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Chandigarh : सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने ‘जेम्स ऑफ इंडिया’ का पायलट चरण शुरू किया

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

‘जेम्स ऑफ इंडिया’ के तहत चंडीगढ़ के रचनाकारों को शहर की विरासत और विशिष्ट पहचान प्रदर्शित करने का अवसर, 31 अगस्त तक प्रविष्टियां आमंत्रित

चंडीगढ़ के युवा एवं डिजिटल रचनाकारों से अपील—राष्ट्रीय मंच WAVES OTT पर अपने जिले की कहानी साझा करें

भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने देश के प्रत्येक जिले से उभरते रचनाकारों की पहचान, प्रोत्साहन और उन्हें राष्ट्रीय डिजिटल मंच उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ‘जेम्स ऑफ इंडिया’ नामक राष्ट्रीय पहल शुरू की है। इस पहल का उद्देश्य नागरिकों, युवाओं और डिजिटल रचनाकारों को अपने जिलों की विशिष्ट पहचान, कहानियों, परंपराओं, उपलब्धियों और अन्य विशेषताओं को मौलिक डिजिटल कहानी-वाचन के माध्यम से प्रस्तुत करने के लिए प्रोत्साहित करना है। यह पहल मंत्रालय द्वारा प्रसार भारती के माध्यम से लागू की जा रही है। इसके अंतर्गत WAVES OTT के MyWAVES सेक्शन को रचनाकारों के पंजीकरण और प्रविष्टियां जमा करने के लिए राष्ट्रीय डिजिटल मंच के रूप में उपयोग किया जाएगा। WAVES OTT एप्लिकेशन को Google Play Store और Apple App Store से डाउनलोड किया जा सकता है।

‘जेम्स ऑफ इंडिया’ का पायलट चरण 21 जुलाई 2026 को अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह, अरुणाचल प्रदेश, चंडीगढ़, दादरा एवं नगर हवेली और दमन एवं दीव, गोवा तथा लद्दाख सहित चयनित पायलट राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में शुरू किया गया। पायलट चरण के लिए प्रविष्टियां जमा करने की अवधि 1 अगस्त से 31 अगस्त 2026 तक है। इस अवधि के दौरान पात्र प्रतिभागी अपना original content जमा कर सकते हैं। इस पहल को देश के सभी जिलों को शामिल करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने की परिकल्पना की गई है। इसके अंतर्गत लगभग 50 लाख नागरिकों एवं उभरते रचनाकारों की भागीदारी तथा जनसंख्या के आधार पर प्रत्येक जिले से लगभग 500 से 15,000 से अधिक प्रविष्टियां प्राप्त होने का अनुमान है। विभिन्न स्तरों पर लगभग 15,000 पुरस्कार प्रदान किए जाने की भी परिकल्पना है।

नागरिक, युवा और उभरते डिजिटल रचनाकार WAVES OTT एप्लिकेशन डाउनलोड करके मोबाइल नंबर के माध्यम से पंजीकरण कर सकते हैं। इसके बाद MyWAVES सेक्शन में Creator Profile बनाकर ‘Gems of India’ कार्यक्रम का चयन करते हुए निर्धारित विवरण के साथ अपने orginal content को अपलोड किया जा सकता है। प्रतिभागी अपने जिले की किसी भी विशिष्ट विशेषता, कहानी या उपलब्धि को रचनात्मक रूप से प्रस्तुत कर सकते हैं। इनमें स्थानीय संस्कृति एवं विरासत, पर्यटन स्थल, लोक परंपराएं एवं प्रदर्शन कलाएं, हस्तशिल्प एवं हथकरघा, स्थानीय व्यंजन, त्योहार, मौखिक परंपराएं, प्रकृति एवं इको-टूरिज्म, ऐतिहासिक स्थल एवं स्मारक, प्रेरणादायी स्थानीय व्यक्तित्व, नवाचार तथा जिले की अन्य विशिष्ट विशेषताएं शामिल हैं। इस पहल के माध्यम से विशेष रूप से प्रामाणिक और प्रभावशाली कहानी-वाचन को प्रोत्साहित किया जा रहा है, ताकि कम चर्चित स्थानों, लोगों और परंपराओं को व्यापक दर्शकों तक पहुंचाया जा सके। सामग्री शॉर्ट वीडियो, रील, डॉक्यूमेंट्री, पॉडकास्ट और व्लॉग जैसे प्रारूपों में 1 से 3 मिनट की अवधि में प्रस्तुत की जा सकती है। फाइल का आकार 2 MB से 6 GB तक निर्धारित किया गया है।

उत्कृष्ट प्रविष्टियों को जिला, राज्य अथवा केंद्र शासित प्रदेश तथा राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया जाएगा और कुल पुरस्कार राशि 5 लाख रुपये तक होगी। जिला स्तर पर भागीदारी के आधार पर प्रत्येक जिले में अधिकतम 20 पुरस्कार दिए जाएंगे, जिनमें प्रत्येक पुरस्कार की राशि 50,000 रुपये होगी। राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेश स्तर पर जिलों से चयनित श्रेष्ठ प्रविष्टियां प्रतिस्पर्धा करेंगी और प्रत्येक राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेश के लिए 2 लाख रुपये का पुरस्कार निर्धारित है। राष्ट्रीय स्तर पर राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों से चयनित श्रेष्ठ प्रविष्टियां 5 लाख रुपये तक के पुरस्कार के लिए पात्र होंगी, जिसमें प्रत्येक राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेश से अधिकतम चार राष्ट्रीय पुरस्कार दिए जाएंगे।

पुरस्कार राशि के अतिरिक्त चयनित रचनाकारों को देशव्यापी पहचान प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। उत्कृष्ट सामग्री को MyWAVES, WAVES OTT, दूरदर्शन, आकाशवाणी तथा प्रसार भारती के अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रदर्शित किया जाएगा।

इस पहल के लिए बहु-स्तरीय कार्यान्वयन एवं मूल्यांकन व्यवस्था बनाई गई है। राष्ट्रीय स्तर पर सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय नीति संबंधी मार्गदर्शन और निगरानी प्रदान करेगा, जबकि प्रसार भारती समग्र कार्यान्वयन एवं सामग्री के क्यूरेशन की जिम्मेदारी निभाएगा। राज्य सरकारें राज्य नोडल अधिकारियों को नामित करेंगी तथा राज्य स्तरीय ज्यूरी समितियों का गठन करेंगी। जिला प्रशासन जिला स्तर पर नोडल प्राधिकरण के रूप में कार्य करते हुए जिला स्तरीय ज्यूरी समितियों का गठन करेगा। My Bharat युवाओं के स्वयंसेवकों और रचनाकार समुदायों को इस पहल से जोड़ने में सहयोग करेगा। निर्धारित समय-सारणी के अनुसार जिला ज्यूरी द्वारा मूल्यांकन सितंबर 2026 में, राज्य ज्यूरी द्वारा मूल्यांकन अक्टूबर 2026 के मध्य तक तथा पुरस्कार एवं राष्ट्रीय प्रदर्शन अक्टूबर 2026 में आयोजित किए जाएंगे। इसके बाद इस पहल को राष्ट्रीय स्तर पर लागू किया जाएगा।

‘जेम्स ऑफ इंडिया’ को केवल एक content प्रतियोगिता के रूप में नहीं, बल्कि जिला स्तर पर एक व्यापक और विस्तार योग्य रचनाकार इकोसिस्टम के रूप में विकसित करने की परिकल्पना की गई है। इसका उद्देश्य भारत के प्रत्येक जिले की प्रामाणिक डिजिटल सामग्री का एक व्यापक राष्ट्रीय भंडार तैयार करना है। उभरते रचनाकारों को राष्ट्रीय मंच प्रदान करके यह पहल स्थानीय पर्यटन, पारंपरिक शिल्प, कला रूपों, व्यंजनों, सांस्कृतिक परंपराओं और कम चर्चित पर्यटन स्थलों को बढ़ावा देने के साथ-साथ भारत की विविध स्थानीय पहचान के डिजिटल दस्तावेजीकरण को मजबूत करेगी।

पायलट राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों, जिसमें चंडीगढ़ भी शामिल है, के नागरिकों, युवाओं और उभरते रचनाकारों से अपील की गई है कि वे 31 अगस्त तक उपलब्ध शेष समय का उपयोग करते हुए इस पहल में सक्रिय रूप से भाग लें और अपनी रचनात्मकता के माध्यम से उन कहानियों को देश के सामने लाएं, जो उनके जिले को विशिष्ट बनाती हैं।

चंडीगढ़ में पंजाब टेलीकॉम सर्किल द्वारा अमृतसर में त्रैमासिक पेंशन अदालत, पेंशनर कल्याण शिविर एवं जीवन प्रमाण-पत्र संग्रहण शिविर का आयोजन

अमृतसर / सत्ता संदेश

संचार मंत्रालय, दूरसंचार विभाग के अधीन नियंत्रक संचार लेखा (सीसीए), पंजाब टेलीकॉम सर्किल, चंडीगढ़ के कार्यालय द्वारा दिनांक 17 जुलाई 2026 को जीएमटीडी, बीएसएनएल कार्यालय, अमृतसर के सम्मेलन कक्ष में दूरसंचार विभाग एवं बीएसएनएल के पेंशनभोगियों तथा पारिवारिक पेंशनभोगियों के लिए द्वितीय त्रैमासिक पेंशन अदालत, पेंशनर कल्याण शिविर एवं जीवन प्रमाण-पत्र (Life Certificate) संग्रहण शिविर का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया।

यह कार्यक्रम श्री विजेन्द्र एन. टंडन, नियंत्रक संचार लेखा, पंजाब टेलीकॉम सर्किल के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य पेंशन संबंधी सेवाओं को पेंशनभोगियों के निकट उपलब्ध कराना तथा उनके कल्याण हेतु विभिन्न जनहितकारी एवं जागरूकता कार्यक्रमों को बढ़ावा देना था।

कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री अक्षय गुप्ता, उप नियंत्रक संचार लेखा, पंजाब ने की। कार्यक्रम में पेंशन स्वीकृति एवं पेंशन वितरण से संबंधित अधिकारी भी उपस्थित रहे तथा उन्होंने पेंशनभोगियों की शिकायतों एवं जिज्ञासाओं का समाधान किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ।

पेंशन अदालत के दौरान सुश्री महक मक्कड़, सहायक लेखा अधिकारी ने अध्यक्ष महोदय श्री अक्षय गुप्ता को अवगत कराया कि कार्यालय को कुल दो पेंशन संबंधी शिकायतें प्राप्त हुई थीं तथा दोनों का सफलतापूर्वक निस्तारण कर दिया गया। शिविर के दौरान भी पेंशनभोगियों की समस्याओं का यथासंभव मौके पर ही समाधान किया गया तथा आवश्यक सहायता प्रदान की गई।

अपने मुख्य संबोधन में श्री अक्षय गुप्ता, उप नियंत्रक संचार लेखा, पंजाब ने कहा कि उनका कार्यालय भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप पेंशनभोगियों एवं पारिवारिक पेंशनभोगियों को समयबद्ध, पारदर्शी एवं प्रभावी पेंशन सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है। उन्होंने यह भी कहा कि कार्यालय द्वारा पेंशनभोगियों की सुविधा एवं कल्याण के लिए समय-समय पर विभिन्न जनकल्याणकारी एवं जनसंपर्क कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहेंगे।

शिविर के दौरान विशेष सहायता काउंटर स्थापित किए गए, जहां पेंशनभोगी अपने जीवन प्रमाण-पत्र जमा कर सकते थे, पेंशनर पहचान-पत्र हेतु आवेदन कर सकते थे तथा अपने मोबाइल नंबर, पते एवं अन्य विवरणों के अद्यतन के लिए अनुरोध प्रस्तुत कर सकते थे। साथ ही पेंशनभोगियों को पेंशन सेवाओं में और अधिक सुधार हेतु अपने बहुमूल्य सुझाव एवं फीडबैक देने के लिए भी प्रोत्साहित किया गया।

कार्यक्रम के दौरान पेंशनभोगियों एवं पारिवारिक पेंशनभोगियों के हित में निम्नलिखित गतिविधियों का आयोजन किया गया—

1. भारत सरकार के डिजिलॉकर पर जागरूकता वीडियो का प्रदर्शन।

2. उमंग (UMANG) एप पर जागरूकता वीडियो का प्रदर्शन।

3. साइबर सुरक्षा एवं डिजिटल धोखाधड़ी से बचाव पर व्याख्यान।

4. वित्तीय योजना एवं आयकर संबंधी मार्गदर्शन।

5. पेंशनभोगियों हेतु निःशुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर।

6. पेंशनभोगियों हेतु निःशुल्क नेत्र जांच शिविर।

7. चिकित्सा विशेषज्ञों द्वारा स्वास्थ्य संबंधी व्याख्यान।

8. जीवन प्रमाण-पत्रों का संग्रहण।

9. Know Your Pensioner (KYP) प्रपत्र एवं पेंशनर पहचान-पत्र हेतु आवेदनों का संग्रहण।

10. “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान के अंतर्गत पौधों का वितरण।

11. पेंशनभोगियों एवं पारिवारिक पेंशनभोगियों के साथ संवादात्मक सत्र।

कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण संवादात्मक सत्र रहा, जिसमें पेंशनभोगियों एवं पारिवारिक पेंशनभोगियों को सीसीए कार्यालय के अधिकारियों के साथ सीधे संवाद कर अपनी समस्याओं, शिकायतों एवं सुझावों पर चर्चा करने का अवसर प्राप्त हुआ।

त्रैमासिक पेंशन अदालत एवं पेंशनर कल्याण शिविर को पेंशनभोगियों एवं पारिवारिक पेंशनभोगियों द्वारा अत्यंत सराहा गया। उन्होंने कार्यक्रम के दौरान उपलब्ध कराई गई सुविधाओं, जनकल्याणकारी पहलों, जानकारीपूर्ण सत्रों तथा त्वरित सहायता की प्रशंसा की। प्रतिभागियों ने श्री अक्षय गुप्ता, उप नियंत्रक संचार लेखा, पंजाब के नेतृत्व की सराहना करते हुए सीसीए, पंजाब टेलीकॉम सर्किल द्वारा पेंशन संबंधी शिकायतों के त्वरित निस्तारण तथा पेंशनभोगियों को सुलभ, प्रभावी एवं हितैषी सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए किए जा रहे निरंतर प्रयासों की भी प्रशंसा की।

MY Bharat पंजाब ने गहन युवा पंजीकरण और जागरूकता अभियान की शुरुआत की

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

युवा मामले और खेल मंत्रालय, भारत सरकार के तहत एक स्वायत्त निकाय, मेरा युवा भारत (MY Bharat) पंजाब ने 1 जुलाई से 15 अगस्त 2026 तक पंजाब के सभी 23 जिलों में MY Bharat पोर्टल पर एक गहन पंजीकरण और जागरूकता अभियान शुरू किया है।
यह अभियान युवाओं को जोड़ने में तेजी लाने और मार्च 2027 तक MY Bharat पोर्टल पर 5 करोड़ युवा पंजीकरण के राष्ट्रीय लक्ष्य में योगदान देने के देशव्यापी प्रयास का हिस्सा है।

पंजाब ने पोर्टल पर पहले ही 5,62,959 युवा पंजीकरण दर्ज किए हैं, और वर्तमान अभियान का उद्देश्य प्रत्येक स्कूल, कॉलेज, ब्लॉक और गाँव से युवाओं को इस प्लेटफॉर्म पर लाकर इस आधार का महत्वपूर्ण रूप से विस्तार करना है।

MY Bharat एक परिवर्तनकारी “फिजीटल” (भौतिक + डिजिटल) प्लेटफॉर्म है जो देश के युवाओं को सशक्त बनाता है और उन्हें राष्ट्र निर्माण के अवसरों से जोड़ता है। पंजीकरण पूरी तरह से निःशुल्क है और www.mybharat.gov.in पर 15-29 आयु वर्ग के युवाओं के लिए खुला है। इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से, पंजीकृत युवा अनुभवात्मक शिक्षण कार्यक्रमों (ELPs) तक पहुँच प्राप्त कर सकते हैं जो कक्षा से परे व्यावहारिक अनुभव और कौशल-निर्माण के अवसर प्रदान करते हैं। स्वयंसेवक अवसर (VOs) जो युवाओं को स्थानीय स्तर पर सामुदायिक विकास और सरकारी पहलों में योगदान करने में सक्षम बनाते हैं। मंत्रालय द्वारा आयोजित राष्ट्रीय प्रमुख कार्यक्रमों, युवा आदान-प्रदान कार्यक्रमों, त्योहारों और आयोजनों के लिए एक एकल-खिड़की गेटवे। कौशल विकास, इंटर्नशिप और परामर्श के मार्ग जो रोजगार क्षमता और व्यक्तिगत विकास को बढ़ाते हैं। एक युवा स्वयंसेवक के रूप में एक सत्यापित डिजिटल पहचान, जो राष्ट्र निर्माण गतिविधियों में भागीदारी के लिए मान्यता और प्रमाणन प्रदान करती है।

सामुदायिक और नागरिक जुड़ाव में एक आवाज, जो प्रेरित युवाओं को साथी चेंजमेकर्स से जोड़ती है और उन्हें जमीनी स्तर की पहलों का नेतृत्व करने में सक्षम बनाती है।

“पंजाब के युवाओं ने लगातार राष्ट्र निर्माण के प्रति अपनी ऊर्जा और प्रतिबद्धता दिखाई है। यह अभियान हमारे जिलों के हर युवा को—चाहे वे स्कूलों, कॉलेजों या गाँवों में हों—MY Bharat आंदोलन में शामिल होने और राष्ट्र के भविष्य को आकार देने में सक्रिय भागीदार बनने का एक आमंत्रण है। हमारा ध्यान समावेशी भागीदारी पर है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि महिलाएँ, ग्रामीण युवा, दिव्यांग युवा और हमारी युवा आबादी के हर वर्ग को इस प्लेटफॉर्म पर जगह मिले।”

MY Bharat पंजाब ने राज्य भर के सभी युवाओं, शैक्षणिक संस्थानों और हितधारकों से आगे आने और MY Bharat पोर्टल पर पंजीकरण करने, और भारत के सबसे बड़े युवा जुड़ाव मंच का हिस्सा बनने की अपील की है।

पंजीकरण और विवरण के लिए, देखें: www.mybharat.gov.in

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जयंती पर निबंध लेखन प्रतियोगिता एवं वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत माय भारत, चंडीगढ़ द्वारा डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जयंती के अवसर पर उनके जीवन, विचारों एवं राष्ट्र निर्माण में दिए गए योगदान को स्मरण करते हुए विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।

यह कार्यक्रम श्री विनय कुमार, जिला युवा अधिकारी, माय भारत चंडीगढ़ के मार्गदर्शन एवं निर्देशन में आयोजित किया गया। कार्यक्रम के अंतर्गत निबंध लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें 45 प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रतिभागियों ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन, राष्ट्रवाद, शिक्षा, राष्ट्रीय एकता तथा भारत के विकास संबंधी उनके विचारों पर अपने निबंध प्रस्तुत किए।

कार्यक्रम के दौरान संजीव राणा, संस्थापक, कर्तव्यनिष्ठ फाउंडेशन ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन, उनके दर्शन एवं राष्ट्र निर्माण में उनके अमूल्य योगदान पर प्रेरणादायक व्याख्यान दिया। उन्होंने युवाओं से डॉ. मुखर्जी के आदर्शों को आत्मसात करते हुए राष्ट्र सेवा, सामाजिक उत्तरदायित्व एवं नैतिक मूल्यों के प्रति समर्पित रहने का आह्वान किया।

कार्यक्रम के अंत में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को पुष्पांजलि अर्पित की गई तथा पर्यावरण संरक्षण एवं हरित भारत के संदेश को जन-जन तक पहुँचाने के उद्देश्य से वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया।

माय भारत, चंडीगढ़ ने युवाओं से आह्वान किया कि वे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के आदर्शों एवं राष्ट्र निर्माण के संकल्प को अपने जीवन में अपनाते हुए समाज एवं देश के विकास में सक्रिय योगदान दें।

मनरेगा बना इतिहास, आज से VB-G-RAM-G कानून हुआ लागू

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

देश में आज से ग्रामीण रोजगार योजना, विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025 (वीबी जी राम जी कानून) लागू हो गया है। वहीं पुराना मनरेगा कानून इतिहास की बात हो गया है। वीबी जी राम जी कानून के जरिए केंद्र सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बड़े बदलाव करना चाहती है। 

क्या है वीबी-जी राम जी कानून
इस कानून के तहत केंद्र सरकार साल 2047 तक एक ग्रामीण विकास ढांचा स्थापित करना चाहती है। इसमें ऐसे ग्रामीण परिवारों के सदस्य, जो अकुशल श्रम कर सकते हैं, उन्हें एक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के रोजगार की गारंटी मिलेगी। इस कानून के तहत ग्रामीण रोजगार के माध्यम से आधारभूत ढांचे को बेहतर किया जाएगा। इस कानून में सरकार ग्रामीणों को सिर्फ रोजगार तक सीमित नहीं रखने की कोशिश कर रही है, बल्कि ऐसा मॉडल बनाने की कोशिश की जा रही है, जिससे गांव के स्तर पर विकास कार्यों की दिशा तय हो। 

नए कानून में किन कामों पर होगा फोकस
वीबी जी राम जी कानून के तहत गांवों में विकास कार्यों के लिए चार प्राथमिकताएं तय की गई हैं।-

जल सुरक्षा– इसके तहत गांवों में अब जल संरक्षण संरचनाएं, सिंचाई सहायता, भूजल पुनर्भरण, जल निकायों को पुनर्जीवित करने का काम और वनीकरण जैसे कामों को आगे बढ़ाया जाएगा।

ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास-वीबी जी राम जी कानून के तहत ग्रामीण सड़कों, सार्वजनिक भवनों, स्कूलों के विकास, स्वच्छता प्रणालियों और सौलर नवीकरणीय ऊर्जा से जुड़े काम और आवास योजनाओं पर जोर रहेगा।

आजीविका से जुड़े काम– सरकार ने वीबी जी राम जी कानून को कृषि, मत्स्य पालन, भंडारण, बाजार, कौशल विकास से भी जोड़ रही है। 

मौसमी घटनाओं से जुड़े काम– नए कानून में ग्रामीण क्षेत्रों को आपदा के समय तैयार रखने पर भी जोर दिया गया है। इसके लिए कानून में आश्रय स्थल, तटबंध निर्माण, बाढ़ प्रबंधन संरचनाएं, पुनर्वास के काम और जंगलों की आग बुझाने जैसे काम भी शामिल किए गए हैं। 

मनरेगा से कितना अलग है वीबी-जी राम जी?
केंद्र सरकार का कहना है कि नए नियमों से मनरेगा की ढाचांगत कमियों को दूर किया गया है। सबसे पहले तो योजना के तहत रोजगार के दिनों को 100 से बढ़ाकर 125 दिन किया गया है। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में किए जाने वाले सभी कार्यों को विकसित भारत राष्ट्रीय ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर स्टैक में शामिल किया जाएगा। इस कानून में ग्रामीण स्तर पर सार्वजनिक कार्यों के लिए एक मजबूत और एकीकृत राष्ट्रीय फ्रेमवर्क तैयार होगा। इसी के आधार पर गांवों में आगे के कामों को लेकर तैयारियां होंगी।

इस तरह गांवों के लिए एकीकृत ढांचा तैयार करने से देशभर में उत्पादक, टिकाऊ, सुदृढ़ और बदलाव में सक्षम ग्रामीण परिसंपत्तियों (एसेट्स) का निर्माण सुनिश्चित होगा। केंद्र और राज्य 2047 में विकसित भारत के लक्ष्य के तहत इन परिसंपत्तियों को आगे बढ़ाने की योजनाएं भी साझा तौर पर तैयार करेंगी। यानी एक राष्ट्रीय नीति के तहत काम के बिखराव को समेटा जाएगा और तय दिशा में इसे आगे बढ़ाया जाएगा।

दोनों कानूनों में मुख्य अंतर-

विशेषतामनरेगा (MGNREGA)VB-G RAM G
गारंटीकृत रोजगार दिनप्रत्येक ग्रामीण परिवार को प्रति वित्तीय वर्ष कम-से-कम 100 दिनों के अकुशल मजदूरी रोजगार की गारंटी थी।
 
 रोजगार की अवधि बढ़ाकर 125 दिन कर दी गई है।
वित्तपोषण मांग-आधारित योजना; अकुशल श्रमिकों की मजदूरी का 100% केंद्र सरकार वहन करती थी।
 
 केंद्र-राज्य व्यय अनुपात 60:40 है। वहीं हिमालयी एवं पूर्वोत्तर राज्यों के लिए ये अनुपात 90:10 है। केंद्र शासित राज्यों में पूरा खर्च केंद्र सरकार वहन करेगी। अगर जरूरत पड़ती है तो अतिरिक्त खर्च राज्य सरकारें वहन करेंगी
 
कृषि विरामयोजना पूरे वर्ष संचालित रहती थी।
 
राज्य बुवाई एवं कटाई के मौसम में 60 दिनों तक काम पर अस्थायी रोक घोषित कर सकते हैं।
 
परिसंपत्ति निर्माणसामान्य ग्रामीण श्रम एवं बुनियादी विकास कार्यों पर केंद्रित था।
 
चार प्रमुख विकास क्षेत्रों—जल, कृषि, आपदा प्रबंधन और संपर्क (कनेक्टिविटी)—पर आधारित है।
 
बजट व्यवस्थामांग के अनुसार अतिरिक्त धनराशि उपलब्ध कराई जाती थी।
 
आपूर्ति-आधारित व्यवस्था है, जिसमें राज्यों के लिए निश्चित एवं सीमित बजट निर्धारित होता है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था, राष्ट्रीय विकास योजना से कैसे जुड़ेगी?

  • मनरेगा कानून के तहत ग्राम पंचायतें ही अपने क्षेत्र में होने वाले विकास कार्यों के लिए जिम्मेदार होतीं थी और वही इससे जुड़ा हर फैसला लेती थीं। वीबी जी राम जी कानून में विकसित ग्राम पंचायत योजना के तहत काम होगा, जिसे ग्राम पंचायतें तैयार करेंगी। इसके बाद इन विकास कार्यों के लिए केंद्र सरकार निचले स्तर से लेकर उच्च स्तर तक जानकारी जुटाएगी, इसके बाद ही कार्यों का आवंटन होगा। 
  • खास बात यह है कि इन ग्राम पंचायत योजनाओं को जीपीएस जैसी तकनीक का इस्तेमाल करके तैयार किया जाएगा और पीएम गति-शक्ति के साथ इस योजना को जोड़ा जाएगा। इससे काम में पारदर्शिता लाने की कोशिश की जाएगी।
  • वीबी जी राम जी कानून में गवर्नेंस इकोसिस्टम अनिवार्य किया गया है, जिसके तहत मजदूरों के बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन, जीपीएस आधारित प्लानिंग और निगरानी, मोबाइल-आधारित रिपोर्टिंग के साथ रियल-टाइम डैशबोर्ड, एआई-सक्षम विश्लेषण और सोशल ऑडिट तंत्र शामिल हैं। इसके अलावा काम की साप्ताहिक जानकारी स्वचालित रूप से तैयार की जाएगी और भौतिक-डिजिटल दोनों पर सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किए जाएंगे।

राज्य निर्धारित करेंगे क्षेत्रीय विकास के लिए किसे-क्या मिलेगा
वीबी जी राम जी कानून के मुताबिक, वित्तीय संसाधनों का न्यायसंगत वितरण सुनिश्चित करने के लिए राज्यों को नॉर्मेटिव आवंटन (Normative Allocation) का प्रावधान किया गया है। सीधे शब्दों में समझें तो पहले मनरेगा के तहत केंद्र जो फंड्स देता था, उसकी मांग औसतन और संभावित खर्चों के आधार पर होती थी। लेकिन अब केंद्र सरकार ने यह जिम्मेदारी राज्य सरकारों को सौंप दी है। यानी अब राज्य ही वर्ग और स्थानीय विकास जरूरतों को ध्यान में रखते हुए जिलों और ग्राम पंचायतों के बीच फंड का पारदर्शी और आवश्यकतानुसार बंटवारा सुनिश्चित करेंगे। 

सरकार, मनरेगा की जगह वीबी जी राम जी कानून क्यों लाई?
दरअसल देश के अधिकतर राज्यों में मनरेगा कानून के दुरुपयोग का पता चला। जिनमें कई जगहों पर काम सिर्फ कागजों पर हुए थे और नियमों का उल्लंघन कर सरकारी पैसे का दुरुपयोग किया गया। कई जगहों पर मजदूरों की बजाय मशीनों से काम कराए गए और पैसे की धांधली की गई। ऐसे में सरकार ने ग्रामीण रोजगार में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और इसकी बेहतर निगरानी के लिए वीबी जी राम जी कानून लाने का फैसला किया। यही वजह है कि नए कानून में जीपीएस से निगरानी और रियल टाइम जानकारी और सोशल ऑडिट जैसे प्रावधान किए गए हैं।  



यमुनानगर में एक दिवसीय जिला स्तरीय मीडिया कार्यशाला ‘वार्तालाप’ का किया गया आयोजन
  • यमुनानगर में ‘वार्तालाप’ कार्यशाला का आयोजन; कल्याणकारी योजनाओं और 12 वर्षों की उपलब्धियों पर हुआ विस्तृत विचार-विमर्श
  • केंद्र सरकार की जनहित योजनाएं यमुनानगर के विकास में साबित हुई मील का पत्थर: सुश्री प्रीती, उपायुक्त, यमुनानगर
  • पीएम सूर्य घर योजना से नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में आई नई क्रांति: श्री नवीन कुमार अहुजा, एडीसी, यमुनानगर
  • पीएमएसएम योजना से यमुनानगर में मातृ मृत्यु दर में आई भारी गिरावट: डॉ. दिव्या मंगला, सिविल सर्जन, यमुनानगर

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

चंडीगढ़ द्वारा हरियाणा के यमुनानगर में एक दिवसीय जिला स्तरीय मीडिया कार्यशाला, ‘वार्तालाप’ का आयोजन किया गया। कार्यशाला का मुख्य विषय “केंद्र सरकार की कल्याणकारी योजनाओं के 12 वर्षों की उपलब्धियां” था, जिसके तहत केंद्र और राज्य सरकारों की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के सफल कार्यान्वयन और पिछले 12 वर्षों में हासिल किए गए महत्वपूर्ण उपलब्धियों पर विस्तृत चर्चा की गई।

यमुनानगर के उपायुक्त, सुश्री प्रीति, मुख्य अतिथि के रूप में ‘वार्तालाप’ में शामिल हुईं। कार्यशाला में मीडिया जगत के प्रतिष्ठित पत्रकारों के साथ-साथ विभिन्न सरकारी विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों और प्रतिनिधियों ने सक्रिय भागीदारी की।

अपने संबोधन में यमुनानगर की उपायुक्त, प्रीति, आईएएस ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में लागू की गई कल्याणकारी योजनाओं ने नागरिकों, विशेष रूप से समाज के अंतिम छोर पर मौजूद लोगों के जीवन को काफी आसान और समृद्ध बनाया है। उन्होंने जिले के सभी विभागों के ठोस प्रयासों की सराहना की और विकास की इस गति को बनाए रखने के लिए प्रशासन और मीडिया के बीच निरंतर संवाद और समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने बताया कि आयुष्मान भारत, पीएम सूर्य घर योजना, मुद्रा योजना, पीएम किसान सम्मान निधी योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान समेत अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं में बहुत उपलब्धियां हासिल की हैं।

इस दौरान मीडियाकर्मियों के साथ चर्चा करते हुए उपायुक्त महोदया ने पत्रकारों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग करते समय सामाजिक ज़िम्मेदारी को ध्यान में रखने के महत्व पर भी ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि विभिन्न पीढ़ियों के लोग, युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक, हर कोई मोबाइल फोन और विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग कर रहा है, इसलिए, यह बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है कि हम इसका उपयोग कैसे करते हैं। उन्होंने लोगों, विशेषकर मीडियाकर्मियों से अधिक सतर्क रहने और सोशल मीडिया के सकतरात्मक उपयोग के बारे में जागरूकता फैलाने का आग्रह किया।

इस मौके पर नवीन कुमार अहुजा, अतिरिक्त उपायुक्त, यमुनानगर, ने ज़ोर देकर कहा कि केंद्र सरकार की जनहित योजनाएं यमुनानगर के विकास में मील का पत्थर साबित हो रही हैं। उन्होंने बताया कि इन कल्याणकारी योजनाओं से शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, ऊर्जा, और रोज़गार सृजन में सराहनीय उपलब्धियां हासिल की गई हैं।

कार्यशाला को संबोधित करते हुए, पुनीत सक्सेना, आईआईएस, पीआईबी मुख्यालय, दिल्ली ने इस बात का संक्षिप्त विवरण दिया कि पीआईबी फैक्ट चेक इकाई कितनी कुशलता से काम करती है और पत्र सूचना कार्यालय जनता और सरकार के बीच एक मध्यस्थ के रूप में कैसे महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

इसी तरह, अहमद खान, आईआईएस, मीडिया एवं संचार अधिकारी, पीआईबी चंडीगढ़ ने वार्तालाप के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस तरह के कार्यक्रम से जनकल्याण की योजनाओं को मीडिया के माध्यम से लोगों तक पहुंचाने में यह एक सार्थक कदम है। उन्होंने क्षेत्र में सूचना और प्रसारण मंत्रालय के तहत काम करने वाली विभिन्न मीडिया इकाइयों की संरचना और कामकाज पर विस्तृत पेशकारी प्रस्तुत की, और जमीनी स्तर तक विकास से संबंधित जानकारी को प्रभावी ढंग से आम जनता तक पहुंचाने में मीडिया की अहम भूमिका पर जोर दिया।

कार्यशाला के दौरान, विभिन्न सरकारी विभागों द्वारा पिछले 12 वर्षों के अपने-अपने रिपोर्ट कार्ड और उपलब्धियों को प्रस्तुत करने के लिए कई तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। इसी कड़ी के तहत यमुनानगर के सिविल सर्जन डॉ. दिव्या मंगला और उप सिविल सर्जन, डॉ. चारू कालरा ने प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (PMSMY), आयुष्मान भारत, टीबी मुक्त भारत अभियान और एचपीवी टीकाकरण सहित प्रमुख स्वास्थ्य पहलों पर व्यापक प्रगति रिपोर्ट साझा की।

डॉ. दिव्या मंगला ने रेखांकित किया कि यमुनानगर में मातृ मृत्यु दर में भारी गिरावट आई है और इसका बड़ा श्रेय प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (PMSMY) को जाता है। उन्होंने आगे उल्लेख किया कि अप्रैल से यमुनानगर के सरकारी अस्पतालों में एक भी मातृ मृत्यु की सूचना नहीं मिली है। एचपीवी टीकाकरण के बारे में उन्होंने कहा कि यमुनानगर का लक्ष्य चार्ट में शीर्ष पर रहना नहीं है बल्कि 100% उपलब्धि हासिल करना है, क्योंकि वे एक भी लड़की को पीछे नहीं छोड़ना चाहते हैं। डॉ. कालरा ने यह भी बताया कि जिले में लिंग अनुपात में भी सराहनीय काम किया गया है और अन्य कल्याणकारी योजनाओं को सफलतापूर्वक लागू किया गया है।

इस दौरान जिला परिषद, यमुनानगर के श्री मनोज कुमार, एपीओ, डीआरडीए ने प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम (PMJVK) और प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) के तहत हासिल किए गए परिवर्तनकारी संरचनात्मक सुधारों और ग्रामीण आवास के सफल कार्यान्वयन पर जानकारी साझा की। इसके साथ वित्तीय सशक्तिकरण पर चर्चा करते हुए, पंजाब नेशनल बैंक (PNB), यमुनानगर के अग्रणी जिला प्रबंधक (LDM), सुभाष चंद ने मुद्रा (MUDRA) योजना और स्टैंड अप इंडिया के बारे में बताते हुए कहा कि ने स्थानीय युवाओं और उभरते उद्यमियों के बीच आत्मनिर्भरता को बल मिला है।

इसी तरह एमएसएमई विभाग के औद्योगिक विस्तार अधिकारी रोहित टिंडल ने औद्योगिक विकास और प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) तथा सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम औपचारिकीकरण योजना (FME) के माध्यम से उत्पन्न आजीविका के नए अवसरों के बारे में जानकारी दी।

कृषि विभाग, यमुनानगर के वरिष्ठ अधिकारी श्री आदित्य प्रताप ने भी पिछले 12 वर्षों के कृषि सुधारों पर प्रकाश डाला, विशेष रूप से ‘प्राकृतिक खेती’ को बढ़ावा देने और अनूठी जल संरक्षण पहल, ‘मेरा पानी-मेरी विरासत’ की सफलता पर ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने बताया कि अब तक प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को प्रति किसान 30,000 रुपये से अधिक की सब्सिडी दी जा चुकी है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने जल को एक विरासत माना है और इसे सुरक्षित करने के लिए सरकार ने ‘मेरा पानी-मेरी विरासत’ योजना शुरू की है। उन्होंने बताया कि राज्य में कम पानी का उपयोग करने वाली खेती करने वाले किसानों को 8000 रुपये प्रति एकड़ से पुरस्कृत किया जा रहा है।

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि जिला पराली जलाने को कम करने के लिए कुशलतापूर्वक काम कर रहा है, अब योजनाओं एवं सरकार के प्रयासों के कारण पराली ‘वेस्ट से वेल्थ’ के रूप में परिवर्तित हो रही है। उन्होंने ‘मेरी फसल मेरा ब्योरा’ पोर्टल की भी सराहना की, जिसके बारे में उन्होंने कहा कि यह इस योजना से किसानों को यूरिया प्राप्त करने में मददगार साबित हुई है एवं यूरिया की कालाबाज़ारी पर भी रोक लगी है। इससे सरकार एवं किसानों को काफी मुनाफा हुआ है।

उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम (UHBVN) के प्रतिनिधि ने कहा कि ‘पीएम सूर्य घर योजना’ सौर ऊर्जा और हरित एवं स्वच्छ ऊर्जा हासिल करने में मददगार साबित हुई है।

कार्यशाला का समापन श्री अहमद खान, मीडिया एवं संचार अधिकारी, पीआईबी चंडीगढ़, द्वारा दिए गए औपचारिक धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ, जिन्होंने इस कार्यक्रम को एक बड़ी सफलता बनाने के लिए जिला प्रशासन और पत्रकारों कर्मियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

कैबिनेट ने NIIF में ₹30,000 करोड़ के अतिरिक्त निवेश को मंजूरी, इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश को मिलेगी रफ्तार

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

इंफ्रास्ट्रक्चर और अन्य राष्ट्रीय महत्व के क्षेत्रों में भारत की निवेश प्रतिबद्धता को और मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पिछले सप्ताह राष्ट्रीय निवेश और अवसंरचना कोष (एनआईआईएफ) के नए और आगामी कोषों के लिए भारत सरकार की ओर से ₹30,000 करोड़ की अतिरिक्त निवेश प्रतिबद्धता को मंजूरी दी। इससे एनआईआईएफ के लिए भारत सरकार की कुल प्रतिबद्धता ₹60,000 करोड़ हो गई।

राष्ट्रीय निवेश एवं अवसंरचना कोष (एनआईआईएफ) भारत का संप्रभु-आधारित कोष है, जिसका संचालन और प्रबंधन नेशनल इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फंड लिमिटेड (एनआईआईएफएल) की ओर से पेशेवर तरीके से किया जाता है। भारत सरकार एनआईआईएफ में 49% शेयरधारक है और वर्तमान में यह अपने कोषों और निवेश रणनीतियों में लगभग ₹40,000 करोड़ की पूंजी प्रतिबद्धता का प्रबंधन करती है। एनआईआईएफ ने पूंजी के इस्तेमाल और प्राप्ति में एक मजबूत ट्रैक रिकॉर्ड दिखाया है, और बड़े पोर्टफोलियो से बाहर निकलने के माध्यम से निवेशकों को लगभग ₹12,000 करोड़ लौटाए हैं।

एनआईआईएफ ने प्रमुख संस्थागत निवेशकों से पूंजी जुटाई है, जिनमें सॉवरेन वेल्थ फंड, पेंशन फंड, बहुपक्षीय विकास और अग्रणी घरेलू वित्तीय संस्थान शामिल हैं। इनमें अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी, ऑस्ट्रेलियनसुपर, सीपीपी इन्वेस्टमेंट्स, ओंटारियो टीचर्स पेंशन प्लान, पीएसपी इन्वेस्टमेंट्स, टेमासेक, एशियन इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक, न्यू डेवलपमेंट बैंक, एशियन डेवलपमेंट बैंक, जापान बैंक फॉर इंटरनेशनल कोऑपरेशन, यूएस इंटरनेशनल डेवलपमेंट फाइनेंस कॉरपोरेशन, एक्सिस बैंक, एचडीएफसी ग्रुप, आईसीआईसीआई बैंक, कोटक महिंद्रा लाइफ इंश्योरेंस और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया शामिल हैं।

ये निवेशक ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, जापान, सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात और संयुक्त राज्य अमेरिका सहित कई भौगोलिक क्षेत्रों से आते हैं, जो भारत की विकास यात्रा और एनआईआईएफ के शासन और वाणिज्यिक ट्रैक रिकॉर्ड में मजबूत अंतरराष्ट्रीय विश्वास को प्रतिबिंबित करता है।

भारत-जापान व्यापार गलियारे में एनआईआईएफ की चार परिचालन निवेश रणनीतियों – इंफ्रास्ट्रक्चर, निजी बाजार, विकास इक्विटी और जलवायु निवेश – ने निवेश में विशेष गति हासिल की है।

एनआईआईएफ का पहला इंफ्रास्ट्रक्चर कोष, ₹16000 करोड़ के कोष के साथ, भारत का सबसे बड़ा घरेलू इंफ्रास्ट्रक्चर कोष है और इसने परिवहन (सड़कें, बंदरगाह और लॉजिस्टिक्स, और हवाई अड्डे), ऊर्जा (नवीकरणीय ऊर्जा, स्मार्ट मीटर और विद्युत पारेषण) और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में प्लेटफॉर्म स्थापित किए हैं। इसके निजी बाजार कोष ने स्वदेशी प्रबंधकों की ओर से प्रबंधित कई सहायक इंफ्रास्ट्रक्चर कोषों में निवेश किया है, जिन्होंने जलवायु, किफायती आवास, किफायती स्वास्थ्य सेवा और वेंचर कैपिटल (वीसी)/ प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में निवेश किया है। एनआईआईएफ के रणनीतिक अवसर कोष ने वित्तीय सेवाओं, स्वास्थ्य सेवा और विनिर्माण जैसे विकास क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया है। एनआईआईएफ का भारत-जापान कोष इसका पहला द्विपक्षीय कोष है और यह जलवायु और चक्रीय अर्थव्यवस्था तथा ऊर्जा परिवर्तन पर, साथ ही भारत-जापान व्यापार गलियारे को बढ़ावा देने वाले निवेशों पर भी, ध्यान केंद्रित करता है।

एनआईआईएफ की ओर से प्रबंधित निधियों ने सामूहिक आधार पर परिवहन, ऊर्जा परिवर्तन, स्वास्थ्य सेवा, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, इलेक्ट्रिक गाड़ियों से आवागमन, किफायती आवास, विनिर्माण और प्रौद्योगिकी सहित प्रमुख क्षेत्रों में कई भारतीय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पूंजी का निवेश किया है। ये निवेश गति शक्ति, डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया, सीओपी प्रतिबद्धताओं और एफएएमई और पीएम ई-ड्राइव जैसी प्रमुख योजनाओं जैसी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप हैं।

एनआईआईएफ एक रणनीतिक सलाहकार की भूमिका भी निभाता है, जो केंद्र सरकार के विभागों और राज्य संस्थाओं को नई पीपीपी पहलों और निवेश विचारों पर सहायता प्रदान करता है जो निजी क्षेत्र के निवेश को बढ़ावा दे सकते हैं। इसमें समुद्री विकास कोष और अनुसंधान विकास एवं नवाचार कोष की संरचना जैसी पहलों पर सलाहकार और नीतिगत सहायता, मुद्रीकरण और पीपीपी संरचनाओं पर सरकारी अधिकारियों के साथ सहयोग, और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप अन्य क्षेत्र-विशिष्ट निवेश ढांचों पर सलाह शामिल है।

भारत में अतिरिक्त निजी पूंजी लाने और भारत की विकास यात्रा में योगदान देने में एनआईआईएफ की ओर से वर्षों से निभाई गई भूमिका को मान्यता देते हुए, भारत सरकार की इस अतिरिक्त प्रतिबद्धता से परिवहन, ऊर्जा, डिजिटल अवसंरचना, शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर, ई-मोबिलिटी और अन्य राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाओं सहित विभिन्न क्षेत्रों में निवेश को प्रोत्साहन की उम्मीद है।

भारत सरकार की ओर से एनआईआईएफ में किए गए ₹30,000 करोड़ के इस अतिरिक्त निवेश का इस्तेमाल एनआईआईएफ के दूसरे अवसंरचना केंद्रित कोष की स्थापना के लिए किया जाएगा, जो इस उद्देश्य के साथ स्थापित इसके पहले प्रमुख कोष का उत्तराधिकारी होगा। एनआईआईएफ अवसंरचना कोष द्वितीय का लक्ष्य कोष लगभग ₹30,000 करोड़ प्रस्तावित है और इससे परिवहन, ऊर्जा, डिजिटल अवसंरचना और शहरी अवसंरचना तथा ई-गतिशीलता जैसे उभरते क्षेत्रों में निवेश किए जाने की उम्मीद है। यह आवंटन एनआईआईएफ की नई कोष रणनीतियों और इसके उत्तराधिकारी द्विपक्षीय एवं अन्य रणनीतिक कोषों को भी सहयोग देगा।

वर्तमान सरकारी आवंटन से अंतर्निहित परिसंपत्तियों और पोर्टफोलियो कंपनियों में निवेश के माध्यम से अर्थव्यवस्था पर उत्प्रेरक प्रभाव पड़ने की उम्मीद है, जिससे उच्च गुणवत्ता वाले इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण, रोजगार निर्माण (प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों) और राष्ट्रीय महत्व के प्रमुख क्षेत्रों के विकास को बढ़ावा मिलेगा, इस प्रकार आत्मनिर्भरता और 2047 तक विकसित भारत बनने की दिशा में देश की यात्रा को सहयोग मिलेगा।

सांख्यिकी दिवस 2026: “प्रशासनिक आंकड़ों की क्षमता को उजागर करना” के विषय पर मोहाली में सेमिनार का आयोजन


चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (क्षेत्रीय संचालन प्रभाग), क्षेत्रीय कार्यालय, मोहाली द्वारा सांख्यिकी दिवस 2026 के अवसर पर एक सेमिनार का आयोजन किया गया। इस वर्ष सांख्यिकी दिवस का विषय “प्रशासनिक आंकड़ों की क्षमता को उजागर करना” (Unlocking the Potential of Administrative Data)” था।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में श्री राम कृष्ण, सेवानिवृत्त उप महानिदेशक (DDG) तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में विनय कुमार, सेवानिवृत्त निदेशक उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता हिम्मत सिंह राघव, उप महानिदेशक (DDG) द्वारा की गई। इस अवसर पर स्नेह कीर्ति, उप निदेशक सहित राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय, मोहाली के लगभग 65 अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने भाग लिया।

अपने संबोधन में मुख्य अतिथि ने प्रशासनिक आंकड़ों के महत्व तथा साक्ष्य आधारित नीति निर्माण में उनकी भूमिका पर प्रकाश डाला। वक्ताओं ने प्रशासनिक आंकड़ों की गुणवत्ता, समयबद्धता एवं उपयोगिता बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया।

अध्यक्षीय संबोधन में श्री हिम्मत सिंह राघव ने कहा कि प्रशासनिक आंकड़ों का प्रभावी उपयोग आधिकारिक सांख्यिकी को अधिक सशक्त, विश्वसनीय एवं उपयोगी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। सेमिनार के दौरान प्रतिभागियों ने विषय से संबंधित अपने विचार एवं सुझाव भी साझा किए।

कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों, प्रतिभागियों एवं सहयोगियों का धन्यवाद ज्ञापित किया गया।

NSO चंडीगढ़ ने 20वां सांख्यिकी दिवस मनाया, प्रशासनिक आंकड़ों की क्षमता पर डाला प्रकाश

चंडीगढ़/सत्ता संदेश

भारत में अर्थशास्त्र, योजना तथा सांख्यिकी के विकास के क्षेत्र में प्रो. पी.सी. महालनोबिस द्वारा दिए गए उल्लेखनीय योगदानों के सम्मान में, राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ), क्षेत्रीय कार्यालय, चंडीगढ़ द्वारा 29 जून को केंद्रीय सदन, सेक्टर-9, चंडीगढ़ के सम्मेलन कक्ष में “20वाँ सांख्यिकी दिवस” मनाया गया। यह आयोजन सांख्यिकी के जनक स्वर्गीय प्रो. पी.सी. महालनोबिस की जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया। 20वें सांख्यिकी दिवस का विषय था – “प्रशासनिक आँकड़ों की क्षमता का उपयोग” (Unlocking the Potential of Administrative Data)।

कार्यक्रम में मुख्य वक्ताओं के रूप में हरबिंदर सिंह, एडीजी (सेवानिवृत्त), आईएसएस अधिकारी, एनएसओ, डॉ. नरेंद्र कुमार, विभागाध्यक्ष, सांख्यिकी विभाग, पंजाब विश्वविद्यालय, तथा शीनम जैन, सहायक निदेशक, पीआईबी चंडीगढ़ उपस्थित रहे।

अपने स्वागत भाषण में श्री दीपक मेहरा, उप महानिदेशक, एनएसओ (एफओडी), क्षेत्रीय कार्यालय चंडीगढ़ ने सभी अतिथि वक्ताओं, अधिकारियों, कर्मचारियों एवं पंजाब विश्वविद्यालय से आए प्रशिक्षुओं का स्वागत किया तथा प्रो. पी.सी. महालनोबिस के जीवन परिचय एवं सांख्यिकी के क्षेत्र में उनके योगदानों पर प्रकाश डाला।

हरबिंदर सिंह, एडीजी (सेवानिवृत्त), आईएसएस अधिकारी, एनएसओ ने कार्यक्रम का उद्घाटन किया तथा भारतीय सांख्यिकीय प्रणाली में प्रो. पी.सी. महालनोबिस के योगदानों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने देश की सांख्यिकीय प्रणाली को और अधिक सुदृढ़ बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए उन्होंने कहा कि 20वें सांख्यिकी दिवस का विषय “प्रशासनिक आँकड़ों की क्षमता का उपयोग” लक्ष्यों की प्राप्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

इस दिवस को मनाने का उद्देश्य विशेष रूप से युवा पीढ़ी के बीच जन-जागरूकता उत्पन्न करना तथा उन्हें स्वर्गीय प्रो. पी.सी. महालनोबिस से प्रेरणा लेते हुए सामाजिक-आर्थिक योजना एवं नीति निर्माण में सांख्यिकी की भूमिका को समझने के लिए प्रोत्साहित करना था।

इस कार्यक्रम में सांख्यिकी के क्षेत्र से जुड़े लगभग 80 अधिकारियों, कर्मचारियों एवं पंजाब विश्वविद्यालय के प्रशिक्षुओं ने भाग लिया।  कार्यक्रम को सफल बनाने हेतु एक क्विज़ प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया, जिसमें पंजाब विश्वविद्यालय के प्रशिक्षुओं तथा सर्वेक्षण प्रगणकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

प्रतियोगिता के शीर्ष तीन विजेताओं को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। कार्यक्रम का समापन सभी अतिथि वक्ताओं, क्षेत्रीय प्रमुख, एनएसओ के अधिकारियों एवं कर्मचारियों तथा पंजाब विश्वविद्यालय के प्रशिक्षुओं के प्रति धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।

भारतीय प्रशासनिक सेवा के 2024 बैच के अधिकारियों ने राष्ट्रपति से मुलाकात की

दिल्ली / सत्ता संदेश

करुणा और तर्कसंगतता का मिश्रण करें; भावुक हुए बिना संवेदनशील बनें: राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आईएएस अधिकारियों को संबोधित किया

वर्तमान में विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों में सहायक सचिव के रूप में कार्यरत भारतीय प्रशासनिक सेवा के 2024 बैच के अधिकारियों के एक समूह ने आज (20 मई, 2026) राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की।

राष्ट्रपति ने आईएएस अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि अखिल भारतीय सेवाओं, विशेषकर आईएएस अधिकारियों ने हमारे देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अब जब देश विकास के उच्च स्तर पर पहुंच चुका है, तो अधिकारियों से अपेक्षाएं भी अधिक हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि युवा अधिकारियों को विविध क्षेत्रों में काम करने का अनूठा अवसर मिलेगा। कई अवसरों पर वे विशिष्ट क्षेत्रों में विशेषज्ञों की टीमों का नेतृत्व करेंगे। इसलिए, उनके सीखने का दायरा और गति बहुत व्यापक तथा त्‍वरित होनी चाहिए। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि विभिन्न क्षेत्रों और परिस्थितियों के अनुकूल ढलने की उनकी क्षमता असाधारण होनी चाहिए।

राष्ट्रपति ने कहा कि अधिकारियों की निष्पक्षता उनकी न्यायसंगतता का सूचक होगी। उनकी संवेदनशीलता समावेशिता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का मापदंड होगी। उनकी विश्वसनीयता उनकी पारदर्शिता और निरंतर निष्पादन पर आधारित होगी। उनके व्यक्तिगत और व्यावसायिक आचरण से निर्धारित उनकी सत्यनिष्ठा उन्हें जनहित में निर्णायक कार्रवाई करने का नैतिक साहस प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को करुणा और तर्कसंगतता का मिश्रण करना होगा। उन्हें भावुक हुए बिना संवेदनशील होना होगा। उन्हें नियमों का पालन करना होगा, लेकिन व्यापक उद्देश्यों को भूलना नहीं होगा।

राष्ट्रपति ने कहा कि नैतिकता और सुशासन एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि अधिकारियों को ईमानदार और नैतिक होना चाहिए। साथ ही, उन्हें परिणाम भी देने होंगे।

राष्ट्रपति ने कहा कि निर्णय लेने से बचना नैतिकता नहीं है बल्कि, जनहित और स्थापित व्यवस्था के अनुरूप सही निर्णय लेना ही नैतिकता का सच्चा सार है। जिस प्रकार न्याय मिलने में देरी को न्याय से वंचित करना माना जाता है, उसी प्रकार प्रशासनिक निर्णय लेने में देरी भी लोगों को उनके वैध हितों से वंचित करने के समान है।

राष्ट्रपति ने कहा कि लोकतंत्र का उद्देश्य जनता की आकांक्षाओं को साकार करना है। ये आकांक्षाएं उनके चुने हुए प्रतिनिधियों के माध्यम से व्यक्त की जाती हैं। इसलिए, अधिकारियों का यह कर्तव्य है कि वे जनता के हित में इन प्रतिनिधियों द्वारा उठाए गए मुद्दों को प्राथमिकता दें।

राष्ट्रपति ने कहा कि बहती धारा के साथ बहते रहने में कोई मेहनत नहीं लगती। ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने और हमारे समाज को प्रगति के शिखर तक पहुंचाने के लिए अधिकारियों को अक्सर विपरीत परिस्थितियों में भी संघर्ष करते हुए आगे बढ़ना होगा। उन्होंने उन्हें सलाह दी कि वे भारत की जनता, विशेषकर समाज के वंचित वर्गों को, अपने विचारों और कार्यों के केंद्र में रखें, चाहे वे क्षेत्र में हों या कार्यालय में। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि वे विकसित और समावेशी भारत के निर्माण में अमूल्य योगदान देंगे।