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अंतरराष्ट्रीय शांतिरक्षक दिवस पर भारत ने दोहराई संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों के प्रति अटूट प्रतिबद्धता

संयुक्त राष्ट्र / सत्ता संदेश

भारत ने अंतरराष्ट्रीय शांतिरक्षक दिवस के अवसर पर United Nations शांति अभियानों के प्रति अपनी ‘‘अटूट प्रतिबद्धता’’ दोहराते हुए उन वीर शांतिरक्षकों को श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्होंने विश्व के विभिन्न संघर्षग्रस्त क्षेत्रों में शांति स्थापित करने के प्रयासों के दौरान अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान दिया।

संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित विशेष कार्यक्रम में भारतीय प्रतिनिधियों ने उन सैनिकों, पुलिसकर्मियों और नागरिक कर्मियों के योगदान को याद किया, जिन्होंने संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशनों के तहत सेवा देते हुए वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए अपना जीवन समर्पित किया। कार्यक्रम के दौरान शहीद शांतिरक्षकों की स्मृति में श्रद्धांजलि दी गई और उनके बलिदान को मानवता की सेवा का उत्कृष्ट उदाहरण बताया गया।

भारत ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में उसकी भूमिका केवल एक सहभागी देश की नहीं, बल्कि वैश्विक शांति और सहयोग के प्रति उसकी दीर्घकालिक प्रतिबद्धता का प्रतीक है। भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने इस बात पर जोर दिया कि भारत दशकों से संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशनों में सबसे बड़े और सबसे विश्वसनीय योगदानकर्ताओं में से एक रहा है।

भारत का संयुक्त राष्ट्र शांतिरक्षा अभियानों में योगदान सात दशकों से अधिक पुराना है। इस दौरान हजारों भारतीय सैनिकों और अधिकारियों ने अफ्रीका, एशिया और अन्य क्षेत्रों में विभिन्न मिशनों में भाग लिया है। कई भारतीय शांतिरक्षकों ने कठिन परिस्थितियों में सेवा देते हुए सर्वोच्च बलिदान भी दिया है।

विशेषज्ञों के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशन संघर्ष प्रभावित देशों में युद्धविराम बनाए रखने, नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने, मानवीय सहायता पहुंचाने और राजनीतिक स्थिरता बहाल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। भारत की पेशेवर सैन्य क्षमता और निष्पक्ष दृष्टिकोण के कारण उसके शांतिरक्षकों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशेष सम्मान प्राप्त है।

कार्यक्रम में यह भी रेखांकित किया गया कि आधुनिक शांति अभियानों की चुनौतियां पहले की तुलना में कहीं अधिक जटिल हो गई हैं। आतंकवाद, गृहयुद्ध, मानवीय संकट और राजनीतिक अस्थिरता जैसी परिस्थितियों में शांतिरक्षकों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

भारतीय प्रतिनिधियों ने कहा कि देश भविष्य में भी संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों में सक्रिय योगदान देता रहेगा और वैश्विक शांति, सुरक्षा तथा बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध रहेगा।

अंतरराष्ट्रीय शांतिरक्षक दिवस हर वर्ष उन लाखों पुरुषों और महिलाओं के सम्मान में मनाया जाता है जिन्होंने संयुक्त राष्ट्र के मिशनों के तहत सेवा दी है। यह दिन उन शांतिरक्षकों की स्मृति को भी समर्पित है जिन्होंने कर्तव्य निर्वहन के दौरान अपने प्राण न्योछावर कर दिए।

भारत ने इस अवसर पर एक बार फिर यह संदेश दिया कि विश्व में स्थायी शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग, संवाद और संयुक्त प्रयासों की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है, और इस दिशा में संयुक्त राष्ट्र शांतिरक्षा अभियानों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण बनी हुई है।

क्वाड की वास्तविक चुनौती उसके उद्देश्यों को धरातल पर उतारना: विशेषज्ञ

वाशिंगटन / सत्ता संदेश

Quadrilateral Security Dialogue यानी क्वाड को लेकर अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक विशेषज्ञों ने कहा है कि समूह की वास्तविक परीक्षा अब उसके घोषित उद्देश्यों को प्रभावी ढंग से लागू करने में है। विशेषज्ञों ने यह टिप्पणी भारत की ओर से हाल में आयोजित क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक के संदर्भ में की।

क्वाड में India, United States, Japan और Australia शामिल हैं। यह समूह हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग, समुद्री सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखला, प्रौद्योगिकी, साइबर सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर मिलकर काम करता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में क्वाड ने अपनी उपस्थिति और गतिविधियों को काफी विस्तार दिया है, लेकिन अब सदस्य देशों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वे घोषणाओं और बैठकों से आगे बढ़कर वास्तविक परिणाम प्रस्तुत करें।

हाल ही में आयोजित विदेश मंत्रियों की बैठक में समुद्री सुरक्षा, आपदा प्रबंधन, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य सहयोग और मुक्त एवं समावेशी हिंद-प्रशांत क्षेत्र जैसे विषयों पर चर्चा हुई थी। भारत ने इस बैठक में क्षेत्रीय स्थिरता और नियम आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के महत्व पर जोर दिया।

रणनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि क्वाड की विश्वसनीयता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह क्षेत्रीय चुनौतियों से निपटने में कितनी प्रभावी भूमिका निभा पाता है। विशेष रूप से हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और चीन के बढ़ते प्रभाव के बीच इस समूह की भूमिका पर वैश्विक नजर बनी हुई है।

विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि क्वाड को केवल सुरक्षा मंच के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। जलवायु परिवर्तन, वैक्सीन सहयोग, उभरती प्रौद्योगिकी और आपूर्ति श्रृंखला सुरक्षा जैसे गैर-सैन्य क्षेत्रों में भी इसका प्रभाव महत्वपूर्ण हो सकता है।

कूटनीतिक जानकारों के अनुसार, भारत क्वाड में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और वह समूह को संतुलित, समावेशी और व्यावहारिक दिशा देने की कोशिश कर रहा है। भारत लगातार यह रेखांकित करता रहा है कि क्वाड का उद्देश्य किसी एक देश के खिलाफ गठबंधन बनाना नहीं, बल्कि क्षेत्रीय सहयोग और स्थिरता को बढ़ावा देना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में क्वाड की सफलता इस बात से तय होगी कि सदस्य देश अपने साझा हितों को किस हद तक ठोस परियोजनाओं और दीर्घकालिक रणनीतिक सहयोग में बदल पाते हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने स्लोवेनिया के जनेज जान्शा को प्रधानमंत्री चुने जाने पर दी बधाई

नयी दिल्ली / सत्ता संदेश

Slovenia की संसद द्वारा Janez Janša को प्रधानमंत्री चुने जाने के बाद भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi ने उन्हें बृहस्पतिवार को बधाई दी। प्रधानमंत्री मोदी ने उम्मीद जताई कि उनके नेतृत्व में दोनों देशों के बीच संबंध और मजबूत होंगे।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में कहा कि वह स्लोवेनिया के नए नेतृत्व के साथ मिलकर द्विपक्षीय सहयोग को और आगे बढ़ाने के लिए उत्सुक हैं। उन्होंने आर्थिक सहयोग, व्यापार, निवेश और वैश्विक मुद्दों पर साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में काम करने की बात कही।

जानकारी के अनुसार, जनेज जान्शा को स्लोवेनिया की संसद में हुए मतदान के बाद देश का नया प्रधानमंत्री चुना गया है। वे स्लोवेनियाई राजनीति में तीन दशकों से अधिक समय से सक्रिय और प्रभावशाली नेता माने जाते हैं। उनकी राजनीतिक छवि एक अनुभवी और दक्षिणपंथी रुझान वाले नेता के रूप में देखी जाती है।

स्लोवेनिया यूरोप का एक महत्वपूर्ण देश है और यूरोपीय संघ का सदस्य भी है। भारत और स्लोवेनिया के बीच पिछले कुछ वर्षों में व्यापार, प्रौद्योगिकी और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा है। दोनों देश अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी कई मुद्दों पर सहयोग करते रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि प्रधानमंत्री स्तर पर इस तरह के बधाई संदेश दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों को और मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इससे भविष्य में व्यापारिक और रणनीतिक साझेदारी के नए अवसर भी विकसित हो सकते हैं।

फिलहाल, भारत और स्लोवेनिया दोनों देशों की सरकारें आपसी सहयोग को बढ़ाने और विभिन्न क्षेत्रों में संबंधों को विस्तार देने की दिशा में काम कर रही हैं।

संयुक्त राष्ट्र में भारत का पाकिस्तान पर तीखा प्रहार, कहा- सीमा पार आतंकवाद की कीमत चुकानी होगी

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

India ने संयुक्त राष्ट्र में Pakistan को सीमा पार आतंकवाद के मुद्दे पर कड़ा संदेश देते हुए साफ कहा है कि आतंकवाद को प्रायोजित करने के गंभीर “परिणाम” भुगतने पड़ते हैं। भारत ने दो टूक शब्दों में कहा कि उसे पड़ोसी देश की ओर से प्रायोजित आतंकवादी हमलों से अपनी रक्षा करने का पूरा अधिकार है और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में वह किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरतेगा।

संयुक्त राष्ट्र में भारतीय प्रतिनिधियों ने कहा कि पाकिस्तान लंबे समय से सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देता रहा है, जिससे क्षेत्रीय शांति और स्थिरता प्रभावित हुई है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आतंकवाद के खिलाफ एकजुट और सख्त रुख अपनाने की अपील करते हुए कहा कि किसी भी देश को आतंकवाद को विदेश नीति के औजार के रूप में इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

भारत की ओर से यह भी कहा गया कि आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई आत्मरक्षा का वैध अधिकार है और अंतरराष्ट्रीय कानून भी इसकी अनुमति देता है। भारतीय प्रतिनिधियों ने जोर देकर कहा कि जब निर्दोष नागरिकों और राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा होता है, तब किसी भी संप्रभु राष्ट्र को अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने का अधिकार होता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि संयुक्त राष्ट्र में भारत का यह बयान अंतरराष्ट्रीय मंच पर आतंकवाद के खिलाफ उसकी सख्त नीति को दोहराता है। हाल के वर्षों में भारत लगातार पाकिस्तान पर आतंकवादी संगठनों को समर्थन देने का आरोप लगाता रहा है और वैश्विक मंचों पर इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाता आया है।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार भारत का यह कड़ा रुख ऐसे समय सामने आया है जब वैश्विक स्तर पर आतंकवाद और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। भारत यह संदेश देना चाहता है कि आतंकवाद के खिलाफ उसकी नीति स्पष्ट और निर्णायक है तथा वह अपनी संप्रभुता और नागरिकों की सुरक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाने को तैयार है।

दक्षिण अफ्रीका में भारतीय संस्कृति का सम्मान, गायक अनूप जलोटा को मिली मानद सदस्यता

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

भारत के प्रसिद्ध भजन गायक Anup Jalota को South Africa में भारतीय संस्कृति और परंपराओं के प्रचार-प्रसार में योगदान के लिए विशेष सम्मान प्रदान किया गया है। भारतीय प्रवासियों द्वारा स्थापित उत्तर प्रदेश देवभूमि संगठन (UPDES) ने उन्हें अपनी मानद सदस्यता देकर सम्मानित किया। यह सम्मान समारोह सोमवार को जोहानिसबर्ग में आयोजित किया गया, जहां बड़ी संख्या में भारतीय समुदाय के लोग उपस्थित रहे।

संगठन की ओर से कहा गया कि अनूप जलोटा ने अपने संगीत और भजनों के माध्यम से दुनिया भर में भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिकता और पारंपरिक संगीत को नई पहचान दिलाई है। उनके गीतों और भक्ति संगीत ने न केवल भारत में बल्कि विदेशों में बसे भारतीयों के बीच भी गहरी छाप छोड़ी है। इसी योगदान को देखते हुए उन्हें यह विशेष सम्मान दिया गया।

समारोह के दौरान अनूप जलोटा ने भारतीय प्रवासी समुदाय का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि विदेशों में भारतीय संस्कृति को जीवित रखने में प्रवासी भारतीयों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि संगीत लोगों को जोड़ने का सबसे प्रभावी माध्यम है और भारतीय भक्ति संगीत आज भी विश्वभर में लोगों को आकर्षित कर रहा है।

कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी आयोजित की गईं, जिनमें भारतीय संगीत, नृत्य और पारंपरिक कला की झलक देखने को मिली। भारतीय समुदाय के सदस्यों ने कहा कि अनूप जलोटा जैसे कलाकार भारतीय संस्कृति के सच्चे दूत हैं, जिन्होंने अपनी कला से देश की पहचान को वैश्विक स्तर तक पहुंचाया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के सम्मान न केवल कलाकारों को प्रोत्साहित करते हैं, बल्कि विदेशों में भारतीय सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करने में भी अहम भूमिका निभाते हैं। दक्षिण अफ्रीका में भारतीय मूल के लोगों की बड़ी आबादी है, जो वर्षों से भारतीय परंपराओं और त्योहारों को संजोए हुए है।

अमेरिका-ईरान तनाव पर चीन की बड़ी टिप्पणी, पाकिस्तान की ‘सक्रिय मध्यस्थता’ का किया समर्थन

China ने अमेरिका और Iran के बीच बढ़ते तनाव को कम करने के प्रयासों में Pakistan की भूमिका का समर्थन करते हुए कहा है कि क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए “सक्रिय मध्यस्थता” बेहद जरूरी है। चीन के विदेश मंत्री Wang Yi ने संयुक्त राष्ट्र में यह टिप्पणी करते हुए कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में संवाद और कूटनीति ही संकट का समाधान निकाल सकती है।

वांग यी ने कहा कि पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ रहे तनाव का असर वैश्विक शांति, ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ रहा है। ऐसे में चीन उन सभी देशों के प्रयासों का समर्थन करता है जो अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत बहाल करने तथा टकराव को कम करने की दिशा में काम कर रहे हैं। उन्होंने विशेष रूप से पाकिस्तान की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि इस तरह की सक्रिय कूटनीतिक पहल क्षेत्रीय स्थिरता के लिए सकारात्मक संकेत है।

चीन ने यह भी दोहराया कि किसी भी विवाद का समाधान सैन्य कार्रवाई या दबाव की राजनीति से नहीं, बल्कि बातचीत और आपसी विश्वास के जरिए होना चाहिए। वांग यी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को ऐसे प्रयासों को बढ़ावा देना चाहिए जो तनाव कम करने और शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में आगे बढ़ें।

विशेषज्ञों का मानना है कि चीन का यह बयान पश्चिम एशिया की बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बीच काफी अहम माना जा रहा है। हाल के महीनों में अमेरिका और ईरान के बीच कई मुद्दों को लेकर तनाव बढ़ा है, जिसमें परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय सुरक्षा और प्रतिबंध जैसे विषय शामिल हैं। ऐसे समय में चीन और पाकिस्तान की कूटनीतिक सक्रियता को क्षेत्रीय समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि चीन लगातार खुद को वैश्विक शांति और मध्यस्थता के समर्थक देश के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा है। इससे पहले भी बीजिंग कई अंतरराष्ट्रीय विवादों में बातचीत के जरिए समाधान की वकालत कर चुका है। वहीं पाकिस्तान की भूमिका को लेकर भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो सकती है, क्योंकि इस्लामाबाद लंबे समय से मुस्लिम देशों और पश्चिमी शक्तियों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करता रहा है।

इजराइल-US का ईरान पर भीषण हमला: तेहरान समेत 30 ठिकानों को बनाया निशाना; सुप्रीम लीडर खामेनेई को सुरक्षित स्थान पर भेजा गया

इंटरनेशनल डेस्क: शनिवार (28 फरवरी 2026) की सुबह इजराइल और अमेरिका ने मिलकर ईरान के कई शहरों पर ताबड़तोड़ हमले किए हैं। यह एक संयुक्त सैन्य कार्रवाई है जिसमें ईरान में एक साथ 30 जगहों को निशाना बनाया गया है, जिनमें से अधिकतर हमले राजधानी तेहरान में हुए हैं। हमलों के बाद तेहरान का आसमान धुएं के गुबार से ढक गया है।

सुप्रीम लीडर और राष्ट्रपति थे मुख्य निशाने पर : इन ताजा हमलों में मुख्य रूप से ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई और राष्ट्रपति को निशाना बनाया गया है। यही कारण है कि राष्ट्रपति कार्यालय के पास भी धमाका किया गया। हालांकि, मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, खामेनेई उस समय तेहरान में मौजूद नहीं थे और हमले के तुरंत बाद उन्हें सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट कर दिया गया है।

इजराइल का दावा: हमला न करते तो ईरान कर देता हमला इस हमले के बाद इजराइल का बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने इसे बचाव की कार्रवाई बताया है। इजराइल के अनुसार, यदि वे यह हमला (प्री-एम्प्टिव स्ट्राइक) नहीं करते, तो ईरान उन पर हमला कर देता। अमेरिकी अधिकारियों ने भी पुष्टि की है कि यह हमला अमेरिका और इजराइल की संयुक्त सैन्य कार्रवाई का हिस्सा है, जिसके बारे में पहले ही चेतावनी दी गई थी।

एयरस्पेस बंद और सड़कों पर एंबुलेंस का शोर: हमलों के बाद सुरक्षा कारणों से ईरान ने अपना एयरस्पेस बंद कर दिया है और सभी उड़ानें रद्द कर दी गई हैं। ईरान और इजराइल दोनों जगहों पर एयर अटैक सायरन बज रहे हैं और लोग सुरक्षा के लिए बंकरों में चले गए हैं। ईरान की सड़कों पर घायलों को अस्पताल ले जाने के लिए एंबुलेंस का तांता लगा हुआ है।

अमेरिका का ईरान पर महा-हमले का प्लान तैयार: ट्रंप को सौंपी गई ‘किल लिस्ट’, दर्जनों नेताओं के खात्मे से तख्तापलट की तैयारी

इंटरनेशनल डेस्क : अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है और रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका अगले कुछ घंटों या हफ्तों में ईरान पर एक बड़ा सैन्य हमला कर सकता है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को व्हाइट हाउस और पेंटागन द्वारा तैयार की गई एक विस्तृत ब्रीफिंग दी गई है, जिसमें ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के कई विकल्प शामिल हैं।

नेताओं की ‘किल लिस्ट’ और तख्तापलट का लक्ष्य : इस योजना का सबसे खतरनाक हिस्सा ईरान में शासन परिवर्तन (रेजीम चेंज) करना है। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका ने एक ‘किल लिस्ट’ तैयार की है जिसमें ईरान के दर्जनों राजनीतिक और सैन्य नेताओं को निशाना बनाने की योजना है। इस सूची में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई, राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेश्कियान और विदेश मंत्री अब्बास अराघची जैसे बड़े नाम शामिल हो सकते हैं। इसका मुख्य उद्देश्य वर्तमान खामेनेई शासन को उखाड़ फेंकना है।

परमाणु ठिकाने और मिसाइल सेंटर निशाने पर : अमेरिकी सेना की हिट लिस्ट में ईरान के परमाणु कार्यक्रम और बैलिस्टिक मिसाइल सुविधाएं सबसे ऊपर हैं। इन हमलों के लिए अमेरिका ने मध्य पूर्व में 150 फाइटर जेट और 12 एयरक्राफ्ट कैरियर तैनात किए हैं, जो 2003 के इराक युद्ध के बाद का सबसे बड़ा सैन्य जमावड़ा है। इस अभियान को “मिडनाइट हैमर” जैसे पिछले ऑपरेशनों से भी बड़ा और निरंतर चलने वाला हवाई युद्ध बताया जा रहा है।

ईरान की तैयारी और कूटनीतिक चुनौतियां: संभावित हमले को देखते हुए ईरान ने भी अपने परमाणु केंद्रों को बंकरों में बदलना शुरू कर दिया है और अपने एयर डिफेंस सिस्टम को मजबूत किया है। ईरान ने चेतावनी दी है कि किसी भी हमले का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। हालांकि, अमेरिका के लिए एक चुनौती यह है कि खाड़ी देशों जैसे सऊदी अरब और यूएई ने अपनी धरती का उपयोग अमेरिकी हमले के लिए करने देने से इनकार कर दिया है, जिससे ट्रंप के विकल्प सीमित हो सकते हैं।

14 फरवरी: प्यार के दिन ‘वैलेंटाइन्स डे’ का दर्दनाक इतिहास; जानें क्यों दी गई थी पादरी वैलेंटाइन को फांसी

वेब डेस्क : आज 14 फरवरी 2026 को भारत समेत दुनियाभर में वैलेंटाइन्स डे को प्रेम के उत्सव के रूप में मनाया जा रहा है। जहाँ प्रेमी जोड़े एक-दूसरे को कार्ड और तोहफे देकर प्यार का इजहार कर रहे हैं, वहीं इस दिन की जड़ें एक बेहद दर्दनाक ऐतिहासिक घटना और बलिदान से जुड़ी हुई हैं।

शादी पर पाबंदी और पादरी का विद्रोह: वैलेंटाइन्स डे की शुरुआत तीसरी शताब्दी में रोम से हुई थी। उस समय वहाँ के क्रूर सम्राट क्लॉडियस II ने अपने साम्राज्य में सैनिकों की शादियों पर रोक लगा दी थी। राजा का मानना था कि अविवाहित पुरुष, विवाहित पुरुषों की तुलना में बेहतर सैनिक साबित होते हैं क्योंकि उनका ध्यान परिवार में नहीं भटकता। पादरी सेंट वैलेंटाइन ने राजा के इस अमानवीय आदेश का विरोध किया और प्यार करने वाले जोड़ों की शादियां करवानी शुरू कर दीं।

बलिदान की कहानी: जब सम्राट क्लॉडियस को सेंट वैलेंटाइन के इस विद्रोह का पता चला, तो उसने उन्हें जेल में डाल दिया। अंततः 14 फरवरी 269 ईस्वी को सेंट वैलेंटाइन को फांसी दे दी गई। प्रेम के लिए अपना जीवन बलिदान करने वाले इस संत की याद में ही हर साल 14 फरवरी को यह दिन मनाया जाता है।

कैसे शुरू हुई परंपरा? जानकारों के अनुसार, 5वीं सदी के अंत में पोप गेलैसियस I ने आधिकारिक तौर पर 14 फरवरी को सेंट वैलेंटाइन के सम्मान में पर्व दिवस घोषित किया था। 14वीं शताब्दी में प्रसिद्ध कवि ज्योफ्री चौसर की कविताओं के माध्यम से यह दिन पूरी तरह से प्रेम की भावनाओं से जुड़ गया।

विरोध और विवाद: जहाँ बड़ी संख्या में लोग इस दिन को मना रहे हैं, वहीं कुछ संगठन और धार्मिक संस्थान इसका विरोध भी कर रहे हैं। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने मुसलमानों से इस दिन को न मनाने की अपील की है, वहीं कुछ अन्य संगठनों ने इसे भारतीय संस्कृति के खिलाफ बताते हुए चेतावनी भी जारी की है।

कनाडा के स्कूल में अंधाधुंध फायरिंग: हमलावर समेत 10 की मौत, 24 घायल; पूरे इलाके में दहशत

इंटरनेशनल डेस्क : पश्चिमी कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया स्थित टंबलर रिज सेकेंडरी स्कूल में मंगलवार दोपहर हुई एक भीषण गोलीबारी की घटना में कम से कम 10 लोगों की मौत हो गई है। इस दर्दनाक हादसे में 24 अन्य लोग घायल हुए हैं, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया है।

घटना का विवरण और पुलिस कार्रवाई: रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (RCMP) के अनुसार, उन्हें मंगलवार दोपहर करीब 1:20 बजे स्कूल में एक ‘एक्टिव शूटर’ होने की सूचना मिली थी। पुलिस ने तुरंत स्कूल के भीतर प्रवेश कर खतरे को बेअसर करने की कोशिश की, जहाँ उन्हें कई पीड़ित मृत अवस्था में मिले।

हमलावर की मौत और जांच: पुलिस ने जानकारी दी है कि संदिग्ध हमलावर भी स्कूल के भीतर मृत पाया गया। शुरुआती जांच के अनुसार, हमलावर की मौत आत्म-घातक चोट (Self-inflicted injury) के कारण हुई लगती है। स्कूल के भीतर हमलावर के अलावा छह और लोग मृत मिले, जबकि एक पीड़ित ने अस्पताल ले जाते समय दम तोड़ दिया।

घर में मिले अन्य शव: जांच के दौरान पुलिस को इस घटना से जुड़े एक घर में दो और पीड़ित मृत मिले हैं। गंभीर रूप से घायल दो लोगों को एयर एंबुलेंस के जरिए अस्पताल पहुँचाया गया। घटना के बाद पूरे इलाके में लॉकडाउन लगा दिया गया था और निवासियों को घरों में रहने की सलाह दी गई थी, जिसे शाम करीब 5:45 बजे स्थिति नियंत्रण में होने के बाद हटा लिया गया। पुलिस का मानना है कि अब जनता के लिए कोई खतरा नहीं है, हालांकि मामले की विस्तृत जांच अभी जारी है।