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पीएम मोदी ने हरियाणा के जींद में 14,700 करोड़ की विकास परियोजनाओं का किया उद्घाटन
  • प्रधानमंत्री ने कहा, जींद में आकर प्रसन्नता हो रही है, स्वच्छ परिवहन, कनेक्टिविटी, स्वास्थ्य सेवा और सांस्कृतिक विरासत सुदृढ़ करने वाली परियोजनाओं के शुभारंभ के अवसर पर कहा, ये सभी परियोजनाएं ‘जीवन की सुगमता’ बढ़ाकर हरियाणा के विकास को गति देंगी
  • श्री मोदी ने कहा आज जींद और हरियाणा ने इतिहास के पन्नों में अपना नाम दर्ज करा लिया है, आज यहीं से देश को अपनी पहली हाइड्रोजन ट्रेन का उपहार मिला है
  • प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की हाइड्रोजन ट्रेन पूर्णतया प्रदूषण मुक्त होने के साथ ही, ‘मेक इन इंडिया’ की एक उल्लेखनीय सफलता का प्रमाण है
  • रेल हो या सड़क मार्ग, संपर्क साधन में ऐसी प्रगति सुविधा बढ़ाने के साथ ही विकास की गति कई गुना बढ़ाती है
  • प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार ने एक नई राष्ट्रीय खेल नीति, ‘खेलो भारत’ नीति तैयार की है; ‘खेलो इंडिया’ अभियान से लेकर ‘टॉप्स’ योजना तक, आज खिलाड़ियों को अभूतपूर्व सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं

हरियाणा / सत्ता संदेश

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को हरियाणा के जींद में लगभग 14,700 करोड़ रुपये की विभिन्न विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखी और इन्हें राष्ट्र को समर्पित किया। उन्होंने आयोजन स्थल पर पहुंचकर अपार प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इस क्षेत्र की समृद्ध ऐतिहासिक, पराक्रम से भरे और आध्यात्मिक विरासत का उल्लेख किया, जिसे शक्ति पीठ माता जयंती का विशेष आशीर्वाद मिला हुआ है। श्री मोदी ने दशकों पहले संगठन के कार्यों से शहर की अपनी प्रारंभिक यात्राओं का स्मरण करते हुए, मुर्रा भैंस के दूध, देसी बूरा और घेवर जैसे स्थानीय व्यंजनों से जुड़े अविस्मरणीय स्नेहिल घटनाओं को याद किया। श्री मोदी ने कहा, यह साधारण भूमि नहीं, बल्कि इतिहास, वीरता, धर्म और अपार गौरव की समृद्ध भूमि है।

प्रधानमंत्री ने इस क्षेत्र के विकास में उल्लेखनीय बदलाव के साथ ही यहां की चिरस्थायी स्थानीय विशेषताओं का तुलनात्मक वर्णन करते हुए, इस शहर को सुशासन मॉडल का एक उत्कृष्ट उदाहरण बताया। उन्होंने इस पर जोर दिया कि पिछले कुछ वर्षों में हरियाणा प्रगति के नए पथ पर दृढ़ता से अग्रसर हुआ है। श्री मोदी ने कहा कि आज के कार्यक्रम सरकार के इस मिशन को नई ऊर्जा प्रदान कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने देश की पहली हाइड्रोजन-चालित ट्रेन के शुभारंभ की घोषणा करते हुए कहा कि इस क्षेत्र का नाम हमेशा के लिए इतिहास के पन्नों में दर्ज हो हो जाएगा। मुंबई और ठाणे के बीच ऐतिहासिक पहली ट्रेन यात्रा से तुलना करते हुए उन्होंने कहा कि भविष्य की पीढ़ियों की उन्नत हरित परिवहन की चर्चा में भी यह कॉरिडोर अमर हो जाएगा। श्री मोदी ने कहा कि भारतीय रेल के अत्याधुनिकीकरण के महत्वपूर्ण कदम के लिए मैं आप सभी को और पूरे देश को बधाई देता हूं।

प्रधानमंत्री ने अवसंरचनात्मक विकास के व्यापक विकास का उल्लेख करते हुए, रेल, राजमार्गों और सांस्कृतिक धरोहरों से संबंधित 14 हजार करोड़ रुपये से अधिक की नई परियोजनाओं की चर्चा की, जो राज्य के कल्याण के लिए प्रत्यक्ष तौर पर समर्पित हैं। स्वास्थ्य सेवा के व्यापक विस्तार का उल्लेख करते हुए उन्होंने भिवानी में पंडित नेकी राम शर्मा मेडिकल कॉलेज और महर्षि च्यवन मेडिकल कॉलेज के साथ ही नारनौल में राव तुलाराम अस्पताल राष्ट्र को समर्पित किया। इन संस्थानों की स्थापना का उद्देश्य चिकित्सा क्षेत्र में पेशेवर जीवन बनाने के इच्छुक लोगों के लिए नए अवसर पैदा करना है। श्री मोदी ने कहा कि ये नए संस्थान हरियाणा की स्वास्थ्य सेवाओं को और भी सशक्त और सुलभ बनाएंगे।

प्रधानमंत्री ने स्थानीय लोगों के समर्पित नागरिक सेवा भाव की सराहना करते हुए, उनके आगमन से पहले स्वच्छता अभियान प्रदर्शित कार्यों की प्रशंसा की। उन्होंने स्वच्छता अभियान में समुदाय की सक्रिय भागीदारी पर अपार संतोष व्यक्त करते हुए इस जमीनी स्तर पर निरंतर जारी रखने का आह्वान किया। श्री मोदी ने कहा कि हमें स्वच्छता को अपने दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बनाना होगा 

प्रधानमंत्री ने वैश्विक रेल क्षेत्र के तकनीकी विकास का उल्लेख करते हुए स्मरण दिलाया कि कैसे 19वीं शताब्दी की रेलगाड़ियां मुख्य रूप से भाप इंजनों द्वारा चालित थीं, जबकि 20वीं शताब्दी ये विद्युत शक्ति से चालित बन गईं। भविष्योन्मुखी दृष्टिकोण दर्शाते हुए उन्होंने जोर देकर कहा कि 21वीं शताब्दी की रेलगाड़ियां हाइड्रोजन परिवहन द्वारा चालित होंगी, और इसी की आधिकारिक शुरुआत जींद और सोनीपत के बीच नवनिर्मित 90 किलोमीटर लंबे मार्ग से हो रही है। श्री मोदी ने कहा कि आज भारतीय रेल ने 21वीं सदी की इस तकनीक में एक बड़ी छलांग लगाई है, जिसे भविष्य में विस्तारित किये जाने की अपार संभावनाएं हैं।

प्रधानमंत्री ने वैश्विक परिप्रेक्ष्य में देश की इस उपलब्धि को रखते हुए कहा कि हाइड्रोजन ट्रेन तकनीक विश्व स्तर पर व्यावहारिक रूप से केवल 7-8 वर्ष पहले ही अस्तित्व में आई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अभी केवल कुछ ही गिने-चुने देशों के पास ऐसी रेलगाड़ियां चलाने की क्षमता है और वे भी अभी प्रारंभिक चरण में ही हैं। श्री मोदी ने कहा कि इस नवनिर्मित भारतीय हाइड्रोजन ट्रेन की वास्तविक क्षमताओं के बारे में सुनकर आपको अत्यंत गर्व होगा।

प्रधानमंत्री ने इस नए परिवहन चमत्कार की तकनीकी विशेषताओं के बारे में बताते हुए कहा कि नई लॉन्च की गई ट्रेन विश्व स्तर पर अपनी तरह की सबसे शक्तिशाली ट्रेन है, जिसकी क्षमता 3,200 हॉर्सपावर है और जिसमें दस कोच लगे हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऐसी रेलगाड़ियों में जिनमें आमतौर पर केवल तीन से चार कोच होते हैं, उनसे तुलना करते हुए, श्री मोदी ने कहा कि देश ने अपने पहले ही प्रयास में यह साहसिक परिचालन क्षमता हासिल की है। श्री मोदी ने कहा कि भारत ने दस डिब्बे वाली हाइड्रोजन ट्रेन सफलतापूर्वक चलाकर अपनी क्षमता प्रदर्शित की है।

इस हरित परिवहन उपलब्धि की स्वदेशी प्रकृति पर गर्व वयक्त करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पूर्णतया धुआं रहित यह ट्रेन घरेलू विनिर्माण पहल की ठोस और उल्लेखनीय सफलता है। इस उन्नत प्रणाली का डिजाइन करने वाले प्रतिभाशाली घरेलू इंजीनियरों और इसके त्रुटिहीन निर्माण के लिए स्थानीय विनिर्माण कंपनियों को उन्होंने इसका श्रेय दिया। श्री मोदी ने कहा कि यह मेक इन इंडिया पहल का एक अत्यंत सफल और गौरवपूर्ण उदाहरण है।

प्रधानमंत्री ने इस उन्नत तकनीक की विशिष्ट परिचालन आवश्यकताओं को समझाते हुए बताया कि हाइड्रोजन ट्रेनों के लिए पूरी तरह अलग बुनियादी ढांचे और विशेष, सहायक प्रणालियों की आवश्यकता होती है। निकट भविष्य में इन विशिष्ट नेटवर्क की आवश्यकताएं पूरी करने के लिए नए कारखाने और संबंधित सुविधाएं तेजी से स्थापित किए जाने की संभावना देखते हुए उन्होंने व्यापक स्थानीय आर्थिक लाभ की भविष्यवाणी की। श्री मोदी ने कहा कि यह उन्नत ट्रेन नेटवर्क हरियाणा के युवाओं के लिए रोजगार के अनेक नए अवसर उत्पन्न करने की गारंटी है।

प्रधानमंत्री ने प्रमुख भू-राजनीतिक चुनौतियों की चर्चा करते हुए, पिछले बारह वर्षों में भारतीय रेल में हुए व्यापक बदलाव से हासिल किए गए प्रचालन लाभों का उल्लेख किया। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष की चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि पेट्रोलियम, डीजल, एलपीजी और उर्वरकों की आपूर्ति के लिए आवश्यक समुद्री मार्ग महीनों से गंभीर रूप से लगातार बाधित हैं। श्री मोदी ने कहा कि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से भारत बड़ी मात्रा में आवश्यक ईंधन और कृषि सामग्री आयात करता है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि 2014 से पहले अगर ऐसा वैश्विक ईंधन संकट आया होता तो इसके विनाशकारी प्रभाव से डीजल पर अत्यधिक निर्भरता के कारण राष्ट्रीय रेल नेटवर्क पूरी तरह ठप्प हो जाता। उन्होंने कहा कि जहां 1925 से 2014 के बीच केवल 30 प्रतिशत रेल मार्गों का विद्युतीकरण हुआ था, वहीं सरकार के प्रयासों से अब राष्ट्रीय रेल ग्रिड का लगभग 99 प्रतिशत और राज्य के सभी ट्रैक का 100 प्रतिशत विद्युतीकरण हो गया है। श्री मोदी ने कहा कि पूर्ण विद्युतीकरण से गंभीर वैश्विक तेल संकट के बाद भी हमारी रेलगाड़ियां निर्बाध रूप से चलती रहीं।

प्रधानमंत्री ने बेहतर संपर्क साधनों के दोहरे सामाजिक-आर्थिक लाभों पर जोर देते हुए कहा कि विस्तृत सड़क और रेल नेटवर्क लोगों की सुविधा बढ़ाते हुए क्षेत्रीय विकास को तेजी से गति देते हैं। दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे के स्थानीय खंड, जींद-गोहाना राष्ट्रीय राजमार्ग और अंबाला-काला अंब चार-लेन परियोजना का आधिकारिक शुभारंभ करते हुए, उन्होंने इन अंतरराज्यीय प्रचालनों से कई लाभों की चर्चा की। श्री मोदी ने कहा कि इस तरह के व्यापक संपर्क मार्गों से अपार सुविधा के साथ ही समग्र विकास की गति में भी काफी वृद्धि होती है।

प्रधानमंत्री ने जींद जिले के संभार-तंत्र संबंधी बदलावों का विस्तार से वर्णन करते हुए बताया कि शहर अब महत्वपूर्ण रूप से पांच अलग-अलग राष्ट्रीय राजमार्गों से जुड़ गया है। इसके अपार आर्थिक लाभों की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि किसान और पशुपालक अब कम किराए में प्रमुख वाणिज्यिक बाजारों तक आसानी से पहुंच पाएंगे। श्री मोदी ने कहा कि ये सुदृढ़ संपर्क साधन उद्योगों को सक्रिय रूप से सशक्त बनाएंगे, पर्यटन को बढ़ावा देंगे और व्यापक तौर पर नए रोजगार उत्पन्न करेंगे।

प्रधानमंत्री ने इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की अपनी हाल की सफल यात्रा की चर्चा करते हुए, भारत द्वारा किए गए कई अंतरराष्ट्रीय द्विपक्षीय समझौतों का उल्लेख किया। उन्होंने एक महत्वपूर्ण, लेकिन कम चर्चित रणनीतिक विषय पर विशेष ध्यान दिलाया, जिससे क्षेत्र की युवा आबादी प्रत्यक्ष और गहराई से जुड़ी है। श्री मोदी ने कहा कि हरियाणा के युवाओं से संबंधित एक विशिष्ट विषय है खेल, जिस पर ज्यादा चर्चा नहीं हुई है।

प्रधानमंत्री ने विदेश की सरकारों के साथ महत्वपूर्ण वार्ताओं का विस्तार से वर्णन करते हुए खेल और प्रतिस्पर्धी क्षेत्र में व्यापक बदलाव के उद्देश्य से आगामी व्यापक अंतरराष्ट्रीय सहयोगों की जानकारी दी। खेल क्षेत्र और विशिष्ट एथलीटों के प्रशिक्षण पद्धतियों पर केंद्रित संयुक्त पहल की संभावना व्यक्त करते हुए उन्होंने इससे स्थानीय खेल कौशल के लाभान्वित होने की आशा व्यक्त की। श्री मोदी ने कहा कि इन देशों के साथ मिलकर हम आने वाले समय में खेल क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल करेंगे।

प्रधानमंत्री ने घरेलू स्तर पर खेल बुनियादी ढांचे में किए गए सुधारों का विस्तृत विवरण देते हुए बताया कि खेलों को सक्रिय और व्यवस्थित रूप से फिटनेस और रोजगार दोनों के प्रमुख और कारगर माध्यम में बदला जा रहा है। नई राष्ट्रीय खेल नीति और खेलो भारत नीति के सफल कार्यान्वयन का उल्लेख करते हुए उन्होंने खेलो इंडिया और ओलंपिक पदक जीतने की टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम जैसी अत्यंत प्रभावी योजनाओं द्वारा खिलाड़ियों को प्रदान की गई वित्तीय और संस्थागत सहायता की सराहना की। श्री मोदी ने कहा कि हरियाणा सरकार भी खेलों और समर्पित खिलाड़ियों को निरंतर और काफी प्रोत्साहन प्रदान कर रही है।

बुनियादी ढांचे से जुड़ी उपलब्धियों से हटकर प्रधानमंत्री ने युवा खिलाड़ियों को सीधे संबोधित करते हुए आगामी विशाल वैश्विक प्रतिस्पर्धी मंचों की ओर रुख किया। उन्होंने 2030 के राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी के लिए भारत की तैयारियों और 2036 ओलंपिक खेलों के लिए महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय बोली की घोषणा और अहमदाबाद में विश्व पुलिस और अग्निशमन खेलों के आयोजन की चर्चा की। श्री मोदी ने स्थानीय खिलाड़ियों से पूरी लगन से प्रशिक्षण प्राप्त करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि वे विश्वास दिलाते हैं कि सरकार खिलाड़ियों की कड़ी तैयारी के लिए हर आवश्यक सुविधा उपलब्ध कराएगी।

प्रधानमंत्री ने स्थानीय शासन प्रणाली की सराहना की। उन्होंने मुख्यमंत्री के नेतृत्व में समावेशी विकास के मंत्र का कड़ाई से पालन करने के लिए राज्य प्रशासन की भी प्रशंसा की। रिश्वतखोरी या भाई-भतीजावाद से मुक्त, पारदर्शी और योग्यता-आधारित रोजगार प्रक्रियाओं के कड़ाई से कार्यान्वयन को ज़रूरी बताते हुए उन्होंने इस तरह के प्रणालीगत सुधार लागू करने में आने वाली अपार राजनीतिक बाधाओं की भी चर्चा की।

किसानों के कल्याण के प्रति सरकार की अटूट संरचनात्मक प्रतिबद्धता दोहराते हुए, प्रधानमंत्री ने स्थानीय बाजार को राज्य के सबसे बड़े बाजारों में से एक बताया और किसानों को सीधे मिलने वाले व्यापक लाभों की चर्चा की। उन्होंने बताया कि राज्य के किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के माध्यम से लगभग 8 हजार करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं, जिसमें स्थानीय किसानों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा शामिल है। श्री मोदी ने कहा कि केवल जींद में ही हमारे मेहनती किसानों को 600 करोड़ रुपये से अधिक की राशि प्रत्यक्ष हस्तांतरित की गई है।

प्रधानमंत्री ने देश की गहरी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक भावना का उल्लेख करते हुए, इस क्षेत्र को इस समृद्ध ऐतिहासिक विरासत का विशाल और जीवंत केंद्र बताया। महाराजा रणजीत सिंह की गौरवशाली विरासत और पांडवों की पवित्र आस्था का उल्लेख करते हुए, उन्होंने उन पूजनीय स्थानीय तीर्थ स्थलों की चर्चा की, जहां आज भी लाखों श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचते हैं। श्री मोदी ने कहा कि यही वह गौरवशाली आस्था और आध्यात्मिकता की विरासत है जिसे आधुनिक भारत आज सक्रिय से संरक्षित कर रहा है।

प्रधानमंत्री ने अतीत के इस गहन श्रद्धा को भविष्य के शैक्षिक और सांस्कृतिक प्रयासों से जोड़ते हुए कहा कि राष्ट्र अपने इतिहास को पूर्ण सम्मान के साथ अगली पीढ़ी तक पहुंचाने को पूर्णतया प्रतिबद्ध है। श्री मोदी ने इस लक्ष्य को साकार करने हेतु कुरुक्षेत्र में एक नए सिख संग्रहालय की आधारशिला रखने की आधिकारिक घोषणा की। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह नया संग्रहालय भारत की महान गुरु परंपरा को आगामी पीढ़ियों तक सफलतापूर्वक और गर्व से पहुंचाएगा।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने अपने संबोधन को विराम देते हुए राज्य को कृषि और उद्योग के दोहरे आर्थिक पहियों पर समान रूप से सवार, तीव्र विकास पथ पर अग्रसर बताया। नव-उद्घाटित परियोजनाओं के प्रति मंगल कामना व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि ये इस विकास गति में और तेज़ी लाएंगी। उन्होंने राष्ट्र की विकास यात्रा में इस क्षेत्र के महत्वपूर्ण योगदान के प्रति पूर्ण विश्वास व्यक्त किया। श्री मोदी ने कहा कि हरियाणा का यह तीव्र विकास निस्संदेह औऱ सशक्त रूप से पूर्ण विकसित भारत की यात्रा को नई ऊर्जा प्रदान करेगा।

भारत की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन तैयार, जिंद-सोनीपत रूट पर जल्द दौड़ेगी

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

हरित और टिकाऊ परिवहन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, भारतीय रेलवे ने उत्तरी रेलवे के जिंद-सोनीपत खंड पर हाइड्रोजन फ्यूल सेल आधारित 10 डिब्बों वाली एक रेलगाड़ी चलाने की मंजूरी दे दी है। यह रेलगाड़ी जल्द ही शुरू होने वाली है और 1200 किलोवाट हाइड्रोजन फ्यूल सेल प्रणोदन प्रणाली द्वारा संचालित होकर अधिकतम 75 किमी प्रति घंटे की गति से चलेगी।


हाइड्रोजन ईंधन सेल तकनीक, हाइड्रोजन का उपयोग करके रासायनिक प्रतिक्रिया के माध्यम से बिजली उत्पन्न करती है, जिसमें केवल जल वाष्प ही उत्सर्जित होता है। इस प्रकार, यह पारंपरिक जीवाश्म ईंधन आधारित रेल प्रणालियों का एक स्वच्छ विकल्प है। हाइड्रोजन आधारित रेल प्रणालियों को सतत परिवहन के लिए एक आशाजनक समाधान के रूप में वैश्विक स्तर पर मान्यता मिल रही है। इस पहल के साथ, भारत जर्मनी, जापान, चीन और संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे चुनिंदा देशों के समूह में शामिल हो गया है जो स्वच्छ रेल परिवहन के लिए हाइड्रोजन के उपयोग की संभावनाओं का पता लगा रहे हैं। चूंकि यह तकनीक अभी प्रारंभिक चरण में है, इसलिए वर्तमान में केवल कुछ ही देश ऐसी प्रणालियों का संचालन या परीक्षण कर रहे हैं।


हरियाणा के जिंद-सोनीपत खंड को इन परिचालनों के लिए पायलट मार्ग के रूप में चुना गया है। इसके लिए जिंद में एक स्वदेशी हाइड्रोजन भंडारण और ईंधन भरने की सुविधा स्थापित की गई है। पेट्रोलियम और विस्फोटक सुरक्षा संगठन (पीईएसओ) ने इस स्थल पर संपीड़ित हाइड्रोजन गैस के भंडारण और वितरण के लिए आवश्यक लाइसेंस प्रदान कर दिया है।


ईंधन भरने के लिए हाइड्रोजन संपीड़न प्रणाली, आवश्यक तकनीकी सहायता और महत्वपूर्ण पुर्जे उपलब्ध कराए गए हैं ताकि विश्वसनीय और त्रुटिरहित संचालन सुनिश्चित हो सके। किसी भी आपातकालीन स्थिति के लिए अलग से एक कंप्रेसर यूनिट की व्यवस्था भी की जा रही है। हाइड्रोजन उत्पादन, भंडारण और वितरण केंद्र में स्थापित हाइड्रोजन रिसाव और आग का पता लगाने वाले विभिन्न सुरक्षा सेंसरों की नियमित रूप से जांच और सफाई की जाएगी ताकि धूल जमा न हो और सुरक्षित संचालन सुनिश्चित हो सके।


आरडीएसओ द्वारा विधिवत अनुमोदित हाइड्रोजन ट्रेन-सेट और हाइड्रोजन संयंत्र के संचालन एवं रख-रखाव नियमावली भी उपलब्ध कराई जा रही हैं। शकुरबस्ती में प्रस्तावित रख-रखाव सुविधा के लिए आवश्यक सुरक्षा प्रावधान, नियमित ऑडिट और मानक संचालन प्रक्रियाओं का पालन सुनिश्चित किया जा रहा है।


इस मंजूरी में व्यापक सुरक्षा और परिचालन प्रोटोकॉल का पालन करना भी अनिवार्य किया गया है, जिनमें हाइड्रोजन ईंधन भरने की प्रणाली की चौबीसों घंटे और सातों दिन निगरानी, ​​महत्वपूर्ण कार्यों के लिए प्रशिक्षित और प्रमाणित कर्मियों की तैनाती तथा नियमित निरीक्षण एवं रखरखाव कार्यक्रम शामिल हैं। परिचालन के प्रारंभिक चरण में, सुचारू संचालन सुनिश्चित करने के लिए प्रशिक्षित तकनीकी कर्मचारी ट्रेन के साथ रहेंगे।
यह परियोजना नवाचार, ऊर्जा दक्षता और पर्यावरण की दृष्टि से टिकाऊ परिवहन के प्रति भारतीय रेलवे की व्यापक प्रतिबद्धता को दर्शाती है और भारत के राष्ट्रीय स्वच्छ ऊर्जा और शून्य कार्बन उत्सर्जन लक्ष्यों के अनुरूप है।