रूस की सेना में जबरन भर्ती किए गए लुधियाना के युवक का अंतिम संस्कार; करियर बनाने गया था मॉस्को, ड्रोन हमले में हुई मौत
लुधियाना: रूस-यूक्रेन युद्ध की आग ने पंजाब के एक और परिवार का चिराग बुझा दिया है। लुधियाना के 21 वर्षीय युवक समरजीत सिंह का शव गुरुवार को रूस से उनके पैतृक शहर पहुँचा, जहाँ गमगीन माहौल में डबा श्मशान घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। समरजीत अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था।
धोखे से भर्ती: समरजीत जुलाई 2024 में एक्स-रे तकनीशियन के रूप में करियर बनाने और रूसी भाषा सीखने के लिए मॉस्को गया था। उसके परिजनों का आरोप है कि उसे वहां जबरन और धोखे से रूसी सेना में भर्ती कर लिया गया। शुरू में उसे बताया गया कि वह सेना के डॉक्टर के साथ सहायक के रूप में काम करेगा, लेकिन बाद में उसे युद्ध के मोर्चे पर भेज दिया गया।
ड्रोन हमले में मौत: समरजीत की मौत 10 सितंबर 2024 को एक ड्रोन हमले के दौरान हुई थी। उसकी पहचान रूसी सेना के एक टोकन के जरिए की गई।अंतिम बातचीत: समरजीत ने आखिरी बार 8 सितंबर को अपने पिता चरनजीत सिंह से वीडियो कॉल पर बात की थी। वह कॉल सिर्फ 7-8 सेकंड की थी जिसमें उसने कहा था, “मैं ठीक हूँ, अपना और मम्मी का ध्यान रखना”।
कर्ज का बोझ: परिवार ने समरजीत को विदेश भेजने के लिए अपना घर गिरवी रखकर 7 लाख रुपये का कर्ज लिया था। उसके पिता लुधियाना में एक छोटी सी दुकान चलाते हैं।समरजीत का पार्थिव शरीर गुरुवार को दिल्ली हवाई अड्डे पर पहुँचा, जहाँ से परिजन उसे लुधियाना लेकर आए। इस घटना ने रूस में फंसे अन्य भारतीय युवकों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

