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चीन में बड़ा हादसा! किंगदाओ शिपयार्ड में मालवाहक जहाज में भीषण आग, 30 मौतों की आशंका

इंटरनेशनल डेस्क / सत्ता संदेश

चीन के किंगदाओ शिपयार्ड में एक विदेशी मालवाहक जहाज में भीषण आग लगने से हड़कंप मच गया। हादसे में करीब 30 लोगों के मारे जाने की आशंका जताई जा रही है, हालांकि चीन की ओर से अभी तक मृतकों की संख्या को लेकर कोई आधिकारिक आंकड़ा जारी नहीं किया गया है। राहत और बचाव कार्य लगातार जारी है और लापता लोगों की तलाश की जा रही है।

चीनी सरकारी मीडिया सीसीटीवी के मुताबिक, जिस मालवाहक जहाज में आग लगी, वह मरम्मत के लिए किंगदाओ शिपयार्ड में खड़ा था। इसी दौरान अचानक जहाज में आग भड़क उठी और देखते ही देखते उसका ऊपरी हिस्सा आग की चपेट में आ गया। आग पर काबू पाने के लिए फायर ब्रिगेड की कई टीमों को मौके पर भेजा गया है।

समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, आग लगने वाला जहाज लाइबेरिया के झंडे वाला मालवाहक पोत ‘ओशन मेलोडी’ है। जहाज का इस्तेमाल किस कंपनी या ऑपरेटर द्वारा किया जा रहा था, इस संबंध में फिलहाल विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। बताया जा रहा है कि जहाज को कुछ दिन पहले ही चीन के किंगदाओ लाया गया था और यहां इसकी मरम्मत का काम चल रहा था।

हादसे के बाद चीन के राष्ट्रपति भी सक्रिय हो गए हैं और राहत एवं बचाव अभियान को लेकर निर्देश दिए हैं। प्रधानमंत्री ली कियांग ने अधिकारियों को लापता लोगों की तलाश तेज करने और बचाव अभियान को पूरी गंभीरता से चलाने के निर्देश दिए हैं। आशंका है कि हादसे में प्रभावित लोगों में बड़ी संख्या शिपयार्ड में काम करने वाले कर्मचारियों की हो सकती है।

घटना के बाद शिपयार्ड के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई है। सामने आई तस्वीरों में मालवाहक जहाज का ऊपरी हिस्सा बुरी तरह जला हुआ दिखाई दे रहा है, जबकि आग बुझाने के लिए फायर ब्रिगेड की गाड़ियां शिपयार्ड के बाहर तैनात नजर आ रही हैं। चीनी शिपयार्ड के अधिकारियों ने स्थानीय मीडिया के सवालों का फिलहाल कोई जवाब नहीं दिया है।

किंगदाओ में चाइना स्टेट शिपबिल्डिंग कॉर्पोरेशन का प्रमुख जहाज निर्माण और मरम्मत परिसर मौजूद है। यहां व्यावसायिक जहाजों के निर्माण, पुनर्निर्माण और मरम्मत का काम किया जाता है। यह विशाल शिपयार्ड करीब 815 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है। फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता आग पर पूरी तरह काबू पाने के साथ-साथ लापता लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना और हादसे में प्रभावित लोगों की वास्तविक संख्या का पता लगाना है।

नेपाल में बाढ़ के बाद फिर कांपी धरती, 5.6 तीव्रता के भूकंप से दहशत

वर्ल्ड डेस्क / सत्ता संदेश

नेपाल में भीषण बाढ़ और भूस्खलन की त्रासदी के बीच अब एक बार फिर धरती कांपने से लोगों में दहशत फैल गई है। मंगलवार रात नेपाल में भूकंप के झटके महसूस किए गए। भारत के राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) के अनुसार, नेपाल में रात 9:38 बजे के करीब भूकंप दर्ज किया गया। NCS के रिकॉर्ड में इसकी तीव्रता 5.6 बताई गई है, जबकि शुरुआती रिपोर्टों में इसकी तीव्रता 5.0 बताई गई थी। भूकंप का केंद्र नेपाल में काठमांडू से करीब 200 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में था और इसकी गहराई लगभग 167.6 किलोमीटर दर्ज की गई।

नेपाल में यह भूकंप ऐसे समय आया है, जब देश अभी कुछ दिन पहले आई विनाशकारी बाढ़ और मलबे के सैलाब से उबरने की कोशिश कर रहा है। 26 अगस्त को नेपाल-चीन सीमा क्षेत्र में हुई इस प्राकृतिक आपदा में भारी तबाही हुई थी। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक नेपाल और तिब्बत में इस आपदा से 1,300 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों लोग अब भी लापता हैं। राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है।

भूकंप के झटकों का असर काठमांडू और आसपास के इलाकों में महसूस किए जाने की खबर है। हालांकि, मंगलवार रात आए भूकंप से किसी नई बड़ी तबाही या बड़े पैमाने पर जान-माल के नुकसान की तत्काल पुष्टि नहीं हुई है। नेपाल के लिए यह नया झटका इसलिए भी चिंता बढ़ाने वाला है क्योंकि देश के कई हिस्से अभी भी बाढ़ से प्रभावित हैं और बड़ी संख्या में लोग राहत एवं पुनर्वास पर निर्भर हैं।

बाढ़ के पीछे भूकंप नहीं, ग्लेशियर का मलबा और मलबे का बहाव

नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ को लेकर शुरुआत में यह आशंका जताई गई थी कि इसके पीछे भूकंप की भूमिका हो सकती है। लेकिन अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) की जांच में स्पष्ट किया गया कि उस समय दर्ज की गई भूकंपीय ऊर्जा वास्तव में ग्लेशियर के ढहने और उसके साथ हुए मलबे के बहाव से उत्पन्न हुई थी। यानी उस आपदा का मुख्य कारण पारंपरिक अर्थों में आया भूकंप नहीं था।

USGS के मुताबिक ग्लेशियर से जुड़े ढलान के अचानक टूटने के बाद बर्फ, चट्टान और मलबा तेजी से नीचे की ओर आया। इस मलबे ने पानी और नदी के बहाव को अपने साथ मिलाकर एक बेहद शक्तिशाली फ्लैश फ्लड का रूप ले लिया। यह मलबा और बाढ़ करीब 100 किलोमीटर तक नीचे की ओर फैली और रास्ते में मौजूद बस्तियों तथा महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा।

इस आपदा का सबसे ज्यादा असर नेपाल के रसुवा और आसपास के इलाकों के साथ-साथ चीन के तिब्बत क्षेत्र में भी हुआ। चीन-नेपाल सीमा पर स्थित ग्यिरोंग बॉर्डर पोर्ट भी भारी मलबे और पानी की चपेट में आ गया। सड़कें, पुल, इमारतें और पनबिजली परियोजनाओं से जुड़ा बुनियादी ढांचा बुरी तरह प्रभावित हुआ।

हजारों लोग अब भी लापता, बचाव अभियान जारी

नेपाल में राहत और बचाव एजेंसियां अब भी लापता लोगों की तलाश में जुटी हैं। बाढ़ के बाद कई इलाकों में सड़क और पुल टूटने से राहत टीमों को प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने में मुश्किलों का सामना करना पड़ा। पनबिजली परियोजनाओं से जुड़े कई कर्मचारी भी लापता हुए हैं।

हाल ही में एक सुरंग में नौ दिन तक फंसे दो नेपाली हाइड्रोपावर कर्मचारियों को जिंदा बचाया गया, जिससे बचाव अभियान में उम्मीद भी जगी है। हालांकि, हजारों लोगों के अब भी लापता होने के कारण परिजनों की चिंता बनी हुई है।

नेपाल इस समय एक साथ कई प्राकृतिक और मानवीय चुनौतियों का सामना कर रहा है। एक तरफ बाढ़ और मलबे से तबाह हुए इलाकों में राहत एवं पुनर्निर्माण का काम चल रहा है, तो दूसरी तरफ भूकंप के ताजा झटकों ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी है। हिमालयी क्षेत्र की भौगोलिक संवेदनशीलता को देखते हुए आने वाले दिनों में भी प्रशासन और राहत एजेंसियों की सतर्कता बेहद महत्वपूर्ण रहने वाली है।

BRICS में मोदी-पुतिन की मुलाकात, Su-57 पर रूस का बड़ा ऑफर; भारत में बनेगा फिफ्थ जेनरेशन फाइटर?

BRICS सम्मेलन में PM मोदी और पुतिन की मुलाकात के दौरान Su-57 फिफ्थ जेनरेशन फाइटर पर चर्चा की संभावना है। जानिए रूस का भारत में Su-57 उत्पादन और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर प्रस्ताव कितना अहम है।

वर्ल्ड डेस्क / सत्ता संदेश

BRICS सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच होने वाली मुलाकात पर भारत-रूस रक्षा सहयोग को लेकर खास नजर रहेगी। दोनों नेताओं की बातचीत में रूस के पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर जेट Su-57 को लेकर चर्चा अहम मुद्दा बन सकती है। सूत्रों के मुताबिक, रूस भारत के साथ Su-57 की तकनीक, स्थानीय उत्पादन और मेंटेनेंस क्षमता विकसित करने के विकल्प पर आगे बढ़ना चाहता है।

रूस की ओर से पहले भी भारत में Su-57 के निर्माण का प्रस्ताव दिए जाने की बात सामने आती रही है। संभावित प्रस्ताव में भारत में स्थानीय उत्पादन के साथ टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और विमान के रखरखाव से जुड़ा स्वदेशी इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने पर जोर हो सकता है। अगर यह बातचीत किसी ठोस समझौते की दिशा में बढ़ती है, तो इसे भारत-रूस रक्षा साझेदारी के लिहाज से महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है।

Su-57 क्यों है खास?

Su-57 रूस का प्रमुख पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ मल्टीरोल फाइटर है। इसे कम रडार दृश्यता, सुपरमैन्युवरेबिलिटी, एडवांस सेंसर और आंतरिक हथियार ले जाने जैसी क्षमताओं के लिए जाना जाता है।

रूस इसके एक्सपोर्ट वेरिएंट Su-57E को भी आगे बढ़ा रहा है। इसके लिए अलग-अलग एयर-टू-एयर और एयर-टू-ग्राउंड हथियारों के विकल्प पेश किए जा रहे हैं। इनमें RVV-MD2, RVV-SDM और RVV-BD जैसे एयर-टू-एयर मिसाइल सिस्टम के अलावा Kh-69 स्टील्थ क्रूज मिसाइल और Kh-38MLE जैसे हथियार शामिल बताए जाते हैं।

यानी भारत के लिए Su-57 केवल एक फाइटर जेट की खरीद तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसके साथ ट्रेनिंग, हथियार, मेंटेनेंस और उत्पादन क्षमता वाला एक व्यापक फिफ्थ जेनरेशन कॉम्बैट इकोसिस्टम विकसित करने का विकल्प भी हो सकता है।

भारत में बन सकता है Su-57

रूस के प्रस्ताव का सबसे अहम हिस्सा भारत में Su-57 का उत्पादन हो सकता है। इसके लिए भारत में मौजूद Su-30MKI से जुड़ी मैन्युफैक्चरिंग क्षमताओं और इंफ्रास्ट्रक्चर के इस्तेमाल की संभावना पर भी चर्चा होती रही है।

हालांकि, किसी भी संभावित डील में सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा Technology Transfer होगा। भारत लंबे समय से रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और स्वदेशी उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर जोर दे रहा है। ऐसे में अगर रूस महत्वपूर्ण तकनीकों के साथ भारत में उत्पादन की पर्याप्त क्षमता विकसित करने में मदद करता है, तो इससे भारतीय एयरोस्पेस और डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बड़ा फायदा मिल सकता है।

Su-75 भी रूस का दूसरा विकल्प

रूस के पास Su-57 के अलावा Su-75 Checkmate का विकल्प भी है। Su-75 को Su-57 की तुलना में छोटा, सिंगल-इंजन और अपेक्षाकृत कम लागत वाला पांचवीं पीढ़ी का फाइटर बनाने की दिशा में विकसित किया जा रहा है।

रूस के मुताबिक, Su-75 को करीब Mach 1.8 की अधिकतम गति और लगभग 7,400 किलोग्राम तक के कॉम्बैट लोड के लिए डिजाइन किया जा रहा है। हालांकि, Su-75 अभी विकास के चरण में है। इसके मुकाबले Su-57 एक operational platform है और इसका export version Su-57E भी रूस की पेशकश का हिस्सा है।

भारत के लिए क्यों अहम है Su-57?

भारत के सामने एक तरफ फाइटर स्क्वाड्रनों की संख्या को लेकर चुनौती है, वहीं दूसरी तरफ चीन की तेजी से बढ़ती वायु शक्ति भी रणनीतिक चिंता का विषय है। दूसरी ओर भारत का स्वदेशी Advanced Medium Combat Aircraft यानी AMCA अभी विकास और आगे चलकर उत्पादन की लंबी प्रक्रिया से गुजरेगा।

ऐसे में Su-57 भारत को AMCA के पूरी तरह operational होने से पहले पांचवीं पीढ़ी की लड़ाकू क्षमता हासिल करने का एक विकल्प दे सकता है।

हालांकि, भारत के लिए यह फैसला केवल किसी विदेशी फाइटर की खरीद का नहीं होगा। नई तकनीक, लागत, स्वदेशी उत्पादन, मेंटेनेंस, हथियार प्रणाली और भविष्य में अपग्रेड की क्षमता जैसे कई पहलुओं पर विचार करना होगा।

सबसे बड़ा सवाल: क्या होगा डील का मॉडल?

अगर BRICS सम्मेलन के दौरान Su-57 को लेकर बातचीत आगे बढ़ती है, तो सबसे बड़ा सवाल केवल विमान की कीमत नहीं बल्कि Technology Transfer, Make in India, Local Production, Engine Technology, Radar, Electronic Warfare और Maintenance Ecosystem को लेकर होगा।

भारत के लिए किसी भी संभावित समझौते में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि रूस कितनी महत्वपूर्ण तकनीक साझा करने के लिए तैयार है और भारत में उत्पादन की वास्तविक क्षमता किस स्तर तक विकसित की जा सकती है।

यही वजह है कि BRICS के दौरान मोदी-पुतिन मुलाकात पर नजर सिर्फ इस बात पर नहीं होगी कि दोनों नेताओं के बीच Su-57 को लेकर चर्चा होती है या नहीं, बल्कि इस पर भी होगी कि क्या रूस भारत को फिफ्थ जेनरेशन फाइटर के उत्पादन और तकनीकी क्षमता में बड़ी भूमिका देने के लिए तैयार है।

अगर भारत में Su-57 का उत्पादन और महत्वपूर्ण तकनीकों का हस्तांतरण किसी ठोस मॉडल के तहत संभव होता है, तो यह भारत-रूस रक्षा साझेदारी में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक बदलाव साबित हो सकता है।

Su-30MKI बनेगा और घातक! 300 KM तक मार करने वाली रूसी मिसाइल पर भारत की नजर

वर्ल्ड डेस्क / सत्ता संदेश

नई दिल्ली: भारत और रूस के बीच लंबे समय से चली आ रही रक्षा साझेदारी के बीच एक बड़ा प्रस्ताव सामने आया है। भारतीय वायुसेना के Su-30MKI लड़ाकू विमानों को रूस की लंबी दूरी की RVV-BD एयर-टू-एयर मिसाइल से लैस करने के प्रस्ताव पर रक्षा मंत्रालय स्तर पर विचार किया जा रहा है। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब नई दिल्ली में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मुलाकात पर दुनिया की नजर है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, RVV-BD को Su-30MKI के साथ इंटीग्रेट करने के लिए विमान में जरूरी तकनीकी बदलाव किए जाने का प्रस्ताव है। मिसाइल की बताई गई मारक क्षमता करीब 300 किलोमीटर तक है। अगर प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है और आगे चलकर इसका तकनीकी एकीकरण सफल रहता है, तो भारतीय वायुसेना की Beyond Visual Range यानी BVR एयर कॉम्बैट क्षमता को मजबूती मिल सकती है।

मोदी-पुतिन मुलाकात पर टिकी नजर

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के BRICS शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए भारत आने की पुष्टि क्रेमलिन की ओर से की गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच 11 सितंबर को द्विपक्षीय बैठक प्रस्तावित है। दोनों नेताओं के बीच रक्षा, व्यापार और रणनीतिक सहयोग सहित कई मुद्दों पर बातचीत होने की संभावना है।

भारत सरकार के अनुसार, मोदी और पुतिन ने 31 अगस्त को बिश्केक में हुई मुलाकात के दौरान राजनीतिक, आर्थिक, रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष और अन्य क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग की समीक्षा की थी। दोनों देशों ने अपनी विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को आगे मजबूत करने पर भी सहमति जताई थी।

क्या है RVV-BD की खासियत?

RVV-BD रूस की लंबी दूरी की एयर-टू-एयर मिसाइल है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इसके विभिन्न संस्करण लंबी दूरी के हवाई लक्ष्यों को निशाना बनाने के लिए विकसित किए गए हैं। करीब 300 किलोमीटर तक की बताई गई रेंज और बेहद तेज गति के कारण ऐसी मिसाइलें सामान्य लड़ाकू विमानों के साथ-साथ दुश्मन के हाई-वैल्यू एयरबोर्न प्लेटफॉर्म के खिलाफ भी महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।

इनमें Airborne Early Warning and Control यानी AEW&C/AWACS विमान, निगरानी विमान और अन्य महत्वपूर्ण हवाई प्लेटफॉर्म शामिल हो सकते हैं। हालांकि वास्तविक प्रभाव मिसाइल के अंतिम संस्करण, सेंसर नेटवर्क, फायर-कंट्रोल सिस्टम और विमान के साथ उसके तकनीकी एकीकरण पर निर्भर करेगा।

Su-30MKI की ताकत में होगा इजाफा

Su-30MKI भारतीय वायुसेना के प्रमुख लड़ाकू विमानों में शामिल है और 260 से अधिक विमान भारतीय बेड़े में बताए जाते हैं। भारत इस फ्लीट के आधुनिकीकरण पर भी काम कर रहा है, जिसमें एवियोनिक्स, सेंसर और अन्य प्रणालियों को अपग्रेड किया जा रहा है।

ऐसे में अगर RVV-BD का Su-30MKI के साथ सफल एकीकरण होता है, तो विमान की लंबी दूरी से हवाई लक्ष्यों को निशाना बनाने की क्षमता में महत्वपूर्ण बदलाव आ सकता है। खास तौर पर आधुनिक BVR युद्ध में लंबी दूरी की मिसाइलें किसी भी वायुसेना के लिए रणनीतिक बढ़त का अहम हिस्सा होती हैं।

रूस के साथ डील के साथ स्वदेशी विकल्प पर भी जोर

भारत रूस से लंबी दूरी की मिसाइल हासिल करने के विकल्प पर विचार कर रहा है, लेकिन इसके साथ ही स्वदेशी एयर-टू-एयर हथियारों के विकास पर भी जोर जारी है। DRDO की Astra मिसाइल श्रृंखला को लगातार विकसित किया जा रहा है और भविष्य में लंबी दूरी के स्वदेशी एयर-टू-एयर हथियार भारतीय वायुसेना की जरूरतों को पूरा करने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।

इसके अलावा भारत ने फ्रांस से Meteor एयर-टू-एयर मिसाइलों की खरीद भी की है। ऐसे में भारतीय वायुसेना की रणनीति में स्वदेशी और विदेशी दोनों तरह के लंबी दूरी के एयर-टू-एयर हथियारों का मिश्रण देखने को मिल रहा है।

क्या BRICS के दौरान आगे बढ़ेगा प्रस्ताव?

फिलहाल RVV-BD को लेकर किसी अंतिम डील या करार की घोषणा नहीं हुई है। इसे एक प्रस्ताव के तौर पर देखा जा रहा है, जिस पर तकनीकी, वित्तीय और रणनीतिक पहलुओं के आधार पर आगे फैसला होना है।

ऐसे में 11 सितंबर को होने वाली मोदी-पुतिन द्विपक्षीय बैठक और उसके बाद BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान भारत-रूस रक्षा सहयोग पर होने वाली चर्चा महत्वपूर्ण हो सकती है। हालांकि, मौजूदा रिपोर्टों में पुतिन-मोदी बातचीत के प्रमुख रक्षा मुद्दों में रूस के Su-57 लड़ाकू विमान से जुड़े तकनीकी सहयोग का भी उल्लेख किया गया है।

अगर RVV-BD प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है और इसके इंटीग्रेशन तथा सप्लाई से जुड़े मुद्दों पर सहमति बनती है, तो Su-30MKI की लंबी दूरी की BVR क्षमता को मजबूत करने की दिशा में यह एक अहम कदम साबित हो सकता है।

Russia Avalanche: 11 पर्वतारोहियों की मौत, 6 लापता, रेस्क्यू ऑपरेशन में मौसम बना बाधा

वर्ल्ड डेस्क / सत्ता संदेश

रूस के उत्तरी काकेशस क्षेत्र में एक दर्दनाक हिमस्खलन ने बड़ी तबाही मचा दी है। काबारडिनो-बाल्कारिया क्षेत्र के बेजेंगी गॉर्ज में आए भीषण हिमस्खलन की चपेट में आने से 11 पर्वतारोहियों की मौत हो गई, जबकि 6 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। हादसे में छह अन्य पर्वतारोही घायल हुए हैं।

स्थानीय इमरजेंसी सर्विस के अनुसार, खराब मौसम और दुर्गम पहाड़ी इलाका राहत एवं बचाव अभियान में बड़ी चुनौती बन रहा है। लगातार हिमस्खलन के खतरे के बीच बचाव दल लापता पर्वतारोहियों की तलाश में जुटे हुए हैं।

33 पर्वतारोहियों के दल को बनाया निशाना

हादसा रविवार शाम करीब 5 बजे स्थानीय समय के अनुसार बेजेंगी गॉर्ज में हुआ। बताया जा रहा है कि करीब 5,025 मीटर ऊंचे माउंट मिजिरगी से अचानक भारी मात्रा में बर्फ नीचे की ओर खिसकी और 33 पर्वतारोहियों के समूह को अपनी चपेट में ले लिया।

हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय बचाव दल को मौके पर भेजा गया। इसके अलावा एमआई-8 हेलीकॉप्टर की भी मदद ली गई। शुरुआती अभियान में तीन पर्वतारोहियों को सुरक्षित बाहर निकालकर नालचिक पहुंचाया गया।

इमरजेंसी सर्विस के मुताबिक सोमवार सुबह करीब 9 बजे तक 10 पर्वतारोही खुद पहाड़ से नीचे उतरने में सफल रहे थे। हालांकि छह लोगों का अभी तक कोई पता नहीं चल सका है।

50 से ज्यादा बचावकर्मी अभियान में जुटे

लापता पर्वतारोहियों की तलाश के लिए 50 से ज्यादा इमरजेंसी वर्कर्स को अभियान में लगाया गया है। लेकिन क्षेत्र में खराब मौसम, कठिन पहाड़ी परिस्थितियों और दोबारा हिमस्खलन की आशंका के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन बेहद जोखिम भरा बना हुआ है।

बचाव दल बेहद सावधानी के साथ आगे बढ़ रहा है ताकि राहतकर्मियों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जा सके।

इस साल पर्वतारोहियों की मौत की दूसरी बड़ी घटना

रूस में हुआ यह हादसा इस साल पर्वतारोहण से जुड़ी बड़ी त्रासदियों में एक है। इससे पहले 30 जुलाई को पाकिस्तान के गिलगित-बाल्टिस्तान स्थित ब्रॉड पीक पर भी हिमस्खलन ने कई पर्वतारोहियों की जान ले ली थी।

ब्रॉड पीक पर कैंप 2 और कैंप 3 के बीच हुए हादसे में कुल 10 पर्वतारोहियों की मौत हुई थी। मृतकों में विश्व प्रसिद्ध नेपाली पर्वतारोही निर्मल पुर्जा (निम्सदाई) भी शामिल थे।

इस अभियान में पांच नेपाली पर्वतारोही शामिल थे और दल का नेतृत्व निर्मल पुर्जा कर रहे थे। इसके अलावा पाकिस्तान, ओमान, अमेरिका और चीन के एक-एक पर्वतारोही भी दल का हिस्सा थे।

लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने एक बार फिर दुनिया के ऊंचे पर्वतीय इलाकों में बदलते मौसम और हिमस्खलन के गंभीर खतरे को उजागर किया है।

SCO Summit 2026 से पहले बिश्केक में भारत की गूंज, विशेष समूह से मिले पीएम मोदी

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस वक्त किर्गिस्तान में हैं। SCO समिट में हिस्सा लेने के लिए वो बिश्केक पहुंचे हैं। समिट के शुरू होने से पहले उन्होंने सोमवार को एक विशेष समूह से मुलाकात की, जो भारत से खास जुड़ाव रखते हैं. इस समूह में प्रवासी भारतीय समुदाय के प्रमुख लोग, पर्यावरण प्रेमी, योग उत्साही, शिक्षाविद, ITEC (भारतीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग) के पूर्व छात्र और शोधकर्ता शामिल थे।

प्रधानमंत्री ने इस मुलाकात की जानकारी एक्स पर साझा करते हुए अपनी खुशी जाहिर की. पीएम मोदी ने लिखा, ऐसे लोगों के समूह से मुलाकात हुई, जिनका भारत से गहरा जुड़ाव है. इनमें प्रवासी भारतीय समुदाय के प्रमुख लोग, पर्यावरण के प्रति उत्साही, योग प्रेमी, शिक्षाविद, ITEC के पूर्व छात्र, शोधकर्ता और अन्य लोग शामिल हैं. भारत के साथ इस तरह का लगातार जुड़ाव देखकर खुशी हुई।

प्रधानमंत्री से मिलने आए योग प्रेमियों में एक ऐसे साधक भी शामिल थे, जिन्होंने गुजरात के अहमदाबाद में आयोजित ‘वर्ल्ड योगासन चैंपियनशिप’ में हिस्सा लिया था. उन्होंने न सिर्फ इस वैश्विक प्रतियोगिता में भाग लिया, बल्कि शानदार प्रदर्शन करते हुए मेडल भी अपने नाम किया. प्रधानमंत्री ने भारत के प्रति उनके इस समर्पण और उपलब्धि की विशेष रूप से सराहना की. यह मुलाकात दर्शाती है कि दुनिया भर में फैले अलग-अलग क्षेत्रों के लोग आज भी भारत की संस्कृति, योग और शिक्षा व्यवस्था से कितने गहरे स्तर पर जुड़े हुए हैं.

किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में SCO समिट

प्रधानमंत्री मोदी SCO के 26वें शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने किर्गिस्तान के बिश्केक पहुंचे हैं. वो आज रूस, ईरान, आर्मेनिया और किर्गिस्तान के नेताओं के साथ द्विपक्षीय मुलाकात करेंगे. रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान के साथ मुलाकात होगी. दोनों नेताओं से उनकी मुलाकात कई मायनों में खास होने वाली हैं.

इसके अलावा एससीओ समिट में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी इस समिट में हिस्सा ले सकते हैं. वहीं चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी शामिल होंगे. पीएम मोदी और जिनपिंग के बीच अहम मीटिंग हो सकती है.

यह सम्मेलन SCO के गठन की 25वीं वर्षगांठ के ऐतिहासिक अवसर पर हो रहा है. एससीओ की स्थापना 2001 में हुई थी. बता दें कि भारत और पाकिस्तान 2017 में SCO के पूर्ण सदस्य बने. इसके बाद 2023 में ईरान और 2024 में बेलारूस इसमें शामिल हुए.

Russia-Ukraine War : रूस ने कीव पर मिसाइल से दागा निशाना, 17 लोगों की मौत

इंटरनेशनल डेस्क / सत्ता संदेश

रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध एक बार फिर बड़े हमले का गवाह बना है। बुधवार तड़के रूस ने यूक्रेन की राजधानी कीव और उसके आसपास के इलाकों पर मिसाइलों और ड्रोन से भीषण हमला किया। इस हमले में 17 लोगों की मौत हो गई, जबकि 44 लोग घायल हुए हैं। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने कहा कि यदि समय पर आधुनिक एयर डिफेंस मिसाइलें मिल जातीं तो कई लोगों की जान बचाई जा सकती थी। वहीं यूक्रेन ने भी रूस के भीतर ड्रोन हमले कर जवाब दिया है।

रूस की ओर से किए गए इस हमले में बैलिस्टिक मिसाइलों, अन्य मिसाइलों और बड़ी संख्या में ड्रोन का इस्तेमाल किया गया। यूक्रेनी अधिकारियों के मुताबिक हमला मुख्य रूप से कीव क्षेत्र पर केंद्रित था। दूसरी ओर रूस का दावा है कि उसने केवल उन ठिकानों को निशाना बनाया जो सैन्य गतिविधियों से जुड़े थे। दोनों देशों के दावे एक-दूसरे से अलग हैं और स्वतंत्र रूप से उनकी पुष्टि नहीं हो सकी है।

यूक्रेन ने किन जगहों को निशाना बनाए जाने का दावा किया?

जेलेंस्की ने कहा कि रूस ने गोदामों, रेलवे स्टेशन, बुनियादी ढांचे और नागरिक लॉजिस्टिक्स केंद्रों को निशाना बनाया, जिनका युद्ध से कोई संबंध नहीं था। उनके अनुसार एक ब्रूइंग कंपनी, निर्माण सामग्री के गोदाम और अन्य नागरिक सुविधाएं भी हमले में क्षतिग्रस्त हुईं। यूक्रेन की सबसे बड़ी निजी डाक सेवा नोवा पोश्टा ने भी बताया कि उसके एक सॉर्टिंग सेंटर को क्लस्टर हथियार से नष्ट कर दिया गया। जेलेंस्की ने अपने सहयोगी देशों से बैलिस्टिक मिसाइल रोधी सिस्टम और इंटरसेप्टर मिसाइलों की आपूर्ति तेज करने की अपील की।विज्ञापन

रूस ने हमले को लेकर क्या दावा किया?

रूस के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि उसके हमलों का निशाना केवल युद्ध से जुड़े परिवहन, लॉजिस्टिक्स और वितरण केंद्र थे। मंत्रालय का दावा है कि कीव क्षेत्र के कई केंद्रों में ड्रोन, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली और अन्य सैन्य सामग्री रखी गई थी। रूस ने यह भी कहा कि ओडेसा के दक्षिण में काला सागर में तीन मालवाहक जहाजों को निशाना बनाया गया, जिनके जरिए यूक्रेनी सेना के लिए हथियार और सैन्य उपकरण पहुंचाए जा रहे थे। यूक्रेन ने इस दावे पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

यूक्रेन ने रूस के अंदर कैसे किया जवाबी हमला?

यूक्रेन ने रूस के भीतर लंबी दूरी के ड्रोन हमले जारी रखे हैं। यूक्रेनी ड्रोन ने मॉस्को के दक्षिण में तुला क्षेत्र में रूस की बड़ी ऑनलाइन रिटेल कंपनी वाइल्डबेरीज के एक गोदाम को निशाना बनाया। यूक्रेन का कहना है कि इस कंपनी की सुविधाओं का इस्तेमाल सैन्य जरूरतों के लिए भी किया जा सकता है। वहीं रूस के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने रातभर में 16 क्षेत्रों, क्रीमिया और आजोव व काला सागर के ऊपर कुल 475 यूक्रेनी ड्रोन मार गिराए।

क्या युद्ध अब और लंबा खिंचने के संकेत दे रहा?

अमेरिका की अगुआई में शांति प्रयास फिलहाल आगे नहीं बढ़ पाए हैं। राष्ट्रपति जेलेंस्की बिना शर्त युद्धविराम की बात स्वीकार कर चुके हैं, लेकिन रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अब तक इसे मंजूरी नहीं दी है। इसी बीच दोनों देशों के बीच मिसाइल और ड्रोन हमले लगातार बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अब युद्ध ऐसे दौर में पहुंच गया है, जहां दोनों पक्ष एक-दूसरे के सैन्य और लॉजिस्टिक ढांचे को लगातार निशाना बना रहे हैं, जिससे आम नागरिक भी इसकी चपेट में आ रहे हैं।

जापान के कुमामोटो प्रांत में 7.1 तीव्रता का आया भूंकप, सुनामी की भी चेतावनी

जापान / सत्ता संदेश

जापान के दक्षिणी कुमामोटो प्रांत में मंगलवार को 7.1 तीव्रता का भूकंप आया। जापान मौसम विज्ञान एजेंसी ने यह जानकारी दी।

भूकंप के बाद जापान मौसम विज्ञान एजेंसी ने 1 मीटर (3.28 फीट) ऊंची लहरों वाली सुनामी की चेतावनी जारी की है। जापान सरकार ने दक्षिणी क्यूशू द्वीप के कुमामोटो, नागासाकी, कागोशिमा, फुकुओका, सागा, ओइता और मियाजाकी प्रांतों के लिए आपातकालीन भूकंप चेतावनी जारी की है। मौसम एजेंसी ने लोगों को समुद्र और तटों से दूर रहने की सलाह दी है।

दुनिया के सर्वाधिक भूकंप प्रभावित देशों में एक है जापान
जापान दुनिया के सबसे ज्यादा भूकंप प्रभावित देशों में से एक है। यहां कम से कम हर पांच मिनट में भूकंप के झटके महसूस किए जाते हैं। जापान प्रशांत महासागर के चारों ओर फैले ज्वालामुखियों और समुद्री गर्तों वाले क्षेत्र ‘रिंग ऑफ फायर’ में स्थित है। दुनिया में 6.0 या उससे ज्यादा तीव्रता वाले भूकंपों में से करीब 20 फीसदी जापान में आते हैं।


ट्रेन सेवाएं रोकी गईं
क्यूशू इलेक्ट्रिक पावर ने कहा कि भूकंप के बाद उसके सेंडाई और जेनकाई परमाणु ऊर्जा संयंत्रों में किसी तरह की गड़बड़ी की कोई सूचना नहीं है। ट्रेन संचालक जेआर क्यूशू ने बताया कि भूकंप के बाद उसने अपनी सेवाएं रोक दी हैं। इसमें हाई-स्पीड शिंकानसेन ट्रेनें भी शामिल हैं।


चीन के छिंगहाई प्रांत में 20 मिनट के भीतर आए दो भूकंप
इससे पहले, चीन के एक दूरदराज प्रांत में भी मंगलवार सुबह करीब 20 मिनट के अंतराल में दो भूकंप के झटके महसूस किए गए। 

अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (यूएसजीएस) ने बताया कि चीन के छिंगहाई प्रांत में सुबह 11 बजकर 16 मिनट और 11 बजकर 34 मिनट पर भूकंप के झटके महसूस किए गए। इनकी तीव्रता क्रमशः 5.7 और 5.8 थी। दोनों भूकंप जमीन से 10 किलोमीटर (6 मील) की गहराई पर आए। भूकंप से किसी के हताहत होने की तत्काल कोई सूचना नहीं है। चीन के उत्तर-पश्चिम में स्थित छिंगहाई प्रांत कम आबादी वाला क्षेत्र है और यहां अक्सर भूकंप आते रहते हैं। सरकारी प्रसारक सीसीटीवी के एक वीडियो में दिखाया गया कि जमीन हिलने के दौरान चट्टानों से धूल के बादल उठ रहे थे।

इन भूकंपों का असर पड़ोसी गांसू प्रांत के लानझोउ शहर में भी महसूस किया गया। यह इस इलाके के सबसे बड़े शहरों में से एक है। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में शहर के घरों के अंदर लगे लैंप हिलते हुए दिखाई दिए।

भारत-बेल्जियम की ‘स्ट्रैटिजक दोस्ती’, व्यापार से लेकर ऱक्षा संवाद तक हुई कई समझौते

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

भारत और बेल्जियम ने अपने आपसी संबंधों को नई गति देने के मकसद से पहली ‘भारत-बेल्जियम रणनीतिक वार्ता’ (Strategic Dialogue) आयोजित की। इस बैठक की सह-अध्यक्षता विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और बेल्जियम के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री मैक्सिम प्रेवोट ने की.दोनों देश अपने आपसी संबंधों को और अधिक संस्थागत, व्यापक और परिणाम-उन्मुख बनाने पर सहमत हुए।

यह रणनीतिक वार्ता, भारत-यूरोपीय संघ (EU) रणनीतिक साझेदारी के व्यापक ढांचे के भीतर नियमित राजनीतिक बातचीत के लिए एक नए मंच के रूप में काम करेगी. बैठक में व्यापार और निवेश, ग्रीन एनर्जी ट्रांज़िशन (हरित ऊर्जा की ओर बदलाव), इनोवेशन और टेक्नोलॉजी, कनेक्टिविटी, रक्षा और सुरक्षा, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर सहयोग और लोगों के बीच आपसी संबंधों जैसे प्रमुख क्षेत्रों में साझेदारी को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया.

साझेदारी में बेल्जियम का एक खास स्थान

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा कि यूरोप के साथ भारत की साझेदारी में बेल्जियम का एक खास स्थान है और यह रणनीतिक वार्ता दोनों देशों की पूरक ताकतों को ठोस नतीजों में बदलने का जरिया बनेगी. वहीं, बेल्जियम के विदेश मंत्री मैक्सिम प्रेवोट ने कहा कि मार्च 2025 में होने वाला बेल्जियम का आर्थिक मिशन दोनों देशों के बीच मजबूत आर्थिक संबंधों का प्रमाण है. उन्होंने कहा कि व्यापार, निवेश और इनोवेशन भविष्य के सहयोग के लिए एक मजबूत आधार बनाते हैं.

‘भारत-EU बिजनेस फोरम’ का भी आयोजन

दोनों देश नियमित उच्च-स्तरीय बैठकें करने पर सहमत हुए. साथ ही, 2026 के लिए प्रस्तावित उच्च-स्तरीय यात्राओं के दौरान विभिन्न प्रमुख पहलों को आगे बढ़ाने का भी निर्णय लिया गया. रणनीतिक वार्ता के साथ-साथ ‘भारत-EU बिजनेस फोरम’ का भी आयोजन किया गया, जिसमें भारत, बेल्जियम और अन्य यूरोपीय देशों के उद्योग प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया.

दोनों देशों के इन नेताओं ने किया प्रतिनिधित्व

भारत का प्रतिनिधित्व विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर, वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने किया. बेल्जियम का प्रतिनिधित्व फ्लैंडर्स के मंत्री-अध्यक्ष (Minister-President) मैथियास डाइपेंडेल और वालोनिया के मंत्री-अध्यक्ष एड्रियन डोलिमोंट ने किया.

भारत-EU मुक्त व्यापार समझौते पर फोकस

बिजनेस फोरम में भारत-EU मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के संदर्भ में व्यापार और निवेश के नए अवसरों पर विस्तृत चर्चा हुई. बैठक के समापन पर, भारत और बेल्जियम ने भविष्य-उन्मुख, महत्वाकांक्षी और मजबूत रणनीतिक साझेदारी के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और बदलते वैश्विक परिदृश्य के बीच आपसी संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का संकल्प लिया.

भारत–ब्रिटेन FTA को बढ़ावा, हरियाणा से ब्रिटेन के लिए फास्टनर्स की पहली शिपमेंट रवाना

हरियाणा / सत्ता संदेश

भारत–ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौते को मिली नई उड़ान, यूपीएस ने हरियाणा से फास्टनर्स की पहली शिपमेंट ब्रिटेन के लिए रवाना

भारत–ब्रिटेन के बीच हुए ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के बाद हरियाणा से फास्टनर्स की पहली निर्यात शिपमेंट आज यूपीएस से ब्रिटेन के लिए रवाना की गई। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) के अधिकारियों एवं यूपीएस के अधिकारियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम में डीजीएफटी की सहायक निदेशक हेमलता हेड़ाऊ, सहायक निदेशक हीरा लाला, अनुभाग प्रमुख योगेंद्र मीणा तथा यूपीएस के निदेशक अमित जैन विशेष रूप से उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के दौरान आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए अधिकारियों ने कहा कि भारत–ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौता भारतीय विनिर्माण और निर्यात क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। इससे विशेष रूप से एमएसएमई एवं विनिर्माण उद्योगों को वैश्विक बाजारों में नई संभावनाएँ प्राप्त होंगी तथा भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता और अधिक सशक्त होगी।

उन्होंने कहा कि इस समझौते से हरियाणा सहित पूरे देश के उद्योगों को निर्यात बढ़ाने का महत्वपूर्ण अवसर मिलेगा। फास्टनर उद्योग के लिए यह एक नए युग की शुरुआत है, जो ‘मेक इन इंडिया’, ‘आत्मनिर्भर भारत’ और भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाने के राष्ट्रीय संकल्प को और अधिक मजबूती प्रदान करेगा।

इस अवसर पर यूपीएस के निदेशक अमित जैन ने कहा कि कंपनी के लिए यह अत्यंत गौरव का क्षण है कि भारत–ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौते के बाद हरियाणा से पहली फास्टनर्स निर्यात शिपमेंट उनके संसथान से ब्रिटेन के लिए रवाना की जा रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह समझौता भारतीय उद्योगों के लिए नए व्यापारिक अवसरों के द्वार खोलेगा तथा देश के निर्यात को नई गति प्रदान करेगा।

कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों ने संयुक्त रूप से हरी झंडी दिखाकर फास्टनर्स की पहली निर्यात शिपमेंट को ब्रिटेन के लिए रवाना किया। उपस्थित सभी अतिथियों ने इस उपलब्धि को भारतीय उद्योग, निर्यात क्षेत्र और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया। इस अवसर पर राजीव जैन, सन्नी निझावन , बलजीत सिंह, रविंदर , शिमला रानी आदि मौजूद रहे |