ब्रेकिंग न्यूज़
इंडिगो फ्लाइट में पावर बैंक ब्लास्ट: हैदराबाद से चंडीगढ़ आए विमान में मची अफरा-तफरी, 5 यात्री घायल

पंजाब डेस्क : हैदराबाद से चंडीगढ़ आ रही इंडिगो की फ्लाइट (6E 108) में मंगलवार को उस समय हड़कंप मच गया जब लैंडिंग के बाद एक यात्री के बैग में रखे पावर बैंक में जोरदार ब्लास्ट हो गया। इस घटना में 5 यात्री घायल हो गए हैं।

कैसे हुआ हादसा? विमान दोपहर करीब 3:29 बजे चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर सुरक्षित लैंड कर चुका था और वे नंबर-1 की ओर बढ़ रहा था। तभी सीट नंबर 39C पर बैठे एक यात्री ने क्रू को जानकारी दी कि उसके पावर बैंक में आग लग गई है। देखते ही देखते विमान के अंदर धुआं भर गया, जिससे यात्री घबरा गए। केबिन क्रू ने तुरंत फायर एक्सटिंग्विशर की मदद से आग पर काबू पाया, लेकिन एहतियात के तौर पर इमरजेंसी प्रोटोकॉल लागू कर दिए गए।

इमरजेंसी गेट से सुरक्षित निकाले गए यात्री : विमान में सवार 198 यात्री, दो बच्चे और छह क्रू मेंबर्स को इमरजेंसी एग्जिट गेट और एयर स्लाइड्स (स्लाइडर) के जरिए बाहर निकाला गया। सुरक्षित बाहर निकलने की प्रक्रिया के दौरान सीट 25F पर बैठी महिला यात्री, ऋचा आचार्य, के पैर में तीन जगह फ्रैक्चर हो गया। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया। एयरलाइन ने पुष्टि की है कि सभी यात्रियों को सुरक्षित टर्मिनल तक पहुँचा दिया गया है।

DGCA के नियम और जांच: नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने जनवरी 2026 से फ्लाइट के दौरान पावर बैंक के इस्तेमाल पर रोक लगा रखी है। नियमों के मुताबिक, पावर बैंक को केवल हैंड बैगेज में ले जाने की अनुमति है और इनसे चार्जिंग करना सख्त मना है क्योंकि लिथियम बैटरियां आग लगने का बड़ा कारण बन सकती हैं। फिलहाल पुलिस और एयरपोर्ट अथॉरिटी मामले की जांच कर रहे हैं।

PUNJAB TOP-10 NEWS, चुटकियों में पढ़े बड़ी दिन भर की खबरें…5-05-2026

पंजाब डेस्क : पंजाब और चंडीगढ़ के लिए आज का दिन राजनीतिक हलचल और गंभीर घटनाओं के नाम रहा। जहाँ एक ओर दिल्ली में आम आदमी पार्टी और केंद्र सरकार के बीच टकराव राष्ट्रपति भवन तक जा पहुँचा, वहीं राज्य के विभिन्न जिलों से हत्या, पुलिस मुठभेड़ और अनोखे विरोध प्रदर्शन की खबरें सामने आईं।

1. राष्ट्रपति भवन में सियासी घमासान: ‘राइट टू रिकॉल’ की मांग आम आदमी पार्टी के 6 सांसदों के भाजपा में शामिल होने के मुद्दे पर मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। मान ने इसे संविधान का मजाक बताते हुए मांग की कि संविधान में संशोधन कर ‘राइट टू रिकॉल’ (प्रतिनिधि को वापस बुलाने का अधिकार) लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि पंजाब में भाजपा के पास केवल 2 विधायक हैं, लेकिन राज्यसभा में उनके 6 सांसद हो गए हैं, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। मुख्यमंत्री 90 विधायकों को लेकर 3 वॉल्वे बसों में दिल्ली पहुंचे थे।

2. राघव चड्ढा की ’21 राज्यों की पुलिस’ वाली चेतावनी : मुख्यमंत्री मान से पहले सांसद राघव चड्ढा ने राष्ट्रपति से मुलाकात की और आरोप लगाया कि पार्टी छोड़ने वाले नेताओं को पंजाब की सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल कर निशाना बनाया जा रहा है। चड्ढा ने चेतावनी देते हुए कहा कि आम आदमी पार्टी एक खतरनाक खेल खेल रही है। उन्होंने यह भी कहा कि जहाँ आप के पास केवल एक राज्य की पुलिस है, वहीं भाजपा के पास 21 राज्यों की पुलिस है।

3. संगरूर में 15 वर्षीय छात्र की हथौड़े से हत्या: संगरूर की पटियाला गेट कृष्णा बस्ती में बच्चों के बीच हुए मामूली विवाद ने खूनी रूप ले लिया। आरोपी मोहम्मद खान और उमर खान ने 10वीं कक्षा के छात्र अर्शदीप सिंह उर्फ अंकुश की हथौड़े से पीट-पीटकर हत्या कर दी। इस हमले में मृतक का चचेरा भाई अवनीत सिंह भी गंभीर रूप से घायल हो गया है, जिसे पटियाला रेफर किया गया है।

4. एलांते मॉल के बाहर मारपीट, मूकदर्शक बनी रही पुलिस : चंडीगढ़ के एलांते मॉल के सामने एक सिख व्यक्ति के साथ मारपीट का वीडियो वायरल हुआ है। चश्मदीद महिला के अनुसार, करीब 100 मीटर की दूरी पर पुलिस की पीसीआर खड़ी थी, लेकिन 5-6 मिनट तक चली इस मारपीट के दौरान पुलिसकर्मी मूकदर्शक बने रहे। जब मामला शांत हुआ और व्यक्ति का सिर फट गया, तब पुलिसकर्मी पूछताछ के लिए आगे आए।

5. लुधियाना: आत्महत्या के 6 महीने बाद प्रेमिका पर केस : लुधियाना में 21 वर्षीय युवक की आत्महत्या के मामले में उसकी मां के 6 महीने के संघर्ष के बाद पुलिस ने आरोपी प्रेमिका के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। युवक ने सुसाइड नोट में अपनी प्रेमिका को मौत का जिम्मेदार ठहराया था। पुलिस कमिश्नर दफ्तर के बाहर धरने और एक एनजीओ के हस्तक्षेप के बाद यह कार्रवाई की गई है।

6. यूट्यूबर ‘मिस्टर इंडियन हैकर’ को निहंग की धमकी : यूट्यूबर दिलराज सिंह रावत (मिस्टर इंडियन हैकर) के एक प्रैंक वीडियो में सरदार के बाल काटने और ‘सरदार-सरदार’ कहने पर सिख समुदाय ने आपत्ति जताई है। निहंग विक्की थॉमस ने यूट्यूबर को उल्टा टांगने की धमकी दी, जिसके बाद यूट्यूबर ने माफी मांगते हुए वीडियो से विवादित हिस्सा हटा दिया है।

7. पेट्रोल लेकर पानी की टंकी पर चढ़ा सरपंच: बरनाला के गांव कलालमाजरा में सरपंच जगजीवन सिंह अपने तीन साथियों और पेट्रोल के साथ पानी की टंकी पर चढ़ गए। उनका आरोप है कि स्थानीय विधायक उनकी पंचायत के कार्यों में अवैध रूप से हस्तक्षेप कर रहे हैं और गांव में जबरन प्रशासक नियुक्त किया गया है। उन्होंने मांग की है कि जब तक प्रशासक नहीं हटाया जाता, वे नीचे नहीं उतरेंगे।

8. अमृतसर में पुलिस मुठभेड़, बदमाश को लगी गोली: अमृतसर के वेरका इलाके में पुलिस और बदमाशों के बीच हुई क्रॉस फायरिंग में आरोपी कृष्णा सोनिक के दोनों पैरों में गोली लगी। पुलिस ने कृष्णा के साथ उसके साथी रणजीत सिंह और गौतम मेहरा को भी गिरफ्तार किया है और मौके से एक पिस्तौल बरामद की है।

9. 4 पाकिस्तानी कैदियों की वतन वापसी : अपनी सजा पूरी करने के बाद आज 4 पाकिस्तानी नागरिक अटारी-वाघा बॉर्डर के रास्ते अपने देश लौट गए। इनमें से मोहम्मद हमजा ने बताया कि वह गलती से नशे की हालत में बॉर्डर पार कर गया था। रिहा हुए कैदियों ने युवाओं से अपील की कि वे नशे से दूर रहें, क्योंकि इसके कारण उनकी जिंदगी बर्बाद हो गई।

10. न्यूजीलैंड इमिग्रेशन पॉलिसी सख्त: 42% स्टूडेंट वीजा रद्द न्यूजीलैंड सरकार ने नियमों में बदलाव करते हुए अंग्रेजी टेस्ट अनिवार्य कर दिया है और फंड दिखाने की सीमा बढ़ाकर 11.20 लाख रुपये कर दी है। रिपोर्ट के अनुसार, 42% स्टूडेंट वीजा पहले ही रद्द किए जा चुके हैं और अब सरप्राइज इंटरव्यू में फेल होने पर सीधे डिपोर्ट करने का प्रावधान है।

डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने और जमीनी स्तर पर युवाओं को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, ग्लोबल यूथ फेडरेशन, इंडिया ने पंजाब के मोहाली में स्थित सरकारी स्कूलों में चार नए कंप्यूटर लैब सफलतापूर्वक स्थापित किए हैं।

मोहाली / सत्ता संदेश

डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने और जमीनी स्तर पर युवाओं को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, ग्लोबल यूथ फेडरेशन, इंडिया ने पंजाब के मोहाली में स्थित सरकारी स्कूलों में चार नए कंप्यूटर लैब सफलतापूर्वक स्थापित किए हैं। ये कंप्यूटर लैब ग्लोबल यूथ फेडरेशन द्वारा पुकार – द वॉइस ऑफ ह्यूमैनिटी एनजीओ के सहयोग से, सेज फाउंडेशन और आईवॉलंटियर इंडिया के बहुमूल्य समर्थन से विकसित किए गए हैं और इन्हें माय भारत (युवा मामले एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार) को समर्पित किया गया है, जो युवा विकास और डिजिटल समावेशन को मजबूत करने की दिशा में ग्लोबल यूथ फेडरेशन की दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

कंप्यूटर लैब सरकारी हाई स्कूल, सनेटा (एस.ए.एस. नगर), सरकारी हाई स्कूल, माताउर (सेक्टर-70), सरकारी हाई स्कूल, मौली बैदवान और सरकारी हाई स्कूल, बाल्टाना में स्थापित किए गए हैं, जिनका उद्देश्य छात्रों को आधुनिक तकनीक तक पहुंच प्रदान करना और उनकी डिजिटल शिक्षण क्षमताओं को बढ़ाना है। उम्मीद है कि यह पहल डिजिटल विभाजन को पाटने और छात्रों को आज की तेजी से बदलती दुनिया में आवश्यक कौशल से लैस करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

उद्घाटन समारोह में सेज के निदेशक श्री महेश गर्ग सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। श्री आनंद कदुर, कंट्री हेड, SAGE; सुदीप्ति रस्तोगी, लर्न एंड डेवलपमेंट हेड और ग्लोबल SAGE फाउंडेशन एंबेसडर; प्रो. (डॉ.) रेणु त्रिखा, चीफ एडवाइजर, ग्लोबल यूथ फेडरेशन; श्रीमती गिन्नी दुग्गल, जिला शिक्षा अधिकारी, मोहाली; सुश्री ईशा गुप्ता, जिला युवा अधिकारी, MY भारत, मोहाली; श्री रोहित कुमार, निदेशक और सीईओ, ग्लोबल यूथ फेडरेशन; और श्रीमती शिवानी रैना, संस्थापक और अध्यक्ष, पुकार – द वॉइस ऑफ ह्यूमैनिटी एनजीओ। उनकी उपस्थिति ने शिक्षा क्षेत्र में सार्थक और स्थायी प्रभाव पैदा करने के लिए सहयोगात्मक प्रयासों के महत्व को उजागर किया।

यह पहल प्रभावी साझेदारी का एक सशक्त उदाहरण है, जहां SAGE फाउंडेशन और iVolunteerIndia ने अपना निरंतर सहयोग दिया, और ग्लोबल यूथ फेडरेशन ने पुकार – द वॉइस ऑफ ह्यूमैनिटी के साथ मिलकर जमीनी स्तर पर सुचारू कार्यान्वयन सुनिश्चित किया। MY भारत को समर्पित ये कंप्यूटर लैब युवाओं को अवसरों, प्रौद्योगिकी और कौशल विकास तक पहुंच के माध्यम से सशक्त बनाने के साझा दृष्टिकोण को और मजबूत करती हैं।

इस अवसर पर बोलते हुए, ग्लोबल यूथ फेडरेशन के निदेशक एवं सीईओ रोहित कुमार ने कहा, “हमारा लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक छात्र को अवसरों की समान पहुँच मिले और वह भविष्य के लिए आवश्यक कौशलों से लैस हो। ये कंप्यूटर लैब केवल बुनियादी ढाँचा नहीं हैं; ये अवसर, शिक्षा और उज्ज्वल भविष्य की ओर अग्रसर मार्ग का प्रतीक हैं।”

इन कंप्यूटर लैब की सफल स्थापना डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देने और समावेशी शिक्षण वातावरण बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जो कुशल और भविष्य के लिए तैयार पीढ़ी के निर्माण के व्यापक लक्ष्य में योगदान देती है।

पीजीआईएमईआर ने द्वितीय वार्षिक ‘सारथी दिवस’ मनाया

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

स्वैच्छिक सेवा और परिवर्तनीय रोगी देखभाल की भावना का सम्मान

• सारथी सहानुभूति, करुणा, सामाजिक जिम्मेदारी और अनुभवात्मक सीख पर आधारित है; छात्रों को इसके माध्यम से केवल कौशल ही नहीं, बल्कि जीवनभर के लिए हृदय का परिवर्तन प्राप्त होता है: श्री एच. राजेश प्रसाद, आईएएस, मुख्य सचिव, चंडीगढ़ प्रशासन

सारथी स्वयंसेवक केवल मरीजों की सहायता नहीं कर रहे, बल्कि मानवता के सर्वोत्तम रूप को सीख रहे हैं: प्रो. विवेक लाल, निदेशक, पीजीआईएमईआर

चंडीगढ़, 5 मई 2026: एक महत्वपूर्ण उपलब्धि को चिह्नित करते हुए, पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ ने आज द्वितीय वार्षिक ‘सारथी दिवस’ मनाया, जो सारथी (Students’ Alliance for Responsible Action to Transform Healthcare Institutes) के दो सफल वर्षों की स्मृति में आयोजित किया गया—यह एक अग्रणी स्वयंसेवी पहल है जो संस्थान में रोगी देखभाल और पहुंच को रूपांतरित कर रही है।
इस अवसर पर श्री एच. राजेश प्रसाद, आईएएस, मुख्य सचिव, चंडीगढ़ प्रशासन मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि सुश्री प्रेरणा पुरी, आईएएस, सचिव शिक्षा, चंडीगढ़ प्रशासन विशिष्ट अतिथि रहीं। कार्यक्रम में प्रो. विवेक लाल, निदेशक, पीजीआईएमईआर, श्री पंकज राय, आईएएस, उप निदेशक (प्रशासन), प्रो. संजय जैन, डीन (अनुसंधान) तथा प्रो. अशोक कुमार, चिकित्सा अधीक्षक भी उपस्थित रहे।
एक भरे हुए सभागार को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि श्री एच. राजेश प्रसाद ने सारथी को सेवा और अनुभवात्मक शिक्षा के अनूठे मॉडल के रूप में सराहा। उन्होंने कहा, “सारथी चार सशक्त स्तंभों—सहानुभूति, करुणा, सामाजिक जिम्मेदारी और अनुभवात्मक सीख—पर आधारित है। बड़े अस्पतालों में, जहां व्यवस्थाओं को समझना चुनौतीपूर्ण हो सकता है, ये युवा स्वयंसेवक सच्चे ‘सारथी’ बनकर मरीजों को गरिमा और संवेदनशीलता के साथ मार्गदर्शन देते हैं। यहां उन्हें केवल कौशल ही नहीं, बल्कि जीवनभर के लिए हृदय का परिवर्तन मिलता है।”
मानवीय सेवा के आयाम को रेखांकित करते हुए उन्होंने आगे कहा, “करुणा को पुस्तकों से नहीं सिखाया जा सकता—इसे अनुभव करना पड़ता है। सारथी के माध्यम से ये छात्र न केवल मरीजों की सहायता कर रहे हैं, बल्कि मानवता के वास्तविक सार को भी समझ रहे हैं। यह पहल बेहतर स्वास्थ्य सेवा प्रणाली के साथ-साथ बेहतर नागरिक भी तैयार कर रही है।”
पहल के व्यापक प्रभाव की सराहना करते हुए उन्होंने कहा, “पीजीआईएमईआर में एक पायलट के रूप में शुरू हुई यह पहल देश के सबसे बड़े सामाजिक सेवा आंदोलनों में से एक बनने की क्षमता रखती है। जब युवाओं की ऊर्जा को सेवा की दिशा में लगाया जाता है, तो स्वास्थ्य सेवाओं का अनुभव पूरे देश में बदला जा सकता है।”
इससे पूर्व प्रो. विवेक लाल, निदेशक, पीजीआईएमईआर ने अपने संबोधन में सारथी को संस्थान की करुणा, सेवा और रोगी-केंद्रित दृष्टिकोण का प्रतिबिंब बताया। उन्होंने कहा, “संस्थान केवल भवनों या तकनीक से नहीं बनते, बल्कि मूल्यों, समर्पण और सेवा से बनते हैं। पीजीआईएमईआर ने अपनी यात्रा इन्हीं मूल्यों के आधार पर तय की है और सारथी इन्हीं आदर्शों का प्रतिनिधित्व करता है।”
स्वयंसेवकों को स्नेहपूर्वक “ब्रेवहार्ट्स” संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, “ये युवा केवल मरीजों की सहायता नहीं कर रहे, बल्कि मानवता का श्रेष्ठ रूप सीख रहे हैं। देश के सबसे व्यस्त अस्पतालों में से एक में मरीजों का मार्गदर्शन करते हुए वे सहानुभूति, धैर्य और सेवा के प्रति आजीवन प्रतिबद्धता विकसित कर रहे हैं। आने वाले वर्षों में वे सारथी को अपने जीवन का एक महत्वपूर्ण अध्याय मानेंगे।”
उन्होंने इस पहल को सफल बनाने में विद्यालयों के प्राचार्यों, शिक्षकों, नोडल अधिकारियों और प्रशासकों के योगदान के लिए आभार भी व्यक्त किया।
कार्यक्रम के राष्ट्रीय विस्तार पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा, “जो पहल पीजीआईएमईआर में शुरू हुई थी, वह अब एक जन-आंदोलन का रूप ले चुकी है। सारथी ने यह सिद्ध किया है कि जब युवाओं को उद्देश्य और मूल्यों के साथ मार्गदर्शन मिलता है, तो वे परिवर्तन के सशक्त वाहक बन सकते हैं।”
श्री पंकज राय, आईएएस, उप निदेशक (प्रशासन), पीजीआईएमईआर ने कहा, “स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की चर्चा अक्सर बुनियादी ढांचे और तकनीक तक सीमित रहती है, लेकिन मरीज का वास्तविक अनुभव भी उतना ही महत्वपूर्ण है। बड़े संस्थानों में सेवाओं तक पहुंच चुनौतीपूर्ण हो सकती है। सारथी इसी अंतर को पाटने के लिए शुरू किया गया था।”
6 मई 2024 को शुरू हुई इस पहल के तहत छात्र स्वयंसेवक अस्पताल में मरीजों की गैर-चिकित्सीय प्रक्रियाओं—जैसे पंजीकरण, जांच केंद्रों तक मार्गदर्शन, विभिन्न सेवाओं के बीच आवागमन, तथा बुजुर्ग और कमजोर वर्गों की सहायता—में सहयोग करते हैं।
पहल के व्यापक प्रभाव पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि 2,000 से अधिक स्वयंसेवकों ने मिलकर 1.24 लाख से अधिक सेवा घंटे दिए हैं, जिससे लाखों मरीजों और उनके परिजनों को लाभ मिला है।
नीतिगत महत्व का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सारथी को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा एक अनुकरणीय मॉडल के रूप में मान्यता प्राप्त हुई है, तथा युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय द्वारा अनुभवात्मक शिक्षण ढांचे के अंतर्गत भी सराहा गया है।
उन्होंने कहा, “सारथी एक ऐसी पीढ़ी तैयार कर रहा है जो सामाजिक रूप से जिम्मेदार है और समझती है कि स्वास्थ्य सेवा एक सामूहिक जिम्मेदारी है। यह पहल हमें याद दिलाती है कि सच्चा उपचार केवल चिकित्सा में नहीं, बल्कि मरीज को सम्मान और सहारा देने में निहित है।”
कार्यक्रम में सारथी परियोजना की दो वर्षों की यात्रा का विस्तृत प्रस्तुतीकरण किया गया। एक विशेष फिल्म के माध्यम से इसके विकास और प्रभाव को दर्शाया गया। इसके साथ ही 25 सहयोगी शैक्षणिक संस्थानों को सम्मानित किया गया तथा प्राचार्यों, एनएसएस नोडल अधिकारियों और समर्पित स्वयंसेवकों (ब्रेवहार्ट्स) को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
समापन पर प्रो. संजय जैन, डीन (अनुसंधान), पीजीआईएमईआर ने कहा, “सारथी करुणा को क्रियान्वित करने का सशक्त उदाहरण है। यह युवाओं द्वारा संचालित परिवर्तन और सामुदायिक सहभागिता की अपार संभावनाओं को दर्शाता है।”
कार्यक्रम का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि इस पहल को और मजबूत करते हुए देशभर के स्वास्थ्य संस्थानों में इसका विस्तार किया जाएगा।

यूआईडीएआई ने साइबर सुरक्षा और डिजिटल फॉरेंसिक सदृढ़ता को बढ़ाने के लिए एनएफएसयू के साथ हाथ मिलाया

यह सहयोग साइबर सुरक्षा ऑडिट, फोरेंसिक अनुसंधान और क्षमता निर्माण सहित छह प्रमुख क्षेत्रों में केन्द्रित है

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) और राष्ट्रीय फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय (एनएफएसयू) ने डिजिटल फोरेंसिक, साइबर सुरक्षा और उन्नत प्रौद्योगिकी अनुसंधान के क्षेत्रों में एक संरचित, पांच वर्षीय सहयोग स्थापित करने के लिए हाथ मिलाया है।

यह समझौता ज्ञापन सहयोग के लिए एक व्यापक रूपरेखा प्रदान करता है और भारत के डिजिटल पहचान इकोसिस्टम को आधार प्रदान करने वाले यूआईडीएआई के डिजिटल इकोसिस्टम में साइबर सदृढ़ता को और मजबूत करने के लिए दो प्रमुख राष्ट्रीय संस्थानों को एक साथ लाया है।

यूआईडीएआई के सीईओ श्री विवेक चंद्र वर्मा और एनएफएसयू गुजरात परिसर के निदेशक प्रोफेसर (डॉ.) एस.ओ. जुनारे के बीच इस समझौता ज्ञापन का आदान-प्रदान किया गया। इस समारोह में यूआईडीएआई के उप महानिदेशक श्री अभिषेक कुमार सिंह और दोनों पक्षों के कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

यह सहयोग छह रणनीतिक स्तंभों पर केंद्रित होगा: शैक्षणिक और व्यावसायिक विकास, सूचना सुरक्षा और प्रणाली अखंडता, फोरेंसिक अवसंरचना और प्रयोगशाला उत्कृष्टता, साइबर सुरक्षा गतिविधियों के लिए तकनीकी सहायता, तकनीकी परामर्श और अनुसंधान (जिसमें एआई, ब्लॉकचेन, डीपफेक डिटेक्शन और क्रिप्टोग्राफिक प्रौद्योगिकियों जैसे उभरते क्षेत्रों में संयुक्त अनुसंधान शामिल है) तथा रणनीतिक प्लेसमेंट और आउटरीच, जिसमें एनएफएसयू के छात्रों के लिए प्लेसमेंट और आउटरीच के अवसर शामिल हैं।

यूआईडीएआई के सीईओ श्री विवेक चंद्र वर्मा ने कहा कि यह सहयोग भारत के डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे का समर्थन करने वाली सुरक्षा, सदृढ़ता और फोरेंसिक क्षमताओं को और मजबूत करने तथा भारत की डिजिटल पहचान प्रणालियों के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपायों को सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

रक्षा मंत्रालय–भारत इलेक्ट्रॉनिक लिमिटेड के बीच 1,476 करोड़ का रक्षा सौदा

दिल्ली/सत्ता संदेश

रक्षा मंत्रालय ने हैदराबाद स्थित भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड के साथ भारतीय सेना के लिए 1,476 करोड़ रुपये की लागत से पांच ग्राउंड-बेस्ड (ज़मीन पर स्थित) मोबाइल (एक से दूसरे स्थान तक ले जाये जाने में सक्षम) इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम की खरीद के अनुबंध पर हस्ताक्षर किए हैं, जो न्यूनतम 72 प्रतिशत स्वदेशी उपकरणों से युक्‍त होंगे। स्वदेशी डिजाइन के आधार पर विकास और निर्माण श्रेणी (बाय इंडिया-इंडिजिनली डिजाइन्ड, डेवलप्ड एंड मैन्युफैक्चर्ड) के तहत इस अनुबंध पर आज नई दिल्ली के कर्तव्य भवन-दो में रक्षा सचिव श्री राजेश कुमार सिंह की उपस्थिति में हस्ताक्षर किये गए।

इस प्रणाली से भारतीय सेना की इकाइयों का आधुनिकीकरण होगा और यह देश के स्वदेशी रक्षा विनिर्माण तंत्र को सुदृढ़ बनाएगा। यह अनुबंध रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत और प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की मेक-इन-इंडिया के प्रति प्रतिबद्धता और पुष्‍ट करता है।

अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (एससीबी) ने वित्त वर्ष 2025-26 में 15.9 प्रतिशत की मजबूत ऋण वृद्धि दर्ज की, जो सुदृढ़ आर्थिक गतिविधि और ऋण मांग को दर्शाती है
कृषि और संबद्ध क्षेत्र के ऋण में वृद्धि वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 15.7 प्रतिशत हो गई है, जो एक वर्ष पहले 10.4 प्रतिशत थी, यह ग्रामीण मांग में निरंतरता और ऋण प्रवाह में सुधार को दर्शाता है

औद्योगिक ऋण वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 15 प्रतिशत हो गया है जो पिछले वर्ष यह 8.2 प्रतिशत था, यह वृद्धि सूक्ष्म, लघु, एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को ऋण देने की तेज गति से हुई

एनबीएफसी, व्यापार और वाणिज्यिक अचल संपत्ति क्षेत्रों में उल्लेखनीय वृद्धि से सेवा क्षेत्र में ऋण वृद्धि पिछले वर्ष के 12 प्रतिशत से बढ़कर 19 प्रतिशत हो गई है

वाहन और स्वर्ण समर्थित ऋणों की मजबूत मांग और आवास ऋण की स्थिर स्थिति के कारण व्यक्तिगत ऋणों में 16.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जो पिछले वर्ष के 11.7 प्रतिशत से अधिक है

दिल्ली /सत्ता संदेश

वित्तीय वर्ष 2025-26 में गैर-खाद्य ऋण में पिछले वर्ष की तुलना में 15.9 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की गई, जो कि वर्ष 2025 की इसी अवधि (10.9 प्रतिशत) की तुलना में 497 आधार अंकों की उल्लेखनीय वृद्धि है। मार्च 2026 में कुल बकाया ऋण 212.9 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 29.2 लाख करोड़ रुपये अधिक है।

कम ब्याज दर के माहौल के बीच, सरकार द्वारा समर्थित पूंजीगत व्यय चक्र और समय पर किए गए संरचनात्मक सुधारों के चलते निजी निवेश बढ़ रहे हैं और घरेलू ऋण मांग को बढ़ावा दे रहे हैं, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था पर कॉरपोरेट और व्यक्तिगत उधारकर्ताओं दोनों का विश्वास बहाल हो रहा है।

वित्त वर्ष 2025-26 में ऋण वृद्धि व्यापक आधार पर हुई है, जिसमें सेवा क्षेत्र का बड़ा योगदान है। इसके बाद व्यक्तिगत ऋण खंड, कृषि और संबद्ध गतिविधियां और उद्योग का स्थान रहा है।

क्षेत्रीय ऋण वितरण – मुख्य बिंदु:

क्षेत्रीय ऋण वितरण (वर्ष-दर-वर्ष वृद्धि प्रतिशत में

  • कृषि एवं संबद्ध गतिविधियां: इस क्षेत्र में ऋण वृद्धि दर बढ़कर 15.7 प्रतिशत हो गई, जो पिछले वर्ष दर्ज की गई 10.4 प्रतिशत वृद्धि से 528 बीपीएस अधिक है। यह कृषि क्षेत्र को मिल रहे सुदृढ़ समर्थन को दर्शाता है। ग्रामीण मांग में निरंतरता और ग्रामीण ऋण के औपचारिकरण से वित्त वर्ष 2025-26 में प्राथमिक क्षेत्र के ऋण उपयोग में सकारात्मक गति प्राप्त हुई है।
  • औद्योगिक क्षेत्र: औद्योगिक क्षेत्र को दिए गए ऋण में पिछले वर्ष की 8.2 प्रतिशत वृद्धि की तुलना में लगभग दोगुनी दर से 15.0 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। सूक्ष्म और लघु उद्योगों ने वित्त वर्ष 2025-26 में 33.1 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज की है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 3.7 गुना अधिक है। मध्यम आकार के उद्योगों में भी इसी तरह के सकारात्मक रुझान देखे गए हैं, जहां ऋण में 21.7 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि हुई है। औद्योगिक ऋण के प्रमुख चालक हैं: अवसंरचना, बुनियादी धातु और धातु उत्पाद, रसायन और रासायनिक उत्पाद, पेट्रोलियम, कोयला उत्पाद और परमाणु ईंधन आदि।
  • सेवा क्षेत्र: सेवा क्षेत्र के ऋण में वार्षिक आधार पर 19.0 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की गई (पिछले वर्ष इसी अवधि में 12.0 प्रतिशत की तुलना में)। सेवा क्षेत्र का कुल ऋण में 28 प्रतिशत का योगदान है। यह वृद्धि मुख्य रूप से गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों, व्यापार और वाणिज्यिक अचल संपत्ति जैसे क्षेत्रों से उच्च मांग के कारण हुई।
  • व्यक्तिगत ऋण खंड: कुल ऋण में 33 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाले व्यक्तिगत ऋण खंड में वित्त वर्ष 2025-26 में 16.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो एक वर्ष पहले दर्ज की गई ऋण वृद्धि (11.7 प्रतिशत) से 455 बीपीएस अधिक है। आवास खंड में वृद्धि स्थिर रही, जबकि वाहन ऋण और सोने के आभूषणों के बदले दिए जाने वाले ऋणों में तीव्र गति बनी रही।

मजबूत ऋण वृद्धि घरेलू अर्थव्यवस्था के सुदृढ़ वातावरण को दर्शाती है और भारतीय अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रों में ऋण की बढ़ती मांग का संकेत देती है। मजबूत ऋण वृद्धि के परिणामस्वरूप निगम और व्यक्ति व्यवसाय विस्तार और टिकाऊ वस्तुओं की खरीद के लिए ऋण सुविधाओं का लाभ उठा रहे हैं, जिससे अचल परिसंपत्तियों में निवेश के माध्यम से अतिरिक्त क्षमता विकास द्वारा औद्योगिक गतिविधि में पहले से अधिक तेजी आ रही है और रोजगार के अधिक अवसर पैदा हो रहे हैं।

भू-आर्थिक विखंडन और भू-राजनीतिक दबावों से घिरे चुनौतीपूर्ण वैश्विक परिदृश्य के बावजूद, भारतीय अर्थव्यवस्था ने उल्लेखनीय लचीलापन दिखाया है और यह लगातार दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक रही है।

भारतीय बैंकिंग क्षेत्र, जो आर्थिक विकास का प्राथमिक इंजन है, अपनी सर्वोत्तम स्थिति में है। इसकी मजबूत पूंजी, ऐतिहासिक रूप से कम अवमूल्यन वाली परिसंपत्तियां और निरंतर लाभप्रदता अर्थव्यवस्था की विकास क्षमता को बढ़ाती है। ऋण को लोकतांत्रिक और औपचारिक बनाने के लिए सरकार के निरंतर प्रयासों के परिणामस्वरूप अर्थव्यवस्था में व्यापक स्तर पर ऋण वृद्धि हो रही है।

*(वार्षिक वृद्धि की गणना 4 अप्रैल, 2025 और 31 मार्च, 2026 के ऋण उपयोग के आधार पर की गई है। 31 दिसंबर, 2025 से बैंकिंग कानून (संशोधन) अधिनियम 2025 के तहत अंतिम रिपोर्टिंग पखवाड़े की परिभाषा को महीने के अंतिम दिन में बदल दिया गया है। तदनुसार, दिसंबर 2025 से आगे की वार्षिक वृद्धि दरें चालू वर्ष के महीने के अंत के आंकड़ों और पिछले वर्ष के संबंधित महीने के अंतिम रिपोर्टिंग पखवाड़े (पुरानी परिभाषा के अनुसार) के आंकड़ों पर आधारित हैं।)

केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान का किसान हित में निर्णायक कदम, 4,886 करोड़ रु. से अधिक की MSP सुरक्षा

कर्नाटक/ सत्ता संदेश

कर्नाटक में 9,023 मीट्रिक टन सूरजमुखी खरीदी को केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा मंजूरी

महाराष्ट्र के चना उत्पादकों के लिए बड़ा फैसला, श्री  शिवराज सिंह चौहान ने खरीद सीमा बढ़ाकर 8.19 लाख मीट्रिक टन की

लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने की दिशा में केंद्र सरकार प्रतिबद्ध, किसानों को औने-पौने दाम से मिलेगी राहत- श्री शिवराज सिंह

किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य दिलाने और बाजार में मजबूरी में बिक्री की स्थिति से बचाने के लिए केंद्र सरकार ने एक और महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कर्नाटक में रबी 2026 सीजन के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य पर 9,023 मीट्रिक टन सूरजमुखी की खरीद को मंजूरी दी है, वहीं महाराष्ट्र में रबी 2025-26 सीजन के दौरान चने की अधिकतम खरीद सीमा बढ़ाकर 8,19,882 मीट्रिक टन कर दी गई है। इन दोनों फैसलों के जरिए किसानों को 4,886.46 करोड़ रुपए से अधिक की एमएसपी सुरक्षा उपलब्ध होगी।

किसान हित में केंद्र सरकार का एक और बड़ा निर्णय

कर्नाटक सरकार के प्रस्ताव को स्वीकृति देते हुए केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने रबी 2026 सीजन के लिए मूल्य समर्थन योजना (PSS) के तहत 9,023 मीट्रिक टन सूरजमुखी की खरीद को मंजूरी दी है। इस स्वीकृति का कुल एमएसपी मूल्य 69.66 करोड़ रु. से अधिक होगा। इस निर्णय से कर्नाटक के सूरजमुखी उत्पादक किसानों को उनकी उपज का उचित और लाभकारी मूल्य मिल सकेगा।

केंद्र सरकार का यह कदम विशेष रूप से उन किसानों के लिए राहतकारी साबित होगा, जिन्हें बाजार में कम कीमत मिलने की आशंका के कारण मजबूरी में अपनी उपज बेचनी पड़ती है। एमएसपी पर खरीद की स्वीकृति से किसानों का भरोसा मजबूत होगा और कृषि क्षेत्र में स्थिरता को बढ़ावा मिलेगा।

महाराष्ट्र के चना किसानों को बड़ी राहत

इसी क्रम में महाराष्ट्र सरकार के प्रस्ताव पर निर्णय लेते हुए केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने रबी 2025-26 सीजन के दौरान राज्य में पीएसएस के तहत चने की अधिकतम खरीद मात्रा बढ़ाकर 8,19,882 मीट्रिक टन करने को मंजूरी दी है। इस स्वीकृति का कुल एमएसपी मूल्य 4,816.80 करोड़ रु. से अधिक होगा। इसके साथ ही महाराष्ट्र में चना खरीद की समय-सीमा में 30 दिनों का विस्तार करते हुए इसे 29 मई 2026 तक बढ़ा दिया गया है। यह फैसला उन किसानों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, जो निर्धारित अवधि में अपनी उपज की बिक्री पूरी नहीं कर पाए थे। अब अधिक किसानों को एमएसपी का लाभ मिल सकेगा और उन्हें बाजार के दबाव में कम कीमत पर बिक्री नहीं करनी पड़ेगी।

किसान कल्याण के प्रति केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के मार्गदर्शन और केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय लगातार इस दिशा में काम कर रहा है कि किसानों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य मिले और कृषि उपज की खरीद प्रणाली अधिक प्रभावी, पारदर्शी और किसानोन्मुख बने। कर्नाटक में सूरजमुखी और महाराष्ट्र में चने की खरीद संबंधी ये निर्णय इस बात का प्रमाण हैं कि सरकार किसानों के आर्थिक हितों की रक्षा के लिए संवेदनशील और सक्रिय है। इन फैसलों से न केवल संबंधित राज्यों के किसानों को प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ मिलेगा, बल्कि कृषि क्षेत्र में विश्वास, सुरक्षा और स्थिरता का वातावरण भी मजबूत होगा। लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने की दिशा में यह कदम किसान कल्याण के प्रति केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता को और सशक्त करता है।

भारत का ऑपरेशन सिंदूर: रणनीतिक जीत का एक वर्ष
  • मेजर जनरल रवि मुरुगन (सेवानिवृत्त)

आज से एक साल पहले, 7 मई 2025 को भारत ने ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया, जिसने केवल नीति की घोषणा से आगे बढ़कर उसे निर्णायक कार्रवाई में बदल दिया। यह भारत की धरती पर दशकों से जारी पाकिस्तान-प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ जवाब देने के तरीके में एक बड़ा बदलाव था। कई मायनों में, ऑपरेशन सिंदूर भारत के उस लंबे संघर्ष में एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन गया, जिसमें पाकिस्तान द्वारा गैर-राज्य तत्वों को प्रॉक्सी हिंसा के हथियार के रूप में इस्तेमाल करने का जवाब दिया गया।

इस अभियान के पीछे भारत का राजनीतिक इरादा पूरी तरह स्पष्ट और दृढ़ था। 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में पाकिस्तान-प्रशिक्षित आतंकवादियों के बर्बर हमले में 26 निर्दोष लोगों की मौत के बाद भारत की प्रतिक्रिया केवल प्रतीकात्मक या सीमित नहीं थी। यह पूरी तरह योजनाबद्ध, समयबद्ध और स्पष्ट उद्देश्य वाली कार्रवाई थी। 88 घंटे तक चले इस अभियान ने साफ दिखाया कि भारत ने तय लक्ष्यों के साथ संगठित जवाबी रणनीति अपनाई और अपने उद्देश्यों को पूरा करने के बाद अपनी शर्तों पर इसे समाप्त किया।

राजनीतिक और रणनीतिक दृष्टिकोण से इस अभियान की दो बातें विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। पहली, हमलों का दायरा पहले से कहीं अधिक व्यापक था। लक्ष्य केवल नियंत्रण रेखा के पार पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर तक सीमित नहीं रहे, बल्कि पाकिस्तान के पंजाब के अंदरूनी क्षेत्रों तक भी पहुंचे। यह एक सोची-समझी रणनीतिक पहल थी, जिसने पाकिस्तान की कथित परमाणु सीमाओं और उसकी प्रतिरोधक नीति को सीधे चुनौती दी।

दूसरा, इस अभियान ने दिखाया कि आज के सूचना युग के युद्धों में तकनीक कितनी केंद्रीय भूमिका निभाती है। क्रूज़ मिसाइलों, लोइटरिंग हथियारों, नेटवर्क-आधारित प्रणालियों और बहु-स्तरीय वायु एवं मिसाइल रक्षा प्रणाली के उपयोग ने स्पष्ट किया कि अब युद्ध सटीकता, गति और बेहतर समन्वय तथा युद्धक्षेत्र की समझ पर आधारित हैं। ऑपरेशन सिंदूर केवल जवाबी कार्रवाई नहीं था, बल्कि यह भारत की उस नई युद्ध रणनीति का प्रदर्शन भी था, जिसमें दूर से मार करने की क्षमता, तेज निर्णय प्रक्रिया और कई मोर्चों पर एकीकृत कार्रवाई प्रमुख है।

7 मई 2025 को शुरू हुआ यह अभियान पाकिस्तान के भीतर मौजूद आतंकी ढांचे पर तेज, सटीक और योजनाबद्ध कार्रवाई था। यह भारत की समन्वित सैन्य क्षमता का नियंत्रित लेकिन अत्यंत प्रभावशाली प्रदर्शन था, जिसका उद्देश्य दुश्मन पर कीमत थोपना था, बिना संघर्ष को अनावश्यक रूप से बढ़ाए। एक साल बाद, ऑपरेशन सिंदूर भारत की बढ़ती रणनीतिक परिपक्वता का प्रमाण माना जाता है—अर्थात, परमाणु शक्ति से लैस दुश्मन को जवाबदेह बनाने की क्षमता, वह भी स्पष्ट उद्देश्य, दृढ़ संकल्प और संतुलित रणनीति के साथ।

आज के कई युद्ध जहां लंबे और अनिर्णायक बन जाते हैं, वहीं ऑपरेशन सिंदूर स्पष्ट लक्ष्यों और ठोस कार्रवाई के कारण अलग दिखाई देता है। इसका राजनीतिक उद्देश्य स्पष्ट था—आतंकवाद के ढांचे और उसे समर्थन देने वालों पर सीधा और प्रभावी प्रहार करना। लक्ष्य प्राप्त होते ही अभियान को सीमित रखा गया। टारगेट चयन में भी संयम और दृढ़ता दोनों दिखाई दिए। लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिदीन जैसे संगठनों से जुड़े महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाया गया, ताकि उनकी क्षमता कमजोर हो, लेकिन आम नागरिकों को नुकसान और सहायक क्षति न्यूनतम रहे।

सैन्य संचालन के स्तर पर यह अभियान भारत की दूर से सटीक प्रहार करने की युद्ध क्षमता के परिपक्व होने का संकेत था। लंबी दूरी की क्रूज़ मिसाइलों और प्रिसीजन हथियारों से लैस राफेल, साथ ही ब्रह्मोस प्रणाली से जुड़े सुखोई SU-30MKI जैसे प्लेटफॉर्म ने व्यापक दायरे में गहराई तक समन्वित हमले संभव बनाए। पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर से आगे बढ़कर पाकिस्तान के पंजाब के भीतर तक कार्रवाई का विस्तार इस बात का संकेत था कि भारत ने अपनी पुरानी स्व-निर्धारित सीमाओं को पीछे छोड़ते हुए कथित सुरक्षित ठिकानों को भी चुनौती दी।

इस अभियान की रक्षा व्यवस्था भी उतनी ही महत्वपूर्ण रही। एकीकृत वायु और मिसाइल रक्षा प्रणालियों ने ड्रोन और मिसाइलों के जरिए किसी भी जवाबी हमले को प्रभावी ढंग से विफल कर दिया। आक्रामक क्षमता और मजबूत रक्षात्मक सुरक्षा के इस संयोजन ने स्पष्ट रूप से दिखाया कि आधुनिक युद्ध में नेटवर्क-आधारित समन्वय और बहु-स्तरीय सुरक्षा कितनी आवश्यक हो चुकी है।

रणनीतिक सिद्धांत के स्तर पर ऑपरेशन सिंदूर ने एक साथ तीन महत्वपूर्ण सीमाएं पार कीं—जिम्मेदार लक्ष्य चयन, संतुलित सैन्य शक्ति का उपयोग और स्पष्ट दबावकारी संदेश। इसने दिखाया कि जब कार्रवाई स्पष्ट राजनीतिक इरादे, सटीक सैन्य लक्ष्यों और मजबूत प्रतिरोधक क्षमताओं के साथ की जाए, तो दुश्मन को दंडित किया जा सकता है बिना स्थिति को अनियंत्रित युद्ध में बदले। भारत ने युद्ध के दायरे को पूरी तरह बढ़ाने के बजाय उसे सीमित लेकिन प्रभावशाली ढंग से बढ़ाया, जिससे पूर्ण युद्ध से बचते हुए भी दुश्मन पर ठोस कीमत थोपी गई।

इस अभियान की एक और बड़ी विशेषता थी—तीनों सेनाओं के बीच बेहतर समन्वय और पूरे रक्षा तंत्र का एकीकृत संचालन। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) की स्थापना के बाद विकसित नए रक्षा ढांचे का प्रभाव स्पष्ट दिखाई दिया। समुद्री मोर्चा, हवाई शक्ति और जमीनी लक्ष्य—ये अलग-अलग अभियान नहीं थे, बल्कि एक ही संयुक्त रणनीति के हिस्से थे।

इसे रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की बढ़ती ताकत ने और मजबूत बनाया। स्वदेशी प्लेटफॉर्म, प्रिसीजन हथियार प्रणालियां, काउंटर-ड्रोन तकनीक और ISR (इंटेलिजेंस, सर्विलांस, रिकॉनिसेंस) जैसी घरेलू क्षमताओं की बढ़ती भूमिका ने दिखाया कि भारत धीरे-धीरे लेकिन मजबूती से रक्षा आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है। इस तरह, ऑपरेशन सिंदूर केवल सैन्य शक्ति का प्रदर्शन नहीं था, बल्कि भारत की औद्योगिक और तकनीकी गहराई का भी प्रमाण था। अब मजबूत रक्षा तैयारी सीधे तौर पर देश की औद्योगिक क्षमता से जुड़ चुकी है।

कूटनीतिक स्तर पर भी यह अभियान बेहद सोच-समझकर चलाया गया। भारत ने अपनी कार्रवाइयों को आतंकवाद के खिलाफ जवाब और आत्मरक्षा के दायरे में प्रस्तुत किया, जिससे ऑपरेशन सिंदूर के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत नैतिक और रणनीतिक आधार तैयार हुआ। सैन्य कार्रवाई और कूटनीतिक संदेशों के बीच यह तालमेल भारत के लिए रणनीतिक स्पेस बनाए रखने में बेहद महत्वपूर्ण साबित हुआ।

अंततः, ऑपरेशन सिंदूर की सबसे बड़ी विशेषता उसका सही समय पर और स्पष्ट तरीके से समापन था। अपने लक्ष्य हासिल करने के बाद भारत ने तय समय-सीमा के भीतर अभियान रोक दिया, जिससे वह उन लंबे और दिशाहीन संघर्षों से बचा रहा जो आज कई आधुनिक युद्धों की पहचान बन चुके हैं। इसकी शुरुआत, संचालन और समाप्ति—तीनों में दिखाई गई स्पष्टता और सटीकता ही इस अभियान की सबसे बड़ी पहचान रही।

एक साल बाद, ऑपरेशन सिंदूर की वास्तविक विरासत केवल दुश्मन को हुए नुकसान में नहीं, बल्कि उस नई मिसाल में है जो इसने स्थापित की। इसने दिखाया कि संतुलित, तकनीक-सक्षम और राजनीतिक नेतृत्व द्वारा निर्देशित सैन्य कार्रवाई दुश्मन पर भारी कीमत थोप सकती है, उसकी रणनीति बदल सकती है और फिर भी नियंत्रण के दायरे में रह सकती है। यह परमाणु जोखिम के बीच सीमित युद्ध के लिए भारत के उभरते मॉडल को दर्शाता है—इरादों में मजबूत, कार्रवाई में सटीक और संयम में अनुशासित।

पीएम मोदी के नेतृत्व का कमाल, 13 सालों में विधायकों की संख्या 773 से बढ़कर 1806 हुई

नई दिल्ली/सत्ता संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 13 सालों में कई राज्यों में बीजेपी की विधायक संख्या तेजी से बढ़ी है. चुनाव आयोग के सूत्रों से मिले डेटा के मुताबिक, सितंबर 2013 में इसके कुल विधायकों की संख्या 773 थी, जो मई 2026 में बढ़कर 1806 हो गई. पीएम मोदी के नेतृत्व में जो उछाल आया है, वह कई इलाकों में लगातार चुनावी बढ़त दिखाता है।

पश्चिम बंगाल जैसे राज्य जहां 2013 में बीजेपी का कोई भी विधायक नहीं था. 2026 के चुनाव के बाद पश्चिम बंगाल में भाजपा पहली बार न केवल सरकार बना रही है, बल्कि विधायकों की संख्या बढ़कर 207 हो गयी है।

मणिपुर, मेघायल और मिजोरम में 2013 में भाजपा का कोई भी विधायक नहीं था. यहां भाजपा विधायकों की संख्या बढ़कर क्रमश 36, दो और दो हो गयी. डेटा के अनुसार तेलंगाना में भी कोई विधायक नहीं था. वहां विधायकों की संख्या बढ़कर सात हो गयी.

हिंदी पट्टी में भाजपा का बढ़ता दबदबा

उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्यों में खास बढ़त दिख रही है, जहां पार्टी के विधायकों की संख्या, जो 2013 में 47 थी, 2026 में 257 हो गई है। इसी तरह, मध्य प्रदेश में, यह 143 से बढ़कर 165 हो गई, और गुजरात में 115 से बढ़कर 161 हो गई, जिससे हिंदी पट्टी और पश्चिमी भारत में इसका दबदबा और मजबूत हुआ है. महाराष्ट्र में भी काफी बढ़ोतरी हुई है, जहां बीजेपी के विधायकों की संख्या 46 से बढ़कर 131 हो गई है।

खास तौर पर, पार्टी ने नॉर्थईस्ट में काफ़ी बढ़त दर्ज की है। अरुणाचल प्रदेश में, इसके विधायक की संख्या 2013 में सिर्फ तीन से बढ़कर 2026 में 46 हो गई, जबकि असम में यह पांच से बढ़कर 82 हो गई है। इसी तरह, बीजेपी ने मणिपुर, त्रिपुरा और नागालैंड में अपनी मौजूदगी बढ़ाई है, जो इस इलाके में उसके स्ट्रेटेजिक दबाव को दिखाता है।

मोदी युग में भाजपा का राजनीतिक विस्तार

ओडिशा में भी तेज बढ़त देखी गई है, जहां भाजपा की सीटें छह से बढ़कर 79 हो गई हैं. हरियाणा में पार्टी की मौजूदगी चार से 48, दिल्ली में 23 से 48 और कर्नाटक में 40 से 64 हो गई है. हालांकि, बिहार और हिमाचल प्रदेश जैसे कुछ राज्यों में थोड़ी गिरावट या सीमित बढ़त हुई है, जो मिली-जुली लेकिन काफी हद तक ऊपर की ओर बढ़त का संकेत है।

अपनी लेजिस्लेटिव बढ़त के साथ-साथ, बीजेपी की एग्जीक्यूटिव मौजूदगी भी बढ़ने वाली है. पश्चिम बंगाल में अपनी जीत के बाद, पार्टी के 17 राज्यों में मुख्यमंत्री होने की उम्मीद है. इसके अलावा, पांच और राज्यों में नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस के मुख्यमंत्री हैं, जिससे विधानसभा वाले 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में से कुल 22 राज्य ऐसे हैं.