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स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) ने एग्जीक्यूटिव एजुकेशन प्रोग्राम के लिए MDI, गुड़गांव के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किया

गुड़गांव / सत्ता संदेश

स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) के मैनेजमेंट ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (MTI) और मैनेजमेंट डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट (MDI), गुड़गांव ने 20 मई, 2026 को एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। कंपनी के नई दिल्ली स्थित कॉर्पोरेट ऑफिस में हुआ यह समझौता, SAIL में भविष्य की कमान संभालने वाले लीडर्स को तैयार करने के उद्देश्य से एग्जीक्यूटिव एजुकेशन प्रोग्राम्स पर मिलकर काम करने के लिए किया गया है।

यह साझेदारी अकादमिक ज्ञान को व्यावहारिक इस्तेमाल के साथ जोड़ेगी। इसके तहत कस्टमाइज्ड लीडरशिप प्रोग्राम्स, रणनीति और इनोवेशन पर आधारित लर्निंग इंटरवेंशन, मापने योग्य व्यावसायिक प्रभाव के लिए ‘एक्शन लर्निंग’, ओवरसीज लर्निंग प्रोग्राम, संयुक्त रिसर्च व कंसल्टिंग और कंपनी के अधिकारियों की जरूरतों के हिसाब से तैयार किए गए केस स्टडीज शामिल होंगे। इस सहयोग का मुख्य उद्देश्य ग्लोबल बेस्ट प्रैक्टिसेज के साथ तालमेल बिठाते हुए संगठनात्मक क्षमता को मजबूत करना है।

इस समझौता ज्ञापन (MoU) पर SAIL के एमटीआई (MTI) के कार्यपालक निदेशक (HR-L&D) श्री संजय धर और एमडीआई (MDI), गुड़गांव की प्रोफेसर सुमिता राय (Dean–Industry Connect) ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर SAIL के निदेशक (कार्मिक) श्री के. के. सिंह और सेल तथा एमडीआई के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

जे सी आई लुधियाना सेंट्रल द्वारा आयोजित तीन दिवसीय प्रशिक्षण सत्र स्पीच क्राफ्ट-2026 का सफल समापन

लुधियाना / सत्ता संदेश

पंजाब और हरियाणा के विभिन्न जिलों से 24 प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा

लुधियाना, 30 अप्रैल: जूनियर चैंबर इंटरनेशनल (जे सी आई) लुधियाना सेंट्रल द्वारा स्थानीय होटल आगाज़ में आयोजित तीन दिवसीय स्पीच क्राफ्ट-2026 का कई रोमांचक यादों के साथ सफल समापन हुआ। इसमें जोन-1 से पंजाब और हरियाणा के विभिन्न शहरों से संबंधित 24 सदस्यों ने भाग लिया और इस प्रशिक्षण सत्र के दौरान बातचीत तथा पब्लिक स्पीकिंग से जुड़े तौर-तरीकों को सीखा।

प्रशिक्षण सत्र संबंधी जानकारी देते हुए, जे सी आई लुधियाना सेंट्रल के प्रधान एडवोकेट सिमरप्रीत सिंह आहूजा ने बताया कि यह अवसर सदस्यों के लिए बातचीत और पब्लिक स्पीकिंग से जुड़े तरीकों को सीखने का महत्वपूर्ण मंच रहा। इस तीन दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को अपने परिवार सहित समाज और व्यवसाय से जुड़े लोगों के साथ मजबूत संबंध बनाने हेतु कम्युनिकेशन और पब्लिक स्पीकिंग के गुण सीखने और उन्हें आजमाने का अवसर मिला। उन्होंने बताया कि जे सी आई एक ऐसा मंच है, जो अपने सदस्यों के व्यक्तित्व विकास, व्यवसायिक उन्नति और सामाजिक संबंधों को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाता है।

इस दौरान उन्होंने विशेष रूप से पहुंचे प्रशिक्षकों गुजरात से दर्शन मरजादी, जालंधर से मनप्रीत उबराय और लुधियाना से साक्षी महाजन का धन्यवाद किया। साथ ही प्रशिक्षण के प्रायोजकों को भी विशेष रूप से सम्मानित किया गया। इसी प्रकार उन्होंने मुख्य अतिथि डॉ. राजीव अग्रवाल, गेस्ट ऑफ ऑनर हनी सेठी, गेस्ट ऑफ ऑनर प्रभजोत सिंह, गेस्ट ऑफ ऑनर राहुल आहूजा, चेयरमैन अनुज धीर, सचिव विनायक, पूर्व प्रधान प्रदीप सिंह मुंडी, जोन प्रधान सोमन गोयल, जोन वाइस प्रधान पुनीत चड्ढा, हरप्रीत उबराय, रसलीन कौर, जसपाल सिंह ग्रेवाल, रितिक पलाहा, मनमोहन सिंह, जतिंदर पाल सिंह, जैसमीन कौर, रोहित जिंदल, मित्तुल डंग, गुरप्रीत सिंह रियात, परमजीत सिंह, दीपक सिंह तथा अन्य प्रतिभागियों और होटल स्टाफ का भी प्रशिक्षण सत्र को सफल बनाने के लिए धन्यवाद किया।

भारत का फार्मा सेक्टर : नवाचार और  युवाओं के लिए नया आकाश

श्रीमती अनुप्रिया पटेल

भारत आज दुनिया की ‘फार्मेसी’ के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर चुका है, और माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत’ के विज़न के अनुरूप अब हम केवल जेनेरिक दवा बनाने वाले देश से आगे बढ़कर एक नवाचारआधारित वैश्विक शक्ति बनने की दिशा में अग्रसर हैं। हमारी सरकार का उद्देश्य ऐसी नीतियां बनाना है जिससे देश के हर नागरिक कम कीमत में गुणवत्तापूर्ण दवाएं से मिल सकें। साथ ही सरकार निरंतर अनुसंधान और विकास को बढ़ावा दे रही है और भारतीय फार्मा उद्योग को वैश्विक स्तर पर और अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए काम कर रही है।

भारत की अब तक की सफलता उसकी उत्पादन क्षमता, लागत दक्षता और गुणवत्ता मानकों पर आधारित रही है। विश्व की लगभग 20 प्रतिशत जेनेरिक दवाओं और 60 प्रतिशत वैक्सीन आपूर्ति के साथ देश ने वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसको देखते हुए भारत सरकार ने 8 से 10 वर्षों में देश को उच्च-मूल्य, नवाचार-आधारित बायोफार्मा और उन्नत चिकित्सीय उत्पादों का वैश्विक केंद्र बनाने का लक्ष्य रखा है।

इसकी आधारशिला के रूप में हालिया केंद्रीय बजट में घोषित ₹10,000 करोड़ की ‘बायोफार्मा शक्ति’ पहल महत्वपूर्ण है। यह कार्यक्रम देश में वैज्ञानिक अनुसंधान, नवाचार आधारित उद्योगों और अगली पीढ़ी की दवाओं के विकास को गति प्रदान करेगा।

आर्थिक आंकड़े भी इस बात को दर्शाते हैं कि भारत का फार्मास्युटिकल उद्योग वर्तमान में 50 अरब डॉलर का है। जिस रफ्तार से हम आगे बढ़ रहे हैं, 2030 तक इसके 130 अरब डॉलर तक पहुंचने की पूरी संभावना है। इसे केवल संख्या नहीं, बल्कि देश के लाखों युवाओं के लिए बेहतर भविष्य के रोडमैप के तौर पर भी देखने की जरूरत है।

वर्तमान में फार्मास्युटिकल उद्योग प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से 30 लाख से अधिक लोगों को रोजगार दे रहा है। 2030 तक हेल्थकेयर और फार्मा क्षेत्र में 20 से 25 लाख नए रोजगार सृजित होंने की उम्मीद है। बायोफार्मा, मेडटेक और क्लीनिकल रिसर्च जैसे उभरते क्षेत्रों ने संभावनाओं के नए द्वार खोल दिए हैं।

हमारी सरकार का मानना है कि युवाओं की सफलता की नींव एक मजबूत शैक्षणिक ढांचे पर टिकी होती है। इसी विजन को ध्यान में रखते हुए, केंद्रीय बजट में फार्मा सेक्टर के लिए और भी कई क्रांतिकारी कदम उठाए गए हैं। सरकार ने देश में तीन नए राष्ट्रीय औषधीय शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (नाईपर) स्थापित करने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही, वर्तमान में कार्यरत सात नाईपर संस्थानों को अपग्रेड किया जा रहा है। इन सात संस्थानों में सेंटर ऑफ एक्सीलेंसकी स्थापना की गई है, जो अनुसंधान और विकास को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे। इन केंद्रों के माध्यम से विशेष क्षेत्रों में अनुसंधान को बढ़ावा दिया जा रहा है, नाईपर मोहाली में एंटी-वायरल और एंटी-बैक्टीरियल दवाओं की खोज एवं विकास, नाईपर अहमदाबाद में मेडिकल डिवाइसेज, नाईपर हैदराबाद में बल्क ड्रग्स, नाईपर कोलकाता में फ्लो केमिस्ट्री और सतत विनिर्माण, नाईपर रायबरेली में नोबेल ड्रग डिलीवरी सिस्टम, नाईपर गुवाहाटी में फाइटोफार्मास्यूटिकल्स तथा नाईपर हाजीपुर में बायोलॉजिकल थेरैप्यूटिक्स पर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए गए हैं। इन संस्थानों का सीधा लाभ हमारे विद्यार्थियों को मिलेगा। नाईपर केवल डिग्री देने वाले संस्थान नहीं रह जाएंगे, बल्कि वे ऐसे केंद्र बनेंगे जहां छात्र उद्योग की वास्तविक चुनौतियों पर काम करेंगे। इससे हमारे छात्र केवल ‘जॉब सीकर’ नहीं बल्कि ‘जॉब क्रिएटर’ और नवाचारी बनेंगे।

बदलते दौर में काम करने के तरीके बदल रहे हैं। अनुमान है कि 2030 तक फार्मा सेक्टर के लगभग 30-35 प्रतिशत कार्यबल को रीस्किलिंग यानी नए कौशल सीखने की जरूरत होगी। केयर डिलीवरी, रिसर्च और मैन्युफैक्चरिंग की परिभाषाएं बदल रही हैं। डेटा विश्लेषण, डिजिटल हेल्थ और नियामक मामलों में उच्च कौशल वाले युवाओं की मांग तेजी से बढ़ेगी। हमारी सरकार का ध्यान इसी ‘स्किल गैप’ को भरने पर है। हम चाहते हैं कि हमारे छात्र क्लीनिकल रिसर्च और अनुसंधान और विकास में विश्व स्तरीय प्रशिक्षण प्राप्त करें।

शिक्षा और उद्योग के बीच की दूरी को कम करना हमारी प्राथमिकता है। जब तक हमारे कॉलेजों में पढ़ाया जाने वाला पाठ्यक्रम और उद्योग की जरूरतें एक समान नहीं होंगी, तब तक हम ‘जनसांख्यिकीय लाभांश’ का पूरा लाभ नहीं उठा पाएंगे।

इसीलिए, हम उद्योगअकादमिक साझेदारी को मजबूत कर रहे हैं। इसी दिशा में, शिक्षा और उद्योग के बीच तालमेल बिठाने के लिए नाईपर और उद्योग के बीच 356 एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए हैं। साथ ही स्किल डेवलपमेंट मिशनों के माध्यम से छात्रों को सीधे कंपनियों के साथ जुड़ने के मौके दिए जा रहे हैं। इससे न केवल युवाओं की रोजगार क्षमता बढ़ेगी, बल्कि भारत एक ग्लोबल इनोवेशन हब बनेगा।

औषधि क्षेत्र का विकास जीडीपी बढ़ाने के साथ-साथ देश के युवाओं को सशक्त बनाने का भी एक मिशन है। ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था की नींव हमारे युवा वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और पेशेवरों के कंधों पर है। नाईपर का विस्तार और बजट में किए गए प्रावधान इस बात का प्रमाण हैं। हम एक ऐसा इकोसिस्टम बना रहे हैं जहां एक छात्र अपनी प्रतिभा और कड़ी मेहनत से वैश्विक स्तर पर बदलाव ला सके। भारत के औषधि क्षेत्र का यह स्वर्णिम युग हमारे युवाओं के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर प्रस्तुत करता है, जो माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत @2047’ के विजन को साकार करने की दिशा में एक मजबूत आधार तैयार कर रहा है।

  • लेखक, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय में राज्य मंत्री हैं।
जे सी आई लुधियाना सेंट्रल द्वारा ‘जे कॉम टेबल 4.0 – ग्रोथ सेंट्रल’ का उद्घाटन

लुधियाना / सत्ता संदेश

जे सी आई लुधियाना सेंट्रल द्वारा जे कॉम टेबल 4.0 – ग्रोथ सेंट्रल का शुभारंभ स्थानीय होटल महाराजा रिजेंसी में किया गया। यह पहल युवाओं के बिज़नेस, पर्सनैलिटी डेवलपमेंट और नेटवर्किंग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू की गई है।

इस अवसर पर जे सी आई लुधियाना सेंट्रल के अध्यक्ष एडवोकेट सिमरनप्रीत सिंह ने बताया कि जे कॉम लुधियाना 4.0 – ग्रोथ सेंट्रल युवाओं में उद्यमिता कौशल विकसित करने के साथ-साथ उनके बीच नेटवर्किंग को मजबूत करेगा। इससे बिजनेसमैनों को अपने व्यवसाय में आगे बढ़ने के बेहतर अवसर मिलेंगे। उन्होंने कहा कि संगठन का लक्ष्य सभी को साथ लेकर तरक्की की दिशा में आगे बढ़ना है।

उन्होंने यह भी कहा कि जे सी आई लुधियाना सेंट्रल समय-समय पर अपने सदस्यों के सर्वांगीण विकास के लिए ऐसे प्रयास करता रहा है और भविष्य में भी यह सिलसिला जारी रहेगा।

कार्यक्रम में जोन के चेयरमैन संजय शर्मा, जे कॉम नेशनल डायरेक्टर डॉ. राजीव अग्रवाल, हेड कोच महेश अरोड़ा, असिस्टेंट कोच परमजीत सिंह, जे कॉम टेबल 4.0 के चेयरमैन अमित गुलाटी, जे कॉम टेबल 1.0 के चेयरमैन दमनजीत सिंह, वाइस प्रेसिडेंट गुरप्रीत सिंह रियात, कुलजीत सिंह, आशीष चोपड़ा, तेजस्वी धीमान, रोहित जिंदल, एडवोकेट बलविंदर सिंह, राहुल भारद्वाज, नरेश कुमार शर्मा, जगप्रीत सिंह सहित टेबल 1.0 और 4.0 के सदस्य मौजूद रहे।

चंडीगढ़ में इंटरनेशनल यूथ कॉन्क्लेव का सफल आयोजन; युवाओं के लिए नए अवसरों हेतु MoU हस्ताक्षरित

चंडीगढ़, 28 मार्च 2026: युगांता ग्लोबल यूथ फेडरेशन, भारत द्वारा पोस्ट ग्रेजुएट गवर्नमेंट कॉलेज फॉर गर्ल्स, सेक्टर-42, चंडीगढ़ के सहयोग से इंटरनेशनल यूथ कॉन्क्लेव का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को वैश्विक अवसरों से जोड़ना और अंतरराष्ट्रीय सहभागिता को बढ़ावा देना था।इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में रूसी हाउस, नई दिल्ली की चीफ कोऑर्डिनेटर (यूथ अफेयर्स) सुश्री अनास्तासिया इल्यूशिना उपस्थित रहीं। अपने संबोधन में उन्होंने युवाओं को अंतरराष्ट्रीय शिक्षा, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और विशेष रूप से रूस में उपलब्ध करियर अवसरों को अपनाने के लिए प्रेरित किया। यह कार्यक्रम डॉ. नेमी चंद, स्टेट लाइज़निंग ऑफिसर, नेशनल सर्विस स्कीम (NSS), उच्च शिक्षा विभाग, चंडीगढ़ प्रशासन तथा श्री विनय कुमार, जिला युवा अधिकारी, MY भारत केंद्र, चंडीगढ़, युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से आयोजित किया गया। इनके सहयोग ने कार्यक्रम को सफल और प्रभावशाली बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस कॉन्क्लेव की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि युगांता ग्लोबल यूथ फेडरेशन और पोस्ट ग्रेजुएट गवर्नमेंट कॉलेज फॉर गर्ल्स, चंडीगढ़ के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) का हस्ताक्षर होना रहा। इस समझौते के तहत दोनों संस्थाएं मिलकर युवाओं और विद्यार्थियों के विकास एवं सशक्तिकरण के लिए कार्य करेंगी, उन्हें नए अवसर प्रदान करेंगी, और अंतरराष्ट्रीय एक्सपोजर, नेतृत्व क्षमता तथा कौशल विकास के लिए मंच उपलब्ध कराएंगी।

कार्यक्रम को संस्थान की प्राचार्या प्रो. (डॉ.) बीनू डोगरा का पूर्ण सहयोग प्राप्त हुआ, जिनके मार्गदर्शन में कार्यक्रम का सफल आयोजन संभव हो सका। इस कार्यक्रम में चंडीगढ़ के विभिन्न कॉलेजों से 200 से अधिक NSS एवं MY भारत स्वयंसेवकों और विद्यार्थियों ने भाग लिया। इस कॉन्क्लेव ने प्रतिभागियों को अंतरराष्ट्रीय शिक्षा, एक्सचेंज प्रोग्राम्स और वैश्विक करियर अवसरों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की तथा भारत-रूस युवा संबंधों को और मजबूत किया। इस अवसर पर युगांता ग्लोबल यूथ फेडरेशन के निदेशक रोहित कुमार ने कहा, “हमारा उद्देश्य युवाओं को वैश्विक अवसरों से जोड़ना और ऐसे मंच तैयार करना है जहां उनकी क्षमता को नई दिशा मिल सके। यह कॉन्क्लेव केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक पहल है जो युवाओं को आत्मविश्वासी, जागरूक और भविष्य के लिए तैयार वैश्विक नागरिक बनने के लिए प्रेरित करता है।” प्राचार्या प्रो. (डॉ.) बीनू डोगरा ने भी इस पहल की सराहना करते हुए कहा, “इस प्रकार के सहयोग हमारे विद्यार्थियों के लिए नए अवसरों के द्वार खोलते हैं। इस मंच ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोचने और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया है। हम भविष्य में भी ऐसे प्रयासों का समर्थन करते रहेंगे।”

कार्यक्रम का समापन सकारात्मक वातावरण के साथ हुआ और यह युवाओं के अंतरराष्ट्रीय सहयोग, नेतृत्व विकास और भविष्य के अवसरों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।