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Ludhiana : हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी की होगी सख्त मॉनिटरिंग, DC हिमांशु जैन ने SMOs को दिए निर्देश

Ludhiana : DC हिमांशु जैन ने मिशन जीवनी के तहत हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी मामलों की मॉनिटरिंग, फॉलो-अप और काउंसलिंग मजबूत करने के निर्देश दिए।

लुधियाना / सत्ता संदेश

लुधियाना जिले में हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी (HRP) के मामलों की पहचान, ट्रैकिंग और फॉलो-अप को और प्रभावी बनाने के लिए प्रशासन ने निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने के निर्देश दिए हैं। डिप्टी कमिश्नर हिमांशु जैन, IAS की अध्यक्षता में सर्किट हाउस में मिशन जीवनी के स्पेशल इंटेंसिव कैंपेन के तहत दूसरी रिव्यू मीटिंग आयोजित की गई।

मीटिंग के दौरान 25 अगस्त 2026 को जारी निर्देशों के पालन की समीक्षा की गई। डिप्टी कमिश्नर ने हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी वाली महिलाओं की समय पर पहचान, नियमित फॉलो-अप, ट्रैकिंग और काउंसलिंग सुनिश्चित करने के लिए स्वास्थ्य अधिकारियों को कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए।

हाई-रिस्क प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए बनेगा मंथली ड्यूटी रोस्टर

डिप्टी कमिश्नर हिमांशु जैन ने जिले के सभी सीनियर मेडिकल ऑफिसर्स (SMOs) को हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी मामलों की निगरानी के लिए मंथली ड्यूटी रोस्टर तैयार करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही ब्लॉक स्टैटिस्टिकल असिस्टेंट (BSA) की मदद से रोटेशनल टेलीफोन फॉलो-अप सुनिश्चित करने को कहा गया।

पिछले सप्ताह किए गए फॉलो-अप की संख्या को हर मंगलवार एक्शन टेकन रिपोर्ट के माध्यम से रिकॉर्ड किया जाएगा, ताकि HRP मामलों की निगरानी में किसी तरह की कमी न रहे।

लो-रिस्क से हाई-रिस्क होने पर तुरंत अपडेट होगा रिकॉर्ड

DC ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि यदि किसी गर्भवती महिला की पहली ANC जांच के दौरान स्थिति लो-रिस्क पाई जाती है, लेकिन बाद में वह हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी की श्रेणी में आती है, तो उसके स्टेटस में हुए बदलाव को तुरंत फ्लैग किया जाए और HRP डेटा में शामिल किया जाए।

उन्होंने कहा कि ऐसी जानकारी ASHA वर्कर से ANM, फिर LHV और BSA तक समय पर पहुंचनी चाहिए, ताकि महिला को जरूरत के अनुसार आगे की स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें।

HRP मामलों में काउंसलिंग पर भी जोर

हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी के मामलों में काउंसलिंग को प्रभावी बनाने के लिए ANM को प्रत्येक मामले की रिपोर्ट संबंधित SMO को देने के निर्देश दिए गए। SMOs अपने-अपने क्षेत्रों में हर सप्ताह ASHA वर्कर्स और ANMs को संवेदनशील बनाएंगे तथा इसकी एक्शन रिपोर्ट भी जमा करेंगे।

प्रत्येक ब्लॉक से बेहतर प्रदर्शन करने वाली ASHA वर्कर का नाम भी भेजने के निर्देश दिए गए हैं।

अस्पतालों और नर्सिंग होम का निरीक्षण होगा

डिप्टी कमिश्नर ने कहा कि प्रत्येक HRP मरीज को इलाज करने वाले डॉक्टर की ओर से यह स्पष्ट रूप से बताया जाना चाहिए कि आगे के बेहतर प्रबंधन और इलाज के लिए उसे किस स्वास्थ्य संस्थान में जाना है।

इसके अलावा SMOs को अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले अस्पतालों और नर्सिंग होम का निरीक्षण करने के निर्देश भी दिए गए। इस दौरान कुम कलां और साहनेवाल ब्लॉक पर विशेष ध्यान देने को कहा गया।

बैठक में स्पेशल ड्यूटी (अर्बन अफेयर्स) ऑफिसर डॉ. प्रगति वर्मा, IAS, सिविल सर्जन डॉ. रमनदीप कौर, डिस्ट्रिक्ट फैमिली प्लानिंग ऑफिसर डॉ. अमनप्रीत कौर, नोडल ऑफिसर जीवनदीप सिंह, CGO अंबर बंद्योपाध्याय सहित जिले के सभी SMOs मौजूद रहे।

सभी संबंधित अधिकारियों को दिए गए निर्देशों के अनुपालन की रिपोर्ट 8 सितंबर 2026 तक जमा करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन का उद्देश्य हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी के मामलों की समय पर पहचान कर गर्भवती महिलाओं को उचित निगरानी, काउंसलिंग और आवश्यक उपचार उपलब्ध कराना है।

लुधियाना की सड़कों पर बिना नंबर प्लेट ऑटो? प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

लुधियाना में बिना स्पष्ट नंबर प्लेट वाले ऑटो, कचरा वाहन और टिपरों को लेकर सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं। जानिए प्रशासन और ट्रैफिक पुलिस से पूछे जाने कुछ सवाल।

लुधियाना / सत्ता संदेश

रिपोर्ट : बसंत सिंह रोरियां

लुधियाना शहर की सड़कों पर चल रहे कुछ ऑटो-रिक्शा, कचरा उठाने वाले वाहनों और टिपरों की पहचान को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप हैं कि कुछ वाहन बिना नंबर प्लेट या ऐसी नंबर प्लेट के साथ सड़कों पर चल रहे हैं जो साफ दिखाई नहीं देतीं। अगर ऐसा है, तो यह केवल ट्रैफिक नियमों का मामला नहीं बल्कि यात्रियों और आम राहगीरों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर सवाल है।

खास चिंता उन यात्रियों की सुरक्षा को लेकर है जो अकेले ऑटो में सफर करते हैं। महिलाओं, बुजुर्गों और अन्य कमजोर यात्रियों के लिए वाहन की स्पष्ट पहचान और उसका रिकॉर्ड होना बेहद महत्वपूर्ण है। सवाल यह है कि अगर किसी ऐसे वाहन से कोई हादसा या आपराधिक घटना हो जाए, तो पुलिस उस वाहन की पहचान कितनी आसानी से कर पाएगी?

हादसा या अपराध होने पर कैसे होगी वाहन की पहचान?

मान लीजिए किसी ऑटो, टिपर या कचरा उठाने वाले वाहन से सड़क पर दुर्घटना हो जाती है और वाहन मौके से निकल जाता है। अगर उसकी नंबर प्लेट ही मौजूद नहीं है या स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देती, तो जांच एजेंसियों के सामने वाहन की पहचान करना बड़ी चुनौती बन सकता है।

इसी तरह अगर किसी यात्री के साथ ऑटो के अंदर या उससे संबंधित कोई घटना होती है—जैसे लूटपाट, धमकी या मारपीट—तो वाहन की पहचान जांच का अहम हिस्सा बन जाती है।

ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या बिना स्पष्ट और वैध नंबर प्लेट वाले वाहनों को सार्वजनिक सड़कों पर चलने की अनुमति मिलनी चाहिए?

मामला सिर्फ नंबर प्लेट का नहीं, सुरक्षा का है

शहर में कचरा उठाने वाले ट्रक और टिपर भी बड़ी संख्या में सड़कों पर चलते हैं। इन भारी वाहनों की स्पष्ट पहचान और जरूरी दस्तावेजों का होना सड़क सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है।

अगर किसी वाहन की नंबर प्लेट साफ दिखाई नहीं देती, तो दुर्घटना की स्थिति में प्रत्यक्षदर्शियों या सीसीटीवी फुटेज के आधार पर उसकी पहचान करना मुश्किल हो सकता है।

इसलिए सवाल यह नहीं है कि बिना नंबर प्लेट या संदिग्ध नंबर प्लेट वाले कितने वाहन सड़क पर चल रहे हैं। असली सवाल यह है कि ऐसे वाहनों को सड़क पर उतरने से पहले ही रोकने के लिए प्रशासन का निगरानी तंत्र कितना प्रभावी है?

प्रशासन की जिम्मेदारी हादसे से पहले शुरू होती है

सड़क सुरक्षा का उद्देश्य केवल दुर्घटना होने के बाद कार्रवाई करना नहीं, बल्कि दुर्घटना और अपराध की संभावना को पहले ही कम करना भी है।

इसके लिए प्रशासन और ट्रैफिक पुलिस को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सार्वजनिक सड़कों पर चलने वाले वाहनों की नंबर प्लेट स्पष्ट और वैध हो। साथ ही वाहन का रजिस्ट्रेशन, परमिट, फिटनेस और अन्य जरूरी दस्तावेज भी नियमों के अनुसार हों।

अगर कोई वाहन इन बुनियादी नियमों का पालन नहीं करता, तो उसके खिलाफ समय रहते कार्रवाई की जानी चाहिए।

प्रशासन पर उठे सवाल

लुधियाना की सड़कों पर ऑटो-रिक्शा और अन्य व्यावसायिक वाहनों की निगरानी को लेकर प्रशासन और ट्रैफिक पुलिस से इन सवालों के जवाब जरूरी हैं:

1. शहर में इस समय कुल कितने ऑटो-रिक्शा रजिस्टर्ड हैं और इनमें से कितने नियमों के मुताबिक वैध नंबर प्लेट के साथ चल रहे हैं?

2. पिछले एक साल में बिना नंबर प्लेट या संदिग्ध/नकली नंबर प्लेट वाले कितने ऑटो पकड़े गए?

3. ऐसे वाहनों के खिलाफ कितने चालान किए गए और कितने वाहन जब्त किए गए?

4. क्या ट्रैफिक पुलिस ऐसे ऑटो की पहचान के लिए विशेष अभियान या नियमित चेकिंग चला रही है?

5. क्या चेकिंग के दौरान हर ऑटो का नंबर प्लेट, रजिस्ट्रेशन, परमिट और फिटनेस प्रमाणपत्र जांचा जाता है?

6. अगर कोई ऑटो कथित तौर पर नकली नंबर प्लेट के साथ पकड़ा जाता है, तो क्या सिर्फ ट्रैफिक चालान किया जाता है या मामले की गंभीरता के अनुसार अन्य कानूनी कार्रवाई भी की जाती है?

7. पिछले एक साल में ऑटो के जरिए यात्रियों के साथ लूटपाट, धमकी या मारपीट की कितनी शिकायतें पुलिस के पास पहुंची हैं?

8. ऐसे मामलों में कितने वाहनों की पहचान नंबर प्लेट, रजिस्ट्रेशन या अन्य रिकॉर्ड के जरिए हुई?

9. क्या प्रशासन के पास ऑटो ड्राइवरों, वाहन रजिस्ट्रेशन और परमिट की निगरानी के लिए कोई केंद्रीय या डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम मौजूद है?

10. अगर प्रशासन के संज्ञान में बिना रजिस्ट्रेशन या संदिग्ध नंबर प्लेट वाले वाहन हैं, तो अब तक कितनी ठोस कार्रवाई की गई है और आगे की कार्रवाई के लिए क्या समय-सीमा तय की गई है?

कार्रवाई का इंतजार या पहले से रोकथाम?

लुधियाना जैसे बड़े शहर में रोजाना हजारों लोग ऑटो, दोपहिया और अन्य सार्वजनिक वाहनों से सफर करते हैं। ऐसे में हर वाहन की स्पष्ट पहचान केवल नियमों का पालन भर नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा और कानून-व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

प्रशासन के सामने अब सीधा सवाल है—क्या किसी दुर्घटना या अपराध के बाद वाहन की पहचान करने की कोशिश की जाएगी, या उससे पहले ही यह सुनिश्चित किया जाएगा कि शहर की सड़कों पर चलने वाला हर वाहन स्पष्ट पहचान और वैध दस्तावेजों के साथ चले?

अगर नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन वास्तव में सड़कों पर चल रहे हैं, तो उनकी पहचान कर कार्रवाई करना प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए। वहीं, यदि ऐसी शिकायतें तथ्यात्मक रूप से सही नहीं हैं, तो प्रशासन को आंकड़ों और आधिकारिक रिकॉर्ड के जरिए स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

लुधियाना में ट्रेडर्स की शिकायतों पर समीक्षा बैठक, अनिल ठाकुर ने अधिकारियों को दिए तुरंत समाधान के निर्देश

लुधियाना / सत्ता संदेश

पंजाब स्टेट ट्रेडर्स कमीशन के वाइस चेयरमैन अनिल ठाकुर ने मंगलवार को लुधियाना के बचत भवन में विभिन्न विभागों के जिला अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। बैठक में PSTC पोर्टल पर ट्रेडर्स और इंडस्ट्रियलिस्ट्स की ओर से दर्ज लंबित शिकायतों की विभागवार समीक्षा की गई और अधिकारियों को इनके जल्द समाधान के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए।

अनिल ठाकुर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ट्रेडर्स की पेंडिंग शिकायतों का तुरंत और तय समय सीमा के भीतर समाधान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी शिकायत को बिना उचित कारण के लंबित नहीं रखा जाना चाहिए। यदि किसी शिकायत के समाधान में तकनीकी या प्रशासनिक बाधा आ रही है, तो उसे भी प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जाए।

ट्रेडर्स को पारदर्शी और समयबद्ध सेवाएं देने के लिए सरकार प्रतिबद्ध: अनिल ठाकुर

अनिल ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार ट्रेडर्स को पारदर्शी, जवाबदेह और समयबद्ध सरकारी सेवाएं उपलब्ध करवाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि PSTC पोर्टल व्यापारियों की समस्याओं के समाधान के लिए प्रभावी प्लेटफॉर्म के तौर पर काम कर रहा है।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पोर्टल पर दर्ज शिकायतों की नियमित निगरानी की जाए और उनका प्राथमिकता के आधार पर निपटारा किया जाए।

पंजाब में मिलीं करीब 7,000 शिकायतें, 6,000 का समाधान

मीडिया से बातचीत के दौरान अनिल ठाकुर ने दावा किया कि पिछले एक साल के दौरान पंजाब स्टेट ट्रेडर्स कमीशन की ओर से व्यापारियों के साथ सीधे संवाद के लिए विभिन्न स्थानों पर बैठकें की गईं। इन बैठकों के माध्यम से करीब 7,000 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें से लगभग 6,000 शिकायतों का समाधान किया जा चुका है।

उन्होंने कहा कि बाकी लंबित शिकायतों के समाधान के लिए जिला स्तर पर समीक्षा बैठकें की जा रही हैं। कमीशन की ओर से बाजारों में जाकर व्यापारियों से सीधे बातचीत कर उनकी समस्याओं को समझा जा रहा है।

अनिल ठाकुर ने कहा कि पिछले कई दशकों से व्यापारियों की समस्याओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया, लेकिन पंजाब सरकार ने पंजाब स्टेट ट्रेडर्स कमीशन का गठन कर इस दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है।

उन्होंने कहा कि व्यापारियों की समस्याओं का तेज और प्रभावी समाधान सरकार के प्रति उनका भरोसा मजबूत करेगा तथा पंजाब में व्यापार और निवेश के लिए बेहतर माहौल बनाने में मदद करेगा।

व्यापारी अर्थव्यवस्था की रीढ़: शिखा भगत

लुधियाना की एडिशनल डिप्टी कमिश्नर (जनरल) शिखा भगत ने कहा कि व्यापारी किसी भी राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ होते हैं। उन्होंने कहा कि व्यापारियों की समस्याओं का समय पर समाधान करना जिला प्रशासन की प्राथमिकता है।

उन्होंने बताया कि PSTC पोर्टल पर दर्ज शिकायतों की प्रगति की नियमित रूप से समीक्षा की जा रही है, ताकि लंबित मामलों का जल्द निपटारा सुनिश्चित किया जा सके।

ये अधिकारी रहे मौजूद

बैठक में पंजाब स्टेट ट्रेडर्स कमीशन के जिला चेयरमैन परमपाल सिंह बावा, वाइस चेयरमैन रोहित वर्मा, असिस्टेंट कमिश्नर पायल गोयल, DCST लुधियाना रणधीर कौर, एसडीएम लुधियाना ईस्ट जसलीन कौर भुल्लर, एसडीएम लुधियाना वेस्ट कुलदीप बावा, मुख्यमंत्री फील्ड ऑफिसर लुधियाना तुशिता गुलाटी, नगर निगम लुधियाना के जोनल कमिश्नर नीरज जैन और जसदेव सिंह सेखों सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

Ludhiana News: ताजपुर एन्क्लेव में घर के अंदर चल रही थी नमकीन फैक्ट्री, गंदगी और बाल श्रम के आरोप

लुधियाना के ताजपुर एन्क्लेव में घर के अंदर नमकीन बनाने का काम होता मिला। गंदगी, स्वच्छता नियमों की अनदेखी, बच्चों से पैकिंग और बिजली व्यवस्था को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं।

लुधियाना / सत्ता संदेश

Report : गुरमीत सिंह

लुधियाना शहर के ताजपुर एन्क्लेव से हैरान करने वाली तस्वीरें सामने आई हैं। यहां एक घर के अंदर नमकीन बनाने का काम होता हुआ दिखाई दिया, जहां खाद्य पदार्थ तैयार करने के दौरान साफ-सफाई और स्वच्छता के मानकों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

सामने आई तस्वीरों में नमकीन तैयार करने वाली जगह पर गंदगी नजर आ रही है। खाद्य पदार्थ तैयार करने के स्थान पर साफ-सफाई की उचित व्यवस्था नहीं दिखाई दी। वहीं, काम करने वाले लोगों द्वारा खाद्य पदार्थ तैयार करते समय जरूरी स्वच्छता संबंधी सावधानियां नहीं बरतने की बात सामने आई है।

बिना दस्ताने और सिर ढके तैयार हो रही थी नमकीन

बताया जा रहा है कि नमकीन तैयार करने के काम में लगे लोगों ने कथित तौर पर हाथों में दस्ताने नहीं पहने थे और सिर भी नहीं ढका हुआ था। खाद्य पदार्थों को तैयार करने के दौरान स्वच्छता के नियमों का पालन नहीं होने से तैयार उत्पाद की गुणवत्ता और उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ गई है।

छोटे बच्चों से पैकिंग करवाने के आरोप

मामले में एक और गंभीर आरोप सामने आया है। आरोप है कि नमकीन की पैकिंग के लिए छोटे बच्चों से काम करवाया जा रहा था। यदि जांच में यह आरोप सही पाया जाता है तो बाल श्रम से जुड़े कानूनों के तहत कार्रवाई का मामला बन सकता है।

हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

बिजली व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल

नमकीन फैक्ट्री में बिजली व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि बिजली से चलने वाली भट्टियों को कथित तौर पर सीधी कुंडी डालकर चलाया जा रहा था। यदि यह आरोप सही पाया जाता है तो बिजली चोरी के साथ-साथ सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी गंभीर मामला सामने आ सकता है।

इस तरह की व्यवस्था से शॉर्ट सर्किट या आग लगने जैसी दुर्घटना का खतरा भी पैदा हो सकता है।

रिहायशी इलाके में फैक्ट्री संचालन पर सवाल

सबसे बड़ा सवाल यह है कि रिहायशी इलाके में घर के अंदर इस तरह खाद्य पदार्थ तैयार करने का काम कैसे चल रहा था और संबंधित विभागों की नजर इस पर क्यों नहीं पड़ी?

मामले में खाद्य सुरक्षा, स्वच्छता, बाल श्रम, बिजली व्यवस्था और रिहायशी क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधि से जुड़े कई पहलुओं की जांच की जरूरत है।

अब देखना होगा कि प्रशासन और संबंधित विभाग इस मामले में क्या कार्रवाई करते हैं। यदि जांच के दौरान नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

व्यापारियों की शिकायतों का समयबद्ध निपटारा सुनिश्चित करें: डीसी हिमांशु जैन

लुधियाना / सत्ता संदेश

डिप्टी कमिश्नर हिमांशु जैन ने शनिवार को सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि वे पंजाब सरकार के शिकायत पोर्टल के माध्यम से व्यापारियों द्वारा दर्ज की गई शिकायतों का समय पर समाधान सुनिश्चित करें।

एक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए, जैन ने व्यापारिक समुदाय के सामने आने वाली समस्याओं के त्वरित समाधान की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि पंजाब सरकार व्यापार-अनुकूल माहौल प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने चेतावनी दी कि वास्तविक शिकायतों के समाधान में किसी भी अनुचित देरी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

डिप्टी कमिश्नर ने विभागों के बीच प्रभावी समन्वय के महत्व पर जोर दिया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि जमीनी स्तर पर समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर हो। उन्होंने कहा कि बेहतर संचार और अंतर-विभागीय सहयोग से समस्याओं का समाधान अधिक तेजी और कुशलता से हो सकेगा।

बैठक के दौरान, जैन ने PSPCL, पुलिस, NHAI, नगर निगम, लुधियाना इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट, GLADA, जल आपूर्ति और सीवरेज बोर्ड, और अन्य विभागों को निर्देश दिया कि वे लंबित शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई करें और उनका शीघ्र निपटारा सुनिश्चित करें।

पारदर्शी और समयबद्ध शिकायत निवारण के प्रति जिला प्रशासन की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए, जैन ने कहा कि व्यापारियों और सरकारी विभागों के बीच समन्वय को मजबूत करने के प्रयास किए जा रहे हैं, साथ ही जमीनी स्तर पर सार्वजनिक सेवाओं की प्रभावी डिलीवरी भी सुनिश्चित की जा रही है। उन्होंने कहा कि जवाबदेही सुनिश्चित करने और सेवा मानकों में सुधार के लिए शिकायतों की नियमित निगरानी की जाएगी।

इस अवसर पर उपस्थित प्रमुख लोगों में GLADA की मुख्य प्रशासक ओजस्वी अलंकार, ADC पूनम सिंह, अमित बांबी, डॉ. नरिंदर सिंह धालीवाल, SDM जसलीन कौर भुल्लर, उपिंदरजीत कौर बराड़, प्रीत इंदर बैंस, खुशप्रीत सिंह, एस्टेट ऑफिसर अमन गुप्ता, संयुक्त आयुक्त विनीत कुमार, तपन भनोट, और विभिन्न विभागों के प्रमुख शामिल थे।