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जल जीवन मिशन की पानी टंकी में भारी रिसाव, ग्रामीणों ने निर्माण गुणवत्ता और भ्रष्टाचार पर उठाए सवाल

जबलपुर/ सत्ता संदेश

मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले के कुलोन गांव में Jal Jeevan Mission के तहत निर्मित पानी की टंकी में बड़े पैमाने पर रिसाव सामने आने के बाद ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं और घटिया सामग्री के इस्तेमाल के कारण टंकी शुरू होने से पहले ही क्षतिग्रस्त होने लगी है।

ग्रामीणों के अनुसार, गांव में हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने के उद्देश्य से बनाई गई पानी की टंकी से लगातार पानी रिस रहा है। कई स्थानों पर दरारें और सीपेज दिखाई देने के कारण लोगों को निर्माण की गुणवत्ता पर संदेह है। उनका कहना है कि जिस परियोजना से गांव की पेयजल समस्या का समाधान होना था, वही अब सवालों के घेरे में आ गई है।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि निर्माण कार्य के दौरान गुणवत्ता मानकों का पालन नहीं किया गया और परियोजना में भ्रष्टाचार की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य सही तरीके से हुआ होता तो नई टंकी में इतनी जल्दी रिसाव की समस्या सामने नहीं आती।

गांव के निवासियों ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी अधिकारियों तथा ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि सरकारी धन से बनने वाली योजनाओं में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित की जानी चाहिए ताकि ग्रामीणों को वास्तविक लाभ मिल सके।

जल जीवन मिशन केंद्र सरकार की प्रमुख योजनाओं में शामिल है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के प्रत्येक घर तक सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना है। इस मिशन के तहत देशभर में जलापूर्ति ढांचे का निर्माण और विस्तार किया जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण जलापूर्ति परियोजनाओं में निर्माण गुणवत्ता बेहद महत्वपूर्ण होती है। यदि जल भंडारण संरचनाओं में तकनीकी खामियां रह जाती हैं, तो न केवल सरकारी धन की बर्बादी होती है बल्कि ग्रामीणों को भी अपेक्षित सुविधाएं नहीं मिल पातीं।

स्थानीय प्रशासन ने मामले की जानकारी मिलने के बाद स्थिति का निरीक्षण करने और तकनीकी जांच कराने के संकेत दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि यदि निर्माण में किसी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित एजेंसियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल कुलोन गांव के ग्रामीण जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि पानी की टंकी की खामियों को जल्द दूर कर उन्हें नियमित एवं सुरक्षित पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी।

पंजाब के गांवों में अब नहीं दिखेंगे बिजली के खंभे: CM भगवंत मान ने सतोज़ से शुरू किया ऐतिहासिक ‘अंडरग्राउंड केबल’ प्रोजेक्ट

पंजाब डेस्क: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अपने पैतृक गांव सतोज़ में बिजली की लाइनों को अंडरग्राउंड (जमीन के नीचे) करने के लिए एक क्रांतिकारी पायलट प्रोजेक्ट की नींव रखी है। इस पहल के साथ पंजाब देश का पहला ऐसा राज्य बनने की राह पर है जहाँ के गांव ‘खंबा मुक्त’ होंगे। मुख्यमंत्री ने इस दिन को पंजाब के इतिहास में “सुनहरे अक्षरों” वाला बताया है।

प्रोजेक्ट की खास बातें और तकनीक:

लागत: इस पायलट प्रोजेक्ट पर लगभग 8 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

बिना खुदाई के काम: सड़कों को नुकसान पहुँचाए बिना पाइप बिछाने के लिए खाई रहित ड्रिलिंग मशीनों (Trenchless drilling machines) का इस्तेमाल किया जाएगा।

बड़ा नेटवर्क: प्रोजेक्ट के तहत 7 किमी हाई-टेंशन लाइन, 9.5 किमी लो-टेंशन लाइन और 41 किमी सर्विस केबलों को जमीन के 3 फीट नीचे दबाया जाएगा, जिससे गांव के 384 अनावश्यक बिजली के खंभे खत्म हो जाएंगे।

जनता को मिलने वाले बड़े फायदे: मुख्यमंत्री के अनुसार, यह प्रोजेक्ट केवल सुंदरता बढ़ाने के लिए नहीं है, बल्कि इसके कई व्यावहारिक लाभ भी हैं:

हादसों से बचाव: लटकती तारों के कारण होने वाले जानलेवा हादसों में कमी आएगी।

फसलों की सुरक्षा: खेतों के ऊपर से गुजरने वाली तारों से अक्सर फसलों में आग लग जाती थी, जिस पर अब लगाम लगेगी।

निर्बाध बिजली: बारिश या तेज हवाओं के दौरान बिजली गुल होने की समस्या खत्म होगी और वोल्टेज में होने वाला नुकसान (Transmission loss) भी कम होगा।

मुख्यमंत्री मान ने कहा कि ‘सतोज़ मॉडल’ पूरे देश के लिए एक उदाहरण बनेगा और यह राज्य को ‘रोशन पंजाब’ बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।