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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने दुर्लभ रोगों पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का किया उद्घाटन

नई दिल्ली/सत्ता संदेश

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने मंगलावर को नई दिल्ली में 5 और 6 मई को आयोजित होने वाले दो दिवसीय राष्ट्रीय दुर्लभ रोग सम्मेलन का उद्घाटन किया। यह दुर्लभ रोगों से उत्पन्न चुनौतियों से निपटने के तरीके को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

इस मौके पर मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलीला श्रीवास्तव ने कहा कि इस सम्मेलन के आयोजन का मुख्य उद्देश्य हितधारकों के समक्ष आने वाली चुनौतियों को समझना, नवाचारों को प्रोत्साहित करना और देश में दुर्लभ रोगों से निपटने के तरीके को सुदृढ़ करने के लिए नए विचार उत्पन्न करना है। उन्होंने कहा कि दुर्लभ रोगों से निपटने की आवश्यकता को सर्वप्रथम राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति, 2017 में प्रमुखता से शामिल किया गया था और बाद में दुर्लभ रोगों के लिए राष्ट्रीय नीति, 2021 के शुभारम्भ के माध्यम से इसे संस्थागत रूप दिया गया, जिसने हमारे भारत को दुर्लभ रोगों के लिए एक व्यापक राष्ट्रीय ढांचा रखने वाले देशों में स्थान दिलाया है।

उन्होंने बताया कि यह नीति देश भर के प्रमुख तृतीयक अस्पतालों- उत्कृष्टता केंद्रों (सीई) के माध्यम से लागू की जाती है। पूर्वोत्तर भारत में दो उत्कृष्टता केंद्रों सहित इसकी संख्या कुछ वर्षों में 8 से बढ़कर 15 हो गई है, जिससे नैदानिक ​​देखभाल और सहायता के लिए राष्ट्रीय ढांचा मजबूत हुआ है।

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने बीमारियों के शीघ्र निदान और रोकथाम के महत्व पर जोर देते हुए, आनुवंशिक विश्लेषण, प्रारंभिक पहचान और सुविचारित नैदानिक ​​प्रबंधन की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि दुर्लभ बीमारियों के लिए सभी हितधारकों के सामूहिक और निरंतर प्रयासों की आवश्यकता है, और इस क्षेत्र में प्रगति केवल सुदृढ़ सहयोग के माध्यम से ही संभव है।

उन्होंने आनुवंशिक विकारों के प्रबंधन के लिए विशिष्ट पद्धतियों की पहल अपने एनआईडीएएन केंद्रों के माध्यम से  परिचालन में आ रही है, आनुवंशिक परामर्श सेवाओं को मजबूत किया जा रहा है, और दुर्लभ रोग नीति के तहत लगभग 1,800 रोगियों को पहले ही उपचार सहायता मिल चुकी है। उन्होंने प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने और उपचारों तक पहुंच में सुधार लाने के लिए नियामक निकायों और अन्य मंत्रालयों के साथ किए जा रहे सहयोगात्मक प्रयासों की भी सराहना की।

स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग (डीएचआर) के सचिव और भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने पिछले तीन दशकों में दुर्लभ रोगों के क्षेत्र में हुई महत्वपूर्ण प्रगति पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि 1990 के दशक में, किसी संदिग्ध दुर्लभ रोग से पीड़ित रोगी की पहचान होने पर उसकी सहायता मुश्किल होती थी क्योंकि बीमारी का निदान अत्यंत कठिन था और उपचार के विकल्प लगभग अनुपलब्ध थे। आज, हालांकि उपचारों की उच्च लागत को देखते हुए प्रति रोगी 50 लाख रुपये की वित्तीय सहायता भी अपर्याप्त लग सकती है, फिर भी यह उल्लेखनीय प्रगति है कि देश अब दुर्लभ रोगों से पीड़ित बच्चों को सार्थक सहायता प्रदान करने में सक्षम है।

परिवार कल्याण मंत्रालय ने राष्ट्रव्यापी अग्नि सुरक्षा सप्ताह का किया शुभारंभ

दिल्ली/सत्ता संदेश

केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने सुरक्षित स्वास्थ्य सेवा वातावरण सुनिश्चित करने की अपनी प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करते हुए, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ साझेदारी में और संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों के समन्वय से, 4 मई से 10 मई,  तक राष्ट्रव्यापी अग्नि सुरक्षा सप्ताह का आयोजन शुरू किया।

इस आयोजन का उद्घाटन केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलीला श्रीवास्तव के नेतृत्व में स्वास्थ्य सुविधा अग्नि सुरक्षा” विषय पर राष्ट्रव्यापी संकल्प समारोह के साथ किया गया, जिसमें अग्नि निवारण, तैयारी और प्रत्युत्तर प्रणालियों को मजबूत करने के लिए स्वास्थ्य संस्थानों और हितधारकों की सामूहिक प्रतिबद्धता की पुष्टि की गई।

इस अवसर पर केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि अग्नि सुरक्षा सप्ताह मौजूदा इन्फ्रास्ट्रक्चर का पुनर्मूल्यांकन करने, सुविधाओं के पर्याप्त ऑडिट का आकलन करने और उन कमियों और खामियों की पहचान करने का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है, जिन्हें दूर करने की आवश्यकता है। क्षमता निर्माण पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य पेशेवरों को अग्नि आपात स्थितियों में प्रभावी ढंग से प्रतिक्रिया देने के लिए पर्याप्त रूप से प्रशिक्षित और संवेदनशील बनाया जाना चाहिए।

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने इस बात पर संतोष व्यक्त किया कि सरकारी संस्थानों सहित पांच लाख अधिक प्रतिभागी पहले ही आईजीओटी अग्नि सुरक्षा पाठ्यक्रम पूरा कर चुके हैं और उन्होंने इस तरह के प्रयासों को व्यापक स्तर पर बढ़ाने के महत्व पर जोर दिया।

एनडीएमए के सदस्य और प्रमुख कृष्ण एस. वत्सा ने स्वास्थ्य सुविधाओं में अग्नि सुरक्षा के लिए एक सक्रिय, प्रणाली-आधारित दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि अस्पतालों में अग्नि सुरक्षा को मजबूत करने के लिए एक राष्ट्रव्यापी अभियान चलाया जाना चाहिए।

इस अवसर पर, मंत्रालय ने स्वास्थ्य सुविधाओं में अग्नि और जीवन सुरक्षा संबंधी राष्ट्रीय दिशानिर्देश (2026) का आधिकारिक रूप से शुभारंभ भी किया। ये दिशानिर्देश विभिन्न प्रमुख संस्थानों और अस्पतालों के विशेषज्ञों के साथ व्यापक परामर्श के माध्यम से विकसित किए गए हैं, जो स्वास्थ्य सुविधाओं में अग्नि सुरक्षा को बढ़ाने के लिए एक मजबूत और व्यापक ढांचा सुनिश्चित करते हैं।