ब्रेकिंग न्यूज़
स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) ने एग्जीक्यूटिव एजुकेशन प्रोग्राम के लिए MDI, गुड़गांव के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किया

गुड़गांव / सत्ता संदेश

स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) के मैनेजमेंट ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (MTI) और मैनेजमेंट डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट (MDI), गुड़गांव ने 20 मई, 2026 को एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। कंपनी के नई दिल्ली स्थित कॉर्पोरेट ऑफिस में हुआ यह समझौता, SAIL में भविष्य की कमान संभालने वाले लीडर्स को तैयार करने के उद्देश्य से एग्जीक्यूटिव एजुकेशन प्रोग्राम्स पर मिलकर काम करने के लिए किया गया है।

यह साझेदारी अकादमिक ज्ञान को व्यावहारिक इस्तेमाल के साथ जोड़ेगी। इसके तहत कस्टमाइज्ड लीडरशिप प्रोग्राम्स, रणनीति और इनोवेशन पर आधारित लर्निंग इंटरवेंशन, मापने योग्य व्यावसायिक प्रभाव के लिए ‘एक्शन लर्निंग’, ओवरसीज लर्निंग प्रोग्राम, संयुक्त रिसर्च व कंसल्टिंग और कंपनी के अधिकारियों की जरूरतों के हिसाब से तैयार किए गए केस स्टडीज शामिल होंगे। इस सहयोग का मुख्य उद्देश्य ग्लोबल बेस्ट प्रैक्टिसेज के साथ तालमेल बिठाते हुए संगठनात्मक क्षमता को मजबूत करना है।

इस समझौता ज्ञापन (MoU) पर SAIL के एमटीआई (MTI) के कार्यपालक निदेशक (HR-L&D) श्री संजय धर और एमडीआई (MDI), गुड़गांव की प्रोफेसर सुमिता राय (Dean–Industry Connect) ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर SAIL के निदेशक (कार्मिक) श्री के. के. सिंह और सेल तथा एमडीआई के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

जिला प्रशासन रोकथाम योग्य मातृ मृत्यु को समाप्त करने के लिए Dayanand Medical College & Hospital के साथ एमओयू करेगा

उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं में जीवनरक्षक देखभाल सुनिश्चित करने के लिए डिप्टी कमिश्नर ने मिशन जीवनी के तहत रेफरल और ‘गोल्डन ऑवर’ पर जोर दिया

लुधियाना / सत्ता संदेश

मातृ मृत्यु दर को समाप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए जिला प्रशासन ने Dayanand Medical College & Hospital के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) करने की घोषणा की है। इस पहल के तहत सिविल अस्पताल से हर माह कम से कम 20 उच्च जोखिम और अत्यधिक उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था के मामलों को विशेषज्ञ और समयबद्ध उपचार उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही नर्सिंग छात्र स्वयंसेवकों द्वारा हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी की ट्रैकिंग के लिए भी MoU किया जाएगा।

जिला मिशन जीवनी के तहत आयोजित उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए डिप्टी कमिश्नर हिमांशु जैन ने ‘गोल्डन ऑवर’ के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी हाई-रिस्क मामलों को सीधे Civil Hospital Ludhiana में रेफर किया जाए, ताकि सब-डिविजनल या अन्य केंद्रों के कारण होने वाली देरी से बचा जा सके।

डिप्टी कमिश्नर ने टालने योग्य मातृ मृत्यु पर ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाते हुए कहा कि जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की जल्द पहचान और सतत निगरानी जरूरी है। उन्होंने स्त्री रोग विशेषज्ञों और आशा वर्करों को निर्देश दिया कि ओपीडी स्लिप पर स्पष्ट रूप से ‘हाई-रिस्क’ या ‘वेरी हाई-रिस्क’ अंकित किया जाए, ताकि तुरंत उचित उपचार सुनिश्चित हो सके।

मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत करने के लिए उन्होंने निर्देश दिया कि हर गर्भवती महिला को मुख्यमंत्री सेहत बीमा योजना के तहत पंजीकृत किया जाए, जिससे मुफ्त और कैशलेस इलाज मिल सके। प्रवासी महिलाओं के लिए Ayushman Bharat Yojana के तहत नामांकन अनिवार्य करने को कहा गया।

इसके अलावा, जोनल लाइसेंसिंग अथॉरिटी द्वारा औचक निरीक्षण के निर्देश दिए गए हैं, ताकि सभी स्वास्थ्य केंद्रों में MTP किट की उपलब्धता और तैयारियों की जांच की जा सके।

बैठक में पिछले दो महीनों के मातृ मृत्यु मामलों की केस-टू-केस समीक्षा की गई, जिसमें प्रसव पूर्व देखभाल, रेफरल में देरी और आपातकालीन सेवाओं की कमियों की पहचान की गई। आशा वर्करों, डॉक्टरों और वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारियों ने इसमें भाग लिया। साथ ही UDID (Unique Disability ID) कार्ड की जांच प्रक्रिया को सुचारु बनाने पर भी चर्चा हुई।

कमेटी ने क्लिनिकल प्रोटोकॉल के सख्त पालन, समय पर मरीज की स्थिति को स्थिर करने और प्रभावी रेफरल प्रणाली पर जोर दिया। किसी भी स्तर पर देरी या लापरवाही पाए जाने पर जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए गए।

बैठक में प्रमुख रूप से सिविल सर्जन डॉ. रामनदीप कौर, डॉ. बिशव मोहन, डॉ. आशिमा, डॉ. अमनप्रीत, डॉ. रोहित रांपल, जेडएलए दिनेश गुप्ता सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

यह पहल ‘गोल्डन ऑवर’ पर विशेष ध्यान और संस्थागत समन्वय के माध्यम से जिले में सुरक्षित मातृत्व और नवजात स्वास्थ्य सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

वित्तीय खुफिया इकाई-भारत और पेंशन निधि विनियामक एवं विकास प्राधिकरण ने धन शोधन और वित्तीय अपराधों से निपटने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए

भारत में धन शोधन और वित्तीय अपराधों के खिलाफ लड़ाई को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए वित्तीय खुफिया इकाई-भारत (एफआईयू-आईएनडी) और पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) ने सूचना साझाकरण और समन्वय को बढ़ाने के लिए एक व्यापक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए।

दिल्ली/ सत्ता संदेश

एफआईयू-आईएनडी के निदेशक श्री अमित मोहन गोविल और पीएफआरडीए के पूर्णकालिक सदस्य श्री रणदीप सिंह जगपाल ने पीएफआरडीए के अध्यक्ष श्री शिवसुब्रमणियन रामन की उपस्थिति में समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।

इस समझौता ज्ञापन का उद्देश्य दोनों एजेंसियों को विनियमित/रिपोर्टिंग संस्थाओं के लिए प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने में सक्षम बनाना है जिसमें पीएफआरडीए द्वारा विनियमित संस्थाओं के बीच मनी लॉन्ड्रिंग विरोधी और आतंकवाद के वित्तपोषण का मुकाबला करने (एएमएल/सीएफटी) क्षमताओं को उन्नत करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। दोनों पक्ष लागू अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूपता सुनिश्चित करेंगे और सूचनाओं के आदान-प्रदान और पारस्परिक हित के मुद्दों पर विचार-विमर्श के लिए त्रैमासिक बैठकें आयोजित करेंगे।

समझौते के प्रत्येक पक्ष द्वारा एक नोडल अधिकारी और एक वैकल्पिक नोडल अधिकारी की नियुक्ति की जाएगी ताकि दोनों एजेंसियों के बीच नियमित समन्वय और संवाद सुगम हो सके। यह समझौता ज्ञापन एगमोंट सूचना विनिमय सिद्धांतों के माध्यम से विदेशी एफआईयू के साथ सूचनाओं के आदान-प्रदान में भी सहायता करेगा।

इस सहयोग में प्रासंगिक वित्तीय उप-क्षेत्रों में मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद वित्तपोषण (एमएल/टीएफ) के जोखिमों और कमियों का आकलन, संदिग्ध लेनदेन के लिए चेतावनी संकेतकों की पहचान और प्रसार और पीएमएलए, पीएमएल नियमों और पीएफआरडीए दिशानिर्देशों के अंतर्गत दायित्वों के साथ रिपोर्टिंग संस्थाओं द्वारा अनुपालन की निगरानी और पर्यवेक्षण भी शामिल होगा।

वित्तीय खुफिया इकाई-भारत (एफआईयू-इंड)

वित्तीय खुफिया इकाई-भारत एक केंद्रीय राष्ट्रीय एजेंसी है जो संदिग्ध वित्तीय लेनदेन से संबंधित जानकारी प्राप्त करने, प्रोसेस करने, विश्लेषण करने और प्रसारित करने तथा मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद के वित्तपोषण के खिलाफ प्रयासों के समन्वय के लिए जिम्मेदार है।

पेंशन निधि विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए)

पेंशन निधि विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) भारत में पेंशन क्षेत्र के विनियमन, विकास और पर्यवेक्षण के लिए जिम्मेदार वैधानिक नियामक निकाय है जिसकी स्थापना पीएफआरडीए अधिनियम, 2013 के अंतर्गत की गई है। इसमें राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली और अटल पेंशन योजना शामिल हैं। पीएफआरडीए पेंशन फंड, केंद्रीय अभिलेखपालन एजेंसियों, ट्रस्टियों, एग्रीगेटरों और उपस्थिति केंद्रों जैसे मध्यस्थों के लिए एक व्यापक नियामक और पर्यवेक्षी ढांचा प्रदान करता है ताकि पेंशन इकोसिस्टम का सुचारू रुप से विकास सुनिश्चित हो सके और ग्राहकों के हितों की रक्षा हो सके।