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जापान के कुमामोटो प्रांत में 7.1 तीव्रता का आया भूंकप, सुनामी की भी चेतावनी

जापान / सत्ता संदेश

जापान के दक्षिणी कुमामोटो प्रांत में मंगलवार को 7.1 तीव्रता का भूकंप आया। जापान मौसम विज्ञान एजेंसी ने यह जानकारी दी।

भूकंप के बाद जापान मौसम विज्ञान एजेंसी ने 1 मीटर (3.28 फीट) ऊंची लहरों वाली सुनामी की चेतावनी जारी की है। जापान सरकार ने दक्षिणी क्यूशू द्वीप के कुमामोटो, नागासाकी, कागोशिमा, फुकुओका, सागा, ओइता और मियाजाकी प्रांतों के लिए आपातकालीन भूकंप चेतावनी जारी की है। मौसम एजेंसी ने लोगों को समुद्र और तटों से दूर रहने की सलाह दी है।

दुनिया के सर्वाधिक भूकंप प्रभावित देशों में एक है जापान
जापान दुनिया के सबसे ज्यादा भूकंप प्रभावित देशों में से एक है। यहां कम से कम हर पांच मिनट में भूकंप के झटके महसूस किए जाते हैं। जापान प्रशांत महासागर के चारों ओर फैले ज्वालामुखियों और समुद्री गर्तों वाले क्षेत्र ‘रिंग ऑफ फायर’ में स्थित है। दुनिया में 6.0 या उससे ज्यादा तीव्रता वाले भूकंपों में से करीब 20 फीसदी जापान में आते हैं।


ट्रेन सेवाएं रोकी गईं
क्यूशू इलेक्ट्रिक पावर ने कहा कि भूकंप के बाद उसके सेंडाई और जेनकाई परमाणु ऊर्जा संयंत्रों में किसी तरह की गड़बड़ी की कोई सूचना नहीं है। ट्रेन संचालक जेआर क्यूशू ने बताया कि भूकंप के बाद उसने अपनी सेवाएं रोक दी हैं। इसमें हाई-स्पीड शिंकानसेन ट्रेनें भी शामिल हैं।


चीन के छिंगहाई प्रांत में 20 मिनट के भीतर आए दो भूकंप
इससे पहले, चीन के एक दूरदराज प्रांत में भी मंगलवार सुबह करीब 20 मिनट के अंतराल में दो भूकंप के झटके महसूस किए गए। 

अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (यूएसजीएस) ने बताया कि चीन के छिंगहाई प्रांत में सुबह 11 बजकर 16 मिनट और 11 बजकर 34 मिनट पर भूकंप के झटके महसूस किए गए। इनकी तीव्रता क्रमशः 5.7 और 5.8 थी। दोनों भूकंप जमीन से 10 किलोमीटर (6 मील) की गहराई पर आए। भूकंप से किसी के हताहत होने की तत्काल कोई सूचना नहीं है। चीन के उत्तर-पश्चिम में स्थित छिंगहाई प्रांत कम आबादी वाला क्षेत्र है और यहां अक्सर भूकंप आते रहते हैं। सरकारी प्रसारक सीसीटीवी के एक वीडियो में दिखाया गया कि जमीन हिलने के दौरान चट्टानों से धूल के बादल उठ रहे थे।

इन भूकंपों का असर पड़ोसी गांसू प्रांत के लानझोउ शहर में भी महसूस किया गया। यह इस इलाके के सबसे बड़े शहरों में से एक है। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में शहर के घरों के अंदर लगे लैंप हिलते हुए दिखाई दिए।

भारत-बेल्जियम की ‘स्ट्रैटिजक दोस्ती’, व्यापार से लेकर ऱक्षा संवाद तक हुई कई समझौते

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

भारत और बेल्जियम ने अपने आपसी संबंधों को नई गति देने के मकसद से पहली ‘भारत-बेल्जियम रणनीतिक वार्ता’ (Strategic Dialogue) आयोजित की। इस बैठक की सह-अध्यक्षता विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और बेल्जियम के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री मैक्सिम प्रेवोट ने की.दोनों देश अपने आपसी संबंधों को और अधिक संस्थागत, व्यापक और परिणाम-उन्मुख बनाने पर सहमत हुए।

यह रणनीतिक वार्ता, भारत-यूरोपीय संघ (EU) रणनीतिक साझेदारी के व्यापक ढांचे के भीतर नियमित राजनीतिक बातचीत के लिए एक नए मंच के रूप में काम करेगी. बैठक में व्यापार और निवेश, ग्रीन एनर्जी ट्रांज़िशन (हरित ऊर्जा की ओर बदलाव), इनोवेशन और टेक्नोलॉजी, कनेक्टिविटी, रक्षा और सुरक्षा, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर सहयोग और लोगों के बीच आपसी संबंधों जैसे प्रमुख क्षेत्रों में साझेदारी को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया.

साझेदारी में बेल्जियम का एक खास स्थान

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा कि यूरोप के साथ भारत की साझेदारी में बेल्जियम का एक खास स्थान है और यह रणनीतिक वार्ता दोनों देशों की पूरक ताकतों को ठोस नतीजों में बदलने का जरिया बनेगी. वहीं, बेल्जियम के विदेश मंत्री मैक्सिम प्रेवोट ने कहा कि मार्च 2025 में होने वाला बेल्जियम का आर्थिक मिशन दोनों देशों के बीच मजबूत आर्थिक संबंधों का प्रमाण है. उन्होंने कहा कि व्यापार, निवेश और इनोवेशन भविष्य के सहयोग के लिए एक मजबूत आधार बनाते हैं.

‘भारत-EU बिजनेस फोरम’ का भी आयोजन

दोनों देश नियमित उच्च-स्तरीय बैठकें करने पर सहमत हुए. साथ ही, 2026 के लिए प्रस्तावित उच्च-स्तरीय यात्राओं के दौरान विभिन्न प्रमुख पहलों को आगे बढ़ाने का भी निर्णय लिया गया. रणनीतिक वार्ता के साथ-साथ ‘भारत-EU बिजनेस फोरम’ का भी आयोजन किया गया, जिसमें भारत, बेल्जियम और अन्य यूरोपीय देशों के उद्योग प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया.

दोनों देशों के इन नेताओं ने किया प्रतिनिधित्व

भारत का प्रतिनिधित्व विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर, वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने किया. बेल्जियम का प्रतिनिधित्व फ्लैंडर्स के मंत्री-अध्यक्ष (Minister-President) मैथियास डाइपेंडेल और वालोनिया के मंत्री-अध्यक्ष एड्रियन डोलिमोंट ने किया.

भारत-EU मुक्त व्यापार समझौते पर फोकस

बिजनेस फोरम में भारत-EU मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के संदर्भ में व्यापार और निवेश के नए अवसरों पर विस्तृत चर्चा हुई. बैठक के समापन पर, भारत और बेल्जियम ने भविष्य-उन्मुख, महत्वाकांक्षी और मजबूत रणनीतिक साझेदारी के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और बदलते वैश्विक परिदृश्य के बीच आपसी संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का संकल्प लिया.

भारत–ब्रिटेन FTA को बढ़ावा, हरियाणा से ब्रिटेन के लिए फास्टनर्स की पहली शिपमेंट रवाना

हरियाणा / सत्ता संदेश

भारत–ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौते को मिली नई उड़ान, यूपीएस ने हरियाणा से फास्टनर्स की पहली शिपमेंट ब्रिटेन के लिए रवाना

भारत–ब्रिटेन के बीच हुए ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के बाद हरियाणा से फास्टनर्स की पहली निर्यात शिपमेंट आज यूपीएस से ब्रिटेन के लिए रवाना की गई। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) के अधिकारियों एवं यूपीएस के अधिकारियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम में डीजीएफटी की सहायक निदेशक हेमलता हेड़ाऊ, सहायक निदेशक हीरा लाला, अनुभाग प्रमुख योगेंद्र मीणा तथा यूपीएस के निदेशक अमित जैन विशेष रूप से उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के दौरान आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए अधिकारियों ने कहा कि भारत–ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौता भारतीय विनिर्माण और निर्यात क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। इससे विशेष रूप से एमएसएमई एवं विनिर्माण उद्योगों को वैश्विक बाजारों में नई संभावनाएँ प्राप्त होंगी तथा भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता और अधिक सशक्त होगी।

उन्होंने कहा कि इस समझौते से हरियाणा सहित पूरे देश के उद्योगों को निर्यात बढ़ाने का महत्वपूर्ण अवसर मिलेगा। फास्टनर उद्योग के लिए यह एक नए युग की शुरुआत है, जो ‘मेक इन इंडिया’, ‘आत्मनिर्भर भारत’ और भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाने के राष्ट्रीय संकल्प को और अधिक मजबूती प्रदान करेगा।

इस अवसर पर यूपीएस के निदेशक अमित जैन ने कहा कि कंपनी के लिए यह अत्यंत गौरव का क्षण है कि भारत–ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौते के बाद हरियाणा से पहली फास्टनर्स निर्यात शिपमेंट उनके संसथान से ब्रिटेन के लिए रवाना की जा रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह समझौता भारतीय उद्योगों के लिए नए व्यापारिक अवसरों के द्वार खोलेगा तथा देश के निर्यात को नई गति प्रदान करेगा।

कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों ने संयुक्त रूप से हरी झंडी दिखाकर फास्टनर्स की पहली निर्यात शिपमेंट को ब्रिटेन के लिए रवाना किया। उपस्थित सभी अतिथियों ने इस उपलब्धि को भारतीय उद्योग, निर्यात क्षेत्र और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया। इस अवसर पर राजीव जैन, सन्नी निझावन , बलजीत सिंह, रविंदर , शिमला रानी आदि मौजूद रहे |

India-UK CETA: भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौता आज से लागू, 99% भारतीय निर्यात पर होगा शून्य शुल्क

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (सीईटीए) आज से लागू हो गया है। इसे पिछले कुछ सालों में भारत के सबसे बड़े मुक्त व्यापार समझौतों में से एक माना जा रहा है। सरकार का दावा है कि इससे किसानों, श्रमिकों, एमएसएमई, निर्यातकों और सेवा क्षेत्र को जबरदस्त लाभ मिलेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार के कार्यकाल में लागू होने वाला यह छठा मुक्त व्यापार समझौता है। इससे पहले भारत मॉरीशस, यूएई, ऑस्ट्रेलिया, ईएफटीए (यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ) और ओमान के साथ ऐसे समझौते लागू कर चुका है।

भारत-यूके सीईटीए केवल टैरिफ घटाने वाला समझौता नहीं, बल्कि व्यापार, निवेश, सेवाओं और रोजगार के नए अवसरों का व्यापक ढांचा है। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल के अनुसार, यह भारत के व्यापारिक इतिहास का एक अहम पड़ाव है। इससे टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाएं कम होंगी। भारतीय उद्योगों की वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और किसानों, उद्योगों, महिला उद्यमियों, स्टार्टअप तथा युवा पेशेवरों को नए अवसर मिलेंगे।

भारत को ये होंगे लाभ
इस करार से भारत के करीब 99 फीसदी निर्यात को ब्रिटिश बाजार में शुल्क मुक्त पहुंच मिलेगी। इसके अलावा ब्रिटेन से आने वाले कई उत्पादों पर आयात शुल्क घटाया जाएगा। इससे कीमतों में कमी आएगी। पहली बार ब्रिटेन की कंपनियों को भारत सरकार की करीब 40 हजार उच्च मूल्य वाली निविदाओं में भाग लेने का अवसर मिलेगा। परिवहन, हरित ऊर्जा और बुनियादी ढांचा क्षेत्रों में कामकाज की गुणवत्ता में सुधार होगा।

क्या है सीईटीए?
सीईटीए के तहत भारत और ब्रिटेन सैकड़ों उत्पादों पर आयात शुल्क कम या समाप्त करेंगे। इसके अलावा डिजिटल व्यापार, सरकारी खरीद, एमएसएमई, निवेश, बौद्धिक संपदा, श्रम, पर्यावरण और सेवा क्षेत्र से जुड़े नियमों को भी सरल बनाया गया है। समझौते में कुल 30 अध्याय शामिल हैं, जिससे इसे भारत का सबसे व्यापक एफटीए माना जा रहा है।

स्कॉच व्हिस्की के दाम घटेंगे
स्कॉच व्हिस्की समेत कई प्रीमियम विदेशी शराबों पर भी आयात शुल्क में कटौती होगी। स्कॉच व्हिस्की पर मौजूदा 150 फीसदी शुल्क पहले चरण में 75 फीसदी और दस वर्षों में घटकर 40 फीसदी रह जाएगा।

संवेदनशील उत्पाद समझौते से बाहर
भारत ने सेब, अखरोट, व्हे, कुछ बीज, सोने की ईंटों व स्मार्टफोन जैसे संवेदनशील उत्पादों पर कोई शुल्क रियायत नहीं दी है। वहीं ब्रिटेन ने भी चावल, चीनी व कुछ मांस उत्पादों को समझौते के दायरे से बाहर रखा है।

आईटी कंपनियों के लिए बड़ी राहत
समझौते के साथ लागू हुए डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन के तहत भारत से ब्रिटेन जाने वाले कर्मचारियों और उनके नियोक्ताओं को पांच वर्ष तक ब्रिटेन में सोशल सिक्योरिटी योगदान नहीं देना होगा।

सबसे बड़ा बदलाव ऑटो सेक्टर में
यह पहला मौका है, जब भारत ने किसी एफटीए में ब्रिटेन में बनी पूरी तरह तैयार कारों और ट्रकों पर इतनी बड़ी सीमा शुल्क रियायत दी है। पूरी तरह बनी कारों पर आयात शुल्क 110 फीसदी से चरणबद्ध तरीके से घटाकर 10 फीसदी किया जाएगा। पेट्रोल और डीजल कारों को शुरुआत से ही रियायत मिलेगी।

इलेक्ट्रिक, हाइब्रिड और हाइड्रोजन कारों को छठे वर्ष से रियायत मिलेगी, ताकि भारतीय ईवी उद्योग को शुरुआती पांच वर्षों तक सुरक्षा मिल सके। पहले 15 वर्षों में रियायती शुल्क पर 3.78 लाख ब्रिटिश यात्री वाहनों के आयात की अनुमति होगी। ट्रकों पर शुल्क 44 फीसदी से घटकर पांचवें वर्ष तक 8.8 फीसदी हो जाएगा।

किन उद्योगों को फायदा?
रेडीमेड गारमेंट और टेक्सटाइल, फुटवियर, कालीन उद्योग, प्रोसेस्ड फूड, अनाज, फल और सब्जियां, मसाले, मछली और समुद्री उत्पाद, मांस एवं प्रोसेस्ड फूड, ऑटोमोबाइल एवं ऑटो पार्ट्स, मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक्स, सिरेमिक, ग्लास, सीमेंट एवं स्टोन उत्पाद

क्या हो सकता है सस्ता?
सैल्मन मछली, लैम्ब (भेड़ का मांस), मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद, चॉकलेट, सॉफ्ट ड्रिंक्स, कॉस्मेटिक्स, साबुन, परफ्यूम, शेविंग क्रीम, नेल पॉलिश

भारत के रक्षा सचिव औऱ जापान के उप ऱक्षामंत्री ने टोक्यों में 8वें रक्षा नीति संवाद का किया आयोजन

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

भारत और जापान ने सोमवार को जापान के टोक्यो में 8वें रक्षा नीति संवाद का आयोजन किया। भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने किया और जापानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व अंतर्राष्ट्रीय मामलों के रक्षा उप मंत्री कानो कोजी ने किया। दोनों पक्षों ने पिछले रक्षा नीति वार्ता सम्मेलन के बाद से द्विपक्षीय रक्षा सहयोग में हुई महत्वपूर्ण प्रगति की समीक्षा की और दोनों देशों के बीच विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी को और मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की।

दोनों देशों ने क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा परिवेश पर व्यापक चर्चा की और पारस्परिक हित के मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया। इस संवाद में द्विपक्षीय रक्षा गतिविधियों के संपूर्ण दायरे की समीक्षा की गई, जिसमें सैन्य आदान-प्रदान, संयुक्त मुख्यालयों के बीच सहयोग, समुद्री सहयोग, रक्षा अभ्यास, क्षमता विकास, समुद्री प्रौद्योगिकी सहित रक्षा उपकरण और प्रौद्योगिकी सहयोग को बढ़ावा देना शामिल है।

दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों ने रक्षा औद्योगिक सहयोग, तकनीकी नवाचार, साइबर सुरक्षा, अंतरिक्ष और साझा रणनीतिक हित के अन्य क्षेत्रों सहित उभरते क्षेत्रों में सहयोग को और गहरा करने के तरीकों पर भी चर्चा की। दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा मुद्दों पर भारत और जापान के बीच बढ़ते तालमेल पर संतोष व्यक्त किया और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में मिलकर काम करना जारी रखने पर सहमति जताई।

रक्षा सचिव ने रक्षा क्षेत्र में भारत के साथ जापान की निरंतर भागीदारी की सराहना की और भारत-जापान विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी के ढांचे के तहत व्यावहारिक सहयोग को मजबूत करने के महत्व पर जोर दिया। कानो कोजी ने प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में भारत के साथ रक्षा संबंधों को बढ़ावा देने की जापान की प्रतिबद्धता को दोहराया।

रक्षा सचिव ने टोक्यो में आत्मरक्षा बलों के स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित करके अपनी यात्रा की शुरुआत की और राष्ट्र की सेवा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले जापान के आत्मरक्षा बलों के सदस्यों को श्रद्धांजलि दी।

इस यात्रा ने भारत और जापान के बीच बढ़ते रक्षा संबंधों, आपसी सम्मान और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता के प्रति साझा प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।

भारत-नेपाल के बीच काठमांडू में होगी बैठक, ऊर्जा सहयोग पर करेंगे चर्चा

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

भारत और नेपाल के बीच ऊर्जा सहयोग को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से इस हफ्ते काठमांडू में संयुक्त कार्य समूह और संयुक्त संचालन समिति की बैठकें आयोजित की जाएंगी. एक अधिकारी ने रविवार को जानकारी दी कि ये बैठकें 14 और 15 जुलाई को होंगी. नेपाल के ऊर्जा, जल संसाधन एवं सिंचाई मंत्रालय के संयुक्त प्रवक्ता संदीप कुमार देव ने बताया कि सचिव स्तर की इन बैठकों में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व भारत के ऊर्जा सचिव पंकज अग्रवाल करेंगे, जबकि नेपाली प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई ऊर्जा, जल संसाधन एवं सिंचाई मंत्रालय की सचिव सरिता दवाड़ी करेंगी.

उन्होंने बताया कि संयुक्त कार्य समूह की बैठक में नेपाल के ऊर्जा, जल संसाधन एवं सिंचाई मंत्रालय के संयुक्त सचिव और भारत के ऊर्जा मंत्रालय के उनके समकक्ष अधिकारी शामिल होंगे. वहीं, संयुक्त संचालन समिति की बैठक में दोनों देशों के संबंधित विभागों के सचिव हिस्सा लेंगे.

काठमांडू में उर्जा सहयोग के मुद्दे पर बैठकें

दरअसल एक अधिकारी ने बताया कि भारत और नेपाल इस हफ्ते काठमांडू में उर्जा सहयोग के मुद्दे पर ‘जॉइंट वर्किंग ग्रुप’ और ‘जॉइंट स्टीयरिंग कमेटी’ की बैठकें करने वाले हैं. ये बैठकें 14 और 15 जुलाई को होंगी. नेपाल के मंत्रालय के संयुक्त प्रवक्ता संदीप कुमार देव के अनुसार, पावर सेक्रेटरी स्तर की बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व भारत के पावर सेक्रेटरी पंकज अग्रवाल करेंगे, जबकि नेपाली प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व ऊर्जा और जल संसाधन मंत्रालय की सेक्रेटरी सरिता दवाडी करेंगी.

दोनों देशों के उर्जा विभागों के सचिव होंगे शामिल

‘जॉइंट वर्किंग ग्रुप’ की बैठक में नेपाल के ऊर्जा, जल संसाधन और सिंचाई मंत्रालय के संयुक्त सचिव और भारतीय ऊर्जा मंत्रालय के उनके समकक्ष अधिकारी शामिल होंगे, जबकि ‘जॉइंट स्टीयरिंग कमेटी’ की बैठक में दोनों देशों के संबंधित विभागों के सचिव शामिल होंगे. अधिकारी ने बताया कि इन बैठकों में नेपाल और भारत के बीच एनर्जी सहयोग के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की जाएगी.

रिन्यूएबल एनर्जी में सहयोग के लिए MoU पर हस्ताक्षर

इससे पहले, जनवरी में विदेश मंत्री एस. जयशंकर की नेपाल यात्रा के दौरान, नेपाल ने भारत को 10,000 मेगावाट बिजली निर्यात करने के लिए एक दीर्घकालिक समझौते और रिन्यूएबल एनर्जी में सहयोग के लिए एक MoU पर हस्ताक्षर किए थे, और संयुक्त रूप से तीन क्रॉस-बॉर्डर ट्रांसमिशन लाइनों का उद्घाटन किया था.

बैकॉक में बड़ा हादसा, पब में आग लगने से 27 लोगों की मौत , थाईलैंड पीएम ने जताया दुख

वर्ल्ड डेस्क / सत्ता संदेश

बैंकॉक के एक पब में भीषण आग लग गई, जिसमें कम से कम 27 लोगों की मौत हो गई। फायर ब्रिगेड ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। बचाव कर्मियों ने बताया कि आग लगने की सूचना आधी रात के आसपास मिली थी। सबसे पहले मौके पर पहुंचने वालों के ऑनलाइन शेयर किए गए फुटेज में थाई राजधानी में स्थित पब के सामने के दरवाजे से आग की भीषण लपटें निकलती और आसमान में घना काला धुआं उठता दिख रहा है, जबकि लोग वहां से भागने की कोशिश कर रहे थे।

थाईलैंड के प्रधानमंत्री अनुतिन चर्नविराकुल ने घटनास्थल पर पत्रकारों को बताया कि 27 लोगों की मौत हो गई है और कई लोगों को अस्पताल ले जाया गया है। उन्होंने कहा कि आग लगने के कारण की अभी जांच की जा रही है.

फायर ब्रिगेड ने आग पर पाया काबू

अधिकारियों ने बताया कि फायर ब्रिगेड को आग पर काबू पाने में लगभग आधा घंटा लगा। घटना के बाद की तस्वीरों में जले हुए टेबल-कुर्सियां और पब का क्षतिग्रस्त अंदरूनी हिस्सा दिखाई दे रहा है। थाईलैंड में पहले भी ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं। साल 2022 में, देश के पूर्वी हिस्से में एक म्यूजिक पब में आग लगने से 14 लोगों की मौत हो गई थी।

आग लगने से 66 लोगों की मौत

उससे एक दशक से भी पहले, 1 जनवरी 2009 को थाईलैंड की राजधानी के सांतिका नाइटक्लब में नए साल के जश्न के दौरान आग लगने से 66 लोगों की मौत हो गई थी। जिसमें 200 से अधिक लोग घायल हो गए थे। वह आग कथित तौर पर घर के अंदर आतिशबाजी के प्रदर्शन के कारण लगी थी।

न्यूजीलैंड दौरे पर पहुंचे पीएम मोदी, पीएम लक्सन और पीएम मोदी के बीच हुए जरूरी

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने छह दिवसीय दौरे के अंतिम चरण में न्यूजीलैंड पहुंचे। ऑकलैंड स्थित गवर्नमेंट हाउस में प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने उनका स्वागत किया। इस दौरान पीएम मोदी को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। स्वागत समारोह के बाद दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय वार्ता हुई। इस दौरान व्यापार, निवेश, रक्षा सहयोग, हिंद-प्रशांत क्षेत्र, कृषि प्रौद्योगिकी, खेल, शिक्षा, पर्यटन, संस्कृति आर्थिक साझेदारी और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने जैसे प्रमुख मुद्दों पर चर्चा हुई।

भारत और न्यूजीलैंड ने अपने संबंधों को स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप के स्तर तक बढ़ाने पर सहमति जताई। दोनों देशों ने साझा हितों के सभी क्षेत्रों में सहयोग और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई। इस दौरान भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को जल्द लागू करने पर जोर दिया गया। दोनों देशों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य तय किया।

10 अहम समझौतों पर हस्ताक्षर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की न्यूज़ीलैंड यात्रा के दौरान भारत और न्यूजीलैंड ने अपने रिश्तों को स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप तक पहुंचाने का ऐलान किया। दोनों देशों ने रक्षा, समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद विरोध, पर्यटन, डेयरी, खेल, संस्कृति और शिक्षा समेत कई क्षेत्रों में 10 अहम समझौतों पर हस्ताक्षर किए. साथ ही 2030 तक दोनों देशों के बीच व्यापार को दोगुना कर 7 अरब न्यूज़ीलैंड डॉलर (करीब 35 हजार करोड़ रुपये) तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया।

समुद्री सुरक्षा और रक्षा सहयोग पर जोर

प्रधानमंत्री मोदी और न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन की मौजूदगी में हुए समझौतों में सबसे ज्यादा जोर इंडो-पैसिफिक में समुद्री सुरक्षा और रक्षा सहयोग पर रहा. दोनों देशों के बीच पहली बार Maritime Cooperation Arrangement और Mutual Logistics Support Arrangement पर सहमति बनी. इसके तहत भारतीय नौसेना और न्यूजीलैंड डिफेंस फोर्स एक-दूसरे को लॉजिस्टिक सहायता दे सकेंगी. साथ ही समुद्री सुरक्षा पर नियमित संवाद शुरू करने का भी फैसला हुआ.

2030 तक द्विपक्षीय व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य

आतंकवाद के खिलाफ सहयोग बढ़ाने के लिए दोनों देशों ने जॉइंट वर्किंग ग्रुप ऑन काउंटर टेररिज्म बनाने का निर्णय लिया है. इसके जरिए खुफिया जानकारी साझा करने और आतंकवाद विरोधी रणनीति पर समन्वय बढ़ाया जाएगा. वहीं व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के लिए दोनों देशों ने फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) के तहत 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य तय किया है. सरकार का मानना है कि इससे दोनों देशों के उद्योगों को नए बाजार मिलेंगे और निवेश बढ़ेगा.

कृषि क्षेत्र में कई अहम फैसले

वहीं कृषि क्षेत्र में भी कई अहम फैसले हुए. भारत और न्यूजीलैंड ने कीवी फ्रूट एक्शन प्लान लॉन्च करने की घोषणा की है. इसके तहत उत्तराखंड और नागालैंड में दो सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए जाएंगे. पशुपालन और डेयरी क्षेत्र में भी तकनीकी सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी है.

आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में भारत की राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) और न्यूजीलैंड की नेशनल इमरजेंसी मैनेजमेंट एजेंसी (NEMA) के बीच समझौता हुआ है. दोनों देश भूकंप, सुनामी और तटीय आपदाओं से निपटने के लिए अनुभव और तकनीक साझा करेंगे.

शिक्षा और रिसर्च के क्षेत्र में महत्वपूर्ण समझौते

शिक्षा और रिसर्च के क्षेत्र में भी दो महत्वपूर्ण समझौते हुए हैं. गोवा स्थित नेशनल सेंटर फॉर पोलर एंड ओशन रिसर्च और यूनिवर्सिटी ऑफ कैंटरबरी अंटार्कटिका अनुसंधान में दोनों देश साथ काम करेंगे. वहीं NIFTEM और मैसी यूनिवर्सिटी के बीच खाद्य प्रौद्योगिकी, रिसर्च और छात्र आदान-प्रदान को लेकर सहमति बनी है.

न्यूजीलैंड ने ग्लोबल बायोफ्यूल्स एलायंस में शामिल होने की भी घोषणा की है. इसके अलावा गुजरात के लोथल स्थित नेशनल मैरीटाइम हेरिटेज कॉम्प्लेक्स के विकास में भी न्यूज़ीलैंड सहयोग करेगा.

बड़े फैसले

  • भारत-न्यूजीलैंड संबंध स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप में अपग्रेड.
  • रक्षा और समुद्री सुरक्षा पर तीन बड़े समझौते.
  • आतंकवाद पर संयुक्त कार्य समूह बनेगा.
  • 2030 तक 7 अरब न्यूज़ीलैंड डॉलर व्यापार का लक्ष्य.
  • उत्तराखंड और नागालैंड में कीवीफ्रूट सेंटर ऑफ एक्सीलेंस.
  • न्यूजीलैंड ग्लोबल बायोफ्यूल्स एलायंस में शामिल होगा.
  • अंटार्कटिका रिसर्च और फूड टेक्नोलॉजी में सहयोग बढ़ेगा.
  • क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विचार-विमर्श हुआ तथा बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी.
  • दोनों प्रधानमंत्रियों की मौजूदगी में कई MoU और समझौतों का आदान-प्रदान हुआ.
  • ये समझौते रक्षा एवं समुद्री सुरक्षा, हाइड्रोग्राफी, खेल, आपदा प्रबंधन, डेयरी, पर्यटन, समुद्री विरासत, संस्कृति, खाद्य प्रौद्योगिकी और समुद्री अनुसंधान से जुड़े हैं.

भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने न्यूजीलैंड के पीएम क्रिस्टोफर लक्सन के साथ चुनिंदा CEOs और बिज़नेस लीडर्स से बातचीत की. पीएम मोदी ने कहा कि भारत और न्यूजीलैंड लोकतांत्रिक मूल्यों, कानून के शासन, विविधता और सतत विकास के साझा सिद्धांतों से जुड़े हैं, जो मजबूत आर्थिक साझेदारी की नींव हैं. पीएम ने भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को दोनों देशों के आर्थिक संबंधों के लिए ऐतिहासिक कदम बताया. उन्होंने कहा कि FTA से बाजार तक पहुंच, निवेश, सेवाओं, तकनीक और प्रतिभा (Talent Mobility) के नए अवसर खुलेंगे.

पीएम मोदी ने भारत की तेज आर्थिक वृद्धि, युवा एवं कुशल कार्यबल, बढ़ते मध्यम वर्ग, डिजिटल क्रांति, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और आर्थिक सुधारों को निवेश के बड़े अवसर बताया. उन्होंने कहा कि भारत की राजनीतिक स्थिरता और निरंतर विकास उसे वैश्विक आर्थिक वृद्धि का महत्वपूर्ण इंजन बना रहे हैं.

पीएम मोदी ने किया निवेश के लिए आमंत्रित

पीएम मोदी ने न्यूजीलैंड के निवेशकों को इन्फ्रास्ट्रक्चर, सिविल एविएशन, लॉजिस्टिक्स, स्वच्छ ऊर्जा, शहरी परिवहन, जल प्रबंधन, अपशिष्ट प्रबंधन और डिजिटल अर्थव्यवस्था में निवेश के लिए आमंत्रित किया. उन्होंने भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम का उल्लेख करते हुए इनोवेशन, फिनटेक और उभरती तकनीकी में निजी क्षेत्र के बीच सहयोग बढ़ाने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि डेयरी विज्ञान, बागवानी और वानिकी में न्यूजीलैंड की विशेषज्ञता और भारत के विशाल उपभोक्ता बाजार, फूड पार्क और एग्री-टेक क्षमता को मिलाकर वैश्विक फूड वैल्यू चेन विकसित की जा सकती है.

दोनों देशों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 7 अरब न्यूज़ीलैंड डॉलर (लगभग ₹35,000 करोड़) तक दोगुना करने का लक्ष्य दोहराया. पीएम मोदी ने कहा कि भारत-न्यूजीलैंड आर्थिक साझेदारी समावेशी और सतत व्यापार का वैश्विक मॉडल बन सकती है, जो नवाचार और समृद्धि को बढ़ावा देगी.

आतंकवाद की निंदा

भारत-न्यूजीलैंड ने एक संयुक्त बयान जारी किया. इस दौरान दोनों प्रधानमंत्रियों ने सीमा-पार आतंकवाद सहित आतंकवाद के सभी रूपों और तरीकों की कड़ी निंदा की. उन्होंने पहलगाम आतंकी हमले और लाल किले के पास हुई आतंकी घटना की भी निंदा की. उन्होंने आतंकवाद के प्रति जीरो-टॉलरेंस और लगातार एक जैसा रवैया अपनाने की बात कही. इसके साथ ही, उन्होंने आतंकवाद को मिलने वाली फंडिंग के नेटवर्क और सुरक्षित ठिकानों को खत्म करने, ऑनलाइन सहित आतंकवाद के इंफ्रास्ट्रक्चर को तोड़ने और आतंकवादियों को जल्द सजा दिलाने का आह्वान किया.

आतंकवाद के खिलाफ एकजुट

दोनों नेता आतंकवाद और हिंसक चरमपंथ से निपटने में सहयोग बढ़ाने पर सहमत हुए.उन्होंने आतंकवाद-रोधी संयुक्त कार्य समूह (JWG) बनाने के समझौते (MoA) पर हस्ताक्षर का भी स्वागत किया, जो जानकारी और ज्ञान साझा करने के लिए एक ढांचा तैयार करेगा. दोनों नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र (UN) और फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) जैसे बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग बढ़ाने के अपने संकल्प को दोहराया.

दोनों नेताओं ने इस बात पर ज़ोर दिया कि सभी देशों को संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों और व्यक्तियों – जिनमें UNSC 1267 प्रतिबंध समिति की सूची में शामिल संगठन और व्यक्ति, एवं उनके सहयोगी, प्रॉक्सी, प्रायोजक, फाइनेंसर और समर्थक शामिल हैं, उनके खिलाफ ठोस कार्रवाई करने की तत्काल आवश्यकता है.

Chabahar port strike : अमेरिका ने चाबहार को बनाया निशाना, तनाव का माहौल

इंटरनेशनल डेस्क / सत्ता संदेश

अमेरिका और ईरान के बीच हो रही जंग की आंच चाबहार बंदरगाह तक पहुंच चुकी है। होर्मुज और आसपास के इलाकों में 90 से अधिक ठिकानों पर हवाई हमलों के बाद अमेरिकी सेना ने चाबहार को भी निशाना बनाया है। रिपोर्ट के मुताबिक ईरान में अमेरिकी सेना की एयर स्ट्राइक के बाद चाबहार और आसपास के क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति बाधित हो गई। हमलों में बंदरगाह, एक समुद्री यातायात नियंत्रण टावर और पास की सैन्य संपत्तियों को भी नुकसान पहुंचा है।

पश्चिम एशिया में संकट कितना गहरा?

गुरूवार को ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर खामेनेई को मशहद शहर में सुपुर्द-ए-खाक भी किया जाना है, ऐसे में अमेरिकी हमलों के बाद पश्चिम एशिया में संकट गहराने लगा है। दोनों पक्षों की तरफ से आक्रामक बयानबाजी का सिलसिला भी जारी है।

अमेरिका ने ईरान के चाबहार पर हमला किया, संघर्ष पर ट्रंप क्या बोले?

दरअसल, अमेरिका ने बुधवार-गुरुवार की दरम्यानी रात ईरान के दक्षिण-पूर्वी बंदरगाह शहर चाबहार पर नए हमले किए। रिपोर्ट्स के मुताबिक दोनों देश दूसरे दिन भी एक-दूसरे पर लगातार हमले कर रहे हैं। ईरान की सरकारी मीडिया में आई खबरों के मुताबिक चाबहार में विस्फोटों की आवाज सुनी गई। शहर के कुछ हिस्सों में बिजली भी गुल हो गई। स्थानीय लोगों ने कई धमाके सुने। आपातकालीन सेवाओं से जुड़ी जगहों पर भी नुकसान की खबर है। यह हमले चिंताजनक इसलिए भी है क्योंकि अप्रैल में अमेरिका-ईरान युद्धविराम की घोषणा के बाद से भारत की मदद के विकसित इस रणनीतिक बंदरगाह पर पहली बार हमले हुए हैं। 

90 ईरानी ठिकानों पर हमले, अमेरिकी सेना क्या बोली?

अमेरिकी सैन्य अधिकारियों के अनुसार, समुद्र में बने बुनियादी ढांचे और सैन्य सुविधाओं को निशाना बनाया गया। वाशिंगटन की तरफ से जारी बयान में कहा गया कि इन जगहों की मदद से ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाता है। खतरों को भांपते हुए अमेरिकी सेना की मध्य पूर्व कमान- सेंटकॉम (CENTCOM) ने लगभग 90 ईरानी ठिकानों को निशाना बनाया। एक्स पर जारी बयान में सेंटकॉम ने लिखा, अमेरिकी सेंट्रल कमांड बलों ने ईरान के खिलाफ अतिरिक्त हमले शुरू किए हैं। इसका मकसद होर्मुज में खतरों को कम करना और जहाजों को नुकसान पहुंचाने की ईरान की ताकत पर नकेल कसना है।

इन हमलों के बाद अमेरिका ने कहा कि वाणिज्यिक जहाजों और नागरिक दल के खिलाफ हालिया आक्रामकता अनुचित हैं। इसके लिए ईरान जवाबदेह है। अमेरिकी हमलों से पहले मंगलवार को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे तीन मालवाहक जहाजों पर कथित तौर पर ईरान की सेना ने हमले किए। ट्रंप ने तेहरान को चेतावनी दी थी कि अगर तेहरान महत्वपूर्ण शिपिंग लेन में वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाना जारी रखेगा, तो इसके अंजाम ‘बहुत खराब’ होंगे।

ईरान ने अमेरिका पर पलटवार करने के लिए कुवैत और बहरीन में उसके सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। ट्रंप के आक्रामक बयान के बीच ईरान की संसद के अध्यक्ष और मुख्य वार्ताकार गालिबाफ ने कहा, अमेरिका ने अभी तक यह नहीं सीखा है कि धमकाना और वादे तोड़ना बीते दिनों की बात हो चुकी है।

ट्रंप ने क्यों कहा- ईरान के साथ वार्ता समय की बर्बादी?

यह भी महत्वपूर्ण है कि ईरान में अमेरिकी सेना के ताजा हमलों से पहले नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान ट्रंप ने कहा था कि ईरान के साथ मौजूदा हालात में बातचीत करना उन्हें समय की बर्बादी लगता है। तल्ख अंदाज में ट्रंप ने तेहरान के नेताओं को बेवकूफ भी बताया था। उन्होंने शांति समझौते को लेकर भी कहा कि ईरान की तरफ से सीजफायर का उल्लंघन किया गया, ऐसे में उन्हें लगता है कि समझौता टूट चुका है। तेहरान की तरफ से भी अमेरिका को दो-टूक जवाब दिया गया है।

भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर फंड में ऑस्ट्रेलिया करेगा 500 मिलियन डॉलर का निवेश, पीएम मोदी की मौजूदगी में करेगा ऐलान

इंटरनेशनल डेस्क / सत्ता संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस वक्त ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर हैं। गुरुवार को उन्होंने मेलबर्न में ‘इंडिया-ऑस्ट्रेलिया CEO फोरम’ और ‘इकोनॉमिक रोडमैप बिजनेस रिसेप्शन’ में शिरकत की। इस दौरान पीएम मोदी ने ऑस्ट्रेलिया के साथ आर्थिक और रणनीतिक रिश्तों को और मजबूत करने की कोशिश की।

पीएम ने कहा कि आज दुनिया अनिश्चितता, सप्लाई चेन में रुकावट और ऊर्जा संकट के दौर से गुजर रही है। ऐसे समय में, भारत और ऑस्ट्रेलिया का स्वाभाविक और भरोसेमंद साझेदार के तौर पर आगे बढ़ना स्वाभाविक और जरूरी है।

ऑस्ट्रेलिया के सबसे बड़े पेंशन फंड ऑस्ट्रेलियनसुपर ने भारत में बडे़ निवेश का एलान भी किया है। पीएम मोदी ने एक्स पर लिखा, ‘भारत ऑस्ट्रेलियनसुपर के 500 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के निवेश का स्वागत करता है, जिसकी घोषणा आज सुबह मेलबर्न में उनके चीफ एग्जीक्यूटिव मिस्टर पॉल श्रोडर ने की। यह भारत की विकास और सुधार की राह में वैश्विक भरोसे की एक और मिसाल है। यह उन बड़े मौकों को भी दिखाता है जो हमारी तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था ग्लोबल निवेशकों को देती है।’

बुधवार को पहुंचे पीएम मोदी

उन्होंने कहा कि पिछले कुछ सालों में, हमने दोनों देशों की क्षमताओं को मिलाकर भविष्य में सहयोग के लिए एक मजबूत ढांचा तैयार किया है। बता दें कि पीएम मोदी अपना इंडोनेशिया का दौरा पूरा करने के बाद बुधवार को ऑस्ट्रेलिया पहुंचे।

पीएम मोदी के पहुंचने पर उनका जोरदार स्वागत किया गया। इस दौरान भारत और ऑस्ट्रेलिया की साझा विरासत का जश्न मनाते हुए सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हुए। पीएम मोदी ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर इसका वीडियो शेयर करते हुए इसे शानदार बताया।

पीएम ने की तारीफ

पीएम मोदी ने ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज के साथ पारंपरिक वाद्ययंत्र डिजेरिडू और तबला के साथ एक संगीत जुगलबंदी भी देखी। प्रस्तुति देखने के बाद पीएम मोदी ने कहा कि यह दोनों देशों के बीच गहरे सांस्कृतिक जुड़ाव को दर्शाता है। पीएम ने कलाकारों की तारीफ भी की।

ऑस्ट्रेलिया के बाद पीएम मोदी न्यूजीलैंड के लिए रवाना होंगे। लेकिन उसके पहले भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच रक्षा और सुरक्षा, व्यापार और निवेश, शिक्षा, मोबिलिटी, टेक्नोलॉजी, खेल पर अहम चर्चा होगी।