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मोदी कैबिनेट ने 1264 करोड़ की रेलवे परियोजना और 3030 करोड़ के केमिकल पार्क स्कीम को मंजूरी

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता ने शुक्रवार को कैबिनेट की बैठक हुई। बैठक में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि कर्नाटक और आंध्र को जोड़ने वाली रेलवे प्रोजेक्ट को मंजूरी दी गई। बेल्लारी-गुंटकल रेलवे लाइन को मंजूरी दी गयी। नई लाइन के लिए 1264 करोड़ रुपए की मंजूरी दी गयी। रेल मंत्री ने कहा कि विकसित भारत के लिए रेल परियोजनाओं अहम भूमिका निभाएगी।

अश्विनी वैष्णव ने कहा कि कैबिनेट ने मुख्य केमिकल सेक्टर के लिए 3,030 करोड़ रुपये की नई स्कीम को मंजूरी दी। तीन डेडिकेटेड केमिकल्स पार्क बनाए जाएंगे। प्रत्येक पार्क को एक हजार करोड़ रुपए की मदद दी जाएगी। उन्होंने कहा कि इससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।केमिकल पार्क सही तरीके से बने। एक-एक प्लांट 15000 करोड़ से 20000 करोड़ रुपए तक हो सकता है।

बल्लारी से गुंटकल तक रेलवे लाइन को मंजूरी

कैबिनेट कमेटी ने आज कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में बल्लारी- गुंटकल सेक्शन की तीसरी और चौथी लाइन को मंजूरी दे दी है, जिसकी कुल लागत लगभग 1,264 करोड़ रुपये है।

यह प्रोजेक्ट PM-गति शक्ति नेशनल मास्टर प्लान पर आधारित है, जिसका फोकस इंटीग्रेटेड प्लानिंग और स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन के ज़रिए मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक एफ़िशिएंसी को बढ़ाने पर है. यह प्रोजेक्ट लोगों, सामान और सर्विसेज़ के आने-जाने के लिए आसान कनेक्टिविटी देगा।

कर्नाटक और आंध्र प्रदेश राज्यों के 3 जिलों को कवर करने वाला यह प्रोजेक्ट भारतीय रेलवे के मौजूदा नेटवर्क को लगभग 46 kms बढ़ा देगा। प्रस्तावित मल्टी-ट्रैकिंग प्रोजेक्ट लगभग 99 गांवों में कनेक्टिविटी बढ़ाएगा, जिनकी आबादी लगभग सात लाख है।

बैठक में तीन केमिकल पार्क बनाने की मिली मंजूरी

कैबिनेट ने देश में तीन खास केमिकल पार्क बनाने के लिए भारत औद्योगिक विकास योजना रसायन या BHAVYA – रसायन स्कीम को मंज़ूरी दे दी है। इस स्कीम की घोषणा वित्तीय वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट में की गई थी।

अश्विनी वैष्णव ने बताया कि इस स्कीम का कुल फाइनेंशियल खर्च 3,030 करोड़ रुपए होगा, जिसमें से 3,000 करोड़ पार्क के अंदर कॉमन इंफ्रास्ट्रक्चर फैसिलिटी और बेसिक यूटिलिटी बनाने की लागत को पूरा करने के लिए और Rs. 30 करोड़ एडमिनिस्ट्रेटिव खर्च के तौर पर होंगे। यह स्कीम वित्तीय वर्ष 2026-27 से वित्तीय 2030-31 तक 5 साल के समय के लिए चलेगी।

उन्होंने कहा कि इस स्कीम के तहत, केंद्र हर पार्क के लिए रुपए 1,000 करोड़ तक का ग्रांट देगा। यह संबंधित राज्य सरकार द्वारा कम से कम 500 करोड़ रुपए के योगदान पर निर्भर करेगा।

फतेहगढ़ चूड़ियां में जर्जर सड़क से लोग परेशान, एक महीने से अधूरा पड़ा निर्माण कार्य

बारिश के बाद गहरे गड्ढों ने बढ़ाई मुश्किलें, लोगों ने प्रशासन से जल्द सड़क बनाने की मांग की

फतेहगढ़ चूड़ियां / सत्ता संदेश

फतेहगढ़ चूड़ियां में डेरा रोड चुंगी से पुलिस स्टेशन और बद्दोवाल चौक तक सड़क की बदहाल स्थिति को लेकर स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी है। पिछले एक महीने से अधिक समय से सड़क निर्माण अधूरा होने के कारण क्षेत्र में बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं। हाल ही में हुई बारिश के बाद स्थिति और गंभीर हो गई है, जिससे लोगों को रोजाना आवागमन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि सड़क की खराब हालत के कारण न केवल यातायात प्रभावित हो रहा है, बल्कि आसपास के व्यापार पर भी असर पड़ा है। कई दुकानदारों का कहना है कि ग्राहकों की आवाजाही कम होने से उनका काम-धंधा प्रभावित हुआ है।

पीड़ित मलूक सिंह, डॉ. अमरबीर सिंह और अन्य स्थानीय लोगों ने बताया कि सड़क को खोदे हुए एक महीने से अधिक समय हो चुका है, लेकिन निर्माण कार्य अब तक पूरा नहीं किया गया। बारिश के कारण गड्ढों में पानी भर गया है और उनकी गहराई बढ़ गई है, जिससे दोपहिया वाहन चालकों, स्कूली बच्चों और पैदल चलने वालों को लगातार दुर्घटना का खतरा बना हुआ है।

स्थानीय लोगों ने बताया कि इसी मार्ग पर पुलिस स्टेशन, डीएसपी कार्यालय, सेवा केंद्र, सांझ केंद्र, तहसील कॉम्प्लेक्स तथा तीन स्कूल स्थित हैं। प्रतिदिन हजारों लोगों को इसी सड़क से गुजरना पड़ता है, लेकिन बदहाल सड़क के कारण उन्हें भारी परेशानी उठानी पड़ रही है।

निवासियों ने प्रशासन और संबंधित विभाग से मांग की है कि सड़क निर्माण कार्य को प्राथमिकता के आधार पर जल्द पूरा कराया जाए, ताकि लोगों को राहत मिल सके और संभावित हादसों से बचा जा सके।

वहीं, इस संबंध में ठेकेदार के प्रतिनिधि ने बताया कि निर्माण कार्य में देरी का एक कारण सीवरेज बोर्ड से अपेक्षित सहयोग नहीं मिलना है। उन्होंने दावा किया कि संबंधित विभागों के बीच समन्वय होने के बाद सड़क का निर्माण जल्द पूरा कर दिया जाएगा।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।

भारत का सांस्कृतिक पुनरोद्धार काल : गजेन्द्र सिंह शेखावत

भारत आज विकास के विभिन्न आयामों में तेज गति से प्रगति कर रहा है। अर्थव्यवस्था, सामाजिक सुरक्षा, ऊर्जा, इन्फ्रास्ट्रक्चर, राष्ट्रीय सुरक्षा, विज्ञान सहित विभिन्न क्षेत्रों में देश नई ऊंचाइयों को छू रहा है। भौतिक प्रगति के इन आयामों में आगे बढ़ते हुए यह भी आवश्यक है कि हम अपनी प्राचीन संस्कृति, इतिहास, धरोहर और विरासत को विस्मृत ना करें। भारत विश्व की प्राचीनतम जीवंत संस्कृतियों में से एक है, शताब्दियों तक विदेशी आक्रांताओं के साथ चले संघर्ष में देश में राजनीतिक सत्ता में परिवर्तन आता रहा, लेकिन भारत अपनी संस्कृति को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक सफलतापूर्वक स्थानांतरित करता रहा। इन वर्षों में हुई राजनीतिक उथल पुथल में हमारे अनेक उपासना स्थल, ग्रंथ, पुस्तकालय, विश्वविद्यालयों का विध्वंस किया गया, लेकिन हमारी संस्कृति और परंपराएं फिर भी जीवित रहीं। सांस्कृतिक भारत पर दूसरी चोट हमारी शिक्षा पद्धति को बदलने से हुई, जिसके द्वारा हमारे अंतर्मन में अपनी संस्कृति के प्रति हीन भावना उत्पन्न करने के प्रयास हुए।
वर्ष 2014 से भारत ने आर्थिक और सामाजिक परिवर्तन के साथ साथ सांस्कृतिक रूप से भी एक बड़ी करवट ली, जिसे हम संस्कृति के पुनरोद्धार के आरंभ का वर्ष भी कह सकते हैं। सांस्कृतिक भारत आज अपने गौरवशाली अतीत को पुनः स्मरण करते हुए उसके वैभव, उसकी भव्यता को ना सिर्फ पुनर्स्थापित कर रहा है, बल्कि सामाजिक जीवन में भी वह संस्कृति पुनः स्थापित हो रही है। आज हमारे उत्सव, प्राचीन और ऐतिहासिक स्मारक, खान-पान, वस्त्र, कला, नृत्य, संगीत, शास्त्र, शिल्प वैश्विक आकर्षण के केंद्र बन रहे हैं।

भारतीय संस्कृति की बढ़ती स्वीकार्यता

पिछले 12 वर्षों में विश्व में भारतीय संस्कृति की स्वीकार्यता बढ़ी है। आज पूरा विश्व 21 जून को योग दिवस मना रहा है। ये सिर्फ एक शारीरिक व्यायाम नहीं, अपितु यह प्राचीन भारतीय दर्शन हैस जिसे विश्व ने मान्यता दी। मानव जीवन में उसकी उपयोगिता को देखते हुए उसे अपनाया। आज विश्व के अनेक देशों से हमारी धरोहरें वापस देश में लौटीं हैं, जिनकी संख्या भी एक रोचक तथ्य है। वर्ष 2013 से पूर्व मात्र 13 धरोहरों को विदेशों से भारत लाया गया था, जबकि पिछले 12 वर्षों में 640 से अधिक धरोहरें विदेशों से भारत लौटी हैं। ये दर्शाता है कि संस्कृति में सिर्फ परंपराएं ही नहीं, अपितु संस्कृति के प्रतीक चिह्नों को वापस लाने के प्रति भी हमने गंभीरता दिखाई है। ये प्रतीक चिह्न हमारे लिए गौरव का विषय हैं, जो हमारे पूर्वजों की कला, शिल्प और विभिन्न विषयों के ज्ञान की निशानियां हैं, जिनसे हमें प्रेरणा मिलती है। दुर्गा पूजा और दीपावली जैसे हमारे सामाजिक उत्सवों को यूनेस्को ने विश्व की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर के रूप में मान्यता दी है। यह मान्यता मात्र उत्सवों को ही नहीं, अपितु इनके पीछे छुपे उन संदेशों को भी मिली है, जो बताती है कि असत्य पर सदैव सत्य की विजय होती है, बुराई हमेशा अच्छाई से पराजित होती है। हमारे प्राचीन इतिहास को भी आज यूनेस्को ने स्वीकारा है। उसका प्रमाण है कि भारत 44 विश्व धरोहर स्थलों के साथ ही विश्व में छटे और एशिया में दूसरे स्थान पर है। यह धरोहरें हमारी विरासत की प्रतीक हैं, जिन्हें देखकर भारतीयों को अपनी संस्कृति और इतिहास का परिचय मिलता है और उस पर गर्व होता है।

भूले और बिखरे ज्ञान का पुनर्संकलन

भारत एक लंबे समय तक विदेशी आक्रांताओं के साथ संघर्षरत रहा है। ज्ञान और संस्कृति का सम्मान ना करने वाले इन विदेशी आक्रमणकारियों ने देश के ज्ञान की अमूल्य विरासत रहे हमारे विश्वविद्यालय, गुरुकुल और पांडुलिपियों में लिखित ज्ञान को नष्ट करने के प्रयास किए। एक लंबे कालखंड में हमारी ज्ञान परंपरा की अमूल्य निधि पांडुलिपियां विभिन्न मठों, मंदिरों, संस्थानों और घरों में संरक्षित की गईं, जिन्हें समय के साथ भुला दिया गया। ये दुःख का विषय है कि स्वतंत्रता के बाद भी इन्हें संकलित कर प्राचीन ज्ञान को पुनः प्राप्त करने का कोई प्रयास नहीं किया गया।

आज संपूर्ण देश में ज्ञान भारतम् राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण के तहत इन पांडुलिपियों को सूचीबद्ध किया जा रहा है। यह अत्यंत हर्ष का विषय है कि समस्त भारत से अब तक 88 लाख से अधिक पांडुलिपियां प्राप्त हो चुकी हैं। इस ज्ञान को संकलित करने के साथ ही इन्हें आधुनिकतम तकनीक के साथ डिजिटाइज किया जा रहा है। इनमें लिखित ज्ञान को संरक्षित और सुरक्षित करने के लिए ऑर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) सहित विभिन्न तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। आने वाले समय में यह संकलन हमारी भावी पीढ़ियों को अध्यात्म, विज्ञान, कला, शिल्प जैसे विभिन्न क्षेत्रों में भारतीय प्राचीन ज्ञान और उसकी उत्कृष्टता से परिचित कराएगा और उस पर गर्व करने को प्रेरित करेगा।

संस्कृति के प्रतीक चिह्नों का पुनरोत्थान

भारत के मंदिर, किले, मेले, ऐतिहासिक धरोहर स्थल हमारी गौरवशाली संस्कृति और इतिहास के प्रतीक चिह्न हैं। यह दुःख का विषय है कि स्वतंत्रता के बाद से भारत के इन सांस्कृतिक स्थलों की उपेक्षा की गई। कुछ ही स्मारकों का वैश्विक स्तर पर प्रचार प्रसार किया गया। यह मंदिर भारत की विविधता भरी संस्कृति को एक सूत्र में जोड़ कर रखते हैं। देश के धार्मिक और सांस्कृतिक स्थल वर्षों से उपेक्षा और अव्यवस्था का शिकार रहे। पिछले 12 वर्षों में इन स्थलों का कायाकल्प किया गया है। आज भारत में देश की प्राचीन संस्कृति के वाहक रहे काशी विश्वनाथ धाम, महाकाल लोक कॉरिडोर, केदारनाथ, सोमनाथ सहित विभिन्न मंदिरों और तीर्थनगरियों का व्यापक विकास किया गया है, श्रद्धालुओं के लिए वहां सुविधाएं विकसित की गई हैं, जिससे आध्यात्मिक पर्यटन बढ़ने के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत हुई। युवाओं में अपनी संस्कृति के प्रति जागरुकता भी आई। आज इन स्थानों पर आने वाले युवाओं की बढ़ती संख्या भारतीय संस्कृति के पुनरोत्थान का प्रतीक है। इन स्थानों के विकास और यहां की यात्राओं से युवाओं में अपनी संस्कृति के प्रति गर्व का एहसास बढ़ा है।


विरासत भी, विकास भी

आज हमारी संस्कृति के प्रतीक चिह्न हमारे धार्मिक स्थल, मंदिर, धार्मिक मेले स्थानीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ बने हुए हैं। आध्यात्मिक पर्यटन बढ़ने से स्थानीय इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास के साथ ही इन नगरों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ी हैं, जिससे लोगों की जीवनशैली में व्यापक सुधार हुआ है। आज ऋषिकेश, अयोध्या, प्रयागराज, काशी सहित भारत के विभिन्न आध्यात्मिक नगरों में विदेशी पर्यटक बड़ी संख्या में भारतीय संस्कृति को जानने और समझने के लिए आ रहे हैं। भारतीय संस्कृति की व्यापकता से अभिभूत हो रहे हैं। इससे ना सिर्फ भारत की संस्कृति को प्रचार प्रसार मिल रहा है बल्कि अर्थव्यवस्था को भी लाभ पहुंच रहा है।


जड़ों से जुड़ता भारत

आज भारत अपनी प्राचीन विरासत पर गर्व करते हुए आधुनिक विश्व के साथ कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ रहा है। आज भारत भूली बिसरा दी गई अपनी संस्कृति के पुनर्जागरण का एक नया अध्याय लिख रहा है। अनेक शताब्दियों तक संघर्ष में उलझा रहा भारत एक नई करवट के साथ आज अपनी पुरानी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान को पुनर्स्थापित कर रहा है। भारत आज विश्व को बता रहा है कि कैसे प्राचीन परंपरा और संस्कृति के साथ आधुनिकता को अपनाया जा सकता है, आने वाला समय नए भारत का है। भविष्य में भारत का विचार, भारत का दर्शन, भारत की संस्कृति विश्व को नई दिशा देने जा रही है।

(लेखक केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री, भारत सरकार है)

मांग में अचानक और तेज़ी से वृद्धि के बीच सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियां (ओएमसी) हरियाणा में निर्बाध ईंधन आपूर्ति सुनिश्चित कर रही

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियां (ओएमसी) – इंडियनऑयल, बीपीसीएल और एचपीसीएल – देश भर में परिचालन और लॉजिस्टिक्स समन्वय जारी रखे हुए हैं ताकि कई क्षेत्रों में ईंधन की मांग में अचानक और तीव्र वृद्धि के बावजूद पेट्रोल (एमएस), डीजल (एचएसडी) और एलपीजी की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।

हाल के दिनों में, ओएमसी ने कई राज्यों में मौसमी कृषि गतिविधियों और कटाई कार्यों के कारण पेट्रोलियम उत्पादों की उल्लेखनीय रूप से अधिक खपत देखी है। अन्य आपूर्तिकर्ताओं की तुलना में कम कीमत के कारण खुदरा ग्राहकों के सार्वजनिक क्षेत्र के खुदरा आउटलेट्स की ओर रुख करने और संस्थागत और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं के खुदरा ईंधन आउटलेट्स की ओर स्पष्ट रुझान के कारण भी अतिरिक्त मांग का दबाव उत्पन्न हुआ है।

सार्वजनिक क्षेत्र की ओएमसी अपने टर्मिनलों, डिपो, पाइपलाइनों, एलपीजी बॉटलिंग संयंत्रों और खुदरा आउटलेट्स के व्यापक राष्ट्रव्यापी नेटवर्क के माध्यम से निर्बाध आपूर्ति बनाए हुए हैं। आपूर्ति दल, परिवहन नेटवर्क, टर्मिनल संचालन और चुनिंदा खुदरा आउटलेट्स बाजारों में निर्बाध उत्पाद आवागमन और समय पर पुनःपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए 24×7 कार्यरत हैं। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियां निर्बाध ईंधन आपूर्ति के लिए राज्य प्रशासन के साथ घनिष्ठ समन्वय बनाए हुए हैं।

सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियां स्टॉक की स्थिति की लगातार समीक्षा कर रही हैं और बढ़ी हुई मांग को कुशलतापूर्वक पूरा करने के लिए रसद और वितरण योजना पर घनिष्ठ समन्वय स्थापित कर रही हैं।

अनिल कुमार सिंह, राज्य स्तरीय समन्वयक, हरियाणा, नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे सामान्य खरीदारी जारी रखें और अनावश्यक रूप से घबराकर खरीदारी करने से बचें। उपभोक्ताओं से यह भी अनुरोध है कि वे ईंधन की उपलब्धता से संबंधित सटीक जानकारी के लिए केवल अधिकृत एजेंसियों और तेल विपणन कंपनियों द्वारा जारी आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें।

खान मंत्रालय के सचिव ने खनिज ब्लॉक की नीलामी और उसके संचालन की प्रगति की समीक्षा की

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

खान मंत्रालय के सचिव श्री पीयूष गोयल ने आज मंत्रालय और श्रेणी-ए खनिज उत्पादक राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ देश भर में खनिज ब्लॉकों की नीलामी और उनके संचालन की प्रगति की समीक्षा करने के लिए आयोजित नौवीं मासिक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में खनन क्षेत्र में सुधारों में तेजी लाने, घरेलू खनिज उत्पादन बढ़ाने और नीलाम किए गए खनिज ब्लॉकों के समय पर संचालन को सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित किया गया।

बैठक के दौरान इस बात पर प्रकाश डाला गया कि 2015 में नीलामी प्रणाली की शुरुआत के बाद से, वित्त वर्ष 2015-16 से वित्त वर्ष 2020-21 की अवधि के दौरान कुल 108 खनिज ब्लॉकों की सफलतापूर्वक नीलामी की गई। इसके बाद नीलामी की गति में उल्लेखनीय वृद्धि हुई और वित्त वर्ष 2021-22 से वित्त वर्ष 2024-25 के बीच 364 खनिज ब्लॉकों की सफलतापूर्वक नीलामी की गई, जो प्रति वर्ष औसतन लगभग 90 ब्लॉक है।

वित्त वर्ष 2025-26 में ही रिकॉर्ड 212 खनिज ब्लॉकों की सफल नीलामी हुई है, जो नीलामी प्रणाली की शुरुआत के बाद से किसी एक वित्तीय वर्ष में आयोजित खनिज ब्लॉक नीलामियों की सबसे अधिक संख्या है। इस उपलब्धि में 22 महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिज ब्लॉकों की नीलामी शामिल है, जो भारत के आर्थिक विकास और स्वच्छ ऊर्जा की ओर परिवर्तन के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण खनिज संसाधनों को सुरक्षित करने पर सरकार के निरंतर फोकस को दर्शाती है।

बैठक में नीलाम किए गए ब्लॉकों के संचालन की स्थिति की भी समीक्षा की गई। यह सूचित किया गया कि वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 28 ग्रीनफील्ड ब्लॉकों और 8 ब्राउनफील्ड ब्लॉकों सहित कुल 36 खनिज ब्लॉक संचालन में लाए गए हैं, जबकि वित्त वर्ष 2015-16 से वित्त वर्ष 2024-25 की पूरी अवधि के दौरान 20 ग्रीनफील्ड और 38 ब्राउनफील्ड ब्लॉकों सहित कुल 58 ब्लॉक संचालन में लाए गए थे।

खान सचिव ने वैधानिक स्वीकृतियों में तेजी लाने, खनन कार्यों की शीघ्र शुरुआत सुनिश्चित करने और नीलाम किए गए ब्लॉकों से समय पर उत्पादन प्राप्त करने के लिए केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के बीच घनिष्ठ समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना को साकार करने और भारत की खनिज सुरक्षा को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण खनिजों के विकास के महत्व से भी अवगत कराया।

पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर सुल्तानपुर में आपातकालीन लैंडिंग सुविधा (ईएलएफ) सक्रिय की गई

दिल्ली /सत्ता संदेश

भारतीय वायु सेना ने 22 अप्रैल, 2026 को उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले में पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर दिन और रात दोनों समय ‘आपातकालीन लैंडिंग सुविधा’ (ईएलएफ) को सक्रिय किया, जिससे रक्षा संबंधी तैयारियों को मजबूत करने के लिए उसकी संचालन क्षमता प्रदर्शित हुई। उत्तर प्रदेश के पंचायती राज और अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री श्री ओम प्रकाश राजभर, वायु सेना प्रमुख बी. मणिकांतन, एओसी-इन-सी, सीएसी और अन्य अधिकारी भारतीय वायु सेना के विमानों द्वारा ईएलएफ संचालन को देखने के लिए उपस्थित थे।

भारतीय वायु सेना की संचालन क्षमता का प्रदर्शन जैगुआर, मिराज-2000, सुखोई-30 एमकेआई, सी-295 और एएन-32 सहित विभिन्न प्रकार के विमानों के बेड़े, एमआई-17 वी5 हेलीकॉप्टर और गरुड़ कमांडो टीम के संचालन के माध्यम से किया गया। भारतीय वायु सेना ने यूपीईआईडीए और स्थानीय नागरिक प्रशासन के साथ मिलकर दिन और रात दोनों समय इन आपातकालीन विमान बेड़े को कम से कम समय में सक्रिय करने के लिए अपनी मानक संचालन प्रक्रियाओं का मान्यीकरण किया।

इस अभियान ने मानक रनवे की अनुपलब्धता के दौरान भी निर्बाध संचालन करने की भारतीय वायु सेना की क्षमता को काफी हद तक बढ़ाया है, जिससे इसकी संचालन क्षमता का प्रदर्शन हुआ है। इसने वायु सेना के कुशल विमान चालक दल और जमीनी चालक दल की अल्प सूचना पर ऐसे एक्सप्रेसवे हवाई पट्टियों को सक्रिय करने की क्षमता को प्रदर्शित किया है। राष्ट्रीय एक्सप्रेसवे पर रणनीतिक रूप से विकसित ये हवाई पट्टियां संचालन संबंधी मजबूती को काफी हद तक बढ़ाती हैं और आपात स्थितियों के दौरान महत्वपूर्ण बलों को कई गुणा बढ़ाने में मददगार हैं, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा और आपदा मोचन क्षमताओं को मजबूती मिलती है।

भारतीय वायु सेना की संचालन संबंधी आवश्यकताओं और यूपीईआईडीए के असैनिक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रबंधन तथा स्थानीय नागरिक प्रशासन के सहयोग से निर्मित यह सहयोगात्मक ढांचा, ऐसे राजमार्गीय हवाई पट्टियों की संचालन व्यवहार्यता को अधिकतम करता है। ईएलएफ को सक्रिय बनाने में तीनों संगठनों द्वारा प्रदर्शित तालमेल न केवल राष्ट्र की समग्र रणनीतिक स्थिति को मजबूत करता है, बल्कि क्षेत्र में आपदा जोखिम न्यूनीकरण (एचएडीआर) क्षमताओं को भी बढ़ाता है।