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विदेश में फंसे पंजाब के दो और नौजवान लौटे वतन, संत सीचेवाल की पहल से हुई सुरक्षित वापसी

सुल्तानपुर लोधी / सत्ता संदेश

विदेश में फंसे भारतीयों को वापस लाने के प्रयासों के तहत संत बलबीर सिंह सीचेवाल की पहल से पंजाब के दो और नौजवान सुरक्षित भारत लौट आए हैं। तरनतारन जिले के राजिंदरपाल सिंह करीब तीन साल बाद 31 अगस्त 2026 को अपने घर पहुंचे, जबकि अमृतसर के जसबीर सिंह करीब आठ महीने विदेश में फंसे रहने के बाद 3 सितंबर 2026 को परिवार के पास लौटे।

तरनतारन के राजिंदरपाल सिंह के परिवार ने 8 दिसंबर को संत सीचेवाल से संपर्क कर अपने बेटे की भारत वापसी में मदद की अपील की थी। परिवार के मुताबिक, राजिंदरपाल अपनी सजा पूरी करने के बावजूद लंबे समय तक भारत नहीं लौट सका। परिवार का कहना है कि एक बार उसकी वापसी लगभग तय हो गई थी, लेकिन एयरपोर्ट पर दस्तावेजों को लेकर आपत्ति जताए जाने के बाद उसे दोबारा जेल भेज दिया गया।

इसके बाद परिवार ने उसकी वापसी के लिए लगातार प्रयास किए। परिवार के अनुसार, इस दौरान उन्हें आर्थिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ा। इसी बीच परिवार में एक बच्चे की मौत हो गई, जिससे उनकी मुश्किलें और बढ़ गईं। परिवार के मुताबिक, राजिंदरपाल बुजुर्ग माता-पिता का आखिरी सहारा था।

भारत लौटने के बाद निर्मल कुटिया सुल्तानपुर लोधी पहुंचे राजिंदरपाल सिंह ने विदेश में बिताए समय के अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि उन्हें एक ऐसे मामले में गिरफ्तार किया गया था, जिसमें उनके साथ जा रहे ट्रकों के सामान में कथित तौर पर कुछ बरामद हुआ था। राजिंदरपाल का दावा है कि वह बेगुनाह था, लेकिन उसे लंबे समय तक जेल में रहना पड़ा। उन्होंने बताया कि जेल से सजा पूरी करने के बाद भी दस्तावेजों से जुड़ी परेशानियों के कारण उनकी भारत वापसी नहीं हो सकी।

राजिंदरपाल ने बताया कि जेल के हालात काफी मुश्किल थे। लंबे समय तक भारत नहीं लौट पाने के कारण उन्हें यह डर सताने लगा था कि शायद वह कभी अपने परिवार के पास वापस नहीं पहुंच पाएंगे। उन्होंने भारत में अपने भाई की मौत की खबर को अपनी जिंदगी का सबसे दर्दनाक पल बताया। राजिंदरपाल ने दावा किया कि उनकी तरह कई अन्य भारतीय भी विदेशों में फंसे हुए हैं और उन्हें अपनी वापसी के लिए मदद का इंतजार है।

राजिंदरपाल की भारत वापसी के लिए संत बलबीर सिंह सीचेवाल की ओर से भारतीय विदेश मंत्रालय और भारतीय दूतावास के साथ लगातार संपर्क और समन्वय किया गया। लंबे प्रयासों के बाद राजिंदरपाल की भारत वापसी संभव हो सकी।

राजिंदरपाल की मां ने नम आंखों से संत सीचेवाल का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि उनके बेटे की वापसी के लिए संत सीचेवाल ने लगातार प्रयास किए। परिवार ने कहा कि यदि समय पर मदद नहीं मिलती तो उनके बेटे की वापसी और भी मुश्किल हो सकती थी।

इसी तरह अमृतसर निवासी जसबीर सिंह भी करीब आठ महीने विदेश में फंसे रहने के बाद भारत लौट आए। जसबीर सिंह के परिवार ने 7 जनवरी को संत सीचेवाल से संपर्क कर उनकी वापसी में मदद की अपील की थी। परिवार के मुताबिक, लगातार प्रयासों के बाद जसबीर सिंह 3 सितंबर 2026 को अपने वतन लौट आया।

संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने पंजाब के युवाओं और उनके परिवारों से अपील की कि विदेश जाने से पहले एजेंट या बिचौलिए की पूरी जांच-पड़ताल जरूर करें। उन्होंने कहा कि विदेश जाने की जल्दबाजी में ऐसा निर्णय नहीं लेना चाहिए, जिससे युवाओं और उनके परिवारों को लंबे समय तक परेशानियों का सामना करना पड़े।

आइसलैंड में भारतीय दूतावास और एपीडा ने पहली बार भारतीय आमों का प्रसार कार्यक्रम आयोजित किया

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

आइसलैंड की राजधानी रेक्याविक स्थित भारतीय दूतावास ने कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के सहयोग से 24 जून 2026 को रेक्याविक तथा 25 जून 2026 को उत्तरी आइसलैंड के अक्यूरेरी में भारतीय आमों का प्रसार कार्यक्रम आयोजित किया। इन कार्यक्रमों में भारतीय आमों की समृद्ध विविधता और उनके निर्यात की अपार संभावनाओं को प्रदर्शित किया गया। आइसलैंड में यह पहला भारतीय आम प्रोत्साहन कार्यक्रम था।

भारत के राजदूत श्री आर. रवीन्‍द्र ने भारत की विश्व-प्रसिद्ध आम की विभिन्न किस्मों की विशिष्टताओं पर प्रकाश डाला और आइसलैंड में भारतीय आमों के निर्यात के विस्तार की व्यापक संभावनाओं पर जोर दिया।

आइसलैंड के विदेश मंत्रालय में व्यापार समझौता निदेशक स्वेन के. एइनार्सन ने भारत–ईएफटीए व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौते (टीईपीए) से मिलने वाले अवसरों और उसके माध्यम से आइसलैंड में भारतीय आमों के आयात को बढ़ावा मिलने की संभावनाओं पर अपने विचार साझा किए।

आइसलैंड ट्रेड फेडरेशन के महासचिव ओलाफुर स्टीफेंसन ने कहा कि आइसलैंड के कारोबारी समुदाय में भारत के प्रति रुचि लगातार बढ़ रही है। उन्होंने विशेष रूप से भारतीय कृषि उत्पादों, खासकर आमों के आयात में वृद्धि की संभावनाओं को बेहद उत्साहजनक बताया।

भारतीय दूतावास की सचिव अनिशा तोमर ने भारत में आम उत्पादन पर एक प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा आम उत्पादक देश है। साथ ही, उन्होंने गुणवत्ता आश्वासन, बाजार तक पहुंच और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसार कर, आम के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार की पहलों की भी जानकारी दी।

इन कार्यक्रमों में आयातकों, राजनयिक समुदाय के सदस्यों, आइसलैंड के विभिन्न व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के प्रतिनिधियों तथा आइसलैंड के विदेश मंत्रालय के अधिकारियों की उल्लेखनीय भागीदारी रही, जिससे कार्यक्रम को व्यापक सफलता मिली।

कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों को भारतीय आमों की चार प्रमुख किस्‍मों—दशहरी, चौसा, लंगड़ा और केसर—का स्वाद चखाया। इन आमों के बेहतरीन स्वाद, मनमोहक सुगंध और उत्कृष्ट गुणवत्ता की सभी ने भरपूर सराहना की। यह आयोजन व्यावसायिक संबंधों को मजबूत करने, भारतीय कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने तथा भारत और आइसलैंड के बीच बढ़ती आर्थिक साझेदारी को और सुदृढ़ बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ।

वर्तमान में आइसलैंड मुख्य रूप से थाईलैंड, ब्राज़ील, कंबोडिया, घाना और पेरू से आमों का आयात करता है। वैकल्पिक आपूर्तिकर्ताओं की सीमित उपलब्धता के कारण इन देशों के आमों ने आइसलैंड के बाजार में अपनी मजबूत उपस्थिति बनाई है। वर्ष 2025 में आइसलैंड ने लगभग 33 लाख अमेरिकी डॉलर (3.3 मिलियन अमेरिकी डॉलर) मूल्य के आमों का आयात किया, जिसमें से लगभग 10 लाख अमेरिकी डॉलर (1 मिलियन अमेरिकी डॉलर) मूल्य के आम केवल थाईलैंड से आयात किए गए थे। भारतीय मिशन द्वारा स्थानीय उपभोक्ताओं के साथ बातचीत के दौरान यह जानकारी सामने आई कि आइसलैंड के लोग आम काफी पसंद करते हैं और विशेष रूप से स्मूदी, डेज़र्ट (मिष्ठान) तथा फ्रूट सलाद में उनका सेवन करना पसंद करते हैं। इससे स्पष्ट होता है कि आइसलैंड के बाजार में भारतीय आमों के लिए पर्याप्त संभावनाएं मौजूद हैं।