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त्विषा शर्मा मौत मामला: सीबीआई ने पूर्व न्यायाधीश गिरिबाला सिंह को किया गिरफ्तार

नयी दिल्ली: / सत्ता संदेश

Central Bureau of Investigation ने त्विषा शर्मा की मौत से जुड़े मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए आरोपी उनकी सास और पूर्व न्यायाधीश Giribala Singh को गुरुवार को गिरफ्तार कर लिया। यह कार्रवाई मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज किए जाने के एक दिन बाद की गई।

यह मामला Madhya Pradesh High Court के आदेश के बाद और गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है, जिसमें अदालत ने गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत रद्द कर दी थी। इसके बाद जांच एजेंसी ने उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।

सीबीआई के अनुसार, यह मामला त्विषा शर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत से जुड़ा है, जिसकी जांच कई पहलुओं से की जा रही थी। जांच एजेंसी का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयान के आधार पर आगे की कार्रवाई की गई है।

सूत्रों के अनुसार, मामले में घरेलू विवाद और पारिवारिक तनाव की भी भूमिका सामने आई है। हालांकि आधिकारिक रूप से सीबीआई ने विस्तृत आरोपों का खुलासा नहीं किया है, लेकिन जांच में कई अहम सुरागों पर काम किया जा रहा है।

गिरिबाला सिंह, जो पूर्व में न्यायिक सेवा से जुड़ी रही हैं, की गिरफ्तारी ने मामले को और संवेदनशील बना दिया है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि किसी पूर्व न्यायाधीश के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई एक गंभीर और असाधारण स्थिति होती है, जो न्यायिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर ध्यान आकर्षित करती है।

मृतका के परिवार ने सीबीआई की कार्रवाई का स्वागत करते हुए निष्पक्ष जांच की मांग दोहराई है। वहीं आरोपी पक्ष की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

अधिकारियों ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ की जा रही है और मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच जारी है। एजेंसी जल्द ही अदालत में आगे की रिपोर्ट पेश कर सकती है।

फिलहाल इस हाई-प्रोफाइल मामले में सभी की नजर सीबीआई की आगे की जांच और न्यायिक प्रक्रिया पर टिकी हुई है।

अदालत ने RG Kar रेप-मर्डर केस में सीबीआई की विशेष जांच टीम गठित करने के दिए निर्देश

कोलकाता / सत्ता संदेश

कलकत्ता उच्च न्यायालय ने आरजी कर रेप और हत्या मामले में बृहस्पतिवार को सीबीआई की तीन सदस्यीय विशेष जांच टीम (एसआईटी) के गठन का आदेश दिया। यह टीम प्रशिक्षु डॉक्टर के नौ अगस्त 2024 की रात भोजन करने से लेकर उनके अंतिम संस्कार तक की पूरी घटनाक्रम की जांच करेगी।

गौरतलब है कि नौ अगस्त 2024 की रात अस्पताल में एक प्रशिक्षु डॉक्टर के साथ कथित तौर पर बलात्कार के बाद हत्या कर दी गई थी। इस घटना ने पश्चिम बंगाल समेत पूरे देश में भारी आक्रोश पैदा कर दिया था।

मामले में आरोप लगाए गए हैं कि घटना के बाद सबूत मिटाने और पूरे प्रकरण को दबाने की कोशिश की गई थी।

न्यायमूर्ति शम्पा सरकार और न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष की खंडपीठ ने कहा कि सीबीआई के संयुक्त निदेशक (पूर्वी क्षेत्र) इस एसआईटी का नेतृत्व करेंगे। टीम के बाकी दो सदस्यों की नियुक्ति अदालत के आदेश के 48 घंटे के भीतर की जाएगी।

अदालत ने कहा कि इस बेहद गंभीर और संवेदनशील घटना के सामाजिक प्रभावों को देखते हुए एसआईटी को सबूत नष्ट करने और मामले को दबाने के आरोपों की भी जांच करनी होगी।

पीठ ने एसआईटी को निर्देश दिया कि वह प्रशिक्षु डॉक्टर के अस्पताल में भोजन करने से लेकर अगले दिन शाम को हुए अंतिम संस्कार तक की हर गतिविधि की विस्तार से जांच करे। अदालत ने टीम को 25 जून तक अपनी विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। इसी दिन मामले की अगली सुनवाई भी होगी।

पीड़िता के माता-पिता ने उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल कर अपनी बेटी के साथ हुए बलात्कार और हत्या की व्यापक जांच की मांग की थी। उन्होंने दावा किया था कि इस जघन्य अपराध में एक से अधिक लोग शामिल हो सकते हैं।

इस मामले में नागरिक स्वयंसेवक संजय रॉय को प्रशिक्षु डॉक्टर से बलात्कार और हत्या का दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई जा चुकी है।