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भाजपा ग्रामीण अध्यक्ष बने योगेश सपरा, टांडा में कार्यकर्ताओं ने किया भव्य अभिनंदन
टांडा उर्मुर / सत्ता संदेश
टांडा उर्मुर, होशियारपुर: भारतीय जनता पार्टी द्वारा योगेश सपरा को होशियारपुर ग्रामीण जिला अध्यक्ष नियुक्त किए जाने के बाद टांडा उर्मुर में पार्टी कार्यकर्ताओं ने उनका भव्य स्वागत किया। इस अवसर पर भाजपा पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने उन्हें फूलों के गुलदस्ते और सिरोपा भेंट कर सम्मानित किया तथा नियुक्ति के लिए पार्टी हाईकमान का आभार व्यक्त किया।
प्रेस से बातचीत करते हुए नवनियुक्त जिला अध्यक्ष योगेश सपरा ने कहा कि वह संगठन के प्रत्येक कार्यकर्ता को साथ लेकर चलेंगे और पूरी ईमानदारी, निष्ठा तथा समर्पण के साथ पार्टी को जमीनी स्तर पर मजबूत बनाने का कार्य करेंगे।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार द्वारा लागू जनकल्याणकारी योजनाओं, विकास कार्यों और उपलब्धियों को गांव-गांव और घर-घर तक पहुंचाने के लिए विशेष जनसंपर्क अभियान चलाया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक लोगों को सरकार की योजनाओं की जानकारी मिल सके।
योगेश सपरा ने आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर भी बड़ा बयान देते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी पंजाब की सभी 117 विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी। उन्होंने कहा कि पार्टी प्रदेश में अपना जनाधार मजबूत करने और सरकार बनाने के लक्ष्य के साथ बूथ स्तर तक संगठन को सशक्त कर रही है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि पंजाब में हो रहे अधिकांश विकास कार्य केंद्र सरकार की योजनाओं के माध्यम से संभव हुए हैं और भाजपा जनता की सेवा तथा प्रदेश के विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
इस मौके पर बड़ी संख्या में भाजपा पदाधिकारी, कार्यकर्ता और स्थानीय नेता मौजूद रहे, जिन्होंने नए जिला अध्यक्ष को संगठन की जिम्मेदारी मिलने पर शुभकामनाएं दीं।
TMC राज्यसभा सांसद कल्याण बनर्जी पूरे मानसून सत्र के लिए हुए निलंबित
नई दिल्ली / सत्ता संदेश
तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सांसद कल्याण बनर्जी को पूरे मानसून सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया है। उन्हें असंसदीय भाषा के इस्तेमाल के लिए निलंबित किया गया।
मानसून सत्र का लगातार तीसरा दिन भी विपक्ष का हंगामा जारी रहा। हंगामे के कारण संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही तीन बार स्थगित हुई। विपक्षी सदस्य नीट पेपर लीक, सीजेपी के प्रदर्शन पर लाठीचार्ज और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर चर्चा के लिए अड़े रहे।
कल्याण बनर्जी पर क्या आरोप लगा?
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसद कल्याण बनर्जी को बुधवार को मानसून सत्र की बाकी अवधि के लिए लोकसभा से निलंबित कर दिया गया। यह कार्रवाई तब हुई, जब आरोप है कि बनर्जी ने टीएमसी के बागी सांसद को ‘चोर’ कहा। इसके बाद लोकसभा की कार्यवाही विपक्ष के हंगामे के बीच स्थगित हुई। फिर सदन के अंदर टकराव की स्थिति बन गई।विज्ञापन
किन सांसदों से हुआ कल्याण बनर्जी का विवाद?
आज पहले कल्याण बनर्जी का एनसीपीआई सांसदों मिताली बैग, शताब्दी रॉय और काकोली घोष दस्तीदार समेत अन्य सांसदों के साथ बहस हुई थी। ये तीनों पहले टीएमसी से जुड़ी थीं। लेकिन बाद में पार्टी से अलग होकर एनसीपीआई में शामिल हो गईं।
विवाद के दौरान क्या हुआ?
कल्याण बनर्जी टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी के साथ बने हुए हैं। उनको सदन की कार्यवाही स्थगित होने के बाद इन सांसदों के साथ बहस करते हुए देखा गया। हालांकि, इस विवाद की शुरुआत किस बात को लेकर हुई, यह तत्काल स्पष्ट नहीं हो सका। कई विपक्षी सांसदों ने बीच-बचाव कर स्थिति को शांत कराने की कोशिश की। कुछ सदस्यों ने जब कल्याण बनर्जी से पूछा कि आखिर क्या हुआ था, तो वह लोकसभा कक्ष से बाहर चले गए।
मामले को लेकर स्पीकर से क्यों मिले सांसद?
इस विवाद के बाद मिताली बैग, काकोली घोष दस्तीदार और अन्य एनसीपीआई सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से उनके कक्ष में मुलाकात कर यह मुद्दा उठाया।
स्पीकर ने क्या कदम उठाया?
समाचार एजेंसी पीटीआई ने सूत्रों के हवाले से बताया कि लोकसभा अध्यक्ष ने एनसीपीआई सांसदों से इस घटना को लेकर लिखित शिकायत देने को कहा है। यह विवाद तृणमूल कांग्रेस में हुए विभाजन की पृष्ठभूमि में सामने आया है।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार के बाद टीएमसी के करीब 20 सांसदों ने नेतृत्व के खिलाफ बगावत कर दी थी और नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में शामिल हो गए थे। बागी सांसदों ने लोकसभा में टीएमसी सांसदों से अलग बैठना शुरू कर दिया और सार्वजनिक रूप से सत्तारूढ़ एनडीए सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना समर्थन देने का एलान किया।
केंद्र सरकार पंजाब को विकसित राज्य बनाने के लिए करेगी बड़ी पहल : जंगी लाल महाजन
टांडा / होशियारपुर / सत्ता संदेश
रिपोर्ट : जसप्रीत सिंह सैनी
भारतीय जनता पार्टी की संगठनात्मक गतिविधियों को लेकर टांडा में एक विशेष बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिला अध्यक्ष योगेश सपरा और मुकेरियां विधानसभा क्षेत्र के विधायक जंगी लाल महाजन विशेष रूप से शामिल हुए। इस दौरान पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ आगामी रणनीति तथा संगठन को मजबूत बनाने पर चर्चा की गई।
बैठक को संबोधित करते हुए विधायक जंगी लाल महाजन ने कहा कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार देशभर के साथ-साथ पंजाब के विकास के लिए बड़े स्तर पर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा ने वर्ष 2027 के पंजाब विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं और पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ लगातार तालमेल बनाकर संगठन को मजबूत किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार पंजाब को विकसित राज्य बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर काम कर रही है। जालंधर में विकसित आधुनिक रेलवे स्टेशन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह दोआबा क्षेत्र के लिए गर्व की बात है और केंद्र सरकार की विकासवादी सोच का उदाहरण है।
जंगी लाल महाजन ने दावा किया कि पंजाब में हो रहे अधिकांश बड़े विकास कार्य केंद्र सरकार के सहयोग से संभव हो रहे हैं। उन्होंने भारत-अमेरिका ट्रेड एग्रीमेंट को लेकर भी अपनी प्रतिक्रिया दी और इस संबंध में पार्टी का पक्ष रखा। इसके साथ ही उन्होंने दिल्ली में NEET परीक्षा से जुड़े छात्रों के मुद्दे पर भी अपनी बात रखी।
बैठक के दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं से बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने और आगामी चुनावों के लिए पूरी सक्रियता के साथ कार्य करने का आह्वान किया गया।
SIT समन में जांच करने में मदद करेंगे सुखबीर सिंह, पंजाब सरकार पर साधा निशाना
पंजाब / सत्ता संदेश
शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल सोमवार यानी 20 जुलाई को पूछताछ के लिए पंजाब पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) के सामने पेश होंगे. इसे लेकर अकाली दल ने शक्ति प्रदर्शन की तैयारी की है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पेशी से पहले सुखबीर सिंह बादल ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को उन्हें गिरफ्तार कराए जाने का भी चैलेंज किया है.
20 जुलाई यानी सोमवार को सुखबीर सिंह बादल को सुबह 11 बजे पंजाब पुलिस ऑफिसर्स इंस्टीट्यूट, सेक्टर 32, चंडीगढ़ में पेश होना है. बता दें कि 14 अक्तूबर 2015 में फरीदकोट के बहबलकलां और कोटकपूरा में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोगों पर पुलिस फायरिंग हुई थी. जिसमें दो सिख प्रदर्शनकारियों गुरजीत सिंह और कृष्ण भगवान सिंह की मौत हो गई थी. इस घटना के वक्त सुखबीर बादल पंजाब के डिप्टी सीएम और गृहमंत्री थे. इसी मामले को लेकर कल सुखबीर बादल से पूछताछ होनी है.
आप सरकार पर जमकर बरसे बादल
वहीं समन को लेकर सुखबीर सिंह बादल ने प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार चुनावों से पहले राजनीतिक कारणों से इस मुद्दे को फिर से उठा रही है. उन्होंने इसे राज्य सरकार का “एक और हथकंडा” बताया, लेकिन साथ ही कहा कि वह जांच में सहयोग करेंगे, क्योंकि अतीत में भी जब-जब उन्हें बुलाया गया, उन्होंने जांच में हिस्सा लिया था. सुखबीर बादल ने कहा कि बीते 10 साल से चालान तक पेश नहीं किया गया. आरोपियों को पकड़ने की बजाय राजनीति खेली जा रही है. अब चार माह के बाद असली आरोपी हम पकड़ेंगे.
बीजेपी नेता विजय सांपला से भी की थी पूछताछ
यह घटनाक्रम वरिष्ठ बीजेपी नेता विजय सांपला से स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) द्वारा पूछताछ किए जाने के कुछ ही दिनों बाद सामने आया है. सांपला ने पंजाब सरकार पर गलत जानकारी फैलाने और जांच में दखल देने का आरोप लगाया है. उनका कहना है कि राजनीतिक तौर पर नियुक्त लोग SIT को दिए गए उनके बयान के बारे में सार्वजनिक रूप से दावे कर रहे हैं.
आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी पर बुलडोजर? 38 इमारतें अवैध घोषित | पूरा विवाद क्या है?
रामपुर / सत्ता संदेश
उत्तर प्रदेश के रामपुर में स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी एक बार फिर सुर्खियां में है। कभी इसे समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान का ड्रीम प्रोजेक्ट कहा जाता था, लेकिन अब यही यूनिवर्सिटी कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई के केंद्र में आ गई है। रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) ने यूनिवर्सिटी परिसर की 38 इमारतों को अवैध निर्माण मानते हुए उन्हें गिराने करने का आदेश जारी किया है। इन इमारतों में कई एकेडमिट डिपार्टमेंट, लेबोरेटरी और अन्य सुविधाएं हैं। इससे हजारों छात्रों और कर्मचारियों के भविष्य को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
इस बीच इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की जांच ने भी विवाद को और गहरा कर दिया है। विभाग ने यूनिवर्सिटी के निर्माण की लागत लगभग 496 करोड़ रुपये आंकी है, जबकि ट्रस्ट का दावा है कि निर्माण पर केवल 46 करोड़ रुपये खर्च हुए। इससे पहले इनकम टैक्स डिपार्टमेंट निर्माण लागत और फंडिंग को लेकर ट्रस्ट को करोड़ों रुपये का नोटिस भी जारी कर चुका है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर जौहर यूनिवर्सिटी पर एक साथ इतनी कार्रवाई क्यों हो रही है और इसके पीछे कानूनी आधार क्या है?
2006 में रखी गई थी यूनिवर्सिटी की नींव
जौहर यूनिवर्सिटी की नींव साल 2006 में रखी गई थी। इसे मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट ने स्थापित किया और धीरे-धीरे यहां मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग, शिक्षा, कृषि, लाइब्रेरी, हॉस्टल और अन्य एकेडमिक बिल्डिंग्स तैयार किए गए। करीब 98 एकड़ में फैला यह परिसर उत्तर प्रदेश के बड़े प्राइवेट यूनिवर्सिटी परिसरों में गिना जाता है। साल 2012 में इसका उद्घाटन हुआ और बाद में इसे यूनिवर्सिटी का दर्जा मिला। हालांकि, समय के साथ इस प्रोजेक्ट पर जमीन विवाद, निर्माण की मंजूरी, पैसों में गड़बड़ी और सरकारी नियमों के उल्लंघन जैसे कई आरोप लगते रहे।
- क्या 38 इमारतें अवैध हैं- प्रशासन का दावा है कि इन भवनों के नक्शे स्वीकृत नहीं कराए गए, इसलिए इन्हें अवैध माना गया है।
- क्या तुरंत बुलडोजर चलेगा- नहीं, पहले ट्रस्ट को 15 दिन का समय दिया जाएगा. इसके बाद आगे की कार्रवाई होगी।
- क्या ट्रस्ट के पास बचाव का मौका है- हां, ट्रस्ट इस आदेश को अदालत में चुनौती दे सकता है।
- निर्माण लागत पर विवाद क्या है- इनकम टैक्स का दावा है कि निर्माण पर 496 करोड़ रुपये खर्च हुए, जबकि ट्रस्ट 46 करोड़ रुपये खर्च होने की बात कह रहा है।
- क्या इससे पढ़ाई प्रभावित होगी- अगर कार्रवाई होती है, तो कुछ विभाग और सुविधाएं प्रभावित हो सकती हैं. अंतिम स्थिति अदालत के फैसले पर निर्भर करेगी।
अब सबसे बड़ा विवाद 38 भवनों के नक्शे को लेकर है. प्रशासन का कहना है कि इन भवनों का नक्शा कभी पास नहीं कराया गया, इसलिए इन्हें अवैध निर्माण माना गया है. दूसरी ओर ट्रस्ट का कहना है कि वह कानूनी विकल्प अपनाएगा और आदेश को अदालत में चुनौती देगा. ऐसे में यह मामला केवल एक यूनिवर्सिटी का नहीं, बल्कि निर्माण नियमों, प्रशासनिक प्रक्रिया और कानून के पालन का भी बन गया है.

जौहर यूनिवर्सिटी विवाद में क्यों है?
रामपुर विकास प्राधिकरण का कहना है कि यूनिवर्सिटी परिसर में बने 38 भवनों के नक्शे संबंधित प्राधिकरण से कभी स्वीकृत नहीं कराए गए. जांच के दौरान यह पाया गया कि मेडिकल कॉलेज और कुछ एकेडमिक बिल्डिंग्स को छोड़कर ज्यादातर निर्माण के लिए आवश्यक अनुमति नहीं ली गई है. इसी आधार कार्रवाई करते हुए ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया गया.
क्या हर निर्माण के लिए मंजूरी जरूरी है?
किसी भी बड़े निर्माण के लिए सक्षम प्राधिकारी से भवन का नक्शा पास कराना जरूरी होता है. जब जौहर यूनिवर्सिटी का निर्माण शुरू हुआ था, तब यह क्षेत्र जिला पंचायत के अधिकार क्षेत्र में आता था. उत्तर प्रदेश क्षेत्र पंचायत एवं जिला पंचायत अधिनियम, 1961 (संशोधित 1994) की धारा 239 के अनुसार, निर्माण से पहले अनुमति लेना जरूरी था. प्रशासन का आरोप है कि यूनिवर्सिटी ने सभी भवनों के लिए यह प्रक्रिया पूरी नहीं की.
निर्माण की मंजूरी किससे लेनी थी?
साल 2015 में रामपुर विकास प्राधिकरण का गठन हुआ, लेकिन जौहर यूनिवर्सिटी वाला क्षेत्र सितंबर 2024 में उसके अधिकार क्षेत्र में शामिल किया गया. उससे पहले जौहर यूनिवर्सिटी जिस सिंगनखेड़ा गांव में स्थित था, वह जिला पंचायत के अधीन आता था. इसलिए शुरुआती निर्माण के समय जिला पंचायत से मंजूरी आवश्यक थी. बाद में 38 भवनों के नक्शा न पास होने की शिकायत की गई थी. इसके बाद उत्तर प्रदेश शहरी योजना एवं विकास अधिनियम, 1973 की धारा 27(1) के तहत विस्तृत सुनवाई और अभिलेखों की जांच के बाद विश्वविद्यालय की 38 इमारतों को ध्वस्त करने का आदेश जारी किया गया.
निर्माण में कितना खर्च आया?
निर्माण में कितना पैसा लगा, यही इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा मुद्दा है. जौहर यूनिवर्सिटी के निर्माण पर कितना खर्च हुआ, इसे लेकर अलग-अलग दावे किए गए हैं. कोई आधिकारिक आंकड़ा सामने नहीं आया है. समाजवादी पार्टी सरकार के समय श्रम विभाग ने इसकी अनुमानित लागत करीब 2,000 करोड़ रुपये बताई थी. वहीं, बाद में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने CPWD से निर्माण लागत का आकलन कराया, जिसमें खर्च करीब 494 करोड़ रुपये बताया गया.

इसके आधार पर अप्रैल 2025 में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने जौहर ट्रस्ट को करोड़ों रुपये का नोटिस भेजा. विभाग का आरोप था कि ट्रस्ट के खातों में सिर्फ 100 करोड़ रुपये का खर्च दर्ज है, जबकि असल निर्माण लागत करीब 450 करोड़ रुपये है. इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने दोनों के बीच 350 करोड़ रुपये के अंतर को कथित बेनामी निवेश मानते हुए ब्याज सहित वसूली का नोटिस जारी किया. अलग-अलग आंकड़ों की वजह से ये विवाद और बढ़ गया है.
38 इमारतें कब गिराई जाएंगी?
रामपुर के जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी के अनुसार, नियमानुसार ट्रस्ट को पहले 15 दिन का समय दिया जाएगा, ताकि वह स्वयं अवैध निर्माण हटा सके. अगर निर्धारित समय में ऐसा नहीं किया जाता, तो रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) अपने स्तर पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करेगा.
जौहर ट्रस्ट का रजिस्ट्रेशन क्यों रद्द हुआ?
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट का पंजीकरण रद्द कर दिया है. डिपार्टमेंट का कहना है कि ट्रस्ट की गतिविधियां जनहित के अनुरूप नहीं थीं और कई वित्तीय व प्रशासनिक अनियमितताएं सामने आई हैं. जांच में आरोप लगा कि ट्रस्ट ने चंदा जुटाने में गड़बड़ी की, कुछ डमी ट्रस्टी बनाए और निर्माण लागत कम दिखाकर टैक्स से जुड़े नियमों का उल्लंघन किया. ट्रस्ट से जुड़े सदस्यों पर भी सवाल उठाए गए हैं, जिसमें 9 लोग शामिल हैं. इन लोगों में 5 आजम खान के परिवार के ही सदस्य हैं.
अब ट्रस्ट के पास क्या है विकल्प?
ट्रस्ट इस आदेश के खिलाफ अदालत जा सकता है. वह निचली अदालत या इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर सकता है. अगर कोर्ट से राहत मिलती है, तो फिलहाल इमारतें गिराने की कार्रवाई रुक सकती है. आगे क्या होगा, इसका फैसला अदालत के आदेश के बाद ही तय होगा.
विधायक मनप्रीत अयाली को चार जिलों का प्रभारी बनाए जाने का लवली ने किया स्वागत
लुधियाना / सत्ता संदेश
अकाली दल ‘वारिस पंजाब दे’ द्वारा वरिष्ठ नेता एवं विधायक मनप्रीत सिंह अयाली को पंजाब के चार जिलों मोहाली, श्री फतेहगढ़ साहिब, लुधियाना और रूपनगर का प्रभारी नियुक्त किए जाने के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई है। बड़ी संख्या में लोग पार्टी की नीतियों से प्रभावित होकर अकाली दल ‘वारिस पंजाब दे’ से जुड़ चुके हैं और यह सिलसिला लगातार जारी है।
यहां जारी एक बयान में, विधानसभा क्षेत्र जगराओं के सेवादार राजीव कुमार लवली ने विधायक अयाली को मिली इस जिम्मेदारी का स्वागत किया। लवली ने कहा कि अयाली की नियुक्ति का प्रभाव केवल मालवा ही नहीं, बल्कि पूरे पंजाब में देखने को मिलेगा। उन्होंने कहा कि पार्टी की नीतियों और गतिविधियों से प्रभावित होकर बड़ी संख्या में लोग अकाली दल ‘वारिस पंजाब दे’ से जुड़ रहे हैं और यह क्रम आगे भी जारी रहेगा।
लवली ने जोर देते हुए, कहा कि विधायक अयाली, सांसद भाई अमृतपाल सिंह खालसा की सोच को आगे बढ़ाते हुए, पार्टी के समूचे नेतृत्व और कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर वर्ष 2027 में एक निरोल पंथक सरकार के गठन के उद्देश्य से लगातार अभियान चला रहे हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी की लहर हर गांव और हर शहर तक पहुंच रही है तथा प्रदेश को बचाने के लिए लोग बढ़-चढ़कर पार्टी का हिस्सा बन रहे हैं।

