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आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी पर बुलडोजर? 38 इमारतें अवैध घोषित | पूरा विवाद क्या है?

रामपुर / सत्ता संदेश

उत्तर प्रदेश के रामपुर में स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी एक बार फिर सुर्खियां में है। कभी इसे समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान का ड्रीम प्रोजेक्ट कहा जाता था, लेकिन अब यही यूनिवर्सिटी कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई के केंद्र में आ गई है। रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) ने यूनिवर्सिटी परिसर की 38 इमारतों को अवैध निर्माण मानते हुए उन्हें गिराने करने का आदेश जारी किया है। इन इमारतों में कई एकेडमिट डिपार्टमेंट, लेबोरेटरी और अन्य सुविधाएं हैं। इससे हजारों छात्रों और कर्मचारियों के भविष्य को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।

इस बीच इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की जांच ने भी विवाद को और गहरा कर दिया है। विभाग ने यूनिवर्सिटी के निर्माण की लागत लगभग 496 करोड़ रुपये आंकी है, जबकि ट्रस्ट का दावा है कि निर्माण पर केवल 46 करोड़ रुपये खर्च हुए। इससे पहले इनकम टैक्स डिपार्टमेंट निर्माण लागत और फंडिंग को लेकर ट्रस्ट को करोड़ों रुपये का नोटिस भी जारी कर चुका है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर जौहर यूनिवर्सिटी पर एक साथ इतनी कार्रवाई क्यों हो रही है और इसके पीछे कानूनी आधार क्या है?

2006 में रखी गई थी यूनिवर्सिटी की नींव

जौहर यूनिवर्सिटी की नींव साल 2006 में रखी गई थी। इसे मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट ने स्थापित किया और धीरे-धीरे यहां मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग, शिक्षा, कृषि, लाइब्रेरी, हॉस्टल और अन्य एकेडमिक बिल्डिंग्स तैयार किए गए। करीब 98 एकड़ में फैला यह परिसर उत्तर प्रदेश के बड़े प्राइवेट यूनिवर्सिटी परिसरों में गिना जाता है। साल 2012 में इसका उद्घाटन हुआ और बाद में इसे यूनिवर्सिटी का दर्जा मिला। हालांकि, समय के साथ इस प्रोजेक्ट पर जमीन विवाद, निर्माण की मंजूरी, पैसों में गड़बड़ी और सरकारी नियमों के उल्लंघन जैसे कई आरोप लगते रहे।

  1. क्या 38 इमारतें अवैध हैं- प्रशासन का दावा है कि इन भवनों के नक्शे स्वीकृत नहीं कराए गए, इसलिए इन्हें अवैध माना गया है।
  2. क्या तुरंत बुलडोजर चलेगा- नहीं, पहले ट्रस्ट को 15 दिन का समय दिया जाएगा. इसके बाद आगे की कार्रवाई होगी।
  3. क्या ट्रस्ट के पास बचाव का मौका है- हां, ट्रस्ट इस आदेश को अदालत में चुनौती दे सकता है।
  4. निर्माण लागत पर विवाद क्या है- इनकम टैक्स का दावा है कि निर्माण पर 496 करोड़ रुपये खर्च हुए, जबकि ट्रस्ट 46 करोड़ रुपये खर्च होने की बात कह रहा है।
  5. क्या इससे पढ़ाई प्रभावित होगी- अगर कार्रवाई होती है, तो कुछ विभाग और सुविधाएं प्रभावित हो सकती हैं. अंतिम स्थिति अदालत के फैसले पर निर्भर करेगी।

अब सबसे बड़ा विवाद 38 भवनों के नक्शे को लेकर है. प्रशासन का कहना है कि इन भवनों का नक्शा कभी पास नहीं कराया गया, इसलिए इन्हें अवैध निर्माण माना गया है. दूसरी ओर ट्रस्ट का कहना है कि वह कानूनी विकल्प अपनाएगा और आदेश को अदालत में चुनौती देगा. ऐसे में यह मामला केवल एक यूनिवर्सिटी का नहीं, बल्कि निर्माण नियमों, प्रशासनिक प्रक्रिया और कानून के पालन का भी बन गया है.

जौहर यूनिवर्सिटी विवाद में क्यों है?

रामपुर विकास प्राधिकरण का कहना है कि यूनिवर्सिटी परिसर में बने 38 भवनों के नक्शे संबंधित प्राधिकरण से कभी स्वीकृत नहीं कराए गए. जांच के दौरान यह पाया गया कि मेडिकल कॉलेज और कुछ एकेडमिक बिल्डिंग्स को छोड़कर ज्यादातर निर्माण के लिए आवश्यक अनुमति नहीं ली गई है. इसी आधार कार्रवाई करते हुए ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया गया.

क्या हर निर्माण के लिए मंजूरी जरूरी है?

किसी भी बड़े निर्माण के लिए सक्षम प्राधिकारी से भवन का नक्शा पास कराना जरूरी होता है. जब जौहर यूनिवर्सिटी का निर्माण शुरू हुआ था, तब यह क्षेत्र जिला पंचायत के अधिकार क्षेत्र में आता था. उत्तर प्रदेश क्षेत्र पंचायत एवं जिला पंचायत अधिनियम, 1961 (संशोधित 1994) की धारा 239 के अनुसार, निर्माण से पहले अनुमति लेना जरूरी था. प्रशासन का आरोप है कि यूनिवर्सिटी ने सभी भवनों के लिए यह प्रक्रिया पूरी नहीं की.

निर्माण की मंजूरी किससे लेनी थी?

साल 2015 में रामपुर विकास प्राधिकरण का गठन हुआ, लेकिन जौहर यूनिवर्सिटी वाला क्षेत्र सितंबर 2024 में उसके अधिकार क्षेत्र में शामिल किया गया. उससे पहले जौहर यूनिवर्सिटी जिस सिंगनखेड़ा गांव में स्थित था, वह जिला पंचायत के अधीन आता था. इसलिए शुरुआती निर्माण के समय जिला पंचायत से मंजूरी आवश्यक थी. बाद में 38 भवनों के नक्शा न पास होने की शिकायत की गई थी. इसके बाद उत्तर प्रदेश शहरी योजना एवं विकास अधिनियम, 1973 की धारा 27(1) के तहत विस्तृत सुनवाई और अभिलेखों की जांच के बाद विश्वविद्यालय की 38 इमारतों को ध्वस्त करने का आदेश जारी किया गया.

निर्माण में कितना खर्च आया?

निर्माण में कितना पैसा लगा, यही इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा मुद्दा है. जौहर यूनिवर्सिटी के निर्माण पर कितना खर्च हुआ, इसे लेकर अलग-अलग दावे किए गए हैं. कोई आधिकारिक आंकड़ा सामने नहीं आया है. समाजवादी पार्टी सरकार के समय श्रम विभाग ने इसकी अनुमानित लागत करीब 2,000 करोड़ रुपये बताई थी. वहीं, बाद में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने CPWD से निर्माण लागत का आकलन कराया, जिसमें खर्च करीब 494 करोड़ रुपये बताया गया.

इसके आधार पर अप्रैल 2025 में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने जौहर ट्रस्ट को करोड़ों रुपये का नोटिस भेजा. विभाग का आरोप था कि ट्रस्ट के खातों में सिर्फ 100 करोड़ रुपये का खर्च दर्ज है, जबकि असल निर्माण लागत करीब 450 करोड़ रुपये है. इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने दोनों के बीच 350 करोड़ रुपये के अंतर को कथित बेनामी निवेश मानते हुए ब्याज सहित वसूली का नोटिस जारी किया. अलग-अलग आंकड़ों की वजह से ये विवाद और बढ़ गया है.

38 इमारतें कब गिराई जाएंगी?

रामपुर के जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी के अनुसार, नियमानुसार ट्रस्ट को पहले 15 दिन का समय दिया जाएगा, ताकि वह स्वयं अवैध निर्माण हटा सके. अगर निर्धारित समय में ऐसा नहीं किया जाता, तो रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) अपने स्तर पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करेगा.

जौहर ट्रस्ट का रजिस्ट्रेशन क्यों रद्द हुआ?

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट का पंजीकरण रद्द कर दिया है. डिपार्टमेंट का कहना है कि ट्रस्ट की गतिविधियां जनहित के अनुरूप नहीं थीं और कई वित्तीय व प्रशासनिक अनियमितताएं सामने आई हैं. जांच में आरोप लगा कि ट्रस्ट ने चंदा जुटाने में गड़बड़ी की, कुछ डमी ट्रस्टी बनाए और निर्माण लागत कम दिखाकर टैक्स से जुड़े नियमों का उल्लंघन किया. ट्रस्ट से जुड़े सदस्यों पर भी सवाल उठाए गए हैं, जिसमें 9 लोग शामिल हैं. इन लोगों में 5 आजम खान के परिवार के ही सदस्य हैं.

अब ट्रस्ट के पास क्या है विकल्प?

ट्रस्ट इस आदेश के खिलाफ अदालत जा सकता है. वह निचली अदालत या इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर सकता है. अगर कोर्ट से राहत मिलती है, तो फिलहाल इमारतें गिराने की कार्रवाई रुक सकती है. आगे क्या होगा, इसका फैसला अदालत के आदेश के बाद ही तय होगा.

सूर्यकुमार यादव- श्रेयस अय्यर का टूटा रिकॉर्ड, 40 गेंदों पर शतक, स्टीव स्मिथ का इस बल्लेबाज के साथ धमाका

खेल डेस्क / सत्ता संदेश

मेजर लीग क्रिकेट में सूर्यकुमार यादव और श्रेयस अय्यर का रिकॉर्ड टूट गया है। दोनों भारतीय बल्लेबाजों के साथ मिलकर बनाए रिकॉर्ड को तोड़ा है एंड्रीस गॉस और स्टीव स्मिथ ने। टूर्नामेंट के एलिमिनेटर 1 में मुंबई इंडियंस न्यू यॉर्क का सामना वॉशिंगटन फ्रीडम से हुआ। इस मुकाबले में ताबड़तोड़ ऐसे रन बने कि रिकॉर्डों की बाढ़ सी आ गई। मुकाबले में मुंबई इंडियंस न्यूयॉर्क ने पहले बल्लेबाजी करते हुए MLC के इतिहास का सबसे बड़ा टोटल खड़ा किया। उसने 20 ओवर में 9 विकेट पर 266 रन बनाए, जिसमें उसके कप्तान निकोलस पूरन के जमाए 30 गेंदों वाले शतक की बड़ी भूमिका रही. लीग के सबसे बड़े स्कोर को चेज कर पाना वॉशिंगटन फ्रीडम के लिए मुश्किल लग रहा था। लेकिन, उस मुश्किल चुनौती से पार पाने का तोड़ जिस तरह से एंड्रीस गॉस और स्टीव स्मिथ ने ढूंढा़ वो काबिल तारीफ रहा।

एंड्रीस गॉस और स्टीव स्मिथ ने किया धमाका

वॉशिंगटन फ्रीडम की शुरुआत खराब रही. 267 रन के रिकॉर्ड लक्ष्य के आगे उसके 2 विकेट 10 रन पर गिर गए। लेकिन, उसके बाद जो हुआ, वो इतिहास में दर्ज हो गया। एंड्रीस गॉस और स्टीव स्मिथ ने मिलकर MI न्यू यॉर्क को मुंहतोड़ जवाब दिया. दोनों ने तूफानी शतक जड़ा। भले ही उनका शतक निकोलस पूरन के शतक जितना तेज ना रहा हो। मगर उसमें MI न्यू यॉर्क को हार के मुंह में धकेलते हुए MLC के सबसे बड़े स्कोर को चेज कर लेने वाली धार जरूर रही।

दोनों ने 40-40 गेंदों में पूरा किया शतक

एंड्रीस गॉस ने 258.82 की स्ट्राइक रेट से 12 छक्के और 10 चौके के साथ 51 गेंदों पर 132 रन बनाए। इस दौरान उन्होंने अपना शतक 40 गेंदों में पूरा किया। वहीं स्टीव स्मिथ ने 48 गेंदों पर 229.16 की स्ट्राइक रेट से नाबाद 110 रन बनाए, जिसमें 9 छक्के और 7 चौके शामिल रहे। स्मिथ ने भी गॉस के जैसे 40वीं गेंद पर ही अपनी सेंचुरी पूरी की।

सूर्यकुमार यादव और श्रेयस अय्यर का रिकॉर्ड टूटा

एंड्रीस गॉस और स्टीव स्मिथ के बीच 241 रन की साझेदारी हुई, जो कि T20 में तीसरे विकेट के लिए हुई सबसे बड़ी पार्टनरशिप का वर्ल्ड रिकॉर्ड है. इससे पहले ये रिकॉर्ड भारत के सूर्यकुमार यादव और श्रेयस अय्यर के नाम था। उन दोनों 2019 में सिक्किम के खिलाफ T20 में मुंबई की ओर से खेलते हुए तीसरे विकेट के लिए 213 रन की पार्टनरशिप की थी।

एंड्रीस गॉस और स्टीव स्मिथ की रिकॉर्ड साझेदारी के दम पर वॉशिंगटन फ्रीडम ने 18.4 ओवर में ही 4 विकेट पर 270 रन बना लिए। इस तरह उन्होंने 8 गेंद शेष रहते ही 6 विकेट से मुकाबला जीत लिया।

भारत-बेल्जियम की ‘स्ट्रैटिजक दोस्ती’, व्यापार से लेकर ऱक्षा संवाद तक हुई कई समझौते

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

भारत और बेल्जियम ने अपने आपसी संबंधों को नई गति देने के मकसद से पहली ‘भारत-बेल्जियम रणनीतिक वार्ता’ (Strategic Dialogue) आयोजित की। इस बैठक की सह-अध्यक्षता विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और बेल्जियम के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री मैक्सिम प्रेवोट ने की.दोनों देश अपने आपसी संबंधों को और अधिक संस्थागत, व्यापक और परिणाम-उन्मुख बनाने पर सहमत हुए।

यह रणनीतिक वार्ता, भारत-यूरोपीय संघ (EU) रणनीतिक साझेदारी के व्यापक ढांचे के भीतर नियमित राजनीतिक बातचीत के लिए एक नए मंच के रूप में काम करेगी. बैठक में व्यापार और निवेश, ग्रीन एनर्जी ट्रांज़िशन (हरित ऊर्जा की ओर बदलाव), इनोवेशन और टेक्नोलॉजी, कनेक्टिविटी, रक्षा और सुरक्षा, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर सहयोग और लोगों के बीच आपसी संबंधों जैसे प्रमुख क्षेत्रों में साझेदारी को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया.

साझेदारी में बेल्जियम का एक खास स्थान

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा कि यूरोप के साथ भारत की साझेदारी में बेल्जियम का एक खास स्थान है और यह रणनीतिक वार्ता दोनों देशों की पूरक ताकतों को ठोस नतीजों में बदलने का जरिया बनेगी. वहीं, बेल्जियम के विदेश मंत्री मैक्सिम प्रेवोट ने कहा कि मार्च 2025 में होने वाला बेल्जियम का आर्थिक मिशन दोनों देशों के बीच मजबूत आर्थिक संबंधों का प्रमाण है. उन्होंने कहा कि व्यापार, निवेश और इनोवेशन भविष्य के सहयोग के लिए एक मजबूत आधार बनाते हैं.

‘भारत-EU बिजनेस फोरम’ का भी आयोजन

दोनों देश नियमित उच्च-स्तरीय बैठकें करने पर सहमत हुए. साथ ही, 2026 के लिए प्रस्तावित उच्च-स्तरीय यात्राओं के दौरान विभिन्न प्रमुख पहलों को आगे बढ़ाने का भी निर्णय लिया गया. रणनीतिक वार्ता के साथ-साथ ‘भारत-EU बिजनेस फोरम’ का भी आयोजन किया गया, जिसमें भारत, बेल्जियम और अन्य यूरोपीय देशों के उद्योग प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया.

दोनों देशों के इन नेताओं ने किया प्रतिनिधित्व

भारत का प्रतिनिधित्व विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर, वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने किया. बेल्जियम का प्रतिनिधित्व फ्लैंडर्स के मंत्री-अध्यक्ष (Minister-President) मैथियास डाइपेंडेल और वालोनिया के मंत्री-अध्यक्ष एड्रियन डोलिमोंट ने किया.

भारत-EU मुक्त व्यापार समझौते पर फोकस

बिजनेस फोरम में भारत-EU मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के संदर्भ में व्यापार और निवेश के नए अवसरों पर विस्तृत चर्चा हुई. बैठक के समापन पर, भारत और बेल्जियम ने भविष्य-उन्मुख, महत्वाकांक्षी और मजबूत रणनीतिक साझेदारी के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और बदलते वैश्विक परिदृश्य के बीच आपसी संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का संकल्प लिया.

सोनम वांगचुक की हड़ताल पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, दिल्ली सरकार को भेजा नोटिस

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल कर रहे सोनम वांगचुक का मामला दिल्ली हाई कोर्ट पहुंच गया है। जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक बीती 28 जून से आमरण अनशन कर रहे हैं। सोनम वांगचुक द्वारा की जा रही भूख हड़ताल को लेकर हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका (पीआईएल) दायर की गई है। दिल्ली हाई कोर्ट ने इस फैसले पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया है। याचिका पर मुख्य न्यायाधीश देवेन्द्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खण्डपीठ सुनवाई कर रही थी।

याचिका सामाजिक कार्यकर्ता और वकील राकेश कुमार सैनी ने दाखिल की है। याचिका में केंद्र सरकार को निर्देश देने की मांग की गई है कि वांगचुक को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया जाए और उनकी जान बचाने के लिए जरूरत पड़ने पर उन्हें जबरन भोजन (फोर्स-फीडिंग) दिया जाए। दायर याचिका में केंद्र और दिल्ली सरकारों को वांगचुक को जबरन खाना खिलाने के निर्देश देने की मांग की गई है।

बता दें कि सोनम वांगचुक दिल्ली के जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल कर रहे हैं। यहां उनके भूख हड़ताल को 18 दिन हो चुके हैं। वे कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक के समर्थन में अनशन पर बैठे हैं। पार्टी संस्थापक शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि मई में हुई परीक्षा पेपर लीक की घटनाओं से लाखों छात्र प्रभावित हुए।

वांगचुक की बिगड़ती सेहत को लेकर चिंता जताई जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उनका शरीर लगातार कमजोर हो रहा है, मांसपेशियों में दर्द है और उनका वजन 8.5 किलोग्राम कम हो चुका है। उनका ब्लड प्रेशर 109/70 दर्ज किया गया है। हजारों समर्थक उनसे अनशन समाप्त करने की अपील कर रहे हैं, लेकिन वह अपने फैसले पर अडिग हैं।

उधर, सीजेपी ने घोषणा की है कि वह संसद के मानसून सत्र के पहले दिन, यानी 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद भवन तक एक शांतिपूर्ण मार्च निकालेगी। सीजेपी ने देश भर के छात्रों, अभिभावकों और आम नागरिकों से इस मार्च में शामिल होने की अपील की है। इस आंदोलन की मुख्य मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाना है।

प्रदर्शनकारियों की कथित निगरानी को हाईकोर्ट में दी चुनौती
जेएनयूएसयू की पूर्व अध्यक्ष आइशी घोष ने जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की कथित निरंतर निगरानी को चुनौती देते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है। याचिका में मांग की गई है कि विरोध स्थल पर अंधाधुंध फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी और निगरानी टावर का संचालन असंवैधानिक घोषित किया जाए, साथ ही ऐसी निगरानी को निलंबित करने और सार्वजनिक प्रदर्शनों में निगरानी को विनियमित करने के लिए दिशानिर्देश तैयार करने का निर्देश दिया जाए।

उमस से बेहाल हुआ पंजाब: मानसून की धीमी रफ्तार से 41.3 डिग्री पहुंचा तामपान, 19 जून के बाद बदलेगा मौसम

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

पंजाब में मानसून की धीमी रफ्तार के कारण एक बार फिर गर्मी का प्रकोप बढ़ गया है। मौसम विभाग ने अगले दो दिन राज्य के आठ जिलों में गर्मी और उमस की स्थिति रहने का अलर्ट जारी किया है। वहीं 20 जुलाई से पंजाब में भारी बारिश होने की संभावना है।

बुधवार को तापमान में 0.4 डिग्री की वृद्धि दर्ज की गई, जिससे पारा सामान्य से 2.1 डिग्री ऊपर पहुंच गया है। फरीदकोट में सबसे अधिक 41.3 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया। न्यूनतम तापमान में भी 0.1 डिग्री की वृद्धि हुई है, जो फिलहाल सामान्य के करीब बना हुआ है। 

मौसम विभाग के अनुसार, 19 जुलाई से एक नया पश्चिमी विक्षोभ उत्तर-पश्चिमी भारत को प्रभावित करेगा। इसके असर से 20 और 21 जुलाई को पंजाब के कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है।

मौसम विभाग ने फिरोजपुर, फाजिल्का, फरीदकोट, मोगा, मुक्तसर, बठिंडा, बरनाला और मानसा जिलों में गर्मी व उमस का अलर्ट दिया है। वहीं, गुरदासपुर, अमृतसर, तरनतारन, होशियारपुर, नवांशहर, कपूरथला, फतेहगढ़ साहिब, रूपनगर और मोहाली में अलग-अलग जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है। अमृतसर का अधिकतम पारा 34.6 डिग्री और लुधियाना का 36.4 डिग्री रहा। सबसे कम न्यूनतम पारा अमृतसर में 24.4 डिग्री दर्ज किया गया।

आयकर निदेशालय ने नए आयकर नियम 2025 और 2026 पर आउटरीच कार्यक्रम का किया आयोजन

चंडीगण / सत्ता संदेश

आयकर निदेशालय (खुफिया और आपराधिक जांच), चंडीगढ़ ने श्री आनंदपुर साहिब में आयकर निदेशक (I&CI), चंडीगढ़, आईआरएस रोहित शर्मा, के मार्गदर्शन में मंगलवार को प्रारंभ (PRARAMBH), 2026 के देशव्यापी अभियान के तहत एक आउटरीच कार्यक्रम का आयोजन किया।

इस सेमिनार में आईसीएआई (ICAI) के सदस्यों, बार एसोसिएशन के सदस्यों, बैंकरों और तहसीलदारों की सक्रिय भागीदारी देखी गई।

यह कार्यक्रम नए आयकर अधिनियम, 2025 और नए आयकर नियम, 2026 के प्रावधानों तथा I&CI निदेशालय के संबंध में एसएफटी (SFT) और एसआरए (SRA) दाखिल करने से संबंधित नए फॉर्म 97, 98, 165, 166 और 167 पर स्पष्टता प्रदान करने के लिए आयोजित किया गया था।

इस आउटरीच पहल का एक महत्वपूर्ण घटक एआई (AI) सक्षम “कर साथी” चैटबॉट का प्रदर्शन था। उपस्थित लोगों को चैटबॉट की कार्यक्षमता और उपयोगिता के बारे में समझाया गया कि एआई सक्षम चैटबॉट “कर साथी” आधिकारिक विभागीय वेबसाइट www.incometaxindia.gov.in पर आसानी से उपलब्ध है। तदनुसार, प्रतिभागियों को आयकर वेबसाइट पर उपलब्ध नए एआई टूल का गहन अनुभव देने के लिए “कर साथी” पर एक समर्पित डेस्क स्थापित किया गया था।

सेमीनार के दौरान, श्रीमती सरिता अग्रवाल, आईआरएस, सहायक आयकर निदेशक (I&CI), चंडीगढ़ ने नए आयकर अधिनियम, 2025 की प्रमुख विशेषताओं, I&CI निदेशालय की भूमिका और फॉर्म संख्या 61ए में एसएफटी फाइलिंग व 61बी में एसआरए से संबंधित अनुपालन आवश्यकताओं के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की। यह समझाया गया कि, नियमों के अनुसार, स्थानीय बैंक, यानी को-ऑपरेटिव बैंक, एईओआई-सीआरएस (AEOI-CRS) फ्रेमवर्क (एफएटीसीए के अलावा) के तहत एक रिपोर्टिंग वित्तीय संस्थान है। एक इंटरैक्टिव सत्र भी आयोजित किया गया जिसमें श्रीमती सरिता अग्रवाल, आईआरएस ने प्रतिभागियों द्वारा उठाए गए विभिन्न प्रश्नों का समाधान और स्पष्टीकरण किया।

आयकर अधिनियम के प्रावधानों के बेहतर अनुपालन और प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए हितधारकों के साथ सहयोग को मजबूत करने पर जोर देने के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।