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बाढ़ प्रभावित अरुणाचल का शिवराज सिंह चौहान, किरेन रिजिजू और पेमा खांडू ने किया हवाई व जमीनी दौरा

अरुणाचल प्रदेश / सत्ता संदेश

अरुणाचल प्रदेश में आई भीषण बाढ़ के बीच केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू और मुख्यमंत्री पेमा खांडू के साथ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई और जमीनी दौरा कर हालात का जायजा लिया। उन्होंने पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया।

केंद्रीय मंत्री ने केयी पान्योर जिले समेत कई बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण किया। इसके साथ ही वे सड़क मार्ग से भी गांवों में पहुंचे और प्रभावित परिवारों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि बाढ़ से हुए नुकसान का विस्तृत सर्वे कराया जाएगा और जिनके घर बह गए हैं, उनके लिए नए मकान बनवाए जाएंगे। खेतों में हुए नुकसान, फसलों की बर्बादी, पशुधन हानि; सभी का आकलन कर उचित मुआवजा दिया जाएगा। तत्काल राहत के रूप में राशन और आवश्यक सामग्री भी उपलब्ध कराई जा रही है।

दौरे के दौरान शिवराज सिंह चौहान ने स्थानीय लोगों द्वारा किए जा रहे सामुदायिक प्रयासों की सराहना की। उन्होंने बाढ़ से क्षतिग्रस्त सड़क की मरम्मत और सुरक्षा दीवार बनाने के काम में खुद भी हाथ बंटाया और कहा कि समाज की यह भागीदारी प्रेरणादायक है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि बाढ़ से भारी तबाही हुई है और नुकसान का लगातार आकलन किया जा रहा है, लेकिन इसके बीच सबसे सराहनीय बात यह है कि स्थानीय समुदाय ने सरकार का इंतजार किए बिना खुद आगे बढ़कर समाधान की पहल की है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री पेमा खांडू के नेतृत्व में केंद्र और राज्य सरकार पूरी तत्परता से कार्य कर रही है और प्रधानमंत्री श्री मोदी के मार्गदर्शन में केंद्र सरकार भी हरसंभव सहयोग प्रदान करेगी ताकि प्रभावित क्षेत्रों में जनजीवन जल्द से जल्द सामान्य हो सके।

कम बारिश और अल नीनो की आशंका को देखते हुए राज्यों को तैयारी तेज करने के निर्देश: कृषि मंत्री चौहान

नयी दिल्ली / सत्ता संदेश

केंद्रीय कृषि मंत्री Shivraj Singh Chouhan ने शुक्रवार को सभी राज्य सरकारों से अपील की है कि वे संभावित कम वर्षा और अल नीनो जैसी मौसमीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए पहले से ही आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि बदलते जलवायु पैटर्न के कारण कृषि क्षेत्र पर असर पड़ सकता है, इसलिए समय रहते रणनीति बनाना जरूरी है।

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुमान का हवाला देते हुए मंत्री ने कहा कि इस वर्ष मानसून सामान्य से कम रहने की संभावना जताई गई है। ऐसे में किसानों की फसलों, सिंचाई व्यवस्था और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर संभावित प्रभाव को कम करने के लिए राज्य स्तर पर सक्रियता जरूरी है।

कृषि मंत्रालय के अनुसार, अल नीनो जैसी परिस्थितियां अक्सर मानसूनी वर्षा को प्रभावित करती हैं, जिससे कई क्षेत्रों में सूखे जैसी स्थिति पैदा हो सकती है। ऐसे हालात में जल प्रबंधन, वैकल्पिक फसल योजना और समय पर बीज उपलब्धता जैसी व्यवस्थाएं बेहद महत्वपूर्ण हो जाती हैं।

मंत्री चौहान ने कहा कि राज्यों को कृषि विभाग, आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और मौसम विभाग के साथ मिलकर एक समन्वित कार्ययोजना तैयार करनी चाहिए। इसमें सूखा-रोधी फसलों को बढ़ावा देना, पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करना और किसानों को समय पर सलाह देना शामिल होना चाहिए।

विशेषज्ञों के अनुसार, कम वर्षा की स्थिति में सबसे अधिक असर धान, गन्ना और कुछ अन्य पानी-प्रधान फसलों पर पड़ता है। इसलिए कृषि नीति में फसल विविधीकरण (क्रॉप डायवर्सिफिकेशन) और सूखा-सहिष्णु किस्मों को बढ़ावा देना लंबे समय से एक महत्वपूर्ण रणनीति माना जाता है।

सरकारी अधिकारियों का कहना है कि केंद्र और राज्य मिलकर किसानों तक मौसम आधारित कृषि सलाह पहुंचाने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म और मोबाइल अलर्ट सिस्टम का विस्तार कर रहे हैं। इससे किसानों को बुवाई और सिंचाई के समय पर निर्णय लेने में मदद मिलती है।

कृषि मंत्री ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है और जरूरत पड़ने पर राहत एवं सहायता योजनाओं को तेजी से लागू किया जाएगा। उन्होंने राज्यों को चेताया कि किसी भी प्रकार की देरी से किसानों को नुकसान बढ़ सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के इस दौर में मानसून की अनिश्चितता कृषि अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है। ऐसे में वैज्ञानिक खेती, जल संरक्षण और तकनीकी हस्तक्षेप ही दीर्घकालिक समाधान हैं।

फिलहाल सरकार का फोकस तैयारी और जोखिम प्रबंधन पर है, ताकि संभावित कम बारिश का प्रभाव किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर न्यूनतम रहे।