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पीएम मोदी ने चंडीगढ़ में विभिन्न विकास परियोजनाओं का किया उद्घाटन, चंडीगढ़ वासियों को दी बधाई

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

गुलाब चंद कटारिया, केंद्र में मेरे सहयोगी जेपी नड्डा , अश्विनी वैष्णव जीसंसद में मेरे साथी मनीष तिवारी, यहां सभागार में भी कई विधायक, मंत्री, सांसद बैठे हुए हैं। अन्य सभी महानुभाव भी, आज कईयों के दर्शन हो रहे, पुराने-पुराने लोगों के।

आज आप सबके बीच आकर मन में खुशी का एक भाव है, अलग ही भाव है।

चंडीगढ़ केवल एक शहर नहीं है, ये भारत के लिए development का एक मॉडल रहा है। चंडीगढ़ जाना जाता है, व्यवस्थित विकास के लिए, चंडीगढ़ की पहचान है, बेहतर लाइफस्टाइल के लिए, ease of living के लिए। चंडीगढ़ की पहचान है, चिकित्सा की बेहतर सुविधाओं के संबंध में और इस सबके साथ-साथ चंडीगढ़ की पहचान है, माँ चंडी का आशीर्वाद। और इसलिए, चंडीगढ़ का विकास हमेशा से NDA सरकार की प्राथमिकता रहा है। आपको ध्यान होगा, डेढ़ साल पहले देश ने न्याय व्यवस्था में बहुत बड़ा सुधार किया है। हम दंड संहिता की जगह भारतीय न्याय संहिता लेकर आए हैं। भारतीय न्याय संहिता यानी, दंड आधारित क़ानूनों की जगह न्याय आधारित कानूनी व्यवस्था। और तब भारतीय न्याय संहिता लागू करने की शुरुआत चंडीगढ़ से ही हुई थी।

बीते वर्षों में इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर, स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट, स्मार्ट पार्किंग और डिजिटल गवर्नेंस, चंडीगढ़ को हाइटेक बनाने के लिए ऐसे कितने ही प्रोजेक्ट्स पर काम हुआ है। ढाई हजार करोड़ से ज्यादा रुपए इस मिशन में खर्च हुये हैं। आज भी यहाँ हेल्थ, एजुकेशन और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े विकास के कई काम शुरू हो रहे हैं। मैं इनके लिए सभी चंडीगढ़ वासियों को बधाई देता हूं।

यहाँ आने से पहले मैं हरियाणा के जींद में था और यहां से इसके बाद मुझे पंजाब के विकास कार्यों के लिए जालंधर जाना है। इन दोनों कार्यक्रमों के बीच आज ये चंडीगढ़ का कार्यक्रम हो रहा है। क्योंकि हमारा चंडीगढ़, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल, इस पूरे क्षेत्र को जोड़ता है। चंडीगढ़ के विकास से चंडीगढ़ के लोगों का जीवन तो बदलता ही है, साथ ही हरियाणा, हिमाचल, पंजाब और जम्मू कश्मीर के लोगों को भी इससे बहुत लाभ होता है। चिकित्सा सेवाओं के लिए तो चंडीगढ़ इस पूरे क्षेत्र में एक बड़ा हब है।

जब मैं चंडीगढ़ रहता था, तो मुझे कई बार PGI जाना होता था और कारण क्या? तो कोई ना कोई हमारे साथी या उनका परिवार चाहे जम्मू कश्मीर का हो, पंजाब का हो, हिमाचल का हो, हरियाणा का हो, कोई ना कोई बीमार यहां आते थे, तो मेरा मिलने जाना बड़ा स्वाभाविक रहता था। और इसलिए मुझे पता है कि इस पूरे क्षेत्र के लोगों के लिए ये आरोग्य की दृष्टि से एक बड़ा महत्वपूर्ण केंद्र रहा है।

आज यहाँ चंडीगढ़ PGI में एडवांस्ड हेल्थकेयर फैसिलिटीज़ का विस्तार हो रहा है। यहाँ एडवांस न्यूरो-साइन्स सेंटर, एडवांस मदर एंड चाइल्ड सेंटर और क्रिटिकल केयर हॉस्पिटल ब्लॉक, ये प्रोजेक्ट्स लाखों लोगों को इलाज की और बेहतर सुविधा देंगे। मुझे याद है, 2015 में, मैं चंडीगढ़ PGI के दीक्षांत समारोह में आया था। और मुझे खुशी है कि आज मुझे वर्चुअली भी वहां के सब पुराने साथियों से मिलने का अवसर मिल रहा है। तब से अब तक इस दशक में PGI की क्षमताओं में बड़ा विस्तार हुआ है। मैं PGI चंडीगढ़ के मैनेजमेंट की, यहाँ के प्रोफेसर्स और युवा डॉक्टर्स की सराहना करता हूं, उन्हें अपनी शुभकामनाएं देता हूं।

जब हम स्वास्थ्य की बात करते हैं, तो हम सब जानते हैं कि इसमें स्वच्छता की कितनी बड़ी भूमिका है और इसलिए जब हमारी सरकार बनी थी, तब हमने देश के लिए ‘स्वच्छ भारत मिशन’ लॉन्च किया था। देश में करोड़ों शौचालय बनाए गए, भारत को खुले में शौच से मुक्त कराया गया, सार्वजनिक स्थानों की स्वच्छता के लिए अभियान चलाये गए, सफाई हमारी जीवनशैली का हिस्सा बने, इसके लिए अलग-अलग initiatives शुरू किए गए। हमारे शहरों की स्वच्छ भारत रैंकिंग इसी प्रयास का हिस्सा है और चंडीगढ़ इसमें बेहतर प्रदर्शन का प्रयास भी करता रहता है।

मैं आज चंडीगढ़ के रिटायर्ड IPS अधिकारी इंदरजीत सिंह सिद्धू जी की भी सराहना करना चाहूँगा। उनकी पहचान ‘ब्रूम वारीयर’ की बनी हुई है। उन्होंने चंडीगढ़ में स्वच्छता को लेकर एक नई अलख जगाई है, लोगों को प्रेरित किया है। इसके लिए हमारी सरकार ने उन्हें इस साल पद्म सम्मान से भी सम्मानित किया है।

स्वच्छता कोई एक दिन का काम नहीं है, स्वच्छता तो जीवन जीने का तरीका है। और मुझे खुशी है कि स्वच्छता को आज के इस कार्यक्रम से भी जोड़ा गया। आज यहां स्वच्छता से स्वागत, इस पहल के तहत विशेष सफाई अभियान चलाया गया। और मैं देख रहा था सोशल मीडिया में सारे लीडर लोग भी और जनता जनार्दन भी सफाई के काम में लगी थी। देश के अंदर एक खुशी का माहौल था, इन सारी चीजों को देखकर के। चंडीगढ़ के सभी भाई-बहनों को मैं इसके, इस पहल के लिए व्यक्तिगत रूप से बड़े गर्व के साथ आप सबको बधाई देता हूं।

स्वच्छता के ऐसे अभियान देश में अनेक रोगों की रोकथाम में बहुत मददगार साबित हुए हैं।

एक समय था, भारत के हेल्थ सेक्टर पर पूरी दुनिया चिंता जताती थी। किसी बड़ी आपदा का अंदेशा होता था, तो लोग सवाल उठाने लगते थे कि भारत में क्या होगा? कोरोना के समय में हमने देखा है कि कैसे भारत ही विश्व की चिंताओं का केंद्र था। लेकिन हमारी सरकार ने भारत का सामर्थ्य भी बदला और विश्व का नजरिया भी बदला। जब कोरोना महामारी आई, तो भारत मदद मांगने वाला देश नहीं था, बल्कि भारत दुनिया को मदद भेज रहा था। आज कितने ही देशों से लोग गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए भारत आते हैं। भारत मेडिकल टूरिज़्म का बड़ा डेस्टिनेशन बनकर उभर रहा है।

ये बदलाव पिछले 12 वर्षों की ईमानदार कोशिशों और नीतियों का परिणाम है। 12 साल पहले हमने संकल्प लिया था, हमारे देश के लोग स्वास्थ्य सेवाओं के अभाव में नहीं जियेंगे, हमारे देश के लोगों को इलाज की बेहतर सुविधाएं मिलेगी और कम कीमत में मिलेंगी। पिछले 12 वर्षों की देश की सफलता इसी संकल्प का परिणाम है। बीते वर्षों में भारत ने अपने हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर का तेजी से विस्तार किया है। 2014 के बाद देश में 15 नए AIIMS को मंजूरी दी गई है। आज देश के अलग-अलग हिस्सों में नए AIIMS काम कर रहे हैं। देशभर में सैकड़ों नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना की गई है। कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए speciality hospitals की संख्या भी बढ़ी है। यहाँ चंडीगढ़ में भी, होमी भाभा कैंसर हॉस्पिटल बना है, यहां से थोड़ी दूरी पर। 2022 में मुझे इसके लोकार्पण का अवसर मिला था। आज ये हॉस्पिटल हजारों मरीजों की सेवा कर रहा है।

गाँव-गाँव में प्राइमरी हेल्थकेयर सुविधाओं के विकास पर भी ध्यान दिया जा रहा है। हर स्तर पर हेल्थ सिस्टम मजबूत हो, इसके लिए आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन शुरू किया गया है। इसके तहत देशभर में क्रिटिकल केयर ब्लॉक्स, इंटीग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब्स और पब्लिक हेल्थ यूनिट्स जैसी सुविधाओं का नेटवर्क तैयार हुआ है। आज शहरी और ग्रामीण इलाकों से लेकर जनजातीय क्षेत्रों तक देश में करीब पौने दो लाख आयुष्मान आरोग्य मंदिर भी काम कर रहे हैं। आरोग्य मंदिरों में प्राइमरी इलाज की सुविधाएं तो हैं ही, साथ ही,12 अलग-अलग हेल्थ पैकेज सर्विस भी यहाँ मिल रही हैं। इनमें करोड़ों लोगों की ब्लड प्रेशर और ड़ायबिटीज़ जैसी बीमारियों की स्क्रीनिंग हुई है।

हमारी सरकार तकनीक के जरिए भी इलाज को सुगम बना रही है। हमने ई-संजीवनी मिशन के जरिए telemedicine की सुविधा शुरू की। इसके तहत आज देश में 48 करोड़ से ज्यादा telemedicine consultations हो चुके हैं। दूर-सुदूर इलाकों से भी लोग बड़े अस्पतालों से, डॉक्टर्स से परामर्श कर रहे हैं।

स्वास्थ्य सेवाओं के इस विस्तार की वजह से आज देश में 90 प्रतिशत से अधिक institutional डिलीवरी हो रही हैं। हमारे यहाँ माता मृत्यु दर में 86 percent की कमी आई है। और शिशु मृत्यु दर में भी बड़ी गिरावट आई है।

बीमारियों के इलाज के साथ ही आज उतना ही फोकस Preventive Healthcare पर भी है। पोषण अभियान, मिशन इंद्रधनुष, योगा, H.P.V. Vaccination, U-WIN प्लेटफॉर्म, ऐसे कई अहम प्रयासों के कारण करोड़ों लोगों का जीवन सुरक्षित हो रहा है।

हमने देश को टीबी मुक्त बनाने का संकल्प भी लिया है। इसके लिए टीबी मुक्त भारत अभियान चलाया जा रहा है। जनभागीदारी के जरिए, जन-जन को जागरूक किया जा रहा है। समय से टीबी की स्क्रीनिंग कराई जा रही है। मरीजों को इलाज मुहैया कराया जा रहा है। इसी का परिणाम है, आज देश में टीबी का ट्रीटमेंट कवरेज 90 percent से ज्यादा हो गया है। पिछले साल आई WHO की रिपोर्ट के मुताबिक 10 वर्षो के भीतर-भीतर टीबी संक्रमण भी इक्कीस प्रतिशत कम हुआ है। इन प्रयासों का सबसे बड़ा लाभ देश के गरीब को हो रहा है, इसका लाभ हमारे मिडिल क्लास को हो रहा है और ज्यादा लाभ हमारी माताओं-बहनों को हो रहा है। क्योंकि माताएं-बहनें परिवार के काम को प्राथमिकता देती हैं। बीमारी को सहन करना ये माताओं-बहनों ने जैसे अपना एक संस्कार बना दिया है। लेकिन यह प्रोएक्टिव प्रयासों के कारण माताओं-बहनों का स्क्रीनिंग हुआ, उनकी देखभाल की गई और आज टीबी मुक्त होने में हमारी माताओं-बहनों की संख्या बड़ी है। भारत में हेल्थ सर्विसेस अब प्रिविलेज नहीं, आज हेल्थ सर्विसेस देश के सामान्य नागरिक का अधिकार बन रही हैं।

हेल्थ सेक्टर पर सरकार के फोकस का बहुत बड़ा लाभ भारत के युवाओं को भी हुआ है। हमारे युवा डॉक्टर्स इस बात से परिचित होंगे, पहले डॉक्टर बनने का सपना कितना मुश्किल होता था, युवाओं को डॉक्टर बनने के पर्याप्त मौके ही नहीं मिलते थे, क्योंकि मेडिकल सीटों और मेडिकल कॉलेजों की संख्या बेहद कम थी। हमने इस परिस्थिति को भी बदला है। आज देश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या लगभग दोगुनी हुई है। MBBS और Post Graduate सीटों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है। और, अब तो चंडीगढ़ PGI में भी MBBS कॉलेज को मंजूरी दे दी गई है। जल्द ही यहां भी एडमिशन शुरू हो जाएंगे। इससे देश के कितने प्रतिभाशाली युवाओं को ऐसे टॉप इंस्टीट्यूट में पढ़ने का मौका मिलेगा। देश को बड़ी संख्या में बेस्ट डॉक्टर्स मिलेंगे।

चंडीगढ़ एक ऐसा शहर है, जहां एजुकेशन, इंजीनियरिंग, मेडिकल साइंस और रिसर्च से जुड़े बड़े संस्थान एक साथ मौजूद हैं। बहुत कम शहरों के पास ऐसा सामर्थ्य होता है। आने वाले समय में यही संस्थान नई टेक्नोलॉजी, हेल्थकेयर, स्टार्टअप्स और इनोवेशन के बड़े केंद्र बन सकते हैं। आज एजुकेशन से जुड़ी कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं भी इस यात्रा को नई गति दे रही हैं। पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज में कुरुक्षेत्र बॉयज़ हॉस्टल एंड मेस का उद्घाटन हुआ है। सेक्टर-46 के गवर्नमेंट कॉलेज के लिए नया हॉस्टल भी तैयार हुआ है। रिसर्च स्कॉलर्स हॉस्टल की नींव भी रखी गई है। हमारा प्रयास है कि हमारे युवाओं को रिसर्च के लिए बेहतर लैब्स, बेहतर फैकल्टी मिले। जब रिसर्च का माहौल मजबूत होगा, तब इनोवेशन भी तेज होगा। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग और डीप-टेक, ऐसी सभी टेक्नोलॉजी में हमें भारत को आगे लेकर जाना है। मुझे पूरा विश्वास है कि चंडीगढ़ के एजुकेशन इंस्टिट्यूट्स, यहां के शिक्षक और यहां के युवा इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास किसी भी देश की आर्थिक प्रगति का रोडमैप होता है। इसलिए, पहली बार देश में इंफ्रास्ट्रक्चर को holistic approach के साथ विकसित किया जा रहा है। आज चंडीगढ़ में कनेक्टिविटी को लेकर भी कई शुभारंभ हुए हैं। आईटी सिटी से कुराली तक छह लेन वाले ग्रीनफील्ड हाईवे का उद्घाटन हुआ है। इससे एयरपोर्ट रोड पर दबाव कम होगा, मोहाली और खरड़ के लोगों को जाम से राहत मिलेगी। अंबाला-चंडीगढ़ ग्रीनफील्ड हाईवे से ‘पी.आर. सेवन स्पर’ इसकी आधारशिला भी रखी गई है। ऐसे सभी विकास कार्यों से उद्योग और कारोबार को गति मिलेगी। हमारे चंडीगढ़ में Ease of Living और बेहतर होगी।

रीजनल कनेक्टिविटी पर फोकस बढ़ाते हुए, आज जालंधर में रेलवे से जुड़े प्रोजेक्ट्स का भी लोकार्पण होने वाला है। इसका लाभ पंजाब के साथ-साथ इस पूरे क्षेत्र को होगा। साथ ही, आज हरियाणा के जींद से, जींद से सोनीपत के लिए देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन भी शुरू हुई है। क्लीन फ्यूल पर चलने वाली ये ट्रेन एक बहुत बड़ी शुरुआत है। मैं इसके लिए भी आप सभी को और देशवासियों को बधाई देता हूँ।

विकसित भारत की यात्रा में हमें फ्यूचर की टेक्नोलॉजी पर, फ्यूचर के ट्रांसपोर्टेशन पर और फ्यूचर की हेल्थ सर्विसेस पर, इसी आधुनिक सोच के साथ आगे बढ़ना है। हमें ऐसे फैसले लेने हैं, जिनका लाभ वर्तमान पीढ़ी को तो मिले ही मिले, आने वाली पीढ़ियों को भी मिलता रहे। हमें ऐसे संस्थान बनाने हैं, जो समय के साथ और मजबूत हो जाएं। बीजेपी-एनडीए सरकार, इसी दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। मैं चंडीगढ़, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल और इस पूरे क्षेत्र के लोगों को इन नई परियोजनाओं के लिए फिर से बहुत-बहुत बधाई देता हूं। आप सबका बहुत-बहुत धन्यवाद। मेरे साथ बोलिए- भारत माता की जय। भारत माता की जय। भारत माता की जय।

बहुत-बहुत धन्यवाद।

भारत के बच्चों को भोजन के अलावा भी और चीजों की आवश्यकता है
  • डॉ. सरथ गोपालन

कुछ समय पहले मेरे क्लिनिक में पांच साल की एक बच्ची लाई गई। वह अपनी उम्र के बच्चों की तुलना में विकास के कई चरणों में पीछे लग रही थी। उसकी बोलने की गति धीमी थी और वह अपने हमउम्र बच्चों जितनी सक्रिय या जुड़ी हुई नहीं दिख रही थी। उसके विकास के आकलन में वह तीन साल की बच्ची के स्तर पर पाई गई। उसकी मां बहुत चिंतित थीं। बच्ची बीमार नहीं थी। कोई ऐसी बीमारी या निदान नहीं था जो इसकी वजह समझा सके। लेकिन जब हमने कोविड-19 के पिछले दो वर्षों के बारे में बात की, तो तस्वीर साफ होने लगी। लंबे लॉकडाउन के कारण स्कूल बंद रहे, वह ज्यादातर समय घर पर रही, खेल की जगह स्क्रीन ने ले ली और भोजन पहले की तुलना में अधिक साधारण और सीमित हो गया। उन शांत वर्षों में उसके मस्तिष्क को वह सब नहीं मिल पाया जिसकी उसे बढ़ने के लिए जरूरत थी। वह कोई अपवाद नहीं थी। अलग-अलग क्लिनिकों में बाल रोग विशेषज्ञ और विकास विशेषज्ञ एक ही तरह की स्थिति देख रहे थे-ऐसे बच्चे जो शारीरिक रूप से स्वस्थ थे, लेकिन विकास में पीछे रह गए थे। यह वायरस की वजह से नहीं था, बल्कि उसके बाद पैदा हुई परिस्थितियों की वजह से था।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, मस्तिष्क का 90% विकास पांच वर्ष की आयु से पहले ही हो जाता है, जिससे प्रारंभिक वर्ष बच्चे के संज्ञानात्मक, भावनात्मक और सामाजिक भविष्य को आकार देने का सबसे बड़ा अवसर बन जाते हैं। इस दौरान बनने वाले तंत्रिका संबंध सीखने, भाषा, स्मृति और जीवन भर के लिए लचीलेपन को मजबूत करते हैं।

इस अवधि में सही पोषण प्राप्त करना सबसे शक्तिशाली निवेशों में से एक है जो हम कर सकते हैं। आयरन, जिंक और सेलेनियम जैसे सूक्ष्म पोषक तत्व, जिन्हें अक्सर तंत्रिका पोषक तत्व कहा जाता है, स्वस्थ मस्तिष्क विकास और कार्य के लिए आवश्यक हैं। फिर भी आंकड़े एक चिंताजनक कहानी बयां करते हैं। अकेले आयरन की कमी भारत में पांच वर्ष से कम आयु के लगभग 50% बच्चों को प्रभावित करती है ( एनएफएचएस-5)। पांच वर्ष से कम आयु के 67.1% बच्चों में एनीमिया दर्ज किया गया, जो पिछले सर्वेक्षण से अधिक है। 12-59 महीने की आयु के बच्चों के राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधि विश्लेषण सहित हाल के साक्ष्यों से पता चला है कि 60% से अधिक बच्चों में एनीमिया के साथ या उसके बिना सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी थी। यह अकेले हीमोग्लोबिन की संख्या से कहीं अधिक व्यापक पोषण संबंधी अंतर की ओर इशारा करता है।

डोकोसाहेक्सानोइक एसिड (डीएचए), एक ओमेगा-3 फैटी एसिड, मस्तिष्क की संरचना, स्मृति निर्माण और दृश्य विकास में सहायक होता है। कोलीन, एक अन्य आवश्यक पोषक तत्व, अब मस्तिष्क के विकास के लिए अनिवार्य माना जाता है। जब माताएं गर्भावस्था के दौरान कोलीन का सेवन करती हैं, तो यह स्वस्थ जीन गतिविधि और कोशिका संरचना, तथा मस्तिष्क के प्रमुख क्षेत्रों – जिनमें स्मृति और चिंतन के लिए जिम्मेदार क्षेत्र शामिल हैं – के विकास में सहायक होता है। ये पोषक तत्व बच्चे के आहार में वैकल्पिक नहीं हैं, बल्कि उनकी क्षमता के लिए मूलभूत हैं।

बच्चे के जीवन में सबसे महत्वपूर्ण पोषण संबंधी हस्तक्षेप जन्म से पहले ही शुरू हो जाता है। मस्तिष्क का विकास भ्रूण अवस्था में ही शुरू हो जाता है, और मां की पोषण स्थिति सीधे तौर पर उस तंत्रिका आधार को आकार देती है जिससे बच्चा जन्म लेता है। डीएचए गर्भ में तंत्रिका संपर्क को सहारा देता है; गर्भावस्था के दौरान आयरन और फोलिक एसिड का सेवन कम जन्म वजन और विकास में देरी के जोखिम को कम करता है। फिर भी, भारत में केवल 44% गर्भवती महिलाओं ने अनुशंसित 180 या उससे अधिक दिनों तक आयरन-फोलिक एसिड सप्लीमेंट का सेवन किया (एनएफएचएस-5), जो एक बहुत बड़ा और लक्षित करने योग्य अवसर प्रस्तुत करता है।

यही कारण है कि किशोरियों में निवेश करना अगली पीढ़ी में निवेश करना है। एक स्वस्थ लड़की स्वस्थ मां बनती है, और एक स्वस्थ मां अपने बच्चे को सर्वोत्तम संभव शुरुआत देती है। भारत में 59% किशोरियों में एनीमिया की समस्या है, इसलिए स्कूलों, सामुदायिक कार्यक्रमों और लक्षित पूरक आहार के माध्यम से इस समूह को प्राथमिकता देना संपूर्ण स्वास्थ्य सेवा में प्रभावी उपायों में से एक है।

हालांकि पोषण महत्वपूर्ण है, मस्तिष्क के विकास के लिए दो समानांतर इनपुट आवश्यक हैं: पर्याप्त पोषण और भावनात्मक-सामाजिक उत्तेजना। महामारी ने इसे सशक्त रूप से प्रदर्शित किया। यूनिसेफ का अनुमान है कि वैश्विक स्तर पर सात में से एक बच्चे ने कोविड-19 के दौरान विकास या सीखने में महत्वपूर्ण हानि का अनुभव किया, जो मुख्य रूप से बीमारी के कारण नहीं, बल्कि साथियों के साथ मेलजोल, बातचीत और खेल की कमी के कारण हुआ। स्क्रीन ने मानवीय संपर्क का स्थान ले लिया, और भाषा, शारीरिक और सामाजिक विकास प्रभावित हुआ।

संवेदनशील देखभाल, मौखिक संवाद, स्पर्श संबंधी जुड़ाव और एक उत्तेजक वातावरण तंत्रिका तंत्र के लिए महत्वपूर्ण हैं और स्वस्थ मस्तिष्क संरचना के लिए आवश्यक हैं। प्रारंभिक बचपन के कार्यक्रम जो पोषण संबंधी सहायता और विकासात्मक उत्तेजना दोनों को एकीकृत करते हैं, ऐसे परिणाम देते हैं जो इनमें से कोई भी अकेले प्राप्त नहीं कर सकता। भारत की कार्यक्रम संरचना इस पर अमल करने के लिए अच्छी स्थिति में है। पोषण अभियान और पीएम पोषण जैसे कार्यक्रम पहले से ही देश भर में लाखों माताओं और छोटे बच्चों तक पहुंच रहे हैं। पोषण पखवाड़ा जैसी पहल पोषण के इर्द-गिर्द निरंतर, सामुदायिक स्तर पर लामबंदी की शक्ति को दर्शाती है। वितरण संरचना, जिसमें आंगनवाड़ी नेटवर्क, अग्रिम पंक्ति के कर्मचारी और सामुदायिक स्तर पर पहुँच शामिल है, स्थापित है। अब अवसर यह है कि इस ढांचे से मिलने वाले लाभों को और अधिक बढ़ाया जाए।

उचित प्रशिक्षण और सहयोग से, वे शारीरिक विकास पर नज़र रखने से लेकर माता-पिता को प्रारंभिक प्रोत्साहन, संवेदनशील देखभाल और बाल विकास प्रथाओं पर मार्गदर्शन देने तक अपनी भूमिका का विस्तार कर सकते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन और यूनिसेफ के नर्चरिंग केयर फ्रेमवर्क को एकीकृत करना, जो पोषण, स्वास्थ्य, सुरक्षा, प्रारंभिक शिक्षा और देखभाल को एक सुसंगत इकाई में जोड़ता है, इस विकास के लिए एक स्पष्ट और वैज्ञानिक रोडमैप प्रदान करता है। यह लक्ष्य को केवल बच्चों को भोजन कराने से आगे बढ़ाकर उन्हें वास्तव में फलने-फूलने में मदद करने की ओर ले जाता है।

शुरुआती बचपन में पोषण किसी भी देश के लिए सबसे अधिक लाभ देने वाला निवेश है। जब बच्चों को उनके विकसित होते मस्तिष्क के लिए जरूरी सूक्ष्म पोषक तत्व, सही देखभाल का वातावरण और सही मानसिक व सामाजिक प्रोत्साहन मिलता है तो उसका लाभ पूरी जिंदगी मिलता है। ऐसे बच्चे बेहतर विद्यार्थी बनते हैं, आगे चलकर अधिक सक्षम और उत्पादक नागरिक बनते हैं, और समाज भी अधिक मजबूत और सक्षम बनता है। भारत के पास विकसित भारत का सपना है। उसके पास व्यवस्थाएं हैं। उसके पास विज्ञान है। अब जरूरत इस बात की है कि शुरुआती बचपन के पोषण को केवल कल्याणकारी योजना का हिस्सा न माना जाए, बल्कि उसे उस बुनियाद के रूप में देखा जाए, जिस पर बाकी सब कुछ टिका है।

(लेखक, नई दिल्ली के मधुकर रेनबो चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल में बाल चिकित्सा गैस्ट्रोएंटरोलॉजी के वरिष्ठ सलाहकार और न्यूट्रिशन सोसाइटी ऑफ इंडिया (एनएसआई) के अध्यक्ष हैं।)

जिला प्रशासन रोकथाम योग्य मातृ मृत्यु को समाप्त करने के लिए Dayanand Medical College & Hospital के साथ एमओयू करेगा

उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं में जीवनरक्षक देखभाल सुनिश्चित करने के लिए डिप्टी कमिश्नर ने मिशन जीवनी के तहत रेफरल और ‘गोल्डन ऑवर’ पर जोर दिया

लुधियाना / सत्ता संदेश

मातृ मृत्यु दर को समाप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए जिला प्रशासन ने Dayanand Medical College & Hospital के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) करने की घोषणा की है। इस पहल के तहत सिविल अस्पताल से हर माह कम से कम 20 उच्च जोखिम और अत्यधिक उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था के मामलों को विशेषज्ञ और समयबद्ध उपचार उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही नर्सिंग छात्र स्वयंसेवकों द्वारा हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी की ट्रैकिंग के लिए भी MoU किया जाएगा।

जिला मिशन जीवनी के तहत आयोजित उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए डिप्टी कमिश्नर हिमांशु जैन ने ‘गोल्डन ऑवर’ के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी हाई-रिस्क मामलों को सीधे Civil Hospital Ludhiana में रेफर किया जाए, ताकि सब-डिविजनल या अन्य केंद्रों के कारण होने वाली देरी से बचा जा सके।

डिप्टी कमिश्नर ने टालने योग्य मातृ मृत्यु पर ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाते हुए कहा कि जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की जल्द पहचान और सतत निगरानी जरूरी है। उन्होंने स्त्री रोग विशेषज्ञों और आशा वर्करों को निर्देश दिया कि ओपीडी स्लिप पर स्पष्ट रूप से ‘हाई-रिस्क’ या ‘वेरी हाई-रिस्क’ अंकित किया जाए, ताकि तुरंत उचित उपचार सुनिश्चित हो सके।

मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत करने के लिए उन्होंने निर्देश दिया कि हर गर्भवती महिला को मुख्यमंत्री सेहत बीमा योजना के तहत पंजीकृत किया जाए, जिससे मुफ्त और कैशलेस इलाज मिल सके। प्रवासी महिलाओं के लिए Ayushman Bharat Yojana के तहत नामांकन अनिवार्य करने को कहा गया।

इसके अलावा, जोनल लाइसेंसिंग अथॉरिटी द्वारा औचक निरीक्षण के निर्देश दिए गए हैं, ताकि सभी स्वास्थ्य केंद्रों में MTP किट की उपलब्धता और तैयारियों की जांच की जा सके।

बैठक में पिछले दो महीनों के मातृ मृत्यु मामलों की केस-टू-केस समीक्षा की गई, जिसमें प्रसव पूर्व देखभाल, रेफरल में देरी और आपातकालीन सेवाओं की कमियों की पहचान की गई। आशा वर्करों, डॉक्टरों और वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारियों ने इसमें भाग लिया। साथ ही UDID (Unique Disability ID) कार्ड की जांच प्रक्रिया को सुचारु बनाने पर भी चर्चा हुई।

कमेटी ने क्लिनिकल प्रोटोकॉल के सख्त पालन, समय पर मरीज की स्थिति को स्थिर करने और प्रभावी रेफरल प्रणाली पर जोर दिया। किसी भी स्तर पर देरी या लापरवाही पाए जाने पर जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए गए।

बैठक में प्रमुख रूप से सिविल सर्जन डॉ. रामनदीप कौर, डॉ. बिशव मोहन, डॉ. आशिमा, डॉ. अमनप्रीत, डॉ. रोहित रांपल, जेडएलए दिनेश गुप्ता सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

यह पहल ‘गोल्डन ऑवर’ पर विशेष ध्यान और संस्थागत समन्वय के माध्यम से जिले में सुरक्षित मातृत्व और नवजात स्वास्थ्य सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री श्री जे.पी. नड्डा ने स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (पीजीआईएमईआर),

चंडीगढ़/ सत्ता संदेश

चंडीगढ़ के 39वें दीक्षांत समारोह को संबोधित कियाकेंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने पीजीआई चंडीगढ़ की विरासत, प्रतिष्ठित साख और अग्रणी चिकित्सा अनुसंधान, सर्जरी तथा एक मजबूत अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र में इसके योगदान पर प्रकाश डालापीजीआई चंडीगढ़ उत्तर भारत के सबसे बड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य देखभाल प्रणालियों में से एक है और विश्वस्तरीय चिकित्सा देखभाल, उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान का केंद्र है: श्री नड्डाप्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में, भारत ने स्वास्थ्य सेवा सहित सभी क्षेत्रों में एक ऐतिहासिक छलांग लगाई है: श्री नड्डा ने 2014 के बाद से चिकित्सा बुनियादी ढांचे के परिवर्तनकारी विस्तार पर प्रकाश डाला: एम्स की संख्या बढ़कर 23 हुई, मेडिकल कॉलेज 818 हुए और कुल मेडिकल सीटों की संख्या 2 लाख से अधिक हो गई दीक्षांत समारोह में 61 पीएचडी और 114 डीएम सहित 682 स्नातकों ने डिग्रियां प्राप्त कीं और 95 पदक प्रदान किए गए

चंडीगढ़, 30 अप्रैल 2026: केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा ने आज स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (पीजीआईएमईआर), चंडीगढ़ के 39वें दीक्षांत समारोह को संबोधित किया। इस अवसर पर पंजाब के राज्यपाल और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के प्रशासक श्री गुलाब चंद कटारिया और नीति आयोग के पूर्व सदस्य डॉ. विनोद के. पॉल भी उपस्थित रहे।

सभा को संबोधित करते हुए, श्री नड्डा ने स्नातक पूरा करने वाले छात्रों को “एक महत्वपूर्ण उपलब्धि” हासिल करने के लिए बधाई दी, जो उनकी कड़ी मेहनत, अनुशासन और दृढ़ संकल्प के साथ-साथ उनके शिक्षकों, संकाय सदस्यों और उनके माता-पिता के प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने भारत में चिकित्सा विज्ञान शिक्षा और रोगी देखभाल को आगे बढ़ाने में पीजीआईएमईआर के योगदान की सराहना की।

श्री नड्डा ने रेखांकित किया कि “पीजीआई चंडीगढ़ उत्तर भारत के सबसे बड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्रों में से एक है और विश्वस्तरीय चिकित्सा देखभाल, उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान का केंद्र है।” उन्होंने कहा कि दशकों से डॉक्टरों, वैज्ञानिकों और स्वास्थ्य पेशेवरों की पीढ़ियों के समर्पित प्रयासों ने पीजीआई को एक प्रतिष्ठित ब्रांड के रूप में स्थापित किया है। उन्होंने कहा कि पीजीआई के स्नातकों के साथ संस्थान की साख जुड़ी होती हैं और इस प्रतिष्ठित संस्थान से उत्तीर्ण होने पर सभी छात्रों को बधाई दी।

श्री नड्डा ने पथ-प्रदर्शक क्लिनिकल अनुसंधान और अग्रणी सर्जरी में संस्थान के योगदान की प्रशंसा की। उन्होंने कहा “वर्तमान में पीजीआई में 850 से अधिक बाह्य (extramural) परियोजनाएं और 100 से अधिक आंतरिक (intramural) परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं, जो न केवल एक स्नातकोत्तर संस्थान के रूप में बल्कि शिक्षा और अनुसंधान में उत्कृष्टता के केंद्र के रूप में इसकी स्थिति को दर्शाती हैं।” उन्होंने एक साथ अग्न्याशय-गुर्दा प्रत्यारोपण, गुर्दा प्रत्यारोपण और यकृत प्रत्यारोपण में संस्थान की विशेषज्ञता की भी सराहना की।

श्री नड्डा ने कहा कि “इतने प्रतिष्ठित संस्थान से स्नातक होना छात्रों के लिए गर्व की बात है” और उन्होंने स्वयं पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ के अध्यक्ष के रूप में इस कार्यक्रम का हिस्सा होने पर गर्व व्यक्त किया।

श्री नड्डा ने जोर देकर कहा कि “प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में, भारत ने स्वास्थ्य सेवा सहित विभिन्न क्षेत्रों में एक ऐतिहासिक छलांग लगाई है।” उन्होंने चिकित्सा शिक्षा के बुनियादी ढांचे के विस्तार में नीतिगत निर्णयों की भूमिका को रेखांकित किया और कहा कि “20वीं सदी के अंत तक, भारत में केवल एक अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स ) और एक स्नातकोत्तर संस्थान था। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने छह नए एम्स की स्थापना शुरू की थी और पिछले 10 वर्षों में 16 और एम्स जोड़े गए हैं, जिससे कुल संख्या 23 हो गई है।”

श्री नड्डा ने आगे कहा कि सरकार का लक्ष्य देश भर में तृतीयक स्वास्थ्य देखभाल को मजबूत करना है। चिकित्सा शिक्षा को मजबूत करने की दिशा में सरकार के प्रयासों को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि “मेडिकल कॉलेजों की संख्या एक दशक पहले के 387 से बढ़कर आज 818 हो गई है। स्नातक (यूजी) मेडिकल सीटें 51,000 से बढ़कर 1,26,000 से अधिक हो गई हैं, अगले पांच वर्षों में 75,000 और यूजी और पीजी सीटें जोड़ने का लक्ष्य है, जिनमें से 28,000 सीटें पिछले दो वर्षों में ही जोड़ने का लक्ष्य हासिल कर लिया गया हैं। इसी तरह, स्नातकोत्तर (पीजी) सीटें 31,000 से बढ़कर लगभग 81,000-85,000 हो गई हैं।”

स्नातक छात्रों को संबोधित करते हुए श्री नड्डा ने कहा कि उनकी उपलब्धियां दृढ़ता, कड़ी मेहनत और प्रतिबद्धता का परिणाम हैं। साथ ही, उन्होंने उन्हें याद दिलाया कि “जहां बुनियादी शिक्षा एक अधिकार है, वहीं उच्च और व्यावसायिक शिक्षा एक विशेषाधिकार है जो महत्वपूर्ण सार्वजनिक निवेश द्वारा समर्थित है।” उन्होंने बताया कि “सरकार द्वारा प्रति छात्र प्रति वर्ष लगभग 30-35 लाख रुपये खर्च किए जाते हैं, और सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सीटें बढ़ाने के लिए अगले पांच वर्षों में प्रति छात्र 1.5 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।”

स्वास्थ्य सेवा के भविष्य के बारे में बात करते हुए, श्री नड्डा ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), स्टेम सेल अनुसंधान, जीन थेरेपी, प्रिसिजन मेडिसिन और टेलीहेल्थ सहित तकनीक की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने जोर देते हुए कहा “हालांकि तकनीकी प्रगति स्वास्थ्य सेवा को बदल रही है, लेकिन मानवीय भूमिका भी बनी रहनी चाहिए।” उन्होंने कहा “करुणा की अपनी ताकत होती है और यह चिकित्सा पद्धति के केंद्र में होनी चाहिए।” उन्होंने छात्रों को रोगियों और समाज के लाभ के लिए तकनीक का पूरी तरह से उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया, साथ ही यह सुनिश्चित करने को कहा कि सहानुभूति और करुणा उनके काम का मार्गदर्शन करती रहे।

उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे अपनी शिक्षा को समाज के लिए कुछ करने की जिम्मेदारी के रूप में देखें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि वे इसमें सार्थक योगदान देंगे, और साथ ही यह भी कहा कि दीक्षांत समारोह स्नातकों को उनके कर्तव्यों की याद दिलाने का एक अवसर होता है। उन्होंने उन्हें बाहरी मान्यताओं से परे देखने के लिए भी प्रोत्साहित किया, और ईमानदारी से अपना आत्म-मूल्यांकन करने, लगातार सुधार करने, तथा अपने प्रयासों और समर्पण के माध्यम से बेहतर पेशेवर और बेहतर इंसान बनते हुए उत्कृष्टता के उच्च मानकों को प्राप्त करने के लिए प्रयास करने के महत्व पर ज़ोर दिया।

अपने संबोधन के अंत में श्री नड्डा ने कहा कि स्नातक छात्र जीवन के एक नए चरण में प्रवेश कर रहे हैं, जहां सीखना व्यावहारिक और जिम्मेदारी आधारित होगा। उन्होंने उन्हें इस समझ के साथ आगे बढ़ने और पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च, चंडीगढ़ के मानकों और मूल्यों को बनाए रखने की सलाह दी।

दीक्षांत समारोह में 682 उम्मीदवारों को डिग्री दी गई, जिनमें 61 पीएचडी, 114 डीएम, 67 एमसीएच, 323 एमडी, 103 एमएस और 14 एमडीएस स्नातक शामिल थे। इसके अतिरिक्त, संस्थान की शैक्षणिक उत्कृष्टता को दर्शाते हुए 95 पदक (18 स्वर्ण, 37 रजत और 40 कांस्य) प्रदान किए गए।

इस अवसर पर प्रो. विवेक लाल, निदेशक, पीजीआईएमईआर और केंद्र सरकार तथा पंजाब एवं चंडीगढ़ सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

पृष्ठभूमि: 1962 में स्थापित और 1967 में ‘राष्ट्रीय महत्व का संस्थान’ घोषित पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़, तृतीयक स्वास्थ्य देखभाल, चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान के लिए भारत के प्रमुख संस्थानों में से एक है। एनआईआरएफ 2025 की मेडिकल श्रेणी में संस्थान ने दूसरा स्थान प्राप्त किया है।

क्षमता: संस्थान में 47 विशेषज्ञता विभागों में 2,233 बिस्तरों की क्षमता है।

रोगी सेवा: वार्षिक रूप से लगभग 27-28 लाख ओपीडी विजिट, 1 लाख इनपेशेंट प्रवेश और 95,000 से अधिक सर्जरी की जाती हैं।

आयुष्मान भारत: पीएम-जेएवाई (पीएम -जे ए वाई ) योजना के तहत लगभग 1.81 लाख मरीजों का इलाज किया गया है।

प्रत्यारोपण: 2025 में 250 गुर्दा प्रत्यारोपण किए गए। संस्थान एक साथ अग्न्याशय-गुर्दा प्रत्यारोपण (एसपीके) में राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी बना हुआ है।

अनुसंधान: डब्ल्यूएचओ, आईसीएमआर और अन्य अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों द्वारा समर्थित 800 से अधिक परियोजनाएं चल रही हैं।

विस्तार: संगरूर (पंजाब), ऊना (हिमाचल प्रदेश) और फिरोजपुर (पंजाब) में सैटेलाइट केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं ताकि क्षेत्रीय पहुंच बढ़ सके।

नवाचार: संस्थान ने दवाओं की आपूर्ति के लिए ‘ऑनलाइन इंडेंटिंग सिस्टम’ और मरीजों की सहायता के लिए ‘प्रोजेक्ट सारथी’ जैसे नवाचार लागू किए हैं।

भारत के अंतिम छोर पर स्थित स्वास्थ्य एवं कल्याण इकोसिस्टम को मजबूत बनाना
  • श्री प्रतापराव जाधव

अब जबकि भारत सभी के लिए न्यायसंगत, समावेशी और समग्र स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे के सपने को साकार करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, हमें एक मौलिक प्रश्न पूछना होगा: हम अंतिम गांव के अंतिम व्यक्ति तक सही समय पर गुणवत्तापूर्ण देखभाल पहुंचना कैसे सुनिश्चित करें?

इसका जवाब केवल बुनियादी ढांचे के विस्तार या उन्नत प्रौद्योगिकियों के उपयोग में ही नहीं, बल्कि उन प्रणालियों को मजबूत करने में भी निहित है जो स्वाभाविक रूप से सुलभ, सस्ती और समुदायों के भरोसे पर खरे उतरते हों। इस संदर्भ में, होम्योपैथी भारतीय पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों के साथ-साथ एक मौन लेकिन शक्तिशाली ताकत के रूप में उभर रही है और जमीनी स्तर पर समग्र स्वास्थ्य से जुड़े बुनियादी ढांचे को बदल रही है।

हम यह दिखाई दे रहा है कि होम्योपैथी कैसे जनजातीय क्षेत्रों, ग्रामीण इलाकों और स्वास्थ्य सेवाओं की कमी वाले शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की आपूर्ति से जुड़ी महत्वपूर्ण कमियों को दूर कर रही है। इसके प्रभाव का पता केवल व्यापकता से ही नहीं, बल्कि सबसे अधिक जरूरत वाले स्थानों – यानी अंतिम छोर – तक पहुंचने की क्षमता से भी चल रहा है।

अब जबकि हर वर्ष 10 अप्रैल को मनाया जाने वाला ‘विश्व होम्योपैथी दिवस’ करीब है, यह इस बात पर विचार करने का एक सही मौका है कि यह प्रणाली केवल व्यक्तिगत कल्याण ही नहीं बल्कि समग्र कल्याण का एक ऐसा मॉडल बनाने में भी योगदान दे रही है जो किफायती, पर्यावरण के अनुकूल और सामाजिक रूप से समावेशी हो। इस वर्ष विश्व होम्योपैथी दिवस की थीम “सतत स्वास्थ्य के लिए होम्योपैथी” है।

18वीं शताब्दी में सैमुअल हैनिमैन द्वारा विकसित और 19वीं शताब्दी में भारत लाई गई, होम्योपैथी “सिमिलिया सिमिलिबस क्यूरेंचर” यानी “समान से समान का उपचार” के सिद्धांत पर आधारित है। दशकों से एक समग्र और रोगी-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाते हुए, यह भारत की बहुआयामी स्वास्थ्य एवं कल्याण प्रणाली का एक अभिन्न अंग बन गई है।

जमीनी स्तर पर होम्योपैथी की सबसे बड़ी खूबी इसकी निरंतर देखभाल सुनिश्चित करने की क्षमता है। कई पिछड़े इलाकों में स्वास्थ्य सेवा टुकड़ों में बिखरी हुई नहीं होती, बल्कि निरंतर  और रिश्तों से सचालित होती है। होम्योपैथी का व्यक्ति-केन्द्रित उपचार का दृष्टिकोण, खासतौर पर पुरानी बीमारियों, बार-बार होने वाले संक्रमणों और जीवनशैली संबंधी विकारों के प्रबंधन के क्रम में चिकित्सक और रोगी के बीच दीर्घकालिक जुड़ाव को बढ़ावा देता है। यह निरंतरता उपचार के प्रति रोगी के समर्पण और समग्र स्वास्थ्य से जुड़े नतीजों में उल्लेखनीय सुधार करती है।

आज भारत में 290 से अधिक होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल हैं। साथ ही, देशभर में चिकित्सकों का एक विशाल नेटवर्क भी उपलब्ध है। फिर भी, होम्योपैथी के असली प्रभावों को संस्थानों में नहीं बल्कि जमीनी स्तर पर – झारखंड के जनजातीय जिलों, छत्तीसगढ़ के वन क्षेत्रों में और हिमाचल प्रदेश की दूरदराज की बस्तियों में – बेहतर ढंग से समझा जा सकता है। वहां एक अकेला चिकित्सक भी सामुदायिक स्वास्थ्य से जुड़े नतीजों में बदलाव ला सकता है।

होम्योपैथी की प्रमुख खूबियों में से एक इसकी सरलता भी है। दवाइयां किफायती होती हैं, इन्हें लाना-ले जाना आसान होता है और इनके भंडारण के लिए किसी जटिल भंडारण संरचना की जरूरत ही नहीं होती है। कमजोर आपूर्ति श्रृंखलाओं और सीमित स्वास्थ्य सेवा कर्मियों वाले इलाकों में, होम्योपैथी की ये विशेषताएं अनमोल हो जाती हैं।

जनजातीय समुदायों, जो हमारी आबादी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और अक्सर बीमारियों का बेमेल बोझ झेलते हैं, के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को सांस्कृतिक रूप से भी अनुकूल होना चाहिए। होम्योपैथी का सौम्य और गैर-आक्रामक रवैया पारंपरिक उपचार पद्धतियों के अनुरूप है, जिससे यह अपेक्षाकृत अधिक स्वीकार्य और सुलभ हो जाता है।

इसी क्षमता को पहचानते हुए, भारत सरकार ने होम्योपैथी को मुख्यधारा की स्वास्थ्य सेवाओं साथ जोड़ने के लिए कई कदम उठाए हैं। राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत, 12,500 से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिर (आयुष) स्थापित किए गए हैं, जो सामुदायिक स्तर पर होम्योपैथी सहित व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करते हैं।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि होम्योपैथी भारत में गैर-संक्रामक रोगों से निपटने में भी योगदान दे रही है। केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद (सीसीआरएच) ने मधुमेह, हृदय रोग और अन्य दीर्घकालिक बीमारियों से निपटने से संबंधित राष्ट्रीय कार्यक्रमों में होम्योपैथी को जोड़ा है। यह प्राथमिक देखभाल से परे इसकी प्रासंगिकता को दर्शाता है।

आपूर्ति के नए-नए मॉडल भी उतने ही उत्साहजनक हैं। आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के अंतर्गत सेवाओं के एक ही स्थान पर उपलब्ध होने की सुविधा ने पहुंच और विश्वास दोनों को बेहतर बनाया है। चलंत चिकित्सा इकाइयां जहां दूरदराज के इलाकों तक पहुंच रही हैं, वहीं सामुदायिक सहायता से जुड़ी पहलों और महामारी से निपटने से संबंधित कार्यक्रमों ने विभिन्न सार्वजनिक स्वास्थ्य परिदृश्यों में होम्योपैथी की अनुकूलता को प्रदर्शित किया है।

शायद सबसे कारगर मॉडल बुनियादी होम्योपैथी में प्रशिक्षित सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं का है। सही ज्ञान और रेफरल सिस्टम के सहयोग से, ये कार्यकर्ता न्यूनतम लागत पर स्वास्थ्य सेवाओं का व्यापक विस्तार कर सकते हैं। स्वास्थ्य रक्षा जैसे कार्यक्रम और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीसीआरएच) द्वारा संचालित संपर्क संबंधी पहलों ने पहले ही दिखा दिया है कि समुदाय-आधारित दृष्टिकोण सार्थक नतीजे दे सकते हैं।

भविष्य को देखते हुए, सतत स्वास्थ्य एवं कल्याण के महत्व को कम करके नहीं आंका जा सकता। स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती लागत, पुरानी बीमारियों का बढ़ता बोझ और रोगाणुरोधी प्रतिरोध जैसी उभरती चुनौतियों से निपटने हेतु ऐसे समाधानों की जरूरत है जो न केवल कारगर हों बल्कि आर्थिक और पर्यावरणीय रूप से व्यवहारिक भी हों।

होम्योपैथी इस दृष्टिकोण के साथ स्वाभाविक रूप से मेल खाती है। इसके कम लागत वाले उपचार परिवारों और सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणालियों पर वित्तीय बोझ को कम करते हैं। जबकि इसका न्यूनतम पर्यावरणीय प्रभाव, पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार स्वास्थ्य और कल्याण संबंधी कार्यप्रणालियों का समर्थन करता है।

अब हमारा ध्यान इन प्रयासों को व्यापक स्तर पर कार्यान्वित करने पर होना चाहिए।  इन प्रयासों में कम सुविधा वाले क्षेत्रों में प्रशिक्षण को मजबूत करना, दवाओं की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करना, गहन अनुसंधान एवं दस्तावेजीकरण को बढ़ावा देना और सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को सशक्त बनाना शामिल है।

विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा जब भौगोलिक स्थिति या सामाजिक-आर्थिक हैसियत की परवाह किए बिना गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा प्रत्येक नागरिक तक पहुंचेगी। होम्योपैथी, अपने गहरे सामुदायिक जुड़ाव और टिकाऊ दृष्टिकोण के साथ, इस लक्ष्य को हासिल  करने का मार्ग प्रशस्त करती है।

हमारी स्वास्थ्य प्रणाली की असली पहचान उसकी अत्याधुनिक सुविधाओं में नहीं, बल्कि हाशिए  पर रहने वाले लोगों की सेवा करने की उसकी क्षमता में निहित है। जब एक सरल और किफायती उपाय किसी दूरदराज के गांव में एक परिवार को राहत पहुंचाता है, तो यह इस    सशक्त विचार को पुष्ट करता है – कि भारत में स्वास्थ्य सेवाएं अधिक समावेशी, अधिक मानवीय और वास्तव में सार्वभौमिक होती जा रही हैं।

[लेखक आयुष राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) हैं]

AMRIT मरीज देखभाल को बड़ी मजबूती देने वाला कदम है: आयुष्मान भारत 4×4 व्हील ड्राइव की तरह मरीज सेवाओं को गति देता है, जबकि AMRIT इसकी किफायती व्यवस्था की रीढ़ है”

AMRIT मरीज देखभाल को बड़ी मजबूती देने वाला कदम है: आयुष्मान भारत 4×4 व्हील ड्राइव की तरह मरीज सेवाओं को गति देता है, जबकि AMRIT इसकी किफायती व्यवस्था की रीढ़ है” — प्रो. विवेक लाल, निदेशक, पीजीआईएमईआरपीजीआईएमईआर ने 14वीं AMRIT फार्मेसी के साथ बनाया राष्ट्रीय कीर्तिमान — देश के किसी भी सार्वजनिक क्षेत्र के अस्पताल में सर्वाधिक संख्या

चंडीगढ़, 30 मार्च 2026: AMRIT फार्मेसी को “मरीज देखभाल को बड़ी मजबूती देने वाला कदम” बताते हुए, प्रो. विवेक लाल, निदेशक, पीजीआईएमईआर ने आज कहा, “आयुष्मान भारत 4×4 व्हील ड्राइव की तरह कार्य करते हुए पीजीआईएमईआर में भारी मरीज भार को संभालने और बनाए रखने में सक्षम बना रहा है, जबकि AMRIT उपचार को किफायती बनाकर इसकी रीढ़ का कार्य करता है।” यह बात उन्होंने संस्थान की 14वीं AMRIT (Affordable Medicines and Reliable Implants for Treatment) फार्मेसी के उद्घाटन अवसर पर कही, जो देश के किसी भी सार्वजनिक क्षेत्र के अस्पताल में इस प्रकार की सर्वाधिक संख्या है।

नेहरू एक्सटेंशन ब्लॉक स्थित इस सुविधा का उद्घाटन प्रो. विवेक लाल द्वारा प्रो. आर.के. राठो, डीन (एकेडमिक्स); प्रो. संजय जैन, डीन (रिसर्च); श्री पंकज राय, उप-निदेशक (प्रशासन); प्रो. संदीप बंसल, अतिरिक्त चिकित्सा अधीक्षक; विभागाध्यक्षों, वरिष्ठ संकाय सदस्यों, रेजिडेंट्स, नर्सिंग अधिकारियों एवं पीजीआईएमईआर के अन्य कर्मचारियों की उपस्थिति में किया गया।

श्री राजेश नायर, उपाध्यक्ष, AMRIT फार्मेसी, भी अपनी टीम के साथ इस अवसर पर उपस्थित रहे, जो AMRIT पहल के निरंतर सहयोग और समन्वय को दर्शाता है।

सभा को संबोधित करते हुए प्रो. विवेक लाल ने AMRIT पहल को मरीज-केंद्रित देखभाल का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बताया और आयुष्मान भारत के लाभार्थियों के समर्थन में इसकी अहम भूमिका को रेखांकित किया।

उन्होंने कहा, “हर मरीज गुणवत्तापूर्ण और किफायती उपचार का हकदार है। AMRIT के माध्यम से हम प्रतिष्ठित और मानक कंपनियों की दवाइयों को काफी रियायती दरों पर उपलब्ध करा रहे हैं। यह पहल मरीज देखभाल की रीढ़ बन चुकी है।”

सेवाओं के व्यापक दायरे और दबाव पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा, “आयुष्मान भारत मरीजों तक पहुंच सुनिश्चित कर रहा है, बड़ी संख्या में मरीजों का समर्थन कर रहा है और यह सुनिश्चित कर रहा है कि आर्थिक बाधाएं उपचार में बाधा न बनें। AMRIT इस व्यवस्था को किफायती और सुलभ बनाकर इसे और मजबूत करता है।”

विस्तार योजनाओं का उल्लेख करते हुए निदेशक पीजीआईएमईआर ने बताया कि वर्तमान में 14 AMRIT आउटलेट्स कार्यरत हैं और संस्थान निकट भविष्य में 2 से 3 और आउटलेट्स स्थापित करने की योजना बना रहा है, ताकि किफायती दवाओं की अंतिम स्तर तक पहुंच सुनिश्चित की जा सके।

उन्होंने कहा, “कार्डियोलॉजी और आपातकालीन सेवाओं जैसे उच्च भार वाले क्षेत्रों में AMRIT आउटलेट्स को 24×7 उपलब्धता के साथ स्थापित किया जा रहा है, जहां आयुष्मान भारत लाभार्थियों के लिए विशेष सुविधा सुनिश्चित की जा रही है। यह कोई व्यावसायिक गतिविधि नहीं, बल्कि एक मरीज कल्याण आंदोलन है।”

AMRIT को एक परिवर्तनकारी पहल बताते हुए उन्होंने कहा, “यह मरीजों के लिए सबसे प्रभावी हस्तक्षेपों में से एक है। हम भारत सरकार के आभारी हैं कि उन्होंने इस तरह की जनहितकारी और प्रेरणादायक पहल को बढ़ावा दिया है।”

संचालन संबंधी चुनौतियों को स्वीकार करते हुए प्रो. लाल ने निरंतर सुधार पर बल दिया। उन्होंने कहा, “कोई भी प्रणाली 100 प्रतिशत परिपूर्ण नहीं होती, लेकिन हम अधिकतम दक्षता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उपलब्धता और रिफंड जैसी चुनौतियों को सक्रिय रूप से संबोधित किया जा रहा है तथा प्रक्रियाओं को और सुगम बनाने के लिए मंत्रालय से संवाद जारी है।”

उन्होंने बढ़ते मरीज भार को संभालने के लिए मजबूत प्रणालियों की आवश्यकता पर भी जोर दिया। “मरीजों की संख्या को देखते हुए हम AMRIT आउटलेट्स की निर्बाध कार्यप्रणाली और पर्याप्त स्टॉक सुनिश्चित कर रहे हैं, ताकि विशेष रूप से आयुष्मान भारत के तहत मरीज सेवाएं प्रभावित न हों,” उन्होंने कहा।

पीजीआईएमईआर की विरासत को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा, “1963 से पीजीआईएमईआर मरीज देखभाल का एक सशक्त स्तंभ रहा है। हमारी सेवाओं का स्तर विश्व के श्रेष्ठ संस्थानों के समकक्ष है और हम निरंतर बुनियादी ढांचे और प्रणालियों को सुदृढ़ कर रहे हैं।”

संस्थागत सुधारों पर बोलते हुए उन्होंने कहा, “परिवर्तन के मार्ग में अदृश्य बाधाएं होती हैं, लेकिन हम दृढ़ता से आगे बढ़ रहे हैं। जो पहलें पहले कठिन लगती थीं—जैसे AMRIT को क्रिटिकल केयर क्षेत्रों तक विस्तार देना—आज वे वास्तविकता बन चुकी हैं। ये बदलाव शांत लेकिन प्रभावशाली हैं।”

भविष्य की योजनाओं की जानकारी देते हुए प्रो. लाल ने बताया कि माननीय केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री 27 अप्रैल 2026 को पीजीआईएमईआर के दीक्षांत समारोह में भाग लेंगे। इस अवसर पर न्यूरोसाइंसेज सेंटर, एडवांस्ड मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य केंद्र, क्रिटिकल केयर सेंटर सहित कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं का उद्घाटन अपेक्षित है।

निदेशक पीजीआईएमईआर ने प्रशासनिक और वित्तीय प्रक्रियाओं में सुधार की भी सराहना की। उन्होंने कहा, “हाल के महीनों में वित्तीय प्रक्रियाएं अधिक सुगम हुई हैं, जिससे खरीद प्रक्रिया तेज हुई है और सेवा वितरण में सुधार आया है। इससे AMRIT आउटलेट्स के विस्तार और कुशल संचालन में भी मदद मिली है।”

14वीं AMRIT फार्मेसी का उद्घाटन पीजीआईएमईआर की किफायती स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति प्रतिबद्धता को और मजबूत करता है, जहां AMRIT और आयुष्मान भारत मिलकर बढ़ते मरीज भार को संभालने और जेब से होने वाले खर्च को कम करने में एक सशक्त पूरक व्यवस्था के रूप में कार्य कर रहे हैं।

कायाकल्प पुरस्कार 2025–26 में पीजीआईएमईआर ने दूसरा स्थान हासिल कर राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ाया गौरवचंडीगढ़

28 मार्च 2026: पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (PGIMER),  चंडीगढ़ ने कायाकल्प  योजना के अंतर्गत वर्ष 2025–26 में केंद्रीय सरकारी अस्पतालों/संस्थानों की श्रेणी में दूसरा स्थान प्राप्त कर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि अपने नाम की है। यह प्रतिष्ठित पुरस्कार भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा प्रदान किया जाता है।स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार ने स्वच्छता, हाइजीन, संक्रमण नियंत्रण, अस्पताल रखरखाव तथा रोगी-अनुकूल वातावरण बनाए रखने में पीजीआईएमईआर के निरंतर उत्कृष्ट प्रदर्शन को मान्यता देते हुए संस्थान को रुपये 1,50,00,000/- (एक करोड़ पचास लाख रुपये) की प्रोत्साहन राशि स्वीकृत की है।

 कायाकल्प  पहल का उद्देश्य देशभर के सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों में स्वच्छता, अपशिष्ट प्रबंधन, संक्रमण नियंत्रण तथा समग्र रोगी देखभाल वातावरण में उत्कृष्टता को बढ़ावा देना है। पीजीआईएमईआर की यह उपलब्धि गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करने और राष्ट्रीय मानकों का अनुपालन करने की संस्थान की सतत प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

 अपनी खुशी व्यक्त करते हुए प्रो. विवेक लाल, निदेशक, PGIMER ने कहा, “यह उपलब्धि रोगी देखभाल और अस्पताल स्वच्छता में पीजीआईएमईआर की उत्कृष्टता के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का प्रमाण है। राष्ट्रीय स्तर पर दूसरा स्थान प्राप्त करना हमारे संपूर्ण कार्यबल की निष्ठा और सामूहिक प्रयासों का परिणाम है, जो हमारे लिए वास्तविक कर्मयोगी हैं। हम अपने सिस्टम को और अधिक सुदृढ़ बनाते रहेंगे ताकि भविष्य में और ऊँचे मानक स्थापित कर सकें।”

उसी भावना को दोहराते हुए श्री पंकज राय, उपनिदेशक (प्रशासन), PGIMER ने कहा,  “कायकल्प केवल एक पुरस्कार नहीं, बल्कि सतत गुणवत्ता सुधार की यात्रा है। यह मान्यता हमारे प्रशासनिक प्रक्रियाओं, मॉनिटरिंग तंत्र और स्टाफ की भागीदारी रणनीतियों की प्रभावशीलता को दर्शाती है, जिन्होंने स्वच्छता और अस्पताल प्रबंधन के उच्च मानकों को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।”

 प्रो. विपिन कौशल, मेडिकल सुपरिंटेंडेंट, PGIMER ने कहा,  “यह उपलब्धि स्वच्छ और सुरक्षित अस्पताल वातावरण सुनिश्चित करने में क्लिनिकल टीमों, नर्सिंग स्टाफ और सफाई कर्मियों की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करती है। संक्रमण नियंत्रण और रोगी सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकताएँ हैं, और हम इन मानकों को बनाए रखने तथा और अधिक उन्नत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”

 पीजीआईएमईआर स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में उत्कृष्टता की ओर निरंतर अग्रसर है और देशभर के संस्थानों के लिए नए मानक स्थापित कर रहा है।

“भगवंत मान के साथ शानदार चार साल”

-विधायक छीना ने धांधारी कलां में जनसभा आयोजित की

-चार साल का लेखा-जोखा जनता के सामने प्रस्तुत किया

लुधियाना, 27 मार्च (000) – पंजाब सरकार के चार साल पूरे होने के उपलक्ष्य में, “भगवंत मान के साथ शानदार चार साल” अभियान के तहत, विधायक राजिंदरपाल कौर छीना ने वार्ड संख्या 32 के धांधारी कलां गांव में एक जनसभा आयोजित की, जिसमें क्षेत्र के निवासियों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।

विधायक छिना ने इस दौरान क्षेत्र में किए गए विकास कार्यों की विस्तृत जानकारी दी और लोगों के बहुमूल्य सुझावों और समस्याओं को ध्यानपूर्वक सुना।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सरकार और जनता के बीच सीधा संवाद स्थापित करना और भविष्य के विकास की योजनाओं पर चर्चा करना था।

उन्होंने कहा,
“ईमानदार नीतियों, स्पष्ट इरादों और जनता के भरोसे के बल पर पंजाब में बदलाव की लहर जारी है। आम आदमी पार्टी की सरकार जनता के लिए, जनता के साथ खड़ी है और भविष्य में भी इसी तरह सेवा करती रहेगी।”

उन्होंने आगे कहा कि सरकार हर वर्ग के कल्याण के लिए निरंतर काम कर रही है और जनता के सहयोग से ‘रंगला पंजाब’ का पुनर्निर्माण किया जाएगा।