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क्वाड की वास्तविक चुनौती उसके उद्देश्यों को धरातल पर उतारना: विशेषज्ञ

वाशिंगटन / सत्ता संदेश

Quadrilateral Security Dialogue यानी क्वाड को लेकर अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक विशेषज्ञों ने कहा है कि समूह की वास्तविक परीक्षा अब उसके घोषित उद्देश्यों को प्रभावी ढंग से लागू करने में है। विशेषज्ञों ने यह टिप्पणी भारत की ओर से हाल में आयोजित क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक के संदर्भ में की।

क्वाड में India, United States, Japan और Australia शामिल हैं। यह समूह हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग, समुद्री सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखला, प्रौद्योगिकी, साइबर सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर मिलकर काम करता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में क्वाड ने अपनी उपस्थिति और गतिविधियों को काफी विस्तार दिया है, लेकिन अब सदस्य देशों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वे घोषणाओं और बैठकों से आगे बढ़कर वास्तविक परिणाम प्रस्तुत करें।

हाल ही में आयोजित विदेश मंत्रियों की बैठक में समुद्री सुरक्षा, आपदा प्रबंधन, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य सहयोग और मुक्त एवं समावेशी हिंद-प्रशांत क्षेत्र जैसे विषयों पर चर्चा हुई थी। भारत ने इस बैठक में क्षेत्रीय स्थिरता और नियम आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के महत्व पर जोर दिया।

रणनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि क्वाड की विश्वसनीयता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह क्षेत्रीय चुनौतियों से निपटने में कितनी प्रभावी भूमिका निभा पाता है। विशेष रूप से हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और चीन के बढ़ते प्रभाव के बीच इस समूह की भूमिका पर वैश्विक नजर बनी हुई है।

विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि क्वाड को केवल सुरक्षा मंच के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। जलवायु परिवर्तन, वैक्सीन सहयोग, उभरती प्रौद्योगिकी और आपूर्ति श्रृंखला सुरक्षा जैसे गैर-सैन्य क्षेत्रों में भी इसका प्रभाव महत्वपूर्ण हो सकता है।

कूटनीतिक जानकारों के अनुसार, भारत क्वाड में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और वह समूह को संतुलित, समावेशी और व्यावहारिक दिशा देने की कोशिश कर रहा है। भारत लगातार यह रेखांकित करता रहा है कि क्वाड का उद्देश्य किसी एक देश के खिलाफ गठबंधन बनाना नहीं, बल्कि क्षेत्रीय सहयोग और स्थिरता को बढ़ावा देना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में क्वाड की सफलता इस बात से तय होगी कि सदस्य देश अपने साझा हितों को किस हद तक ठोस परियोजनाओं और दीर्घकालिक रणनीतिक सहयोग में बदल पाते हैं।

संयुक्त राष्ट्र में भारत का पाकिस्तान पर तीखा प्रहार, कहा- सीमा पार आतंकवाद की कीमत चुकानी होगी

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

India ने संयुक्त राष्ट्र में Pakistan को सीमा पार आतंकवाद के मुद्दे पर कड़ा संदेश देते हुए साफ कहा है कि आतंकवाद को प्रायोजित करने के गंभीर “परिणाम” भुगतने पड़ते हैं। भारत ने दो टूक शब्दों में कहा कि उसे पड़ोसी देश की ओर से प्रायोजित आतंकवादी हमलों से अपनी रक्षा करने का पूरा अधिकार है और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में वह किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरतेगा।

संयुक्त राष्ट्र में भारतीय प्रतिनिधियों ने कहा कि पाकिस्तान लंबे समय से सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देता रहा है, जिससे क्षेत्रीय शांति और स्थिरता प्रभावित हुई है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आतंकवाद के खिलाफ एकजुट और सख्त रुख अपनाने की अपील करते हुए कहा कि किसी भी देश को आतंकवाद को विदेश नीति के औजार के रूप में इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

भारत की ओर से यह भी कहा गया कि आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई आत्मरक्षा का वैध अधिकार है और अंतरराष्ट्रीय कानून भी इसकी अनुमति देता है। भारतीय प्रतिनिधियों ने जोर देकर कहा कि जब निर्दोष नागरिकों और राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा होता है, तब किसी भी संप्रभु राष्ट्र को अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने का अधिकार होता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि संयुक्त राष्ट्र में भारत का यह बयान अंतरराष्ट्रीय मंच पर आतंकवाद के खिलाफ उसकी सख्त नीति को दोहराता है। हाल के वर्षों में भारत लगातार पाकिस्तान पर आतंकवादी संगठनों को समर्थन देने का आरोप लगाता रहा है और वैश्विक मंचों पर इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाता आया है।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार भारत का यह कड़ा रुख ऐसे समय सामने आया है जब वैश्विक स्तर पर आतंकवाद और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। भारत यह संदेश देना चाहता है कि आतंकवाद के खिलाफ उसकी नीति स्पष्ट और निर्णायक है तथा वह अपनी संप्रभुता और नागरिकों की सुरक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाने को तैयार है।

उमर अब्दुल्ला ने ईरान युद्ध को ‘अन्यायपूर्ण और अवैध’ बताया, प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप की अपील की

जम्मू, 27 मार्च (भाषा) जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने ‘‘ईरान पर थोपी गई अन्यायपूर्ण एवं अवैध जंग’’ की शुक्रवार को निंदा की और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मानवता के हित में इस युद्ध को समाप्त कराने के लिए अपने प्रभाव का इस्तेमाल करने का अनुरोध किया।

अब्दुल्ला ने विधानसभा में सदन के नेता के रूप में यह बयान दिया। इससे पहले नेशनल कॉन्फ्रेंस के कई सदस्यों ने इस मामले में संक्षिप्त बयान दिए जाने की मांग की थी जबकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायकों ने इसका विरोध करते हुए कहा था कि ईरान संकट एक अंतरराष्ट्रीय मुद्दा है और यह इस सदन के दायरे में नहीं आता।

मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘मैं ईरान पर थोपी गई इस अन्यायपूर्ण और अवैध जंग की अपनी ओर से और अपने सहयोगियों की ओर से कड़ी निंदा करता हूं। मैं अयातुल्ला अली खामेनेई, उनके सहयोगियों और इस संघर्ष में जान गंवाने वाले सभी लोगों की मौत पर गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं।’’

अब्दुल्ला ने कहा, ‘‘मैं प्रधानमंत्री से भी अपील करता हूं कि वह इस युद्ध को जल्द से जल्द समाप्त कराने में मदद के लिए सभी उपलब्ध कूटनीतिक माध्यमों एवं संबंधों का इस्तेमाल करें। इससे न केवल हमें, बल्कि पूरी मानवता को लाभ होगा।’’