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सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय 22 मई, 2026 को “सुचारू रूप से कार्य करने वाली देखभाल अर्थव्यवस्था का सृजन” विषय पर एक आभासी कार्यक्रम का आयोजन करेगा


कर्नाटक/ सत्ता संदेश

केंद्रीय मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार वरिष्ठ नागरिकों के लिए जीवन ऐप और केयरगिवर डैशबोर्ड का शुभारंभ करेंगे

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग 22 मई, 2026 को सुबह 10:00 बजे “सुचारू रूप से कार्य करने वाली देखभाल अर्थव्यवस्था का सृजन” विषय पर एक आभासी कार्यक्रम का आयोजन करेगा।

कार्यक्रम का शुभारंभ संयुक्त सचिव (वरिष्ठ नागरिक) के स्वागत भाषण से होगा जिसके बाद सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के सचिव श्री सुधांश पंत का संबोधन होगा।

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री श्री बी.एल. वर्मा और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री श्री रामदास अठावले भी प्रतिभागियों को संबोधित करेंगे।

इस कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण वरिष्ठ नागरिकों के लिए जीवन ऐप और केयरगिवर डैशबोर्ड का शुभारंभ होगा, जिसे केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार द्वारा शुभारंभ किया जाएगा। डॉ. वीरेंद्र कुमार मुख्य भाषण देंगे, जिसमें वे वरिष्ठ नागरिकों के लिए देखभाल व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से मंत्रालय की पहलों की रूपरेखा प्रस्तुत करेंगे।

इस कार्यक्रम में कर्नाटक और केरलम राज्यों से स्वास्थ्य सेवा अर्थव्यवस्था में सर्वोत्तम प्रथाओं पर प्रस्तुतियां भी शामिल होंगी। इस कार्यक्रम में गहन चर्चा के लिए चार विषयगत क्षेत्रों की पहचान की गई है। प्रतिभागी निर्दिष्ट वर्चुअल चर्चा कक्षों में शामिल होंगे, जहां मॉडरेटर, पैनलिस्ट और प्रख्यात वक्ता प्रमुख नीतिगत मुद्दों, कार्यान्वयन में कमियों, उभरती पहलों, सर्वोत्तम प्रथाओं और निर्धारित समयसीमा के साथ कार्रवाई योग्य सिफारिशों पर विचार-विमर्श करेंगे।

इस पहल का उद्देश्य भारत की बढ़ती बुजुर्ग आबादी की जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रौद्योगिकी और सामुदायिक भागीदारी का लाभ उठाते हुए देखभाल सेवाओं के लिए एक व्यापक ढांचा विकसित करना है।

चिंतन शिविर में भिखारियों/आश्रय गृहों की देखभाल, पुनर्वास और प्रबंधन संबंधी आदर्श दिशा – निर्देशों का अनावरण किया गया।

चंडीगढ़/ सत्ता संदेश

भारत सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने 24 से 26 अप्रैल, 2026 तक चंडीगढ़ में राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के साथ आयोजित चिंतन शिविर के दौरान भिखारियों/आश्रय गृहों की देखभाल, पुनर्वास और प्रबंधन पर आदर्श दिशानिर्देशों का अनावरण किया।

इन दिशानिर्देशों में निवारक स्वास्थ्य देखभाल और स्वच्छता, अवसंरचना और क्षमता, पोषण और खाद्य सुरक्षा, व्यावसायिक प्रशिक्षण और पुनर्वास, कानूनी सहायता और जागरूकता, बाल और लैंगिक संवेदनशीलता, और जवाबदेही एवं निगरानी जैसे प्रमुख क्षेत्रों को शामिल करते हुए एक व्यापक ढांचा प्रदान किया गया है। ये दिशानिर्देश विभिन्न केंद्रीय और राज्य सरकारी योजनाओं के साथ समन्वय पर भी जोर देते हैं ताकि उपरोक्त निर्देशों का सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में समान रूप से कार्यान्वयन सुनिश्चित हो सके।

मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से आग्रह किया कि वे देश भर में भिखारियों/आश्रय गृहों में मानवीय और गरिमापूर्ण जीवन को सुनिश्चित करने के लिए इन दिशानिर्देशों को अक्षरशः लागू करने के लिए आवश्यक कदम उठाएं।

चंडीगढ़ में (24-26 अप्रैल 2026) आयोजित चिंतन शिविर में स्माइल-बेगरी सर्वे मोबाइल एप्लिकेशन का शुभारंभ

चंडीगढ़/ सत्ता संदेश

भारत सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने 24 से 26 अप्रैल 2026 तक चंडीगढ़ में राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के साथ आयोजित चिंतन शिविर के दौरान स्माइल-बेगरी सर्वे मोबाइल एप्लिकेशन का शुभारंभ किया।

यह मोबाइल एप्लिकेशन स्माइल-भिक्षावृत्ति उप-योजना (भिक्षावृत्ति में संलग्न व्यक्तियों का व्यापक पुनर्वास) के अंतर्गत विकसित की गई है। इसका उद्देश्य वास्तविक समय डेटा संग्रह और बेहतर निगरानी के माध्यम से जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन को मजबूत करना है। यह एप्लिकेशन कार्यान्वयन एजेंसियों और जिला अधिकारियों को सर्वेक्षण डेटा को डिजिटल रूप से एकत्रित करने में सक्षम बनाएगा, जिससे सटीकता, पारदर्शिता और समय पर रिपोर्टिंग सुनिश्चित होगी।

मोबाइल एप्लिकेशन का शुभारंभ देर से और अनियमित डेटा रिपोर्टिंग जैसी चुनौतियों से निपटने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है, साथ ही यह शहरों में वास्तविक समय की निगरानी, ​​डेटा विश्लेषण और प्रदर्शन ट्रैकिंग के लिए मंत्रालय की क्षमता को भी बढ़ाती है।

इस अवसर पर बोलते हुए, यह बताया गया कि यह पहल सरकार के “भिक्षावृत्ति मुक्त भारत” के लक्ष्य के अनुरूप है। यह मोबाइल एप्लिकेशन योजना के समग्र निगरानी ढांचे को और मजबूत करेगी। मंत्रालय ने चिन्हित व्यक्तियों को समाज की मुख्यधारा में पुनः शामिल करने और उन्हें गरिमा और आत्मविश्वास के साथ जीवन जीने में सक्षम बनाने के लिए प्रौद्योगिकी आधारित समाधानों का लाभ उठाने और संस्थागत तंत्रों को मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय 24 से 26 अप्रैल, 2026 तक चंडीगढ़ में “अंत्योदय का संकल्प, अमृत काल का प्रतिबिंब- विकसित भारत के संकल्प के साथ” विषय-वस्‍तु पर राष्ट्रीय चिंतन शिविर का आयोजन करेगा

चंडीगढ़/ सत्ता संदेश

केंद्र और राज्य सरकारें तीन दिवसीय शिविर में सामाजिक न्याय व्यवस्था को सुदृढ़ करने पर विचार-विमर्श करेंगी

केंद्रीय मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार राज्य मंत्रियों की उपस्थिति में चिंतन शिविर की अध्यक्षता करेंगे

शिविर में समावेश पोर्टल, एनएमबीए 2.0, सेतु और स्‍माइल ऐप्स सहित कई प्रमुख ऐप्स लॉन्च किए जाएंगे
चंडीगढ़, 23 अप्रैल, 2026: सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ मिलकर 24 से 26 अप्रैल, 2026 तक चंडीगढ़ में “अंत्योदय का संकल्प, अमृत काल का प्रतिबिंब– विकसित भारत @2047” विषय-वस्‍तु पर तीन दिवसीय चिंतन शिविर का आयोजन करेगा। यह विषय-वस्‍तु अमृत काल और विकसित भारत के विजन के अनुरूप समावेशी सशक्तिकरण के प्रति मंत्रालय की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

इस शिविर का उद्देश्य सामाजिक न्याय संबंधी पहलों के क्रियान्वयन को सुदृढ़ करना, प्रमुख योजनाओं के अंतिम चरण कार्यान्वयन में सुधार करना और हाशिए पर पड़े समुदायों के समावेशी और सतत सशक्तिकरण के लिए एक व्यावहारिक रूप-रेखा विकसित करना है।

उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार करेंगे। इस अवसर पर राज्य मंत्री श्री बी.एल. वर्मा और श्री रामदास अठावले भी उपस्थित रहेंगे। इस कार्यक्रम में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मंत्रियों तथा अधिकारियों के साथ-साथ सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग और दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के सचिव और वरिष्ठ अधिकारी भी भाग लेंगे।

कार्यक्रम का शुभारंभ मंत्रालय की प्रमुख योजनाओं की प्रदर्शनी से होगा। इस अवसर पर, समावेश पोर्टल, एनएमबीए 2.0 ऐप, सेतु ऐप और स्‍माइल ऐप सहित कई महत्वपूर्ण डिजिटल और नीतिगत पहलों का शुभारंभ किया जाएगा। मनोभ्रंश (डिमेंशिया) देखभाल गृहों के लिए न्यूनतम मानकों और भिक्षुक गृहों के लिए आदर्श दिशानिर्देशों पर एक पुस्तक का भी विमोचन किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा संस्थान और विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं संस्थानों के बीच समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए जाएंगे।

तीन दिनों तक चलने वाले चिंतन शिविर में संरचित विषयगत चर्चाएं और समूह सत्र आयोजित किए जाएंगे। समूह सत्रों में प्रमुख विषयगत क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। 25 अप्रैल को छात्रवृत्ति वितरण और शिक्षा तक पहुंच, नशा मुक्त भारत इकोसिस्‍टम, स्वच्छता कार्य में गरिमा और मिशन ज़ीरो के तहत स्वच्छता संबंधी मौतों, वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल और विकलांग बच्चों के लिए प्रारंभिक युक्ति जैसे विषयों पर चर्चा होगी। 26 अप्रैल को क्षेत्र आधारित सामाजिक-आर्थिक विकास, हाशिए पर पड़े समुदायों का समावेशन और पहचान, ऋण तक पहुंच और वित्तीय सशक्तिकरण, दिव्‍यांगजनों के लिए सुलभता और प्रमाणन जैसे विषयों पर सत्र आयोजित किए जाएंगे।

प्रत्येक समूह कार्यान्वयन की वर्तमान स्थिति का आकलन करेगा, कमियों की पहचान करेगा और सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों तथा नवोन्‍मेषी समाधानों को साझा करेगा। समूह निर्धारित समयसीमाओं के साथ अल्पकालिक, मध्यमकालिक और दीर्घकालिक अनुशंसाएं प्रस्तुत करेंगे। यह सुनिश्चित करने के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया तैयार की गई है ताकि चर्चाएं संरचित, साक्ष्य-आधारित और परिणाम-उन्मुख रहें।

चिंतन शिविर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए सफल मॉडलों के आदान-प्रदान और समन्वय को सुदृढ़ करने के लिए एक सहयोगी मंच के रूप में कार्य करेगा। इससे प्राप्त परिणामों से सामाजिक न्याय कार्यक्रमों में संयोजन, डिजिटल नवोन्‍मेषण और बेहतर शासन पर केंद्रित व्यावहारिक सुधार एजेंडा में योगदान मिलने की उम्मीद है।

इन विचार-विमर्शों के परिणामस्वरूप बेहतर समन्वय, सामुदायिक भागीदारी और प्रौद्योगिकी-आधारित कार्यान्वयन के माध्यम से भारत के सामाजिक न्याय ढांचे को सुदृढ़ करने के लिए एक स्पष्ट रोडमैप तैयार होगा। समापन दिवस पर एक प्रेस वार्ता आयोजित की जाएगी जिसमें प्रमुख परिणामों और भविष्‍य की रणनीति को साझा किया जाएगा।