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भारत-ऑस्ट्रेलिया रक्षा सहयोग को नई मजबूती, नई दिल्ली में हुई दूसरी रक्षा मंत्रियों की वार्ता

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और ऑस्ट्रेलिया के उप प्रधानमंत्री एवं रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्ल्स ने नई दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में भारत-ऑस्ट्रेलिया रक्षा मंत्रियों की दूसरी संवाद बैठक की सह-अध्यक्षता की। बैठक में दोनों देशों के बीच रक्षा और सुरक्षा सहयोग को और मजबूत बनाने पर व्यापक चर्चा हुई।

दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों में हुई प्रगति का स्वागत करते हुए क्षेत्रीय शांति, सुरक्षा और सामूहिक क्षमता बढ़ाने की दिशा में सहयोग जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई।

बैठक में समुद्री सुरक्षा सहयोग पर विशेष जोर दिया गया। दोनों देशों ने समुद्री निगरानी, समुद्री क्षेत्र जागरूकता गतिविधियों और पनडुब्बी क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की। साथ ही भारतीय तटरक्षक बल और ऑस्ट्रेलिया की समुद्री सीमा कमान के बीच सहयोग को और मजबूत करने पर भी चर्चा हुई।

भारत और ऑस्ट्रेलिया ने स्वतंत्र, खुले और सुरक्षित हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। दोनों पक्षों ने नौवहन और हवाई उड़ान की स्वतंत्रता तथा अंतरराष्ट्रीय कानूनों के पालन के महत्व पर बल दिया।

रक्षा औद्योगिक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए दोनों देशों ने रक्षा सामग्री और रक्षा सेवाओं से संबंधित एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) तैयार करने की घोषणा की। इसके अलावा रक्षा उद्योग, अनुसंधान और नई तकनीकों के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी।

दोनों देशों ने संयुक्त सैन्य अभ्यासों और रक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रमों में बढ़ती भागीदारी का स्वागत किया। ऑस्ट्रेलिया ने एक्सरसाइज टैलिस्मान सेबर 2027 में भारत की भागीदारी की उम्मीद जताई, जबकि भारत ने ऑस्ट्रेलिया के साथ विभिन्न सैन्य अभ्यासों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई।

बैठक में रक्षा विज्ञान, सेंसर प्रौद्योगिकी, सूचना साझाकरण और सैन्य प्रशिक्षण जैसे नए क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। दोनों देशों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में साथ मिलकर काम करने का संकल्प लिया।

विश्व तंबाकू निषेध दिवस: शिक्षा मंत्रालय ने सम्मानित किए तंबाकू-मुक्त स्कूल, लॉन्च किया नया पोर्टल

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

विश्व तंबाकू निषेध दिवस से पहले शिक्षा मंत्रालय के विद्यालय शिक्षा एवं साक्षरता विभाग (डीओएसईएल) ने नई दिल्ली में एक राष्ट्रीय कार्यक्रम आयोजित किया। इस दौरान “तंबाकू-मुक्त पीढ़ी की ओर: स्कूल चैलेंज 2025” के विजेता स्कूलों को सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम में डीओएसईएल के सचिव संजय कुमार ने विजेता स्कूलों को पुरस्कार प्रदान किए। उन्होंने बताया कि देशभर के 17,000 से अधिक स्कूलों ने इस अभियान में भाग लिया। उन्होंने सभी स्कूलों से तंबाकू और नशा मुक्त वातावरण बनाने की अपील की।

संजय कुमार ने कहा कि स्कूल बच्चों में स्वस्थ आदतें विकसित करने और नशे से दूर रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने बताया कि देश की शिक्षा व्यवस्था लगभग 24.69 करोड़ छात्रों तक पहुंचती है, जिससे यह अभियान एक बड़े सामाजिक आंदोलन का रूप ले सकता है।

इस अवसर पर नशा-मुक्त भारत अभियान के तहत 2026-2029 की तीन वर्षीय कार्य योजना और नशा मुक्त विद्यालय पोर्टल भी लॉन्च किया गया। यह पोर्टल स्कूलों में नशा-मुक्त अभियान की प्रगति की निगरानी करेगा।

नई कार्य योजना के तहत स्कूलों के आसपास 500 मीटर क्षेत्र को नशा-मुक्त क्षेत्र बनाने, पाठ्यक्रम में नशा विरोधी शिक्षा शामिल करने, शिक्षकों को प्रशिक्षण देने और छात्रों व अभिभावकों में जागरूकता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

कार्यक्रम में चार श्रेणियों—फाउंडेशनल, प्रिपरेटरी, मिडिल और सेकेंडरी—में कुल 12 स्कूलों को सम्मानित किया गया। प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले स्कूलों को 50,000 रुपये, द्वितीय स्थान पर 25,000 रुपये और तृतीय स्थान पर 15,000 रुपये की पुरस्कार राशि दी गई। इसके अलावा 41 स्कूलों को उनके उत्कृष्ट प्रयासों के लिए प्रशंसा पुरस्कार प्रदान किए गए।

शिक्षा मंत्रालय ने कहा कि स्कूलों, परिवारों और समुदायों के सहयोग से तंबाकू और नशे के खिलाफ प्रभावी अभियान चलाकर देश में एक स्वस्थ और जागरूक पीढ़ी तैयार की जा सकती है।

एशियाई उत्पादकता संगठन के शासी निकाय की बैठक के 68वें सत्र का नई दिल्ली में समापन


नई दिल्ली / सत्ता संदेश

एशियाई उत्पादकता संगठन के शासी निकाय ने विजन 2030 की रूपरेखा और संस्थागत निष्पादन उपायों की समीक्षा की

एशियाई उत्पादकता संगठन के शासी निकाय की बैठक का 68वां सत्र 20-22 मई 2026 तक भारत मंडपम में आयोजित तीन दिनों के विचार-विमर्श, रणनीतिक चर्चाओं और उच्च स्तरीय बैठकों के बाद नई दिल्ली में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद (एनपीसी) ने उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी), वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार के तत्वावधान में इस बैठक का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय उत्पादकता संगठनों (एनपीओ) के प्रमुखों, वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों, नीति निर्माताओं, उत्पादकता विशेषज्ञों और एपीओ सदस्य अर्थव्यवस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

यह तीन दिवसीय कार्यक्रम 20 मई 2026 को तैयारी और बंद कमरे में हुई बैठकों के साथ शुरू हुआ, जिसके बाद सदस्य अर्थव्यवस्थाओं के बीच क्षेत्रीय सहयोग और समन्वय को मजबूत करने के उद्देश्य से नेटवर्किंग और सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन किया गया।

21 और 22 मई 2026 को आयोजित पूर्ण सत्रों में एपीओ की भविष्य की दिशा, शासन और रणनीतिक प्राथमिकताओं से संबंधित कई महत्वपूर्ण एजेंडा मदों पर विचार-विमर्श किया गया। इन सत्रों में महासचिव की वार्षिक रिपोर्ट, वर्ष 2025 की वित्तीय रिपोर्ट, 2026 के लिए लेखा परीक्षकों की नियुक्ति, एपीओ विजन 2030 संचालन समिति की सिफारिशें, 2027-28 की द्विवर्षीय अवधि के लिए एपीओ का प्रारंभिक बजट और शासन सुधार, क्षेत्रीय उत्पादकता पहलों पर प्रगति रिपोर्ट को स्वीकार किया गया और संस्थागत निष्पादन और अनुपालन को मजबूत करने के उपायों पर चर्चा की गई।

केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने 21 मई 2026 को आयोजित उद्घाटन सत्र में विशिष्ट अतिथि के रूप में भाग लिया और उद्घाटन भाषण दिया। श्री गोयल ने भारत की उत्पादकता-आधारित विकास, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, विनिर्माण और रसद सुधार, एमएसएमई के सशक्तिकरण, स्थिरता पहलों और क्षेत्रीय सहयोग के बारे में बताया।

शासी निकाय की बैठक में नेतृत्व में महत्वपूर्ण परिवर्तन भी हुए, जिसमें इंडोनेशिया के एपीओ निदेशक, प्रोफेसर अनवर सानुसी ने 2026-27 के लिए एपीओ अध्यक्ष का पदभार ग्रहण किया। उन्होंने भारत के एपीओ निदेशक और वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार के उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) के सचिव श्री अमरदीप सिंह भाटिया का स्थान लिया। ईरान और जापान के कार्यवाहक एपीओ निदेशकों ने क्रमशः प्रथम और द्वितीय उपाध्यक्ष का पदभार ग्रहण किया।

इस कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण उत्पादकता संवर्धन और संगठनात्मक उत्कृष्टता में उत्कृष्ट योगदान के लिए उत्पादकता समर्थकों, तकनीकी विशेषज्ञों और एनपीसी विशेष मान्यता पुरस्कारों के लिए एपीओ पुरस्कार थे।

एशियाई उत्पादकता संगठन (एपीओ) ने एपीओ सदस्य देशों में उत्पादकता विशेषज्ञों के प्रमाणन निकायों का मूल्यांकन करने और मान्यता प्रदान करने के लिए एपीओ प्रत्यायन निकाय (एपीओ-एबी) की स्थापना की। अब तक, भारत सहित 13 एपीओ सदस्य देशों को प्रमाणन प्राप्त हो चुका है। इस कार्यक्रम के दौरान, कंबोडिया के राष्ट्रीय उत्पादकता संगठन प्रमाणन निकाय को एपीओ-एबी प्रत्यायन प्रमाणपत्र प्रदान किया गया।

सदस्य अर्थव्यवस्थाओं ने शासी निकाय की बैठक के दौरान एपीओ विजन 2030 के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने और डिजिटल परिवर्तन, सतत विकास, नवाचार, क्षमता विकास और उत्पादकता-आधारित विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करने के प्रति अपनी सामूहिक प्रतिबद्धता दोहराई।

22 मई 2026 को आयोजित समापन सत्र का शुभारंभ एपीओ अध्यक्ष के संबोधन से हुआ, जिसके बाद भारत की वैकल्पिक निदेशक श्रीमती नीरजा शेखर ने अपने विचार रखे। इसके बाद यह घोषणा की गई 2027 में कि 69वीं जीबीएम की मेजबानी लाओ पीडीआर करेगा और एपीओ अर्थव्यवस्थाओं के प्रमुखों की 67वीं कार्यशाला शिखर बैठक (एसएम) 2027 में श्रीलंका में आयोजित की जाएगी।

एपीओ ने “अन्य व्यवसाय” के अंतर्गत, सदस्य देशों को विजन 2030 के तहत जीएआईए (जेनुइन एआई एक्शन) पहल के बारे में जानकारी दी जिसमें एआई-संचालित उत्पादकता विकास और प्रशिक्षण प्रणालियों के आधुनिकीकरण पर जोर दिया। इसके बाद, द्वितीय उपाध्यक्ष, जापान द्वारा प्रस्तुत कार्यवाही का सारांश (दिन 1 और 2) अपनाया गया और एपीओ अध्यक्ष के समापन भाषण के साथ सत्र समाप्त हुआ।

बाद में, प्रतिनिधिमंडल ने दिल्ली के प्रमुख धरोहर स्थलों- राष्ट्रीय संग्रहालय, हुमायूं का मकबरा, इंडिया गेट-सेंट्रल विस्टा सेरिमोनियल ऐवन्यू और ‘द लाइट एंड द लोटस्: रेलिक्स ऑफ अवेकन्ड वन का सांस्कृतिक भ्रमण किया। इस प्रदर्शनी में भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों के साथ-साथ मूर्तियां, पांडुलिपियां और कलाकृतियां प्रदर्शित की गईं, जो भारत की बौद्ध विरासत को दर्शाती हैं। इस प्रदर्शनी में नई दिल्ली के राय पिथोरा सांस्कृतिक परिसर में आयोजित भारत की आध्यात्मिक और सभ्यतागत विरासत को दर्शाया गया। प्रतिनिधिमंडल ने भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का अनुभव करने के इस अवसर की सराहना की।

एशियाई उत्पादकता संगठन के शासी निकाय की 68वीं बैठक की सफल मेजबानी ने एशिया-प्रशांत क्षेत्र में उत्पादकता को बढ़ाने, क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करने और सतत सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के प्रति भारत की प्रतिबद्धता की पुष्टि की।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह आज नई दिल्ली में सीमा सुरक्षा बल (BSF) के अलंकरण समारोह और रुस्तमजी स्मृति व्याख्यान में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए


नई दिल्ली / सत्ता संदेश

BSF के जवानों का सम्मान, राष्ट्र के प्रति अडिग निष्ठा, कर्तव्यपरायणता और पूर्ण समर्पण का प्रतीक है

मोदी सरकार अगले एक साल में ड्रोन, राडार, आधुनिक कैमरा और तकनीकों से लैस ‘Smart Border Project’ लाकर अभेद्य बॉर्डर ग्रिड बनाएगी

त्रिपुरा, असम और पश्चिम बंगाल में घुसपैठ रोकने के लिए संकल्पित सरकारें हैं, BSF इनके साथ मिलकर काम करें

गृह मंत्री ने त्रिपुरा, असम और पश्चिम बंगाल में BSF को जिला प्रशासनों, पुलिस थानों, पंचायत और पटवारियों के साथ मिलकर घुसपैठ रोकने के लिए काम करने के निर्देश दिए

बॉर्डर सिक्योरिटी आइसोलेटेड ड्यूटी नहीं, टेरिटोरियल रिस्पॉन्सिबिलिटी है

मोदी सरकार का इंटरनल सिक्योरिटी का विजन – समस्याओं को जड़ से उखाड़ फेंकना है, ‘नक्सलवाद के बाद अब घुसपैठ समाप्त होगी’

गृह मंत्री अमित शाह ने कहा साइबर थ्रेट्स, हाइब्रिड वॉरफेयर और ड्रोन वॉरफेयर से निपटने के लिए ‘नई बॉर्डर सिक्योरिटी स्ट्रेटेजी’ लायेंगे

मोदी सरकार बॉर्डर पर ‘टेक्नोलॉजी-ड्रिवन स्मार्ट सिक्योरिटी ग्रिड’ खड़ी करने का रोडमैप तैयार कर रही है

वह जमाना चला गया, जब आतंकी हमले और नक्सलवादी बेखौफ नरसंहार करते थे और सरकारें सिर्फ़ वार्ता करती थीं, यह नई डिफेंस डॉक्ट्रिन है, मोदी डॉक्ट्रिन है

मोदी जी ने High Powered Demography Mission की घोषणा की, जल्दी ही इसकी कमेटी बना कर काम शुरू हो जाएगा

हम भारत में Unnatural Demographic Change नहीं होने देंगे, एक-एक घुसपैठियों को बाहर निकालेंगे

दो महीने के अंदर ही मोदी सरकार सभी CAPF जवानों और उनके परिवारों के कल्याण के लिए एक बहुत बड़ा कार्यक्रम लेकर आएगी

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह आज नई दिल्ली में सीमा सुरक्षा बल के अलंकरण समारोह और रुस्तमजी स्मृति व्याख्यान में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर निदेशक, आसूचना ब्यूरो, सचिव, सीमा प्रबंधन और सीमा सुरक्षा बल (BSF) के महानिदेशक सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

अपने संबोधन में केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि यह अलंकरण समारोह बल की अडिग निष्ठा, कतर्व्यपरायणता और राष्ट्र के प्रति पूर्ण समर्पण का प्रतीक है। 1965 के युद्ध के बाद सीमाओं की सुरक्षा व्यवस्था में पाए गए गैप्स और कमियों का गहन अध्ययन करने के बाद एक ऐसे बल की आवश्यकता महसूस की गई जो शांति काल में भी हमारी सीमाओं की सुरक्षा करे। उस समय पद्म विभूषण श्री के एफ रुस्तम जी के नेतृत्व में बीएसएफ का गठन हुआ और तब से इस बल ने पूरे देश की सीमाओं की सुरक्षा को सुनिश्चित किया है। उन्होंने कहा कि श्री रुस्तम जी ने सीमा सुरक्षा बल की जो नींव डाली उस पर सुरक्षा के क्षेत्र में एक भव्य इमारत बनाने का काम आज बीएसएफ ने किया है जो देश के लिए गौरव की बात है।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने बीएसएफ की महिला टीम द्वारा माउंट एवरेस्ट पर सफल आरोहण करने की ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए दल के सभी सदस्यों और सीमा सुरक्षा बल के सभी जवानों को हार्दिक बधाई दी। उन्होंने कहा कि एवरेस्ट की चोटी पर जब वंदे मातरम गाया जाता है तो यहां दिल्ली में बैठकर भी हमारे मन में बहुत आनंद और संतोष की अनुभूति होती है। गृह मंत्री ने कहा कि सीमा सुरक्षा बल की वीरांगनाओं को विश्व की सबसे ऊंची चोटी पर वंदे मातरम का गान करने का सौभाग्य मिला है।

श्री अमित शाह ने कहा कि सीमा सुरक्षा के क्षेत्र में आज कई प्रकार की नई चुनौतियां हमारे सामने खड़ी हैं। अवैध घुसपैठ, नारकोटिक्स की तस्करी, गौ तस्करी, नकली करेंसी, संगठित अपराध, ड्रोन से हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी सहित कई प्रकार की चुनौतियां सीमा सुरक्षा बल के सामने हैं, लेकिन बीएसएफ ने लगातार इन चुनौतियों से निपटने का सुनियोजित प्रयास किया है। श्री शाह ने कहा कि बीएसएफ ने अपने पास उपलब्ध संसाधनों का सर्वोत्तम उपयोग करते हुए इन सभी चुनौतियों के बखूबी सामना कर देश की सुरक्षा करने का काम किया है। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में इस बल की भूमिका को और अधिक समन्वित और व्यापक करना होगा।

श्री अमित शाह ने कहा कि अब हम केवल पारंपरिक तरीके से सीमाओं की सुरक्षा नहीं कर सकते। हमें राज्य पुलिस, केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPFs), अन्य सशस्त्र बल, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB), खुफिया एजेंसियों और राज्य प्रशासन के साथ मिलकर सुरक्षा ग्रिड को मजबूत करना पड़ेगा तभी हम इन नई चुनौतियों का सामना कर सकेंगे। हमें सीमा सुरक्षा को एक आइसोलेटेड ज़िम्मेदारी के रूप में देखने की जगह एक टेरिटोरियल रिस्पांसिबिलिटी के रूप में देखना होगा तभी हम इन सभी चुनौतियों को पार करने में सफल होंगे। श्री शाह ने यह भी कहा कि हमें आने वाले खतरों को भी देखना पड़ेगा। हमारी जिम्मेदारी है कि सीमापार से घुसपैठ द्वारा कृत्रिम तरीके से जनसांख्यिकी में किए जा रहे बदलाव को रोकने के लिए भी हमें सतर्क और सजग रहना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि नार्कोटिक्स और फेक करंसी के हमले से हमारे अर्थ तंत्र को खोखला करने के प्रयास के प्रति भी हमें सतर्क रहना होगा। साइबर चुनौतियां, हाइब्रिड वॉरफेयर और ड्रोन के खतरों के लिए एक नई रणनीति के साथ हमें काम करना होगा।  

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि सियाचिन और कश्मीर की बर्फीली पहाड़ियां, कुपवाड़ा, केरन और उरी जैसे दुर्गम क्षेत्र, राजस्थान का रण, कच्छ का छोटा रण, सरक्रीक के दलदली नाले, सुंदरवन के घने जंगल, त्रिपुरा, मेघालय और मिजोरम की कठिन पूर्वी सीमाएं और ब्रह्मपुत्र से जुड़े कठिन संवेदनशील नदी क्षेत्रों के बीच सीमा सुरक्षा बल डटा हुआ है। इसी कारण 1965 में महज 25 बटालियनों से अल्प संसाधनों के साथ शुरू हुआ सीमा सुरक्षा बल, आज 2,70,000 की नफरी के साथ विश्व का सबसे बड़ा सीमा सुरक्षा बल बन गया है।

श्री अमित शाह ने कहा कि 2014 में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद हमारी रक्षा नीति और सीमाओं की सुरक्षा के बारे में हमारे नजरिए में आमूलचूल परिवर्तन आया है। पाकिस्तान द्वारा किए गए तीनों हमलों का हमने जवाब दिया है, चाहे उरी हो, पुलवामा हो या पहलगाम हो। हमने सर्जिकल स्ट्राइक, एयर स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से पाकिस्तान के अंदर उनके मर्मस्थान पर प्रहार कर मुंहतोड़ जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि वह ज़माना गया कि आतंकी हमलों के बाद वार्ताएं होती थीं, नक्सलवादी बेखौफ होकर जनसंहार करते थे और सरकारें सिर्फ़ वार्ता करती थीं। हमने अपने सुरक्षा परिदृश्य को भारत के संविधान की स्पिरिट के साथ मज़बूत बनाने का काम किया है। यह एक प्रकार से नए Defence Doctrine की घोषणा है और इसमें सीमा सुरक्षा बल का बहुत बड़ा योगदान रहा है।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि भारत सरकार और गृह मंत्रालय, सीमा को एक स्मार्ट बॉर्डर बनाने में सीमा सुरक्षा बल को तकनीकी सहायता प्रदान करेंगे। उन्होंने कहा कि बीएसएफ़ द्वारा किए जा रहे कई प्रयोगों के साथ एक मजबूत सुरक्षा ग्रिड बनाने की दिशा में हम आगे बढ़ रहे हैं। आने वाले 1 साल के अंदर ही स्मार्ट बॉर्डर कंसेप्ट के साथ सीमा सुरक्षा की सुरक्षा में सभी प्रकार की तकनीक को समाहित कर एक अभेद्य बॉर्डर का सुरक्षा ग्रिड बनाने का काम आगे बढ़ रहा है। गृह मंत्रालय बहुत जल्दी, ड्रोन, रडार, आधुनिक कैमरा और अन्य नई तकनीक के साथ एक स्मार्ट बॉर्डर प्रोजेक्ट को देश के सामने लेकर आएगा। गृह मंत्री ने कहा कि इस शुरूआत के बाद सीमा सुरक्षा बल का काम काफी सरल भी हो जाएगा और इसे मजबूती भी मिलेगी।

श्री अमित शाह ने कहा कि सीमा सुरक्षा बल की स्थापना के 60वें साल में ही हम स्मार्ट बॉर्डर प्रोजेक्ट की शुरूआत कर बांग्लादेश और पाकिस्तान की पूरी सीमा को अभेद्य बना देंगे जिससे बीएसएफ़ को बहुत बड़ी तकनीकी सहायता उपलब्ध हो जाएगी। इससे पराक्रम, शौर्य, समर्पण, देशभक्ति के साथ-साथ एक मजबूत तकनीकी सपोर्ट भी बल के पास उपलब्ध होगा जिससे हम दोनों सीमाओं को और अधिक सुरक्षित कर देंगे।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में भारत सरकार ने तय किया है कि हम न केवल घुसपैठ को रोकेंगे, बल्कि एक-एक घुसपैठिए को चुन-चुन कर देश से बाहर निकाल देंगे और अपनी जनसांख्यिकी में कृत्रिम बदलाव नहीं होने देंगे। सीमा सुरक्षा बल को जनसांख्यिकी में बदलाव करने के षड्यंत्र को रोकना होगा। उन्होंने कहा कि अब त्रिपुरा, असम और पश्चिम बंगाल में ऐसी सरकारें हैं जो नीतिगत रूप से मानती है कि देश में घुसपैठ नहीं होनी चाहिए। यह सीमा सुरक्षा बल की जिम्मेदारी है कि हम न केवल सीमाओं की सुरक्षा करें बल्कि गांव के पटवारी, थाने, डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर, DDO, जिला पुलिस अधीक्षक के साथ हमारा संवाद होना चाहिए। कौन नया घुसपैठिया आया है, उसके आने का क्या रूट है, कहां से तस्करी, गौ तस्करी हो रही है? इन सभी रूट्स को चुन-चुन कर बंद करना और समाप्त करना बीएसएफ की जिम्मेदारी है। इनसे मिली हुई सारी सूचना का उपयोग कर घुसपैठियों को निकालने और रोकने की एक सुचारू व्यवस्था बनानी चाहिए। गृह मंत्री ने कहा कि अब समय आ गया है कि सालों से बेरोक-टोक चल रही घुसपैठ को हमें रोकना होगा।

श्री अमित शाह ने कहा कि भारत सरकार के अडिग और दृढ़ निश्चय के कारण पांच दशक पुरानी नक्सलवाद की समस्या आज समाप्त हो गई है और भारत नक्सल मुक्त हो चुका है। उन्होंने कहा कि हमारे जवानों ने यह कर दिखाया है। गृह मंत्री ने कहा कि समस्या को बनाए रखना या कंट्रोल में रखना सुरक्षा का दृष्टिकोण नहीं हो सकता, बल्कि समस्या को समूल समाप्त करना ही सुरक्षा का दृष्टिकोण हो सकता है। उन्होंने कहा कि अब घुसपैठ के लिए भी बीएसएफ को इसी दृढ़ता के साथ आगे बढ़ना चाहिए।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि वाइब्रेंट विलेजेज-1 और वाइब्रेंट विलेजेज -2 सीमा सुरक्षा बल के सहयोग से एक लोकतांत्रिक तरीके से चलाया गया विकास कार्यक्रम है। बीएसएफ के अधिकार क्षेत्र को 15 किलोमीटर से बढ़ाकर हमने 50 किलोमीटर किया है और पश्चिम बंगाल सरकार को जो भूमि देनी थी उसका निर्णय भी हो चुका है।

श्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी ने High-Powered Demography Mission की घोषणा की है और जल्दी ही इसकी कमेटी बना कर काम शुरू हो जाएगा। हमें दोनों देशों की सीमाओं पर आने वाले दिनों में एक मजबूत सुरक्षा ग्रिड बनानी होगी और इसके लिए एक बहुत बड़ा अभियान भी चलाना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि बीएसएफ का 60वां वर्ष एक स्मार्ट बॉर्डर बनाने और  बीएसएफ के जवानों के कल्याण का भी वर्ष है। श्री शाह ने कहा कि दो महीने के अंदर ही नरेन्द्र मोदी सरकार बीएसएफ और सभी सीएपीएफ के जवानों के कल्याण के लिए एक बहुत बड़ा कार्यक्रम लाएगी। इसके बाद हमारे जवान सुनिश्चित होकर सीमाओं की सुरक्षा कर सकेंगे और उनके परिवारजनों की चिंता भारत सरकार का गृह मंत्रालय करेगा।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि नारकोटिक्स के खिलाफ भी हम देश में एक बहुत बड़ा अभियान चलाने जा रहे हैं और इसमें भी सीमा सुरक्षा बल की बहुत अहम भूमिका होगी। बीएसएफ़ की सतर्कता से दोनों तरफ की सूचनाएं एकत्रित कर नारकोटिक्स के खिलाफ लड़ाई में भी इस बल का बहुत बड़ा योगदान है। उन्होंने कहा कि आने वाले तीन-चार साल सीमा सुरक्षा में संपूर्ण बदलाव के वर्ष होंगे। उन्होंने कहा कि तकनीकी सहायता मिलने से जवानों की जिम्मेदारी कम नहीं होती, बल्कि बढ़ती है। श्री शाह ने कहा कि तकनीक को आत्मसात कर, स्थानीय लोगों से संवाद प्रस्थापित कर, स्थानीय प्रशासन से तालमेल बढ़ाते हुए हमें इस देश को घुसपैठ से मुक्त करने का लक्ष्य हासिल करना है।

भारत एशियाई उत्पादकता संगठन (एपीओ) के शासी निकाय के 68वें सत्र की मेजबानी नई दिल्‍ली में करेगा


नई दिल्‍ली / सत्ता संदेश

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल 21 मई को एपीओ की 68वीं शासी निकाय बैठक के उद्घाटन सत्र में शामिल होंगे

एपीओ की 68वीं शासी निकाय की बैठक के दौरान उत्पादकता के पैरोकारों और तकनीकी विशेषज्ञों को एपीओ राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया जाएगा

एशियाई उत्पादकता संगठन (एपीओ) के शासी निकाय का 68वां सत्र नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में 20 से 22 मई 2026 तक आयोजित किया जा रहा है। यह कार्यक्रम भारत की अध्‍यक्षता में हो रहा है। इस सत्र में 20 एपीओ सदस्य देशों के 60 से अधिक वरिष्ठ प्रतिनिधि भाग लेंगे।

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल 21 मई 2026 को होने वाले उद्घाटन सत्र में उपस्थित रहेंगे। एपीओ के निदेशक, सलाहकार, एपीओ सदस्य देशों के राजनयिक मिशनों के प्रतिनिधि और आमंत्रित अतिथियों के भी इस कार्यक्रम में शामिल होने की उम्मीद है। कजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान और भूटान की सरकारों के पर्यवेक्षकों के साथ-साथ ग्लोबल ग्रीन ग्रोथ इंस्टीट्यूट के प्रतिनिधि भी इसमें भाग लेंगे।

तीन दिवसीय इस कार्यक्रम में एपीओ विजन 2030 फ्रेमवर्क, 2027-28 की द्विवर्षीय अवधि के लिए एपीओ के प्रारंभिक बजट और एपीओ महासचिव चुनाव प्रक्रियाओं की समीक्षा पर उच्च स्तरीय चर्चाएं होंगी।

कार्यक्रम के प्रमुख एजेंडे में 68वीं शासी निकाय बैठक (जीबीएम) का औपचारिक उद्घाटन और शुभारंभ; 2026-27 के लिए एपीओ अध्यक्ष और उपाध्यक्षों का चुनाव; एपीओ वार्षिक और वित्तीय रिपोर्ट पर विचार-विमर्श तथा उसे अपनाना; बजट प्रस्तावों एवं संस्थागत सुधारों पर विचार-विमर्श; एपीओ विजन 2030 के अंतर्गत प्रगति तथा सचिवालय के प्रदर्शन की समीक्षा; प्रमुख नीतिगत और प्रक्रियात्मक सिफारिशों का अनुमोदन शामिल है।

उद्घाटन सत्र के दौरान, एपीओ राष्ट्रीय पुरस्कार कार्यक्रम के अंतर्गत उत्पादकता पैरोकारों और उत्पादकता तकनीकी विशेषज्ञों के लिए एपीओ राष्ट्रीय पुरस्कार की श्रेणियों में पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे।

इन पुरस्कारों का उद्देश्य राष्ट्रीय उत्पादकता संगठनों (एनपीओ) की भूमिका को मजबूत करना है ताकि वे प्रभावशाली पहलों को आगे बढ़ाने वाली उत्कृष्ट उत्पादकता वाली कंपनियों को बढ़ावा दे सकें और उन्हें मान्यता दे सकें, साथ ही एपीओ सदस्य अर्थव्यवस्थाओं में ठोस सुधारों की ओर ले जाने वाली उत्पादकता की संस्कृति को प्रोत्साहित कर सकें।

शासी निकाय (जीबी) एपीओ की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था है और यह शासन, रणनीतिक निगरानी तथा संगठनात्मक निर्णय लेने के लिए सर्वोच्च संस्थागत मंच के रूप में कार्य करती है। वार्षिक रूप से आयोजित होने वाली शासी निकाय की इस बैठक में एपीओ के सभी सदस्य देशों के आधिकारिक प्रतिनिधि संगठन की रणनीतिक दिशा, वार्षिक कार्यक्रम प्राथमिकताओं, शासन ढांचे, संस्थागत प्रदर्शन और वित्तीय नियोजन पर विचार-विमर्श करने के लिए एकत्रित होते हैं।

उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (डीपीआईआईटी) के सचिव श्री अमरदीप सिंह भाटिया, आईएएस ने मई 2025 में आयोजित एपीओ शासी निकाय के 67वें सत्र में एपीओ शासी निकाय की अध्यक्षता ग्रहण की। इसी सत्र के दौरान, भारत ने एपीओ शासी निकाय के 68वें सत्र की मेजबानी करने के अपने निर्णय की घोषणा की।

1961 में स्थापित एशियाई उत्पादकता संगठन (एपीओ) एशिया-प्रशांत क्षेत्र के 21 सदस्य देशों से मिलकर बना एक अंतर-सरकारी संगठन है। एपीओ पारस्परिक सहयोग और ज्ञान साझाकरण के माध्यम से सतत सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए उत्पादकता बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। पिछले छह दशकों में, इस संगठन ने नीतिगत संवाद, तकनीकी सहयोग, संस्थागत क्षमता विकास, ज्ञान के आदान-प्रदान और उत्पादकता वृद्धि में सर्वोत्तम प्रथाओं के प्रसार के माध्यम से सदस्य देशों की अर्थव्यवस्थाओं को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

यह आयोजन द्विपक्षीय और बहुपक्षीय गतिविधियों के अवसर भी प्रदान करेगा, जिससे ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलेगा और सदस्य देशों की अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग मजबूत होगा।

एपीओ शासी निकाय के 68वें सत्र की मेजबानी करना राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और वैश्विक आर्थिक रुझानों के अनुरूप क्षेत्र में उत्पादकता-आधारित विकास, नवाचार और सतत विकास को बढ़ावा देने के प्रति भारत की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने नई दिल्ली में राज्य मानवाधिकार आयोगों (एसएचआरसी) और उनके विशेष प्रतिवेदकों एवं पर्यवेक्षकों के साथ एक दिवसीय वर्चुअल बैठक का आयोजन किया

नई दिल्ली/ सत्ता संदेश

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने नई दिल्ली स्थित अपने परिसर में राज्य मानवाधिकार आयोगों (एसएचआरसी) और उनके विशेष प्रतिवेदकों एवं पर्यवेक्षकों के साथ एक दिवसीय वर्चुअल सम्मेलन का आयोजन किया। एनएचआरसी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति वी. रामासुब्रमणियन ने सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए कहा कि भारत का मानवाधिकार ढांचा अद्वितीय है, इसमें एनएचआरसी और एसएचआरसी दोनों ही अपने विषय-विशिष्ट क्षेत्राधिकार के अतिरिक्त कुछ मामलों पर समवर्ती क्षेत्राधिकार का प्रयोग करते हैं। उन्होंने कहा कि देश के मानवाधिकार प्रदर्शन का मूल्यांकन सभी आयोगों के कार्यों के माध्यम से सामूहिक रूप से किया जाता है। इसलिए मामलों के दोहराव से बचने, सूचना साझाकरण में सुधार करने और सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। इस बैठक में एनएचआरसी के सदस्य न्यायमूर्ति (डॉ.) बिद्युत रंजन सारंगी, श्रीमती विजया भारती सयानी, महासचिव श्री भरत लाल, महानिदेशक श्रीमती अनुपमा नीलेकर चंद्र और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

न्यायमूर्ति रामासुब्रमणियन ने एसएचआरसी से अपने कामकाज को डिजिटल बनाने और एनएचआरसी के साथ एक एकीकृत एचआरसीनेट पोर्टल से जुड़ने का आग्रह किया। उन्होंने आयोगों को अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर न जाने की चेतावनी भी दी और कहा कि हालांकि न्यायालयों ने मौलिक और मानवाधिकारों के दायरे को बढ़ाया है, लेकिन मानवाधिकार संस्थानों को मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम के तहत दी गई परिभाषाओं का पालन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अधिकार क्षेत्र में स्पष्टता बनाए रखने से अनावश्यक विवाद कम होंगे और आयोग अधिक प्रभावी और गुणवत्तापूर्ण सेवाएं प्रदान कर सकेंगे। उन्होंने भविष्य में राज्य मानवाधिकार आयोगों के बीच संवाद और घनिष्ठ सहयोग की आशा भी व्यक्त की।

न्यायमूर्ति (डॉ.) बिद्युत रंजन सारंगी ने एनएचआरसी और एसएचआरसी के बीच संवाद को समन्वय को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया। उन्होंने आदेशों के प्रभावी कार्यान्वयन और पीड़ित व्यक्तियों, विशेष रूप से हिरासत में हुई मौतों जैसे संवेदनशील मामलों में, समय पर कार्रवाई के लिए दोनों पक्षों के बीच बेहतर संचार और समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया।

सदस्य श्रीमती विजया भारती सयानी ने एसएचआरसी से प्रभावित समुदायों के साथ अधिक संपर्क बढ़ाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि एनएचआरसी और एसएचआरसी के विशेष पर्यवेक्षकों और प्रतिवेदकों के बीच समन्वय से संस्थागत प्रभावशीलता मजबूत हो सकती है। उन्होंने कर्नाटक सरकार द्वारा जन सहायता के लिए एसएचआरसी के संपर्क विवरण प्रदर्शित करने की पहल की भी सराहना की।

इससे पहले एनएचआरसी के महासचिव श्री भरत लाल ने अपने उद्घाटन भाषण में कहा कि मानवाधिकार एक जटिल विषय है जिसके लिए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और उसके विशेष प्रतिवेदकों एवं पर्यवेक्षकों के साथ-साथ एसएचआरसी के बीच सामूहिक कार्रवाई, घनिष्ठ समन्वय और सामंजस्यपूर्ण दृष्टिकोण की आवश्यकता है। आयोग की ऑनलाइन प्रणाली के माध्यम से प्राप्त शिकायतों का उल्लेख करते हुए, उन्होंने बताया कि पिछले 5 वर्षों में 4.28 लाख शिकायतें प्राप्त हुई हैं, जो पुलिस द्वारा मानवाधिकारों का उल्लंघन (18 प्रतिशत), माफियाओं द्वारा संगठित शोषण (17.4 प्रतिशत), सेवा संबंधी मामले- पेंशन/वेतन का भुगतान न होना (6 प्रतिशत), महिलाओं के अधिकारों का उल्लंघन (5.8 प्रतिशत), जेलों और कारागारों की स्थिति (3.5 प्रतिशत), श्रमिकों के अधिकारों का उल्लंघन (2.2 प्रतिशत), स्वास्थ्य संबंधी उल्लंघन (2 प्रतिशत), शैक्षणिक संस्थानों में मानवाधिकारों का उल्लंघन (2 प्रतिशत), बाल अधिकारों का उल्लंघन (1.7 प्रतिशत) आदि से संबंधित हैं।

सक्रिय निगरानी और जमीनी स्तर पर हस्तक्षेप पर जोर देते हुए, उन्होंने हिरासत में हुई मौतों, आश्रय गृहों में दुर्व्यवहार, मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों में दयनीय स्थिति, हाथ से मैला ढोने से हुई मौतों, साथ ही भिखारियों, दिव्यांगजनों और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के पुनर्वास और प्रमाणीकरण तंत्र में कमियों के मामलों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस तरह की सहभागिता और संवाद नीतिगत उद्देश्यों और जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन के बीच के अंतर को कम करने, मजबूत संस्थागत समन्वय स्थापित करने में सहायक होंगे, साथ ही मानवाधिकारों के उल्लंघन की रोकथाम भी सुनिश्चित करेंगे।

मानवाधिकारों के उल्लंघन से जुड़े मामलों के शीघ्र और प्रभावी समाधान सुनिश्चित करने में डिजिटल शासन महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। एनएचआरसी ने शिकायत प्रबंधन प्रणाली के रूप में एचआरसीनेट पोर्टल विकसित किया है। सभी मानवाधिकार संस्थानों द्वारा इसे अपनाने से मामलों की पुनरावृत्ति से बचा जा सकता है और समन्वय में सुधार हो सकता है। अब तक, 23 राज्य मानवाधिकार आयोगों ने इस प्रणाली को अपनाया है। हालांकि, आंध्र प्रदेश, गुजरात, झारखंड और नागालैंड के एसएचआरसी अभी तक इससे नहीं जुड़े हैं, जबकि मध्य प्रदेश और राजस्थान के एसएचआरसी जुड़ने के बावजूद अभी तक पोर्टल के माध्यम से शिकायतों के समाधान की शुरुआत नहीं कर पाए हैं।

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर, मानवाधिकारों के उल्लंघन की निगरानी वैश्विक तंत्रों के माध्यम से की जाती है, जबकि देश के भीतर, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग 27 राज्य मानवाधिकार आयोग  और विभिन्न क्षेत्रीय आयोग मानवाधिकारों के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में कार्य करते हैं। इसलिए देश भर में किए जा रहे कार्यों की समग्र जानकारी एक ही स्थान पर उपलब्ध होना महत्वपूर्ण है।

सम्मेलन के दौरान आयोजित दो सत्रों में एसएचआरसी के साथ उनकी चुनौतियों को समझने के लिए संवाद शामिल था, जिसके बाद एनएचआरसी ने विशेष प्रतिवेदकों और पर्यवेक्षकों ने देश में मानवाधिकार तंत्र को मजबूत करने के लिए अपने अनुभवों को साझा किया।

हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, ओडिशा, असम, मणिपुर, त्रिपुरा, मेघालय, नागालैंड, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, गुजरात, गोवा और कर्नाटक के राज्य मानवाधिकार आयोगों के अध्यक्ष, सदस्य और प्रतिनिधि, साथ ही विशेष प्रतिवेदक और पर्यवेक्षक, जिन्हें आयोग को मानवाधिकार स्थिति पर रिपोर्ट और सिफारिशें प्रस्तुत करने के लिए मानवाधिकार विषयगत क्षेत्र सौंपे गए हैं, इस चर्चा में शामिल हुए।

सम्मेलन के दौरान एसएचआरसी को मजबूत करने और संस्थागत समन्वय के लिए दिए गए कुछ महत्वपूर्ण सुझाव निम्नलिखित हैं:

  • राज्य सरकारों द्वारा कर्मचारियों की संख्या, बुनियादी ढांचे, पहुंच, जमीनी स्तर पर भागीदारी और संस्थागत क्षमता में सुधार के माध्यम से मानवाधिकार नियंत्रण केंद्रों एसएचआरसी को मजबूत बनाना ताकि हिरासत में हिंसा, पुलिस की ज्यादतियों और अन्य मानवाधिकार उल्लंघनों से संबंधित बढ़ती शिकायतों का प्रभावी ढंग से समाधान किया जा सके।
  • मानवाधिकार आयोग की सिफारिशों की प्रवर्तनीयता और कानूनी स्पष्टता को बढ़ाना तथा आयोगों के जनादेश, शक्तियों और अधिकार क्षेत्र के संबंध में जनता में जागरूकता बढ़ाना।
  • समन्वय, निगरानी और कार्यवाही के दोहराव से बचने के लिए एसएचआरसी को एचआरसीनेट पोर्टल से जोड़ना ताकि एनएचआरसी के साथ एकीकृत डिजिटल डेटा साझा किया जा सके।
  • एसएचआरसी और एनएचआरसी के विशेष पर्यवेक्षक और प्रतिवेदक बेहतर जवाबदेही और अनुवर्ती कार्रवाई के लिए सरकारी विभागों और अन्य हितधारकों के बीच तालमेल हेतु पारस्परिक समन्वय में सुधार करेंगे।
  • समन्वित क्षेत्रीय दौरों, निरीक्षणों और संस्थागत अनुवर्ती कार्रवाई को बढ़ाना, जिसमें जेलों, मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों, नशामुक्ति केंद्रों, आश्रय गृहों, अस्पतालों, वृद्धाश्रमों और अन्य संवेदनशील संस्थानों का दौरा शामिल है।
  • एनएचआरसी और एसएचआरसी की कमजोर व्यक्तियों, संस्थानों से संपर्क करने में असमर्थ महिलाओं बच्चों, बेघर बुजुर्ग एवं मानसिक बीमारियों से ग्रस्त व्यक्तियों को सहायता प्रदान करने के लिए पहुंच बढ़ाना।
  • धोखाधड़ी करने वाले संगठनों और मध्यस्थों द्वारा मानवाधिकार से जुड़े मंचों का दुरुपयोग रोकने के लिए एनएचआरसी द्वारा राज्यों को दिए गए निर्देशों का अनुपालन करना।
  • एसएचआरसी को शैक्षणिक संस्थानों, मानवाधिकार प्रकोष्ठों और सामुदायिक पहुंच कार्यक्रमों के माध्यम से मानवाधिकार जागरूकता, शिक्षा और संवेदीकरण के लिए एनएचआरसी की पहलों की शुरुआत।

विशेष प्रतिवेदकों और पर्यवेक्षकों ने विषयगत और क्षेत्र-विशिष्ट मानवाधिकार संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए निम्नलिखित प्रतिक्रियाएं और सुझाव प्रदान किए।

  • मानवाधिकारों के उल्लंघन के बाद दंडात्मक कार्रवाई पर निर्भर रहने के बजाय, पुलिस, सुधार गृह कर्मचारियों और सीएपीएफ के नियमित प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण के माध्यम से निवारक हस्तक्षेपों पर ध्यानकेंद्रित किया जाना चाहिए।
  • जेलों में भीड़ कम करने, रहने की बेहतर स्थिति, बेहतर संचार सुविधाएं, जेल में वेतन का मानकीकरण और निगरानी गृहों और आश्रय गृहों के विस्तार सहित जेल सुधारों को लागू करके उनका पालन किया जाना चाहिए।
  • जिला अधिकारियों और पुलिस के बीच मजबूत समन्वय, कानूनी प्रवर्तन और जागरूकता के माध्यम से बचाए गए बाल श्रमिकों, बंधुआ मजदूरों और अन्य कमजोर बच्चों के उचित पुनर्वास को सुनिश्चित करना।
  • बाल कल्याण समितियों को मजबूत करना, बाल संरक्षण प्रणालियों को सुदृढ़ बनाना और जिलों और राज्यों में बच्चों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए हेल्पलाइनों को बहाल करना।
  • पुनर्वास, कलंक निवारण, कल्याणकारी योजनाओं तक पहुंच और समुदाय आधारित निगरानी के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य, कुष्ठ रोग और दिव्यांगों के अधिकारों पर अधिक जोर देना।
  • अंतर्लिंगी शिशुओं, लैंगिक गैर-अनुरूप बच्चों और अन्य कमजोर समूहों की सुरक्षा और मान्यता सुनिश्चित करना, जिसमें उन्हें प्रभावित करने वाली संस्थागत और चिकित्सा पद्धतियों की निगरानी करना शामिल है।
  • सार्वजनिक सेवा वितरण दुकानों और असुरक्षित आबादी की सेवा करने वाली संस्थाओं सहित कल्याणकारी वितरण प्रणालियों में गरिमा और पहुंच में सुधार करना।
  • प्रदूषण, जल संदूषण और जलवायु संबंधी मानवाधिकार चिंताओं को दूर करने के लिए वैज्ञानिक और वास्तविक समय में पर्यावरण निगरानी प्रणालियों, साक्ष्य-आधारित अनुसंधान और पर्यावरणीय न्याय मानचित्रण का उपयोग करना।
  • सफाईकर्मियों, कचरा उठाने वाले श्रमिकों, ट्रक चालकों, खदान श्रमिकों और अन्य कमजोर श्रमिक समूहों के लिए व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य देखभाल, बीमा और कल्याणकारी सुरक्षा उपायों में सुधार करना।
  • सुरक्षित प्रौद्योगिकियों, सुरक्षात्मक उपायों और नैदानिक ​​अवसंरचना के माध्यम से सिलिकोसिस जैसी बीमारियों के लिए जागरूकता अभियान और निवारक तंत्र को मजबूत करना।
  • नियमित निरीक्षण, शिकायत निवारण और निगरानी तंत्र के माध्यम से विद्यालयों, आदिवासी छात्रावासों, अस्पतालों, कारागारों और अन्य संस्थानों में स्थितियों में सुधार करना।
  • दिव्यांग बच्चों के लिए विशेष शिक्षकों की उपलब्धता और समावेशी शैक्षिक सहायता प्रणालियों में सुधार करना।
  • राज्यों में सफल कल्याण और पुनर्वास मॉडलों को अपनाना, जिसमें जेलों में आंगनवाड़ी से जुड़ी बाल देखभाल सुविधाएं और समुदाय आधारित सहायता प्रणाली शामिल हैं।
  • अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ताओं और आपदा प्रभावित कर्मियों के लिए मुआवजे, पुनर्वास और कल्याणकारी सहायता सुनिश्चित करना और
  • स्वास्थ्य अधिकार ढांचे के अंतर्गत भर्ती मानकों और सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता से संबंधित समस्याओं का समाधान करना।
एनएसटीएफडीसी 10 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली में अपना 25वां स्थापना दिवस मनाएगा

केंद्रीय मंत्री श्री जुएल ओराम इस अवसर पर उपस्थित रहेंगे; अनुसूचित जनजाति के उद्यमियों को सम्मानित किया जाएगा
सरकार के जनजातीय मामलों के मंत्रालय के अधीन एक सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति वित्त और विकास निगम (एनएसटीएफडीसी), 10 अप्रैल, 2026 को नई दिल्ली स्थित विश्व युवा केंद्र में अपना 25वां स्थापना दिवस मनाने जा रहा है 

वर्ष 2001 में स्थापित, एनएसटीएफडीसी देशभर में अनुसूचित जनजातियों के आर्थिक विकास के लिए समर्पित एक सर्वोच्च संगठन के रूप में कार्य करता है। निगम आय सृजन गतिविधियों के लिए राज्य चैनलिंग एजेंसियों के माध्यम से रियायती वित्तीय सहायता प्रदान करके आजीविका के अवसरों को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

जनजातीय मामलों के माननीय केंद्रीय मंत्री श्री जुएल ओराम इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। इस कार्यक्रम में जनजातीय मामलों के माननीय राज्य मंत्री श्री दुर्गा दास उइके और जनजातीय मामलों के मंत्रालय की सचिव श्रीमती रंजना चोपड़ा के साथ-साथ पूर्व सीएमडी, वरिष्ठ अधिकारी और विशिष्ट अतिथि भी शामिल होंगे। उपस्थित लोगों का स्वागत एनएसटीएफडीसी के सीएमडी श्री टी. रूमुआन पैते करेंगे ।

समारोह के अंतर्गत, एनएसटीएफडीसी भारत भर के उन सफल अनुसूचित जनजाति उद्यमियों को सम्मानित करेगा जिन्होंने एनएसटीएफडीसी योजनाओं के तहत वित्तीय सहायता प्राप्त करके स्थायी उद्यम स्थापित किए हैं। ये लाभार्थी विभिन्न जनजातीय समुदायों का प्रतिनिधित्व करते हैं और उन्होंने पारंपरिक व्यंजन, स्वास्थ्य सेवाएँ, मुर्गी पालन, डेयरी, हस्तशिल्प, मत्स्य पालन, खुदरा व्यवसाय, सिलाई आदि जैसे विभिन्न क्षेत्रों में उद्यम स्थापित किए हैं।

इस कार्यक्रम में आदिवासी नृत्यों और नुक्कड़ नाटक सहित सांस्कृतिक कार्यक्रम भी शामिल होंगे , जो आदिवासी समुदायों की समृद्ध विरासत और परंपराओं को दर्शाते हैं।

एनएसटीएफडीसी के अधिकारी इस समारोह का आयोजन बड़े उत्साह के साथ कर रहे हैं और आदिवासी सशक्तिकरण और समावेशी विकास की दिशा में समर्पित सेवा के 25 वर्षों के इस महत्वपूर्ण अवसर पर गणमान्य व्यक्तियों, हितधारकों और प्रतिभागियों का स्वागत करने के लिए उत्सुक हैं।