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Railway Modernization: 7 हाई-डेंसिटी कॉरिडोर होंगे फोर-ट्रैक, ₹10,783 करोड़ की 3 परियोजनाओं को मंजूरी

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

केंद्र सरकार ने भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण और रेल नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट बैठक के बाद रेलवे से जुड़ी कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं की जानकारी दी। सरकार के अनुसार, रेलवे के व्यापक आधुनिकीकरण की प्रक्रिया पिछले करीब 12 वर्षों से लगातार आगे बढ़ रही है।

इस योजना के तहत देश के सात हाई-डेंसिटी रेलवे कॉरिडोर को फोर-ट्रैक यानी क्वाड्रुपल करने की दिशा में काम किया जा रहा है। इसका उद्देश्य इन व्यस्त रेल मार्गों की क्षमता बढ़ाना और भविष्य में बढ़ने वाले यात्री एवं माल यातायात के दबाव को संभालना है।

सात हाई-डेंसिटी कॉरिडोर की बढ़ेगी क्षमता

अश्विनी वैष्णव ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय रेलवे के व्यापक ओवरहाल और आधुनिकीकरण पर लगातार काम किया जा रहा है। इसके तहत सात हाई-डेंसिटी कॉरिडोर की ट्रैक क्षमता बढ़ाई जा रही है।

इनमें दिल्ली-मुंबई, मुंबई-चेन्नई, चेन्नई-कोलकाता और कोलकाता-दिल्ली के चार मार्ग गोल्डन क्वाड्रिलेटरल का हिस्सा हैं। इसके अलावा दिल्ली-चेन्नई और मुंबई-कोलकाता इसके दो प्रमुख डायगोनल हैं। दिल्ली-गुवाहाटी कॉरिडोर को भी इस योजना में शामिल किया गया है।

सरकार इन सातों कॉरिडोर को चरणबद्ध तरीके से चार-ट्रैक करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। फिलहाल करीब 4,000 किलोमीटर रेल लाइन के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने की प्रक्रिया चल रही है।

10,783 करोड़ रुपये की तीन मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी

कैबिनेट समिति ने रेलवे मंत्रालय की तीन मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को भी मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं की कुल अनुमानित लागत 10,783 करोड़ रुपये है।

इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद भारतीय रेलवे के नेटवर्क में करीब 656 किलोमीटर की अतिरिक्त रेल लाइन जुड़ेगी। इससे प्रमुख रेल मार्गों पर ट्रेनों की आवाजाही की क्षमता बढ़ने और परिचालन में सुधार की उम्मीद है।

इन रेलवे रूटों पर होगा काम

मंजूर की गई परियोजनाओं में खड़गपुर-झारसुगुड़ा सेक्शन में चौथी लाइन और कटनी-पेंड्रा रोड सेक्शन में चौथी लाइन का निर्माण शामिल है। इसके साथ ही बिलासपुर (उसलापुर)-पेंड्रा रोड सेक्शन में तीसरी लाइन बनाई जाएगी।

अतिरिक्त रेल लाइन बनने से इन मार्गों पर ट्रेनों के संचालन को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। साथ ही भीड़भाड़ कम होगी और रेलवे की परिचालन दक्षता तथा सेवा की विश्वसनीयता में सुधार होने की उम्मीद है।

पांच राज्यों के 14 जिलों को मिलेगा फायदा

सरकार के मुताबिक, ये तीनों परियोजनाएं पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के 14 जिलों से होकर गुजरेंगी।

परियोजनाओं के माध्यम से रेलवे नेटवर्क में करीब 656 किलोमीटर की वृद्धि होगी। इससे लगभग 4,790 गांवों की कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है। इन गांवों में करीब 56 लाख लोगों की आबादी रहती है।

पीएम गति शक्ति के तहत होगा विकास

इन परियोजनाओं की योजना पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत तैयार की गई है। इसका उद्देश्य मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी और देश की लॉजिस्टिक्स क्षमता को मजबूत करना है।

सरकार का कहना है कि एकीकृत योजना और विभिन्न संबंधित पक्षों के साथ समन्वय के जरिए इन परियोजनाओं को आगे बढ़ाया जाएगा। इससे लोगों, सामान और सेवाओं की आवाजाही के लिए बेहतर परिवहन नेटवर्क तैयार करने में मदद मिलेगी।

धार्मिक और पर्यटन स्थलों की कनेक्टिविटी भी होगी बेहतर

रेल नेटवर्क के विस्तार से कई महत्वपूर्ण धार्मिक और पर्यटन स्थलों तक कनेक्टिविटी मजबूत होने की उम्मीद है। इनमें तारातारिणी मंदिर, श्री क्षेत्र जगन्नाथ मंदिर, बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व, विराटेश्वर मंदिर, अमरकंटक मंदिर, ज्वालेश्वर धाम, अचानकमार टाइगर रिजर्व, खुटाघाट बांध, मल्हार पुरातात्विक स्थल और रतनपुर महामाया मंदिर समेत कई प्रमुख स्थान शामिल हैं।

इससे धार्मिक पर्यटन और पर्यटन गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।

कोयला, सीमेंट और स्टील की ढुलाई को मिलेगा फायदा

सरकार के अनुसार, ये रेल मार्ग कोयला, सीमेंट, लौह अयस्क और इस्पात जैसी महत्वपूर्ण वस्तुओं की ढुलाई के लिहाज से बेहद अहम हैं।

रेल नेटवर्क की क्षमता बढ़ने के बाद इन मार्गों पर करीब 27 MTPA यानी 2.7 करोड़ टन सालाना अतिरिक्त माल यातायात की संभावना है। इससे माल ढुलाई की क्षमता बढ़ाने के साथ लॉजिस्टिक्स व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

पर्यावरण को भी होगा लाभ

रेलवे को ऊर्जा दक्ष और पर्यावरण के अनुकूल परिवहन माध्यम बताते हुए सरकार ने इन परियोजनाओं के पर्यावरणीय लाभों पर भी जोर दिया है।

सरकार के अनुमान के मुताबिक, इन परियोजनाओं से करीब 12 करोड़ लीटर तेल के आयात में कमी आ सकती है। साथ ही लगभग 62 करोड़ किलोग्राम CO₂ उत्सर्जन में कमी आने की संभावना है। सरकार ने इस पर्यावरणीय लाभ को करीब 2.48 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर बताया है।

कुल मिलाकर, इन परियोजनाओं से रेलवे की क्षमता बढ़ाने, ट्रेनों की आवाजाही को सुचारु बनाने, माल ढुलाई को गति देने और देश की लॉजिस्टिक्स लागत कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।