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नाबार्ड ने मनाया गया 45वां स्थापना दिवस, हरियाणा में ग्रामीण विकास के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

नाबार्ड हरियाणा क्षेत्रीय कार्यालय ने 21 जुलाई को हरियाणा सरकार, भारतीय रिज़र्व बैंक, सहकारी संस्थाओं, कृषक उत्पादक संगठनों (एफपीओ), स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) तथा विकास भागीदार संगठनों के वरिष्ठ अधिकारियों की सहभागिता के साथ नाबार्ड का 45वां स्थापना दिवस मनाया।

इस कार्यक्रम में हरियाणा सरकार के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने अपनी उपस्थिति से समारोह की शोभा बढ़ाई। उन्होंने नाबार्ड को राष्ट्र की 44 वर्षों की समर्पित सेवा पूर्ण करने पर बधाई दी और कृषि विकास, वित्तीय समावेशन, संस्था निर्माण तथा सतत आजीविका संवर्धन के माध्यम से ग्रामीण भारत के कायाकल्प में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका की सराहना की। उन्होंने नाबार्ड को हरियाणा के एक विश्वसनीय विकास भागीदार बताया और ग्रामीण अवसंरचना, कृषक संस्थाओं, सहकारी समितियों तथा समुदाय-आधारित विकास पहलों को सुदृढ़ करने की दिशा में इसके निरंतर सहयोग की सराहना की।

मुख्य सचिव ने इस बात पर बल दिया कि ग्रामीण हरियाणा के कायाकल्प के लिए सरकारी एजेंसियों, वित्तीय संस्थाओं तथा जमीनी स्तर के संगठनों को शामिल करते हुए एक सहयोगात्मक दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है। उन्होंने विकसित भारत @ 2047 की परिकल्पना के अनुरूप सतत कृषि को बढ़ावा देने, आजीविका के अवसर बढ़ाने, ग्रामीण युवाओं तथा महिलाओं को सशक्त बनाने और लचीले ग्रामीण समुदायों के निर्माण के महत्व को रेखांकित किया।

वर्ष 2026 को अंतर्राष्ट्रीय महिला किसान वर्ष घोषित किए जाने का उल्लेख करते हुए, उन्होंने संस्थागत वित्त, प्रौद्योगिकी, कौशल विकास, बाजारों तथा नेतृत्व के अवसरों तक अधिक पहुंच सुनिश्चित कर कृषि में महिलाओं के योगदान को पहचानने और सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि नाबार्ड राज्य में महिला-नेतृत्व विकास को आगे बढ़ाने तथा समावेशी एवं सतत ग्रामीण विकास को बढ़ावा देने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाना जारी रखेगा।

इस अवसर पर बोलते हुए, श्रीमती निवेदिता तिवारी, मुख्य महाप्रबंधक, नाबार्ड हरियाणा क्षेत्रीय कार्यालय ने हरियाणा में ग्रामीण विकास क्षेत्र के साथ नाबार्ड की गहन सहभागिता को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि ग्रामीण अवसंरचना विकास निधि (आरआईडीएफ) के अंतर्गत, नाबार्ड ने हरियाणा के लिए लगभग ₹15,056 करोड़ स्वीकृत किए हैं और 6,175 अवसंरचना परियोजनाओं को सहयोग प्रदान किया है, जिससे ग्रामीण संपर्क, सिंचाई, पेयजल सुविधाओं तथा समग्र आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान मिला है।

उन्होंने आगे बताया कि नाबार्ड ने 710 प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स) के कंप्यूटरीकरण और डिजिटलीकरण तथा राज्यभर में 131 कृषक उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के संवर्धन के माध्यम से ग्रामीण संस्थाओं को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इन एफपीओ ने 63,369 से अधिक किसानों को संगठित किया है, जिनमें 14,017 महिला सदस्य शामिल हैं, जिससे किसानों को बाजारों, प्रौद्योगिकी तथा मूल्य श्रृंखलाओं तक पहुंच बेहतर बनाने में सहायता मिली है।

मुख्य महाप्रबंधक ने कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों में नाबार्ड के प्रयासों को रेखांकित किया, जिनसे 2022-23 से अब तक 5,010 से अधिक महिलाओं को लाभ पहुंचा है। उन्होंने बताया कि इन कार्यक्रमों ने डेयरी पालन, खाद्य प्रसंस्करण, मशरूम की खेती, हस्तशिल्प, सिलाई तथा अन्य ग्रामीण उद्यमों में सतत आजीविका के अवसर सृजित किए हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि 28 एफपीओ को कुल ₹11.12 करोड़ की ऋण सहायता के साथ ऋण से जोड़ा गया है, जबकि नौ एफपीओ को ₹60.38 लाख की इक्विटी अनुदान सहायता प्रदान की गई है। नाबार्ड ने वाटरशेड विकास, भूजल प्रबंधन, सूक्ष्म सिंचाई, धान की सीधी बुवाई (डीएसआर), सब्जी क्लस्टर संवर्धन तथा किसानों की आय एवं सततता बढ़ाने के उद्देश्य से अन्य नवीन हस्तक्षेपों के माध्यम से जलवायु-अनुकूल कृषि को भी बढ़ावा दिया है।

मुख्य महाप्रबंधक ने हरियाणा में नवाचार को बढ़ावा देने, ग्रामीण संस्थाओं को सुदृढ़ करने, महिला-नेतृत्व विकास को प्रोत्साहित करने तथा सतत एवं समावेशी विकास का समर्थन करने के प्रति नाबार्ड की प्रतिबद्धता को दोहराया।

समारोह के दौरान, राज्य में नाबार्ड द्वारा समर्थित विभिन्न हस्तक्षेपों की प्रमुख विकासात्मक पहलों, उपलब्धियों तथा प्रभाव को दर्शाने वाली एक कॉफी टेबल बुक का विमोचन किया गया। कृषि तथा संबद्ध गतिविधियों के ऋण नियोजन, परियोजना मूल्यांकन तथा वित्तपोषण में बैंकों एवं अन्य हितधारकों हेतु संदर्भ के रूप में कार्य करने के लिए एक यूनिट कॉस्ट बुक भी जारी की गई।

ग्रामीण विकास तथा संस्था निर्माण में उनके उत्कृष्ट योगदान के सम्मान में, कार्यक्रम के दौरान चयनित प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स), जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों (डीसीसीबी), कृषक उत्पादक संगठनों (एफपीओ), शिल्पकारों तथा महिला किसानों उद्यमियों को सम्मानित किया गया।

इस कार्यक्रम में शिल्पकारों, एफपीओ तथा ओएफपीओ द्वारा एक प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया, जिसमें कृषि उपज, प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद, हस्तशिल्प तथा अन्य मूल्य वर्धित उत्पादों को प्रदर्शित किया गया, जो ग्रामीण उत्पादक समूहों की बढ़ती उद्यमशीलता क्षमताओं को दर्शाता है। कार्यक्रम में अंतर्राष्ट्रीय महिला किसान वर्ष 2026 के महत्व को भी रेखांकित किया गया, जिसमें कृषि तथा संबद्ध क्षेत्रों में महिलाओं के नेतृत्व, उद्यमिता तथा भागीदारी को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया।

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आंध्र प्रदेश में विकसित भारत जी-राम जी योजना का किया शुभारंभ

आंध्र प्रदेश / सत्ता संदेश

आंध्र प्रदेश के तिरुपति ज़िले के मुक्कावरिपल्ली गाँव से “विकसित भारत जी राम जी योजना” का आज राष्ट्रीय शुभारंभ हुआ, जहाँ केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू, उप मुख्यमंत्री पवन कल्याण, केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासानी और श्री कमलेश पासवान तथा सांसद विधायक और हजारों की संख्या में जनसमुदाय उपस्थित रहे। इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर के गरीब मजदूरों, किसानों और गाँवों के लिए रोज़गार की गारंटी, ग्राम विकास के लिए बड़े वित्तीय आवंटन और पारदर्शी व्यवस्था के साथ एक नया मॉडल पेश किया गया।

भगवान वेंकटेश्वर के चरणों में नमन से शुरू वीबी- जी राम जी

केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने अपना संबोधन “नमः वेंकटेश्वराय” और “गोविंदा, गोविंदा” के जयकारों के साथ शुरू करते हुए कहा कि इस पावन धरती से विकसित भारत जी राम जी योजना लागू होना गरीबों और मजदूरों के लिए भगवान की कृपा की वर्षा जैसा है। उन्होंने प्रार्थना की कि देश में कोई भी गरीब मजदूर बिना काम के न रहे, हर हाथ को काम और हर पेट को रोटी मिले। इसी संकल्प को ज़मीन पर उतारने के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को हृदय से धन्यवाद दिया।

मनरेगा से आगे वीबी- जी राम जी– 100 से 125 दिन रोजगार की छलांग

श्री शिवराज सिंह चौहान ने याद दिलाया कि यूपीए सरकार के समय शुरू हुई मनरेगा में सिर्फ 100 दिन रोज़गार की गारंटी दी जाती थी। उन्होंने कहा कि आज प्रधानमंत्री श्री मोदी की नई रणनीति के तहत विकसित भारत- जी राम जी योजना में मजदूरों के लिए पूरे 125 दिन तक काम की पक्की गारंटी दी जा रही है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ दिनों की बढ़ोतरी नहीं, बल्कि सोच में बदलाव है, अब लक्ष्य यह है कि कोई हाथ खाली न रहे। उन्होंने गर्व के साथ बताया कि नई योजना के लागू होते ही पहले दिन ही देशभर में लाखों मजदूरों को काम मिला है और मनरेगा को बेहतर स्वरूप में बदलकर वीबी- जी राम जी के रूप में लागू किया जा रहा है।

पहले ही साल में 1.51 लाख करोड़ रु. का प्रावधान, 5 साल में 7.5 लाख करोड़ रु. का लक्ष्य

केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने योजना के वित्तीय पक्ष पर विस्तार से बात करते हुए कहा कि विकसित भारत- जी राम जी योजना के पहले ही वर्ष में केंद्र सरकार की हिस्सेदारी 95,000 करोड़ रु. से अधिक रहेगी और राज्यों की 40% हिस्सेदारी जोड़कर यह वार्षिक व्यय 1.51 लाख करोड़ रु. के आसपास पहुँचता है। श्री शिवराज सिंह ने बताया कि अगले 5 साल में इस योजना के तहत कुल 7.5 लाख करोड़ रु. खर्च करने का लक्ष्य रखा गया है। यह धन देश की 2.86 लाख पंचायतों तक पहुँचकर हर पंचायत को प्रति वर्ष औसतन 2 करोड़ रु. से ज़्यादा की राशि देगा जिससे गाँवों में रोजगार भी बढ़ेगा और स्थायी परिसंपत्तियाँ भी बनेंगी।

रोज़गार की कानूनी गारंटी– 15 दिन में काम, वरना बेरोज़गारी भत्ता

केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि विकसित भारत- जी राम जी योजना में मजदूरों के अधिकारों को कानूनी ताकत दी गई है। किसी भी मजदूर द्वारा काम माँगने पर 15 दिन के भीतर उसे रोज़गार देना अनिवार्य होगा और यदि निर्धारित समय में काम नहीं दिया गया तो संबंधित मजदूर को बेरोज़गारी भत्ता देना पड़ेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि अब मजदूर के पसीने से कोई खिलवाड़ नहीं कर सकता। मजदूरी देने में देरी होने की पुरानी समस्या को खत्म करने के लिए योजना में यह प्रावधान किया गया है कि देर से मज़दूरी देने पर मजदूर को ब्याज समेत विलंबित मजदूरी दी जाएगी। यह सब इसलिए कि मजदूरों के पसीने की पूरी कीमत मिले और गरीबों की सेवा को ही भगवान की पूजा मानने वाला “मोदी मंत्र” ज़मीन पर दिखाई दे।

सिस्टम मज़बूत करने के लिए 9% प्रशासनिक व्यय, मैदानी कर्मचारियों को पूरा वेतन

केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह ने बताया कि योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रशासनिक व्यय को 6% से बढ़ाकर 9% कर दिया गया है। इसके तहत लगभग 13,000 करोड़ रु. से ज़्यादा की राशि ग्राम रोजगार सहायकों, मैट्स और अन्य जमीनी कर्मचारियों के वेतन और सुविधा के लिए रखी गई है। उन्होंने कहा कि जो कर्मचारी गाँवों में मजदूरों और विकास के कामों को संभालेंगे, उन्हें समय पर पूरा वेतन मिलना ज़रूरी है ताकि वे भटकने से बचें और सिस्टम मज़बूत रहे। इस तरह यह योजना मजदूरों के साथ साथ प्रशासनिक ढाँचे को भी सुदृढ़ करने का काम करेगी।

गाँव का फैसला गाँव में– ग्राम सभा तय करेगी काम

श्री शिवराज सिंह चौहान ने साफ शब्दों में कहा कि किस गाँव में कौन सा काम होगा, यह दिल्ली या अमरावती से तय नहीं किया जाएगा। काम तय करने का अधिकार ग्राम पंचायत और ग्राम सभा के पास रहेगा। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि गाँव की जनता खुद तय करेगी कि उन्हें आंगनवाड़ी बनानी है, स्कूल, अस्पताल या सड़क चाहिए, खेत सड़क बनानी है, एफपीओ के लिए संरचना करनी है, तालाब, जैक डैम, बाँध या प्राकृतिक आपदा से बचाने के लिए कोई सुरक्षा दीवार बनानी है– यह सब निर्णय गाँव में बैठकर ग्राम सभा करेगी। गाँव का फैसला गाँव में होगा, यही जी राम जी योजना की आत्मा है।

पिछड़ी पंचायतों को अतिरिक्त मदद, आंध्र प्रदेश के लिए 7,707 करोड़ रु. की विशेष राशि

केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने राज्यों से कहा कि वे अपनी पंचायतों का ग्रेडेशन कर A, B, C श्रेणियों में बाँट सकते हैं और जो पंचायत विकास में पीछे हैं, उन्हें अधिक राशि देकर तेज़ी से काम करवा सकते हैं। इससे इंटीरियर और पिछड़े इलाकों के गाँवों में विकास की रफ्तार बढ़ेगी। आंध्र प्रदेश के संदर्भ में उन्होंने बताया कि केवल 9 महीने की अवधि के लिए विकसित भारत- जी राम जी योजना के तहत केंद्र से 7,707 करोड़ रु. की विशेष राशि दी जा रही है। राज्य सरकार के हिस्से के साथ यह पैकेज आंध्र प्रदेश को देश में शीर्ष राज्यों में लाएगा और गाँवों में रोज़गार एवं विकास के लिए बड़ी ताकत देगा। उन्होंने विश्वास जताया कि मुख्यमंत्री श्री चंद्रबाबू नायडू और उप मुख्यमंत्री श्री पवन कल्याण के नेतृत्व में आंध्र प्रदेश ग्राम विकास का एक मॉडल बनकर उभरेगा।

प्रधानमंत्री आवास और ग्रामीण सड़कों पर बड़ी सौगात– स्वीकृति पत्र मंच से सौंपे

केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आंध्र प्रदेश के गरीब परिवारों और गाँवों के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण तथा प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना IV के तहत बड़ी सौगातों की घोषणा की। उन्होंने बताया कि आंध्र प्रदेश को प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत 74,212 नए पक्के मकान स्वीकृत किए गए हैं ताकि कोई भी पात्र गरीब परिवार कच्चे मकान में न रहे और सभी को सम्मानजनक आवास मिल सके। इसी के साथ उन्होंने उन गाँवों की चिंता भी दूर की जो अभी तक पक्की सड़कों से नहीं जुड़े हैं। केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने कहा कि ऐसे इलाकों के लिए 146 नई सड़कें और 19 पुलों के निर्माण के लिए कुल 422 करोड़ रु. से अधिक की राशि स्वीकृत की गई है। श्री शिवराज सिंह चौहान ने मंच से ही इन स्वीकृतियों के पत्र मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री को सौंपते हुए आश्वासन दिया कि गाँव बढ़ेगा तो भारत बदलेगा और केंद्र सरकार आंध्र प्रदेश के संपूर्ण ग्रामीण विकास में कोई कमी नहीं छोड़ेगी।

तोता परी आम के किसानों के लिए राहत– मार्केट इंटरवेंशन से उचित दाम की गारंटी

केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने आंध्र प्रदेश के तोता परी आम उत्पादक किसानों की समस्याओं का उल्लेख करते हुए कहा कि तोता परी आम के दाम गिरने से किसानों को भारी नुकसान हो रहा है, इसलिए केंद्र सरकार ने मार्केट इंटरवेंशन स्कीम के तहत बड़ी मात्रा में तोता परी आम खरीदने का फैसला किया है ताकि किसानों को उचित कीमत मिल सके और उनका मेहनताना सुरक्षित रहे। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि आईसीआर की वैज्ञानिक टीम राज्य सरकार की टीम के साथ मिलकर ड्राफ्टिंग और वैरायटी बदलने की तकनीक पर काम करेगी ताकि आम बागानों की उत्पादकता बढ़े और बाजार में बेहतर वैरायटी उपलब्ध हो सके।

पर्यावरण संरक्षण का संकल्प

श्री शिवराज सिंह चौहान ने लोगों से पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेने की अपील करते हुए कहा कि वे खुद रोज़ पेड़ लगाते हैं और जनता से आग्रह किया कि कम से कम अपने जन्मदिन पर एक पेड़ ज़रूर लगाएँ। उन्होंने मंच से लोगों विकसित गाँव, विकसित आंध्र प्रदेश और विकसित भारत के लिए सामूहिक संकल्प दिलाया।

विकसित भारत- जी राम जी योजना गाँवों और ग्रामीण जीवन स्तर में परिवर्तनकारी

मुख्यमंत्री श्री चंद्रबाबू नायडू ने अपने संबोधन में विकसित भारत- जी राम जी योजना को गाँवों और ग्रामीण जीवन स्तर में परिवर्तन लाने वाला कार्यक्रम बताया। उन्होंने कहा कि पहले मनरेगा ने रॉयलसीमा से शुरुआत कर देश को एक मॉडल दिया था, अब उसी आधार पर लेकिन अधिक सशक्त स्वरूप में VB G RAM G योजना शुरू होकर स्वर्ण आंध्र प्रदेश और विकसित भारत की दिशा में बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि 125 दिन की रोज़गार गारंटी के साथ खेत सड़क, तालाब, ड्रेनेज आदि सुविधाएँ और भूमिहीन मजदूरों की सामाजिक सुरक्षा जैसे कामों से ग्रामीण जीवन स्तर में सीधा सुधार होगा।

डिजिटल मॉनिटरिंग से फर्जीवाड़े पर लगाम, ग्राम सभाओं से विकास की योजना

श्री चंद्रबाबू नायडू ने बताया कि इस नई योजना में डिजिटल मास्टर रोल, आधार आधारित भुगतान, रियल टाइम मॉनिटरिंग और जियो टैगिंग जैसी तकनीकों से कामों की निगरानी होगी। इससे काम न करके भी कागज़ पर हिसाब जैसी पुरानी प्रवृत्तियों पर रोक लगेगी और पैसा सही जगह खर्च होगा। उन्होंने राज्य में हाल के वर्षों में श्री पवन कल्याण के नेतृत्व में हुई ग्राम सभाओं, CC रोडों, गोशालाओं, पानी के टैंकों, पम्प पोंड्स और आदिवासी क्षेत्रों में बने सड़कों का ज़िक्र करते हुए कहा कि इन्हीं अनुभवों के आधार पर अब वीबी- जी राम जी योजना को सबसे बेहतर तरीके से लागू करके आंध्र प्रदेश को देश का मॉडल राज्य बनाया जाएगा।

हॉर्टिकल्चर हब के लिए बड़ा निवेश

मुख्यमंत्री ने रायलसीमा क्षेत्र को हॉर्टिकल्चर हब बनाने के अपने विज़न को भी साझा किया। उन्होंने कहा कि Purvodaya कार्यक्रम के तहत लगभग 40,000 करोड़ रु. के सार्वजनिक/सरकारी निवेश और लगभग 60,000 करोड़ रु. के निजी निवेश का लक्ष्य रखा गया है ताकि सिंचाई परियोजनाओं, सड़क कनेक्टिविटी, वेयरहाउस और इंफ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से रायलसीमा को फलों और बागवानी के लिए देश का बड़ा केंद्र बनाया जा सके। उन्होंने इस विज़न को स्वर्ण आंध्र प्रदेश की दिशा में एक निर्णायक कदम बताते हुए कहा कि ग्रामीण रोजगार, हॉर्टिकल्चर, इंडस्ट्री निवेश और इंफ्रास्ट्रक्चर– सब मिलकर आंध्र प्रदेश को अग्रणी राज्य बनाने में योगदान देंगे।

अमरावती, पोलावरम और इंडस्ट्री निवेश से स्वर्ण आंध्र प्रदेश

श्री चंद्रबाबू नायडू ने अमरावती को “देवताओं की राजधानी” बताते हुए कहा कि केंद्र सरकार की मदद से राजधानी परियोजना, पोलावरम, विशाखापत्तनम स्टील प्लांट, डेटा सेंटर और फाइटर जेट प्रोजेक्ट जैसे कामों के ज़रिये आंध्र प्रदेश की ब्रांड इमेज को फिर से ऊँचा किया गया है। उन्होंने कहा कि राइट लीडर, राइट प्लेस, राइट टाइम– यही नरेंद्र मोदी हैं और 2047 तक भारत को नंबर वन देश बनाने के विज़न के साथ स्वर्ण आंध्र प्रदेश की दिशा में भी तेज़ी से काम हो रहा है।

कार्यक्रम में मौजूद केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ चंद्रशेखर पेम्मासानी ने कहा कि वीबी जी राम जी में काम के दिन 100 से बढ़ाकर 125 दिन तो किये ही गए हैं, साथ ही काम न मिलने की स्थिति में बेरोजगारी भत्ते का भी प्रावधान है। इससे हर कामगार को काम मिलना सुनिश्चित होगा। वहीं केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री कमलेश पासवान ने कहा कि वीबी जी राम जी योजना विकसित भारत की नींव बनेगी। इस योजना में 300 से ज्यादा तरह के काम होंगे जो ग्रामीण भारत को सशक्त- समृद्ध बनाने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। कार्यक्रम में ग्रामीण विकास विभाग के सचिव रोहित कंसल, संयुक्त सचिव रोहिणी आर. भाजीभाकरे भी मौजूद रहीं।

केंद्र के सहयोग से आंध्र प्रदेश को मिली मजबूती

उपमुख्यमंत्री श्री पवन कल्याण ने कहा कि शिवराज जी, आपका 49 वर्षों का सार्वजनिक जीवन जनसेवा, किसानों और ग्रामीण भारत के प्रति समर्पण का प्रतीक है। आपने 6 बार सांसद और 4 बार मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में देश की सेवा कर एक प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया है। इमरजेंसी के दौरान लोकतंत्र की रक्षा के लिए आपका संघर्ष और जेल यात्रा हम सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। आपके मार्गदर्शन और प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में आंध्र प्रदेश को ग्रामीण विकास के लिए 12,845 करोड़ रु. की स्वीकृति मिली है। आपके सहयोग से राज्य में पंचायत राज व्यवस्था को मजबूती मिली है तथा जनजातीय क्षेत्रों में प्लांटेशन सहित कई महत्वपूर्ण विकास कार्य आगे बढ़े हैं और आंध्र प्रदेश आरजीएसए की राष्ट्रीय रैंकिंग में 24वें स्थान से प्रथम स्थान तक पहुँचा है। उन्होंने कहा कि VB- G RAM G के राष्ट्रीय शुभारंभ के लिए आंध्र प्रदेश को चुनकर आपने हमारे राज्य के प्रत्येक नागरिक का सम्मान बढ़ाया है।

कार्यक्रम की शुरुआत में मुख्यमंत्री श्री नायडू और केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने फार्म पॉन्ड गतिविधि स्थल पर पहुँचकर पूजा और ग्राउंड ब्रेकिंग की, पौधरोपण किया, “मैजिक ड्रेन” डेमोंस्ट्रेशन देखा और आंध्र प्रदेश की उपलब्धियों व पहलों की प्रदर्शनी का अवलोकन किया।

जल जीवन मिशन की पानी टंकी में भारी रिसाव, ग्रामीणों ने निर्माण गुणवत्ता और भ्रष्टाचार पर उठाए सवाल

जबलपुर/ सत्ता संदेश

मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले के कुलोन गांव में Jal Jeevan Mission के तहत निर्मित पानी की टंकी में बड़े पैमाने पर रिसाव सामने आने के बाद ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं और घटिया सामग्री के इस्तेमाल के कारण टंकी शुरू होने से पहले ही क्षतिग्रस्त होने लगी है।

ग्रामीणों के अनुसार, गांव में हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने के उद्देश्य से बनाई गई पानी की टंकी से लगातार पानी रिस रहा है। कई स्थानों पर दरारें और सीपेज दिखाई देने के कारण लोगों को निर्माण की गुणवत्ता पर संदेह है। उनका कहना है कि जिस परियोजना से गांव की पेयजल समस्या का समाधान होना था, वही अब सवालों के घेरे में आ गई है।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि निर्माण कार्य के दौरान गुणवत्ता मानकों का पालन नहीं किया गया और परियोजना में भ्रष्टाचार की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य सही तरीके से हुआ होता तो नई टंकी में इतनी जल्दी रिसाव की समस्या सामने नहीं आती।

गांव के निवासियों ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी अधिकारियों तथा ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि सरकारी धन से बनने वाली योजनाओं में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित की जानी चाहिए ताकि ग्रामीणों को वास्तविक लाभ मिल सके।

जल जीवन मिशन केंद्र सरकार की प्रमुख योजनाओं में शामिल है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के प्रत्येक घर तक सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना है। इस मिशन के तहत देशभर में जलापूर्ति ढांचे का निर्माण और विस्तार किया जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण जलापूर्ति परियोजनाओं में निर्माण गुणवत्ता बेहद महत्वपूर्ण होती है। यदि जल भंडारण संरचनाओं में तकनीकी खामियां रह जाती हैं, तो न केवल सरकारी धन की बर्बादी होती है बल्कि ग्रामीणों को भी अपेक्षित सुविधाएं नहीं मिल पातीं।

स्थानीय प्रशासन ने मामले की जानकारी मिलने के बाद स्थिति का निरीक्षण करने और तकनीकी जांच कराने के संकेत दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि यदि निर्माण में किसी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित एजेंसियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल कुलोन गांव के ग्रामीण जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि पानी की टंकी की खामियों को जल्द दूर कर उन्हें नियमित एवं सुरक्षित पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी।

पंजाब के गांवों में अब नहीं दिखेंगे बिजली के खंभे: CM भगवंत मान ने सतोज़ से शुरू किया ऐतिहासिक ‘अंडरग्राउंड केबल’ प्रोजेक्ट

पंजाब डेस्क: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अपने पैतृक गांव सतोज़ में बिजली की लाइनों को अंडरग्राउंड (जमीन के नीचे) करने के लिए एक क्रांतिकारी पायलट प्रोजेक्ट की नींव रखी है। इस पहल के साथ पंजाब देश का पहला ऐसा राज्य बनने की राह पर है जहाँ के गांव ‘खंबा मुक्त’ होंगे। मुख्यमंत्री ने इस दिन को पंजाब के इतिहास में “सुनहरे अक्षरों” वाला बताया है।

प्रोजेक्ट की खास बातें और तकनीक:

लागत: इस पायलट प्रोजेक्ट पर लगभग 8 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

बिना खुदाई के काम: सड़कों को नुकसान पहुँचाए बिना पाइप बिछाने के लिए खाई रहित ड्रिलिंग मशीनों (Trenchless drilling machines) का इस्तेमाल किया जाएगा।

बड़ा नेटवर्क: प्रोजेक्ट के तहत 7 किमी हाई-टेंशन लाइन, 9.5 किमी लो-टेंशन लाइन और 41 किमी सर्विस केबलों को जमीन के 3 फीट नीचे दबाया जाएगा, जिससे गांव के 384 अनावश्यक बिजली के खंभे खत्म हो जाएंगे।

जनता को मिलने वाले बड़े फायदे: मुख्यमंत्री के अनुसार, यह प्रोजेक्ट केवल सुंदरता बढ़ाने के लिए नहीं है, बल्कि इसके कई व्यावहारिक लाभ भी हैं:

हादसों से बचाव: लटकती तारों के कारण होने वाले जानलेवा हादसों में कमी आएगी।

फसलों की सुरक्षा: खेतों के ऊपर से गुजरने वाली तारों से अक्सर फसलों में आग लग जाती थी, जिस पर अब लगाम लगेगी।

निर्बाध बिजली: बारिश या तेज हवाओं के दौरान बिजली गुल होने की समस्या खत्म होगी और वोल्टेज में होने वाला नुकसान (Transmission loss) भी कम होगा।

मुख्यमंत्री मान ने कहा कि ‘सतोज़ मॉडल’ पूरे देश के लिए एक उदाहरण बनेगा और यह राज्य को ‘रोशन पंजाब’ बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।