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नई दिल्ली में 15 से 17 जून तक विकसित भारत युवा संसद का होगा आयोजन
  • विकसित भारत युवा संसद 2026: नई दिल्ली में 15 से 17 जून, 2026 तक आयोजन
  • युवाओं के नेतृत्व में राष्ट्र-निर्माण और शासन की दिशा में एक अहम पड़ाव
  • बहस से समाधान तक: युवा ‘नारी शक्ति वंदन’ (समावेशिता को बढ़ावा) और ‘विकसित भारत 2047’ पर चर्चा करेंगे
  • युवा संसदीय कार्यवाही को करीब से देखेंगे: शासन-व्यवस्था की गहरी समझ

युवा मामले और खेल मंत्रालय, केंद्रीय युवा मामले और खेल तथा श्रम और रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया के नेतृत्व में, ‘MY Bharat’ (एक स्वायत्त संस्था) के माध्यम से नई दिल्ली में 15 से 17 जून, 2026 तक ‘विकसित भारत युवा संसद 2026’ आयोजित करने के लिए पूरी तरह तैयार है। पिछले आयोजनों की सफलता को आगे बढ़ाते हुए, यह प्रमुख पहल लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में युवाओं की भागीदारी को नए नज़रिए से देखती है। यह युवा नागरिकों को शासन, नीतिगत चर्चा और संसदीय कामकाज की व्यावहारिक समझ प्रदान करती है। यह कार्यक्रम तीन चरणों में आगे बढ़ेगा, जिनमें से प्रत्येक को युवाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए डिज़ाइन किया गया है:

ज़िला नोडल राउंड:

• देश के हर कोने तक बातचीत पहुँचाने के लिए 757 नोडल विश्वविद्यालयों/संस्थानों में ‘आपातकाल के 50 साल: भारतीय लोकतंत्र के लिए सबक’ विषय पर व्यापक चर्चाएँ आयोजित की गईं।
• हर ज़िले से शीर्ष 5 प्रतिभागियों को राज्य स्तर के राउंड में भाग लेने का मौका मिला।

राज्य स्तरीय राउंड:

• सभी राज्यों की विधानसभाओं और प्रमुख सरकारी स्थानों पर आयोजित इन राउंड्स ने युवाओं को ‘केंद्रीय बजट 2026: युवा शक्ति-संचालित बजट’ विषय पर क्षेत्रीय शासन-व्यवस्था की सार्थक झलक दिखाई।
• राज्य विधानसभा अध्यक्षों और राज्यपालों की अध्यक्षता में हुए इन सत्रों ने सार्वजनिक चर्चा में युवाओं की आवाज़ को और मज़बूत किया।

राष्ट्रीय राउंड (15-17 जून, 2026):

• सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले प्रतिनिधि ग्रैंड फिनाले के लिए नई दिल्ली में इकट्ठा होंगे। • नेशनल राउंड में कई तरह की गतिविधियाँ शामिल हैं:
• शुरुआती भाषण: हर टीम का एक प्रतिनिधि ‘नारी शक्ति वंदन: समावेशिता को बढ़ावा और विकसित भारत 2047’ विषय पर सभा को संबोधित करेगा; हर प्रतिनिधि 3 मिनट तक बोलेगा।
• प्रश्नकाल: संसदीय भावना के अनुरूप, टीमें सवाल पूछेंगी और जवाब देंगी — सवाल के लिए 3 मिनट और जवाब के लिए 3 मिनट — ताकि एक सामूहिक प्रस्ताव तैयार किया जा सके।
• मास्टरक्लास: एक जानी-मानी हस्ती भाषण कला और पब्लिक स्पीकिंग पर मास्टरक्लास लेंगी, जिससे भाग लेने वाले युवाओं में नेतृत्व क्षमता और निखरेगी।
• पीएम संग्रहालय का दौरा: प्रतिनिधि पीएम संग्रहालय के खास दौरे के ज़रिए भारत की समृद्ध राजनीतिक विरासत और नेतृत्व की परंपरा को जानेंगे।
• नई संसद का दौरा: भारत की नई संसद इमारत का एक प्रेरणादायक दौरा, जो प्रतिभागियों को देश के लोकतंत्र के केंद्र से सीधे जोड़ेगा।
• पुरस्कार समारोह: 17 जून को ‘विकसित भारत युवा संसद 2026’ पुरस्कार दिए जाएंगे, जिनमें युवा प्रतिभागियों के बेहतरीन योगदान को सम्मानित किया जाएगा।

‘विकसित भारत युवा संसद’ सिर्फ़ एक कार्यक्रम नहीं है — यह एक ऐसा आंदोलन है जो भारत के युवाओं की ऊर्जा, विचारों और आकांक्षाओं को राष्ट्रीय चर्चा का हिस्सा बनाता है। सेंट्रल हॉल में तैयार किए गए प्रस्ताव इन तीन दिनों के बाद भी गूंजते रहेंगे और युवा नेताओं की एक ऐसी पीढ़ी को प्रेरित करेंगे जो ‘विकसित भारत 2047’ की ओर भारत की यात्रा की ज़िम्मेदारी उठाएगी।

उद्घाटन समारोह

‘विकसित भारत युवा संसद’ का उद्घाटन 16 जून, 2026 को नई दिल्ली में संसद के सेंट्रल हॉल में लोकसभा के माननीय अध्यक्ष श्री ओम बिरला करेंगे। भारत सरकार के युवा मामले और खेल मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया भी इस कार्यक्रम में शामिल होंगे।

ट्राई ने दिल्ली-एनसीआर मेट्रो मार्गों पर मोबाइल नेटवर्क गुणवत्ता का आकलन किया

दिल्ली / सत्ता संदेश

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण ने सेक्टर -51 नोएडा से डिपो स्टेशन (एक्वा लाइन), द्वारका सेक्टर-21 से नोएडा इलेक्ट्रॉनिक सिटी (ब्लू लाइन 1), वैशाली से यमुना बैंक (ब्लू लाइन 2), कीर्ति नगर से ब्रिगेडियर होशियार सिंह (ग्रीन लाइन), द्वारका से ढांसा बस स्टैंड (ग्रे लाइन), बॉटनिकल गार्डन से कृष्णा पार्क एक्सटेंशन (मैजेंटा लाइन), दीपाली चौक से मजलिस पार्क (मैजेंटा लाइन एक्सटेंशन), नई दिल्ली से यशोभूमि द्वारका सेक्टर-25 (ऑरेंज लाइन), मयूर विहार-1 से मौजपुर-बाबरपुर (पिंक लाइन), शिव विहार से मयूर विहार-1 (पिंक लाइन एक्सटेंशन), सेक्टर 55-56 से फेज-3 (रैपिड मेट्रो), शहीद स्थल से रिठाला (रेड लाइन), राजा नहर सिंह (बल्लभगढ़) से कश्मीरी गेट (वायलेट लाइन), समयपुर बादली से मिलेनियम सिटी सेंटर (येलो लाइन) और दिल्ली से मेरठ (नमो भारत आरआरटीएस) तक के मेट्रो मार्गों पर मोबाइल नेटवर्क की गुणवत्ता का आकलन किया।


ट्राई ने अप्रैल 2026 के दौरान दिल्ली मेट्रो रेल निगम, नोएडा मेट्रो रेल निगम और दिल्ली एलएसए के अंतर्गत राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम के मेट्रो मार्गों पर किए गए स्वतंत्र ड्राइव टेस्ट (आईडीटी) के निष्कर्ष आम दूरसंचार उपभोक्ताओं की जानकारी के लिए जारी किए हैं। इस ड्राइव टेस्ट का उद्देश्य दूरसंचार सेवा प्रदाताओं (टीएसपी) द्वारा प्रदान की जाने वाली मोबाइल नेटवर्क सेवाओं (वॉयस और डेटा दोनों) की वास्तविक समय गुणवत्ता का आकलन और सत्यापन करना है। इस परीक्षण के दौरान ट्राई कवरेज, कॉल ड्रॉप रेट (सीडीआर), कॉल सेटअप सक्सेस रेट (सीएसआर), डेटा डाउनलोड (डीएल) और अपलोड (यूएल) थ्रूपुट आदि जैसे प्रमुख सेवा गुणवत्ता (क्यूओएस) मापदंडों के लिए टीएसपी के प्रदर्शन को रिकॉर्ड करता है, जिन्हें बाद में उपभोक्ताओं को सूचित करने और टीएसपी को अपनी सेवाओं में सुधार करने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु प्रकाशित किया जाता है।


इन परिक्षणों को शहरों, हॉटस्पॉट, सार्वजनिक परिवहन केंद्रों आदि जैसे विभिन्न उपयोग परिवेशों में सभी टीएसपी (ट्रांसपोर्टर सेवा प्रदाता) के मोबाइल नेटवर्क प्रदर्शन को मापने के उद्देश्‍य से तैयार किया गया है। इस प्रकार के ड्राइव टेस्टिंग में, 2जी, 3जी, 4जी और 5जी नेटवर्क पर सभी दूरसंचार कंपनियों के सिम कार्ड का उपयोग करके लाइव डेटा और वॉयस सेशन स्थापित किए जाते हैं। कई उन्नत टेस्ट हैंडसेट का उपयोग किया जाता है और उन्नत सॉफ्टवेयर सिस्टम का उपयोग करके सेशन की वास्तविक समय में निगरानी और विश्लेषण किया जाता है।

भारतीय रेलवे ने उत्तरी रेलवे के अंबाला मंडल के लिए ‘कवच परियोजना’ की दी स्वीकृति

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

रेल सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए भारतीय रेलवे ने उत्तरी रेलवे के अंबाला मंडल के शेष ब्रॉड गेज रेल खंडों पर ‘कवच’ प्रणाली स्थापित करने की स्‍वीकृति प्रदान की है। यह परियोजना 811 किलोमीटर के मार्ग को कवर करती है और इसके लिए 201 करोड़ रुपये की लागत स्वीकृत की गई है। इस कार्य को भारतीय रेलवे के शेष मार्गों पर ‘एलटीई-आधारित संचार नेटवर्क’ के साथ कवच प्रणाली के प्रावधान वाले व्यापक कार्यक्रम के तहत मंजूरी दी गई है।

इस स्वीकृत कार्य के अंतर्गत अंबाला मंडल के कई महत्वपूर्ण रेल मार्ग शामिल होंगे, जिनमें अंबाला छावनी-लुधियाना, कालका-चंडीगढ़-न्यू मोरिंडा-साहनेवाल, सरहिंद-दौलतपुर चौक, राजपुरा-बठिंडा-श्री गंगानगर और लुधियाना-धुरी-जाखल रेलखंड शामिल हैं।

ये मार्ग हरियाणा, पंजाब और हिमाचल प्रदेश राज्यों को जोड़ने वाले प्रमुख रेल गलियारों के रूप में कार्य करते हैं। यहां से भारी मात्रा में यात्री और मालगाडि़यों का आवागमन होता है, जो इस पूरे क्षेत्र में लोगों और सामान की आवाजाही में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

‘कवच’ स्वदेशी रूप से विकसित एक स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली है, जिसे परिचालन सुरक्षा बढ़ाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह प्रणाली रेड सिग्नल पार करने की घटनाओं को रोकने में मदद करती है, असुरक्षित स्थितियों से बचने के लिए आवश्यकता पड़ने पर स्वचालित रूप से ब्रेक लगाती है, गंभीर परिस्थितियों में ट्रेन की गति को नियंत्रित करती है और ट्रेनों की आपस में होने वाली टक्करों के जोखिम को काफी हद तक कम करती है।

भारतीय रेलवे अपने नेटवर्क पर अधिक व्‍यस्‍तता वाले और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मार्गों पर सुरक्षा, विश्वसनीयता और क्षमता बढ़ाने के निरंतर प्रयासों के तहत चरणबद्ध तरीके से ‘कवच’ प्रणाली का विस्तार कर रहा है।

रेलवे ने अहमदाबाद डिवीजन के लिए 140 करोड़ रुपये की कवच परियोजना को मंजूरी दी

गुजरात / सत्ता संदेश

रेलवे ने रेल सुरक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, गुजरात के पश्चिमी रेलवे के अहमदाबाद डिवीजन के 48 ब्लॉक खंडों में फैले 598 किलोमीटर मार्ग पर कवच परियोजना के चौथे चरण को मंजूरी दी है। इस परियोजना को रेलवे मार्गों पर लॉन्ग टर्म इवोल्यूशन (एलटीई) आधारित संचार तकनीक के साथ कवच उपलब्ध कराने के लिए बनाए गए व्यापक कार्यक्रम के अंतर्गत 140 करोड़ रुपये की लागत से स्वीकृत किया गया है।


इससे पहले, अहमदाबाद डिवीजन के लगभग 702 किलोमीटर मार्ग पर कवच के लिए पहले ही स्वीकृति दी जा चुकी है। वर्तमान परियोजना की मंजूरी के साथ, डिवीजन के शेष खंड भी कवच प्रणाली के अंतर्गत आ जाएंगे, जिससे पूरे डिवीजन में स्वदेशी ट्रेन सुरक्षा प्रणाली के व्यापक उपयोग का मार्ग प्रशस्त होगा।


कवच स्वदेशी रूप से विकसित स्वचालित ट्रेन सुरक्षा (एटीपी) प्रणाली है जिसे परिचालन सुरक्षा बढ़ाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह प्रणाली खतरे के सिग्नल को पार करने (एसपीएडी) से रोकने, गंभीर परिस्थितियों में स्वचालित रूप से ब्रेक लगाकर रेल की गति को नियंत्रित करके दुर्घटनाओं के जोखिम को काफी हद तक कम करती है।


रेलवे सुरक्षा को मजबूत करने और रेल संचालन को आधुनिक बनाने के अपने निरंतर प्रयासों के तहत पूरे नेटवर्क में कवच कार्यक्रम का विस्तार कर रहा है।

एनसीसी ने युवाओं के लिए आंध्र प्रदेश और झारखंड में दो नए राज्य निदेशालय स्थापित किए

दिल्ली / सत्ता संदेश

एनसीसी महानिदेशालय मुख्यालय ने युवाओं को सशक्त बनाने और राष्ट्रीय कैडेट कोर तक पहुंच का विस्तार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए आंध्र प्रदेश और झारखंड में स्वतंत्र राज्य निदेशालयों के गठन को मंजूरी दे दी है। इससे भारत में एनसीसी राज्य निदेशालयों की कुल संख्या 17 से बढ़कर 19 हो गई है।

आंध्र प्रदेश और झारखंड में स्वतंत्र राज्य निदेशालयों की स्थापना से एनसीसी कैडेटों और शिक्षण संस्थानों के साथ और अधिक निकटता से जुड़ सकेगी। नई प्रशासनिक संरचना से अधिक केंद्रित समन्वय, बेहतर पर्यवेक्षण और प्रशिक्षण एवं विकासात्मक कार्यकलापों के लिए बेहतर समर्थन संभव हो सकेगा। साथ ही, बेहतर प्रशिक्षण अवसंरचना और सहायता तंत्र के माध्यम से इन राज्यों के युवाओं के लिए अधिक अवसर उपलब्ध होंगे।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के भारत के युवाओं को सशक्त बनाने के विजन से प्रेरित यह निर्णय, अधिक से अधिक युवाओं को आत्मविश्वास से भरपूर, सक्षम और सामाजिक रूप से प्रतिबद्ध नागरिक बनने में मदद करेगा, जो राष्ट्र की प्रगति में सार्थक योगदान देने के लिए तैयार होंगे।
वर्ष 1948 में 20,000 कैडेटों की प्रारंभिक संख्या के साथ स्थापित एनसीसी, आज विश्व का सबसे बड़ा यूनिफॉर्म वाला युवा संगठन बन गया है, जिसमें 20 लाख से अधिक कैडेट हैं। वर्ष 2014 से 2025 के बीच संगठन में 6 लाख कैडेटों की वृद्धि हुई है और वर्तमान में यह देश भर के 750 से अधिक जिलों में विद्मान है। नई प्रशासनिक शक्ति के साथ यह संगठन जिम्मेदार नागरिकों को तैयार करने और अधिक मजबूत, सक्षम और विकसित भारत के निर्माण में योगदान देने का कार्य जारी रखे हुए है।

सीसीआरएएस और केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय की पहल ने आयुर्वेद ज्ञान विरासत के संरक्षण को दी नई मजबूती

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

उडुपी: भारत की पारंपरिक ज्ञान विरासत के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए आयुष मंत्रालय के तहत कार्यरत CCRAS और शिक्षा मंत्रालय के तहत संचालित CSU ने तिगलारी और प्राचीन कन्नड़ लिपियों में लिखी आयुर्वेद पांडुलिपियों के लिप्यंतरण हेतु 15 दिवसीय क्षमता-निर्माण कार्यशाला का शुभारंभ किया है। यह कार्यशाला उडुपी स्थित श्री पुथिगे नरसिम्हा सभा भवन, गीता मंदिर में आयोजित की जा रही है।


कार्यक्रम का आयोजन CCRAS और केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय द्वारा श्री वदिराजा अनुसंधान फाउंडेशन के सहयोग से संयुक्त रूप से किया जा रहा है। यह पहल श्री पुथिगे मठ के पीठाधिपति श्री श्री सुगुनेन्द्र तीर्थ श्रीपाद तथा कनिष्ठ पीठाधिपति श्री श्री सुश्रीन्द्र तीर्थ श्रीपाद के आशीर्वाद से संचालित हो रही है।
कार्यशाला का उद्देश्य क

र्नाटक के तटीय क्षेत्रों में प्रचलित तिगलारी और प्राचीन कन्नड़ लिपियों में संरक्षित दुर्लभ आयुर्वेद पांडुलिपियों को पढ़ने, समझने, लिप्यंतरित करने और संरक्षित करने के लिए विद्वानों को प्रशिक्षित करना है।


कार्यक्रम का उद्घाटन सीसीआरएएस के महानिदेशक प्रोफेसर वैद्य रबीनारायण आचार्य ने किया। इस अवसर पर श्री पुथिगे मठ के प्रशासक एवं दीवान नागराज आचार्य, राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा विरासत संस्थान (एनआईआईएमएच) हैदराबाद के सहायक निदेशक डॉ. जी.पी. प्रसाद, केंद्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान (सीएआरआई) बेंगलुरु के सहायक निदेशक डॉ. टी. महेश्वर तथा निट्टे विश्वविद्यालय के भारतीय ज्ञान प्रणाली केंद्र के निदेशक डॉ. सुधीर राज के. सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समन्वय श्री वदिराजा अनुसंधान फाउंडेशन के निदेशक विद्वान गोपालचार्य ने किया।


अपने संबोधन में प्रो. वैद्य रबीनारायण आचार्य ने आयुर्वेदिक ज्ञान के संरक्षण, प्रलेखन और प्रसार के लिए सीसीआरएएस द्वारा किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने भारत सरकार के “ज्ञान भारतम मिशन” के तहत देश की समृद्ध ज्ञान परंपराओं को संरक्षित और प्रोत्साहित करने के लिए चलाए जा रहे अभियानों पर भी प्रकाश डाला।


वहीं, डॉ. सुधीर राज के. ने भारत की हस्तलिखित विरासत को संरक्षित करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि भारतीय ज्ञान प्रणालियां अनुसंधान और ज्ञान के प्रसार को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।


15 दिवसीय इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान आयुर्वेद और संस्कृत विषयों से जुड़े युवा शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों को विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में अप्रकाशित आयुर्वेद पांडुलिपियों के अध्ययन, लिप्यंतरण, संपादन और प्रकाशन की प्रक्रिया का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
गौरतलब है कि सीसीआरएएस और केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित यह तीसरी कार्यशाला है। इससे पहले ओडिशा के पुरी में करणी एवं देवनागरी लिपियों तथा केरल के गुरुवायूर में वट्टेझुथु एवं मलयालम लिपियों पर आधारित कार्यशालाओं का सफल आयोजन किया जा चुका है।


इस कार्यशाला में श्री धर्मस्थल मंजुनाथेश्वर आयुर्वेद महाविद्यालय उडुपी और हसन के संकाय सदस्य एवं छात्र, साथ ही श्री पुथिगे मठ के गुरुकुल के संस्कृत विद्यार्थी भाग ले रहे हैं। कार्यक्रम के दौरान तैयार की गई लिप्यंतरित पांडुलिपियों को बाद में सीसीआरएएस और केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित किया जाएगा, जिससे भारत की अमूल्य पारंपरिक ज्ञान संपदा के संरक्षण और व्यापक प्रसार को नई गति मिलेगी।

 श्रीलंका की तेज शुरुआत; 13 ओवर के बाद स्कोर 108/2; भारत ने बनाए 265 रन

खेल समाचार / सत्ता संदेश

भारत-ए और श्रीलंका-ए के बीच दांबुला में त्रिकोणीय सीरीज का चौथा मैच खेला जा रहा है। भारत-ए  की टीम पहले बल्लेबाजी करते हुए 49.2 ओवर में 265 रन पर सिमट गई। जवाब में श्रीलंका ने आक्रामक शुरुआत की है। उसने भी हालांकि, 110+ रन पर तीन विकेट गंवा दिए हैं। फिलहाल सदीरा समरविक्रमा और कप्तान सहन अराचिगे क्रीज पर हैं।


श्रीलंका की पारी
निरोशन डिकवेला और अविष्का फर्नांडो ने पहले विकेट के लिए 30 गेंद में 56 रन जोड़े। इस साझेदारी को निशांत सिंधु ने तोड़ा। उन्होंने अविष्का को बोल्ड किया। अविष्का 14 गेंद में 22 रन बना सके। इसके बाद विशेन हलमबगे 17 रन बनाकर आउट हुए। उन्हें बदोनी ने पवेलियन भेजा। वहीं, डिकवेला 33 गेंद में 37 रन बनाकर विप्रज का शिकार बने।

वैभव सूर्यवंशी ने दिखाई आक्रामकता
भारतीय-ए टीम की बल्लेबाजी एक बार फिर खराब रही। श्रीलंका ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला किया था। विप्रज निगम और सूर्यांश शेडगे ने अर्धशतकीय पारियां खेलीं। भारत-ए को पहला झटका विकेटकीपर बल्लेबाज प्रभसिमरन सिंह के रूप में लगा, जो 13 गेंदों में 11 रन बनाकर मोहम्मद शिराज का शिकार बने। इसके बाद युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने कुछ आकर्षक शॉट लगाए और 14 गेंदों में 21 रन बनाए। उनकी पारी में तीन चौके और एक छक्का शामिल रहा। हालांकि, वह साहन अराचिगे की गेंद पर आउट हो गए।

तिलक और गायकवाड़ भी नहीं चले
दो विकेट गिरने के बाद ऋतुराज गायकवाड़ और कप्तान तिलक वर्मा ने पारी को संभालने का जिम्मा उठाया। दोनों ने 54 गेंद में 52 रन की साझेदारी निभाई। हालांकि, दोनों ज्यादा देर तक नहीं टिक सके। ऋतुराज 42 गेंद में 37 रन और तिलक 32 गेंद में 23 रन बनाकर आउट हुए। ऋतुराज को विजयकांत ने और तिलक को मथुलन ने पवेलियन भेजा।

बदोनी और निशांत भी नहीं चले
इसके बाद बल्लेबाजी करने आए आयुष बदोनी और निशांत सिंधु भी कुछ खास नहीं कर सके। बदोनी 35 गेंद में 15 रन बनाकर वनुजा सहान के शिकार बने। वहीं, सिंधु विजयकांत की गेंद पर कैच आउट हुए। निशांत छह रन ही बना सके। अनुकूल रॉय आठ रन बना सके।  भारत इससे पहले श्रीलंका-ए के खिलाफ मैच जीत चुका है, लेकिन अफगानिस्तान-ए के खिलाफ टीम को डकवर्थ लुईस नियम के तहत हार का सामना करना पड़ा था। 

विप्रज और सूर्यांश के अर्धशतक
आखिरी में विप्रज निगम ने सूर्यांश शेडगे के साथ 90 गेंद में 104 रन की साझेदारी निभाई। सूर्यांश 66 गेंद में तीन चौके और दो छक्के की मदद से 72 रन बनाए। वहीं, विप्रज ने 49 गेंद में छह चौके की मदद से 51 रन की पारी खेली। श्रीलंका-ए की तरफ से मोहम्मद शिराज और विजयकांत ने तीन-तीन विकेट लिए। वहीं, सहन अराचिजे, कुगथास और वानुजा को एक-एक विकेट मिला। 

5 साल बाद विश्वकप में गूंजा भारत का नाम, धीरज बोम्मदेवरा ने तीरंदाजी में जीते 2 स्वर्ण पदक, रचा इतिहास

खेल समाचार / सत्ता संदेश

तुर्किये के अंताल्या में जब भारतीय तीरंदाज धीरज बोम्मादेवरा पोडियम पर खड़े होकर राष्ट्रगान सुन रहे थे, तब यह सिर्फ दो स्वर्ण पदकों की कहानी नहीं थी। यह एक ऐसे परिवार की जीत थी जिसने आर्थिक तंगी, संघर्ष और अनिश्चितताओं के बीच अपने बेटे के सपने को जिंदा रखा।

24 वर्षीय धीरज ने विश्व तीरंदाजी विश्वकप स्टेज-तीन में दो स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। उन्होंने पहले 17 वर्षीय कुमकुम मोहोड के साथ रिकर्व मिश्रित टीम स्पर्धा में स्वर्ण जीता और फिर पुरुष व्यक्तिगत रिकर्व वर्ग के फाइनल में दक्षिण कोरिया के स्टार तीरंदाज ली वू सियोक को हराकर दूसरा स्वर्ण अपने नाम किया।

Mother Mortgaged Her Mangalsutra, Father Became an Archery Judge: Dhiraj's Journey to Double World Cup Gold

पिता ने बेटे के लिए बदल दी जिंदगी
धीरज के पिता श्रवण कुमार खेलों के बड़े प्रशंसक थे। उन्होंने बेटे को बैडमिंटन, फुटबॉल, टेनिस और क्रिकेट से परिचित कराया, लेकिन धीरज का मन कहीं नहीं लगा। एक दिन उनकी नजर तीरंदाजी का अभ्यास कर रहे खिलाड़ियों पर पड़ी और यहीं से सफर शुरू हुआ। धीरज की मदद करने के लिए श्रवण कुमार ने खुद तीरंदाजी को समझना शुरू किया। बाद में उन्होंने तीरंदाजी संघ की जज परीक्षा पास की और आंध्र प्रदेश के वरिष्ठ तीरंदाजी जजों में शामिल हो गए। श्रवण कुमार ने कहा, ‘मैंने खुद तीरंदाजी सीखी ताकि हर कदम पर बेटे का मार्गदर्शन कर सकूं। यह सिर्फ उसका नहीं, हमारा साझा सफर था।’

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जब मां ने गिरवी रखा मंगलसूत्र
धीरज के करियर का सबसे मुश्किल दौर 2017 में आया। बेहतर प्रशिक्षण के लिए उन्हें महंगे विदेशी उपकरणों की जरूरत थी, लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति इसकी इजाजत नहीं देती थी। हालात ऐसे हो गए कि धीरज तीरंदाजी छोड़ने तक का मन बना चुके थे। तभी उनकी मां रेवती ने बड़ा फैसला लिया। उन्होंने अपना मंगलसूत्र गिरवी रखकर कर्ज लिया ताकि बेटे के लिए नया धनुष खरीदा जा सके। धीरज आज भी उस पल को याद करते हैं। उन्होंने कहा, ‘एक समय ऐसा था जब मैं तीरंदाजी छोड़ने वाला था। मेरी मां ने अपना मंगलसूत्र गिरवी रख दिया ताकि मैं धनुष खरीद सकूं। मध्यमवर्गीय परिवार के लिए यह बहुत बड़ी बात होती है।’

पेरिस की निराशा से अंताल्या की जीत तक
दो साल पहले पेरिस ओलंपिक में धीरज पदक के बेहद करीब पहुंचकर चूक गए थे। वह भारत को तीरंदाजी में पहला ओलंपिक पदक दिलाने से बस एक कदम दूर रह गए थे। उस हार ने उन्हें तोड़ा जरूर, लेकिन रोका नहीं। अंताल्या में उन्होंने उसी दक्षिण कोरिया के तीरंदाजों को हराकर दो स्वर्ण पदक जीते, जिनके खिलाफ भारतीय तीरंदाजी टीम अक्सर दबाव महसूस करती थी।

Mother Mortgaged Her Mangalsutra, Father Became an Archery Judge: Dhiraj's Journey to Double World Cup Gold

राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने दी बधाई
आंध्र प्रदेश के राज्यपाल एस. अब्दुल नजीर और मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने धीरज को इस उपलब्धि पर बधाई दी। नायडू ने कहा कि दक्षिण कोरिया के मजबूत प्रतिद्वंद्वियों को हराकर स्वर्ण जीतना धीरज की असाधारण प्रतिभा का प्रमाण है।

Archery World Cup: Dhiraj Bommadevara makes history, winning two gold medals in a single day

अब और ऊंचा है लक्ष्य
विश्वकप में दो स्वर्ण जीतने के बाद भी धीरज खुद को मंजिल पर नहीं मानते। उनके लिए यह सिर्फ शुरुआत है। धीरज ने कहा, ‘आज मैं विश्वकप चैंपियन बना हूं, लेकिन अभी बहुत कुछ हासिल करना बाकी है। यह जीत बताती है कि हम सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। आने वाले समय में भारतीय राष्ट्रगान और ज्यादा बार सुनाई देगा।’ धीरज की यह कहानी बताती है कि सपनों की उड़ान सिर्फ प्रतिभा से नहीं, बल्कि परिवार के त्याग, भरोसे और संघर्ष से भी मिलती है। अंताल्या में जीते गए दो स्वर्ण पदक उसी विश्वास की सबसे चमकदार मिसाल हैं।

महंत खनौरा ने नालों की सफाई न होने पर AAP सरकार पर साधा निशाना

नाभा / सत्ता संदेश

रिपोर्ट : चेतन मेहता

बारिश का मौसम आते ही भादसों इलाके के लोगों की चिंताएं और मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। इस चिंता का मुख्य कारण इलाके से गुजरने वाले बारिश के पानी के नालों की समय पर सफाई न होना है। इस गंभीर मुद्दे को उठाते हुए समाजसेवी और इलाके की जानी-मानी हस्ती महंत खनौरा ने इलाके के लोगों के साथ हालात का जायजा लिया और मौजूदा आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार पर जमकर निशाना साधा।


गंदगी से भरी नहर बाढ़ को दे रही न्योता

लोगों की शिकायतों का समाधान करने पहुंचे महंत खनौरा ने तस्वीर में दिख रहे इलाके के लोगों की एक बड़ी भीड़ को संबोधित करते हुए कहा कि इस समय मानसून नहर के अंदर बड़ी मात्रा में जंगली घास, खरपतवार और गंदगी जमा हो गई है। अगर आने वाले दिनों में भारी बारिश हुई तो पानी की निकासी बंद होने से यह पानी भादसों के आसपास के गांवों, खेतों और रिहायशी इलाकों में घुस जाएगा, जिससे बाढ़ जैसे हालात बन सकते हैं और किसानों की फसलों समेत आम लोगों के जान-माल का भारी नुकसान होने का डर है।

विज्ञापन तक सीमित है ‘आप’ की सरकार: महंत खनोरा

महंत खनोरा ने भगवंत मान सरकार और स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों की कारगुजारी पर सवाल उठाते हुए कहा कि आम आदमी पार्टी सिर्फ बड़े-बड़े दावे करने और विज्ञापन तक ही सीमित रह गई है। जमीनी स्तर पर लोगों की बुनियादी समस्याओं पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बारिश शुरू होने से पहले नालों की सफाई हो जानी चाहिए थी, लेकिन सरकार की लापरवाही के कारण अभी तक काम भी शुरू नहीं हो सका, जिससे लोग डर के साये में जी रहे हैं।

स्थानीय निवासियों ने संघर्ष की चेतावनी दी

इस मौके पर मौजूद भादसों के गणमान्य लोगों और आम लोगों ने कहा कि वे कई बार प्रशासन का दरवाजा खटखटा चुके हैं, लेकिन उन्हें सिर्फ कोरे आश्वासन ही मिले हैं। महंत खानोरा और इकट्ठा हुए लोगों ने सरकार और संबंधित विभाग को चेतावनी दी कि अगर अगले कुछ दिनों में इस बरसाती नाले की युद्ध स्तर पर सफाई नहीं की गई, तो वे प्रशासन के खिलाफ कड़ा संघर्ष और विरोध करने के लिए मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी मौजूदा सरकार और प्रशासन की होगी।


1 जुलाई से महिलाओं को मिलेगी ‘मुख्तार मंत्री मावन-ध्यान सत्कार योजना’ के तहत आर्थिक सहायता

अमृतसर / सत्ता संदेश

मुख्तार मंत्री मावन-ध्यान सत्कार योजना के तहत महिला सत्कार सखियों को मिली खास ट्रेनिंग

योग्य महिलाओं को 1 जुलाई से हर महीने आर्थिक मदद मिलेगी: हरभजन सिंह ETO

पंजाब सरकार द्वारा महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने और सामाजिक सम्मान दिलाने के मकसद से शुरू की गई मुख्तार मंत्री मावन-ध्यान सत्कार योजना को ज़मीनी स्तर पर असरदार तरीके से लागू करने के लिए आज जंडियाला गुरु के इंदर फार्म में महिला सत्कार सखियों के लिए एक खास ट्रेनिंग सेशन रखा गया। ट्रेनिंग के दौरान, सखियों को स्कीम के निर्देशों, योग्यता की शर्तों, एप्लीकेशन प्रोसेस और बेनिफिशियरी के रजिस्ट्रेशन के बारे में डिटेल में जानकारी दी गई।

इस मौके पर पंजाब के पब्लिक वर्क्स मिनिस्टर हरभजन सिंह ETO खास तौर पर शामिल हुए और सखियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है और इसी उद्देश्य से यह ऐतिहासिक योजना शुरू की गई है।

उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत, योग्य सामान्य श्रेणी की महिलाओं को हर महीने 1000 रुपये और अनुसूचित जाति (SC) की योग्य महिलाओं को हर महीने 1500 रुपये की वित्तीय सहायता दी जाएगी। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत वित्तीय सहायता 1 जुलाई से शुरू की जाएगी।

कैबिनेट मंत्री ने कहा कि योजना को सफल बनाने के लिए सरकार द्वारा सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई हैं। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में महिलाओं ने सार्वजनिक सेवा के लिए महिला सत्कार सखी के रूप में अपनी सेवाएं देने की इच्छा व्यक्त की थी, जिसे देखते हुए उन्हें योजना के हर पहलू पर तकनीकी और व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

प्रशिक्षण के दौरान, सखियों को मास्टर ट्रेनरों और पर्यवेक्षकों द्वारा फॉर्म भरने की प्रक्रिया, पात्रता की शर्तों, आवश्यक दस्तावेजों, लाभार्थियों की पहचान और पंजीकरण प्रक्रिया के बारे में विस्तार से बताया गया। सखियों को यह भी कहा गया कि वे अपने-अपने इलाकों में घर-घर जाकर योग्य महिलाओं तक स्कीम की जानकारी पहुंचाएं और उन्हें स्कीम से जोड़ने में अहम भूमिका निभाएं।

हरभजन सिंह ETO ने कहा कि पंजाब सरकार ने लोगों से किए गए वादों और गारंटियों को एक-एक करके पूरा किया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री मां-बेटी सत्कार योजना सरकार की अहम गारंटियों में से एक थी, जिसे अब लागू किया जा रहा है। इस स्कीम से महिलाओं को बड़ी फाइनेंशियल मदद मिलेगी और वे अपने परिवारों की आर्थिक मजबूती में और बेहतर तरीके से योगदान दे पाएंगी।

उन्होंने महिला सत्कार सखियों से अपील की कि वे पूरी लगन, जिम्मेदारी और समर्पण के साथ काम करें और यह पक्का करें कि स्कीम का फायदा हर योग्य महिला तक पहुंचे।

इस अवसर पर विभाग के अधिकारी, मास्टर ट्रेनर, सुपरवाइजर, महिला सत्कार सखी और बड़ी संख्या में महिलाएं मौजूद थीं।