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पंजाब में बाहर खाना होगा 20% तक महंगा: 4 महीने में ₹1380 बढ़े कमर्शियल सिलेंडर के दाम, रेस्टोरेंट मालिकों ने दी चेतावनी

लुधियाना: यदि आप होटल या रेस्टोरेंट में खाना खाने के शौकीन हैं, तो अगले वीकेंड से आपकी जेब पर बोझ बढ़ने वाला है। पंजाब होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन ने कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी के बाद खाने के दाम 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ाने का फैसला किया है।

4 महीने में ₹1380 का ‘महा-झटका‘ : सरकारी तेल कंपनियों द्वारा कमर्शियल गैस की कीमतों में की गई बेतहाशा वृद्धि ने व्यापारियों की कमर तोड़ दी है। आंकड़ों के अनुसार, पिछले मात्र 120 दिनों के भीतर एक सिलेंडर पर करीब ₹1,380 का अतिरिक्त बोझ बढ़ चुका है। साल की शुरुआत में 1 जनवरी को सिलेंडर ₹1,691.50 का था, जो कई चरणों में बढ़ते हुए 1 अप्रैल तक ₹2,078.50 पर पहुँच गया था। हालांकि, सबसे बड़ा झटका 1 मई 2026 को लगा, जब केंद्र सरकार ने एक ही बार में ₹993 की रिकॉर्ड वृद्धि कर दी, जिससे अब एक सिलेंडर की कीमत ₹3,071.50 हो गई है।

कुकिंग कॉस्ट में 20% का उछाल: पंजाब होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष अमरवीर सिंह ने बताया कि गैस की इन बढ़ती कीमतों के कारण रेस्टोरेंट की कुकिंग कॉस्ट (खाना बनाने की लागत) में सीधा 20% का इजाफा हुआ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब तक होटल मालिक इस बढ़ती लागत को खुद सह रहे थे, लेकिन ₹1000 की हालिया एकमुश्त बढ़ोतरी के बाद अब उनके पास रेट बढ़ाने के अलावा कोई चारा नहीं बचा है। यदि कीमतें नहीं बढ़ाई गईं, तो पंजाब का पूरा होटल उद्योग घाटे में डूब सकता है।

8000 से ज्यादा इकाइयां प्रभावित : इस फैसले का असर पंजाब के करीब 8000 से ज्यादा होटलों, ढाबों और फास्ट फूड जॉइंट्स पर पड़ेगा। एसोसिएशन के अनुसार, रेट बढ़ने से न केवल लग्जरी होटलों पर बल्कि उन मिडिल क्लास परिवारों पर भी असर पड़ेगा जो रोजमर्रा के काम या छोटे कार्यक्रमों के लिए ढाबों और मिड-रेंज रेस्टोरेंट्स पर निर्भर हैं।

सोमवार की बैठक पर टिकी नजरें : होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन का एक शिष्टमंडल सोमवार को केंद्र सरकार के साथ बैठक करने जा रहा है। इस बैठक में सरकार से कीमतों को घटाने या सब्सिडी देने की मांग की जाएगी। अमरवीर सिंह ने अल्टीमेटम दिया है कि यदि सोमवार की बैठक में सरकार से कोई राहत नहीं मिलती, तो अगले वीकेंड से पूरे पंजाब में नए रेट कार्ड लागू कर दिए जाएंगे।