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पंजाब निकाय चुनाव: कल से नामांकन प्रक्रिया शुरू, 26 मई को होगा मतदान

पंजाब डेस्क: पंजाब में नगर निगमों और नगर परिषदों के चुनाव के लिए अधिसूचना जारी होने के बाद चुनावी हलचल तेज हो गई है। राज्य चुनाव आयोग द्वारा जारी शेड्यूल के अनुसार, नामांकन की प्रक्रिया कल यानी बुधवार से शुरू हो जाएगी। उम्मीदवार 16 मई तक अपने नामांकन फॉर्म जमा कर सकेंगे।

चुनाव कार्यक्रम की मुख्य तिथियां:

नामांकन की अंतिम तिथि: 16 मई

-नामांकन पत्रों की जांच (स्क्रूटनी): 18 मई

-नाम वापसी की अंतिम तिथि: 19 मई-मतदान (Voting): 26 मई

-नतीजों की घोषणा: 29 मई

प्रशासनिक तैयारियां और सुरक्षा: लुधियाना के डीसी और जिला चुनाव अधिकारी हिमांशु जैन ने बताया कि चुनाव के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। पारदर्शिता और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लुधियाना जिले के खन्ना, समराला, पायल, जगराओं, रायकोट और दोराहा में अलग-अलग नामांकन केंद्र बनाए गए हैं।

जिला निर्वाचन अधिकारी ने सभी उम्मीदवारों से आदर्श चुनाव आचार संहिता का सख्ती से पालन करने की अपील की है और उन्हें सलाह दी है कि अंतिम समय की भीड़ से बचने के लिए अपने दस्तावेज़ समय रहते पूरे कर लें। 26 मई को होने वाले मतदान के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहेंगे।

नीट पेपर लीक मामला: सीबीआई की ताबड़तोड़ कार्रवाई, कई राज्यों में छापेमारी और गिरफ्तारियां शुरू

नई दिल्ली/जयपुर: नीट-यूजी 2026 (NEET-UG 2026) पेपर लीक मामले में केंद्र सरकार की सख्ती के बाद सीबीआई (CBI) ने कमान संभालते ही अपनी जांच तेज कर दी है। शिक्षा मंत्रालय की लिखित शिकायत पर प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने के बाद जांच एजेंसी ने कई स्थानों पर छापेमारी की और महत्वपूर्ण गिरफ्तारियां की हैं।

जमवारामगढ़ से पहली हिरासत: सीबीआई ने अपनी पहली बड़ी कार्रवाई राजस्थान के जमवारामगढ़ में की है, जहां एक व्यक्ति को हिरासत में लिया गया है। बताया जा रहा है कि इस शख्स के दोनों बेटे पेशे से डॉक्टर हैं।नासिक में मेडिकल छात्र गिरफ्तार: जांच एजेंसियों ने महाराष्ट्र के नासिक से डॉ. शुभम खैरनार नाम के एक आरोपी को पकड़ा है। शुभम खुद भोपाल के एक कॉलेज में BAMS (आयुर्वेदिक चिकित्सा) के अंतिम वर्ष का छात्र है, जिससे इस नेटवर्क के गहरे और प्रोफेशनल संबंधों का पता चलता है।

गंभीर धाराओं में केस दर्ज: सीबीआई ने यह मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं जैसे आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, विश्वासघात, चोरी और सबूत मिटाने के तहत दर्ज किया है। इसके अलावा, ‘पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट 2024’ और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं भी लगाई गई हैं।

परीक्षा की पवित्रता पर सवाल: शिकायत के अनुसार, 3 मई 2026 को आयोजित हुई परीक्षा से पहले ही कुछ दस्तावेजों का अनधिकृत प्रसार किया गया था। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को इस संबंध में इनपुट मिले थे, जिसके बाद सीबीआई अब दोषियों की पहचान के लिए विशेष टीमें गठित कर जांच कर रही है।

PUNJAB TOP-10 NEWS, चुटकियों में पढ़े बड़ी दिन भर की खबरें…12-05-2026

पंजाब डेस्क: पंजाब और चंडीगढ़ की आज की प्रमुख हलचलों में भ्रष्टाचार के खिलाफ सीबीआई की बड़ी कार्रवाई और एक खूंखार साइको किलर का अंत सबसे ऊपर रहे। जहां विजिलेंस मुख्यालय पर छापेमारी ने प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया, वहीं समाज, राजनीति, खेल और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सिखों की धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़ी खबरें भी सुर्खियों में रहीं।

1. पंजाब विजिलेंस मुख्यालय पर सीबीआई का छापा: मोहाली स्थित पंजाब विजिलेंस हेडक्वार्टर पर सीबीआई (CBI) ने रेड की है। यह कार्रवाई 20 लाख रुपये के रिश्वत मामले की जांच के सिलसिले में की गई है। सीबीआई ने चंडीगढ़ के एक पांच सितारा होटल में डील पकड़ते हुए कुछ निजी लोगों को गिरफ्तार किया है, जबकि विजिलेंस चीफ के रीडर ओपी राणा की भूमिका की जांच की जा रही है।

2. 26 घंटे में 3 कत्ल करने वाले साइको किलर का एनकाउंटर: पंजाब के तरनतारन निवासी साइको किलर गुरप्रीत सिंह को यूपी पुलिस ने मुठभेड़ में ढेर कर दिया। उसने 26 घंटे के भीतर चलती ट्रेन और अस्पताल में तीन लोगों की बेवजह हत्या की थी। पुलिस जब उसे सीन रिक्रिएट कराने ले गई, तो उसने पिस्टल छीनकर भागने की कोशिश की, जिसके बाद जवाबी फायरिंग में उसकी मौत हो गई।

3. पत्नी के ताने से तंग आकर पति ने नहर में कूदकर दी जान: पठानकोट में एक हलवाई रमेश पाल ने अपनी पत्नी की मानसिक प्रताड़ना और उसके अवैध संबंधों से दुखी होकर आत्महत्या कर ली। परिजनों का आरोप है कि पत्नी उसे “मर क्यों नहीं जाता” जैसे ताने मारती थी। पुलिस ने आरोपी पत्नी को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि उसका प्रेमी अभी फरार है।

4. पंजाब में ‘फार्म स्टे पॉलिसी-2026’ लॉन्च, किसान करेंगे अतिरिक्त कमाई: पंजाब सरकार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए फार्म स्टे पॉलिसी-2026 की शुरुआत की है। इसके तहत किसान अपनी खेती की जमीन पर पर्यटकों के ठहरने और खाने की सुविधा दे सकेंगे। किसान अधिकतम 9 कमरों का होमस्टे बना सकते हैं, जिससे उनकी आय में बढ़ोतरी होगी।

5. मोहाली में राजस्थान की युवती से गैंगरेप :मोहाली के खरड़ में नौकरी और सस्ते फ्लैट का झांसा देकर एक युवती के साथ दो युवकों ने गैंगरेप किया। पीड़िता राजस्थान की रहने वाली है और ब्यूटी पार्लर का काम तलाशने पंजाब आई थी। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

6. सीएम मान ने 10वीं बोर्ड के टॉपर्स को किया सम्मानित :मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड की 10वीं कक्षा के टॉपर्स और उनके अभिभावकों से मुलाकात की। सीएम ने पहले तीन स्थान हासिल करने वाली हरलीन शर्मा, मनीमहेश शर्मा और रीया रानी को बधाई दी और उन्हें स्कॉलरशिप के चेक सौंपे।

7. अबोहर में भीषण सड़क हादसा: दादी-पोते समेत 3 की मौत अबोहर के पास एक तेज रफ्तार पिकअप ने ई-रिक्शा को टक्कर मार दी। इस हादसे में एक महिला, उसके 4 साल के पोते और ई-रिक्शा चालक की मौके पर ही मौत हो गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि ई-रिक्शा के परखच्चे उड़ गए।

8. चंडीगढ़ को स्लम बना दिया: सुप्रीम कोर्ट की नगर निगम को फटकार चंडीगढ़ में अवैध वेंडरों और रेहड़ी-फड़ी के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि “सिटी ब्यूटीफुल” को स्लम बना दिया गया है। अदालत ने अधिकारियों से पूछा कि वे अवैध अतिक्रमण हटाने में ढिलाई क्यों बरत रहे हैं।

9. मानहानि केस में चंडीगढ़ कोर्ट में पेश हुए सुखबीर बादल : शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल 8 साल पुराने मानहानि मामले में कोर्ट में पेश हुए। उन पर 2017 में ‘अखंड कीर्तनी जत्था’ को लेकर विवादास्पद टिप्पणी करने का आरोप है। कोर्ट ने उन्हें अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के बाद अगली सुनवाई तक की मोहलत दी है।

10. कनाडा में सिख युवक को कृपाण की वजह से परीक्षा से रोका: कनाडा के विन्निपेग में एक सिख युवक, जसपाल सिंह गिल, को पुलिस भर्ती परीक्षा में बैठने से मना कर दिया गया क्योंकि उसने अपनी कृपाण उतारने से इनकार कर दिया था। जसपाल ने इसे अपनी धार्मिक आस्था का अपमान बताते हुए मानवाधिकार आयोग में शिकायत करने की बात कही है।

चिंतन शिविर: साझा दृष्टिकोण के ज़रिए भारत में खेलों के भविष्य को दिशा देना

श्री पुलेला गोपीचंद


दो चिंतन शिविरों का हिस्सा बनने का अवसर प्राप्त करने के बाद, मैं भरोसे के साथ कह
​​सकता हूँ कि यह आज भारतीय खेल जगत की सबसे सामयिक और असरदार पहलों में से
एक है। हम अपने राष्ट्र की खेल यात्रा के एक महत्वपूर्ण मोड़ पर हैं, एक ऐसा मोड़ जहाँ इरादा,
निवेश और प्रेरणा अभूतपूर्व रूप से एक साथ मिल रहे हैं।
पिछले एक दशक में, नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, भारत में खेल हाशिये से मुख्यधारा में आ गया
है। इसके महत्व के प्रति भी साफ तौर पर राष्ट्रीय जागरूकता देखी जा सकती है, न केवल एक
प्रतिस्पर्धी गतिविधि के रूप में, बल्कि स्वास्थ्य, अनुशासन और राष्ट्रीय गौरव के साधन के रूप
में भी। आज, हम एक विशाल और विविध तंत्र देख रहे हैं, जहां राज्य सरकारें, गैर-सरकारी
संगठन, निगम, संघ और ज़मीनी स्तर के संस्थान सभी मिलकर खेलों के विकास में सक्रिय रूप
से योगदान दे रहे हैं।
चिंतन शिविर की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह सभी हितधारकों को एक साझा मंच पर लाता
है। खेल अपने आप में कई क्षेत्रों से जुड़ा हुआ है, जिनमें विनिर्माण, मनोरंजन, फिटनेस, मीडिया
और शिक्षा शामिल हैं। यह शिविर इन सभी क्षेत्रों को एक साथ लाने में मदद करता है, जिससे
एक साझा दृष्टिकोण बनता है, जो दीर्घकालिक सफलता के लिए बेहद ज़रुरी है। यह देश के
सामूहिक दृष्टिकोण को सामने लाता है और साथ ही विभिन्न राज्यों की सर्वोत्तम प्रथाओं को
प्रदर्शित करता है, जिससे अनुकरण और नवाचार को भी प्रोत्साहन मिलता है।
चिंतन शिविर महज एक सम्मेलन से कहीं बढ़कर, एक शिक्षण तंत्र है। यह इसमें शामिल होने
वाले लोगों को विचारों का आदान-प्रदान करने, चुनौतियों को समझने और मिलकर समाधान
विकसित करने का अवसर देता है। यह एक शक्तिशाली प्रेरक के रूप में भी काम करता है,

सफलता की तमाम कहानियों को सामने लाता है और इस विचार को और पुख्ता करता है कि
भारत में खेल महज़ विशिष्ट पदकों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसमें भागीदारी, समावेशिता
और राष्ट्र निर्माण भी शामिल है।
फिट इंडिया मूवमेंट जैसी पहल, अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का आयोजन और साइक्लिंग
प्रतियोगिताओं जैसी सामुदायिक गतिविधियों ने खेल के प्रति हमारे नज़रिए को नया रूप दिया
है। आज के वक्त में जोर “सभी के लिए खेल” के साथ-साथ, उच्चतम स्तर पर उत्कृष्टता पर
है। पदक जीतने की आकांक्षाएं और व्यापक भागीदारी अब अलग-अलग मुद्दे नहीं हैं, बल्कि वे
एक ही प्रक्रिया का हिस्सा हैं।
श्रीनगर में शिविर का आयोजन करने से इसका महत्व और भी बढ़ गया है। इस शहर की शांत
सुंदरता न केवल खेलों की विचारधारा के लिए एक मनोरम पृष्ठभूमि प्रदान करती है, बल्कि शांत
चिंतन का भाव भी देती है, जो सार्थक संवाद के लिए बेहद ज़रुरी है।
इस चिंतन शिविर का एक अहम केंद्र बिंदु श्रीनगर खेल संकल्प को अपनाना था। यह संकल्प
महज़ एक आशय का दस्तावेज़ नहीं, बल्कि यह एक एकीकृत ढांचा है, जो भारतीय खेल जगत
के सभी हितधारकों की आकांक्षाओं को एक साथ बांधता है। साझा लक्ष्यों, प्राथमिकताओं और
जिम्मेदारियों को स्पष्ट रूप से रेखांकित करके, यह एक ऐसा रोडमैप तैयार करता है, जो विखंडन
के बजाय सहयोग को प्रोत्साहित करता है।
श्रीनगर खेल संकल्प की असली ताकत विभिन्न भागीदारों—सरकारों, संघों, निजी क्षेत्र और
नागरिक समाज को एक मंच पर लाने की क्षमता में निहित है। यह इस विचारधारा को और
पुख्ता करता है कि भारत के खेल जगत का उत्थान अलग-थलग प्रयासों से नहीं हो सकता।
इसके बजाय, इसे एक समन्वित, सहयोगात्मक दृष्टिकोण से संचालित किया जाना चाहिए, जहां
संसाधनों, ज्ञान और विशेषज्ञता को एक साथ लाया जाए।
भारत को 2036 तक ओलंपिक खेलों में शीर्ष 10 देशों में शामिल होने की अपनी दीर्घकालिक
महत्वाकांक्षा को प्राप्त करने के लिए यह समन्वय बेहद महत्वपूर्ण है। विश्व स्तरीय एथलीट
तैयार करने के लिए न केवल प्रतिभा की ज़रुरत होती है, बल्कि एक सुचारू तंत्र की भी
आवश्यकता होती है, जिसमें जमीनी स्तर पर पहचान, वैज्ञानिक प्रशिक्षण, बुनियादी ढांचा, उत्कृष्ट
कोचिंग, प्रतिस्पर्धा का अनुभव और निरंतर वित्तीय एवं संस्थागत समर्थन शामिल हैं। संकल्प वही
रणनीतिक कड़ी है, जो इन सभी तत्वों को एक सुसंगत प्रणाली में जोड़ सकता है।

इन वार्ताओं से जो बात सबसे अधिक उभरकर सामने आई है, वह है इस व्यवस्था में मौजूद
आशावाद। सभी का यह मानना ​​है कि भारत का खेल भविष्य उज्ज्वल है और सहयोग से हम
एक सशक्त, समावेशी और उच्च प्रदर्शन वाली खेल संस्कृति का निर्माण कर सकते हैं।
चिंतन शिविर कई मायनों में एक अनूठा प्रयोग है, लेकिन यह पहले से ही सफल साबित हो रहा
है। यह संवाद, समन्वय और आपसी समझ के महत्व को दर्शाता है। भारत जैसे विविधतापूर्ण
देश के लिए, ऐसे मंच न केवल लाभकारी हैं, बल्कि आवश्यक भी हैं।
अगर हम वैश्विक खेल मंच पर अपनी महत्वाकांक्षाओं को सही मायने में साकार करना चाहते हैं,
तो इन संवादों का जारी रहना और इन्हें सामूहिक कार्रवाई से मदद मिलना भी ज़रुरी है। श्रीनगर
खेल संकल्प हमें वह दिशा प्रदान करता है। चिंतन शिविर हमें वह मंच प्रदान करता है। ये दोनों
मिलकर भारत को अपनी खेल संबंधी आकांक्षाओं को स्थायी ओलंपिक सफलता में बदलने के
लिए एक सशक्त आधार प्रदान करते हैं।
(लेखक भारतीय राष्ट्रीय बैडमिंटन टीम के मुख्य राष्ट्रीय कोच हैं)

डॉ. एवीएम पब्लिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल का दसवीं का परिणाम रहा शत-प्रतिशत

लुधियाना / सत्ता संदेश

डायरेक्टर राजीव कुमार लवली और प्रिंसिपल मनीषा गाबा ने विद्यार्थियों व स्टाफ को दी बधाई

लुधियाना, 12 मई: डॉ. ए.वी.एम पब्लिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल, नजदीक ईसा नगरी पुली का दसवीं कक्षा का परीक्षा परिणाम इस बार भी 100 प्रतिशत रहा। स्कूल के 107 विद्यार्थियों में से अनुष्का ने 96.15 प्रतिशत अंक प्राप्त कर मेरिट सूची में अपना नाम दर्ज कराया।

इस अवसर पर स्कूल के डायरेक्टर राजीव कुमार लवली और प्रिंसिपल मनीषा गाबा ने शानदार परिणामों के लिए सभी विद्यार्थियों और स्कूल स्टाफ को बधाई दी। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की सफलता में उनकी कड़ी मेहनत, शिक्षकों के मार्गदर्शन और अभिभावकों के सहयोग का अहम योगदान है। इस मौके पर स्कूल प्रबंधक समिति ने अनुष्का को पुरस्कार स्वरूप 11,000 रुपये की राशि भेंट की, जबकि अन्य सभी विद्यार्थियों को गुलाब के फूल देकर सम्मानित किया गया।

इस क्रम में, दसवीं कक्षा के परिणामों में अनुष्का ने 96.15 प्रतिशत अंक हासिल कर पहला स्थान प्राप्त किया। वहीं, दमनजोत कौर ने 94.30 प्रतिशत अंकों के साथ दूसरा और यशिका ने 90.46 प्रतिशत अंकों के साथ तीसरा स्थान हासिल किया। इसके अलावा, 10 विद्यार्थियों ने 80 से 90 प्रतिशत तक अंक प्राप्त किए, जबकि कई विद्यार्थियों ने 70 से 80 प्रतिशत तथा 24 विद्यार्थियों ने 60 से 70 प्रतिशत तक अंक हासिल कर सफलता प्राप्त की।

इस दौरान सभी स्टाफ सदस्यों ने शानदार परिणामों पर खुशी व्यक्त करते हुए विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इनमें सोनिया रानी, ईशिता कतियाल, नवनीत कौर, जसवंत कौर, रूबी वर्मा, रीमा, गुरप्रीत बजाज, कुलदीप कौर, वंदना सूद, हरजीत कौर, मुस्कान, हर्ष बाला और गुरलीन कौर भी शामिल रहे।

पंजाब केन्द्रीय विश्वविद्यालय के 11वें दीक्षांत समारोह में भारत के माननीय मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत होंगे मुख्य अतिथि

·       पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश माननीय न्यायमूर्ति शील नागू होंगे विशिष्ट अतिथि

·       कुलाधिपति प्रो. जगबीर सिंह करेंगे समारोह की अध्यक्षता

बठिंडा / सत्ता संदेश

बठिंडा, 12 मई: पंजाब केन्द्रीय विश्वविद्यालय का 11वां दीक्षांत समारोह 23 मई, 2026 को आयोजित किया जाएगा। भारत के माननीय मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में समारोह की गरिमा बढ़ाएंगे। पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश माननीय न्यायमूर्ति शील नागू समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के माननीय कुलाधिपति प्रो. जगबीर सिंह करेंगे।

कुलपति प्रो. राघवेन्द्र प्रसाद तिवारी गणमान्य अतिथियों, विश्वविद्यालय के प्राधिकारियों, संकाय सदस्यों, विद्यार्थियों, अभिभावकों तथा आमंत्रित अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति में विद्यार्थियों को उपाधियाँ प्रदान करेंगे।

यह दीक्षांत समारोह विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के शैक्षणिक जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव होगा, जिसमें स्नातकोत्तर एवं डॉक्टरेट कार्यक्रमों के विद्यार्थियों को उपाधियाँ प्रदान की जाएंगी।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने 11वें दीक्षांत समारोह के सफल आयोजन हेतु व्यापक तैयारियाँ शुरू कर दी हैं। इस समारोह में प्रख्यात शिक्षाविदों, न्यायिक क्षेत्र से जुड़ी गणमान्य हस्तियों, प्रशासकों एवं अन्य प्रतिष्ठित व्यक्तियों की सहभागिता रहेगी।

आधार ऐप के माध्यम से साझा किए गए आधार प्रमाण-पत्र पहचान सत्यापन के लिए वैध: यूआईडीएआई

चंडीगढ़/ सत्ता संदेश

चंडीगढ़, 12 मई 2026: भारत सरकार के विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) के क्षेत्रीय कार्यालय चंडीगढ़ ने सूचित किया है कि आधार ऐप के माध्यम से दिखाए गए, साझा किए गए और/या सत्यापित आधार प्रमाण-पत्र आधार नंबर धारक की पहचान स्थापित करने के लिए विधिक रूप से वैध हैं।

यूआईडीएआई द्वारा लॉन्च किया गया आधार ऐप आधार नंबर धारकों को मोबाइल उपकरणों के माध्यम से अपनी पहचान को सुरक्षित रूप से दिखाने, साझा करने और सत्यापित करने में सक्षम बनाता है। यह ऐप एंड्रॉयड और आईओएस प्लेटफॉर्म्स दोनों पर उपलब्ध है तथा निवासियों को पहचान सत्यापन का सुविधाजनक, पेपरलेस और सुरक्षित साधन प्रदान करता है।

आधार ऐप के माध्यम से ऑफलाइन सत्यापन चाहने वाली इकाई (ओवीएसई) के साथ पहचान विवरण साझा करते समय पूर्ण 12-अंकीय आधार नंबर हस्तांतरित नहीं किया जाता। निवासी अपनी आवश्यकता के अनुसार पूर्ण या आंशिक पहचान विवरण साझा करने का चयन कर सकते हैं, जिससे गोपनीयता और उपयोगकर्ता नियंत्रण में वृद्धि होती है।

यूआईडीएआई ने स्पष्ट किया है कि आधार ऐप के माध्यम से साझा किए गए आधार प्रमाण-पत्र आधार पत्र, ई-आधार, मास्क्ड ई-आधार, आधार पीवीसी कार्ड और एम-आधार जैसे अन्य स्वीकृत आधार रूपों के समान ही वैधता रखते हैं।

आधार को पहचान प्रमाण के रूप में स्वीकार करने वाले सभी मंत्रालयों, विभागों, राज्य सरकारों, स्वायत्त निकायों और अन्य एजेंसियों को आधार ऐप के माध्यम से साझा किए गए आधार प्रमाण-पत्रों को वैध पहचान प्रमाण के रूप में मान्यता देने तथा उचित निर्देश जारी करने का अनुरोध किया गया है।

क्षेत्रीय कार्यालय चंडीगढ़ ने पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू एवं कश्मीर, लद्दाख और चंडीगढ़ के निवासियों से डिजिटल आधार सत्यापन अपनाने का आग्रह किया है ताकि तेज, सुरक्षित और निर्बाध सेवा वितरण सुनिश्चित हो सके।

आज बटाला में जातीय जनगणना के फॉर्म में एससी समाज के प्रति अपमानजनक शब्दों के खिलाफ मजदूर मुक्ति मोर्चा आजाद पंजाब द्वारा केंद्र और पंजाब सरकार के खिलाफ रोष प्रदर्शन किया गया।

बटाला / सत्ता संदेश

इस मौके पर मांग की गई कि फॉर्म छापने वाले अधिकारियों के खिलाफ एससी/एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया जाए और मुख्यमंत्री मान एससी समाज से माफी मांगें। इस प्रदर्शन की अगुवाई जिला प्रधान सरूप सिंह चाहल कला और जिला सचिव राकेश कुमार गोपी ने की।

इस दौरान मजदूर मुक्ति मोर्चा आजाद के माझा ज़ोन के जनरल सचिव मनजीत राज बटाला ने संबोधित करते हुए कहा कि पंजाब सरकार द्वारा जनगणना 2026 के लिए जारी किए गए फॉर्म में जाति कॉलम भरने हेतु अनुसूचित जाति के लिए अपमानजनक और देश की माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रतिबंधित शब्द दर्ज किए गए हैं। साथ ही वाल्मीकि समुदाय और मजहबी सिखों के कॉलम में केवल “मजबी” लिखकर इस समाज को सिख धर्म से अलग करने की कोशिश की गई है।

उन्होंने कहा कि इससे मजहबी सिख समाज और वाल्मीकि समाज की भावनाओं को ठेस पहुंची है। सरकारी दस्तावेजों में ऐसे शब्दों का इस्तेमाल सत्ताधारी नेताओं और उच्च अधिकारियों की जातिवादी मानसिकता को उजागर करता है। उन्होंने कहा कि जातीय जनगणना के बाद आबादी के हिसाब से अधिकार मिलने तो दूर, पंजाब सरकार पहले ही अनुसूचित जाति समाज का अपमान कर रही है।

उन्होंने कहा कि सरकारी मशीनरी के कागजों में खुलेआम अपमानजनक शब्द लिखकर दलित समाज को जलील करने के मुद्दे पर विपक्षी राजनीतिक पार्टियों के नेताओं की भी जुबान बंद है। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर पंजाब की दलित संगठनों की संयुक्त बैठक में सरकार के खिलाफ तीखे आंदोलन का ऐलान किया गया है। इसके तहत 9 से 16 जून तक अर्थियां फूंकी जाएंगी और 1 जून को संगरूर में बड़ा एकत्र कर पंजाब की मान सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया जाएगा।

इस मौके पर मजदूर मुक्ति मोर्चा आजाद के सूबा नेता दलबीर सिंह भट्टी, सरजीत सिंह, बलकार सिंह, हीरा सिंह और कई अन्य साथियों ने भी हिस्सा लिया।

अमृतपाल सिंह मामले में डिस्चार्ज अर्जी पर सुनवाई, राज्य पक्ष ने जवाब दाखिल किया

पंजाब / सत्ता संदेश

FIR नंबर 39 मामले में अदालत ने अगली सुनवाई के लिए तारीख तय की

अमृतपाल सिंह से संबंधित FIR नंबर 39 मामले में आज सेशन कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। इस दौरान भाई अमृतपाल सिंह की पेशी के समय उनके कानूनी पक्ष की ओर से डिस्चार्ज एप्लीकेशन संबंधी कार्रवाई को आगे बढ़ाया गया।

केस के बारे में जानकारी देते हुए रीतू राज सिंह संधू ने बताया कि आज अदालत में वह अर्जी पेश की गई, जिसके जरिए भाई अमृतपाल सिंह को इस मामले से डिस्चार्ज करने की मांग की गई है। उन्होंने कहा कि आज की कार्रवाई के दौरान राज्य पक्ष की ओर से अपना जवाब अदालत में दाखिल किया गया।

एडवोकेट संधू ने बताया कि अदालत ने अब इस मामले में दलीलें सुनने के लिए अगली तारीख तय कर दी है। उनके मुताबिक कल डिस्चार्ज एप्लीकेशन पर दोनों पक्षों की ओर से विस्तार से बहस की जाएगी।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आज अदालत में मुख्य रूप से राज्य पक्ष द्वारा रिप्लाई फाइल करने की प्रक्रिया होनी थी, जिस कारण विस्तारपूर्वक दलीलें नहीं हो सकीं। अदालत ने सभी दस्तावेज रिकॉर्ड पर लेते हुए मामले की अगली सुनवाई कल तक के लिए स्थगित कर दी।

इस मामले को लेकर समर्थकों और कानूनी वर्गों में काफी चर्चा बनी हुई है। अब सभी की नजर अगली सुनवाई पर टिकी हुई है, जहां डिस्चार्ज एप्लीकेशन से संबंधित अहम दलीलें सामने आ सकती हैं।

इमान सिंह मान ने ‘वंदे मातरम’ और बेअदबी कानून को लेकर केंद्र और पंजाब सरकार की कड़ी आलोचना की।

पंजाब / सत्ता संदेश

अकाल तख्त साहिब पर इमान सिंह मान का कहना है कि सिखों पर मातृ पूजा थोपने का प्रयास किया जा रहा है।

श्री अकाल तक़्त साहिब पहुंचे शिरोमणि अकाली दल अमृतसर के कार्यकारी अध्यक्ष इमान सिंह मान ने मीडिया से बात करते हुए केंद्र सरकार, पंजाब सरकार और एसजीपीसी के कामकाज पर तीखे सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सबसे बड़ा घोर अपमान भारत देश द्वारा किया जा रहा है, जहाँ सिखों पर “वंदे मातरम” थोपा जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि इस गीत में देश को माता और देवी-देवताओं के रूप में प्रस्तुत किया गया है। जो सिख धर्म के मानदंडों के विरुद्ध है। इमान सिंह मान ने कहा कि “राष्ट्रीय स्मारकों के अपमान की रोकथाम” अधिनियम के तहत, यदि बच्चे “वंदे मातरम” नहीं गाते हैं, तो उन्हें तीन साल की कैद और जुर्माना हो सकता है। उन्होंने इसे सिख धर्म के विरुद्ध एक बड़ा कदम बताया। उन्होंने अनुच्छेद 25 का हवाला देते हुए कहा कि सिखों को पहले ही हिंदू के रूप में चित्रित किया जा चुका है, जबकि यह बात गुरु ग्रंथ साहिब में स्पष्ट रूप से लिखी है।— “न हिंदू, न मुसलमान।” ईमान सिंह मान ने कहा कि वह आज अकाल तक़्त साहिब के मुख्य ग्रंथी के पास यह स्पष्टीकरण लेने आए हैं कि सिखों के लिए माता की पूजा, मूर्ति पूजा और देवी-देवताओं की पूजा करना जायज़ है या नहीं।उन्होंने बेअदबी मामलों पर पंजाब सरकार के कानूनों और मुख्यमंत्री भगवंत मान की “शुकराना यात्रा” पर भी निशाना साधा।उन्होंने कहा कि सरकार ने समय पर एसजीपीसी चुनाव नहीं कराए और सिख गुरुद्वारा अधिनियम का उल्लंघन किया। उन्होंने कहा कि सरकार गुरुघरों के प्रबंधन में हस्तक्षेप कर रही है और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर कर रही है।इमान सिंह मान ने कहा कि सिख समुदाय को देवी-देवताओं की पूजा की ओर धकेलने का प्रयास किया जा रहा है, जिसका वह कड़ा विरोध करते हैं।