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असम में बाढ़ का कहर : PM ने सांसदों के साथ की समीक्षा बैठक विधायकों को 1 महीने का वेतन देने का किया ऐलान

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि उन्होंने असम के विभिन्न हिस्सों में व्याप्त बाढ़ की स्थिति पर राज्य के सांसदों के साथ बैठक की। इसके साथ ही आश्वासन दिया कि केंद्र सरकार प्रभावित लोगों की सहायता के लिए असम सरकार के साथ मिलकर काम कर रही है।

पीएम मोदी ने क्या बताया? 

एक्स पर एक पोस्ट में प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने लोगों की सुरक्षा और कुशलक्षेम के लिए प्रार्थना की। उन्होंने एक्स पर लिखा,’असम के सांसदों से मुलाकात की और राज्य के विभिन्न हिस्सों में बाढ़ की मौजूदा स्थिति पर चर्चा की। केंद्र सरकार प्रभावित लोगों की सहायता के लिए असम सरकार के साथ मिलकर काम कर रही है। मैं सभी की सुरक्षा और कुशल मंगल की कामना करता हूं। 

असम में क्या है हालात?

इस बीच, असम के शिवसागर जिले में बाढ़ की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है क्योंकि नौजान गांव में बाढ़ का पानी घरों में घुस गया और सड़कें जलमग्न हो गईं, जिससे सैकड़ों परिवार आश्रय, भोजन और सुरक्षित पेयजल तक पहुंच के लिए संघर्ष कर रहे हैं, जबकि राहत अभियान तेज कर दिए गए हैं।


वहीं, असम के विधायकों ने एक बड़ा फैसला लिया है। रायजोर दल को छोड़कर सभी विधायकों ने मंगलवार को राज्य के बाढ़ पीड़ितों की राहत और पुनर्वास के लिए अपने एक महीने का वेतन दान करने की घोषणा की।

अध्यक्ष रणजीत कुमार दास ने क्या एलान किया?

अध्यक्ष रणजीत कुमार दास ने कहा कि वह और उपाध्यक्ष हब्बे टेरोन बाढ़ राहत के लिए एक महीने का वेतन दान करेंगे। उन्होंने घोषणा की, ‘हमारे अलावा, विधानसभा सचिवालय के सभी कर्मचारी पीड़ितों की राहत और पुनर्वास के लिए एक दिन का वेतन दान करेंगे।’

संसदीय कार्य मंत्री ने क्या कहा? 

इस पहल का स्वागत करते हुए संसदीय कार्य मंत्री पीयूष हजारिका ने कहा कि भाजपा के सभी विधायक भी एक महीने का वेतन दान करेंगे। राज्य में तृणमूल कांग्रेस के इकलौते विधायक शेरमन अली अहमद ने भी ऐसा ही किया और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिए अपने एक महीने का वेतन दान करने की घोषणा की।

वायुसेना की ओर से राहत अभियान जारी

भारतीय वायुसेना की ओर से असम और नागालैंड के बाढ़ प्रभावित इलाकों में मानवीय सहायता एवं आपदा राहत अभियान लगातार जारी है। खराब मौसम और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद वायुसेना राहत एवं बचाव कार्यों में पूरी तत्परता से जुटी हुई है। मंगलवार को भारतीय वायुसेना ने बताया कि पिछले 10 दिनों के दौरान उसके हेलीकॉप्टरों ने बाढ़ में फंसे 458 लोगों को सुरक्षित बचाकर निकाला है।

वायुसेना के मुताबिक अभी तक प्रभावित क्षेत्रों में हवाई मार्ग से 9 टन से अधिक आवश्यक राहत सामग्री भी पहुंचाई गई है। वायुसेना के अधिकारी व जवान रहात अभियान के दौरान लगातार दुर्गम और जलमग्न क्षेत्रों में उड़ान भर रहे है।

बता दे कि कुल 631 गांव अभी भी जलमग्न हैं। वहीं, राहत कार्य 184 शिविरों और वितरण केंद्रों के माध्यम से जारी हैं, जहां लगभग 28,700 लोगों को आश्रय दिया गया है। 

राज्य दूरसंचार आपदा समन्वय समिति ने आपदा तैयारी की समीक्षा की

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

राज्य दूरसंचार आपदा समन्वय समिति (STDCC), हरियाणा की अर्धवार्षिक बैठक आज श्री राधा चरण शाक्य, ITS, प्रमुख, हरियाणा LSA के मार्गदर्शन में आयोजित की गई। बैठक की कार्यवाही का संचालन DDG (प्रौद्योगिकी), अध्यक्ष–STDCC, दूरसंचार विभाग, हरियाणा द्वारा किया गया, जिसमें राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA), राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) तथा हरियाणा में कार्यरत सभी दूरसंचार सेवा प्रदाताओं (TSPs) सहित प्रमुख हितधारकों ने भाग लिया।

बैठक में आगामी मानसून सत्र, प्राकृतिक आपदाओं एवं अन्य आपात स्थितियों के लिए दूरसंचार नेटवर्क की तैयारियों की समीक्षा की गई। साथ ही आपदा प्रतिक्रिया एवं पुनर्प्राप्ति कार्यों के दौरान निर्बाध संचार सेवाएं सुनिश्चित करने हेतु उपायों पर भी विचार-विमर्श किया गया।

प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए श्री संजय कुमार ने कहा कि विश्वसनीय दूरसंचार सेवाएं आपदा प्रबंधन, आपातकालीन प्रतिक्रिया, प्रशासन, बैंकिंग, स्वास्थ्य सेवाएं, डिजिटल भुगतान तथा जन सुरक्षा की आधारशिला हैं। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि वर्तमान डिजिटल युग में निर्बाध दूरसंचार कनेक्टिविटी अत्यंत आवश्यक हो गई है तथा अल्पकालिक सेवा बाधाएं भी नागरिकों एवं आर्थिक गतिविधियों पर गंभीर प्रभाव डाल सकती हैं।

समिति ने यह संतोष व्यक्त किया कि वर्ष 2025 में हरियाणा में आई गंभीर बाढ़ की स्थिति के बावजूद राज्य में दूरसंचार सेवाएं अधिकांशतः बाधित नहीं हुईं। यह उपलब्धि दूरसंचार सेवा प्रदाताओं द्वारा किए गए सक्रिय तैयारी उपायों का परिणाम है, जिसमें संवेदनशील दूरसंचार स्थलों के प्लिंथ स्तर को ऊंचा करना, महत्वपूर्ण अवसंरचना को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करना, पावर बैकअप व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करना तथा सेवा बहाली क्षमताओं में सुधार शामिल हैं। समिति ने राज्य में दूरसंचार अवसंरचना की सुदृढ़ता बढ़ाने हेतु सभी सेवा प्रदाताओं के समर्पित प्रयासों की सराहना की।

समिति ने राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) एवं राज्य प्रशासन द्वारा दूरसंचार सेवा प्रदाताओं एवं उनके विक्रेताओं को निर्बाध डीजल आपूर्ति सुनिश्चित करने में दिए गए सक्रिय सहयोग की भी सराहना की, विशेषकर पश्चिम एशिया संकट के चुनौतीपूर्ण समय के दौरान। यह समय पर उपलब्ध कराई गई सहायता दूरसंचार अवसंरचना के संचालन को बनाए रखने तथा राज्य में संचार सेवाओं को निर्बाध बनाए रखने में महत्वपूर्ण सिद्ध हुई।

क्षेत्र में हालिया भूकंपीय गतिविधियों के मद्देनजर समिति ने भूकंप संबंधी परिस्थितियों के लिए तैयारी को और मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया। दूरसंचार सेवा प्रदाताओं को महत्वपूर्ण दूरसंचार अवसंरचना का संरचनात्मक सुरक्षा आकलन करने, नेटवर्क में अतिरिक्त वैकल्पिक व्यवस्था (रेडंडेंसी) बढ़ाने, बैकअप पावर व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने तथा आपात स्थितियों में संचार सेवाओं की निरंतरता सुनिश्चित करने हेतु मजबूत बहाली तंत्र विकसित करने की सलाह दी गई।

समिति ने दूरसंचार विभाग के आपदा प्रतिक्रिया मानक संचालन प्रक्रिया (SOP-2020) के कार्यान्वयन की समीक्षा की तथा नियमित आपदा तैयारी अभ्यास, मॉक ड्रिल, विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय एवं सतत क्षमता निर्माण के महत्व को दोहराया। यह भी रेखांकित किया गया कि आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र का समय-समय पर परीक्षण संचालन तत्परता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है।

आपात स्थितियों के दौरान इंट्रा सर्किल रोमिंग (ICR) के त्वरित सक्रियण की तैयारी की भी विस्तृत समीक्षा की गई। दूरसंचार सेवा प्रदाताओं को ICR सक्रियण में लगने वाले समय को कम करने तथा नियमित परीक्षण करने की सलाह दी गई, ताकि आपातकालीन संचार सेवाएं बिना किसी बाधा के उपलब्ध रह सकें। विशेष रूप से आपदा की स्थिति में आपातकालीन सेवाओं, विशेषकर 112, तक निर्बाध पहुंच सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।

समिति को अवगत कराया गया कि कॉमन अलर्ट प्रोटोकॉल (CAP) आधारित प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली का हरियाणा में सभी दूरसंचार सेवा प्रदाताओं के साथ सफलतापूर्वक परीक्षण किया जा चुका है तथा यह आम जनता को आपदा चेतावनी संदेश प्रसारित करने हेतु पूर्ण रूप से कार्यरत है। यह प्रणाली आपात स्थितियों के दौरान समय पर चेतावनी प्रदान करने तथा नागरिकों द्वारा शीघ्र प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने में राज्य की क्षमता को महत्वपूर्ण रूप से सुदृढ़ करेगी।

बैठक का समापन दूरसंचार विभाग, राज्य सरकार की एजेंसियों, आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों एवं दूरसंचार सेवा प्रदाताओं द्वारा हरियाणा में दूरसंचार सुदृढ़ता को मजबूत करने हेतु आपसी समन्वय के साथ कार्य करने की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए किया गया। समिति ने नियमित समीक्षा, संयुक्त अभ्यास, अवसंरचना सुदृढ़ीकरण, उभरती प्रौद्योगिकियों को अपनाने तथा प्रभावी अंतर-एजेंसी समन्वय के माध्यम से सभी प्रकार की आपदाओं एवं आपात स्थितियों में निर्बाध दूरसंचार सेवाएं सुनिश्चित करने हेतु तैयारी को निरंतर बढ़ाने का संकल्प लिया।

बोरवेल में गिरे बच्चे को लगभग नौ घंटे बाद बचाया गया

होशियारपुर/सत्ता संदेश

डिप्टी कमिश्नर ने बच्चे को बचाने के लिए NDRF, SDRF, पंजाब पुलिस, सिविल अधिकारियों और स्थानीय निवासियों के अथक प्रयासों के लिए उनका धन्यवाद किया

बचाव अभियान के दौरान पंजाब के जेल मंत्री डॉ. रवजोत सिंह और सांसद डॉ. राज कुमार चब्बेवाल अंत तक मौजूद रहे

होशियारपुर, 15 मई: शुक्रवार शाम 4 बजे पास के गांव चक समाना में एक बोरवेल में गिरे चार साल के बच्चे को NDRF, SDRF, पंजाब पुलिस, प्रशासनिक अधिकारियों और स्थानीय निवासियों की मदद से लगभग नौ घंटे बाद सुरक्षित निकाल लिया गया।

बच्चे गुरकरन सिंह (हरिंदर और आशा का बेटा, जो मज़दूर हैं) को रात करीब 12:40 बजे बोरवेल से बाहर निकाला गया और तुरंत मेडिकल जांच के लिए अस्पताल ले जाया गया।

डिप्टी कमिश्नर आशिका जैन और SSP संदीप कुमार मलिक ने शुरू से ही इस अभियान का नेतृत्व किया और इसे सफल बनाने के लिए टीमों के दृढ़ संकल्प की खूब सराहना की।

बचाव अभियान के सफलतापूर्वक पूरा होने के बाद, डिप्टी कमिश्नर आशिका जैन ने कहा कि बच्चे को बचाने के बाद, उसे आगे की जांच के लिए एक मेडिकल टीम के साथ एम्बुलेंस में अस्पताल भेजा गया। उन्होंने बताया कि यह घटना शाम करीब 4 बजे हुई थी और सूचना मिलते ही प्रशासनिक अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंच गए। उन्होंने कहा कि गुरकरन अपने घर के पास ही एक खुले बोरवेल में गिर गया था, जिसे कल ही खोदा गया था। उन्होंने बताया कि बोरवेल के ठीक बगल में 30 फीट से ज़्यादा गहरा गड्ढा खोदने के बाद, बचाव टीमें बोरवेल के साथ बनाए गए एक संकरे रास्ते से शाफ़्ट तक पहुंचीं और काफी मशक्कत के बाद बच्चे को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। उन्होंने बताया कि बोरवेल में गिरने के बाद बच्चा करीब 30 फीट की गहराई पर फंसा हुआ था और बचाव अभियान में तेज़ी लाने के लिए मौके पर ज़रूरी मशीनरी मंगवाई गई थी। उन्होंने बताया कि ज़िला प्रशासन ने शाफ़्ट में एक कैमरा और ऑक्सीजन पाइप भी नीचे उतारा था, जिसकी मदद से फुटेज में बच्चे की हलचल देखी जा रही थी।

डिप्टी कमिश्नर ने कहा कि NDRF की टीम, जिसमें 40 से ज़्यादा सदस्य शामिल थे, ने इस मुश्किल समय में अपनी विशेषज्ञता का इस्तेमाल करते हुए इस अभियान को सुरक्षित रूप से सफल बनाया। इस बीच, पंजाब के जेल मंत्री डॉ. रवजोत सिंह और होशियारपुर से लोकसभा सदस्य डॉ. राज कुमार चब्बेवाल, जो इस पूरे ऑपरेशन के दौरान मौके पर मौजूद थे, ने गुरकरन को बचाने के लिए सभी टीमों द्वारा किए गए अथक प्रयासों की सराहना की। डॉ. रवजोत ने कहा कि जिला प्रशासन ने NDRF, अन्य टीमों और स्थानीय ग्रामीणों की मदद से बच्चे को बोरवेल से बाहर निकालने के लिए पर्याप्त व्यवस्था की थी, जिन्होंने गुरकरन की जान बचाई। सांसद डॉ. चब्बेवाल ने कहा कि यह एक बहुत ही नाजुक ऑपरेशन था और टीमों के लगातार प्रयासों के कारण, लगभग सात घंटे की मशक्कत के बाद इसे सफलतापूर्वक पूरा किया गया।

SSP संदीप कुमार मलिक ने भी बच्चे को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए बचाव टीमों का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि टीमों का जज्बा बहुत ही सराहनीय था, जिसके कारण गुरकरन की जान बच सकी। यह भी उल्लेखनीय है कि बचाव कार्यों के दौरान, सामाजिक और धार्मिक संगठनों ने भी टीमों का हौसला बढ़ाया और विभिन्न तरीकों से उनकी मदद की

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने उत्तर प्रदेश के गाज़ियाबाद में NDRF को ‘प्रेसिडेंट्स कलर’ प्रदान किए जाने के समारोह को मुख्य अतिथि के तौर संबोधित किया

उत्तर प्रदेश / सत्ता संदेश

मोदी सरकार हीट वेव से होने वाली मृत्यु दर को शून्य तक लाने की दिशा में कार्य कर रही है

पिछले 20 वर्षों में अपने साहस, समर्पण और परिश्रम से देश का विश्वास अर्जित कर ‘प्रेसिडेंट्स कलर’ हासिल करने वाले NDRF के सभी जवानों को बधाई

CAPF के जवानों ने 7 करोड़ से अधिक वृक्ष लगाए हैं, जो पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे

भारत आज आपदा प्रबंधन में ‘ग्लोबल लीडर’ और ‘फर्स्ट रिस्पॉन्डर’ बनकर उभरा है तथा ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ की भावना को धरातल पर उतारा है

पहले आपदा प्रबंधन में प्रतिक्रिया राहत-आधारित थी, लेकिन मोदी सरकार ने इसे सिर्फ रिएक्टिव नहीं, बल्कि प्रिवेंटिव और प्रोडक्टिव बनाया है

मोदी सरकार आपदा प्रबंधन के दृष्टिकोण को ‘मिनिमम कैजुअल्टी’ से ‘ज़ीरो कैजुअल्टी’ तक पहुँचा रही है

आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में मोदी जी के 10-सूत्रीय एजेंडा और 360-डिग्री अप्रोच ने डिज़ास्टर रिस्क मैनेजमेंट को नई दिशा दी है

1.5 लाख से अधिक लोगों की जान बचाने और 9 लाख से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुँचाने वाले NDRF के जवानों को देखते ही मन में सुरक्षा और भरोसे का भाव बढ़ जाता है

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज उत्तर प्रदेश के गाज़ियाबाद में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) को ‘प्रेसिडेंट्स कलर’ प्रदान किए जाने के समारोह को मुख्य अतिथि के तौर पर संबोधित किया। इस अवसर पर केन्द्रीय गृह सचिव, आसूचना ब्यूरो (IB) के निदेशक और NDRF के महानिदेशक सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

समारोह को संबोधित करते हुए केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि NDRF को ‘प्रेसिडेंट्स कलर’ प्रदान किया जाना सिर्फ NDRF की सराहनीय सेवाओं को स्वीकार किया जाना ही नहीं, बल्कि यह SDRF, पंचायत से लेकर राज्य तक पूरी मशीनरी, NCC, NSS और हजारों की संख्या में सेवा में लगे आपदा मित्रों की सेवाओं का राष्ट्रपति महोदया द्वारा अनुमोदन किया जाना है। उन्होंने कहा कि NDRF के जवान देश में कहीं भी ‘आपदा सेवा सदैव सर्वत्र’ के घोष के साथ जाते हैं। NDRF के जवान देश-दुनिया में जहाँ कहीं भी गए, वहाँ प्यार और भरोसा अर्जित किया है। देश में कहीं भी आपदा आई हो या आने वाली हो, जब NDRF के जवान वहाँ पहुँचते हैं, तो जनता राहत की साँस लेती है कि अब उनका बचाव हो जाएगा। श्री शाह ने कहा कि NDRF ने अपनी स्थापना के 20 साल में देश में कहीं भी बाढ़, भूकंप, चक्रवात या किसी अन्य प्रकार की आपदा आई हो, अपने सफल कार्यों के आधार पर पूरे देश की 140 करोड़ जनता का विश्वास अर्जित किया है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदा हो या कोई भीषण हादसा, NDRF की एक झलक ही देशवासियों के मन में सुरक्षा और भरोसे का भाव भर देती है। इस बल ने अब तक 1.5 लाख से अधिक लोगों की जान बचाई है और 9 लाख से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुँचाया है।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि NDRF को प्रेसिडेंट्स कलर मिलना, NDRF के समस्त बल के सेवा, साहस, शौर्य और समर्पण के संचित गुणों का सम्मान है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) और NDRF ने अपने कार्यकाल में आपदा बचाव के क्षेत्र में भारत को वैश्विक नक्शे पर स्थापित करने का काम किया है। यह हम सभी के लिए गौरव की बात है, लेकिन देश के गृह मंत्री के नाते मेरे लिए यह विशेष गौरव का विषय है।

श्री अमित शाह ने कहा कि आज 116 करोड़ रुपए से ज्यादा की लागत वाली छह परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन किया गया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इन परियोजनाओं के माध्यम से NDRF देश की जनता को किसी भी प्रकार की आपदा से सुरक्षित रखने के लिए और भी मजबूती से काम कर पाएगी।

गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में 2014 से अब तक हमने न केवल आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए काम किया है, बल्कि अब हम ऐसी स्थिति में आ गए हैं कि अब हम जीरो कैजुअल्टी की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। जिस आपदा का पूर्वानुमान और मौसम विज्ञान विभाग से पूर्व जानकारी मिल जाती है, वहाँ जन, धन की सुरक्षा सुनिश्चित करना हमारा लक्ष्य होता है। उन्होंने कहा कि NDMA ने आपदा प्रबंधन से जुड़े नीति विषयक मामलों में ढेर सारे निर्णय लिए, बहुत सारे दिशानिर्देश जारी किए, और जन जागरूकता पैदा करने की दिशा में सफल प्रयास किए, जिसकी वजह से धीरे-धीरे आपदा बचाव देश का संस्कार बनता जा रहा है।

श्री अमित शाह ने कहा कि NDRF ने न केवल नागरिकों, बल्कि उनके साथ रहने वाले मूक पशुओं को भी बचाकर उत्कृष्ट सेवा का उदाहरण प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य है कि आपदा में जनहानि शून्य हो और संपत्तियों का नुकसान न्यूनतम हो।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि भारत सरकार का गृह मंत्रालय हीट वेव जैसी गंभीर चुनौतियों का भी बहुत ही प्रभावी तरीके से सामना करने की तैयारी कर चुका है। उन्होंने कहा कि सरकार हीट वेव से होने वाली मृत्यु दर को शून्य तक लाने की दिशा में कार्य कर रही है।

श्री अमित शाह ने कहा कि गृह मंत्रालय और NDRF ने क्षमता निर्माण और सामुदायिक भागीदारी पर बहुत बल दिया है। NDRF ने अपने 8,500 से अधिक जवानों, 10,000 से ज्यादा सिविल डिफेंस कर्मियों और 2 लाख 20 हजार से अधिक वॉलंटियर्स को प्रशिक्षित करने का भागीरथ कार्य किया है। उन्होंने कहा कि दो वर्षों में 10,500 से अधिक नाविकों को भी प्रशिक्षित किया गया है।

गृह मंत्री ने कहा कि कम्युनिटी बेस्ड आपदा रिस्पॉन्स को मजबूत करने के लिए आपदा मित्रों की टोली हर खतरे का मुकाबला करने में उपयोगी साबित होगी। उन्होंने कहा कि पहले आपदा प्रबंधन में प्रतिक्रिया राहत-आधारित थी, लेकिन मोदी सरकार ने इसे सिर्फ रिएक्टिव नहीं, बल्कि प्रिवेंटिव और प्रोडक्टिव बनाया है। आपदा के कहर से जानमाल का नुकसान न्यूनतम करने के विषय को प्रधानमंत्री मोदी जी ने न केवल भारत, बल्कि पूरे विश्व में एक थ्योरी के रूप में स्थापित किया है। बीते 12 साल में आपदा से बचाव सिर्फ एक सिस्टम नहीं बल्कि इकोसिस्टम बन चुका है। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायत से लेकर भारत सरकार तक, भारतीय मौसम विभाग (IMD) के वैज्ञानिक से लेकर आम नागरिक तक हर जगह एक साथ एक उद्देश्य के लिए काम करने का एक नया तरीका भारत सरकार ने अपनाया है।

श्री अमित शाह ने कहा कि भारत में कई भीषण प्राकृतिक आपदाएं आई। ओडिशा के सुपर साइक्लोन, गुजरात के भूकंप और हिंद महासागर की सुनामी ने देश के जनजीवन को झकझोर कर रख दिया। इन घटनाओं के कारण देश में एक मजबूत आपदा प्रबंधन व्यवस्था की आवश्यकता को महसूस किया गया। आपदा प्रबंधन अधिनियम भी आया। NDMA और NDRF का भी गठन हुआ। उन्होंने कहा कि अब 16 बटालियनों के साथ NDRF एक सशक्त बल बन चुका है। NDRF ने अपनी कार्यपद्धति से SDRF की ट्रेनिंग और SDRF के साथ साझा अभियानों से अपनी शक्ति बढ़ाया है। प्रोएक्टिव डिप्लॉयमेंट और प्रीपोजिशनिंग जैसे उपाय हमें नुकसान से बचाने में कारगर साबित हो चुके हैं। श्री शाह ने कहा कि 2008 में बिहार में कोसी नदी में आई बाढ़ NDRF के लिए बहुत बड़ी परीक्षा थी। बाद में ऐसी कई आपदाएं आई, जैसे – धराली में फ्लैश फ्लड, चासोटी में क्लाउडबर्स्ट, जम्मू, पंजाब और दिल्ली के फ्लड्स, साइक्लोन मोंथा और साइक्लोन दितवाह। वहीं, अमरनाथ यात्रा, महाकुंभ, चारधाम यात्रा, मणि महेश, सबरीमाला यात्रा, भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा जैसे कई महत्वपूर्ण आयोजनों में NDRF ने बहुत अच्छे तरीके से समाज के साथ मिलकर काम किया।

गृह मंत्री ने कहा कि आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में मोदी जी के 10-सूत्रीय एजेंडा और 360-डिग्री अप्रोच ने डिज़ास्टर रिस्क मैनेजमेंट को नई दिशा दी है। इसके माध्यम से रिस्क मैपिंग, अर्ली वार्निंग, कम्युनिटी पार्टिसिपेशन, और गाइडलाइंस के निर्माण जैसे क्षेत्रों को मजबूती मिली है। श्री शाह ने कहा कि वैश्विक स्तर पर आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में भारत आज निर्विवाद रूप से एक ग्लोबल लीडर और फर्स्ट रिस्पॉंडर के रूप में उभरा है। ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ को व्यवहार में उतारते हुए इसे धरातल पर लागू किया गया है। श्री शाह ने कहा कि मोदी जी की प्रेरणा से ‘डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर’ के क्षेत्र में भारत ने वैश्विक स्तर पर नेतृत्व किया है। CDRI के आज 48 देश सदस्य बन चुके हैं और भारत के साथ मिलकर इस दिशा में कार्य कर रहे हैं।

श्री अमित शाह ने देशभर के सभी केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPFs) के जवानों को बधाई देते हुए कहा कि 2021 से अब तक CAPFs के सभी जवानों ने देशभर में 7 करोड़ से अधिक पेड़ लगाने का काम किया है। उन्होंने कहा कि यह समस्त CAPFs के मानवीय दृष्टिकोण और पर्यावरण के प्रति जागरूकता का प्रतीक है।

लुधियाना में शुक्रवार रात 8 बजे ब्लैकआउट मॉक ड्रिल, प्रशासन ने पूर्ण सहयोग की अपील की

लुधियाना/सत्ता संदेश

पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (पीएयू) और अगर नगर पीएसपीसीएल डिवीजन के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में शुक्रवार को रात 8:00 बजे से 8:15 बजे तक ब्लैकआउट मॉक ड्रिल आयोजित की जाएगी।

हितधारकों के साथ बैठक के दौरान, सहायक आयुक्त पायल गोयल ने निवासियों से सभी प्रकार की बत्तियाँ बंद करके ब्लैकआउट अभ्यास का अनुपालन करने का आग्रह किया। नागरिकों को सचेत करने के लिए लगभग 7:55 बजे सायरन बजाया जाएगा और धार्मिक स्थलों से सार्वजनिक घोषणाएँ की जाएंगी। सायरन बजने के तुरंत बाद, पीएसपीसीएल बिजली आपूर्ति काट देगा।

ड्रिल पीएयू में अलार्म के साथ शुरू होगी और इसमें राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ), अग्निशमन विभाग, जिला प्रशासन, नगर निगम, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, नागरिक सुरक्षा और एनसीसी सहित कई एजेंसियों के समन्वित प्रयास शामिल होंगे। जिला प्रशासन द्वारा आयोजित इस अभ्यास का उद्देश्य वास्तविक आपातकालीन स्थिति का अनुकरण करना है।

सहायक आयुक्त ने इस बात पर जोर दिया कि यह अभ्यास किसी भी अप्रत्याशित आपात स्थिति के लिए एहतियाती उपाय है। निवासियों से अनुरोध किया गया है कि वे अभ्यास के दौरान जनरेटर, पावर बैकअप सिस्टम, टॉर्च, मोमबत्ती या माचिस का उपयोग न करके पूर्ण सहयोग करें और बिजली पूरी तरह बंद रखें।