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सुरक्षा बहाली के लिए पूर्व क्रिकेटर और सांसद हरभजन सिंह पहुंचे हाई कोर्ट

पंजाब डेस्क : राज्यसभा सांसद और पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह ने अपनी सुरक्षा बहाल करने और अपने घर के बाहर विरोध प्रदर्शन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।हाल ही में आम आदमी पार्टी (AAP) छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हुए हरभजन सिंह के जालंधर स्थित आवास के बाहर आप कार्यकर्ताओं ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया था।

प्रदर्शनकारियों ने उनके घर की दीवारों पर काले पेंट से “गद्दार” लिख दिया था और उनके खिलाफ नारेबाजी की थी। सूत्रों के अनुसार, पाला बदलने के बाद पंजाब पुलिस के सुरक्षाकर्मियों को वापस मुख्यालय रिपोर्ट करने के आदेश दिए गए थे, जिससे उनका सुरक्षा घेरा कम हो गया है।

इस मामले पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने केंद्र और पंजाब सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। साथ ही, अदालत ने सरकार को आदेश दिया है कि हरभजन सिंह और उनके परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

मामले की अगली सुनवाई 12 मई को तय की गई है। यह विरोध प्रदर्शन केवल हरभजन सिंह तक सीमित नहीं रहा; लुधियाना में भी आप कार्यकर्ताओं ने भाजपा में शामिल होने वाले अन्य नेताओं के खिलाफ प्रदर्शन किया और उन्हें “जनमत के साथ विश्वासघात” करार दिया है।

PUNJAB TOP-10 NEWS, चुटकियों में पढ़े बड़ी दिन भर की खबरें…30-04-2026

पंजाब डेस्क : पंजाब और चण्डीगढ़ में आज का दिन राजनीतिक और कानूनी हलचलों से भरा रहा। जहाँ एक ओर आम आदमी पार्टी सरकार के नए बेअदबी कानून को अदालत में चुनौती दी गई, वहीं मुख्यमंत्री भगवंत मान का राष्ट्रपति से मिलने का कार्यक्रम भी चर्चा में रहा। इसके अलावा, खेल जगत से जुड़ी एक शर्मनाक घटना और हिमाचल में हुए दर्दनाक सड़क हादसे ने सबको झकझोर कर रख दिया है।

बेअदबी कानून को ईसाई भाईचारे की चुनौती: पंजाब सरकार द्वारा बेअदबी के लिए उम्रकैद की सजा वाले कानून को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि कानून में केवल श्री गुरु ग्रंथ साहिब का जिक्र है और अन्य धर्मों के ग्रंथों को शामिल न करना संविधान की भावना के खिलाफ है।CM भगवंत मान की राष्ट्रपति से मुलाकात: मुख्यमंत्री भगवंत मान 5 मई को राष्ट्रपति से अकेले मुलाकात करेंगे। वह ‘राइट टू रिकॉल’ के तहत उन 6 राज्यसभा सांसदों की सदस्यता रद्द करने की मांग करेंगे जिन्होंने हाल ही में आम आदमी पार्टी छोड़कर बीजेपी जॉइन की है।

नाबालिग फुटबॉल खिलाड़ी का यौन उत्पीड़न: चण्डीगढ़ में एक नामी फुटबॉल कोच पर टूर्नामेंट के दौरान एक नाबालिग खिलाड़ी के साथ अश्लील हरकत करने का आरोप लगा है। खिलाड़ी ने चण्डीगढ़ के प्रशासक से शिकायत की है कि पुलिस आरोपी को गिरफ्तार करने के बजाय गवाहों पर दबाव बना रही है।

संगरूर में दोहरा हत्याकांड: संगरूर में एक दामाद ने अपने ससुर और साले की गोली मारकर हत्या कर दी। विवाद तब शुरू हुआ जब पत्नी के बुलावे पर ससुर और साला आपसी झगड़ा सुलझाने आए थे, लेकिन बहस बढ़ने पर दामाद ने फायरिंग कर दी।

हिमाचल में दर्दनाक हादसा: माता चिंतपूर्णी के दर्शन कर लौट रहे लुधियाना के दो युवकों की कार खाई में गिरकर आग का गोला बन गई, जिससे दोनों की जिंदा जलकर मौत हो गई। मृतक युवक ने हादसे से महज एक घंटे पहले इंस्टाग्राम पर अपनी मौत से जुड़ी रील पोस्ट की थी।

IPS अजय पाल शर्मा का ‘सिंघम’ अंदाज: लुधियाना के रहने वाले यूपी कैडर के IPS अधिकारी अजय पाल शर्मा इन दिनों बंगाल चुनाव में चर्चा में हैं। पुलिस ऑब्जर्वर के रूप में उन्होंने बदमाशों को चेतावनी दी है कि बदमाशी करने पर उनका “कायदे से इलाज” किया जाएगा।

पंजाब में डिजिटल जनगणना शुरू: पंजाब में आज से ऑनलाइन जनगणना शुरू हो गई है, जो 14 मई तक चलेगी। लोग वेब पोर्टल पर 16 भाषाओं में उपलब्ध 33 सवालों के जवाब देकर खुद अपनी जानकारी भर सकते हैं।

CISCE बोर्ड परीक्षा के नतीजे: काउंसिल फॉर द इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन (CISCE) ने 10वीं और 12वीं के नतीजे घोषित कर दिए हैं। लुधियाना के रेयांश गुप्ता ने 12वीं में 99.25% और अर्णव गर्ग ने 10वीं में 99.2% अंक हासिल कर शानदार प्रदर्शन किया है।

राहुल गांधी की पंजाब कांग्रेस को नसीहत: राहुल गांधी ने हिमाचल के कांगड़ा में पंजाब के कांग्रेस नेताओं के साथ बैठक की। उन्होंने नेताओं को VIP कल्चर छोड़कर सीधे जनता से संवाद करने और सोशल मीडिया पर विपक्षी नैरेटिव का प्रभावी जवाब देने को कहा।

न्यूयार्क में भिड़े पंजाबी युवक: अमेरिका के न्यूयार्क में हॉर्न बजाने को लेकर चार पंजाबी युवक आपस में भिड़ गए और सड़क पर मारपीट की। पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया है और वर्क परमिट खत्म होने के कारण अब उन्हें भारत डिपोर्ट करने की तैयारी की जा रही है।

जाने कौन है डेंटिस्ट से IPS बने लुधियाना के अजय पाल शर्मा: बंगाल चुनाव में दिखा ‘सिंघम’ अवतार, बदमाशों को दी खुली चेतावनी

पंजाब डेस्क : उत्तर प्रदेश कैडर के चर्चित आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा इन दिनों पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में अपने बेखौफ ‘सिंघम’ अंदाज के कारण सुर्खियों में हैं। लुधियाना के रहने वाले इस अधिकारी को चुनाव के दौरान पुलिस ऑब्जर्वर के रूप में तैनात किया गया है, जहाँ उन्होंने चुनावी हिंसा और गुंडागर्दी करने वालों को कड़ा संदेश दिया है।

“बदमाशी की तो कायदे से इलाज होगा“: दक्षिण 24 परगना के फलता क्षेत्र में मतदाताओं को डराने-धमकाने की शिकायतों के बीच अजय पाल शर्मा खुद सीआरपीएफ (CRPF) की टीम के साथ मैदान में उतरे। उन्होंने संदिग्धों और असामाजिक तत्वों को दो टूक चेतावनी देते हुए कहा, “अगर किसी ने बदमाशी की तो उसका कायदे से इलाज होगा”। उनका मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में निष्पक्ष और स्वतंत्र मतदान सुनिश्चित करना था।

डेंटिस्ट से आईपीएस तक का सफर: अजय पाल शर्मा की कहानी प्रेरणादायक है। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई लुधियाना के आर.एस. मॉडल स्कूल से की। वे पेशे से एक डेंटिस्ट (BDS) थे, लेकिन अपने पिता अमरजीत शर्मा (एक सरकारी शिक्षक) के सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने यूपीएससी (UPSC) की तैयारी की और आईपीएस बने। दिलचस्प बात यह है कि उनके छोटे भाई अमितपाल शर्मा भी एक डॉक्टर थे, जो बाद में आईएएस (IAS) बने।

एनकाउंटर स्पेशलिस्ट’ की पहचान: अजय पाल शर्मा को उनकी कार्यशैली के कारण ‘एनकाउंटर स्पेशलिस्ट’ के नाम से भी जाना जाता है। उन्होंने अपने करियर में अब तक 500 से अधिक पुलिस एक्शन का नेतृत्व किया है। जौनपुर में एसपी रहते हुए उन्होंने केवल 22 महीनों में 136 मुठभेड़ों का नेतृत्व किया था। इसके अलावा, रामपुर में तैनाती के दौरान दिग्गज नेता आजम खान के खिलाफ सख्त कार्रवाई करके भी वे चर्चा में रहे थे।

जहाँ बुद्ध घर लौटते हैं

भारत के इतिहास में पहली बार, तथागत बुद्ध के पवित्र अवशेष अपने स्थायी संरक्षणस्थल से उस भूमि को आशीर्वाद देने निकले हैं, जिसने सदियों की कठिनाइयों, ऊँचाइयों और आस्था के बीच धर्म को जीवित रखा। यह एक सभ्यता का अपने आप को नमन है।

श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत द्वारा

किसी राष्ट्र के जीवन में कुछ ऐसे क्षण आते हैं जब इतिहास केवल खुद को दोहराता नहीं — बल्कि और गहरा हो जाता है। इस बुधवार, जब तथागत बुद्ध के पवित्र अवशेष इस पैमाने पर सार्वजनिक श्रद्धा के साथ पहली बार भारत में लद्दाख की धरती पर उतरेंगे, तो मैं खुद को सरकारी भाषा की ओर नहीं, बल्कि किसी बहुत पुरानी चीज़ की ओर — श्रद्धा की ओर — मुड़ते हुए पाता हूँ।

सदियों से लद्दाख ने यह ज्योति संजोए रखी है। उन क्रूर सर्दियों में जो नदियों को जमा देती हैं, उन भू-राजनीतिक दबावों में जो मज़बूत से मज़बूत आत्माओं को भी आज़माते हैं, ऊँचाई की एकाकी दुनिया में और दूर-दराज़ के दर्रों की कठिनाइयों के बीच — लद्दाख के लोगों ने धर्म को ऐसी निष्ठा से जीवित रखा है जो हर संस्था और हर सरकार को नत-मस्तक कर दे। तो यह बिल्कुल उचित है कि भारत का पहला ऐतिहासिक सार्वजनिक प्रदर्शनी किसी महानगर के वातानुकूलित संग्रहालय में नहीं, बल्कि यहाँ — दुनिया की छत पर — हो रहा है, जहाँ आस्था ही जीवन की बुनावट है।

और सोचिए — ये अवशेष कहाँ से आ रहे हैं? वे पिपरहवा, उत्तर प्रदेश से आते हैं — वह स्थान जिसे ऐतिहासिक रूप से प्राचीन कपिलवस्तु से जोड़ा जाता है, सिद्धार्थ गौतम की जन्मभूमि। उन्हें लद्दाख लाना, शाब्दिक अर्थों में, एक घर-वापसी है।

एक ऐसा ‘पहली बार’ जो युगों का बोझ उठाए है

तथागत के पवित्र अवशेषों की इस पावन प्रदर्शनी का आधिकारिक नाम भी एक घोषणा है: “संघर्ष के समय में शांति।” एक ऐसी दुनिया में जो युद्ध, विखंडन और बढ़ती दुश्मनी से जूझ रही है, ये शब्द उस सोच को चुनौती देते हैं जो संघर्ष को अनिवार्य मानती है, शक्ति को आक्रामकता से जोड़ती है, और अनिश्चितता का एकमात्र उत्तर बल में देखती है। बुद्ध ने ढाई हज़ार साल पहले इस चुनौती का जवाब दिया था। हम उनकी भौतिक उपस्थिति को वापस ला रहे हैं ताकि दुनिया को याद दिला सकें — वह उत्तर आज भी उतना ही प्रासंगिक है।

गौतम बुद्ध के पवित्र अवशेष — जिन्हें अत्यंत पवित्रता के साथ संरक्षित किया गया है — पहली बार अपने स्थायी संरक्षण-स्थल से बाहर निकलकर इस पैमाने पर भारतीय भूमि पर दर्शन के लिए आ रहे हैं। Z श्रेणी की सुरक्षा के साथ, एक विशेष विमान में, वे 29 अप्रैल को लेह पहुँचेंगे — और पंद्रह दिनों तक, 1 से 15 मई तक, शुभ 2569वीं वेसाक बुद्ध पूर्णिमा के पावन अवसर से आरंभ होकर, दुनियाभर के श्रद्धालुओं, भिक्षुओं, विद्वानों और तीर्थयात्रियों के लिए यह प्रदर्शनी सुलभ रहेगी।

स्थान भी अपने आप में बहुत कुछ कहते हैं। महाबोधि अंतर्राष्ट्रीय ध्यान केंद्र, ऐतिहासिक लेह पैलेस का धर्म केंद्र, और जीवे-त्सल का शिक्षण स्थल — वही पवित्र भूमि जहाँ परमपावन दलाई लामा ने अपनी शिक्षाएं दी हैं — इस प्रदर्शनी के आयोजन-स्थल होंगे। और अवशेष केवल लेह तक सीमित नहीं रहेंगे। 11 और 12 मई के बीच वे सुदूर ज़ांस्कर घाटी की यात्रा करेंगे — उस समुदाय तक बुद्ध की कृपा पहुँचाने के लिए, जिनकी बौद्ध परंपराएं उनके परिदृश्य की खाइयों जितनी गहरी हैं।

“यह भारत की आत्मा, उसकी सभ्यता और उस शाश्वत संदेश का उत्सव है जो वह एक टूटती हुई दुनिया को देती है।”

वह भूमि जिसने ज्योति को कभी बुझने नहीं दिया

यह समझने के लिए कि लद्दाख इस अवसर के लिए सही घर क्यों है, पहले लद्दाख को समझना होगा। यह केवल मठों और पहाड़ों का एक नाटकीय परिदृश्य नहीं है — चाहे वह परिदृश्य कितना भी मनोरम हो। यह धर्म का एक जीवित विश्वविद्यालय है। हेमिस मठ की शांत ऊँचाइयों से — जिसका वार्षिक उत्सव समूचे हिमालयी संसार से तीर्थयात्रियों को खींचता है — अलची के प्राचीन भित्तिचित्रों तक, जो 10वीं सदी में बने और आज भी भक्ति की प्रतिभा से जीवंत हैं; दिस्कित की विशाल मैत्रेय बुद्ध प्रतिमा से — जो श्योक नदी की ओर अनंत करुणा की दृष्टि से देखती है — थिकसे के बहुस्तरीय ज्ञान तक, जिसकी तुलना अक्सर तिब्बत के महान मठों से की जाती है — लद्दाख हज़ार वर्षों से अधिक समय से बौद्ध दर्शन, कला, पांडुलिपि परंपरा और जीवंत साधना के सबसे असाधारण भंडारों में से एक रहा है।

ये मठ, इनमें रहने वाले भिक्षु — ये उस परंपरा के सक्रिय वाहक हैं जो हिमालयी क्षेत्र के हर भू-राजनीतिक तूफान में टिकी रही। और यह संरक्षण का कार्य उन्होंने उन परिस्थितियों में किया है जो अधिकांश प्रशासकों की कल्पना को भी थका दे: कड़ाके की ठंड, सीमित संसाधन, बुनियादी सुविधाओं का अभाव, और एक ऐसा भूगोल जिसे बसाने के लिए भी साहस चाहिए।

यह भारत की आधिकारिक स्वीकृति है कि लद्दाख हमेशा से क्या रहा है — नक्शे के किनारे पर एक सीमांत क्षेत्र नहीं, बल्कि राष्ट्र की पहचान के केंद्र में धड़कता हुआ एक आध्यात्मिक हृदय।

सभ्यतागत गहराई में निहित एक दृष्टि

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने लद्दाख को बौद्ध संस्कृति और आध्यात्मिकता के एक जीवंत केंद्र के रूप में निरंतर वर्णित किया है। उन्होंने लद्दाख के लोगों की लचीलेपन और देशभक्ति की — विशेषकर कठिन सीमा परिस्थितियों में — अक्सर बात की है, उनकी आध्यात्मिक शक्ति को राष्ट्रीय संकल्प और एकता से जोड़ते हुए। उन्होंने स्पष्ट किया है कि लद्दाख में विकास उसकी अनूठी संस्कृति और पर्यावरण के संरक्षण के साथ-साथ चलेगा।

जैसा कि प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया है: लद्दाख न केवल अत्यंत रणनीतिक महत्त्व की भूमि है, बल्कि बुद्ध की शिक्षाओं का एक जीवंत केंद्र भी है। पवित्र अवशेषों की यह यात्रा एक आध्यात्मिक आशीर्वाद भी है और बौद्ध विरासत को संजोने में लद्दाख की सदियों पुरानी भूमिका, तथा राष्ट्र की सेवा में यहाँ के लोगों के साहस और समर्पण की पहचान भी।

यह दृष्टि — कि लद्दाख एक साथ राष्ट्रीय सुरक्षा का सीमांत और सभ्यतागत ज्ञान का गढ़ है — इस स्थान के बारे में सबसे सुसंगत बात है।

एक टूटती दुनिया को लद्दाख क्या सिखाता है

यह प्रदर्शनी भारत में अब तक की बौद्ध समुदायों की सबसे बड़ी सभाओं में से एक बनने की संभावना रखती है। और ऐसी दुनिया में जो संघर्ष, ध्रुवीकरण और संदेह की राजनीति से परिभाषित होती जा रही है, यह सभा एक ऐसा संदेश देती है जो किसी एक आस्था की सीमाओं से परे जाता है।

अहिंसा, करुणा और आंतरिक जागृति पर बुद्ध की शिक्षाएं किसी एक समुदाय, संप्रदाय या परंपरा की संपत्ति नहीं हैं। चाहे वह गेलुग हो, द्रुकपा, काग्यू, या लद्दाख में फलती-फूलती कोई भी अन्य महान परंपरा — धर्म का सार एक ही रहता है: करुणा का, प्रज्ञा का, सद्भाव का मार्ग।

यह पवित्र प्रदर्शनी, जो ऐसे समय में आ रही है जब क्षेत्र में वसंत आ रहा है और ऊँचे दर्रों से बर्फ पिघलने लगी है, हर उस सीमा को पार करने का आमंत्रण है जो हमें बाँटती है — संप्रदाय की, राष्ट्रीयता की, भय की।

“अवशेष आस्थावानों को आशीर्वाद देते हैं। लेकिन वे एक देखती हुई दुनिया को यह भी याद दिलाते हैं कि शक्ति के सबसे शांत रूप हमेशा सबसे स्थायी रहे हैं।”

इस जीवंत विरासत के प्रति हमारी प्रतिबद्धता

भारत सरकार लद्दाख को दुनिया में बौद्ध संस्कृति के सबसे महत्त्वपूर्ण जीवंत केंद्रों में से एक मानती है। हम प्रतिबद्ध हैं — केवल नीति दस्तावेज़ों की भाषा में नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई में — यहाँ के मठों के संरक्षण, बौद्ध अध्ययन के प्रोत्साहन, और इसकी अनूठी सांस्कृतिक परंपराओं की रक्षा के लिए। इस प्रदर्शनी के हिस्से के रूप में बड़ी संख्या में भिक्षुओं की एक विशाल बौद्ध जाप-सभा की योजना है — जिसे आयोजक Guinness World Records में दर्ज कराना चाहते हैं — जो इस भूमि की उस भक्ति के पैमाने का एक सटीक प्रतीक है जिसे वह जगाती है।

केंद्र सरकार मठीय संस्थाओं और लद्दाख के लोगों के साथ मिलकर काम करती रहेगी ताकि यह समृद्ध विरासत फले-फूले और दुनिया तक पहुँचे। लद्दाख पर्यटन और स्वयं इस पवित्र प्रदर्शनी के लिए हाल ही में लॉन्च किए गए digital portals इसी दिशा में उठाए गए कदम हैं।

संस्कृति मंत्रालय, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ, और लद्दाख के स्थानीय संगठन — गोम्पा एसोसिएशन, बौद्ध एसोसिएशन, और उपराज्यपाल श्री विनय कुमार सक्सेना के नेतृत्व में केंद्रशासित प्रदेश प्रशासन — ने उसी एकता के साथ मिलकर काम किया है जो स्वयं अवशेषों की शिक्षा में निहित है।

एक ऐसा क्षण जो हम सबका है

जैसे ही तथागत बुद्ध के पवित्र अवशेष इस बुधवार लद्दाख पहुँचेंगे, कुछ प्राचीन हलचल करेगा। यह अनुभूति है कि किसी सभ्यता के जीवन में कुछ चीज़ें किसी भी राजनीतिक मौसम के चक्र से बड़ी होती हैं। बुद्ध का करुणा का संदेश उन्हीं चीज़ों में से एक है। उस संदेश के प्रति लद्दाख की निष्ठा भी उन्हीं में से एक है।

बुद्ध के आशीर्वाद से लद्दाख के हर घर में शांति आए, सभी समुदायों में सद्भाव हो, और सभी प्राणियों को आध्यात्मिक जागृति मिले। और यह पवित्र प्रदर्शनी हम सभी को — चाहे हमारी आस्था कुछ भी हो, चाहे हम जहाँ भी खड़े हों — याद दिलाए कि मनुष्य की सबसे गहरी आकांक्षा हमेशा एक ही रही है: बिना पीड़ा पहुँचाए जीना, ज्ञान के साथ कार्य करना, और दुनिया को उससे थोड़ा अधिक शांत छोड़ जाना जितनी हमें मिली थी।

बुद्धं शरणं गच्छामि।

धम्मं शरणं गच्छामि।

संघं शरणं गच्छामि।

(लेखक भारत सरकार के केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री हैं।)

जे सी आई लुधियाना सेंट्रल द्वारा आयोजित तीन दिवसीय प्रशिक्षण सत्र स्पीच क्राफ्ट-2026 का सफल समापन

लुधियाना / सत्ता संदेश

पंजाब और हरियाणा के विभिन्न जिलों से 24 प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा

लुधियाना, 30 अप्रैल: जूनियर चैंबर इंटरनेशनल (जे सी आई) लुधियाना सेंट्रल द्वारा स्थानीय होटल आगाज़ में आयोजित तीन दिवसीय स्पीच क्राफ्ट-2026 का कई रोमांचक यादों के साथ सफल समापन हुआ। इसमें जोन-1 से पंजाब और हरियाणा के विभिन्न शहरों से संबंधित 24 सदस्यों ने भाग लिया और इस प्रशिक्षण सत्र के दौरान बातचीत तथा पब्लिक स्पीकिंग से जुड़े तौर-तरीकों को सीखा।

प्रशिक्षण सत्र संबंधी जानकारी देते हुए, जे सी आई लुधियाना सेंट्रल के प्रधान एडवोकेट सिमरप्रीत सिंह आहूजा ने बताया कि यह अवसर सदस्यों के लिए बातचीत और पब्लिक स्पीकिंग से जुड़े तरीकों को सीखने का महत्वपूर्ण मंच रहा। इस तीन दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को अपने परिवार सहित समाज और व्यवसाय से जुड़े लोगों के साथ मजबूत संबंध बनाने हेतु कम्युनिकेशन और पब्लिक स्पीकिंग के गुण सीखने और उन्हें आजमाने का अवसर मिला। उन्होंने बताया कि जे सी आई एक ऐसा मंच है, जो अपने सदस्यों के व्यक्तित्व विकास, व्यवसायिक उन्नति और सामाजिक संबंधों को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाता है।

इस दौरान उन्होंने विशेष रूप से पहुंचे प्रशिक्षकों गुजरात से दर्शन मरजादी, जालंधर से मनप्रीत उबराय और लुधियाना से साक्षी महाजन का धन्यवाद किया। साथ ही प्रशिक्षण के प्रायोजकों को भी विशेष रूप से सम्मानित किया गया। इसी प्रकार उन्होंने मुख्य अतिथि डॉ. राजीव अग्रवाल, गेस्ट ऑफ ऑनर हनी सेठी, गेस्ट ऑफ ऑनर प्रभजोत सिंह, गेस्ट ऑफ ऑनर राहुल आहूजा, चेयरमैन अनुज धीर, सचिव विनायक, पूर्व प्रधान प्रदीप सिंह मुंडी, जोन प्रधान सोमन गोयल, जोन वाइस प्रधान पुनीत चड्ढा, हरप्रीत उबराय, रसलीन कौर, जसपाल सिंह ग्रेवाल, रितिक पलाहा, मनमोहन सिंह, जतिंदर पाल सिंह, जैसमीन कौर, रोहित जिंदल, मित्तुल डंग, गुरप्रीत सिंह रियात, परमजीत सिंह, दीपक सिंह तथा अन्य प्रतिभागियों और होटल स्टाफ का भी प्रशिक्षण सत्र को सफल बनाने के लिए धन्यवाद किया।

लद्दाख : गृह मंत्री अमित शाह डेयरी अवसंरचना एवं सहकारी पहलों का करेंगे उद्घाटन

दिल्ली/सत्ता संदेश


सहकारिता आधारित ग्रामीण विकास को मजबूत करने और केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में डेयरी क्षेत्र को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के तहत, केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह 1 मई को केंद्रीय बौद्ध अध्ययन संस्थान, लेह में आयोजित एक कार्यक्रम में विभिन्न प्रमुख पहलों का उद्घाटन करेंगे। इस अवसर पर केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह तथा लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना भी उपस्थित रहेंगे।


यह कार्यक्रम दूध प्रसंस्करण क्षमता को बढ़ाने, कोल्ड-चेन प्रणालियों को सुदृढ़ करने तथा स्थानीय डेयरी किसानों के लिए बाजार संपर्क को विस्तारित करने के उद्देश्य से विभिन्न डेयरी अवसंरचना परियोजनाओं के उद्घाटन एवं शिलान्यास का साक्षी बनेगा। इस कार्यक्रम में क्षेत्र में सहकारी डेयरी संचालन के आधुनिकीकरण हेतु डिजिटल एवं संस्थागत पहलों का भी शुभारंभ किया जाएगा।


कार्यक्रम के दौरान माननीय मंत्री कारगिल में 10 टीएलपीडी क्षमता वाले डेयरी प्लांट का शिलान्यास करेंगे तथा लेह में दही एवं पनीर उत्पादन सहित नई डेयरी प्रसंस्करण इकाइयों का उद्घाटन करेंगे। इसके अतिरिक्त, दूध के भंडारण एवं परिवहन अवसंरचना को सुदृढ़ करने के लिए बल्क मिल्क कूलर प्रणाली का शुभारंभ किया जाएगा।


सहकारी क्षेत्र में डिजिटल सशक्तीकरण के विजन को और मजबूत करते हुए, खरीद प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने तथा किसानों को भुगतान में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए एंड्रॉयड-आधारित ऑटोमेटेड मिल्क कलेक्शन सिस्टम एप्लिकेशन का शुभारंभ किया जाएगा।


कार्यक्रम के अंतर्गत एक मोबाइल दूध परीक्षण प्रयोगशाला को भी हरी झंडी दिखाकर रवाना किया जाएगा, जिसका उद्देश्य गुणवत्ता सुनिश्चित करना तथा जमीनी स्तर पर डेयरी किसानों को सहयोग प्रदान करना है। प्रमुख हितधारकों के बीच डेयरी उत्पादों के विपणन को बढ़ावा देने हेतु समझौता ज्ञापन पर भी हस्ताक्षर किए जाएंगे, जिससे स्थानीय उत्पादकों को बेहतर बाजार उपलब्धता और मूल्य प्राप्ति सुनिश्चित होगी।


सरकार के किसान कल्याण और सहकारी सशक्तीकरण पर विशेष जोर के अनुरूप, इस अवसर पर क्षेत्र के प्रगतिशील डेयरी किसानों को सम्मानित भी किया जाएगा। यह पहल सहकारी संस्थाओं को सशक्त बनाने, ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देने तथा देश के दूरस्थ क्षेत्रों में समावेशी आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करने के लिए “सहकार से समृद्धि” के दृष्टिकोण को साकार करने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

Day-NRLM और Help Age India के बीच MoU, वरिष्ठ नागरिक देखभाल को मिलेगा बढ़ावा

दिल्ली/सत्ता संदेश


समावेशी ग्रामीण विकास को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, ग्रामीण विकास मंत्रालय ने हेल्पएज इंडिया के साथ दीनदयाल अंत्योदय योजना–राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के खाद्य, पोषण, स्वास्थ्य एवं स्वच्छता फ्रेमवर्क के अंतर्गत वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल एवं कल्याण को सुदृढ़ करने हेतु एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया।
यह एमओयू मंत्रालय के अपर सचिव टीके अनिल कुमार तथा हेल्पएज इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रोहित प्रसाद द्वारा, वरिष्ठ अधिकारियों एवं बिहार, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, झारखंड और तमिलनाडु के राज्य प्रतिनिधियों की उपस्थिति में हस्ताक्षरित किया गया।


अपर सचिव ने कहा कि वरिष्ठ नागरिकों से संबंधित चुनौतियों के समाधान हेतु समग्र, समुदाय-आधारित एवं अभिसरित दृष्टिकोण आवश्यक है। उन्होंने नीति आयोग द्वारा सुझाए गए सुलभ, सतत एवं गरिमापूर्ण सामुदायिक देखभाल मॉडल के विकास पर बल देते हुए राज्यों के अनुभवों से सीखकर आगे बढ़ने का आह्वान किया।


संयुक्त सचिव स्वाती शर्मा ने कहा कि यह पहल “लखपति दीदी” अभियान को भी सशक्त बनाएगी, क्योंकि स्वस्थ एवं सक्षम महिलाएँ ही आर्थिक प्रगति में अग्रणी भूमिका निभा सकती हैं।


हेल्पएज इंडिया के सीईओ रोहित प्रसाद ने कहा कि भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में, वरिष्ठ नागरिकों की संख्या निरंतर बढ़ रही है और उन्हें स्वास्थ्य, पोषण, गतिशीलता तथा सामाजिक अलगाव जैसी अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि हेल्पएज इंडिया का अनुभव तथा डे-एनआरएलएम का व्यापक एसएचजी नेटवर्क मिलकर इन चुनौतियों के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।


उप सचिव डॉ. मोनिका ने बताया कि FNHW के अंतर्गत किए जा रहे प्रयासों के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से खाद्य, पोषण, स्वास्थ्य एवं स्वच्छता के प्रति जागरूकता एवं व्यवहार परिवर्तन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई हैऔर इसी क्रम में अब वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल को भी प्राथमिकता दी जा रही है।
यह पहल एफएनएचडब्ल्यू फ्रेमवर्क के अंतर्गत वरिष्ठ नागरिक देखभाल के लिए राष्ट्रीय रणनीति के सह-विकास पर केंद्रित होगी। इसके तहत रणनीति निर्माण, क्षमता निर्माण, प्रशिक्षण मॉड्यूल और क्रियान्वयन हेतु आवश्यक संसाधन विकसित किए जाएंगे।


प्रारंभिक चरण में बिहार, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, झारखंड और तमिलनाडु में पायलट परियोजना लागू की जाएगी, जिसके आधार पर एक स्केलेबल मॉडल विकसित किया जाएगा।


यह प्रयास “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसमें प्रत्येक वरिष्ठ नागरिक को गरिमा, सुरक्षा और समावेशन के साथ जीवन जीने का अवसर सुनिश्चित किया जाएगा।

अमित शाह का मिशन पंजाब, नशे के मुद्दे पर ‘आप’ को घेरने की तैयारी

दिल्ली/सत्ता संदेश
पांच राज्यों के चुनाव खत्म होने के बाद अब बीजेपी ने मिशन पंजाब को अमलीजामा पहनाना शुरू कर दिया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह अब हर महीने पंजाब जाएंगे। वह पंजाब में ड्रग्स के खिलाफ यात्रा की शुरुआत करेंगे। पंजाब में अगले साल फरवरी में उत्तर प्रदेश, गोवा, उत्तराखंड और मणिपुर के साथ विधानसभा चुनाव होने हैं। बाकी चार राज्यों में बीजेपी की सरकारें हैं लेकिन पंजाब में बीजेपी अपनी जमीन मजबूत करना चाहती है।


खबरों के मुताबिक, अमित शाह का ‘मिशन पंजाब’ मई महीने से शुरू हो जाएगा. मई में वह पंजाब के दौरे पर जाएंगे। इस दौरान पूरे पंजाब में ड्रग्स के खिलाफ बीजेपी की यात्राओं की शुरुआत भी की जाएगी। इस यात्राओं में अलग-अलग समय पर अलग-अलग जगहों पर बीजेपी के राज्य और केंद्र के बड़े नेता भी समय समय पर जुड़ेंगे। बीजेपी नेता जनता को ये भी बताएंगे की चूंकि पंजाब बॉर्डर राज्य है लिहाजा बीजेपी सरकार बनने पर डबल इंजन सरकार के मार्फत सीमा से ड्रग्स की तस्करी पर भी नकेल लगाने में मदद मिलेगी।

पंजाब में ड्रग्स बड़ा मुद्दा है


बीजेपी चुनावों से पहले ड्रग्स को एक बड़ा मुद्दा बनाना चाहती है इसलिए इसके खिलाफ जनजागरुकता अभियान चलाया जाएगा। बीजेपी नेताओं का कहना है कि अमित शाह ने पूरे देश में ड्रग्स के खिलाफ लडाई छेड़ी हुई है ऐसे में पंजाब को भी ड्रग्स मुक्त किया जाएगा। पार्टी को लगता है कि पंजाब में नशे की लत के चलते लाखों घर बर्बाद हुई, युवाओं में इस लत के चलते परिवार टूट रहे हैं।
बीजेपी का मानना है कि इस अभियान से उनकों लोगों का समर्थन और साथ मिलेगा। साथ ही पंजाब सरकार की ड्रग्स पर नकेल कसने को लेकर नाकामी को भी जनता के सामने लाया जाएगा। इस यात्रा के जरिए राज्य की आम आदमी पार्टी सरकार को इस मुद्दे पर एक्सपोज करने की तैयारी है।

नशे के बहाने ‘आप’ को घेरने की तैयारी में बीजेपी


2016 में बीजेपी अकाली गठबंधन सरकार के समय भी बतौर पार्टी अध्यक्ष उन्होंने यह यात्रा निकालने का फैसला किया था, लेकिन तब अंदरूनी कारणों से इस फैसले को टाल दिया गया था। 2022 में आम आदमी पार्टी ने भी ड्रग्स को विधानसभा चुनाव में एक बड़ा मुद्दा बनाया था और उसकी जीत के पीछे इसे भी एक बड़ा कारण माना गया था। बीजेपी ने पंजाब में अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया है। पार्टी अपने पुराने सहयोगी शिरोमणि अकाली दल के साथ गठबंधन नहीं करेगी।

पंजाब की सियासी जमीन पर कमल खिलाने की तैयारी


मार्च 2026 में अमित शाह ने मोगा में बदलाव रैली के जरिए पंजाब में बीजेपी के चुनावी अभियान की शुरूआत कर दी है। अब इस ड्रग्स के खिलाफ यात्रा से पार्टी को पंजाब के पिंड पिंड तक पहुंचने की उम्मीद है, क्योकि पंजाब का लगभग हर इलाका इससे प्रभावित है। साथ ही बीजेपी का आकलन है कि अब पंजाब के जमीनी हालात बदले हैं। जहां एक तरफ आम आदमी पार्टी सरकार अपने वादे पूरे नहीं कर पाई तो वहीं कांग्रेस भी अंदरूनी गुटबाजी से जुझ रही है। अकाली दल भी सरदार प्रकाश सिंह बादल के निधन के बाद आंतरिक मतभेदों में उलझी है। लिहाजा बीजेपी को इस बार पंजाब सियासी तौर पर उपजाऊ जमीन नजर आ रहा है।

कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीईडीए) ने पीलीभीत में बासमती  और जैविक प्रशिक्षण केंद्र के लिए 70 वर्ष के पट्टे समझौते पर हस्ताक्षर किए

फसल मूल्यांकन और निर्यात योजना को बेहतर बनाने के लिए एआई-आधारित बासमती धान सर्वेक्षण परियोजना का शुभारंभ


दिल्ली /सत्ता संदेश

भारत में बासमती चावल पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीईडीए), कृषि विभाग और उत्तर प्रदेश सरकार के बीच 70 वर्ष के पट्टे समझौते पर हस्ताक्षर के माध्यम से पीलीभीत के टांडा बिजैसी में बासमती और जैविक प्रशिक्षण केंद्र-सह-प्रदर्शन फार्म की स्थापना के लिए भूमि हस्तांतरण को औपचारिक रूप दिया गया है।

प्रस्तावित बासमती एवं जैविक प्रशिक्षण केंद्र-सह-प्रदर्शन फार्म लगभग सात एकड़ क्षेत्र में विकसित किया जाएगा। इस केंद्र में सभागार, बासमती एवं जैविक खेती पर संग्रहालय और गैलरी, सम्मेलन कक्ष, प्रयोगशाला और जैविक खेती के लिए आवश्यक सामग्री के भंडारण की सुविधा उपलब्ध होगी। आशा है कि यह सुविधा बासमती एवं जैविक किसानों के प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण में सहायक होगी और कृषि विशेषज्ञों एवं छात्रों के लिए एक संसाधन केंद्र के रूप में भी कार्य करेगी।

एक बार स्थापित हो जाने के पश्‍चात यह केंद्र देश का पहला बासमती जैविक प्रशिक्षण और प्रदर्शन फार्म होगा, जिसमें पारंपरिक और जैविक दोनों प्रकार की बासमती की खेती शामिल होगी। अपने स्‍थल स्थिति के कारण  इस केंद्र से उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के किसानों और हितधारकों को लाभ मिलने की आशा है।

इस अवसर पर केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग एवं इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री श्री जितिन प्रसाद ने सभा को संबोधित करते हुए इस पहल की सराहना करते हुए पीलीभीत को बासमती चावल के प्रमुख उत्पादक क्षेत्र के रूप में विकसित करने की अपार संभावनाओं की जानकारी दी। उन्होंने जैविक खेती के विस्तार के महत्व पर बल देते हुए किसानों की भागीदारी बढ़ाने का आह्वान किया। श्री प्रसाद ने आगंतुकों और छात्रों को सूचना एवं अनुभवात्मक शिक्षा प्रदान करने के लिए केंद्र में एआई-आधारित इंटरैक्टिव संग्रहालय स्थापित करने के साथ-साथ किसानों के लिए गुणवत्तापूर्ण बासमती बीज और जैविक सामाग्री उपलब्ध कराने हेतु एक विशेष आउटलेट स्थापित करने का सुझाव दिया।

इस अवसर पर श्री जितिन प्रसाद ने भारत की पहली एआई-आधारित बासमती धान सर्वेक्षण परियोजना (2026-2028) का भी अनावरण किया, जिसे एपीईडीए अखिल भारतीय चावल निर्यातक संघ (एआरआईईए) के सहयोग से कार्यान्वित किया जाएगा। यह परियोजना लगभग 40 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को कवर करेगी, 150,000 से अधिक जमीनी स्तर के सर्वेक्षण बिंदुओं से डेटा एकत्र करेगी और 500,000 से अधिक किसानों के साथ मिलकर कार्य करेगी। इसका उद्देश्य सटीक फसल मूल्यांकन, किस्मों की पहचान, वैज्ञानिक परामर्श सेवाएं और बेहतर निर्यात योजना में सहयोग करना है।

यह भी घोषणा की गई कि आगामी केंद्र को राष्ट्रीय स्तर के बासमती चावल परीक्षणों के लिए अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना (एआईसीआरपी) केंद्र के रूप में नामित किया गया है, जैसा कि 61वीं वार्षिक चावल अनुसंधान समूह की बैठक में मान्यता दी गई थी। इसके साथ ही, पीलीभीत, नगीना (बिजनौर) और बीईडीएफ मोदीपुरम के बाद उत्तर प्रदेश के बासमती जीआई क्षेत्र में तीसरा एआईसीआरपी केंद्र बन जाएगा। इससे क्षेत्र की कृषि-जलवायु परिस्थितियों के अनुकूल नई बासमती किस्मों के व्यवस्थित परीक्षण और मूल्यांकन में सुविधा होगी।

भारत का भौगोलिक संकेत (जीआई) प्राप्त उत्पाद बासमती चावल का निर्यात 2025-26 में 5.67 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य का रहा, जिसमें निर्यात की मात्रा लगभग 65 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गई। इस क्षेत्र की मध्य पूर्व, यूरोप और उत्तरी अमेरिका के बाजारों में मजबूत उपस्थिति के साथ भारत के कृषि निर्यात में महत्वपूर्ण योगदान देना जारी है।

एपीडा सतत कृषि पद्धतियों को अपनाने में सहायता के लिए प्रशिक्षण, प्रमाणन सहायता और बाजार संपर्क पहलों के माध्यम से जैविक खेती को बढ़ावा दे रहा है। ये प्रयास पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार उत्पादों की वैश्विक मांग के अनुरूप हैं।

इस कार्यक्रम में वाणिज्य और उद्योग तथा इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री श्री जितिन प्रसाद, जिले के वरिष्ठ जन प्रतिनिधि, एपीईडीए के अधिकारी, उत्तर प्रदेश सरकार और अन्य हितधारक उपस्थित थे।

पंजाब में जनगणना का पहला चरण शुरू, 14 मई तक स्व-गणना; 15 से 30 जून घर-घर सर्वे

केंद्र सरकार ने 1 अप्रैल से 30 सितंबर के बीच पहले चरण का काम पूरा करने के निर्देश दिए है। इसके तहत पंजाब के स्थानीय निकाय विभाग ने स्व-गणना की प्रक्रिया को मई में लागू किया है और डोर टू डोर सर्वे 15 मई से शुरु करने का फैसला लिया है।


पंजाब में जनगणना के पहले चरण की शुरुआत 30 अप्रैल से हो रही है। इस चरण में 14 मई तक स्व-गणना की प्रक्रिया चलेगी जिसमें लोग मोबाइल एप या वेब पोर्टल के जरिए अपनी जानकारी खुद दर्ज कर सकेंगे।


जिन लोगों के पास मोबाइल या इंटरनेट सुविधा नहीं है उनकी मदद के लिए फील्ड कर्मचारी उपलब्ध रहेंगे। इस दौरान घरों की सूची तैयार की जाएगी जबकि 15 मई से 30 जून तक गणनाकर्मी घर-घर जाकर जानकारी जुटाएंगे।


इस प्रक्रिया में लोगों से कुल 33 सवाल पूछे जाएंगे। इनमें घर में गाड़ियों की संख्या, लैपटॉप या कंप्यूटर की उपलब्धता, इंटरनेट सुविधा और पीने के पानी का मुख्य स्रोत जैसी जानकारियां शामिल हैं। इसके अलावा घर की बुनियादी सुविधाओं और स्थिति से जुड़े सवाल भी पूछे जाएंगे।


पंजाब के स्थानीय निकाय विभाग पहले ही नगरपालिका और वार्ड सीमाओं का रिकॉर्ड तैयार कर चुके है। अमृतसर, जालंधर और मलेरकोटला में प्री-टेस्ट भी किया गया था जिससे प्रक्रिया में आने वाली दिक्कतों को पहले ही समझ लिया गया।

घर की संरचना और सुविधाओं पर खास फोकस


घरों की सूची तैयार करते समय गणनाकर्मी भवन संख्या, फर्श दीवार और छत की सामग्री, घर के उपयोग और उसकी स्थिति से जुड़ी जानकारी दर्ज करेंगे। इसके साथ परिवार संख्या, परिवार के मुखिया का नाम और विवाहित दंपतियों की संख्या भी पूछी जाएगी। स्नान सुविधा, रसोईघर और एलपीजी या पीएनजी कनेक्शन जैसी सुविधाओं का ब्योरा भी लिया जाएगा।

अधिकारियों की तैनाती और अगला चरण तय


जनगणना प्रक्रिया को सुचारु बनाने के लिए विभाग ने अतिरिक्त, संयुक्त और सहायक आयुक्त के साथ नगर योजनाकार, अधीक्षक अभियंता और नगर निगम इंजीनियरों की तैनाती की है। ये सभी अधिकारी जनगणना अधिनियम 1948 के तहत अपनी जिम्मेदारियां निभाएंगे।