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राजस्थान के सेवानिवृत्त एएसपी ने की आत्महत्या, जोधपुर में पुलिस जांच शुरू

जोधपुर / सत्ता संदेश

Rajasthan के जोधपुर शहर के लालसागर इलाके में एक सेवानिवृत्त अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) ने अपने आवास पर कथित तौर पर आत्महत्या कर ली। पुलिस ने शुक्रवार को इस घटना की पुष्टि की और मामले की जांच शुरू कर दी है।

मृतक की पहचान दशरथ सिंह चरण के रूप में हुई है, जो करीब दो साल पहले पुलिस सेवा से सेवानिवृत्त हुए थे। जानकारी के अनुसार, उन्होंने हाल ही में लालसागर क्षेत्र में एक नया मकान बनवाया था और लगभग एक सप्ताह पहले ही अपनी पत्नी के साथ वहां रहने आए थे।

घटना की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। प्रारंभिक जांच में किसी सुसाइड नोट की जानकारी सामने नहीं आई है, हालांकि पुलिस सभी संभावित पहलुओं की जांच कर रही है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आत्महत्या के कारणों का अभी स्पष्ट पता नहीं चल पाया है। पारिवारिक स्थिति, मानसिक तनाव या किसी अन्य व्यक्तिगत कारण सहित सभी एंगल से जांच की जा रही है।

इस घटना के बाद इलाके में शोक और स्तब्धता का माहौल है। स्थानीय लोगों के अनुसार, दशरथ सिंह चरण एक शांत स्वभाव के व्यक्ति थे और हाल ही में नए घर में शिफ्ट होने के बाद सामान्य जीवन जी रहे थे।

पुलिस ने कहा है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और आगे की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल मामले को संवेदनशील मानते हुए जांच जारी है।

विशेषज्ञों का कहना है कि सेवानिवृत्ति के बाद कई वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी मानसिक दबाव, सामाजिक बदलाव और व्यक्तिगत चुनौतियों का सामना करते हैं, जिसके चलते ऐसे मामलों में संवेदनशीलता और समय पर सहायता बेहद जरूरी हो जाती है।

गाजियाबाद सुसाइड केस के बाद सोनू सूद की चेतावनी: ‘बच्चों से मोबाइल फोन वापस ले लो’

मनोरंजन डेस्क: गाजियाबाद में तीन मासूम बच्चियों द्वारा खुदकुशी किए जाने की दुखद घटना के बाद, बॉलीवुड अभिनेता सोनू सूद ने माता-पिता के लिए एक गंभीर चेतावनी जारी की है,। उन्होंने अपील की है कि बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए उनसे *मोबाइल फोन वापस ले लेने चाहिए,।

ऑनलाइन गेमिंग का ‘अदृश्य दबाव

खबरों के अनुसार, गाजियाबाद की ये तीनों बच्चियां ऑनलाइन गेमिंग की बुरी तरह आदी (एडिक्ट) थीं, जिसे उनकी मौत का मुख्य कारण माना जा रहा है,। इस घटना पर दुख जताते हुए सोनू सूद ने कहा, “गाजियाबाद में तीन मासूमों की जान चली गई। यह मौत किसी हिंसा या गरीबी के कारण नहीं, बल्कि ऑनलाइन गेमिंग और **डिजिटल नशे** के अदृश्य दबाव के कारण हुई है”।

सोनू सूद का संदेश: ‘बचपन इंतजार नहीं कर सकता’**सोनू सूद ने सोशल मीडिया पर माता-पिता को सलाह दी कि वे अपने बच्चों को मोबाइल से दूर रखें ताकि वे एक स्वस्थ जीवन जी सकें। उन्होंने एक मर्मस्पर्शी बात साझा करते हुए कहा, **”सोशल मीडिया इंतजार कर सकता है, लेकिन बचपन नहीं”**।

मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर प्रभाव

सूत्रों के अनुसार, आज के दौर में हर कोई मोबाइल का आदी हो चुका है, जिससे लोग **मानसिक रोगों** का शिकार हो रहे हैं। मोबाइल के अत्यधिक उपयोग के कारण बच्चे अपनी पारंपरिक खेलों और शारीरिक गतिविधियों से दूर हो रहे हैं, जिससे उन्हें कई तरह की बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है।

फ्रांस में बड़ा फैसला: 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन

इंटरनेशनल डेस्क: फ्रांस की नेशनल असेंबली ने बच्चों की सुरक्षा पर एक ऐतिहासिक बिल पास किया है। इस नए कानून के तहत, 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए TikTok, Instagram, Facebook और Snapchat जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल पूरी तरह से बैन कर दिया गया है।

बैन के मुख्य कारण: बच्चों में बढ़ती मेंटल हेल्थ प्रॉब्लम, साइबरबुलिंग और युवाओं में हिंसा जैसी चिंताओं को ध्यान में रखते हुए यह सख्त कदम उठाया गया है। आंकड़ों के मुताबिक, फ्रांस में पिछले 10 सालों में 13-15 साल के बच्चों में डिप्रेशन और सुसाइड के मामलों में 60% की बढ़ोतरी हुई है, जिसके लिए सोशल मीडिया को एक बड़ा जिम्मेदार कारण माना जा रहा है।

कंपनियों को देनी होगी उम्र की गारंटी: बिल के मुताबिक, अब सोशल मीडिया कंपनियों के लिए यूजर्स की उम्र वेरिफाई करने के लिए असरदार टेक्नोलॉजिकल तरीके अपनाना अनिवार्य होगा। अगर कोई कंपनी इन नियमों का उल्लंघन करती है, तो उस पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा।

राष्ट्रपति मैक्रों का समर्थन: फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भी बच्चों के स्क्रीन टाइम को लिमिट करने के इस फैसले का समर्थन किया है। यह बिल नेशनल असेंबली में भारी बहुमत (130 वोट पक्ष में और 21 वोट विरोध में) से पास हो गया और अब आगे की मंज़ूरी के लिए सीनेट में जाएगा।