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Garden Valley School के विद्यार्थियों की नशे के खिलाफ अनोखी पहल, घर-घर पहुंचा रहे जागरूकता का संदेश

गार्डन वैली इंटरनेशनल स्कूल भट्टियां के विद्यार्थियों ने नशे के खिलाफ अनोखी मुहिम शुरू की है। 10-10 सदस्यों की टीमें घर-घर जाकर जागरूकता फैला रही हैं। विद्यार्थियों को खेल किटें भी वितरित की गईं।

माछीवाड़ा / सत्ता संदेश

Report : जसबीर सिंह अलबेला

नशे के खिलाफ जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से गार्डन वैली इंटरनेशनल स्कूल, भट्टियां के विद्यार्थियों ने अनोखी पहल शुरू की है। स्कूल के विद्यार्थियों की 10-10 सदस्यों वाली टीमें बनाकर उन्हें घर-घर जाकर लोगों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक किया जा रहा है।

विद्यार्थियों की इस मुहिम की हौसला अफजाई करने के लिए एनआईएसडी सदस्य, एनसीसीडीआर के स्पेशल सदस्य तथा सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार से जुड़े सुखविंदर सिंह बिंद्रा विशेष रूप से स्कूल पहुंचे। इस दौरान विद्यार्थियों को विभिन्न खेलों से संबंधित किटें भी वितरित की गईं।

बच्चों को नशे से दूर रखने में खेलों की अहम भूमिका

सुखविंदर सिंह बिंद्रा ने विद्यार्थियों की पहल की सराहना करते हुए कहा कि स्कूल द्वारा बच्चों को प्रेरित कर 10-10 सदस्यों की टीमें तैयार की गई हैं, जो घर-घर जाकर नशे के खिलाफ लोगों को जागरूक कर रही हैं। उन्होंने इसे समाज के लिए एक सराहनीय प्रयास बताया।

उन्होंने कहा कि बच्चों और युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए उन्हें खेलों से जोड़ना, बेहतर शिक्षा उपलब्ध करवाना और रोजगार के अवसर प्रदान करना बेहद जरूरी है। इन प्रयासों के माध्यम से ही स्वस्थ और बेहतर समाज का निर्माण किया जा सकता है।

विद्यार्थियों को वितरित की गईं खेल किटें

सुखविंदर सिंह बिंद्रा ने बताया कि बच्चों को खेलों से जोड़ने के उद्देश्य से खेल किटें उपलब्ध करवाई जा रही हैं। इसी कड़ी में विद्यार्थियों को विभिन्न खेलों से संबंधित किटें सौंपी गईं।

उन्होंने कहा कि खेल बच्चों में अनुशासन, आत्मविश्वास और टीम भावना विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विद्यार्थियों को खेलों के प्रति प्रोत्साहित करने से उन्हें सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ने में मदद मिलती है।

‘नशा रोको मुहिम’ के तहत स्वस्थ जीवनशैली का संदेश

इस दौरान सुखविंदर सिंह बिंद्रा ने विद्यार्थियों को नशे से दूर रहने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि पंजाब को नशामुक्त बनाने के लिए केवल सरकार या प्रशासन के प्रयास पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि विद्यार्थियों, अभिभावकों और समाज के प्रत्येक वर्ग की भागीदारी जरूरी है।

विद्यार्थियों ने पेश की जागरूकता कोरियोग्राफी

स्कूल की प्रिंसिपल डॉ. हरप्रीत कौर ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि स्कूल विद्यार्थियों में खेल भावना विकसित करने और उन्हें सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है।

कार्यक्रम के दौरान गार्डन वैली स्कूल के विद्यार्थियों ने नशे के खिलाफ जागरूकता फैलाने वाली विशेष कोरियोग्राफी भी प्रस्तुत की। विद्यार्थियों की इस प्रस्तुति की उपस्थित लोगों ने खूब सराहना की।

इस पहल के माध्यम से विद्यार्थियों ने यह संदेश देने का प्रयास किया कि युवा पीढ़ी को नशे से दूर रखने के लिए जागरूकता, खेल, शिक्षा और सकारात्मक वातावरण को बढ़ावा देना बेहद जरूरी है।

पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज, चंडीगढ़ में ‘नशा मुक्ति युवा फॉर विकसित भारत’ शपथ समारोह आयोजित
  • PEC चंडीगढ़ में युवाओं ने ली नशामुक्त भारत की शपथ, पीएम मोदी का संदेश भी सुना
  • ‘विकसित भारत 2047’ के लिए युवाओं का संकल्प, पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज में नशा मुक्ति अभियान
  • नशे के खिलाफ युवाओं का संकल्प, PEC चंडीगढ़ में शपथ समारोह और नुक्कड़ नाटक का आयोजन

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज (PEC), चंडीगढ़ में रविवार को ‘नशा मुक्ति युवा फॉर विकसित भारत’ अभियान के तहत शपथ समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम कॉलेज सभागार में आयोजित हुआ, जिसमें निदेशक प्रो. राजेश कुमार भाटिया, छात्र कल्याण अधिष्ठाता डॉ. पुनीत चावला, एसोसिएट डीन (ADSA), संकाय सदस्य और बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम की शुरुआत नशा मुक्ति शपथ से हुई, जिसमें सभी प्रतिभागियों ने नशीले पदार्थों से दूर रहने और समाज में इसके दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया।

इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ऑनलाइन संबोधन प्रसारित किया गया, जिसमें उन्होंने नशामुक्त भारत के निर्माण और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने में युवाओं की अहम भूमिका पर बल दिया। प्रधानमंत्री ने नशीले पदार्थों के दुरुपयोग के खिलाफ युवा-नेतृत्व वाले जनआंदोलन की आवश्यकता पर जोर देते हुए काशी घोषणा-पत्र को मार्गदर्शक बताया तथा देशभर में जागरूकता फैलाने में माई भारत (MY Bharat) स्वयंसेवकों के प्रयासों की सराहना की।

कार्यक्रम के दौरान नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) के विद्यार्थियों और स्वयंसेवकों ने एक प्रभावशाली नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया। नाटक के माध्यम से नशे के सामाजिक दुष्प्रभावों को उजागर किया गया और युवाओं को स्वस्थ एवं नशामुक्त जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।

समारोह का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। इस अवसर पर सभी प्रतिभागियों ने ‘नशा मुक्ति युवा फॉर विकसित भारत’ अभियान को सफल बनाने और नशामुक्त समाज के निर्माण में सक्रिय योगदान देने का संकल्प दोहराया।

डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी ने ड्रग्स के खिलाफ जागरुकता सेमिनार का किया आयोजन

लुधियाना / सत्ता संदेश

डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विसेज़ अथॉरिटी, लुधियाना ने ड्रग्स के खिलाफ़ जागरूकता सेमिनार और शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया

पंजाब स्टेट लीगल सर्विसेज़ अथॉरिटी, SAS नगर से मिली गाइडलाइंस के मुताबिक, डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विसेज़ अथॉरिटी, लुधियाना ने NALSA की ड्रग अवेयरनेस एंड वेलनेस नेविगेशन-ए ड्रग-फ्री इंडिया स्कीम के तहत अलग-अलग जागरूकता सेमिनार और शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किए।

जागरूकता सेमिनार के दौरान, ड्रग्स के शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और आर्थिक बुरे असर, ड्रग्स की रोकथाम, इलाज और रिहैबिलिटेशन के बारे में डिटेल में जानकारी दी गई। इसके अलावा, लीगल सर्विसेज़ अथॉरिटीज़ एक्ट, 1987 के तहत मिलने वाली फ्री लीगल एड, लोक अदालतों और दूसरी लीगल सर्विसेज़ के बारे में भी जानकारी दी गई और यह भी बताया गया कि योग्य लोग डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विसेज़ अथॉरिटी के ज़रिए फ्री लीगल एड का फायदा उठा सकते हैं।

इस मौके पर सेंट्रल जेल, बोरस्टल जेल, महिला जेल और ऑब्जर्वेशन होम में मौजूद कैदियों को ड्रग्स न लेने की शपथ दिलाई गई। सभी लोगों ने ड्रग्स से दूर रहने, अपने परिवार और समाज को ड्रग्स के बुरे असर के बारे में जागरूक करने और ड्रग-फ्री पंजाब और ड्रग-फ्री भारत बनाने में एक्टिव रूप से योगदान देने का वादा किया।

इसके अलावा, GHG सिधवान खुर्द, लुधियाना के स्टूडेंट्स के लिए एक वेबिनार ऑर्गनाइज़ किया गया और स्टूडेंट्स को ड्रग्स से दूर रहने के लिए मोटिवेट किया गया। पैरा-लीगल वॉलंटियर्स ने इस स्कीम के बारे में एक वीडियो भी अलग-अलग जगहों पर चलाया।

आखिर में, डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विसेज़ अथॉरिटी, लुधियाना ने सभी नागरिकों से ड्रग्स के खिलाफ चल रहे कैंपेन में एक्टिव रूप से हिस्सा लेने, नई पीढ़ी को ड्रग्स से बचाने और एक हेल्दी, सेफ और ड्रग-फ्री समाज बनाने के लिए मिलकर काम करने की अपील की।

नशा मुक्त राज्य बनने की ओर बढ़ रहा पंजाब, CM मान ने नशा छोड़ चुके नौजवानों को ‘सूरमे’ के रूप में किया सम्मानित
  • मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने ‘सूरमा’ मुहिम की शुरुआत की; नशा छोड़ चुके नौजवानों को ‘सूरमा’ छाप और टी-शर्ट देकर किया सम्मानित
  • पंजाब सरकार सूबे को नशा मुक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध; नशों की गिरफ्त में से निकले नौजवान इस मुहिम में रोल मॉडल के रूप में काम करेंगे-मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान
  • नशा एक बीमारी है, कोई अपराध नहीं, यह सजा की नहीं, इलाज की मांग करता है-मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान
  • नशा मुक्त हुए नौजवानों को आत्म-निर्भर बनाने के लिए सरकार पुनर्वास केंद्रों में सकारात्मक माहौल और हुनर प्रशिक्षण प्रदान कर रही है: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान
  • नशों के खिलाफ जंग में खेल अहम भूमिका निभा सकते हैं; हमारा मकसद हर नौजवान को खेलों से जोड़ना है: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान
  • 15 जुलाई तक पूरे पंजाब में 3,100 गांवों के खेल मैदान और 3,000 जिम तैयार हो जाएंगे: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान
  • पिछली सरकारों की गलत नीतियों और नशा तस्करी ने पंजाब के नौजवानों को विदेश जाने के लिए मजबूर किया: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान
  • आप सरकार क्रांतिकारी कदमों के जरिए पंजाब के माथे से नशों का कलंक मिटा रही है: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान

लुधियाना / सत्ता संदेश

पंजाब को नशा मुक्त राज्य बनाने की दिशा में मजबूती से कदम बढ़ाते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज अपनी सरकार की ‘युद्ध नशियाँ विरुद्ध’ मुहिम को अगले पड़ाव पर ले जाते हुए ‘सूरमा’ मुहिम की शुरुआत की। इस दौरान उन्होंने नशा मुक्त हुए नौजवानों को विशेष तौर पर तैयार की गई ‘सूरमा’ छाप (रिंग) और टी-शर्ट से सम्मानित किया।

इसे सूबे की नशा विरोधी मुहिम का अगला पड़ाव बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस उपराले का उद्देश्य नशा छोड़ चुके नौजवानों को ‘उम्मीद के दूत’ के रूप में पेश करना है, जो जमीनी स्तर पर नशों के खिलाफ जंग की अगवानी करेंगे। दो साल से अधिक समय से नशा मुक्त रहने वाले व्यक्तियों का सम्मान करते हुए उन्होंने ऐलान किया कि ये नौजवान न सिर्फ दूसरों को नशा छोड़ने के लिए प्रेरित करेंगे, बल्कि राज्य सरकार की ओर से उन्हें रोजगार के मौके भी मुहैया करवाए जाएंगे।

खेलों को नशों की बीमारी के खिलाफ सबसे कारगर हथियार बताते हुए उन्होंने ऐलान किया कि 15 जुलाई तक पंजाब भर में करीब 3,100 गांवों के खेल मैदान और 3,000 जिम चालू कर दिए जाएंगे ताकि नौजवानों की ऊर्जा को सकारात्मक दिशा में लगाया जा सके। उन्होंने आगे कहा कि राज्य सरकार की ओर से मानक शिक्षा, सभी के लिए स्वास्थ्य सुविधाएं, खेलों के बुनियादी ढांचे और पुनर्वास पर एक साथ ध्यान दिया जा रहा है जो नशा-मुक्त और रंगला पंजाब की नींव रख रहा है।

कुछ मुख्य नुक्ते साझा करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने ‘एक्स’ पर लिखा, “आज हमने ‘सूरमा मुहिम’ की शुरुआत की है और उन नौजवानों को सम्मानित किया है जो नशों के चंगुल में से निकलकर नई जिंदगी की शुरुआत कर चुके हैं। दूसरों के लिए रोल मॉडल बने इन प्रेरणादायक नौजवानों को पंजाब सरकार की ओर से रोजगार के मौके भी दिए जाएंगे।

15 जुलाई तक पंजाब भर के नौजवानों के लिए 3,100 नए खेल मैदान और 3,000 जिम तैयार हो जाएंगे। आज पंजाब शिक्षा के क्षेत्र में देश भर में पहले नंबर पर है और 47 लाख परिवारों को मुफ्त इलाज के लिए 10 लाख रुपये के ‘मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना कार्ड’ मिल चुके हैं।

सड़क सुरक्षा फोर्स (एस.एस.एफ.) ने सड़क हादसों में होने वाली मौतों को 50 फीसदी तक कम कर दिया है, जिससे हर साल करीब 2,700 कीमती जानें बच रही हैं। जब नीयत साफ हो तो कुछ भी नामुमकिन नहीं होता। आओ सब मिलकर रंगला पंजाब बनाएं।”

इकट्ठ को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि समागम में मौजूद नौजवानों ने नशों की वजह से सब कुछ गंवाने के बाद इस दलदल में से बाहर निकलकर ऐतिहासिक कदम उठाया है। उन्होंने कहा कि आज इनका सम्मान इसलिए किया जा रहा है क्योंकि सामाजिक बदनामी के बावजूद इन्होंने नशे को हराने का असाधारण साहस दिखाया है। मुख्यमंत्री ने कहा, “नशे की लत एक सामाजिक कलंक है। जब लोगों को पता चलता है कि कोई नशा करता है तो वे उस शख्स से बात करना भी बंद कर देते हैं। इन नौजवानों ने उस दर्द और मानसिक पीड़ा को झेला है, लेकिन आज वे नई शुरुआत करने और समाज की सेवा करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।”

मुख्यमंत्री ने कहा, “ये नौजवान नशे की बीमारी पर जीत हासिल कर चुके हैं और अब अपने तजुर्बे साझा करके दूसरों की मदद कर सकते हैं।” उन्होंने आगे कहा, “पंजाब सरकार नशा पीड़ितों के पुनर्वास के लिए लगातार कोशिशें कर रही है और राज्य भर में आधुनिक सुविधाओं से लैस विश्व स्तरीय पुनर्वास केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आगे ऐलान किया कि 15 जुलाई तक पंजाब भर में करीब 3,100 गांवों के खेल मैदान और 3,000 जिम चालू हो जाएंगे ताकि नौजवानों की असीम ऊर्जा को सकारात्मक दिशा में बदला जा सके।

समागम में मौजूद नशा मुक्त हुए सभी नौजवानों को बधाई देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वे दुखद अतीत को पीछे छोड़कर सुनहरे भविष्य की ओर बढ़ चुके हैं। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि पंजाब सरकार इस नेक मिशन में उन्हें हर संभव सहयोग देगी। उन्होंने कहा, “रंगला पंजाब के सपने को पूरा करने के लिए अब सिर्फ एक ही रंग बाकी रह गया है और वह भी जल्द ही भर दिया जाएगा क्योंकि पंजाब जल्द ही पूरी तरह नशा मुक्त हो जाएगा।”

राज्य की उपलब्धियों पर रोशनी डालते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब सरकार ने सरकारी स्कूलों में मानक शिक्षा यकीनी बनाकर शिक्षा के क्षेत्र का काया-कल्प किया है, जिसके कारण पंजाब, केरल और कई अन्य सूबों को पछाड़कर 27वें नंबर से पहले नंबर पर आया है।

उन्होंने कहा कि गरीबी को खत्म करने के लिए शिक्षा सबसे बड़ा हथियार है। “हमारे स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे कल ऊंचे अधिकारी बनेंगे और अपने परिवारों को गरीबी में से निकालने में मदद करेंगे। सिर्फ कार्ड या मुफ्त की सुविधाएं गरीबी खत्म नहीं कर सकतीं, लेकिन शिक्षा में ऐसा करने की ताकत और समर्थता जरूर है।”

मुख्यमंत्री ने बताया कि पंजाब के करीब 65 लाख परिवारों में से 17.47 लाख परिवारों को पहले ही ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना कार्ड’ मिल चुके हैं, जिससे वे मुफ्त इलाज का फायदा उठा सकते हैं। उन्होंने आगे बताया कि इस योजना के तहत लाभार्थियों को अब तक करीब 650 करोड़ रुपये का कैशलेस इलाज मुहैया करवाया जा चुका है।

राज्य सरकार की अन्य उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब अब सिंचाई के लिए 80 प्रतिशत नहरी पानी का उपयोग कर रहा है, किसानों को दिन के समय बिजली मिल रही है, सड़क सुरक्षा बल (एसएसएफ) ने अब तक सड़क दुर्घटनाओं में लगभग 3,000 लोगों की जान बचाई है, लगभग 90 प्रतिशत घरों को मुफ्त बिजली मिल रही है और कई अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से लोगों को बड़ा लाभ पहुंचाया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस समारोह में उन लोगों को सम्मानित किया गया है, जिन्होंने नशे की लत पर सफलतापूर्वक काबू पाया है और दो वर्षों से अधिक समय से नशा मुक्त (संयमित) जीवन जी रहे हैं। उन्होंने कहा, “ये व्यक्ति वास्तविक ‘सूरमा’ हैं क्योंकि इन्होंने साहस और दृढ़ संकल्प के साथ नशे पर विजय प्राप्त की है। आज का यह समारोह पंजाब की नशों के विरुद्ध चल रही लड़ाई में एक नए अध्याय की शुरुआत है।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि ये सूरमा अब ‘एम्बेसडर ऑफ रिकवरी’ के रूप में सरकार के साथ मिलकर काम करेंगे, जो अन्य लोगों को नशे की लत से छुटकारा पाने और अपने जीवन की नई शुरुआत करने के लिए प्रेरित करेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सूरमा कार्यक्रम की शुरुआत पूरे पंजाब में व्यापक पुनर्वास कार्यक्रमों और मजबूत सामाजिक सहायता प्रणालियों के सकारात्मक प्रभाव का एक बड़ा प्रमाण है। उन्होंने कहा कि पंजाब की विरासत में गहराई से रचा-बसा ‘सूरमा’ शब्द अदम्य साहस का प्रतीक है, जो इन व्यक्तियों द्वारा अपनी अटूट इच्छाशक्ति के बल पर अपने जीवन को पुनः संवारने के दृढ़ संकल्प को दर्शाता है।

सरकार के संकल्प को दोहराते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि हमारी सरकार नशों के खात्मे के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और यह सुनिश्चित कर रही है कि नशे से प्रभावित प्रत्येक परिवार को उपचार के लिए आवश्यक सहायता मिले।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह समारोह केवल इन व्यक्तियों की रिकवरी का नहीं, बल्कि उनके नए जीवन को समर्पित है। उन्होंने कहा, “ये सूरमा अपने परिवारों और समाज के लिए आशा की किरण हैं। इनकी यात्रा यह साबित करती है कि दृढ़ इच्छाशक्ति, पारिवारिक सहयोग और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच के माध्यम से नशे से मुक्ति संभव है।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि आप सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि नशे के खिलाफ संघर्ष कर रहे प्रत्येक व्यक्ति को उचित उपचार मिले और वह समाज की मुख्यधारा में पुनः शामिल हो सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ये सूरमा इस बात का जीवंत प्रमाण हैं कि समय पर सहायता मिलने से उन जीवनों को फिर से संवारा जा सकता है, जो शायद नशे के कारण बर्बाद हो सकते थे। उन्होंने कहा, “स्वस्थ हो चुके व्यक्तियों को विशेष रूप से तैयार की गई ‘प्रॉमिस रिंग्स’ (छल्लों) और बाज के प्रतीक वाली वर्दियों से सम्मानित किया गया है, जो नशा मुक्त पंजाब के मिशन में साहस, शक्ति और पंजाबियत के प्रतीक हैं।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि सूरमा पहल पंजाब सरकार की नशों के खात्मे के प्रति अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जिसने पिछले कई वर्षों से राज्य में तबाही मचा रखी थी। उन्होंने कहा, “ये व्यक्ति ‘युद्ध नशों विरुद्ध’ की वास्तविक भावना का प्रतिनिधित्व करते हैं। इनकी कड़ी मेहनत, साहस और दृढ़ संकल्प रंगला पंजाब के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण माध्यम हैं।”

मुख्यमंत्री ने प्रत्येक सूरमा को सरकार की ओर से पूर्ण सहयोग का भरोसा दिलाते हुए कहा कि वे अब दूसरों को नशे की लत से छुटकारा दिलाने में मदद करके आशा के दूत बनेंगे। उन्होंने कहा, “पंजाब सरकार नशा मुक्ति केंद्रों, कौशल विकास कार्यक्रमों में निवेश करना जारी रखेगी और नशे की लत से जुड़े सामाजिक कलंक को समाप्त करने के लिए प्रयासरत रहेगी, ताकि प्रत्येक स्वस्थ हो चुका व्यक्ति बेहतर रोजगार के अवसरों के साथ सम्मानजनक जीवन व्यतीत कर सके।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने यह भी दोहराया कि जहां सरकार नशों के माध्यम से पंजाब को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी, वहीं सहायता मांगने वाले प्रत्येक व्यक्ति को पूरा सहयोग देना भी जारी रखेगी। उन्होंने कहा, “यही ‘युद्ध नशों विरुद्ध चरण-2’ का वास्तविक उद्देश्य है।”

मुख्यमंत्री ने नशों के विरुद्ध संघर्ष कर रहे प्रत्येक व्यक्ति को समर्पित एक प्रेरणादायक गीत भी लॉन्च किया और घोषणा की कि सूरमा कार्यक्रम अब पंजाब के प्रत्येक जिले और गांव तक पहुंचेगा।

उन्होंने कहा कि जिन व्यक्तियों ने नशा मुक्ति उपचार सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है और कम से कम दो वर्षों से नशे से दूर हैं, वे व्हाट्सएप पर 9779142200 पर “Soorma” संदेश भेजकर इस कार्यक्रम के लिए स्वयं को पंजीकृत कर सकते हैं।

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पात्र व्यक्तियों को उनके अद्वितीय साहस के लिए सम्मानित किया जाएगा और वे पंजाब की नशों के विरुद्ध चल रही लड़ाई में चैंपियन के रूप में सेवा देंगे। उन्होंने कहा, “सूरमा पहल के माध्यम से पंजाब सरकार एक मजबूत नेटवर्क तैयार कर रही है, जो नशे के कारण फैली निराशा को चुनौती देते हुए पीड़ितों के जीवन को फिर से पटरी पर लाने और उनका सम्मान बहाल करने में मदद करेगा।”

उन्होंने कहा कि लगभग एक वर्ष तीन महीने पहले ‘युद्ध नशों विरुद्ध’ की शुरुआत से लेकर अब तक पंजाब ने अपने नशा विरोधी अभियान में महत्वपूर्ण सफलता दर्ज की है।

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि राज्य के सभी जिलों में आधुनिक उपचार सुविधाओं, परामर्श सेवाओं और फॉलो-अप सहायता से लैस अत्याधुनिक नशा मुक्ति केंद्र स्थापित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि ‘सूरमा रिकग्निशन प्रोग्राम’ नशे और रिकवरी से जुड़े सामाजिक कलंक को दूर कर इन उपलब्धियों को और मजबूत करता है तथा ऐसा सहयोगी नेटवर्क तैयार करता है, जो नशे के खिलाफ संघर्ष कर रहे अन्य लोगों को उपचार के लिए प्रेरित करेगा।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री डॉ. बलबीर सिंह तथा अनेक अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे।

अमित शाह ने NCORD की 10वीं शीर्ष-स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की और“मादक पदार्थ नियंत्रण पर विज़न डॉक्यूमेंट (2026-2029)” का विमोचन किया

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

  • केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने नई दिल्ली में नार्को-कोऑर्डिनेशन सेंटर (NCORD) की 10वीं शीर्ष-स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की और“मादक पदार्थ नियंत्रण पर विज़न डॉक्यूमेंट (2026-2029)” का विमोचन किया
  • श्री अमित शाह ने‘ऑनलाइन ड्रग्स डिस्पोज़ल फोर्टनाइट कैंपेन’ की शुरुआत भी की जिसमे 6,000 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के 2,09,500 किलोग्राम नशीले पदार्थों को नष्ट करने का लक्ष्य रखा गया है
  • ड्रग्स के खिलाफ लड़ाई में NCB द्वारा जारी Vision Document on Narcotics Control का उद्देश्य सिंथेटिक ड्रग्स, डार्कनेट नेटवर्क, सीमा पार तस्करी और नए खतरों के खिलाफ संस्थागत क्षमता को और मजबूत बनाना है
  • प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में हम ड्रग्स के कारोबार के पूरे इकोसिस्टम पर अगले 3 वर्षों में ऐसा प्रहार करेंगे, कि यह दशकों तक उठ न पाए
  • ‘डिटेक्ट, डिसरप्ट और डिस्ट्रॉय’ की नीति से ह्यूमन व टेक्नोलॉजी इंटेलिजेंस व कम्युनिटी पुलिसिंग के जरिए सोर्स से लेकर किंगपिन तक नार्को के पूरे तंत्र को खत्म करना होगा
  • हमें ड्रग्स के व्यापारियों के प्रति ruthless अप्रोच और पीड़ित युवाओं के प्रति Sympathetic अप्रोच रखना होगा
  • बड़े NDPS मामलों में वित्तीय जांच, अपराध की कमाई को फ्रीज़ और सीज़ करना हमारी प्राथमिकता
  • सभी राज्य ANTF को फुल-टाइम, डेडिकेटेड, इक्विप्ड और अकाउंटेबल यूनिट बनाए
  • विदेश में छिपे ड्रग तस्करों और गैंगस्टरों के खिलाफ रेड कार्नर नोटिस, प्रत्यर्पण और CBI के माध्यम से कार्रवाई तेज करने के लिए राज्य एक तंत्र विकसित करें
  • डिमांड रिडक्शन के लिए अभिभावकों, शिक्षकों, शैक्षणिक संस्थानों, युवा संगठनों व मंत्रालयों की भागीदारी से ड्रग्स फ्री जोन बनाए व जन-जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे
  • बड़े मामलों में जल्द सजा सुनिश्चित करने के लिए गृह मंत्रालय एक्सक्लूसिव NDPS कोर्ट की दिशा में कार्यरत, राज्य भी अपने हाई कोर्ट में एक्सक्लूसिव NDPS कोर्ट के गठन करें
  • सीमा, पोर्ट, एयरपोर्ट, गांव, कम्युनिटी पुलिसिंग और क्राइम मैपिंग के जरिए हर ड्रग नेटवर्क की पहचान करनी होगी
  • ड्रग कार्टेल की फाइनेंसिंग, नेतृत्व और पूरे नेटवर्क पर हमला करना होगा, बड़े मामलों में ED के जरिए वित्तीय जांच अनिवार्य हो
  • ड्रग्स की लड़ाई के खिलाफ हमारा रोडमैप चार स्तंभों पर आधारित- एनफोर्समेंट, इंटेलिजेंस व ऑपरेशंस; प्रीकर्सर व सिंथेटिक ड्रग कंट्रोल; डिमांड रिडक्शन व रिहैबिलिटेशन; कैपेसिटी बिल्डिंग व कोऑर्डिनेशन
  • केन्द्रीय गृह मंत्री ने “एनसीबी वार्षिक रिपोर्ट -2025” का विमोचन और जम्मू और गुवाहाटी में NCB के ज़ोनल कार्यालयों का ई-उद्घाटन भी किया

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज नई दिल्ली के विज्ञान भवन में नार्को-को ऑर्डिनेशन सेंटर (NCORD) की 10वीं शीर्ष-स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। केन्द्रीय गृह मंत्री ने “मादक पदार्थ नियंत्रण पर विज़न डॉक्यूमेंट (2026-2029)” और “एनसीबी वार्षिक रिपोर्ट -2025” का विमोचन और जम्मू और गुवाहाटी में NCB के ज़ोनल कार्यालयों का ई-उद्घाटन भी किया। श्री अमित शाह ने ‘ऑनलाइन ड्रग्स डिस्पोज़ल फोर्टनाइट कैंपेन’ की शुरुआत भी की जिसमे 6,000 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के 2,09,500 किलोग्राम नशीले पदार्थों को नष्ट करने का लक्ष्य रखा गया है।

अपने संबोधन में केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि आज हमारा देश नारकोटिक्स के खिलाफ लड़ाई के ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहां पर आने वाले 3 साल यह तय करेंगे कि नशा हम पर विजय प्राप्त करेगा या हम नशे पर विजय प्राप्त करेंगे। उन्होंने कहा कि देश के आने वाले 100 वर्ष के भविष्य के लिए यह लड़ाई हमें दृढ़ता के साथ संयुक्त प्रयास से जीतनी चाहिए। यह लड़ाई कोई एक विभाग, राज्य, सरकार याव्यक्ति नहीं लड़ सकता बल्कि इसके लिए सभी राज्यों और उनके संबंधित विभागों को एक साथ एक मंच पर आना होगा। इस लड़ाई में हमें जनता को प्रेरित करने वाले संतों, देश का भविष्य तय करने वाले युवाओं और हमारी मातृशक्ति को भी जोड़ना पड़ेगा, तभी इस लड़ाई में हम पूरी तरह से सफल हो सकेंगे। श्री शाह ने कहा कि मादक पदार्थों की समस्या केवल कानून व्यवस्था और सार्वजनिक स्वास्थ्य का मुद्दा नहीं है बल्कि यह देश की आंतरिक सुरक्षा, सामाजिक स्थिरता, आर्थिक हितों की रक्षा और हमारी युवा पीढ़ी और उसके माध्यम से देश के भविष्य के साथ जुड़ी हुई समस्या है। इस समस्या पर संपूर्ण विजय प्राप्त करना भारत के सभी राज्यों का एक सामूहिक लक्ष्य होना चाहिए।

श्री अमित शाह ने कहा कि ड्रग तस्करी, संगठित अपराध, नार्को टेरर फाइनेंस और सीमापार के आतंकी नेटवर्क के वित्त पोषण के साथ यह समस्या एक Evolving Narco Terrorism Ecosystem भी बन चुकी है। हमारे देश की आंतरिक सुरक्षा, अर्थतंत्र और युवा पीढ़ी के भविष्य की सुरक्षा के लिए हमें इस समस्या पर पूर्ण विजय प्राप्त करनी ही होगी। हम Death Triangle और Death Crescent के बीच में स्थित हैं और ड्रोन-आधारित ड्रॉप्स, समुद्री मार्गों से कंटेनराइज्ड कार्गो, डार्कनेट, क्रिप्टो पेमेंट, ऑर्डर टू डिलीवरी मॉडल, पार्सल का उपयोग आदि तरीकों से ड्रग का कारोबार करने वालों ने हमारी लड़ाई को और कठिन बना दिया है। नार्को ऑफेंडर्स आज टेक्नोलॉजी से सक्षम बन कर नेटवर्क आधारित बन चुके हैं और मल्टी-डोमेन अपराध के रूप में आज हमारे सामने खड़े हैं। इस कठिन लड़ाई के प्रति हमारी प्रतिक्रिया भी सामूहिक और संगठित, रोडमैप आधारित और आधुनिक और इंटेलिजेंस लीड-बेस्ड होनी चाहिए। हमारी अप्रोच टेक्नोलॉजी ड्रिवन होनी चाहिए और हमें रूथलेस अप्रोच के साथ नेटवर्क-सेंट्रिक लड़ाई लड़नी होगी तभी हम इस समस्या के खिलाफ विजय प्राप्त कर सकते हैं।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि हमें ड्रग का व्यापार करने वालों के प्रति ruthless अप्रोच रखनी है और ड्रग के विक्टिम के प्रति sympathetic अप्रोच रखनी है। उन्होंने कहा कि हमारी सद्भावना ही उन विक्टिम बच्चों को फिर से सामान्य जीवन के साथ जोड़ सकती है और हमें उनकी अंगुली पकड़ कर सही रास्ते पर ले जाने का काम करना होगा।

श्री अमित शाह ने कहा कि आज यहां पर किए गए प्रस्तुतिकरण में बहुत स्पष्ट रूप से चार स्तंभों के अंदर हमारी लड़ाई को व्याख्यायित किया गया है और हर स्तंभ के अंदर उसके उपस्तंभ भी तय किए गए हैं। हर उपस्तंभ के अंदर लक्ष्य और इसे प्राप्त करने की तिथि को भी चिन्हित कर दिया गया है। एक साल बाद इस योजना का हम पुनरीक्षण करेंगे और इसे रीडिफाइन कर अंतिम 2 साल की लड़ाई के लिए हम आगे बढ़ेंगे।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि आज यहां एनसीबी की वार्षिक रिपोर्ट का भी विमोचन किया गया है। इसके साथ-साथ नशामुक्त भारत के रोडमैपके विजन डॉक्यूमेंट का भी आज विमोचन हुआ है। एनसीबी के गुवाहाटी और जम्मू ज़ोनल कार्यालयों का भी आज लोकार्पण किया गया। आज तक ज़िलास्तरीय एनकॉर्ड की 15876 बैठक हो चुकी हैं, राज्य स्तर की 266 बैठक हो चुकी हैं, एग्जीक्यूटिव स्तर पर सात बैठक कर चुके हैं और शीर्ष स्तर पर आज हम 10वीं बैठक कर रहे हैं। सभी राज्यों के मुख्य सचिव और पुलिस प्रमुख एनकॉर्ड बैठकों को परिणामलक्षित बनाने के लिए भी प्रयास करें।

श्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने 2047 में विकसित भारत का एक लक्ष्य रखा है और नशामुक्त भारत का लक्ष्य भी प्रधानमंत्री जी ने हमें दिया है। प्रधानमंत्री मोदी जी द्वारा दिए गए इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए 2026 से 2029 तक का रोडमैप चार प्रमुख स्तंभों पर आधारित है। पहला स्तंभ –Enforcement, Intelligence और Operations। इसका उद्देश्य है कि पूरे नेटवर्क पर लक्षित इंटेलिजेंस लीड कार्रवाई करें और नेटवर्क को नष्ट कर दें। दूसरा स्तंभ है –Precursors एवं Synthetic Drug Control। हमें उत्पादन स्तर पर ही नशे को रोकने की रणनीति अपनानी पड़ेगी। तीसरा स्तंभ- Demand और Harm Reduction के अभियान को समाज, शिक्षा और पुनर्वसन के माध्यम से हमें आगे बढ़ाना होगा। Capacity Building, Coordination और Monitoringके चौथे स्तंभ की रचना तंत्र को सक्षम, समन्वित, जवाबदेह और आधुनिक बनाने के लिए की गई है। यह रोडमैप Whole of Government Approach और Whole of Society Approach को ध्यान में रखकर बनाया गया है।इस रोडमैप में भारत के हर नागरिक का रोल समाहित किया गया है, लेकिन नागरिकों को प्रेरित करने का काम सभी राज्य सरकारें और भारत सरकार के सभी विभागों के सचिवों को करना पड़ेगा। इस रोडमैप की सफलता और लक्ष्यों की समय पर सिद्धि की जिम्मेदारी भी साझा है और उसकी निगरानी की भी व्यवस्था तय की गई है।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई वर्णन हम तीन शब्दों में कर सकते हैं –Detect, Disrupt और Destroy। हमने सीमावर्ती और संवेदनशील जिलों में HUMINT,टेक्निकल इंटेलिजेंस और कम्युनिटी पुलिसिंग के माध्यम से हमें – विदेश से देश में ड्रग पहुंचाने वाले, देश में उसे राज्यों तक पहुंचाने वाले और राज्यों से उपयोगकर्ता तक पहुंचाने वाले – तीनों प्रकार के कार्टेल को नष्ट करने के लिए आगे बढ़ना होगा। डार्क वेब मॉनिटरिंग, हवाला, क्रिप्टो ट्रांजैक्शन, पोर्ट और एयरपोर्ट के उपयोग पर हमारी सभी वित्तीय एजेंसियों को अपनी पूरी क्षमता के साथ समन्वित तरीके से काम कर एक साझा कार्यक्रम तैयार करना पड़ेगा। Disrupt के तहत नशे का व्यापार करने वालों के सोर्स ट्रांजिट, फाइनेंस और लीडरशिप के हर लेवल पर हमें कानून के तहत आघात करना पड़ेगा। अवैध फसलों को नष्ट करने के लिए हमें एक अभियान चलाना होगा। अवैध प्रयोगशालाओं को ढूंढने का एक तंत्र एजेंसियों को विकसित करना पड़ेगा और उन्हें कठोरता के साथ नष्ट करना पड़ेगा। नई पद्धति के कंट्रोल डिलीवरी ऑपरेशन का हमें उपाय भी ढूंढना पड़ेगा और इस उपाय में सतत पर्वर्तन करते हुए इसकी मॉनिटरिंग कर हमें इसे लॉजिकल एंड तक ले जाना पड़ेगा। श्री शाह ने कहा कि PMLA और ED के माध्यम से नशे के व्यापारियों के फाइनेंशियल इन्वेस्टिगेशन को भी हमें बहुत रूथलेसली करना पड़ेगा और इसके माध्यम से उनके नेटवर्क को छिन्न-भिन्न करने की जिम्मेदारी भी हमारी है। Destroy के तहत ध्वस्त किया गया नेटवर्क दोबारा खड़ा ना हो, इस तरह से हम इसे रूथलेसली समाप्त करें। जो पकड़ा गया जो kingpin है वो छूटना नहीं चाहिएऔर इसके लिए हमारे कानूनों में सभी प्रावधान उपलब्ध हैं। De-addiction और rehabilitation के माध्यम से हमें सप्लाई साइड को कम कर इनको डिस्ट्रॉय करने की दिशा में आगे बढ़ना पड़ेगा। Detect, Disrupt और Destroy इन तीन शब्दों के आधार पर इस पूरे रोडमैप की रचना की गई है।

श्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत सरकार के सभी मंत्रालयों, राज्यों और सभी विभागों को नशे के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति को जमीन पर उतारने के लिए सामूहिक रूप से आगे बढ़ना पड़ेगा। बड़े NDPS के मामले में वित्तीय जांच को राज्य के पुलिस प्रमुखों को अनिवार्य करना होगा। Proceed of Crime, उसकी पहचान, फ्रीज करना, seize करना और उसे जेल से बाहर न आने देने तक की पूरी प्रक्रिया को एविडेंस बेस्ड और आधुनिक तकनीक से लैस करनी होगी। गृह मंत्रालय ने सभी हाई कोर्ट के साथ भी इस विषय को उठाया है कि स्पेशल कोर्ट्स बनें, कोर्ट्स के न्यायमूर्ति की संख्या पर्याप्त हो और सजा तय करने के लिए बड़े केस की प्रतिदिन सुनवाई करने को प्राथमिकता दी जाए। जब तक रियल टाइम शेयरिंग सुनिश्चित नहीं करते हैं तब तक follow the money trail हम नहीं कर पाएंगे और इसीलिए रियल टाइम शेयरिंग को हमें सुनिश्चित करना पड़ेगा।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि Precursors और साइकोट्रॉपिक पदार्थ की शेड्यूलिंग को भी हमें एक बार देखना होगा और नार्को फाइनेंस के विरुद्ध प्रभावी कार्यवाही भी हमें सुनिश्चित करनी पड़ेगी। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय को नशामुक्त भारत अभियान और जन जागरूकता अभियान, सामुदायिक सहभागिता और उपचार पुनर्वास सेवाओं का विस्तार करना होगा तभी हम मांग को कम कर सकते हैं। फार्मास्यूटिकल डायवर्जन और ऑनलाइन फार्मेसी की निगरानी को स्वास्थ्य मंत्रालय को सुनिश्चित करना होगा। शिक्षा मंत्रालय के तहत माध्यमिक शिक्षा और उच्च शिक्षाविभागों को ड्रग-फ्री कैंपस का फ्रेमवर्क अडॉप्ट करना होगा। सबकी सहमति से इस कांसेप्ट को आगे बढ़ाते हुए अभिभावकों औरशिक्षकों की जागरूकता को भी हमेंसुनिश्चित करनाहोगा।

श्री अमित शाह ने कहा कि NCRB, NFSU, DFSS, I4C और NATGRID को कार्टेल आइडेंटिफिकेशन के लिए अपने-अपने स्तर पर बहुत सारे काम करने होंगे। राज्यों को ANTFs को फुल टाइम बनाना चाहिए औरdedicated, resourced, equipped और accountable यूनिट के रूप में इसे परिवर्तित करने के लिए राज्यों के पुलिस प्रमुख को काम करना चाहिए। ड्रग्स की commercial quantity के मामले में फाइनेंशियल इन्वेस्टिगेशन तथा backward-forward linkage हमारी इन्वेस्टिगेशन का अहम हिस्सा होना चाहिए क्योंकि इसके बिना हम तंत्र को नष्ट नहीं कर सकते। राज्य और ज़िला स्तरीय NCORD बैठकों को output-oriented बनाना चाहिए और इसकी मॉनिटरिंग भी बहुत अच्छे तरीके से करनी चाहिए। Strong chargesheet और effective prosecution के लिए स्पेशल पब्लिक प्रोसीक्यूटर रखने की दिशा में हमें आगे बढ़ना चाहिए और exclusive NDPS कोर्ट के लिए राज्य के पुलिस प्रमुख, अपने गृह विभाग के माध्यम से हाई कोर्ट को अप्रोच कर आगे बढ़ें। Demand reduction, treatment, rehabilitation, awareness, अभिभावकों, प्राध्यापकों और शिक्षकों की जागरूकताके लिए भी राज्यों को हर विभाग में एक नोडल अधिकारी तय करना चाहिए। इसके साथ ही, CBI के माध्यम से हमने भगोड़ों को वापस लाने का एक अभियान शुरू किया है जिसमें हमें बहुत अच्छी सफलता मिली है। राज्य सरकारों से भी अनुरोध है जो आपके राज्य के ड्रग्स या गैंगस्टर का काम करने वाले लोग विदेश में छिप कर बैठे हैं, उनके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी कर, सीबीआई का उपयोग कर और एजेंसियों के माध्यम से उनको वापस लाने की प्रक्रिया शुरू करें।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि 2004 से 2014 तक 40000 करोड़ रूपए के मूल्य की 26 लाख किलोग्राम सिंथेटिक ड्रग जब्त किए गए थे जबकि 2014 से 2026 तक 1 लाख 84 हज़ार करोड़ रूपए मूल्य की 1 करोड़ 18 लाख किलोग्राम ड्रग्स ज़ब्त की गई, यह बताता है कि हमारा अभियान सफलता की दिशा में आगे बढ़ रहा है।2004 से 2014 में 8000 करोड़ रूपए मूल्य की 3,26,000 किलोग्रामड्रग्स को नष्ट किया गया जबकि 2014 से 2026 के बीच 89,896 करोड़ रूपए मूल्य की 42,47,000 किलोग्राम ड्रग को हमने नष्ट किया। इसी प्रकार अवैध खेती के विनष्टीकरण को हमने लगातार बढ़ाया है। 2020 में 10,000 एकड़ अवैध अफीम की खेती विनष्ट की गई 2025 में हमने 42,282 एकड़ अवैध खेती को विनष्ट किया। 2004 से 2014 तक 173000 केस हुए थे जिनमें 195000 गिरफ्तारियां की गई थीं। 2014 से 2026 में 8,75,000 केस रजिस्टर किए गए हैं और 10,97,000 लोगों की गिरफ्तारियां हुई है। ये आंकड़े बताते हैं कि जब हम प्रयास करते हैं तो सफलता जरूर मिलेगी। मोदी सरकार ने प्रयास को स्पेसिफिक किया है, लक्ष्य को केंद्रित किया है, टाइम बाउंड भी किया है और ड्रग के खिलाफ लड़ाई के सभी प्रकार के बिंदुओंको आइडेंटिफाई कर हमने यह रोडमैप बनाया है।

श्री अमित शाह ने कहा कि अगर हम इस लड़ाई को मिलकर और एकजुट होकर लड़ते हैं तो निश्चित रूप से विजय हमारी होगी। तीन साल के अंदर हम भारत में ड्रग्स के नेटवर्क को समाप्त करने की दिशा में बहुत आगे बढ़ जाएंगे। इन तीन साल में हम सब एक लक्ष्य को तय कर सामूहिक प्रयास से मेहनत करें, समयसीमा और साझा रणनीति के साथ लक्ष्य तय करें तो हमारी विजय सुनिश्चित है।

अमित शाह ने NCORD की 10वीं बैठक की अध्यक्षता की, ‘मादक पदार्थ नियंत्रण विज़न डॉक्यूमेंट 2026-2029’ जारी

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने नई दिल्ली के विज्ञान भवन में नार्को-को ऑर्डिनेशन सेंटर की 10वीं शीर्ष-स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। केन्द्रीय गृह मंत्री ने “मादक पदार्थ नियंत्रण पर विज़न डॉक्यूमेंट (2026-2029)” और “एनसीबी वार्षिक रिपोर्ट -2025” का विमोचन और जम्मू और गुवाहाटी में NCB के ज़ोनल कार्यालयों का ई-उद्घाटन भी किया। अमित शाह ने ‘ऑनलाइन ड्रग्स डिस्पोज़ल फोर्टनाइट कैंपेन’ की शुरुआत भी की जिसमे 6,000 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के 2,09,500 किलोग्राम नशीले पदार्थों को नष्ट करने का लक्ष्य रखा गया है।

गृह मंत्री ने कहा कि ड्रग तस्करी, संगठित अपराध, नार्को टेरर फाइनेंस और सीमापार के आतंकी नेटवर्क के वित्त पोषण के साथ यह समस्या एक Evolving Narco Terrorism Ecosystem भी बन चुकी है। हमारे देश की आंतरिक सुरक्षा, अर्थतंत्र और युवा पीढ़ी के भविष्य की सुरक्षा के लिए हमें इस समस्या पर पूर्ण विजय प्राप्त करनी ही होगी। हम Death Triangle और Death Crescent के बीच में स्थित हैं और ड्रोन-आधारित ड्रॉप्स, समुद्री मार्गों से कंटेनराइज्ड कार्गो, डार्कनेट, क्रिप्टो पेमेंट, ऑर्डर टू डिलीवरी मॉडल, पार्सल का उपयोग आदि तरीकों से ड्रग का कारोबार करने वालों ने हमारी लड़ाई को और कठिन बना दिया है।

अमित शाह ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी ने 2047 में विकसित भारत का एक लक्ष्य रखा है और नशामुक्त भारत का लक्ष्य भी प्रधानमंत्री जी ने हमें दिया है। प्रधानमंत्री मोदी जी द्वारा दिए गए इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए 2026 से 2029 तक का रोडमैप चार प्रमुख स्तंभों पर आधारित है। पहला स्तंभ –Enforcement, Intelligence और Operations। इसका उद्देश्य है कि पूरे नेटवर्क पर लक्षित इंटेलिजेंस लीड कार्रवाई करें और नेटवर्क को नष्ट कर दें। दूसरा स्तंभ है –Precursors एवं Synthetic Drug Control। हमें उत्पादन स्तर पर ही नशे को रोकने की रणनीति अपनानी पड़ेगी। तीसरा स्तंभ- Demand और Harm Reduction के अभियान को समाज, शिक्षा और पुनर्वसन के माध्यम से हमें आगे बढ़ाना होगा। Capacity Building, Coordination और Monitoringके चौथे स्तंभ की रचना तंत्र को सक्षम, समन्वित, जवाबदेह और आधुनिक बनाने के लिए की गई है। यह रोडमैप Whole of Government Approach और Whole of Society Approach को ध्यान में रखकर बनाया गया है।इस रोडमैप में भारत के हर नागरिक का रोल समाहित किया गया है, लेकिन नागरिकों को प्रेरित करने का काम सभी राज्य सरकारें और भारत सरकार के सभी विभागों के सचिवों को करना पड़ेगा। इस रोडमैप की सफलता और लक्ष्यों की समय पर सिद्धि की जिम्मेदारी भी साझा है और उसकी निगरानी की भी व्यवस्था तय की गई है।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई वर्णन हम तीन शब्दों में कर सकते हैं –Detect, Disrupt और Destroy। हमने सीमावर्ती और संवेदनशील जिलों में HUMINT,टेक्निकल इंटेलिजेंस और कम्युनिटी पुलिसिंग के माध्यम से हमें – विदेश से देश में ड्रग पहुंचाने वाले, देश में उसे राज्यों तक पहुंचाने वाले और राज्यों से उपयोगकर्ता तक पहुंचाने वाले – तीनों प्रकार के कार्टेल को नष्ट करने के लिए आगे बढ़ना होगा।

केंद्रीय मंत्री डॉ. वीरेन्द्र कुमार ने हरिद्वार में नशा विरोधी जनजागरूकता अभियान का नेतृत्व किया

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

नशा मुक्त भारत सप्ताह के दौरान 1.31 करोड़ से अधिक नागरिकों ने विभिन्न जन-जागरूकता एवं सामुदायिक जनभागीदारी कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। 17 जून से 26 जून 2026 तक मनाए गए इस अभियान के अंतर्गत नशा मुक्ति मित्र पंजीकरण अभियान, सेमिनार और वेबिनार, बच्चों एवं युवाओं के लिए प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रम, नुक्कड़ नाटक, लघु नाटिकाएं, स्लोगन लेखन प्रतियोगिताएं, ई-प्रतिज्ञाएं, जन-जागरूकता रैलियां, योग सत्र, हस्ताक्षर अभियान, निबंध लेखन प्रतियोगिताएं, चित्रकला प्रतियोगिताएं तथा सामुदायिक सहभागिता से जुड़े अनेक अन्य कार्यक्रम आयोजित किये गए।

नशा मुक्त भारत सप्ताह का आयोजन मादक पदार्थों के दुरुपयोग एवं अवैध तस्करी के विरुद्ध अंतरराष्ट्रीय दिवस के उपलक्ष्य में किया गया। इस सप्ताह का समापन 26 जून 2026 को उत्तराखंड के हरिद्वार स्थित देव संस्कृति विश्वविद्यालय (डीएसवीवी) में आयोजित राष्ट्रीय जन-जागरूकता कार्यक्रम के साथ हुआ।

इस कार्यक्रम की शोभा केन्‍द्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेन्द्र कुमार, देव संस्कृति विश्वविद्यालय (डीएसवीवी) के प्रो वाइस चांसलर डॉ. चिन्मय पंड्या तथा अन्य गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति से बढ़ी।

कार्यक्रम के अंतर्गत डॉ. वीरेन्द्र कुमार के नेतृत्व में नशा मुक्त रैली आयोजित की गई, जिसमें लगभग 4,000 नागरिकों ने भाग लिया। यह भागीदारी नशे के दुरुपयोग के विरुद्ध राष्ट्रीय अभियान के प्रति जनता के व्यापक समर्थन का प्रतीक रही। इस अवसर पर केन्‍द्रीय मंत्री ने उपस्थित लोगों को ‘नशा मुक्ति की शपथ’ तथा ‘गरिमापूर्ण वृद्धावस्था की शपथ’ दिलाई। इसके माध्यम से सरकार ने नशा-मुक्त, समावेशी और संवेदनशील समाज के निर्माण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को पुनः दोहराया।इस कार्यक्रम में ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से हजारों लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रतिभागियों में छात्र, युवा, विभिन्न आध्यात्मिक संगठनों के स्वयंसेवक, उत्तराखंड सरकार के प्रतिनिधि तथा अन्य स्थानीय हितधारक शामिल थे। इसके अलावा, देशभर के राज्यों और केन्‍द्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों, विभिन्न मंत्रालयों एवं विभागों, अनुदान सहायता प्राप्त संस्थानों, नशा मुक्ति एवं व्यसन उपचार केन्‍द्रों तथा अन्य संबंधित हितधारकों ने भी कार्यक्रम में भाग लेकर ‘नशा मुक्त भारत’ के निर्माण के प्रति अपनी सामूहिक प्रतिबद्धता दोहराई।

कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग तथा अखिल विश्व गायत्री परिवार के बीच नशा मुक्त भारत अभियान (एनएमबीए) और अटल वयो अभ्युदय योजना (एवीवाईएवाई) के अंतर्गत समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर करना रहा। इन समझौतों का उद्देश्य जन-जागरूकता बढ़ाने, सामुदायिक एकजुटता को मजबूत करने, मादक पदार्थों की मांग में कमी लाने तथा ‘गरिमापूर्ण वृद्धावस्था’ के संदेश के माध्यम से देशभर में वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण को बढ़ावा देना है।

कार्यक्रम के दौरान नशा मुक्त भारत अभियान (एनएमबीए) के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने में राज्यों एवं केन्‍द्र शासित प्रदेशों, जिलों, विभिन्न मंत्रालयों एवं विभागों तथा अनुदान सहायता प्राप्त संस्थानों द्वारा किए गए प्रयासों स्‍वीकृत करते हुए उनकी सराहना की गई। साथ ही, ‘नशा मुक्ति मित्रों’ को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता फैलाने और समुदायों को अभियान से जोड़ने में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त, नशा मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत राज्य सरकारों द्वारा आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं तथा उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विभिन्न हितधारकों को नशामुक्त समाज के निर्माण में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए सम्मानित किया गया।

नशा मुक्त भारत सप्ताह–2026 तथा मादक पदार्थों के दुरुपयोग और अवैध तस्करी के विरुद्ध अंतरराष्ट्रीय दिवस के सफल आयोजन ने ‘संपूर्ण सरकार’ और ‘संपूर्ण समाज’ की सहभागिता पर आधारित दृष्टिकोण से सरकार की नशा-मुक्त समाज के निर्माण के प्रति अटूट प्रतिबद्धता को एक बार फिर दोहराया। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग ने सभी नागरिकों, संस्थानों, युवा संगठनों, शैक्षणिक संस्थानों तथा सामुदायिक हितधारकों से इस राष्ट्रीय जनआंदोलन में सक्रिय रूप से सहभागी बनने और “नशा मुक्त भारत, खुशहाल भारत” के संकल्प को साकार करने में अपना योगदान देने का आह्वान किया।