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सकून ट्रस्ट द्वारा डीसी कार्यालय परिसर में 100 से अधिक पौधों का वितरण, हरियाली का दिया संदेश

लुधियाना / सत्ता संदेश

सकून ट्रस्ट द्वारा डीसी कार्यालय परिसर में 100 से अधिक पौधों का वितरण, हरियाली का दिया संदेश

लुधियाना, 14 जुलाई: पर्यावरण संरक्षण और हरित लुधियाना के उद्देश्य से डॉ. परमिंदर सिंह सिद्धू एवं डॉ. सुरुचि द्वारा संचालित सकून ट्रस्ट ने डीसी कार्यालय परिसर (बचत भवन), लुधियाना में 100 से अधिक पौधों का वितरण किया। इस अवसर पर डिप्टी कमिश्नर श्री हिमांशु जैन मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

अपने संबोधन में डिप्टी कमिश्नर श्री हिमांशु जैन ने सकून ट्रस्ट की सराहना करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए इस प्रकार की जनभागीदारी वाली पहल समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि सकून ट्रस्ट समाज सेवा के साथ-साथ पर्यावरण जागरूकता फैलाने का भी सराहनीय कार्य कर रहा है। उन्होंने सभी नागरिकों से अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनकी देखभाल करने का आह्वान किया ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ एवं हरित वातावरण सुनिश्चित किया जा सके।

इस कार्यक्रम में डॉ. नवजीत, सरदार नछत्तर सिंह, श्रीमती चरणजीत कौर तथा सिद्धू डेंटल हॉस्पिटल के समस्त स्टाफ ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और पौधों के वितरण में सहयोग दिया।

कार्यक्रम का विशेष आकर्षण सिद्धू डेंटल हॉस्पिटल की मोबाइल डेंटल वैन रही, जिसका प्रदर्शन भी किया गया। यह मोबाइल डेंटल वैन पंजाब के जरूरतमंद एवं दूर-दराज़ क्षेत्रों के लोगों को निःशुल्क दंत चिकित्सा सेवाएं प्रदान कर रही है। डिप्टी कमिश्नर ने इस अनूठी पहल की भी प्रशंसा करते हुए कहा कि यह समाज सेवा का एक प्रेरणादायक उदाहरण है।

इस अवसर पर डॉ. परमिंदर सिंह सिद्धू ने कहा कि स्वस्थ पर्यावरण और अच्छा स्वास्थ्य एक-दूसरे के पूरक हैं तथा प्रत्येक लगाया गया पौधा भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक अमूल्य उपहार है।

डॉ. सुरुचि ने सभी से पौधे लगाने के साथ-साथ उनकी नियमित देखभाल करने का संकल्प लेने की अपील की।

कार्यक्रम का समापन सभी उपस्थित लोगों द्वारा स्वच्छ, स्वस्थ और हरित लुधियाना के निर्माण का संकल्प लेकर किया गया।

Goa: पर्यावरण संरक्षण की बड़ी पहल, दक्षिण गोवा की 1.03 करोड़ वर्ग मीटर जमीन नो डेवलपमेंट जोन घोषित

गोवा / सत्ता संदेश

गोवा सरकार ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए दक्षिण गोवा के सालसेत तालुका में 1.03 करोड़ वर्ग मीटर भूमि को ‘नो डेवलपमेंट जोन’ (एनडीजेड) घोषित कर दिया है। इस फैसले के बाद इन इलाकों में निर्माण और विकास से जुड़ी गतिविधियों पर रोक लग जाएगी। सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य पर्यावरण के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्रों, कृषि भूमि और प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित रखना है।

गोवा के टाउन एंड कंट्री प्लानिंग मंत्री विश्वजीत राणे ने शुक्रवार को बताया कि अधिसूचित क्षेत्र में नमक के खेत, धान के खेत और अन्य पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील जमीन शामिल हैं। ये जमीनें सालसेत तालुका के सात गांवों में फैली हुई हैं। राज्य सरकार ने इसे क्षेत्रीय योजना के तहत ‘नो डेवलपमेंट जोन’ घोषित किया है, ताकि तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को बचाया जा सके।

किन इलाकों को नो डेवलपमेंट जोन में शामिल किया गया है?

सरकार की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, सबसे अधिक 29.13 लाख वर्ग मीटर भूमि तालाउलिम गांव में अधिसूचित की गई है। इसके बाद माजोर्डा में 17.64 लाख वर्ग मीटर, सेराउलिम में 16.81 लाख वर्ग मीटर, लौटोलिम में 16.71 लाख वर्ग मीटर, उटोरडा में 9.92 लाख वर्ग मीटर, ओरलिम में 9.49 लाख वर्ग मीटर और कालाटा में 4.08 लाख वर्ग मीटर भूमि को एनडीजेड में शामिल किया गया है।विज्ञापन

सरकार ने यह फैसला क्यों लिया है?

गोवा सरकार का कहना है कि यह निर्णय राज्य के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र को बचाने के लिए लिया गया है। समुद्र तटों और हरित क्षेत्रों के लिए प्रसिद्ध गोवा में तेजी से शहरीकरण हो रहा है। ऐसे में पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील इलाकों को संरक्षण देना जरूरी हो गया था। सरकार का मानना है कि इससे प्राकृतिक संसाधनों के साथ-साथ कृषि विरासत भी सुरक्षित रहेगी।

क्या इन इलाकों में विकास कार्य पूरी तरह रुक जाएंगे?

‘नो डेवलपमेंट जोन’ घोषित होने के बाद इन क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर निर्माण और व्यावसायिक विकास गतिविधियों पर रोक रहेगी। हालांकि, सरकार ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि स्थानीय लोगों की पारंपरिक कृषि गतिविधियों और अन्य सीमित उपयोगों को लेकर क्या दिशा-निर्देश होंगे। क्षेत्रीय योजना के तहत इन इलाकों की निगरानी की जाएगी, ताकि पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों को रोका जा सके

गोवा में पर्यावरण संरक्षण के लिए आगे क्या योजना है?

इस महीने की शुरुआत में ही टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग ने राज्य के विभिन्न हिस्सों में पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील भूमि की पहचान शुरू की थी। सरकार का उद्देश्य ऐसे इलाकों को विकास के दबाव से बचाना और प्राकृतिक परिदृश्य को संरक्षित रखना है। ताजा अधिसूचना को इसी व्यापक अभियान का हिस्सा माना जा रहा है। आने वाले समय में राज्य के अन्य हिस्सों में भी ऐसे कदम उठाए जा सकते हैं।

लुधियाना: बुड्ढा दरिया में प्रदूषण फैलाने वाली डेयरियों पर बड़ी कार्रवाई, संचालकों के खिलाफ FIR दर्ज

पंजाब डेस्क : पंजाब के लुधियाना में बुड्ढा दरिया को प्रदूषित करने वालों के खिलाफ प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। पुलिस ने दरिया में गंदा पानी और अपशिष्ट छोड़ने के आरोप में कई डेयरी संचालकों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज की है।

बिना ट्रीटमेंट के बहाया जा रहा था कचरा: लुधियाना अर्बन वाटर एंड वेस्ट वाटर मैनेजमेंट लिमिटेड (जोन-बी) के नोडल अफसर की शिकायत पर यह कार्रवाई की गई है। शिकायत के अनुसार, कुछ डेयरियां अपने कचरे और अपशिष्ट को बिना किसी ट्रीटमेंट के सीधे दरिया में बहा रही थीं, जिससे पानी और वातावरण लगातार दूषित हो रहा है। इससे न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुँच रहा है, बल्कि स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य पर भी खतरा मंडरा रहा है।

इन डेयरियों पर गिरी गाज : पुलिस ने जिन आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है, उनमें प्रमुख रूप से पारस डेयरी, राकेश डेयरी, राम मिलन डेयरी, पाल डेयरी और हर्ष (कृष्ण लाल डेयरी कॉम्प्लेक्स) शामिल हैं। थाना डिवीजन नंबर 7 की पुलिस ने इनके खिलाफ बीएनएस (BNS) की धारा 279 और नॉर्दर्न इंडिया कैनाल एंड ड्रेनेज एक्ट 1873 की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया है।

प्रशासन की चेतावनी : पुलिस और प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस ने अन्य उल्लंघन करने वाले डेयरी संचालकों की एक सूची भी तैयार की है, जिन पर आने वाले दिनों में सख्त कार्रवाई की जा सकती है।