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कपास उद्योग को बड़ी राहत: सरकार ने 30 अक्टूबर 2026 तक आयात शुल्क से दी छूट

नयी दिल्ली / सत्ता संदेश

केंद्र सरकार ने देश के वस्त्र और कपड़ा उद्योग को राहत देते हुए कपास के आयात पर लगने वाले सीमा शुल्क से 30 अक्टूबर 2026 तक छूट देने की घोषणा की है। यह छूट अगले पांच महीनों तक प्रभावी रहेगी और इसका उद्देश्य घरेलू उद्योग को पर्याप्त कच्चा माल उपलब्ध कराना तथा कपास की कीमतों को नियंत्रित रखना है।

सरकार के इस फैसले से कपड़ा, धागा और परिधान उद्योग को विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है। उद्योग जगत लंबे समय से कपास की उपलब्धता और बढ़ती लागत को लेकर चिंता जता रहा था। ऐसे में आयात शुल्क हटाए जाने से विदेशी बाजारों से कपास खरीदना अपेक्षाकृत सस्ता हो जाएगा।

विशेषज्ञों के अनुसार, हाल के महीनों में घरेलू बाजार में कपास की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। कई क्षेत्रों में उत्पादन संबंधी चुनौतियों और वैश्विक मांग में बदलाव के कारण उद्योग पर दबाव बढ़ा था। आयात शुल्क में छूट से कच्चे माल की आपूर्ति बेहतर होने और उत्पादन लागत कम होने की संभावना है।भारत दुनिया के प्रमुख कपास उत्पादक देशों में शामिल है, लेकिन घरेलू मांग और निर्यात आवश्यकताओं को देखते हुए समय-समय पर आयात की जरूरत भी पड़ती है। कपड़ा उद्योग देश के सबसे बड़े रोजगार देने वाले क्षेत्रों में से एक है और लाखों लोगों की आजीविका इससे जुड़ी हुई है।

उद्योग संगठनों का मानना है कि इस निर्णय से सूती धागे और कपड़ों के निर्माताओं को प्रतिस्पर्धी बने रहने में मदद मिलेगी। इससे निर्यात क्षेत्र को भी लाभ मिल सकता है, क्योंकि कम लागत पर उत्पादन होने से भारतीय उत्पाद वैश्विक बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे।

हालांकि कुछ किसान संगठनों ने आशंका जताई है कि सस्ते आयात से घरेलू किसानों को कीमतों के मोर्चे पर दबाव का सामना करना पड़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार को उद्योग और किसानों दोनों के हितों के बीच संतुलन बनाए रखना होगा।

आर्थिक विश्लेषकों के अनुसार, यह फैसला ऐसे समय में आया है जब सरकार विनिर्माण और निर्यात क्षेत्र को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है। कपास आयात पर शुल्क छूट से वस्त्र उद्योग की उत्पादन क्षमता बढ़ाने और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।

फिलहाल उद्योग जगत ने सरकार के इस कदम का स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि इससे आने वाले महीनों में कपड़ा क्षेत्र की वृद्धि को नई गति मिलेगी।

भारत 2035 तक 150 अरब डॉलर की सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन बनाने की दिशा में बढ़े: नीति आयोग

नयी दिल्ली / सत्ता संदेश

NITI Aayog ने शुक्रवार को जारी एक रिपोर्ट में कहा है कि भारत को 2035 तक वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग में केवल भागीदार की भूमिका तक सीमित रहने के बजाय नेतृत्वकारी स्थिति हासिल करने का लक्ष्य रखना चाहिए। इसके लिए देश में 120 से 150 अरब डॉलर तक की सेमीकंडक्टर मूल्य श्रृंखला विकसित करने की आवश्यकता बताई गई है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि आने वाले दशक में सेमीकंडक्टर उद्योग वैश्विक अर्थव्यवस्था का सबसे रणनीतिक और तेजी से बढ़ने वाला क्षेत्र रहेगा, क्योंकि यह इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, रक्षा, टेलीकॉम और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी प्रमुख तकनीकों की रीढ़ है।

नीति आयोग के अनुसार, भारत पहले ही इस क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने और निर्माण क्षमता विकसित करने की दिशा में कदम बढ़ा चुका है, लेकिन दीर्घकालिक सफलता के लिए एक मजबूत इकोसिस्टम विकसित करना जरूरी है, जिसमें डिजाइन, निर्माण, पैकेजिंग और सप्लाई चेन सभी शामिल हों।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में हाल के वर्षों में आए व्यवधानों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि देशों के लिए सेमीकंडक्टर आत्मनिर्भरता रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है। कोविड-19 महामारी और उसके बाद की भू-राजनीतिक तनावों ने इस उद्योग की संवेदनशीलता को और उजागर किया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के पास इस क्षेत्र में बड़ी क्षमता है, खासकर उसके विशाल इंजीनियरिंग टैलेंट, डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार और बढ़ते घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार के कारण। हालांकि, उच्च तकनीकी निवेश, अनुसंधान एवं विकास और वैश्विक प्रतिस्पर्धा जैसी चुनौतियां भी मौजूद हैं।

रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि सरकार को निजी क्षेत्र के साथ मिलकर दीर्घकालिक नीति स्थिरता, कर प्रोत्साहन और बुनियादी ढांचे के विकास पर ध्यान देना चाहिए। इसके अलावा, अनुसंधान संस्थानों और उद्योग के बीच सहयोग को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया है।

नीति आयोग ने कहा कि यदि भारत इस दिशा में सफल होता है, तो वह न केवल आयात पर निर्भरता कम कर सकेगा, बल्कि वैश्विक तकनीकी सप्लाई चेन में एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभर सकता है।

फिलहाल यह लक्ष्य भारत की औद्योगिक और तकनीकी नीति में एक बड़े रणनीतिक बदलाव का संकेत माना जा रहा है, जो आने वाले दशक में देश की आर्थिक संरचना को भी प्रभावित कर सकता है।

आरबीआई रिपोर्ट में बड़ा खुलासा: वित्तीय संस्थानों में 48,000 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के 10,000 से ज्यादा मामले दर्ज

मुंबई / सत्ता संदेश

Reserve Bank of India की ताजा वार्षिक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि देश के वित्तीय संस्थानों में वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 48,000 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी से जुड़े 10,000 से ज्यादा मामले दर्ज किए गए। रिपोर्ट ने बैंकिंग और वित्तीय प्रणाली में बढ़ते साइबर जोखिम तथा वित्तीय अपराधों को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

आरबीआई के अनुसार, धोखाधड़ी के मामलों में डिजिटल बैंकिंग, ऑनलाइन भुगतान, ऋण लेनदेन और फर्जी दस्तावेजों के जरिए की गई वित्तीय अनियमितताएं प्रमुख रूप से शामिल हैं। केंद्रीय बैंक ने कहा कि तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के साथ वित्तीय अपराधों के तरीके भी अधिक जटिल होते जा रहे हैं।

रिपोर्ट में बताया गया कि धोखाधड़ी के कुल मामलों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। हालांकि इनमें से कई मामलों का संबंध पुराने ऋण खातों और पूर्व अवधि की अनियमितताओं से भी है, जिन्हें अब रिपोर्ट किया गया।

विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल बैंकिंग और ऑनलाइन लेनदेन में तेजी आने से ग्राहकों को सुविधा तो मिली है, लेकिन इसके साथ साइबर ठगी, फर्जीवाड़ा और डेटा सुरक्षा की चुनौतियां भी बढ़ी हैं। बैंकिंग क्षेत्र में तकनीकी सुरक्षा और निगरानी तंत्र को लगातार मजबूत करने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

आरबीआई ने बैंकों और वित्तीय संस्थानों को जोखिम प्रबंधन प्रणाली मजबूत करने, साइबर सुरक्षा उपायों को उन्नत करने और संदिग्ध लेनदेन की निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। केंद्रीय बैंक ने ग्राहकों को भी सतर्क रहने और अनजान लिंक, कॉल या डिजिटल भुगतान अनुरोधों से बचने की सलाह दी है।

आर्थिक विश्लेषकों का कहना है कि बड़ी रकम से जुड़े धोखाधड़ी मामलों का असर केवल संबंधित संस्थानों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इससे निवेशकों और आम ग्राहकों का भरोसा भी प्रभावित हो सकता है। इसलिए समय पर पहचान, सख्त निगरानी और त्वरित कार्रवाई बेहद जरूरी है।

रिपोर्ट में यह भी संकेत दिया गया कि वित्तीय क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित निगरानी प्रणाली और उन्नत डेटा विश्लेषण तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ाया जा रहा है, ताकि धोखाधड़ी के मामलों का जल्दी पता लगाया जा सके।

विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले समय में डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार के साथ साइबर सुरक्षा और वित्तीय पारदर्शिता भारतीय बैंकिंग प्रणाली की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल रहेंगी।

टी20 सीरीज में भारत की दमदार शुरुआत, इंग्लैंड को 38 रन से हराया; रोड्रिग्स, यास्तिका और नंदनी चमकीं

लंदन / सत्ता संदेश

India women’s national cricket team ने इंग्लैंड दौरे की टी20 श्रृंखला में शानदार शुरुआत करते हुए England women’s national cricket team को 38 रन से हराकर महत्वपूर्ण जीत दर्ज की। भारतीय टीम की जीत में Jemimah Rodrigues, Yastika Bhatia और पदार्पण कर रहीं Nandini Kashyap का प्रदर्शन बेहद अहम रहा।

भारतीय टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए संतुलित और आक्रामक बल्लेबाजी का प्रदर्शन किया। जेमिमा रोड्रिग्स ने मध्यक्रम में शानदार पारी खेलकर टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया। उन्होंने तेज रन गति बनाए रखते हुए इंग्लैंड के गेंदबाजों पर दबाव बनाया।

यास्तिका भाटिया ने भी महत्वपूर्ण योगदान देते हुए टीम की पारी को स्थिरता दी। दोनों बल्लेबाजों के बीच हुई साझेदारी ने भारत को प्रतिस्पर्धी स्कोर तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई।

मैच की सबसे खास बात रही युवा खिलाड़ी नंदनी का अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण। पहली बार भारतीय टीम की ओर से खेलते हुए उन्होंने आत्मविश्वास से भरा प्रदर्शन किया और अपने खेल से सभी का ध्यान आकर्षित किया। क्रिकेट विशेषज्ञों ने उनके प्रदर्शन को भारतीय महिला क्रिकेट के लिए सकारात्मक संकेत बताया।

लक्ष्य का पीछा करने उतरी इंग्लैंड की टीम भारतीय गेंदबाजों के सामने लगातार संघर्ष करती नजर आई। भारतीय गेंदबाजों ने शुरुआत से ही दबाव बनाए रखा और नियमित अंतराल पर विकेट हासिल किए। इंग्लैंड की बल्लेबाजी कभी भी लक्ष्य की ओर मजबूती से बढ़ती नहीं दिखी।

भारतीय टीम की क्षेत्ररक्षण भी बेहद प्रभावशाली रही। खिलाड़ियों ने कैच पकड़ने और रन बचाने में शानदार तालमेल दिखाया, जिससे इंग्लैंड की टीम पर दबाव लगातार बना रहा।

इस जीत के साथ भारत ने श्रृंखला में बढ़त हासिल कर ली है और टीम का आत्मविश्वास भी मजबूत हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि युवा खिलाड़ियों और अनुभवी बल्लेबाजों के संयोजन ने भारतीय टीम को संतुलन दिया है।

महिला क्रिकेट में भारत का लगातार बेहतर प्रदर्शन यह संकेत देता है कि टीम आने वाले बड़े टूर्नामेंटों के लिए मजबूत तैयारी कर रही है। अब सभी की नजर श्रृंखला के अगले मुकाबले पर टिकी है, जहां इंग्लैंड वापसी की कोशिश करेगा जबकि भारत अपनी बढ़त मजबूत करना चाहेगा।

भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता में तेजी, अंतरिम समझौते के करीब पहुंचे दोनों देश: पीयूष गोयल

नयी दिल्ली / सत्ता संदेश

भारत और United States के बीच चल रही व्यापार वार्ता में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। केंद्रीय मंत्री Piyush Goyal ने कहा है कि दोनों देशों के बीच बातचीत “उत्साहजनक” दिशा में आगे बढ़ रही है और एक अंतरिम व्यापार समझौता जल्द होने की संभावना है।

गोयल ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच विभिन्न व्यापारिक मुद्दों पर लगातार सकारात्मक चर्चा हो रही है। उन्होंने संकेत दिया कि दोनों पक्ष कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहमति के करीब पहुंच चुके हैं और जल्द ही एक अंतरिम व्यवस्था को अंतिम रूप दिया जा सकता है।

भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंध पिछले कुछ वर्षों में लगातार मजबूत हुए हैं। दोनों देश वस्तुओं, सेवाओं, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा और निवेश के क्षेत्र में व्यापक आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं। व्यापार वार्ता का उद्देश्य शुल्क, बाजार पहुंच, आपूर्ति श्रृंखला और निवेश से जुड़े मुद्दों को सरल बनाना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरिम समझौता होता है तो इससे दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों को नई गति मिल सकती है। भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में बेहतर अवसर मिलने की संभावना है, वहीं अमेरिकी कंपनियों को भी भारत के बड़े उपभोक्ता बाजार तक अधिक पहुंच मिल सकती है।

गोयल ने कहा कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए संतुलित और व्यावहारिक समझौते की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार घरेलू उद्योगों और किसानों के हितों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है।

आर्थिक विश्लेषकों के अनुसार, वैश्विक स्तर पर बदलते व्यापारिक समीकरणों और आपूर्ति श्रृंखला पुनर्गठन के बीच भारत और अमेरिका के बीच मजबूत आर्थिक साझेदारी दोनों देशों के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। तकनीक, रक्षा, डिजिटल अर्थव्यवस्था और हरित ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग तेजी से बढ़ा है।

फिलहाल व्यापार जगत की नजर इस संभावित अंतरिम समझौते पर टिकी है, क्योंकि इससे निवेश माहौल और निर्यात क्षेत्र को सकारात्मक संकेत मिल सकते हैं।

बेमौसम बारिश के बावजूद बढ़ेगा गेहूं उत्पादन, 2025-26 में 12.06 करोड़ टन रहने का अनुमान

नयी दिल्ली / सत्ता संदेश

देश में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि जैसी मौसम संबंधी चुनौतियों के बावजूद गेहूं उत्पादन में वृद्धि का अनुमान जताया गया है। केंद्र सरकार द्वारा बुधवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, फसल सत्र 2025-26 में देश का गेहूं उत्पादन 2.29 प्रतिशत बढ़कर 12.06 करोड़ टन रहने का अनुमान है। यह पिछले वर्ष के उत्पादन की तुलना में उल्लेखनीय बढ़ोतरी मानी जा रही है।

कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2024-25 में देश में गेहूं का उत्पादन 11.79 करोड़ टन दर्ज किया गया था, जबकि चालू फसल सत्र के लिए प्रारंभिक अनुमान 12.02 करोड़ टन का लगाया गया था। अब जारी नवीनतम अनुमान इस प्रारंभिक आकलन के लगभग अनुरूप है, जिससे संकेत मिलता है कि प्रतिकूल मौसम के बावजूद उत्पादन पर बड़ा असर नहीं पड़ा।

विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर बीज, आधुनिक खेती तकनीकों, सिंचाई सुविधाओं में सुधार और किसानों द्वारा वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाने के कारण गेहूं उत्पादन में यह बढ़ोतरी संभव हो सकी है। हालांकि कई राज्यों में फसल कटाई के दौरान बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से नुकसान की खबरें सामने आई थीं, फिर भी कुल राष्ट्रीय उत्पादन में गिरावट नहीं आई।

सरकारी अधिकारियों के अनुसार, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्यों में अच्छी पैदावार दर्ज की गई है। खासकर मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में उत्पादन वृद्धि ने कुल राष्ट्रीय आंकड़ों को मजबूत आधार दिया है।

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि देश में खाद्यान्न सुरक्षा बनाए रखने के लिए गेहूं उत्पादन का स्थिर और बढ़ता स्तर बेहद महत्वपूर्ण है। भारत दुनिया के प्रमुख गेहूं उत्पादक देशों में शामिल है और घरेलू खपत के साथ-साथ सरकारी भंडारण व्यवस्था के लिए भी पर्याप्त उत्पादन आवश्यक माना जाता है।

सरकार का मानना है कि उत्पादन बढ़ने से सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) और अन्य कल्याणकारी योजनाओं के लिए गेहूं की उपलब्धता बेहतर बनी रहेगी। इसके अलावा उत्पादन बढ़ने से बाजार में आपूर्ति मजबूत होने और कीमतों पर नियंत्रण बनाए रखने में भी मदद मिल सकती है।

हालांकि विशेषज्ञों ने यह भी चेतावनी दी है कि जलवायु परिवर्तन और असामान्य मौसम की घटनाएं भविष्य में कृषि क्षेत्र के लिए बड़ी चुनौती बन सकती हैं। ऐसे में मौसम अनुकूल खेती, फसल बीमा, जल प्रबंधन और तकनीकी सहायता को और मजबूत करने की जरूरत होगी।

कृषि मंत्रालय द्वारा जारी यह अनुमान किसानों और कृषि क्षेत्र के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। यदि आगामी महीनों में भंडारण और खरीद प्रक्रिया सुचारू रहती है, तो इससे देश की खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।

बेहतर रिटर्न के लिए पेंशन नियामक का बड़ा कदम, नई निवेश श्रेणियों पर बनेगी समिति

दिल्ली / सत्ता संदेश

पेंशन फंड नियामक एवं विकास प्राधिकरण Pension Fund Regulatory and Development Authority ने पेंशन निवेशकों को दीर्घकालिक बेहतर रिटर्न उपलब्ध कराने के उद्देश्य से नई परिसंपत्ति श्रेणियों की संभावनाओं का अध्ययन करने के लिए एक विशेषज्ञ समिति गठित करने का फैसला किया है।

नियामक का मानना है कि बदलते आर्थिक माहौल और निवेश के नए अवसरों को देखते हुए पारंपरिक निवेश विकल्पों के अलावा अन्य परिसंपत्तियों में निवेश की संभावनाओं का आकलन जरूरी हो गया है। समिति विभिन्न निवेश साधनों, जोखिम प्रबंधन और दीर्घकालिक लाभ के पहलुओं का अध्ययन कर अपनी सिफारिशें देगी।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस पहल से पेंशन फंड निवेशकों को भविष्य में अधिक स्थिर और बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना बढ़ सकती है। साथ ही इससे पेंशन क्षेत्र में निवेश के विकल्प भी विस्तृत होंगे।