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फाजिल्का मंडी में भारी बारिश से धान बर्बाद, किसानों ने पंजाब सरकार से मांगा मुआवजा

फाजिल्का अनाज मंडी में भारी बारिश और जलभराव से किसानों की धान की फसल को नुकसान। किसानों ने जलनिकासी व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए पंजाब सरकार से मुआवजे की मांग की।

फाजिल्का / सत्ता संदेश

पंजाब के फाजिल्का में भारी बारिश ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अनाज मंडी में जलभराव के कारण किसानों की धान की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। किसानों का आरोप है कि मंडी में पानी की निकासी के उचित इंतजाम नहीं होने के कारण धान के ढेर पानी में बह गए और कई बोरियों तक पानी पहुंच गया। इससे किसानों को लाखों रुपये का नुकसान होने की आशंका है।

किसानों ने बताया कि उन्हें इस बार धान का अच्छा भाव मिलने की उम्मीद थी। उन्हें भरोसा था कि फसल बेचकर वे अपने पुराने कर्ज चुका सकेंगे और परिवार की आर्थिक स्थिति को कुछ बेहतर बना पाएंगे। लेकिन सुबह हुई भारी बारिश ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया।

किसानों के मुताबिक, कई दिन पहले धान को मंडी में लाकर खुले स्थान पर ढेर लगाकर रखा गया था। बारिश से बचाने के लिए उन्होंने रात को धान के ढेरों को तिरपाल से चारों तरफ से ढक दिया था। इसके बावजूद सुबह जब वे मंडी पहुंचे तो वहां जलभराव के कारण धान के ढेर पानी में बह चुके थे। किसानों का कहना है कि उनकी मेहनत से तैयार की गई फसल को भारी नुकसान हुआ है।

प्रशासन पर उठाए सवाल, निकासी व्यवस्था न होने का आरोप

किसानों ने मंडी में पानी की निकासी के पर्याप्त इंतजाम नहीं होने पर प्रशासन के प्रति नाराजगी जताई। उनका कहना है कि यदि समय रहते पानी की निकासी की व्यवस्था की गई होती, तो नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता था। किसानों ने पंजाब सरकार से नुकसान का आकलन करवाकर उचित मुआवजा देने की मांग की है।

किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि पहले वे अपनी फसल को आढ़तियों के निजी खेतों में रख देते थे, जिससे बारिश के दौरान मंडी में होने वाले नुकसान से बचाव हो जाता था। लेकिन इस बार प्रशासन की ओर से आढ़तियों को अपने निजी खेतों में धान रखने की अनुमति नहीं दिए जाने के कारण किसानों को मंडी में ही फसल रखनी पड़ी। किसानों का दावा है कि इसी वजह से उन्हें भारी नुकसान झेलना पड़ा है।

अब किसानों ने पंजाब सरकार और संबंधित प्रशासन से मांग की है कि मंडी में जलनिकासी की उचित व्यवस्था की जाए, खराब हुई फसल का सर्वे करवाया जाए और प्रभावित किसानों को जल्द से जल्द मुआवजा दिया जाए, ताकि उन्हें आर्थिक संकट से राहत मिल सके।