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सिरसा में BIS का ज्वेलर्स जागरूकता कार्यक्रम में 100 से अधिक ज्वेलर्स ने लिया हिस्सा

हरियाणा / सिरसा / सत्ता संदेश

भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के हरियाणा शाखा कार्यालय की ओर से मंगलवार को सिरसा में ज्वेलर्स जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में सिरसा के अलावा आसपास के जिलों के 100 से अधिक ज्वेलर्स और ज्वेलर्स एसोसिएशनों के सदस्यों ने भाग लिया।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ज्वेलर्स को हॉलमार्किंग पंजीकरण प्रक्रिया, अनुपालन आवश्यकताओं, BIS की ऑनलाइन सेवाओं, हालिया सुधारों, HUID तथा लागू BIS मानकों के बारे में जानकारी देना और उन्हें इन नियमों के प्रति अपडेट करना रहा।

कार्यक्रम का शुभारंभ मधुरिमा माधव, वैज्ञानिक-ई/निदेशक एवं प्रमुख, हरियाणा शाखा कार्यालय, BIS के स्वागत संबोधन से हुआ। उन्होंने कार्यक्रम के उद्देश्यों की जानकारी देते हुए ज्वेलर्स के लिए हॉलमार्किंग व्यवस्था के महत्व और BIS के साथ प्रभावी अनुपालन की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।

इस अवसर पर ज्वैलर्स एसोसिएशन, सिरसा के जिला अध्यक्ष सज्जन सिंह सोनी ने BIS अधिकारियों, हॉलमार्किंग सेंटर के प्रतिनिधियों और कार्यक्रम में पहुंचे सभी ज्वेलर्स का स्वागत किया। उन्होंने हॉलमार्किंग, HUID और सिल्वर HUID से जुड़े ज्वेलर्स के प्रमुख मुद्दों को अधिकारियों के सामने रखा।

उन्होंने अधिकारियों से नियमों के क्रियान्वयन को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने और नई प्रक्रियाओं को लागू करने के लिए पर्याप्त समय देने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि ज्वेलर्स नियमों का पालन करने के लिए तैयार हैं, लेकिन प्रक्रिया सरल, पारदर्शी और व्यावहारिक होनी चाहिए।

HUID और हॉलमार्किंग प्रक्रिया पर दी गई जानकारी

कार्यक्रम के मुख्य तकनीकी सत्र में अनंत कुमार, वैज्ञानिक-सी/उप निदेशक, हरियाणा शाखा कार्यालय, BIS ने “हॉलमार्किंग – पंजीकरण प्रक्रिया, अनुपालन आवश्यकताएँ, ऑनलाइन सेवाएँ, सुधार, HUID एवं लागू BIS आवश्यकताएँ” विषय पर विस्तृत प्रस्तुति दी।

तकनीकी सत्र में ज्वेलर्स को हॉलमार्किंग के लिए पंजीकरण, अनुपालन से जुड़े प्रावधानों, BIS की ऑनलाइन सुविधाओं, HUID और लागू प्रक्रियाओं एवं मानकों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।

ज्वेलर्स ने पूछे BIS और हॉलमार्किंग से जुड़े सवाल

कार्यक्रम के अंत में प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया। इसमें ज्वेलर्स ने हॉलमार्किंग, HUID और BIS से संबंधित विभिन्न सवाल अधिकारियों के सामने रखे। BIS अधिकारियों ने प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश और मार्गदर्शन प्रदान किया।

कार्यक्रम का उद्देश्य हॉलमार्किंग व्यवस्था के प्रभावी क्रियान्वयन को बढ़ावा देना, ज्वेलर्स में नियामकीय अनुपालन के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा आभूषणों की गुणवत्ता, पारदर्शिता और उपभोक्ता विश्वास को मजबूत करना रहा।

BIS की ओर से कहा गया कि ऐसे जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से ज्वेलर्स को गुणवत्तापूर्ण और प्रमाणित आभूषण उपलब्ध कराने की दिशा में आवश्यक जानकारी एवं सहयोग प्रदान किया जाता रहेगा।

सोना खरीदने का प्लान बना रहे हैं? GST और मेकिंग चार्ज का पूरा गणित जान लें; एक गलती से हो सकता है हजारों का नुकसान

बिजनेस डेस्क: भारत में सोना सिर्फ एक मेटल नहीं, बल्कि परंपरा, इन्वेस्टमेंट और भावनाओं का एक अहम हिस्सा है। शादी हो या कोई त्योहार, हर घर में सोने की चमक खास मानी जाती है। लेकिन जब ज्वेलरी शॉप पर बिल हाथ में आता है, तो GST, मेकिंग चार्ज और वेस्टेज जैसे शब्द अक्सर ग्राहकों को कन्फ्यूज कर देते हैं।

सोने पर GST रेट (3%): सूत्रों के मुताबिक, भारत में सोने की खरीद पर 3% GST लगता है। यह रेट सभी तरह के सोने पर एक जैसा रहता है, चाहे वह 24 कैरेट हो, 22 कैरेट हो या 18 कैरेट हो। आप चाहे ज्वेलरी खरीदें, सोने के सिक्के खरीदें या सोने की छड़ें, GST रेट 3% ही रहेगा। उदाहरण के लिए, अगर 10 ग्राम सोने की कीमत 1 लाख रुपये है, तो उस पर 3000 रुपये GST देना होगा। डिजिटल गोल्ड पर भी 3% GST लगता है, हालांकि सर्विस फीस पर 18% तक टैक्स लग सकता है।

मेकिंग चार्ज का कैलकुलेशन: मेकिंग चार्ज वह कॉस्ट है जो ज्वेलरी बनाने में लगती है, जो आम तौर पर सोने की कीमत का 5% से 25% तक हो सकती है। यह चार्ज प्रति ग्राम फिक्स्ड रेट पर भी हो सकता है। यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि अगर सोने की कीमत पर GST देने के बाद मेकिंग चार्ज लगता है, तो टैक्स आपकी उम्मीद से ज़्यादा हो सकता है, इसलिए बिल में उनकी अलग-अलग डिटेल्स देखना ज़रूरी है।

ज्वेलरी खरीदते समय इन ज़रूरी बातों का ध्यान रखें:

हॉलमार्क ज़रूर चेक करें: हमेशा HUID नंबर वाला सोना खरीदें, जो प्योरिटी की गारंटी देता है।

आइडेंटिटी प्रूफ (ID): 2 लाख रुपये से ज़्यादा की खरीदारी पर PAN या आधार कार्ड देना ज़रूरी है।

बेकार और मोलभाव: कई ज्वेलर एक्स्ट्रा चार्ज जोड़ते हैं, जिसके लिए मोलभाव किया जा सकता है।

बायबैक पॉलिसी: पुराना सोना बेचकर नया खरीदने पर GST का बोझ कम हो सकता है।

फिक्स्ड बिल: टैक्स और चार्ज की पूरी डिटेल्स वाला बिल लेना बहुत ज़रूरी है।