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चंडीगढ़ ने रक्त आधान सेवाओं पर राष्ट्रीय वीडियो कॉन्फ्रेंस में भाग लिया, जिसकी अध्यक्षता अतिरिक्त सचिव (सार्वजनिक स्वास्थ्य) एवं महानिदेशक (NACO) ने की*

चंडीगढ़, 22 अप्रैल 2026: आज सुबह 11 बजे भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा रक्त चढ़ाने से जुड़ी सेवाओं की एक राष्ट्रीय समीक्षा बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए आयोजित की गई। इस बैठक की अध्यक्षता डॉ. राकेश गुप्ता, अतिरिक्त सचिव (सार्वजनिक स्वास्थ्य) और महानिदेशक, नेशनल एड्स कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (NACO) ने की।

इस बैठक में देश के सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। चंडीगढ़ से भी वरिष्ठ अधिकारियों ने इसमें भाग लिया।

बैठक में रक्त सेवाओं के 5 मुख्य चरणों की समीक्षा की गई, जैसे—लाइसेंस देना और नवीनीकरण, रक्तदान करने वालों की जांच और रक्त संग्रह, संक्रमण (TTI) की जांच, रक्त का प्रोसेसिंग और स्टोरेज, तथा रिकॉर्ड रखना। इन सभी को 10 मुख्य मानकों (KPI) के आधार पर परखा गया। इसके लिए eRaktKosh, CDSCO, ब्लड बैंक मैनेजमेंट सिस्टम (BBMS) और अन्य रिकॉर्ड्स के डेटा का उपयोग किया गया।

डॉ. राकेश गुप्ता ने कहा कि देश का लक्ष्य है कि हर जिले में सुरक्षित खून उपलब्ध हो और खून चढ़ाने से होने वाले संक्रमण (TTI) बिल्कुल खत्म हों। उन्होंने यह भी बताया कि दिसंबर 2026 तक हर जिले में कम से कम एक ब्लड बैंक होना चाहिए।

बैठक में बताया गया कि सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ मिलकर जिला स्तर पर ब्लड सेंटर बढ़ाने और सभी लाइसेंस प्राप्त ब्लड सेंटर को eRaktKosh से जोड़ने का काम चल रहा है।

चंडीगढ़ के बारे में बताया गया कि यहां हर जिले में कम से कम एक ब्लड सेंटर उपलब्ध है। साथ ही, यहां अधिकतर रक्तदान स्वेच्छा से किया जाता है और जांच की गुणवत्ता भी बहुत अच्छी है।

आगे के लिए यह तय किया गया कि ब्लड सेंटरों में काम करने के नियमों (SOPs) को सही तरीके से लागू किया जाए, आधुनिक टेस्ट (जैसे ELISA/CLIA) अपनाए जाएं, ब्लड कंपोनेंट अलग करने की सुविधा बढ़ाई जाए और eRaktKosh व BBMS के जरिए डिजिटल ट्रैकिंग को मजबूत किया जाए।

इसके अलावा, ब्लड डोनर्स की पहचान के लिए बायोमेट्रिक सिस्टम और हर ब्लड सेंटर का डिजिटल रजिस्ट्रेशन भी किया जाएगा। इस काम में राज्य ब्लड ट्रांसफ्यूजन काउंसिल, रेड क्रॉस सोसायटी और अन्य संस्थाएं मिलकर काम करेंगी।

बैठक के अंत में डॉ. गुप्ता ने निर्देश दिए कि सभी ब्लड सेंटरों के लाइसेंस की जांच की जाए, eRaktKosh और BBMS का 100% उपयोग सुनिश्चित किया जाए, नियमों का सख्ती से पालन हो, कर्मचारियों को सही प्रशिक्षण दिया जाए और सभी जरूरी उपकरण उपलब्ध कराए जाएं।

चंडीगढ़ प्रशासन ने भरोसा दिलाया कि वह भारत सरकार के साथ मिलकर हर नागरिक को समय पर और सुरक्षित रक्त  उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

पीजीआईएमईआर में 20 अप्रैल से न्यूरोलॉजी एवं न्यूरोसर्जरी ओपीडी एडवांस्ड न्यूरोसाइंस सेंटर में शिफ्ट होंगी

“रोगी देखभाल को बेहतर बनाने और क्लिनिकल दक्षता को सुव्यवस्थित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम” : प्रो. विवेक लाल, निदेशक, पीजीआईएमईआर

चंडीगढ़, 17 2026: अप्रैल पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ ने घोषणा की है कि न्यूरोलॉजी और न्यूरोसर्जरी (न्यूरोसर्जरी ट्रॉमा ओपीडी को छोड़कर) की बाह्य रोगी सेवाएं (ओपीडी) 20 अप्रैल 2026 से एडवांस्ड न्यूरोसाइंसेज सेंटर के लेवल-2 पर (एसबीआई बैंक और गोल मार्केट के पास) संचालित होंगी।

इस परिवर्तन को सुगम बनाने के लिए ये सेवाएं 18 अप्रैल 2026 की दोपहर के बाद न्यू ओपीडी ब्लॉक से बंद कर दी जाएंगी।

इस बदलाव को रोगी देखभाल और क्लिनिकल दक्षता को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताते हुए पीजीआईएमईआर के निदेशक प्रो. विवेक लाल ने कहा,“यह केवल स्थान परिवर्तन नहीं, बल्कि न्यूरोलॉजिकल देखभाल प्रदान करने के तरीके में एक परिवर्तनकारी कदम है। एडवांस्ड न्यूरोसाइंस सेंटर में परामर्श, जांच और उन्नत उपचार सुविधाओं को एकीकृत करके हम एक रोगी-केंद्रित प्रणाली विकसित कर रहे हैं, जो विलंब को कम करती है, उपचार के परिणामों को बेहतर बनाती है और मरीजों को अधिक सहज अनुभव प्रदान करती है। यह कदम सुपर-स्पेशलिटी स्वास्थ्य सेवाओं में नए मानक स्थापित करने की पीजीआईएमईआर की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।”

ओपीडी के समय और कार्यक्रम में कोई बदलाव नहीं किया गया है।न्यूरोलॉजी ओपीडी सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को संचालित होंगी, जबकि गुरुवार को विशेष क्लिनिक (सुबह 11:30 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक) लगेगा।न्यूरोसर्जरी ओपीडी मंगलवार, गुरुवार और शनिवार को पूर्ववत संचालित होंगी, जिनका सामान्य समय सुबह 8:00 बजे से 11:00 बजे तक रहेगा।

मरीज और उनके परिजन पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ के गेट नंबर 3 से एडवांस्ड न्यूरोसाइंसेज सेंटर में प्रवेश कर सकते हैं। आगंतुकों के मार्गदर्शन और सुचारू व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक प्रबंध किए गए हैं।

सभी संबंधित पक्षों से अनुरोध है कि इस परिवर्तन का संज्ञान लें और सहयोग प्रदान करें।

काया कल्प में खन्ना सिविल अस्पताल की बड़ी उपलब्धि

खन्ना / सत्ता संदेश

एसएमओ डॉ. मनिंदर भसीन की अगुवाई में मिला 13वां स्थानपिछले 4 वर्षों में दूसरी बार दोनों राउंड पास कर रचा इतिहास, मिलेगा एक लाख रुपये का इनाममान सरकार की सेहत क्रांति, सेहत मंत्री डा. बलबीर सिंह के निर्देशों, कैबिनेट मंत्री डा. तरुणप्रीत सिंह सौंध और सिविल सर्जन डा. रमनदीप कौर के मार्ग दर्शन से नुहार बदली – एसएमओ डा. मनिंदर भसीन खन्ना/लुधियाना, 16 अप्रैलखन्ना सिविल अस्पताल ने स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण कायाकल्प योजना के दूसरे चरण में भी सफलता प्राप्त की है। इस उपलब्धि के साथ अस्पताल ने पूरे पंजाब में 41 सब डिवीजन सिविल अस्पतालों में से 13वां स्थान हासिल किया है, जो खन्ना के लिए गर्व की बात है।इस योजना के दो मुख्य राउंड होते हैं और खन्ना सिविल अस्पताल ने दोनों ही राउंड सफलतापूर्वक पास किए हैं। खास बात यह है कि पिछले चार वर्षों में यह दूसरी बार है जब अस्पताल ने यह उपलब्धि हासिल की है। इससे न केवल अस्पताल की कार्यक्षमता साबित होती है, बल्कि यहां दी जा रही स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता भी सामने आती है।यह भी उल्लेखनीय है कि पिछले 15 वर्षों में खन्ना सिविल अस्पताल कभी भी कायाकल्प परियोजना के तहत क्वालीफाई नहीं कर पाया था, लेकिन एसएमओ डॉ. मनिंदर सिंह भसीन की योग्य और दूरदर्शी अगुवाई में पिछले चार वर्षों के दौरान दूसरी बार यह उपलब्धि हासिल कर इतिहास रच दिया गया है।इस सफलता का मुख्य श्रेय एसएमओ डॉ. मनिंदर सिंह भसीन को जाता है। उनकी अगुवाई में अस्पताल में लगातार सुधार किए गए हैं, जिससे साफ-सफाई, मरीजों की सुविधाओं और स्टाफ की कार्यप्रणाली में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। डॉ. भसीन की लीडरशिप ने अस्पताल को नई पहचान दी है और यह पहली बार है कि खन्ना के इतिहास में अस्पताल ने दूसरी बार दोनों राउंड पास कर यह मुकाम हासिल किया है।इस उपलब्धि के तहत खन्ना सिविल अस्पताल को एक लाख रुपये का इनाम भी मिलेगा, जो अस्पताल की पूरी टीम के लिए उत्साह बढ़ाने वाला है।एसएमओ डॉ. मनिंदर भसीन ने कहा कि पंजाब के मुख्यमंत्री श्री भगवंत सिंह मान की अगुवाई वाली सरकार की स्वास्थ्य क्रांति, स्वास्थ्य मंत्री डा. बलबीर सिंह के निर्देशों, कैबिनेट मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंध व सिविल सर्जन लुधियाना डा. रमनदीप कौर के मार्गदर्शन के कारण अस्पताल की नुहार बदली है। उन्होंने बताया कि इस सफलता के पीछे कायाकल्प नोडल अधिकारी डॉ. नवनीत कौर और नर्सिंग सिस्टर कुलवीर कौर की मेहनत भी है। पूरी टीम के सहयोग और समर्पण ने अस्पताल को इस मुकाम तक पहुंचाया है।अस्पताल में साफ-सफाई, सैनिटेशन, दवा प्रबंधन और मरीजों को बेहतर सुविधाएं देने पर विशेष ध्यान दिया गया है। मरीजों को सुरक्षित और आरामदायक वातावरण उपलब्ध करवाने के लिए हर स्तर पर काम किया गया है। इसके परिणामस्वरूप अस्पताल की कार्यप्रणाली में बड़ा सुधार आया है और लोगों का भरोसा भी मजबूत हुआ है।स्थानीय लोगों ने भी अस्पताल की व्यवस्थाओं की खुलकर सराहना की है। उनका कहना है कि पिछले तीन वर्षों में सिविल अस्पताल की सेवाओं में काफी सुधार हुआ है और अब मरीजों को बेहतर इलाज मिल रहा है।गौरतलब है कि इससे पहले भी कायाकल्प योजना के तहत अस्पताल का मूल्यांकन किया गया था, जिसमें एसएमओ डॉ. मनिंदर सिंह भसीन की अगुवाई में खन्ना सिविल अस्पताल ने पंजाब में 14वां स्थान हासिल किया था। अब दूसरी बार और बेहतर प्रदर्शन करते हुए अस्पताल ने 13वां स्थान प्राप्त कर अपनी उपलब्धि को और ऊंचा किया है।