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गवर्नमेंट ITI हुसैनपुरा में एडमिशन जारी – 10वीं पास युवाओं के लिए सुनहरा मौका

हुसैनपुरा / सत्ता संदेश

गवर्नमेंट इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट (ITI) हुसैनपुरा में सेशन 2026-27 के लिए एडमिशन प्रोसेस चल रहा है। फिटर, इलेक्ट्रीशियन, रेफ्रिजरेशन एंड एयर कंडीशनिंग (RAC) और इंडस्ट्रियल रोबोटिक एंड डिजिटल मैन्युफैक्चरिंग टेक्नीशियन ट्रेड में एडमिशन हो रहे हैं।

इंस्टीट्यूशन के प्रिंसिपल ने बताया कि इन ट्रेड में एडमिशन के लिए कम से कम क्वालिफिकेशन 10वीं पास है। ITI में ट्रेनिंग लेने वाले स्टूडेंट्स को इंडस्ट्री की ज़रूरतों के हिसाब से मॉडर्न टेक्निकल ट्रेनिंग दी जाती है, जिससे उन्हें नौकरी और सेल्फ-एम्प्लॉयमेंट के बेहतर मौके मिलते हैं।
उन्होंने आगे बताया कि इंस्टीट्यूशन में सीटें लिमिटेड हैं, इसलिए एलिजिबल और इंटरेस्टेड कैंडिडेट अपने ज़रूरी डॉक्यूमेंट्स के साथ जल्द से जल्द एडमिशन लेकर इस सुनहरे मौके का फायदा उठाएं।

यह भी बताया गया कि गवर्नमेंट ITI हुसैनपुरा, जालंधर बाईपास से आगे, मल्होत्रा ​​पैलेस के पीछे, गांव हुसैनपुरा (लादियां रोड) में है। ज़्यादा जानकारी के लिए, कैंडिडेट ऑफिस टाइम में इंस्टिट्यूट से कॉन्टैक्ट कर सकते हैं।

पंजाब के राज्यपाल और केंद्रीय राज्य मंत्री ने 1,044 युवाओं को सौंपे नियुक्ति पत्र

लुधियाना / सत्ता संदेश

विश्व युवा कौशल दिवस के अवसर पर सन फाउंडेशन द्वारा संचालित मल्टी स्किल डेवलपमेंट सेंटरों (एमएसडीसी) का भव्य दीक्षांत समारोह आज वर्ल्ड स्किल कैंपस ऑफ एक्सीलेंस, गवर्नमेंट आईटीआई कैंपस, गिल रोड, लुधियाना में आयोजित किया गया। समारोह के दौरान सन फाउंडेशन के पंजाब भर में संचालित कौशल केंद्रों से प्रशिक्षित 1,044 युवाओं को प्रमाण-पत्र एवं नियुक्ति पत्र प्रदान किए गए।

समारोह में पंजाब के राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री जयंत चौधरी ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। कार्यक्रम की मेजबानी पद्मश्री डॉ. विक्रमजीत सिंह साहनी, राज्यसभा सांसद एवं सन फाउंडेशन के चेयरमैन ने की।

इस कार्यक्रम में पंजाब भर से 3,000 से अधिक युवाओं, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, शैक्षणिक संस्थानों, नियोक्ताओं तथा अन्य विशिष्ट अतिथियों ने भाग लिया, जिससे यह राज्य में विश्व युवा कौशल दिवस के सबसे बड़े आयोजनों में से एक बन गया।

पंजाब के राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया ने कौशल विकास एवं रोजगार सृजन के क्षेत्र में सन फाउंडेशन द्वारा किए जा रहे उल्लेखनीय कार्यों की सराहना की। उन्होंने पद्मश्री डॉ. विक्रमजीत सिंह साहनी के दूरदर्शी नेतृत्व की प्रशंसा करते हुए कहा कि फाउंडेशन की पहलें पंजाब के हजारों युवाओं को कौशल प्रशिक्षण और सम्मानजनक रोजगार के अवसर प्रदान कर उन्हें सशक्त बना रही हैं।

केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री जयंत चौधरी ने पंजाब में विश्वस्तरीय कौशल विकास केंद्र स्थापित करने के लिए पद्मश्री डॉ. विक्रमजीत सिंह साहनी और सन फाउंडेशन की टीम की प्रशंसा की। उन्होंने सन फाउंडेशन को कौशल विकास और रोजगार के क्षेत्र में एक आदर्श संस्था बताया तथा युवाओं के सशक्तिकरण और राष्ट्र निर्माण में डॉ. साहनी के उत्कृष्ट योगदान की सराहना की।

इस अवसर पर राज्यसभा सांसद एवं सन फाउंडेशन के चेयरमैन डॉ. विक्रमजीत सिंह साहनी ने कहा कि कौशल विकास और रोजगार सृजन, पंजाब में बेरोजगारी, नशाखोरी और पलायन जैसी चुनौतियों का सबसे प्रभावी समाधान हैं। उन्होंने बताया कि सन फाउंडेशन आज अपने मल्टी स्किल डेवलपमेंट सेंटरों के नेटवर्क के माध्यम से उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप तथा भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए प्रशिक्षण देकर प्रतिवर्ष 5,000 से अधिक युवाओं को “स्किल फॉर जॉब्स” उपलब्ध करा रहा है।

उन्होंने बताया कि सन फाउंडेशन के केंद्रों से प्रशिक्षित हजारों युवाओं को इंडिगो एयरलाइंस, ताज होटल्स, मैरियट, रेडिसन, शाही एक्सपोर्ट्स, एवन साइकिल्स सहित विनिर्माण, स्वास्थ्य सेवा और सेवा क्षेत्र की अनेक प्रतिष्ठित कंपनियों में रोजगार प्राप्त हुआ है।

डॉ. साहनी ने कहा कि सन फाउंडेशन उद्योगों की आवश्यकताओं और युवाओं की आकांक्षाओं के बीच की दूरी को सफलतापूर्वक कम कर रहा है। संस्था बाजार की मांग के अनुरूप पाठ्यक्रम तैयार कर युवाओं के लिए सम्मानजनक रोजगार के अवसर सुनिश्चित कर रही है।

समारोह के दौरान गणमान्य अतिथियों ने वर्ल्ड स्किल कैंपस ऑफ एक्सीलेंस का भी दौरा किया। उन्होंने प्रशिक्षुओं से संवाद किया तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस), एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, हॉस्पिटैलिटी, स्वास्थ्य सेवा और अन्य उभरते क्षेत्रों से संबंधित कौशलों की प्रदर्शनी एवं लाइव डेमोंस्ट्रेशन का अवलोकन किया।

पंजाब गवर्नर और केंद्रीय राज्य मंत्री ने 1,044 युवाओं को सौंपे नियुक्ति पत्र

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

‘विश्व युवा कौशल दिवस’ के मौके पर आज लुधियाना के गिल रोड स्थित सरकारी ITI कैंपस के ‘वर्ल्ड स्किल कैंपस ऑफ एक्सीलेंस’ में सन फाउंडेशन द्वारा चलाए जा रहे ‘मल्टी स्किल डेवलपमेंट सेंटर्स’ (MSDCs) का एक भव्य दीक्षांत समारोह आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में पंजाब भर में सन फाउंडेशन के स्किल सेंटर्स में प्रशिक्षित 1,044 युवाओं को सर्टिफिकेट और नियुक्ति पत्र दिए गए। इस समारोह में पंजाब के माननीय गवर्नर गुलाब चंद कटारिया मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए, जबकि कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय के केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जयंत चौधरी ने समारोह की अध्यक्षता की। कार्यक्रम की मेजबानी पद्म डॉ. विक्रमजीत सिंह साहनी, सांसद (राज्यसभा) और चेयरमैन, सन फाउंडेशन ने की।

इस कार्यक्रम में पंजाब भर से 3,000 से अधिक युवाओं, इंडस्ट्री के प्रतिनिधियों, शिक्षण संस्थानों, नियोक्ताओं और प्रतिष्ठित हस्तियों ने भाग लिया, जिससे यह राज्य में ‘विश्व युवा कौशल दिवस’ के सबसे बड़े आयोजनों में से एक बन गया।

पंजाब के गवर्नर श्री गुलाब चंद कटारिया ने कौशल विकास और रोजगार सृजन के क्षेत्र में सन फाउंडेशन द्वारा किए जा रहे बेहतरीन कार्यों की बहुत सराहना की। उन्होंने पद्म श्री डॉ. विक्रमजीत सिंह साहनी के दूरदर्शी नेतृत्व की तारीफ की और कहा कि फाउंडेशन की पहल पंजाब भर के हजारों युवाओं को कौशल और सम्मानजनक रोजगार के अवसर प्रदान करके उन्हें सशक्त बना रही है।

कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय के माननीय केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जयंत चौधरी ने पंजाब में विश्व स्तरीय कौशल विकास केंद्र बनाने के लिए पद्म श्री डॉ. विक्रमजीत सिंह साहनी और सन फाउंडेशन की टीम की प्रशंसा की। उन्होंने सन फाउंडेशन को कौशल और रोजगार के क्षेत्र में एक आदर्श संस्थान बताया और युवा सशक्तिकरण तथा राष्ट्र निर्माण में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए डॉ. साहनी को बधाई दी।

सभा को संबोधित करते हुए, सांसद (राज्यसभा) और सन फाउंडेशन के चेयरमैन डॉ. विक्रमजीत सिंह साहनी ने कहा कि कौशल विकास और रोजगार सृजन पंजाब में बेरोजगारी, नशीली दवाओं के दुरुपयोग और पलायन की चुनौतियों का सबसे प्रभावी समाधान हैं। उन्होंने बताया कि सन फ़ाउंडेशन आज पंजाब भर में अपने ‘मल्टी स्किल डेवलपमेंट सेंटर’ के नेटवर्क के ज़रिए हर साल 5,000 से ज़्यादा युवाओं को ‘स्किल फ़ॉर जॉब्स’ (नौकरी के लिए कौशल) के तहत इंडस्ट्री से जुड़ी और भविष्य के लिए तैयार करने वाली ट्रेनिंग देता है।

उन्होंने आगे कहा कि सन फ़ाउंडेशन सेंटर्स में ट्रेनिंग लेने वाले हज़ारों युवाओं को इंडिगो एयरलाइंस, ताज होटल्स, मैरियट, रैडिसन, शाही एक्सपोर्ट्स, एवन साइकिल्स जैसी बड़ी कंपनियों और मैन्युफैक्चरिंग, हेल्थकेयर और सर्विस सेक्टर की कई नामी कंपनियों में नौकरी मिली है। डॉ. साहनी ने कहा कि सन फ़ाउंडेशन मार्केट की मांग के हिसाब से कोर्स तैयार करके और युवाओं के लिए सम्मानजनक रोज़गार के मौके पक्के करके, इंडस्ट्री की ज़रूरतों और युवाओं की उम्मीदों के बीच के अंतर को सफलतापूर्वक कम कर रहा है।

मान्यवरों ने ‘वर्ल्ड स्किल कैंपस ऑफ़ एक्सीलेंस’ का दौरा भी किया, जहाँ उन्होंने ट्रेनिंग लेने वालों से बातचीत की और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, हॉस्पिटैलिटी, हेल्थकेयर और कई उभरते हुए सेक्टर में कौशल दिखाने वाली प्रदर्शनियों और लाइव डेमो का निरीक्षण किया।

लुधियाना में शिक्षा और सद्भाव का संदेश, एक मंच पर आए AAP, अकाली और कांग्रेस नेता

लुधियाना / सत्ता संदेश

शहर के दुर्गा माता मंदिर में संचालित कंप्यूटर प्रशिक्षण केंद्र के सफल विद्यार्थियों को सम्मानित करने के लिए एक समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर आम आदमी पार्टी, कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल के कई नेता एक ही मंच पर नजर आए और विद्यार्थियों को प्रमाणपत्र वितरित कर उनका उत्साहवर्धन किया। कार्यक्रम के दौरान नेताओं ने एक-दूसरे को गले लगाकर सामाजिक सौहार्द और भाईचारे का संदेश भी दिया।

कार्यक्रम में पहुंचे पूर्व कैबिनेट मंत्री भारत भूषण आशु ने कहा कि युवाओं को शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण से जोड़ना समय की आवश्यकता है, ताकि वे अपने भविष्य को बेहतर बना सकें। हालांकि, कांग्रेस में चल रही अंदरूनी कलह से जुड़े सवाल पर उन्होंने कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

वहीं, पूर्व विधायक रणजीत सिंह ढिल्लों ने कहा कि बच्चों को ऐसी शिक्षा और प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए जिससे वे आत्मनिर्भर बन सकें। अलग-अलग राजनीतिक दलों के नेताओं के एक मंच पर आने के सवाल पर उन्होंने कहा कि समाज में सांप्रदायिक सद्भाव और आपसी भाईचारा बनाए रखना बेहद जरूरी है।

मंदिर कमेटी के अध्यक्ष ने बताया कि इस वर्ष कंप्यूटर प्रशिक्षण केंद्र से 1,700 विद्यार्थियों ने प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया है, जिन्हें समारोह में प्रमाणपत्र प्रदान किए गए। उन्होंने कहा कि मंदिर कमेटी जरूरतमंद लोगों की सेवा और युवाओं को कौशल आधारित शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए लगातार कार्य कर रही है।

CSIR-NCL ने अत्याधुनिक कौशल विकास केंद्र का उद्घाटन किया

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

सीएसआईआर-राष्ट्रीय रसायन प्रयोगशाला, पुणे ने अपने नवनिर्मित, अत्याधुनिक कौशल विकास केंद्र का आधिकारिक तौर पर उद्घाटन किया है। इस उन्नत सुविधा का उद्घाटन CSIR-NCL के निदेशक डॉ. आशीष लेले ने मुख्य अतिथि के रूप में CSIR -एकीकृत कौशल के नोडल वैज्ञानिक डॉ. विनय कुमार और एनवेलियर टीम के प्रतिनिधियों के साथ किया। एनवेलियर टीम ने अपनी कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व पहल के माध्यम से आधुनिकीकरण परियोजना को प्रायोजित किया था।

CSIR की एकीकृत कौशल पहल (CSIR ISI) के अंतर्गत CSIR-NCL का कौशल विकास कार्यक्रम के माध्यम से राष्ट्रीय कौशल प्रणाली तंत्र में विश्व स्तरीय उच्च स्तरीय कौशल प्रदान करना है, ताकि प्रयोगशाला के मुख्य दक्षता क्षेत्र में वर्तमान और उभरती औद्योगिक आवश्यकताओं के अनुरूप उच्च गुणवत्ता वाले कुशल कार्यबल का निर्माण किया जा सके। एसडीपी गतिविधियां एनसीएल के अत्यधिक अनुभवी वैज्ञानिक कर्मचारियों और अत्याधुनिक बुनियादी ढांचे के माध्यम से संचालित की जाती हैं।

उन्नत सुविधा को एनसीएल में कौशल विकास और तकनीकी प्रशिक्षण की सभी पहलों को केंद्रीकृत और बढ़ावा देने के लिए एक समर्पित, पूर्णतः एकीकृत केंद्र के रूप में संरचित किया गया है। आधुनिक बुनियादी ढांचे में अत्याधुनिक सुविधाएं मौजूद हैं, जिनमें संवादात्‍मक स्मार्ट डिस्प्ले से सुसज्जित अति आधुनिक कक्षाएं, एक डिजिटल पोडियम, एक समर्पित कंप्यूटर कक्षा, एक उन्नत डिजिटल कॉन्फ्रेंस रूम, विश्लेषणात्मक प्रयोगशालाएं और एक केंद्रीकृत कौशल विकास कार्यक्रम कार्यालय शामिल हैं।

निदेशक डॉ. आशीष लेले ने उद्घाटन समारोह में इस बात पर जोर दिया कि उन्नत सुविधाएं विशेष उपकरणों के महत्वपूर्ण व्यावहारिक अनुभव प्रदान करेंगी, औद्योगिक दक्षता में सुधार करेंगी और प्रभावशाली नवाचार को बढ़ावा देंगी। मुख्य अतिथि डॉ. विनय कुमार ने आधुनिक अवसंरचना की सराहना करते हुए कहा कि यह सीएसआईआर-एकीकृत कौशल पहल के राष्ट्रीय दृष्टिकोण के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य वैज्ञानिक कौशल को बढ़ाना और सतत तकनीकी क्षमता का निर्माण करना है।

अनुसूचित जाति की लड़कियों के लिए “केयरगिवर-मदर एंड न्यूबोर्न इन्फैंट” फ्री कोर्स

लुधियाना / सत्ता संदेश

पंजाब में अनुसूचित जाति की लड़कियों के लिए “केयरगिवर-मदर एंड न्यूबोर्न इन्फैंट” की फ्री कोर्स की शुरुआत की गई है। जानकारी देते हुए एडिशनल डिप्टी कमिश्नर (रूरल डेवलपमेंट) डॉ. नरिंदर सिंह ने बताया कि पंजाब स्किल डेवलपमेंट मिशन स्कीम के तहत युवाओं को स्किल एजुकेशन देने के बाद नौकरी भी दी जाती है।

इसी कड़ी में, केंद्र सरकार और पंजाब सरकार की तरफ से सिर्फ अनुसूचित जाति कैटेगरी के लिए शुरू की गई PM अजय स्कीम के तहत, लोकल नाइटिंगेल कॉलेज ऑफ नर्सिंग, नारंगवाल में लड़कियों के लिए “केयरगिवर-मदर एंड न्यूबोर्न इन्फैंट (नॉन-क्लिनिकल)” कोर्स फ्री में करवाया जाएगा।

उन्होंने बताया कि इस स्कीम के तहत ट्रेनी को फ्री में रहने और खाने की सुविधा दी जाएगी। ये कोर्स अपोलो मेडस्किल्स सरकार के साथ मिलकर करवा रहा है। ज़्यादा जानकारी के लिए, इस कोर्स में दिलचस्पी रखने वाले कैंडिडेट रूम नंबर 9, स्किल डेवलपमेंट ब्रांच, एडिशनल डिप्टी कमिश्नर (रूरल डेवलपमेंट) के ऑफिस या मोबाइल नंबर 98119-71828 पर कॉन्टैक्ट कर सकते हैं। ऑनलाइन फॉर्म भरने के लिए लिंक https://forms.gle/rms8NiuMdE1i4fLe7 का इस्तेमाल किया जा सकता है।

आकांक्षाओं का गणित: भारत में रोजगार का सवाल अब स्थिरता पर क्यों निर्भर है

जब 1954 में सर आर्थर लुईस ने गरीब अर्थव्यवस्थाओं के अमीर बनने की परिघटना को समझाने का काम शुरू किया, तो उन्होंने विकास की मुख्य प्रक्रिया को पूंजी के संचय के रूप में नहीं बल्कि कामगारों के जीवन-निर्वाह वाली खेती से हटकर अधिक कमाई वाले उद्योगों एवं
सेवा क्षेत्रों की ओर मुड़ने के तौर पर पहचाना। उनका यह अनुमान बिल्कुल ही सही था कि यही बदलाव देर से औद्योगीकरण करने वाले हर देश का भविष्य तय करेगा। आज भारत ठीक इसी मोड़ पर खड़ा है और नीति-निर्माताओं के सामने सवाल पर्याप्त नौकरियां उपलब्ध कराने भर का नहीं है। बल्कि, उनके सामने इससे भी अधिक अहम सवाल यह है कि भारतीय अर्थव्यवस्था ऐसी नौकरियां पैदा करने की स्थिति में है या नहीं जो पर्याप्त तादाद में हों, औपचारिक हों और एक युवा कामगार को जीवन भर बढ़ती उत्पादकता एवं सुरक्षा दे सकने लायक टिकाऊ हों।

इस जिम्मेदारी के भार को काफी सटीकता से बताया जा सकता है। ‘आर्थिक समीक्षा 2023-24’ ने ‘आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे)’ और आबादी से जुड़े अनुमानों के आधार पर यह अनुमान लगाया है कि इस दशक की बाकी अवधि में भारतीय अर्थव्यवस्था को हर वर्ष लगभग 78.5 लाख गैर-कृषि नौकरियां सृजित करनी होंगी। यह आंकड़ा दो बढ़ते दबावों का नतीजा है: पहला, कामकाज के क्षेत्र में लोगों की भागीदारी बढ़ने के साथ श्रमशक्ति में हो रही लगातार बढ़ोतरी; और दूसरा, संरचनात्मक बदलाव के कारण खेती से बाहर आने वाले
कामगार। रोजगार में खेती की हिस्सेदारी अभी भी लगभग 46 प्रतिशत है। वर्ष 2047 तक इस हिस्सेदारी के घटकर एक-चौथाई तक आ जाने की संभावना है।

जुलाई 2025 में केन्द्रीय मंत्रिमंडल द्वारा मंजूर की गई और उसके अगले महीने से शुरू हुई ‘प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना’ उस अंतर को पाटने की अब तक की सबसे सोची- समझी कोशिश है। इस योजना के तहत, जुलाई 2027 तक की दो वर्षों की अवधि में 3.5 करोड़ से अधिक औपचारिक नौकरियां सृजित करने हेतु ‘कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ)’ के जरिए 99,446 करोड़ रुपये लगाए जा रहे हैं। ईपीएफओ में पंजीकृत किसी कंपनी में पहली बार शामिल होने वाला और महीने में एक लाख रुपये से कम कमाने वाला कामगार, दो किस्तों
में कुल 15,000 रुपये तक पाने का हकदार बन जाता है। दूसरी किस्त वित्तीय साक्षरता पाठ्यक्रम (फाइनेंशियल लिटरेसी कोर्स) करने पर और बचत (सेविंग्स) के तौर पर मिलती है। वहीं, निर्धारित आधार-रेखा (बेसलाइन) से अधिक लोगों को नौकरी पर रखने वाले नियोक्ताओं को हर नए कामगार के लिए महीने में 3,000 रुपये तक मिलते हैं। ये शर्तें कुछ इस तरह तय की गई हैं कि छोटी कंपनियां भी इसके दायरे से बाहर हो जाने के बजाय इसमें शामिल हो सकें।

यह योजना भर्ती संबंधी सब्सिडी वाले आम व निराशाजनक तरीकों से इसलिए अलग और बेहतर है क्योंकि इसमें पहला लाभ मिलने से पहले छह महीने तक लगातार नौकरी करना आवश्यक है। ऐसा इसलिए है क्योंकि पहली बार काम करने वाले को नौकरी पर रखने का लाभ तभी मिलता है जब वह कर्मचारी काम में कुशल बन जाए और टिका रहे। यह शर्त शुरुआती भर्ती को एक पक्की प्रतिबद्धता में बदल देती है, जिससे नियोक्ता को प्रशिक्षण की लागत वसूलने के लिए पर्याप्त समय मिल जाता है और कर्मचारी को भी उतने महीने मिल जाते हैं जिनमें वह असली हुनर सीख सके ​​और भरोसेमंद रिकॉर्ड बना सके। इस तरह, यह योजना केवल नौकरी देने के लिए नहीं बल्कि कर्मचारी को बनाए रखने की अपेक्षाकृत अधिक कठिन प्रक्रिया के लिए पुरस्कृत करती है और इसके बाद कर्मचारी के पास रोजगार क्षमता एक ऐसा ट्रैक रिकॉर्ड होता है जिसका वह कहीं भी सदुपयोग कर सकता है।

इस योजना का सबसे अधिक झुकाव मैन्यूफैक्चरिंग की ओर है, जहां नियोक्ता को मिलने वाला प्रोत्साहन दो वर्ष के बजाय चार वर्ष तक मिलता है। समय-सीमा को दोगुनी करने का यह निर्णय औद्योगिक क्षमता तैयार होने में लगने वाले अधिक समय को ध्यान में रखकर लिया गया है। साथ ही, इससे निर्माता (मैन्यूफैक्चरर) समय से पहले स्वचालित व्यवस्था (ऑटोमेशन) लाकर कामगारों को हटाने के बजाय श्रमशक्ति बढ़ाने की ओर प्रेरित होते हैं। अहम बात यह है कि सरकार ने इसे देश को वैश्विक मैन्यूफैक्चरिंग केन्द्र बनाने के लक्ष्य को हासिल करने की दृष्टि से जरूरी माना है। ईपीएफओ ​​के जरिए, हर नए कामगार को एक यूनिवर्सल अकाउंट नंबर मिलता है और उन्हें सामाजिक सुरक्षा का पहली बार अहसास होता है। अनौपचारिक क्षेत्र में काम करने वाले बहुत कम कामगारों को यह सुरक्षा मिल पाती है। इस योजना के शुरुआती नतीजे बेहद उत्साहजनक रहे हैं। इसके शुरू होने के बाद से लगभग 60 लाख नए कर्मचारी नामांकित हुए हैं। इनमें से अधिकतर 30 वर्ष से कम आयु के हैं और 18 लाख से अधिक महिलाएं हैं। वहीं, लगभग 1.77 लाख प्रतिष्ठानों ने 66 लाख से अधिक रोजगार के अवसर सृजित किए हैं। इन प्रतिष्ठानों में कई ऐसी छोटी कंपनियां शामिल हैं, जहां लंबे समय से अनौपचारिक काम का बोलबाला रहा है।

हालांकि, एक अच्छी शुरुआत को पूरी तरह से सफल बदलाव मान लेना नासमझी होगी। इस योजना में धोखाधड़ी में शामिल कंपनियों को बाहर रखने, हर छह महीने में इलेक्ट्रॉनिक रिटर्न के जरिए यह सुनिश्चित करना कि नौकरी सिर्फ कागजों के बजाय असल में बनी हुई है और भुगतान की स्वचालित प्रणाली जैसी कई अच्छी बातें हैं। ये सभी खूबियां इस बात को दर्शाती हैं कि योजनाकारों को इस बात का अहसास है कि ऐसी योजना में उन भर्तियों को लाभ नहीं मिलना चाहिए जो अन्यथा भी हो जातीं। इसकी असली सफलता पहले वर्ष में नामांकित लोगों के आंकड़ों से नहीं, बल्कि इस बात से पता चलेगी कि वे नौकरियां उस प्रोत्साहन के समाप्त होने के बाद भी बनी रहती हैं या नहीं और इससे पैदा होने वाली मांग को पूरा करने के लिए काम के लायक युवा मौजूद हैं या नहीं। इसीलिए, इस योजना की सफलता कौशल को सिखाने में किए जा रहे निवेश से सीधे तौर पर जुड़ी हुई है।

यह याद रखना ज़रूरी है कि बेरोजगारी सिर्फ आमदनी से ही वंचित नहीं करती, बल्कि यह लोगों के हुनर, आत्म-सम्मान और समाज में उनकी हैसियत को भी कमजोर करती है। वोल्टेयर ने भी यही बात कही थी जब उन्होंने कैंडिड के जरिए यह निष्कर्ष दिया था कि काम करने से तीन बड़ी समस्याएं – बोरियत, बुराई और अभाव – दूर रहती हैं। इस तरह की योजना की अहमियत इसलिए है क्योंकि यह रोजगार के सही और संपूर्ण मतलब को समझती है। यह औपचारिक नौकरी को सिर्फ गिनती के आंकड़े के तौर पर नहीं, बल्कि कामकाजी जीवन की पहली सुरक्षित
सीढ़ी के तौर पर देखती है। अब जबकि भारत 2047 तक एक विकसित अर्थव्यवस्था बनने की राह पर अग्रसर है, तो चुनौती इस बात की है कि इस योजना में दिखाई गई धैर्य की भावना को बनाए रखा जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि युवाओं को सार्थक रोजगार, जिसे प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय परियोजना के केन्द्र में रखा है, कुछ समय के प्रोत्साहन तक सीमित रहने के बजाय एक पूरी पीढ़ी के लिए टिकाऊ, उत्पादक और सम्मानजनक काम के रूप में मिले।

(लेखक भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार हैं)

भारत-जापान संगोष्ठी से कार्यबल सहयोग को नई रफ्तार मिली

दिल्ली / सत्ता संदेश

भारत और जापान के बीच कार्यबल गतिशीलता सहयोग पर चर्चा करने के लिए 25 मई को टोक्यो में एक संयुक्त संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह संगोष्ठी जापान स्थित भारतीय दूतावास और जापान की आसियान वन कंपनी लिमिटेड द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित की गई थी।

भारत और जापान के बीच कुशल कार्यबल गतिशीलता और मानव संसाधन विकास में दीर्घकालिक सहयोग पर चर्चा के लिए इस संगोष्ठी में जापानी नीति निर्माताओं, उद्योग जगत प्रमुखों, शैक्षणिक संस्थानों और कार्यबल गतिशीलता से जुड़े हितधारकों को एक मंच पर लाया गया।

इस संगोष्ठी में जापान की प्रमुख कंपनियों के लगभग 250 प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जिनमें वरिष्ठ अधिकारी और मानव संसाधन प्रबंधक शामिल थे। प्रतिनिधियों ने भारत के कुशल कार्यबल पारिस्थितिकी तंत्र के साथ संरचित जुड़ाव की संभावनाओं पर चर्चा की।

प्रतिभागियों ने विनिर्माण, देखभाल, निर्माण, वाहन रखरखाव, आतिथ्य सत्कार, कृषि, आईटी और डिजिटल सेवाओं तथा उभरते हरित अर्थव्यवस्था क्षेत्रों जैसे विभिन्न क्षेत्रों में भारत-जापान सहयोग की प्रबल संभावनाओं को स्वीकार किया। चर्चाओं में पारदर्शी और व्यापक कार्यबल गतिशीलता मार्ग बनाने के लिए डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और रोजगार सुविधा प्रणालियों के महत्व पर भी बल दिया गया।

आगे बढ़ने के तरीके के रूप में, दोनों पक्षों ने भारत में जापानी भाषा और परीक्षण केंद्रों का विस्तार करने, जापानी नियोक्ताओं और भारतीय कौशल संस्थानों के बीच सहयोग को मजबूत करने, जापान से मांग की दृश्यता में सुधार करने, कौशल-मान्यता और व्यावसायिक संरेखण को बढ़ावा देने और घनिष्ठ संस्थागत सहयोग के माध्यम से विश्वसनीय कार्यबल गतिशीलता मार्ग बनाने पर चर्चा की।

असम सरकार की फॉरेन लैंग्वेज इनिशिएटिव फॉर ग्लोबल टैलेंट (फ्लाइट) को राज्य के नेतृत्व वाली एक पहल के रूप में उजागर किया गया, जिसका उद्देश्य उम्मीदवारों को वैश्विक कार्यबल के अवसरों, विशेष रूप से जापान-उन्मुख मार्गों के लिए तैयार करना है।

कार्यक्रम का समापन आसियान ग्रुप कंपनी लिमिटेड के अध्यक्ष एवं मुख्‍य कार्यकारी अधिकारी श्री तोशियाकी निशिकावा के संबोधन से हुआ, जिन्होंने भारत-जापान के बीच दीर्घकालिक जन-सहयोग के महत्व पर बल दिया। उन्होंने भविष्य में कार्यबल सहयोग के प्रति आशा व्यक्त करते हुए अगले 10 वर्षों में 50,000 लोगों को शामिल करने के साथ जापान-भारत मानव विनिमय कार्यक्रम को साकार करने के प्रति वचनबद्धता जताई।

उच्च शिक्षा संस्थानों, औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों, शिक्षुता प्रणालियों, डिजिटल कौशल विकास प्लेटफार्मों और कैरियर सेवाओं द्वारा समर्थित भारत के व्यापक कार्यबल तैयारी तंत्र पर भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने विदेश मंत्रालय के ई-माइग्रेट प्लेटफार्म, राष्ट्रीय कैरियर सेवा प्लेटफार्म, मॉडल कैरियर केंद्रों और कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय, राज्यों और शैक्षणिक संस्थानों को शामिल करने वाले व्यापक कौशल विकास तंत्र सहित भारत के अंतर्राष्ट्रीय श्रम गतिशीलता ढांचे पर प्रकाश डाला।

सचिव महोदया ने भारत और जापान के बीच जापानी भाषा की तैयारी, क्षेत्र-विशिष्ट कौशल विकास, परीक्षण अवसंरचना, कौशल मानचित्रण, व्यावसायिक संरेखण, संरचित मांग एकत्रीकरण, नैतिक भर्ती प्रथाओं और संस्थागत सहयोग को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

एनएचएआई ‘परियोजना सक्षम’ के माध्यम से महिला-केंद्रित कौशल विकास को बढावा दे रहा है

दिल्ली /सत्ता संदेश

समावेशी विकास को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करते हुए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई), वर्टिस फाउंडेशन के साथ साझेदारी में ‘परियोजना सक्षम’ के माध्यम से सार्थक सामाजिक प्रभाव पैदा कर रहा है। यह पहल स्थायी आजीविका के अवसरों के लिए संरचित कौशल विकास के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाने पर केंद्रित है। कौशल प्रशिक्षण से परे इस पहल का उद्देश्य दीर्घकालिक वित्तीय आत्‍मनिर्भरता और सामाजिक सशक्तिकरण के लिए मार्ग तैयार करना भी है।

‘परियोजना सक्षम’ देशभर में फैले 12 प्रशिक्षण केंद्रों के नेटवर्क के माध्यम से संचालिता होता है, जो वंचित समुदायों को उद्योग-प्रासांगिक कौशल और औपचारिक कार्यबल में शामिल होने के अवसर प्रदान करता हैं। अब तक इस पहल ने 6,000 से अधिक युवाओं को प्रशिक्षित किया है, जिनमें से 4,000 से अधिक को विभिन्न क्षेत्रों में सफलतापूर्वक रोजगार मिला है। लाभार्थी औसतन 13,000 से 16,000 रुपये प्रतिमाह की आय अर्जित कर रहे हैं, जो कई राज्यों में प्रवेश स्तर के वेतन मानकों से अधिक है। गौर तलब है कि 80 प्रतिशत से अधिक लाभार्थी महिलाएं हैं, जो जेंडर-आधारित सशक्तिकरण पर कार्यक्रम के मजबूत जोर को रेखांकित करता है।

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के समावेशी बुनियादी ढांचा विकास के व्यापक दृष्टिकोण के अनुरूप, ‘सक्षम परियोजना’ इस विश्वास पर आधारित है कि राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे बसे समुदायों, विशेष रूप से ग्रामीण महिलाओं को, बुनियादी ढांचे के विस्तार से उत्पन्न आर्थिक अवसरों का सीधा लाभ मिलना चाहिए। यह पहल उन समुदायों के लिए कौशल, रोजगार और वित्तीय आत्‍मनिर्भरता तक पहुंच को सक्षम बनाकर इस अंतर को पाटने का प्रयास करती है, जो इससे जुड़े तो हैं, लेकिन अक्सर बुनियादी ढांचे के विस्तार के आसपास की आर्थिक गति से बाहर रह जाते हैं।

‘परियोजना सक्षम’ अपनी जमीनी सहभागिता मॉडल के कारण विशिष्‍ट पहचान रखता है। इसकी फील्ड टीमें ग्रामीण समुदायों के भीतर परिवारों के साथ निकटता से कार्य करती है, ताकि विश्‍वास कायम किया जा सकें, सामाजिक-सांस्कृतिक बाधाओं को दूर किया जा सकें तथा महिलाओं को कौशल विकास और रोजगार के अवसरों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किेया जा सके-कई मामलों में यह उनके लिए पहली बार होता है। प्रतिभागियों को विभिन्न प्रकार के व्यावसायिक कौशलों में प्रशिक्षित किया जाता है, जिनमें बिजली का काम, प्लंबिंग, उपकरण मरम्मत, सिलाई, जनरल ड्यूटी असिस्‍टेंट नर्सिंग और बहु-कुशल तकनीशियन प्रशिक्षण शामिल हैं।इन कार्यक्रमों को इस प्रकार तैयार किया गया है कि लाभार्थियों को व्यावहारिक, बाजार-उन्‍मुख क्षमताएं प्राप्‍त हों, जिससे उनकी रोजगार योग्‍यता बढे। अनेक प्रतिभागियों के लिए यह पहल एक परिवर्तनकारी यात्रा सिद्ध हुई है, जिसने उन्हें आर्थिक आत्मनिर्भरता हासिल करने तथा अपने और अपने समुदायों के लिए नई आकांक्षाएं निर्धारित करने में सक्षम बनाया है।

यह पहल इस बात को रेखांकित करती है कि एनएचएआई अवसंरचना विकास को केवल बेहतर कनेक्टिविटी तक सीमित नहीं रखना चाहता, बल्कि इसके माध्‍यम से समावेशी विकास के अवसर भी सुनिश्चित करना चाहता है, जिससे देश भर में अधिक और सशक्‍त समुदायों के निर्माण में योगदान मिल सके।