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भारत-जापान संगोष्ठी से कार्यबल सहयोग को नई रफ्तार मिली

दिल्ली / सत्ता संदेश

भारत और जापान के बीच कार्यबल गतिशीलता सहयोग पर चर्चा करने के लिए 25 मई को टोक्यो में एक संयुक्त संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह संगोष्ठी जापान स्थित भारतीय दूतावास और जापान की आसियान वन कंपनी लिमिटेड द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित की गई थी।

भारत और जापान के बीच कुशल कार्यबल गतिशीलता और मानव संसाधन विकास में दीर्घकालिक सहयोग पर चर्चा के लिए इस संगोष्ठी में जापानी नीति निर्माताओं, उद्योग जगत प्रमुखों, शैक्षणिक संस्थानों और कार्यबल गतिशीलता से जुड़े हितधारकों को एक मंच पर लाया गया।

इस संगोष्ठी में जापान की प्रमुख कंपनियों के लगभग 250 प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जिनमें वरिष्ठ अधिकारी और मानव संसाधन प्रबंधक शामिल थे। प्रतिनिधियों ने भारत के कुशल कार्यबल पारिस्थितिकी तंत्र के साथ संरचित जुड़ाव की संभावनाओं पर चर्चा की।

प्रतिभागियों ने विनिर्माण, देखभाल, निर्माण, वाहन रखरखाव, आतिथ्य सत्कार, कृषि, आईटी और डिजिटल सेवाओं तथा उभरते हरित अर्थव्यवस्था क्षेत्रों जैसे विभिन्न क्षेत्रों में भारत-जापान सहयोग की प्रबल संभावनाओं को स्वीकार किया। चर्चाओं में पारदर्शी और व्यापक कार्यबल गतिशीलता मार्ग बनाने के लिए डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और रोजगार सुविधा प्रणालियों के महत्व पर भी बल दिया गया।

आगे बढ़ने के तरीके के रूप में, दोनों पक्षों ने भारत में जापानी भाषा और परीक्षण केंद्रों का विस्तार करने, जापानी नियोक्ताओं और भारतीय कौशल संस्थानों के बीच सहयोग को मजबूत करने, जापान से मांग की दृश्यता में सुधार करने, कौशल-मान्यता और व्यावसायिक संरेखण को बढ़ावा देने और घनिष्ठ संस्थागत सहयोग के माध्यम से विश्वसनीय कार्यबल गतिशीलता मार्ग बनाने पर चर्चा की।

असम सरकार की फॉरेन लैंग्वेज इनिशिएटिव फॉर ग्लोबल टैलेंट (फ्लाइट) को राज्य के नेतृत्व वाली एक पहल के रूप में उजागर किया गया, जिसका उद्देश्य उम्मीदवारों को वैश्विक कार्यबल के अवसरों, विशेष रूप से जापान-उन्मुख मार्गों के लिए तैयार करना है।

कार्यक्रम का समापन आसियान ग्रुप कंपनी लिमिटेड के अध्यक्ष एवं मुख्‍य कार्यकारी अधिकारी श्री तोशियाकी निशिकावा के संबोधन से हुआ, जिन्होंने भारत-जापान के बीच दीर्घकालिक जन-सहयोग के महत्व पर बल दिया। उन्होंने भविष्य में कार्यबल सहयोग के प्रति आशा व्यक्त करते हुए अगले 10 वर्षों में 50,000 लोगों को शामिल करने के साथ जापान-भारत मानव विनिमय कार्यक्रम को साकार करने के प्रति वचनबद्धता जताई।

उच्च शिक्षा संस्थानों, औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों, शिक्षुता प्रणालियों, डिजिटल कौशल विकास प्लेटफार्मों और कैरियर सेवाओं द्वारा समर्थित भारत के व्यापक कार्यबल तैयारी तंत्र पर भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने विदेश मंत्रालय के ई-माइग्रेट प्लेटफार्म, राष्ट्रीय कैरियर सेवा प्लेटफार्म, मॉडल कैरियर केंद्रों और कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय, राज्यों और शैक्षणिक संस्थानों को शामिल करने वाले व्यापक कौशल विकास तंत्र सहित भारत के अंतर्राष्ट्रीय श्रम गतिशीलता ढांचे पर प्रकाश डाला।

सचिव महोदया ने भारत और जापान के बीच जापानी भाषा की तैयारी, क्षेत्र-विशिष्ट कौशल विकास, परीक्षण अवसंरचना, कौशल मानचित्रण, व्यावसायिक संरेखण, संरचित मांग एकत्रीकरण, नैतिक भर्ती प्रथाओं और संस्थागत सहयोग को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

एनएचएआई ‘परियोजना सक्षम’ के माध्यम से महिला-केंद्रित कौशल विकास को बढावा दे रहा है

दिल्ली /सत्ता संदेश

समावेशी विकास को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करते हुए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई), वर्टिस फाउंडेशन के साथ साझेदारी में ‘परियोजना सक्षम’ के माध्यम से सार्थक सामाजिक प्रभाव पैदा कर रहा है। यह पहल स्थायी आजीविका के अवसरों के लिए संरचित कौशल विकास के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाने पर केंद्रित है। कौशल प्रशिक्षण से परे इस पहल का उद्देश्य दीर्घकालिक वित्तीय आत्‍मनिर्भरता और सामाजिक सशक्तिकरण के लिए मार्ग तैयार करना भी है।

‘परियोजना सक्षम’ देशभर में फैले 12 प्रशिक्षण केंद्रों के नेटवर्क के माध्यम से संचालिता होता है, जो वंचित समुदायों को उद्योग-प्रासांगिक कौशल और औपचारिक कार्यबल में शामिल होने के अवसर प्रदान करता हैं। अब तक इस पहल ने 6,000 से अधिक युवाओं को प्रशिक्षित किया है, जिनमें से 4,000 से अधिक को विभिन्न क्षेत्रों में सफलतापूर्वक रोजगार मिला है। लाभार्थी औसतन 13,000 से 16,000 रुपये प्रतिमाह की आय अर्जित कर रहे हैं, जो कई राज्यों में प्रवेश स्तर के वेतन मानकों से अधिक है। गौर तलब है कि 80 प्रतिशत से अधिक लाभार्थी महिलाएं हैं, जो जेंडर-आधारित सशक्तिकरण पर कार्यक्रम के मजबूत जोर को रेखांकित करता है।

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के समावेशी बुनियादी ढांचा विकास के व्यापक दृष्टिकोण के अनुरूप, ‘सक्षम परियोजना’ इस विश्वास पर आधारित है कि राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे बसे समुदायों, विशेष रूप से ग्रामीण महिलाओं को, बुनियादी ढांचे के विस्तार से उत्पन्न आर्थिक अवसरों का सीधा लाभ मिलना चाहिए। यह पहल उन समुदायों के लिए कौशल, रोजगार और वित्तीय आत्‍मनिर्भरता तक पहुंच को सक्षम बनाकर इस अंतर को पाटने का प्रयास करती है, जो इससे जुड़े तो हैं, लेकिन अक्सर बुनियादी ढांचे के विस्तार के आसपास की आर्थिक गति से बाहर रह जाते हैं।

‘परियोजना सक्षम’ अपनी जमीनी सहभागिता मॉडल के कारण विशिष्‍ट पहचान रखता है। इसकी फील्ड टीमें ग्रामीण समुदायों के भीतर परिवारों के साथ निकटता से कार्य करती है, ताकि विश्‍वास कायम किया जा सकें, सामाजिक-सांस्कृतिक बाधाओं को दूर किया जा सकें तथा महिलाओं को कौशल विकास और रोजगार के अवसरों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किेया जा सके-कई मामलों में यह उनके लिए पहली बार होता है। प्रतिभागियों को विभिन्न प्रकार के व्यावसायिक कौशलों में प्रशिक्षित किया जाता है, जिनमें बिजली का काम, प्लंबिंग, उपकरण मरम्मत, सिलाई, जनरल ड्यूटी असिस्‍टेंट नर्सिंग और बहु-कुशल तकनीशियन प्रशिक्षण शामिल हैं।इन कार्यक्रमों को इस प्रकार तैयार किया गया है कि लाभार्थियों को व्यावहारिक, बाजार-उन्‍मुख क्षमताएं प्राप्‍त हों, जिससे उनकी रोजगार योग्‍यता बढे। अनेक प्रतिभागियों के लिए यह पहल एक परिवर्तनकारी यात्रा सिद्ध हुई है, जिसने उन्हें आर्थिक आत्मनिर्भरता हासिल करने तथा अपने और अपने समुदायों के लिए नई आकांक्षाएं निर्धारित करने में सक्षम बनाया है।

यह पहल इस बात को रेखांकित करती है कि एनएचएआई अवसंरचना विकास को केवल बेहतर कनेक्टिविटी तक सीमित नहीं रखना चाहता, बल्कि इसके माध्‍यम से समावेशी विकास के अवसर भी सुनिश्चित करना चाहता है, जिससे देश भर में अधिक और सशक्‍त समुदायों के निर्माण में योगदान मिल सके।