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टांडा में ब्यास नदी का बढ़ता खतरा, किसानों ने प्रशासन से बांध मजबूत करने की लगाई गुहार

टांडा/उड़मुड़ / सत्ता संदेश

होशियारपुर के टांडा उड़मुड़ क्षेत्र के रड़ा गांव स्थित ब्यास दरिया के मंड इलाके में संभावित बाढ़ के खतरे को देखते हुए किसानों ने प्रशासन से तुरंत सुरक्षा प्रबंध करने की मांग की है। किसानों का कहना है कि पिछले वर्षों में आई बाढ़ के दौरान दरिया किनारे बने तटबंध (गेट बांध) क्षतिग्रस्त हो गए थे, जिससे सैकड़ों एकड़ फसल पानी में डूबकर बर्बाद हो गई थी।

लगातार हो रही बारिश और ब्यास नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि नदी किनारे क्षतिग्रस्त तटबंधों की तुरंत मरम्मत और मजबूती का कार्य कराया जाए, ताकि इस बार बाढ़ की स्थिति में किसानों की फसलों को नुकसान से बचाया जा सके।

किसानों ने कहा कि पिछले नुकसान की भरपाई अभी तक पूरी तरह नहीं हो पाई है और एक बार फिर बाढ़ की आशंका ने उनकी चिंता बढ़ा दी है। उन्होंने पंजाब सरकार और मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान से अपील की कि ब्यास नदी के किनारे सुरक्षा प्रबंधों को प्राथमिकता के आधार पर मजबूत किया जाए।

किसानों ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते तटबंधों की मरम्मत नहीं कराई गई तो आगामी दिनों में भारी बारिश और बाढ़ की स्थिति से क्षेत्र में बड़ा नुकसान हो सकता है। उन्होंने प्रशासन से तुरंत मौके का निरीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की।

बिहार में आंधी-बारिश और ओलावृष्टि से फसलों को नुकसान, मुख्यमंत्री ने तत्काल सर्वे के निर्देश दिए

पटना / सत्ता संदेश

Bihar के कई जिलों में अचानक आई तेज आंधी, बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। इस प्राकृतिक आपदा के चलते फसलों और पेड़ों पर लगे फलों को भारी नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है। स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार ने नुकसान का त्वरित आकलन शुरू करने के निर्देश दिए हैं।

मुख्यमंत्री Samrat Choudhary ने कृषि विभाग और आपदा प्रबंधन विभाग को प्रभावित क्षेत्रों में सर्वेक्षण कराने का आदेश दिया है, ताकि वास्तविक नुकसान का आकलन किया जा सके और प्रभावित किसानों को शीघ्र राहत दी जा सके।

मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा कि राज्य सरकार किसानों के हितों के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है और फसलों व बागवानी को हुए नुकसान को गंभीरता से लिया जा रहा है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सर्वेक्षण रिपोर्ट के आधार पर राहत और मुआवजा वितरण की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाए।

अधिकारियों के अनुसार, कई इलाकों में तेज हवाओं के साथ बारिश और ओलावृष्टि के कारण गेहूं, मक्का, सब्जियों और बागवानी फसलों को नुकसान पहुंचने की खबरें सामने आई हैं। पेड़ों से फल गिरने और खेतों में जलभराव जैसी समस्याएं भी देखी गई हैं।

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि मौसम के इस अचानक बदलाव से रबी और खरीफ सीजन के बीच संक्रमण काल में किसानों को आर्थिक नुकसान हो सकता है। ऐसे में समय पर सर्वे और मुआवजा वितरण बेहद महत्वपूर्ण है।

राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने भी संबंधित जिलों के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे प्रभावित गांवों में तुरंत टीम भेजकर नुकसान का आकलन करें और रिपोर्ट तैयार करें।

फिलहाल सरकार की प्राथमिकता प्रभावित किसानों को जल्द से जल्द सहायता उपलब्ध कराना है, ताकि वे आगामी कृषि सीजन की तैयारियों पर ध्यान केंद्रित कर सकें।