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सिरसा में BIS का ज्वेलर्स जागरूकता कार्यक्रम में 100 से अधिक ज्वेलर्स ने लिया हिस्सा

हरियाणा / सिरसा / सत्ता संदेश

भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के हरियाणा शाखा कार्यालय की ओर से मंगलवार को सिरसा में ज्वेलर्स जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में सिरसा के अलावा आसपास के जिलों के 100 से अधिक ज्वेलर्स और ज्वेलर्स एसोसिएशनों के सदस्यों ने भाग लिया।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ज्वेलर्स को हॉलमार्किंग पंजीकरण प्रक्रिया, अनुपालन आवश्यकताओं, BIS की ऑनलाइन सेवाओं, हालिया सुधारों, HUID तथा लागू BIS मानकों के बारे में जानकारी देना और उन्हें इन नियमों के प्रति अपडेट करना रहा।

कार्यक्रम का शुभारंभ मधुरिमा माधव, वैज्ञानिक-ई/निदेशक एवं प्रमुख, हरियाणा शाखा कार्यालय, BIS के स्वागत संबोधन से हुआ। उन्होंने कार्यक्रम के उद्देश्यों की जानकारी देते हुए ज्वेलर्स के लिए हॉलमार्किंग व्यवस्था के महत्व और BIS के साथ प्रभावी अनुपालन की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।

इस अवसर पर ज्वैलर्स एसोसिएशन, सिरसा के जिला अध्यक्ष सज्जन सिंह सोनी ने BIS अधिकारियों, हॉलमार्किंग सेंटर के प्रतिनिधियों और कार्यक्रम में पहुंचे सभी ज्वेलर्स का स्वागत किया। उन्होंने हॉलमार्किंग, HUID और सिल्वर HUID से जुड़े ज्वेलर्स के प्रमुख मुद्दों को अधिकारियों के सामने रखा।

उन्होंने अधिकारियों से नियमों के क्रियान्वयन को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने और नई प्रक्रियाओं को लागू करने के लिए पर्याप्त समय देने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि ज्वेलर्स नियमों का पालन करने के लिए तैयार हैं, लेकिन प्रक्रिया सरल, पारदर्शी और व्यावहारिक होनी चाहिए।

HUID और हॉलमार्किंग प्रक्रिया पर दी गई जानकारी

कार्यक्रम के मुख्य तकनीकी सत्र में अनंत कुमार, वैज्ञानिक-सी/उप निदेशक, हरियाणा शाखा कार्यालय, BIS ने “हॉलमार्किंग – पंजीकरण प्रक्रिया, अनुपालन आवश्यकताएँ, ऑनलाइन सेवाएँ, सुधार, HUID एवं लागू BIS आवश्यकताएँ” विषय पर विस्तृत प्रस्तुति दी।

तकनीकी सत्र में ज्वेलर्स को हॉलमार्किंग के लिए पंजीकरण, अनुपालन से जुड़े प्रावधानों, BIS की ऑनलाइन सुविधाओं, HUID और लागू प्रक्रियाओं एवं मानकों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।

ज्वेलर्स ने पूछे BIS और हॉलमार्किंग से जुड़े सवाल

कार्यक्रम के अंत में प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया। इसमें ज्वेलर्स ने हॉलमार्किंग, HUID और BIS से संबंधित विभिन्न सवाल अधिकारियों के सामने रखे। BIS अधिकारियों ने प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश और मार्गदर्शन प्रदान किया।

कार्यक्रम का उद्देश्य हॉलमार्किंग व्यवस्था के प्रभावी क्रियान्वयन को बढ़ावा देना, ज्वेलर्स में नियामकीय अनुपालन के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा आभूषणों की गुणवत्ता, पारदर्शिता और उपभोक्ता विश्वास को मजबूत करना रहा।

BIS की ओर से कहा गया कि ऐसे जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से ज्वेलर्स को गुणवत्तापूर्ण और प्रमाणित आभूषण उपलब्ध कराने की दिशा में आवश्यक जानकारी एवं सहयोग प्रदान किया जाता रहेगा।

2 करोड़ से ज्यादा स्कूली बच्चों के आधार में बायोमेट्रिक अपडेट हुआ पूरा, 1.6 लाख स्कूल अभियान से जुड़े

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने स्कूली बच्चों के आधार में अनिवार्य बायोमेट्रिक अपडेट (MBU) को लेकर चलाए जा रहे राष्ट्रव्यापी मिशन-मोड अभियान में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। अभियान के तहत देशभर में 2 करोड़ से अधिक स्कूली बच्चों के अनिवार्य बायोमेट्रिक अपडेट पूरे किए जा चुके हैं।

सितंबर 2025 में शुरू किए गए इस विशेष अभियान के तहत अब तक 1.56 लाख से अधिक स्कूलों को कवर किया जा चुका है। अभियान का उद्देश्य बच्चों के आधार में समय पर बायोमेट्रिक जानकारी अपडेट कराना और इस प्रक्रिया को स्कूल स्तर पर ही आसान एवं सुविधाजनक बनाना है।

UDISE+ के तकनीकी एकीकरण से अभियान को मिली गति

UIDAI ने शिक्षा मंत्रालय के यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस (UDISE+) के साथ तकनीकी एकीकरण किया है। इसके माध्यम से स्कूलों में बच्चों के अनिवार्य बायोमेट्रिक अपडेट की स्थिति की जानकारी उपलब्ध हो रही है।

UIDAI और राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों के शिक्षा विभागों के समन्वय से स्कूलों में विशेष शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। इससे बच्चों को आधार अपडेट कराने के लिए अलग से केंद्रों पर जाने की जरूरत कम हुई है और सेवा सीधे स्कूलों तक पहुंच रही है।

5 और 15 वर्ष की उम्र में MBU जरूरी

पांच वर्ष से कम उम्र में आधार बनाते समय बच्चों की जनसांख्यिकीय जानकारी और फोटो दर्ज की जाती है। इस उम्र में उंगलियों के निशान और आंखों की पुतली जैसी बायोमेट्रिक जानकारी सामान्यतः दर्ज नहीं की जाती, क्योंकि बच्चों में ये बायोमेट्रिक्स अभी विकसित हो रहे होते हैं।

5 वर्ष की आयु पूरी होने पर और फिर 15 वर्ष की आयु पूरी होने पर अनिवार्य बायोमेट्रिक अपडेट (MBU) कराया जाना जरूरी है। समय पर अपडेट होने से आगे चलकर आधार प्रमाणीकरण में आने वाली संभावित परेशानियों को कम किया जा सकता है।

30 सितंबर 2026 तक 5 से 17 साल के बच्चों के लिए MBU मुफ्त

बच्चों और अभिभावकों को समय पर MBU कराने के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से UIDAI ने शुल्क में राहत दी है। तकनीकी रूप से 30 सितंबर 2026 तक 5 से 17 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए अनिवार्य बायोमेट्रिक अपडेट निःशुल्क है।

UIDAI के अनुसार, 7 से 15 वर्ष के बच्चों के लिए MBU शुल्क 1 अक्टूबर 2025 से एक वर्ष की अवधि के लिए माफ किया गया था, जबकि 5-7 वर्ष और 15-17 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के लिए MBU पहले से ही निःशुल्क है।

NEET, JEE और CUET समेत कई परीक्षाओं में हो सकती है जरूरत

UIDAI ने अभिभावकों से बच्चों के आधार में समय पर MBU पूरा कराने की अपील की है। आधार में बायोमेट्रिक अपडेट नहीं होने पर कुछ सरकारी योजनाओं का लाभ लेने तथा NEET, JEE, CUET जैसी प्रतियोगी और विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षाओं के दौरान आधार प्रमाणीकरण में कठिनाई आ सकती है।

UIDAI का कहना है कि समय पर MBU पूरा कराने से बच्चों की शिक्षा, उच्च शिक्षा और विभिन्न सेवाओं का लाभ लेने के दौरान आधार प्रमाणीकरण की प्रक्रिया अधिक सुचारू रहने में मदद मिलेगी।

एमएसएमई को मजबूत करने के लिए सुधारों का अगला चरण

संसद के दोनों सदन में हाल ही में पारित किया गया सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास संसोधन विधेयक, 2026 एक बहुत ही महत्वपूर्ण बदलाव है। एमएसएमई राष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। पिछले कुछ वर्षों में, एमएसएमई क्षेत्र ने विकास के नए आयाम स्थापित किए हैं। आज ‘उद्यम पंजीकरण पोर्टल’ पर 9 करोड़ से अधिक एमएसएमई पंजीकृत हैं, जो 40 करोड़ लोगों को रोजगार प्रदान करते हैं। एमएसएमई हमारी आर्थिकी में 31% तथा निर्यात में 50% योगदान देते हैं। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में एमएसएमई क्षेत्र की प्रमुख भागीदारी है। एमएसएमई भारत के विकास के सूत्रधार हैं। हाल के वर्षों में एमएसएमई क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है जो ‘उद्यम’ पर पंजीकृत उद्यमों की संख्या से ही स्पष्ट दिखती है, जो 1 अप्रैल 2023 को 1 करोड़ 65 लाख से बढ़कर 9 करोड़ से अधिक हो गए हैं।

वर्ष 2020 में, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के वर्गीकरण को, विनिर्माण और सेवा क्षेत्र के बीच के अंतर को समाप्त करके, अधिक व्यापक और समावेशी बनाया गया था। इसके तहत टर्नओवर और निवेश दोनों पर आधारित एक समग्र मानदंड विकसित किया गया।  इसके पश्चात वर्ष 2025 में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों की निवेश सीमा ढ़ाई गुना बढ़ाकर क्रमश: ढ़ाई करोड़, पच्चीस करोड़ और एक सौ पच्चीस करोड़ की गई है एवं टर्नओवर को दो गुना बढ़ाकर क्रमश: दस करोड़, सौ करोड़ और पांच सौ करोड़ किया गया, जिसने इन उद्यमों को पूंजी निवेश बढ़ाने, विकास और तकनीकी को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया। 

वित्त की उपलब्धता एमएसएमई क्षेत्र के विकास का सबसे महत्वपूर्ण घटक है। मंत्रालय एमएसएमई क्षेत्र के लिए बैंक ऋण की उपलब्धता बढ़ाने के लिए लगातार प्रयासरत रहा है और इसके उल्लेखनीय परिणाम दिख रहे हैं। एमएसएमई को प्रदान किया गया बकाया ऋण, वर्ष 2014-15 में 10 लाख करोड़ रुपये था, जो कि अब बढ़कर 38 लाख 35 हजार करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। क्रेडिट गारंटी ट्रस्ट फॉर माइक्रो एंड स्मॉल एंटरप्राइजेज’ (सीजीटीएमएसई), सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों को दिए जाने वाले ऋण पर गारंटी उपलब्ध कराता है। इसके ज़रिए वर्ष 2000 से 2022 के बीच, सूक्ष्म और लघु उद्यमों को दी गई क्रेडिट गारंटी 3 लाख 14 हजार करोड़ रुपये थी, जो पिछले चार वर्षों में अर्थात् 2022-23 से 2025-26 तक बढ़कर 10 लाख 43 हजार करोड़ रुपये से अधिक हो गई। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) के तहत, वित्त वर्ष 2014-15 से अब तक लगभग 8 लाख 34 हजार सूक्ष्म उद्यमों को 24 हजार 903 करोड़ रुपये की मार्जिन मनी सब्सिडी दी गई है, जिससे अनुमानित 75 लाख लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं। 

एमएसएमई मंत्रालय की सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए सार्वजनिक खरीद नीति 2012 के अंतर्गत केंद्रीय मंत्रालय/विभाग/केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उद्यमों (सीपीएसई) के लिए सूक्ष्म और लघु उद्यमों से सालाना 25% खरीद करना अनिवार्य है; इसमें महिला उद्यमियों के स्वामित्व वाली सूक्ष्म और लघु उद्यमों से 3% और एससी/एसटी उद्यमियों के स्वामित्व वाले सूक्ष्म और लघु उद्यमों से 4% खरीद शामिल है। विगत वर्षों में सूक्ष्म और लघु उद्यमों से खरीद में लगातार वृद्धि हुई है। वित्तीय-वर्ष 2020-21 में, सूक्ष्म और लघु उद्यमों से सार्वजनिक खरीद का मूल्य 40,717 करोड़ रुपये था जो कि वित्तीय-वर्ष 2025-26 में बढ़कर 1,15,801 करोड़ रुपये हो गया है, जो सीपीएसई द्वारा खरीद के लिए लक्षित 25 प्रतिशत की तुलना में 49 प्रतिशत से अधिक है। इसमें एससी/एसटी उद्यमियों के स्वामित्व वाले उद्यमों से 3,984 करोड़ रुपये की खरीद हुई और महिला उद्यमियों के स्वामित्व वाली उद्यमों से 9,059 करोड़ रुपये की खरीद हुई है। 

एमएसएमई को उनका भुगतान समय पर दिलाने हेतु मंत्रालय ने कई सार्थक प्रयास किए हैं, ट्रेड्स इनमें से एक है। यह भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) द्वारा विनियमित एक डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म है, जिसे भारत में एमएसएमई की लिक्विडिटी (नकदी) संबंधी चुनौतियों तथा कार्यशील पूंजी की आवश्यकताओं को पूरा करने के उद्देश्य से वर्ष 2017 में शुरु किया गया था। ट्रेड्स प्लेटफ़ॉर्म ने एमएसएमई क्षेत्र को मार्च 2026 तक 8,71,000 करोड़ रुपये की इनवॉइस डिसकाउंटिंग के माध्यम से समय पर भुगतान दिलवाया है। ट्रेड्स प्लेटफ़ॉर्म से जुड़े एमएसएमई की संख्या अप्रैल 2022 में 34,430 थी, जो मार्च 2026 तक बढ़कर 2,55,000 से अधिक हो गई है। वहीं, एमएसएमई की इनवॉइस डिसकाउंटिंग की राशि वर्ष 2021-22 में 40,000 करोड़ रुपये से बढ़कर, वित्त वर्ष 2025-26 में 3,47,000 करोड़ रुपये से अधिक हो गई है। ट्रेड्स पर इनवॉइस डिसकाउंटिंग का बढ़ता चलन, भारत सरकार के एमएसएमई के समयबद्ध भुगतान के प्रति संकल्प को दर्शाता है। 

इसी दिशा में विलंबित भुगतान और उससे जुड़े विवादों के निपटारे हेतु पूरे देश में 161 सूक्ष्म और लघु उद्यम सुविधा परिषद (एमएसईएफसी) स्थापित किए गए हैं। संशोधन में राज्यों को एमएसईएफसी की संरचना तय करने के लिए सक्षम बनाने के लिये प्रावधान लाए गए हैं जिससे आवश्यकतानुसार एमएसईएफसी का गठन किया जा सके। संबंधित पक्षों में समझौते के साथ विवाद सामाधान के पर्याप्त उपाय किए गए हैं। यह संशोधन विधेयक ऑनलाइन विवाद समाधान (ओडीआर) को सक्षम एवं सशक्त बनाता है, ताकि संबंधित पक्षों द्वारा अपने विवादों का समयबद्ध और किफायती तरीके से हल सुनिश्चित किया जा सके।

एमएसएमई मंत्रालय महिला उद्यमियों के विकास को बढ़ावा देने के लिए पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है। मंत्रालय की अनेक योजनाओं में महिलाओं के लिए विशेष प्रावधान है। आज उद्यम पोर्टल पर 39% से अधिक एमएसएमई महिलाओं के स्वामित्व में हैं, यानि 3.38 करोड़ के लगभग  एमएसएमई महिला स्वामित्व में हैं और जिनकी संख्या में निरंतर वृद्धि हो रही है।  क्रेडिट गारंटी योजना के तहत, महिलाओं के लिए 90% तक गारंटी कवरेज है और सालाना गारंटी फीस में 10% तक की छूट प्रदान की जाती है। खरीद और विपणन सहायता योजना के तहत ट्रेड फेयर में महिला उद्यमियों की भागीदारी पर 100% सब्सिडी दी जाती है, जबकि दूसरे उद्यमियों के लिए यह 80% है।  पीएमईजीपी में ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को 35 प्रतिशत व शहरी क्षेत्र की महिलाओं को 25 प्रतिशत की सब्सिडी देने का प्रावधान है। अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति का विकास, मंत्रालय की प्राथमिकता है। आज उद्यम पर 1.24 करोड़  से अधिक एमएसएमई, अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति  के उद्यमी के स्वामित्व में हैं। राष्ट्रीय अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति हब योजना, एमएसएमई मंत्रालय की एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना है, जिसे 2016 में माननीय प्रधानमंत्री ने शुरू किया था। इस योजना का उद्देश्य अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति  के उद्यमियों की क्षमता बढ़ाना और उनके बीच “उद्यमिता संस्कृति” को बढ़ावा देना है। 

मंत्रालय की इन निरंतर पहलों और प्रयासों को और सशक्त बनाने के लिए एमएसएमई विकास संशोधन विधेयक, 2026 पास किया गया है। इसका उद्देश्य है—एमएसएमई क्षेत्र की मौजूदा चुनौतियों का समाधान करना, प्रशासनिक ढांचे में सुधार करना, व्यापार करने में सुगमता (ईज ऑफ डूइंग बिजनेस) और नियमों का अनुपालन करने को बढ़ावा देना। इसके मुख्य घटक हैं:

  1. सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमो के निःशुल्क एवं स्वैच्छिक रजिस्ट्रेशन के लिए एक राष्ट्रीय डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म को अधिसूचित करने की व्यवस्था करना। टर्नओवर और निवेश आधारित एमएसएमई वर्गीकरण को वैधानिक रूप देना।
  2. एमएसएमई की लिक्विडिटी (नकदी) से जुड़ी समस्याओं को हल करना। सभी केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (सीपीएसई) के लिए यह अनिवार्य किया गया है कि वे एमएसएमई से खरीद के लिए इनवॉइस का निपटान ट्रेड्स के ज़रिए करें। साथ ही, राज्य सरकारों को भी अपने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के लिए इसी प्रकार के प्रावधान अपनाने हेतु सशक्त किया गया है;
  3. राज्य सरकारों को सूक्ष्म और लघु उद्यम सुविधा परिषद (एमएसईएफसी) की संरचना को युक्तिसंगत बनाकर और अधिक एमएसईएफसी की स्थापना करने की सुविधा प्रदान करना;
  4. सूक्ष्म और लघु उद्यमो के पेमेंट में देरी से जुड़े विवादों के तेज़ी से निपटारे के लिए समय-सीमा तय करना;
  5. मध्यस्थता से हुए समझौते या आरबिट्रल अवॉर्ड की वसूली ‘भूमि राजस्व के बकाया’  के रूप में वसूलने की व्यवस्था करना;
  6. अगर डिक्री, अवॉर्ड या आदेश को रद्द करने का आवेदन छह महीने से अधिक समय से लंबित है, तो अदालतों को यह आदेश देने का अधिकार देना कि सूक्ष्म और लघु उद्यम सप्लायर्स को अवॉर्ड की गई राशि का कम से कम पचास प्रतिशत भुगतान किया जाए;
  7. कुछ प्रावधानों के उल्लंघन को अपराध की श्रेणी से हटाना (डिक्रिमिनलाइज़ करना) और दोषसिद्धि-आधारित जुर्माने की जगह अलग-अलग स्तर के दंड लागू करना, जिसमें पहली बार उल्लंघन पर चेतावनी देना भी शामिल है।

यह संशोधन हितधारकों के साथ व्यापक विचार-विमर्श और संबंधित मुद्दों की सावधानीपूर्वक जांच के बाद किया गया है। समावेशी, टिकाऊ और रोज़गार-प्रधान आर्थिक विकास हासिल करने के लिए एक मज़बूत एमएसएमई सेक्टर ज़रूरी है। ये संशोधन ‘विकसित भारत 2047’ के विज़न के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता के अनुरूप हैं। इस से उद्यमों के औपचारिकीकरण को बढ़ावा मिलेगा, उनके विस्तार का मार्ग प्रशस्त होगा और वे विकास के ‘चैंपियन’ बन सकेंगे।

(लेखिका केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम तथा श्रम एवं रोजगार मंत्रालय में राज्य मंत्री हैं।)

स्टीलफ्रेम का पुनर्निर्माण : शासन करने से लेकर सेवातक, समयबद्ध सुधारों का सिलसिला

आर्टिकल /

जब अंग्रेज 1947 में भारत छोड़कर वापस ब्रिटेन जाने लगे, तो वे एक मुहावरा अपने पीछे छोड़ गए : “स्टील फ्रेम”। इसे वे भारतीय सिविल सेवा कहते थे, वह प्रशासनिक ढांचा जिसके जरिए ब्रिटिश राज अपनी हुकूमत चलाता था। स्टील आसानी से नहीं झुकता, और यही वास्‍तविक बात थी। यह ढांचा एक साम्राज्य को स्थिर बनाए रखने के लिए बनाया गया था, न कि उन लोगों की बात सुनने के लिए जिन पर उसने शासन किया था। आजादी के बाद दशकों तक हमें वो फ्रेम विरासत में मिला। हमने उसे नया नाम दिया, उसे खादी का आवरण पहनाया और खुद को बताया कि अब यह हमारा अपना है। लेकिन नियंत्रण के लिए बनाया गया फ्रेम स्‍वभाविक रूप से सेवा के लिए बनाया गया ढांचा नहीं है। और हमारे गणतंत्र के पहले कई दशकों तक, भारत अपने उपनिवेशक देश के ढांचे के अंदर ही बना रहा। एक ही फॉर्म को तीन प्रतियों में दाखिल करता रहा, उन्हीं ऊंची कुर्सियों के सामने कतारों में खड़ा होता रहा और अपने भाग्य के फैसले के लिए किसी “साहब” की प्रतीक्षा करता रहा।

मैंने अपने कामकाजी जीवन का अधिकांश समय इस ढांचे के अंदर बिताया है। पहले एक नागरिक के रूप में और एक प्रोफेशनल के रूप में, फिर भारत सरकार में कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन का प्रभार सौंपे गए मंत्री के रूप में, जिस विभाग का काम ही स्टील फ्रेम की जांच करना और यह पूछना है कि क्या फिर से तैयार करने की आवश्यकता है। इसलिए जब मुझसे पूछा जाता है कि क्या भारत ने अपनी नौकरशाही में सुधार किया है, तो मेरे उत्‍तर में न तो किसी संस्थान की रक्षा करने वाले व्यक्ति का ढाल बनना है, न ही किसी ऐसे व्यक्ति की निंदा है जिसने इसे छोड़ दिया है। यह एक ऐसे व्यक्ति का उत्तर है, जिसने एक ऐसी प्रणाली के बारह वर्षों के शांत लेकिन दृढ़ पुनर्निर्माण को अंदर से देखा है, जिसे स्वतंत्रता के बाद से सार्थक रूप से नहीं छुआ गया था। अगर श्री नरेन्द्र मोदी, जो अपनी पथ-प्रदर्शक सोच के लिए जाने जाते हैं, भारत के 15वें प्रधानमंत्री के रूप में पदभार नहीं संभालते तो शायद अब भी अछूता रह गया होता।

विचार करें कि हमने कहां से शुरुआत की। 2014 में, केंद्र सरकार से एक नागरिक की शिकायत को अगर हल कर लिया गया, तो इसे करने में औसतन 157 दिन लगे। अगर शिकायत दर्ज कर भी ली गई, तो इसका मतलब देश भर में फैले मुश्किल से दस हजार शिकायत अधिकारियों के साथ एक प्रणाली की खोज करना था, जिनमें से अधिकांश तक पहुंच नहीं थी और वे सभी किसी भी वास्तविक समय सीमा के प्रति कोई जवाबदेह नहीं थे। नौकरी के लिए सरकारी कार्यालय के बाहर कतार में खड़ा एक युवक, अपने पति की पेंशन फ़ाइल का पता लगा रही एक विधवा, यह जानने की कोशिश में लगा एक किसान कि उसके फसल बीमा दावे की फाइल किसी मंत्रालय की अलमारी में से क्यों गायब हो गई, इन सबके सामने एक ही स्थिति थी। उनका सामना नागरिकों को प्रतीक्षा कराने के लिए डिज़ाइन की गई एक सिस्‍टम से और ऐसे अधिकारियों से था, जिनका किसी भी परिणाम के प्रति कोई उत्‍तरदायित्‍व नहीं था। यह केवल अक्षमता नहीं थी। यह उस प्रशासन का अंतिम जीवित अवशेष था जिसका निर्माण समाधान उपलब्‍ध कराने के बजाय डराने के लिए किया गया था।

आज के साथ इसकी तुलना राय का विषय नहीं है; यह संख्याओं में वर्णित है। शिकायत निपटान का समय 157 दिन घटकर 15 दिन रह गया है। आज का हमारा सिस्‍टम नौ गुना अधिक सालाना लगभग 3 लाख से बढ़कर 27 लाख शिकायतों का निवारण करता है। इन शिकायतों का निवारण करने वाले अधिकारियों की संख्‍या दस गुना से अधिक बढ़कर एक लाख तक पहुंच गई है। इस वर्ष मार्च में ही, केंद्रीय सचिवालय ने लगातार पैंतालीसवें महीने में एक लाख शिकायतों के निवारण के आंकड़े को पार कर लिया है। हमने केंद्रीकृत लोक शिकायत निवारण और निगरानी प्रणाली (सीपीजीआरएएमएस) का एक ऐसे प्‍लेटफॉर्म में निर्माण किया है जो अब 22 भाषाओं में बोलता है, कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग करके एक नागरिक की शिकायत को सही डेस्क पर ले जाता है। यहां तक कि एक दूरस्‍थ गांव में एक किसान की आवाज में, उसकी अपनी भाषा में, एक चैटबॉट के माध्यम से शिकायत दर्ज करने में सक्षम बनाता है। काफी जानबूझकर, हमने इसका नाम समाधान दीदी अर्थात् ‘समाधान करने वाली बहन’ रखा था। जिस ग्रामीण को अपने काम के लिए कभी जिला कार्यालय की यात्रा करने की आवश्यकता होती थी और उम्‍मीद करनी होती थी कि उसका काम सरलता से हो जाए, वह अब अपनी पंचायत में एक सामान्य सेवा केंद्र से यह काम कर सकता है। हर महीने की बीस तारीख को सीएससी-सीपीजीआरएएमएस दिवस के रूप में निर्धारित किया जाता है ताकि यह वादा अंतिम मील तक पहुंच सके।

लेकिन वह गहरा परिवर्तन, जिसे मैं स्टील फ्रेम का सच्चा सुधार मानता हूं, वह डिजिटल प्लंबिंग नहीं है। यह इस दर्शन में बदलाव है कि हम अपने प्रशासनिक अधिकारियों का निर्माण कैसे करते हैं। 70 वर्षों तक, सरकार “नियम-आधारित” संस्कृति पर चलती रही: एक अधिकारी को इस बात से आंका जाता था कि क्या उसने सही प्रक्रिया का पालन किया था, न कि इस बात से कि उसने नागरिक की समस्या को हल किया है या नहीं। 2020 में, हमने मिशन कर्मयोगी लॉन्च किया, जो प्रशासनिक सेवा क्षमता निर्माण के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम है। हमने इस कार्यक्रम को इसी “भूमिका-आधारित” संस्कृति में परिवर्तित करने के लिए लॉन्‍च किया था,  जहां एक अधिकारी को इस आधार पर प्रशिक्षित और मूल्यांकन किया जाता है कि उसकी नौकरी वास्तव में उससे क्या मांग करती है, न कि औपनिवेशिक युग की नियम पुस्तिका में क्‍या वर्णन किया गया है। आज एक ग्राम-स्तरीय क्लर्क से लेकर भारत सरकार के सचिव तक 1.65 करोड़ से अधिक सरकारी कर्मचारी, आईजीओटी कर्मयोगी नामक एक सामान्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सीखते हैं, जो अब हिंदी और सत्रह अन्य भारतीय भाषाओं में पांच हजार से अधिक पाठ्यक्रम संचालित करता है। पहली बार, हमने औपचारिक रूप से इस सीखने को एक अधिकारी की पदोन्‍नति के लिए आवश्‍यक वार्षिक मूल्‍यांकन अर्थात्  निष्‍पादन मूल्यांकन रिपोर्ट से जोड़ा है। अब निरंतर सीखना एक गुण नहीं रह गया, जिसका कोई अच्‍छा अधिकारी अभ्यास करता है, बल्कि इसे सीधे उसके करियर से जुड़ा हुआ एक मापतंत्र (मेट्रिक) बना दिया गया है। यह निष्‍पादन जवाबदेही है, एक नारे के रूप में नहीं बल्कि एक तंत्र के रूप में।

हमने अधिकारियों की भर्ती और प्रशिक्षण के तरीके से औपनिवेशिक अवशेषों को हटाने के लिए चुपचाप लेकिन लगातार काम किया है। 2016 के बाद से, निचले और मध्यम स्तर की सरकारी नौकरियों, ग्रुप सी और अराजपत्रित ग्रुप बी पदों के लिए साक्षात्कार, जिन पदों पर पारंपरिक रूप से एक साक्षात्कार का मतलब पक्षपात होता था और अक्सर रिश्वत दी जाती थी, को केंद्र सरकार के कार्यालयों में समाप्त कर दिया गया है। 24 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों ने भी इसका अनुसरण किया है। हमने पुरानी आवश्यकता को खत्‍म कर दिया कि एक उम्मीदवार को एक सरकारी फॉर्म भरने के लिए भरोसा करने से पहले एक राजपत्रित अधिकारी द्वारा प्रतिहस्ताक्षरित और पुष्टि की जाए। यह एक औपनिवेशिक युग की प्रथा थी जो हर नागरिक को जालसाजी का दोषी मानती थी जब तक कि अन्यथा साबित न हो जाए। हम नौकरशाही औपचारिकता के लिए महीनों इंतजार करवाने के बजाय सफल उम्मीदवारों को पुलिस सत्यापन होने तक अस्थायी रूप से अपनी नई नौकरियों में शामिल होने देते हैं। हमने 1600 से अधिक अप्रचलित कानूनों को निरस्त कर दिया है, जिनका उद्देश्य केवल हमें यह याद दिलाना था कि हम पर पहले किसने शासन किया था। आज जब मैं युवा अधिकारियों से मिलता हूं, तो मैं उन्हें स्पष्ट रूप से बताता हूं कि मैंने इस साल की शुरुआत में उनसे क्‍या कहा था: कि अभी भी दिमाग में सबसे बड़ा सुधार करने की आवश्‍यकता यह है कि अपनी “औपनिवेशिक मानसिकता” को दूर किया जाए। जब प्रधानमंत्री ने हमारे मंत्रालय को नॉर्थ ब्लॉक, जिसका हर पत्‍थर किसी साम्राज्‍य पर शासन के लिए बिछाया गया था, से बाहर कर्तव्‍य भवन में स्‍थानांतरित किया, तो यह केवल पते में बदलाव नहीं था। यह एक वक्‍तव्‍य था कि भारत का कामकाजी शब्‍द कर्तव्य होना चाहिए, न कि नियंत्रण। 

इस सब के साथ-साथ एक शांत सुधार चल रहा है, जिसका उद्देश्य कार्यालय के बाहर के नागरिक के लिए नहीं बल्कि उन महिलाओं पर है जो कार्यालय को भीतर से चलाती हैं। स्वतंत्र भारत के इतिहास के अधिकांश समय में, सरकारी सेवारत महिलाओं को जन्म के समय अपने एक बच्चे को खो देने पर शोक मनाने के लिए कोई औपचारिक छुट्टी नहीं थी; आज वह साठ दिनों के विशेष मातृत्व अवकाश की हकदार है। यह एक ऐसी पात्रता है, जिसे हमने 2022 में प्रदान किया था। इसे मैं केवल करुणा की एक अतिदेय भावना कह सकता हूं, जिसे हमने तब से उन सभी माताओं को उपलब्‍ध कराया है जो सरोगेसी के माध्यम से भी अपने परिवार की देखरेख करती हैं। हम चाइल्ड केयर लीव की सुविधा का लाभ महिलाओं की हर पोस्टिंग तक उपलब्‍ध कराते हैं। यहां तक कि सरकार उसे विदेश यात्रा के लिए भी इसका उपयोग करने की अनुमति देती है। एक सिंगल मदर को एक कैलेंडर वर्ष में इसके छह अवसर देते हैं, जबकि दूसरों को केवल तीन की ही अनुमति दी जाती है। जो महिला जो अपने कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की रिपोर्ट करने का साहस करती है, वह अब नब्बे दिनों की छुट्टी की हकदार है, जबकि उसकी शिकायत की जांच अपना काम करती है, यह छुट्टी उसके अपने खाते से नहीं काटी जाती है। दिव्‍यांग महिला अधिकारियों को नवजात शिशु की परवरिश में मदद करने के लिए मासिक भत्ता मिलता है। सरकारी कर्मचारी के दिव्यांग बच्चे के लिए शिक्षा भत्ता दोगुना कर दिया गया है। इनमें से कुछ भी जीडीपी चार्ट में दिखाई नहीं देगा, लेकिन यह इस बात में दिखाई देता है कि क्या एक महिला अब सरकारी सेवा में बने रहने का विकल्प चुनती है जिससे वे एक लंबे समय तक चुपचाप बाहर रही थी। यह भी कि सिविल सेवा ईमानदारी से कह सकती है कि वह जेंडर समानता का वास्‍तव में अनुपालन करती है, न कि केवल साल में एक बार बैनर पर प्रदशित करती है।

बेशक, इनमें से कोई भी मायने नहीं रखता है, जब तक कि एक आम नागरिक के जीवन में कुछ न बदले, और ऐसा न हो। पिछले कुछ वर्षों में रोजगार मेलों के माध्यम से 12 लाख से अधिक नियुक्ति पत्र दिए गए हैं, जो संपर्क और प्रभाव के पुरान‍े रिवाज के बिना वितरित किए गए हैं। मसूरी में एक कॉमन फाउंडेशन कोर्स है, जहां एक आईएएस अधिकारी और एक आईपीएस अधिकारी अपने अलग-अलग संवादहीनता को बनाए रखने के बजाय कंधे से कंधा मिलाकर प्रशिक्षण लेते हैं, ताकि जब वे वर्षों बाद किसी नागरिक से मिलें, तो वे तीन प्रतिस्पर्धी विभागों के बजाय एक सरकार के रूप में कार्य करें। यह सुविधा अब एक पेंशनभोगी के पास है, जो अब बैंक की कतार में खड़े होने के बजाय अपने घर से डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र बना सकती है। एक युवा आकांक्षी छात्र के पास जो हर परीक्षा के लिए एक ही फॉर्म भरने के बजाय यूपीएससी पोर्टल पर एक बार पंजीकरण करता है। सरकारी सेवा में ओबीसी प्रतिनिधित्व 2014 से 19 प्रतिशत से बढ़कर 27 प्रतिशत हो गया है। अंग्रेजों ने हमें जो स्टील फ्रेम छोड़ा था, वह कभी भी रातोंरात नष्ट नहीं होने वाला था, और न ही होना चाहिए; संस्थाएं स्मृति को संजोती हैं और स्मृति के अपने उपयोग होते हैं। इन 12 वर्षों में हमने इसका पुनर्निर्माण करने की कोशिश की है, चुपचाप, अलग-अलग सेवाओं के माध्‍यम से, अलग-अलग नियमों के माध्‍यम से, ताकि जिस ढांचे ने कभी एक साम्राज्य को संभाला था, वही अब उस व्यवस्था को सहारा दे सके, जिसका वादा हमारे संविधान ने वास्तव में अपने लोगों से किया था: ऐसी सरकार जो शासन करने के बजाय सेवा करे और केवल प्रशासन करने के बजाय जनता के प्रति उत्‍तरदायी हो।

(लेखक केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री हैं)

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पीके/केसी/एसकेजे/जीआरएस 

Punjab: 75 विधानसभा सीटों पर बदला सियासी समीकरण, 20 लाख से ज्यादा वोटरों के कटे नाम

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

पंजाब में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले सामने आई स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की ड्राफ्ट सूची के काफी रोचक आंकड़े सामने आए हैं. पंजाब में SIR की ड्राफ्ट सूची जारी होते ही राजनीतिक तौर पर चुनावी समीकरण बदल सकते हैं. SIR में कटे वोटों के आंकड़ों का विश्लेषण करें तो इसका ज्यादा असर राज्य की 117 में से 75 विधानसभा सीटों के नतीजों पर पड़ सकता है.

SIR के दौरान जिन 6 बड़े जिलों में सबसे ज्यादा वोट काटे गए हैं, वहां कुल 52 विधानसभा सीटें हैं. जिनमें सबसे ज्यादा 39 AAP, कांग्रेस 11 व अकाली दल के पास 2 सीटें हैं. बीजेपी को यहां 2022 विधानसभा चुनाव में कोई सीट नहीं मिली थी.

चुनाव में हार-जीत का अंतर बेहद कम

इन 52 सीटों पर औसतन हर सीट पर लगभग 20000 से 35000 वोटों का फेरबदल हुआ है. पंजाब में पिछले चुनावों के दौरान कई सीटों पर हार-जीत का अंतर 2 हजार से 8 हजार वोटों के बीच रहा था. ऐसे में इतनी बड़ी संख्या में वोटों की छंटनी से आगामी चुनाव में हार-जीत का अंतर बेहद कम और मुकाबला काफी दिलचस्प हो जाएगा.

इनमें 11 सीटें ऐसी हैं, जहां हार-जीत का अंतर 10 हजार से कम रहा था. वहीं पंजाब में 35 विधानसभा सीटें ऐसी हैं, जहां पिछले चुनाव में हार-जीत का अंतर 10 हजार वोट से कम रहा था. SIR में कटे वोटों के आंकड़ों के मुताबिक, राज्य की हर विधानसभा सीट पर औसत निकाला जाए तो औसतन हर विधानसभा सीट पर करीब 17,500 वोट काटे गए हैं.

दूसरी जगह शिफ्ट हो गए 10 लाख वोट

ये संख्या कई सीटों पर हार-जीत के अंतर से ज्यादा है. ऐसे में इन वोटों के सूची से बाहर होने से विधानसभा सीटों का चुनावी समीकरण बदल सकता है. SIR में काटे गए 20.66 लाख वोटों में करीब 10 लाख वोट ऐसे हैं, जो दूसरी जगह शिफ्ट हो गए हैं. इनमें बड़ी संख्या उन वोटर्स की है, जो दूसरे राज्यों से पंजाब आए थे. उनके राज्यों में SIR होने के बाद उन्होंने वहां अपना वोट रजिस्टर्ड करा लिया.

शहरी सीटों का बदल जाएगा चुनावी गणित

लुधियाना, जालंधर और मोहाली जैसे औद्योगिक और व्यावसायिक केंद्रों में बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर और किराए पर रहने वाले लोग बसते हैं. पते में बदलाव, कम टाइम के लिए रहना और जरूरी कागजात ना होने के कारण इनके नाम मतदाता सूची से बड़ी संख्या में हटे हैं. इससे उन शहरी सीटों का पूरा चुनावी गणित बदल जाएगा, जहां ये प्रवासी वर्ग निर्णायक भूमिका निभाता रहा है.

बड़ी संख्या में विदेश पलायन कर चुके युवा

अमृतसर, जालंधर, पटियाला और गुरदासपुर जैसे जिलों से बड़ी संख्या में युवा विदेश पलायन कर चुके हैं, लेकिन उनके नाम कागजों में दर्ज थे. अनुपस्थित या स्थानांतरित श्रेणी के तहत ऐसे फर्जी और डुप्लीकेट वोटों के हटने से अब वास्तविक वोटरों की संख्या ही उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला करेगी. जिन राजनीतिक दलों का वोट बैंक असंगठित क्षेत्र के मजदूरों, अस्थायी प्रवासी मजदूरों, निवासियों या युवाओं पर टिका था, उन्हें अब नए सिरे से अपनी रणनीति बनानी होगी.

पिछली जीत का सारा समीकरण बिगड़ना तय

विधानसभा चुनाव 2022 में पूरे राज्य में 35 सीटें ऐसी थी, जहां पर हार जीत का अंतर 500 से लेकर 9,900 वोटों के बीच था. SIR के तहत इन सीटों पर औसतन 15 हजार से 30 हजार तक वोट कटे या पेंडिंग हैं. कटने वाले वोटों की संख्या जीत के अंतर से दोगुनी या तीन गुनी हो जाती है, तो पिछली जीत का सारा समीकरण बिगड़ना तय है. इनमें से ज्यादातर सीटों पर आम आदमी पार्टी ने जीत हासिल की थी.

इन 35 में से कई सीटें शहरी या सेमी-अर्बन इलाकों में आती हैं, जहां दूसरे राज्यों से आए मजदूर वर्ग के लोग हैं. उनमें से ज्यादातर लोगों के वोट अपने गृह राज्य में बने हैं. इसलिए उन्होंने यहां अपने वोट कटवा दिए. इसके अलावा उनके दस्तावेज पूरे न होने या पते में बदलाव के कारण इस वर्ग के सबसे ज्यादा वोट कटे हैं. जो दल या प्रत्याशी इस अस्थायी वर्ग पर निर्भर थे, उनके सभी समीकरण बिगड़ सकतें हैं.

कुल 20.66 लाख मतदाताओं के नाम कटे

चुनाव आयोग द्वारा हाल ही में जारी की गई पंजाब की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन SIR की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट के अनुसार, राज्य में कुल 20.66 लाख मतदाताओं के नाम काटे गए हैं (जो कुल वोटर्स का लगभग 9.63% है).

  • इस छंटनी के बाद पंजाब में मतदाताओं की कुल संख्या 2.14 करोड़ से घटकर 1.93 करोड़ रह गई है.
  • स्थायी रूप से शिफ्ट हुए: 9,44,131 मतदाता (4.40%) दूसरे स्थानों या राज्यों में चले गए.
  • मृतक: 5,74,568 मतदाता (2.68%) मृत पाए गए.
  • लापता/पता नहीं चला: 4,12,715 मतदाता (1.92%) घर पर नहीं मिले.
  • फर्जी/एक से अधिक जगह नाम: 1,19,145 मतदाता (0.56%) डबल एंट्री वाले थे.
  • लुधियाना, जालंधर और मोहाली (साहिबजादा अजीत सिंह नगर) में प्रवासी मजदूरों और किराएदारों की संख्या अधिक होने के कारण, दस्तावेजों की कमी या पते बदलने से सबसे ज्यादा वोट कटे हैं.
  • अमृतसर, जालंधर, पटियाला और गुरदासपुर – इन जिलों से भारी संख्या में युवाओं का विदेश में पलायन हो चुका है, जिससे अनुपस्थित पाए जाने पर हजारों नाम सूची से हटाए गए हैं.
  • अकेले बठिंडा जिले में कुल 10,53,091 वोटर्स में से 65,072 मतदाताओं को ASDD कैटेगरी में डालकर सूची से बाहर किया गया है.
  • बड़ी बात ये है कि जिन सीटों पर ज्यादा वोट कटे हैं वो शहरी सीटें हैं और यहां पर प्रवासी वोट बैंक बड़ी संख्या में हैं और उनके ही ज्यादातर वोट कटने की बात सामने आ रही है.
उत्तराखंड कांग्रेस नेता अमित तलवार का सूरज सिंह बागड़ी ने किया जोरदार स्वागत, टीम ने जताया स्नेह

लुधियाना / सत्ता संदेश

उत्तराखंड के वरिष्ठ कांग्रेस नेता अमित तलवार के पंजाब आगमन पर वरिष्ठ कांग्रेस नेता सूरज सिंह बागड़ी एवं उनकी टीम ने जोरदार स्वागत किया। इस अवसर पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं एवं समर्थकों ने आपसी भाईचारे, स्नेह और राजनीतिक सौहार्द की भावना के साथ तलवार जी का अभिनंदन किया।

स्वागत समारोह के दौरान डॉ. सधीश सैनी, अवनीश चौहान, विक्की बोहत, राहुल चौहान, अजय तोमर एवं सार्थक राज विशेष रूप से उपस्थित रहे। सभी ने अमित तलवार का फुलदस्ता एवं गर्मजोशी से स्वागत करते हुए उनके साथ अपने आत्मीय संबंधों को और मजबूत करने की भावना व्यक्त की।

इस अवसर पर सूरज सिंह बागड़ी ने कहा कि कांग्रेस परिवार की सबसे बड़ी ताकत उसके कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच आपसी प्रेम, सम्मान, विश्वास एवं सहयोग की भावना है। पंजाब और उत्तराखंड के कांग्रेस नेताओं के बीच इस प्रकार के आत्मीय मिलन से न केवल आपसी संबंध मजबूत होते हैं, बल्कि भविष्य में संगठनात्मक स्तर पर भी सकारात्मक सहयोग और बेहतर समन्वय की नई संभावनाएं बनती हैं।

अमित तलवार जी ने पंजाब में मिले स्नेह एवं सम्मान के लिए सूरज सिंह बागड़ी तथा उपस्थित सभी साथियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक जीवन में विचारों के साथ-साथ आपसी संबंध, विश्वास और सद्भाव भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। ऐसे आत्मीय मिलन कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा का संचार करते हैं और संगठन को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

इस अवसर पर उपस्थित सभी नेताओं ने पंजाब और उत्तराखंड के बीच कांग्रेस कार्यकर्ताओं एवं नेताओं के आपसी संपर्क को और मजबूत करने, एक-दूसरे के साथ सहयोग बढ़ाने तथा भविष्य में भी ऐसे आत्मीय संवाद एवं मिलन जारी रखने पर जोर दिया।

पूरे कार्यक्रम का वातावरण स्नेह, सम्मान, भाईचारे और सकारात्मक ऊर्जा से ओत-प्रोत रहा। इस आत्मीय मुलाकात ने यह संदेश दिया कि मजबूत राजनीतिक संबंध केवल संगठनात्मक सहयोग तक सीमित नहीं होते, बल्कि उनमें विश्वास, अपनापन और एक-दूसरे के प्रति सम्मान की भावना भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। आने वाले समय में यह आपसी जुड़ाव कांग्रेस संगठन के लिए नए संबंधों, बेहतर समन्वय और सहयोग की दिशा में महत्वपूर्ण आधार बन सकता है।

शादी की खुशियां मातम में बदलीं, 15 साल के भाई की दर्दनाक मौत

लुधियाना / सत्ता संदेश

Report: जसबीर सिंह अलबेला

लुधियाना: थाना कूमकलां क्षेत्र के गांव भमा कलां में एक दर्दनाक सड़क हादसे ने शादी की खुशियों को मातम में बदल दिया। बहन की शादी के निमंत्रण कार्ड बांटने जा रहे 15 वर्षीय किशोर युवराज सिंह की सड़क हादसे में मौत हो गई, जबकि उसका चचेरा भाई गुरमनप्रीत सिंह गंभीर रूप से घायल हो गया।

जानकारी के अनुसार, सुरजीत सिंह का इकलौता बेटा युवराज सिंह अपने चचेरे भाई गुरमनप्रीत सिंह के साथ मोटरसाइकिल पर अपनी बड़ी बहन की शादी के कार्ड बांटने के लिए निकला था। जब दोनों गांव गहिलेवाल के पास पुल के नजदीक पहुंचे, तो उन्होंने एक ट्रैक्टर-ट्रॉली को ओवरटेक करने का प्रयास किया।

इसी दौरान अज्ञात ट्रैक्टर-ट्रॉली चालक ने मोटरसाइकिल को टक्कर मार दी। टक्कर लगने के बाद दोनों युवक सड़क पर गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उपचार के दौरान 15 वर्षीय युवराज सिंह ने दम तोड़ दिया। वहीं, गुरमनप्रीत सिंह का अस्पताल में इलाज जारी है।

शादी की खुशियां मातम में बदलीं

बताया जा रहा है कि युवराज की बड़ी बहन की शादी की तैयारियां घर में जोर-शोर से चल रही थीं। परिवार रिश्तेदारों और परिचितों को शादी के निमंत्रण पत्र बांट रहा था। लेकिन जिस घर में कुछ ही दिनों बाद बहन की डोली विदा होनी थी, वहां अब बेटे की अर्थी उठाने की तैयारी हो रही है।

युवराज अपने परिवार में दो बहनों का इकलौता भाई था। बेटे की मौत की खबर मिलते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। शादी की खुशियां देखते ही देखते मातम में बदल गईं और पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई।

अज्ञात ट्रैक्टर-ट्रॉली चालक के खिलाफ मामला दर्ज

हादसे के बाद पुलिस ने परिजनों के बयान के आधार पर अज्ञात ट्रैक्टर-ट्रॉली चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और हादसे के जिम्मेदार चालक की पहचान करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

पोस्टमार्टम के बाद युवराज सिंह का शव परिजनों को सौंप दिया गया। उसका अंतिम संस्कार सोमवार को किया जाएगा।

सोशल जस्टिस मिनिस्ट्री पंजाब समेत देश भर के कॉलेजों के साथ MoU करेगी साइन, युवाओं को मिलेगा फायदा

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

भारत सरकार के सोशल जस्टिस एंड एम्पावरमेंट मिनिस्ट्री ने दिल्ली में मिनिस्ट्री में जनरल काउंसिल की मीटिंग की। सुखविंदर सिंह बिंद्रा मेंबर (NISD) और स्पेशल मेंबर/इनवाइट (NCCDR), सोशल जस्टिस एंड एम्पावरमेंट मिनिस्ट्री, (भारत सरकार) और पंजाब यूथ डेवलपमेंट बोर्ड (पंजाब सरकार) के पूर्व स्टेट चेयरपर्सन ने मीटिंग की अध्यक्षता की। इसके साथ ही, इस मीटिंग में सुधांश पंत, IAS, सेक्रेटरी सोशल जस्टिस एंड एम्पावरमेंट मिनिस्ट्री, देबोलिना ठाकुर IAS, मोनाली पी. धकाते IAS; गौरव राजवंत IAS और मिनिस्ट्री के सीनियर अधिकारी मौजूद हैं।

इस मौके पर हरियाणा के चीफ स्पोक्सपर्सन अजीत तेवतिया ने कहा कि मिनिस्ट्री समाज के कमजोर, पिछड़े और वंचित तबकों की सोशल, इकोनॉमिक और एजुकेशनल तरक्की के लिए काम करती है। इसके अलावा, यह ड्रग डी-एडिक्शन और ड्रग प्रिवेंशन, रिहैबिलिटेशन सेंटर और वॉलंटरी ऑर्गनाइजेशन के लिए अवेयरनेस कैंपेन को भी सपोर्ट करती है। मिनिस्ट्री सोशल जस्टिस से जुड़े कानूनों और पॉलिसी को भी लागू करती है और उनके असरदार तरीके से लागू करने पर नज़र रखती है।

इसके साथ ही, इस मौके पर सुखविंदर सिंह बिंद्रा ने कहा कि भारत सरकार का सोशल जस्टिस एंड एम्पावरमेंट मिनिस्ट्री, पंजाब समेत देश भर के कॉलेजों के साथ मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) साइन करेगा। इस पहल का मकसद युवाओं, खासकर समाज के कमजोर, पिछड़े और वंचित तबकों के स्टूडेंट्स को एजुकेशन, स्किल डेवलपमेंट और नौकरी के ज़्यादा मौके देना है। उन्होंने यह भी बताया कि इससे पहले उनकी मिनिस्ट्री ने देश भगत यूनिवर्सिटी (DBU) और पंजाबी यूनिवर्सिटी, पटियाला के साथ एक ज़रूरी मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) साइन किया है। उन्होंने आगे कहा कि पंजाब की दूसरी बड़ी यूनिवर्सिटी और कॉलेजों के साथ भी MoU साइन किए जाएंगे। इसके अलावा, सुखविंदर सिंह बिंद्रा ने कहा कि उनका डिपार्टमेंट हमेशा युवाओं को ड्रग्स से दूर रखने की कोशिश करता है। बिंद्रा ने कहा कि उनका डिपार्टमेंट और सोशल जस्टिस मिनिस्ट्री के मिनिस्टर वरिंदर कुमार युवाओं की भलाई के लिए मिलकर काम करते रहेंगे और युवाओं की भलाई, विकास और उन्हें ड्रग्स से दूर रखने के लिए हर मुमकिन कोशिश की जाएगी। इस मौके पर, बिंद्रा ने ड्रग्स के गलत इस्तेमाल को रोकने में यूथ एम्पावरमेंट और अवेयरनेस प्रोग्राम की अहम भूमिका पर ज़ोर दिया।

उन्होंने कहा कि वह और उनका डिपार्टमेंट पंजाब और युवाओं की भलाई के लिए कमिटेड हैं। वे युवाओं को ड्रग्स से बचाने के लिए ज़रूरी कदम उठाते रहेंगे। इसके साथ ही, बिंद्रा ने युवा पीढ़ी को ड्रग्स से बचाने के लिए स्पोर्ट्स की अहमियत पर ज़ोर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले समय में युवाओं को ड्रग्स से दूर रखने और उन्हें स्पोर्ट्स की तरफ मोटिवेट करने के लिए स्पोर्ट्स किट भी बांटी जाएंगी। इसके साथ ही, बिंद्रा ने युवा पीढ़ी को ड्रग्स से बचाने के लिए स्पोर्ट्स की अहमियत पर ज़ोर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले समय में युवाओं को ड्रग्स से दूर रखने और उन्हें स्पोर्ट्स की तरफ मोटिवेट करने के लिए और कोशिशें की जाएंगी, ताकि युवाओं की एनर्जी सही दिशा में लग सके।

आखिर में, बिंद्रा ने माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और कैबिनेट मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार को उनकी दूर की सोच और युवाओं को मजबूत बनाने के अभियान के लिए धन्यवाद दिया।

SS नगर में ‘एडवांस्ड एनालिटिकल टेक्निक्स’ विषय पर 5 दिवसीय फैक्ल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम का शुभारंभ

मोहाली / सत्ता संदेश

नाईपर, मोहाली द्वारा पंजाब के सरकारी पॉलीटेक्निक कॉलेजों के फैकल्टी सदस्यों के लिए “एडवांस्ड एनालिटिकल टेक्निक्स” विषय पर पांच दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (एफडीपी) का आयोजन 17 से 21 अगस्त तक किया जा रहा है। यह कार्यक्रम तकनीकी शिक्षा एवं औद्योगिक प्रशिक्षण विभाग, पंजाब सरकार के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है।

एफडीपी का उद्देश्य प्रतिभागियों के तकनीकी ज्ञान एवं उन्नत विश्लेषणात्मक तकनीकों की व्यावहारिक समझ को मजबूत करना है। कार्यक्रम के माध्यम से सैद्धांतिक ज्ञान और उसके व्यावहारिक अनुप्रयोग के बीच की दूरी को कम करने तथा शिक्षण क्षमताओं को और बेहतर बनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। पंजाब के विभिन्न सरकारी पॉलीटेक्निक कॉलेजों से कुल 15 फैकल्टी सदस्य इस कार्यक्रम में भाग ले रहे हैं।

कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह में श्री मोनीश कुमार, आईएएस, निदेशक, तकनीकी शिक्षा एवं औद्योगिक प्रशिक्षण विभाग, पंजाब ने मुख्य अतिथि/विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे । उन्होंने अपने संबोधन में कार्यक्रम के प्रतिभागियों को मूलभूत अवधारणाओं को अच्छी तरह समझने तथा इन्हें विद्यार्थियों तक सरल एवं प्रभावी तरीके से पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने इस महत्वपूर्ण पहल के लिए नाईपर, मोहाली के निदेशक का आभार भी व्यक्त किया।

प्रो. दुलाल पांडा, निदेशक, नाईपर ने अपने संबोधन में खाद्य पदार्थों में मिलावट की पहचान तथा दवाओं में अशुद्धियों और उनके परीक्षण जैसे व्यावहारिक उदाहरणों का उल्लेख किया, जिनमें उच्च स्तरीय विश्लेषणात्मक उपकरणों का उपयोग किया जाता है। उन्होंने प्रतिभागियों से तकनीकों को गहराई से सीखने और इस ज्ञान को विद्यार्थियों तक प्रभावी ढंग से सिखाने की बात कही।

प्रो. आई.पी. सिंह, एसोसिएट डीन, नाईपर, मोहाली ने सभी प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने प्रतिभागियों को कार्यक्रम में पूरे मनोयोग से भाग लेने तथा हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण के दौरान अपनी किसी भी डाउट का समाधान प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया।

प्रो. एस.के. गुछैत, कोर्स कोऑर्डिनेटर ने एफडीपी के कार्यक्रम एवं शेड्यूल की संक्षिप्त रूपरेखा प्रस्तुत की और प्रतिभागियों को पांच दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान आयोजित होने वाले विभिन्न सत्रों एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण से अवगत कराया।

समारोह के अंत में रजिस्ट्रार, विंग कमांडर (सेवानिवृत्त) पी.जे.पी. सिंह वडैच ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया। उद्घाटन समारोह सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

मोहाली में दूसरे राष्ट्रीय फार्माकोलॉजी दिवस का आयोजन

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

नाईपर, मोहाली के फार्माकोलॉजी एवं टॉक्सिकोलॉजी विभाग द्वारा सोमवार को आधुनिक फार्माकोलॉजी अनुसंधान के जनक एवं भारत में आधुनिक फार्माकोलॉजी अनुसंधान की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले कर्नल डॉ. आर.एन. चोपड़ा की जयंती के उपलक्ष्य में द्वितीय राष्ट्रीय फार्माकोलॉजी दिवस मनाया गया।

इस अवसर पर विभिन्न आमंत्रित वक्ताओं द्वारा वैज्ञानिक एवं शोध से सम्बंधित व्याख्यान प्रस्तुत किए गए। प्रो. दुलाल पांडा, निदेशक एवं डीन प्रो. कुलभूषण टिक्कू ने कार्यक्रम का उद्घाटन किया। फार्माकोलॉजी एवं टॉक्सिकोलॉजी विभाग के अन्य संकाय सदस्य भी कार्यक्रम में उपस्थित हुए। इस अवसर पर नाईपर तथा बाहरी संस्थानों से लगभग 100 प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम में शोधकर्ताओं द्वारा रिसर्च पिच प्रस्तुत की गईं तथा एक इंटरैक्टिव क्विज सत्र का भी आयोजन किया गया। प्रो. जी.बी. जेना ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। पूरे कार्यक्रम का नेतृत्व विभागाध्यक्ष प्रो. एस.एस. शर्मा, डॉ. उज्ज्वल मुकुंद महाजन एवं डॉ. आशुतोष कुमार द्वारा किया गया। डॉ. अजय प्रकाश, डॉ. महेंद्र बिश्नोई एवं डॉ. बिकाश मेधी द्वारा आमंत्रित व्याख्यान प्रस्तुत किये गए । इसके अतिरिक्त विभागीय संकाय सदस्यों डॉ. उज्ज्वल महाजन, डॉ. आशुतोष कुमार एवं डॉ. राजेश रिंगे द्वारा भी वैज्ञानिक व्याख्यान प्रस्तुत किए गए।

यह दिवस हमें कर्नल डॉ. आर.एन. चोपड़ा के योगदान की याद दिलाता है, जिन्होंने उस समय भारत में फार्माकोलॉजी के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जब देश स्वतंत्रता की दहलीज पर था और अनेक चुनौतियों का सामना कर रहा था। उनका योगदान हमें यह विश्वास दिलाता है कि यदि समर्पण हो, तो उत्कृष्ट विज्ञान के लिए हमेशा एक मार्ग होता है।