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मेरठ में रिश्तों का खौफनाक अंत, जमीन विवाद में बड़े भाई ने छोटे भाई की हत्या कर शव खेत में दफनाया

मेरठ / सत्ता संदेश

Meerut के बहसूमा थाना क्षेत्र स्थित महमूदपुर सिखेड़ा गांव में जमीन विवाद ने एक परिवार को तबाह कर दिया। आरोप है कि बड़े भाई ने संपत्ति विवाद के चलते अपने छोटे भाई की गोली मारकर हत्या कर दी और सबूत छिपाने के लिए शव को खेत में दफना दिया। घटना का खुलासा तब हुआ जब मृतक की मौसी ने पुलिस को मामले की जानकारी दी। पुलिस ने गुरुवार को यह जानकारी देते हुए बताया कि मामले की जांच तेज कर दी गई है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, परिवार में लंबे समय से जमीन को लेकर विवाद चल रहा था। इसी विवाद ने हिंसक रूप ले लिया और बड़े भाई ने कथित तौर पर अपने छोटे भाई की हत्या कर दी। हत्या के बाद आरोपी ने शव को गांव के पास खेत में दफनाकर मामले को छिपाने की कोशिश की।

बताया जा रहा है कि मृतक कई दिनों से लापता था, जिससे परिवार और रिश्तेदारों को शक हुआ। मृतक की मौसी ने जब पुलिस को शिकायत दी और हत्या की आशंका जताई, तब पुलिस ने मामले की गंभीरता से जांच शुरू की। पूछताछ और जांच के दौरान पुलिस को खेत में दफनाए गए शव की जानकारी मिली।

पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर खेत की खुदाई कराई, जहां से शव बरामद किया गया। शव की हालत देखकर अंदाजा लगाया गया कि हत्या कुछ दिन पहले की गई थी। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है ताकि मौत के सही कारणों की पुष्टि हो सके।

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी और मृतक के बीच पैतृक जमीन के बंटवारे को लेकर लंबे समय से तनाव था। गांव के लोगों के मुताबिक दोनों भाइयों के बीच कई बार विवाद और कहासुनी भी हुई थी। हालांकि किसी ने नहीं सोचा था कि मामला हत्या तक पहुंच जाएगा।

घटना के बाद गांव में सनसनी फैल गई और इलाके में भय तथा तनाव का माहौल बन गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि जमीन विवाद अब पारिवारिक रिश्तों को भी निगलता जा रहा है। पुलिस ने आरोपी की तलाश शुरू कर दी है और मामले में कई लोगों से पूछताछ की जा रही है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले में सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। यदि हत्या और शव छिपाने के आरोप प्रमाणित होते हैं, तो आरोपी के खिलाफ हत्या और साक्ष्य मिटाने जैसी गंभीर धाराओं में कार्रवाई की जाएगी।

उत्तर प्रदेश में हाल के समय में जमीन विवाद से जुड़ी घटनाओं में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि पारिवारिक संपत्ति को लेकर बढ़ते विवाद कई बार हिंसक रूप ले लेते हैं, जिससे सामाजिक रिश्तों पर भी गंभीर असर पड़ रहा है। मेरठ की यह घटना भी रिश्तों के टूटते विश्वास और लालच के खतरनाक परिणाम की एक दर्दनाक मिसाल बनकर सामने आई है।

AAP विधायक का बड़ा ऐलान, कैमरे के सामने उतारे जूते10 करोड़ की सरकारी जमीन छुड़ाने तक नंगे पैर प्रचार का प्रण

लुधियाना / सत्ता संदेश

समराला नगर काउंसिल चुनावों को लेकर राजनीतिक माहौल लगातार गर्माता जा रहा है। इसी बीच आम आदमी पार्टी के विधायक जगतार सिंह दियालपुरा ने एक ऐसा ऐलान कर दिया, जिसने पूरे पंजाब की राजनीति में हलचल मचा दी है। विधायक ने मीडिया के सामने अपने जूते उतार दिए और बड़ा राजनीतिक प्रण लेते हुए कहा कि जब तक वह विरोधियों के कब्जे से 10 करोड़ रुपये की सरकारी जमीन को मुक्त नहीं करवा लेते, तब तक नंगे पैर ही रहेंगे और चुनाव प्रचार भी इसी तरह करेंगे। विधायक दियालपुरा ने कहा, “मैं आज ऐलान करता हूं कि जब तक विरोधियों के कब्जे से वह 10 करोड़ की सरकारी प्रॉपर्टी जनता को वापस नहीं दिलवा देता, तब तक मैं खुद नंगे पैर रहूंगा। इस भीषण गर्मी में भी चुनाव प्रचार नंगे पैर ही करूंगा और जूते उसी दिन पहनूंगा, जिस दिन वह जमीन छुड़वाकर जनता को सौंप दूंगा।” दरअसल, यह पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ जब शिरोमणि अकाली दल के हलका इंचार्ज परमजीत सिंह ढिल्लों ने भी चुनाव प्रचार नंगे पैर करने का ऐलान किया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि सत्ताधारी आप सरकार द्वारा उनके साथ राजनीतिक धक्का किया गया है,
जिसके विरोध में और जनता से न्याय मांगने के लिए वह नंगे पैर वोट मांगेंगे। इसी बयान पर पलटवार करते हुए विधायक दियालपुरा ने कहा कि विरोधी दल मगरमच्छ के आंसू बहाकर लोगों को गुमराह कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विरोधियों ने मेन बाईपास पर शहर की करीब 10 करोड़ रुपये की सरकारी जमीन पर कब्जा किया हुआ है। विधायक ने कहा कि त्याग अगर करना है तो जनता के हित के लिए होना चाहिए, न कि अपनी राजनीति चमकाने के लिए। विधायक द्वारा लाइव कैमरे के सामने जूते उतारने के बाद समराला क्षेत्र में राजनीतिक तापमान और बढ़ गया है। नगर काउंसिल चुनाव अब पूरी तरह “नंगे पैर चुनाव प्रचार” की राजनीति के इर्द-गिर्द घूमते नजर आ रहे हैं। बाजारों, चौकों और सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं और लोग अब यह देखने को उत्सुक हैं कि आखिर 10 करोड़ की सरकारी जमीन का मामला किस करवट बैठता है। समराला से परमिंदर वर्मा की रिपोर्ट