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माय भारत ने सीमावर्ती गांवों में युवा सशक्तिकरण के लिए वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम 2026 शुरू किया

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

युवा मामले एवं खेल मंत्रालय के युवा मामलों के विभाग ने मेरा युवा भारत के माध्यम से विकसित जीवंत ग्राम कार्यक्रम 2026 के पहले चरण का शुभारंभ किया है। यह एक अग्रणी युवा नेतृत्व वाली पहल है जिसका उद्देश्य जमीनी स्तर पर भागीदारी को सुदृढ़ करना, राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देना और भारत के सीमावर्ती गांवों में सतत विकास को प्रोत्साहित करना है। यह कार्यक्रम दो चरणों में कार्यान्वित किया जाएगा।

इस कार्यक्रम में भाग लेने के लिए कुल 500 ‘एमवाई भारत’ स्वयंसेवकों का चयन किया गया है। इनका चयन एक राष्ट्रव्यापी ऑनलाइन प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता के माध्यम से किया गया, जिसमें 3 लाख से अधिक युवाओं ने भाग लिया था। सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व करने वाले स्वयंसेवकों को लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के चिन्हित सीमावर्ती गांवों में दो चरणों में तैनात किया जा रहा है। प्रथम चरण में 250 स्वयंसेवक 43 गांवों में गहन गतिविधियों में भाग ले रहे हैं, जबकि शेष 250 स्वयंसेवक इस महीने के अंत में 50 गांवों में द्वितीय चरण की गतिविधियों में शामिल होंगे।

यह कार्यक्रम युवा नागरिकों को सीमावर्ती गांवों में रहने और स्थानीय समुदायों के साथ सीधे जुड़ने का एक अनूठा अवसर प्रदान करता है। गांववासियों, पंचायती राज संस्थाओं, स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा कर्मियों के साथ परस्पर बातचीत के माध्यम से, प्रतिभागी भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों की सामाजिक-आर्थिक वास्तविकताओं, सांस्कृतिक विरासत, विकासात्मक आकांक्षाओं और रणनीतिक महत्व से प्रत्यक्ष रूप से परिचित होंगे।

सात दिवसीय गहन प्रशिक्षण कार्यक्रम को सीमा जागरूकता, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, सामुदायिक जीवन, शासन, सामाजिक-आर्थिक मूल्यांकन, ग्राम विकास योजना, स्वयंसेवा और राष्ट्रीय एकता जैसे विषयगत क्षेत्रों के इर्द-गिर्द संरचित किया गया है। स्वयंसेवक घरेलू सर्वेक्षण करेंगे, ग्राम सभा की गतिविधियों में भाग लेंगे, स्वच्छता और पर्यावरण अभियानों में योगदान देंगे और गांवों में विकास के अवसरों की पहचान करने में सहायता करेंगे।

यह कार्यक्रम गृह मंत्रालय और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के सहयोग से कार्यान्वित किया जा रहा है और राष्ट्र निर्माण की पहलों में युवाओं की सक्रिय भागीदारी के माध्यम से 2047 तक एक विकसित भारत के निर्माण की परिकल्पना के अनुरूप है।

विकसित वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम 2026 भारत सरकार की युवा नागरिकों को राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदार के रूप में सशक्त बनाने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। साथ ही, भारत के युवाओं और इसके जीवंत सीमावर्ती गांवों के बीच सामाजिक, सांस्कृतिक और विकासात्मक संबंधों को सुदृढ़ करता है।

शिवराज सिंह चौहान ने रायसेन से राष्ट्रव्यापी ‘खेत बचाओ अभियान’ की शुरुआत की

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के रमासिया गांव से राष्ट्रव्यापी ‘खेत बचाओ अभियान’ की शुरुआत की। यह अभियान 1 जून से 30 जून तक पूरे देश में चलाया जाएगा।

अभियान के शुभारंभ पर शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि “मिट्टी बचेगी तो खेती बचेगी, किसान मजबूत होगा और देश समृद्ध बनेगा।” उन्होंने किसानों से संतुलित उर्वरक उपयोग, मिट्टी परीक्षण, सॉयल हेल्थ कार्ड, प्राकृतिक खेती और जल संरक्षण को अपनाने की अपील की।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अधिक मात्रा में रासायनिक खाद और कीटनाशकों का उपयोग मिट्टी की उर्वरता को नुकसान पहुंचाता है। इसलिए किसानों को मिट्टी की जांच के आधार पर ही खाद और उर्वरकों का उपयोग करना चाहिए।

उन्होंने बताया कि ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत कृषि वैज्ञानिक, कृषि विश्वविद्यालयों के विशेषज्ञ, कृषि विज्ञान केंद्रों के अधिकारी और कृषि विभाग की टीमें गांव-गांव जाकर किसानों को जागरूक करेंगी। किसानों को मिट्टी परीक्षण, प्राकृतिक खेती, आधुनिक बुवाई तकनीक, जल संरक्षण और उन्नत कृषि पद्धतियों की जानकारी दी जाएगी।

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि हर किसान के पास सॉयल हेल्थ कार्ड होना चाहिए, ताकि वह अपनी जमीन की जरूरत के अनुसार खाद का उपयोग कर सके। इससे खेती की लागत कम होगी और उत्पादन बढ़ेगा।

उन्होंने बताया कि सोयाबीन, धान और दलहन जैसी फसलों के लिए विशेष प्रदर्शन कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। किसानों को उन्नत बीज, लेजर लेवलर जैसी आधुनिक तकनीकों और पानी बचाने वाली खेती के तरीकों की जानकारी दी जाएगी।

महिला सशक्तिकरण पर जोर देते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को रोजगार और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। वहीं युवाओं को प्रशिक्षण और मार्गदर्शन देकर आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी काम किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि रमासिया गांव से शुरू हुआ यह अभियान आगे चलकर जनभागीदारी का बड़ा आंदोलन बनेगा। सरकार का लक्ष्य खेती को टिकाऊ, लाभकारी और पर्यावरण के अनुकूल बनाना है।

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में “रिफॉर्म एक्सप्रेस” पर सवार है कृषि और ग्रामीण विकास मंत्रालय- श्री शिवराज सिंह चौहान


दिल्ली / सत्ता संदेश

किसान-गरीब को भटकना नहीं पड़े, शिकायत निवारण को दें वरीयता- श्री शिवराज सिंह चौहान

हर महीने होगी समीक्षा, केवल डिस्पोजल नहीं, जमीन पर समाधान चाहिए- श्री शिवराज सिंह

नियम-प्रक्रिया को बनाएं सरल; एआई, डेटा और डिजिटल गवर्नेंस से कृषि-ग्रामीण विकास को देंगे नई धार- श्री शिवराज

कोर्ट केस, फाइल कल्चर और ड्राफ्टिंग पर श्री शिवराज सिंह का बड़ा सुधार एजेंडा

पीएम मोदी के ‘रिफॉर्म, परफॉर्म, ट्रांसफॉर्म और इनफॉर्म’ मंत्र से किसानों के जीवन में भरेंगे खुशियां- केंद्रीय कृषि मंत्री

2047 विजन, राज्यों से साझेदारी और 12 साल की उपलब्धियों के प्रस्तुतीकरण पर श्री शिवराज सिंह ने दिया जोर

 प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा गुरुवार शाम मंत्रिपरिषद की बैठक में दिए गए दिशा-निर्देशों के पालन को लेकर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने अगले ही दिन आज अपने दोनों मंत्रालयों के अंतर्गत आने वाले विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों की उच्चस्तरीय बैठक लेकर साफ कहा कि सरकार का काम फाइलों में नहीं, जनता के जीवन में दिखना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि किसान, गरीब, ग्रामीण और आम नागरिक को योजनाओं का लाभ पाने या शिकायतों के समाधान के लिए भटकना न पड़े, इसके लिए योजनाबद्ध, समयबद्ध और परिणाममुखी व्यवस्था तुरंत खड़ी की जाए।

केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने बैठक में कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट रूप से कहा है कि आम आदमी को लड़ना न पड़े, उसे दर-दर भटकना न पड़े और उसे योजनाओं का लाभ सहज, सरल और समय पर मिलना चाहिए। इसी को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए उन्होंने कृषि, ग्रामीण विकास, भूमि संसाधन और आईसीएआर समेत संबंधित इकाइयों में शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत, प्रभावी और जवाबदेह बनाने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि अभी विभिन्न योजनाओं और विभागों में शिकायतों के निपटारे की अलग-अलग व्यवस्थाएं हैं, जैसे अलग पोर्टल, अलग तंत्र और अलग प्रणाली, लेकिन अब इस व्यवस्था को ज्यादा प्रभावी और परिणामकारी बनाने की जरूरत है। इसके लिए कृषि और ग्रामीण विकास, दोनों विभागों में कम से कम 10-10 अधिकारियों की टीम गठित करने को कहा गया, जो प्रतिदिन शिकायतों, जनसमस्याओं, पत्रों, जनप्रतिनिधियों के प्रतिवेदनों और विभिन्न पोर्टलों पर आई समस्याओं की समीक्षा करे।

श्री चौहान ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि शिकायतों का समाधान केवल कागज पर “डिस्पोजल” दिखाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि यह देखा जाए कि लाभार्थी को वास्तविक राहत मिली या नहीं, योजना का लाभ वास्तव में पहुंचा या नहीं, और कहीं ऐसा तो नहीं कि रिकॉर्ड में वितरण दिख रहा हो लेकिन जमीन पर लाभार्थी को कुछ मिला ही न हो।

बैठक में केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने अपने उस अनुभव का भी उल्लेख किया, जिसमें लाभार्थियों को फोन कर सत्यापन करने पर कुछ मामलों में कागज और वास्तविकता के बीच अंतर सामने आया था। उन्होंने साफ कहा कि यह समस्या आसान नहीं, बल्कि जटिल है, इसलिए शिकायतों की प्रकृति, क्षेत्रवार प्रवृत्ति और योजनावार अड़चनों की पहचान कर तंत्र में आवश्यक बदलाव करना होगा।

उन्होंने निर्देश दिया कि हर महीने शिकायत निवारण व्यवस्था की समीक्षा की जाएगी। श्री शिवराज सिंह ने कहा कि महीने के पहले सोमवार को समीक्षा की जाएगी, हालांकि जून में खरीफ कार्यों की व्यस्तता को देखते हुए दूसरे सोमवार को विस्तृत समीक्षा की जाएगी, लेकिन तब तक तंत्र और अधिक व्यवस्थित, उत्तरदायी और प्रभावी हो जाना चाहिए।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा रिफॉर्म्स पर दिए जा रहे लगातार जोर का उल्लेख करते हुए श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अब हर डिवीजन, हर योजना और हर विभाग अपने स्तर पर यह पहचाने कि आखिर कठिनाई कहां है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना, सड़क योजना, कृषि योजनाएं, बागवानी, बीमा, विपणन या अन्य कार्यक्रमों में जहां कहीं लाभार्थी बेवजह चक्कर काट रहा है, वहां नियम, प्रक्रिया, तंत्र और कार्यप्रणाली को सरल बनाना ही होगा।

केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने साफ कहा कि प्रक्रियाओं का सरलीकरण किया जाए और पुराने-अप्रासंगिक रेगुलेशंस को खत्म करना अब जरूरी है। उन्होंने पूछा कि हर चीज के लिए लाइसेंस की जरूरत क्यों हो, कई जगह पंजीकरण या आसान प्रणाली से काम क्यों नहीं हो सकता। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि एक सप्ताह के भीतर विभिन्न योजनाओं में बाधा पैदा करने वाले प्रावधानों, जटिल प्रक्रियाओं और सुधार योग्य बिंदुओं की पहचान कर ली जाए, ताकि आगे त्वरित निर्णय लिया जा सके।

बैठक में एआई और टेक्नोलॉजी के उपयोग पर महत्वपूर्ण रूप से बात करते हुए श्री चौहान ने कहा कि कृषि, ग्रामीण विकास, भूमि संसाधन और आईसीएआर सहित सभी क्षेत्रों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल प्लेटफॉर्म, डेटा शेयरिंग, डेटा आधारित निर्णय, मॉनिटरिंग और इंटर-डिपार्टमेंटल समन्वय को और मजबूत किया जाना चाहिए। उन्होंने इसके लिए अलग टीम बनाकर अध्ययन करने और उपयोगी प्रस्ताव उनके सामने प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि डिजिटल गवर्नेंस के माध्यम से पारदर्शिता और दक्षता दोनों बढ़ाई जा सकती हैं, लेकिन इसके लिए विभागों के बीच साझा कामकाज और डेटा इंटीग्रेशन जरूरी है। बैठक में यह भी सामने आया कि विभिन्न शिकायत डेटाबेस को जोड़ने की दिशा में काम चल रहा है, ताकि केवल एक पोर्टल की नहीं बल्कि समेकित शिकायत-प्रणाली के आधार पर विभागीय मूल्यांकन हो सके।

श्री चौहान ने प्रशासनिक कार्यसंस्कृति में बदलाव पर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि फाइल नीचे से बनकर ऊपर आती है और कई बार नीचे का पुराना माइंडसेट ही पूरी प्रक्रिया को उलझा देता है। इसलिए केवल ऊपर के स्तर पर नहीं, बल्कि नीचे से फाइल निर्माण, नोटिंग, निर्णय-तैयारी और ड्राफ्टिंग की गुणवत्ता सुधारने की जरूरत है। उन्होंने ड्राफ्टिंग को अत्यंत महत्वपूर्ण विषय बताते हुए कहा कि विभागों में ऐसे अधिकारी विकसित किए जाएं जो फाइलें और नोट्स मजबूत, स्पष्ट और नीति-संगत तरीके से तैयार कर सकें। इसके लिए प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण और दक्षता वृद्धि की व्यवस्था की जाए, ताकि फाइलें अनावश्यक रूप से न अटकें और निर्णय की गुणवत्ता भी बेहतर हो।

न्यायालयों में लंबित मामलों को लेकर भी केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कई मामलों में सरकार इसलिए कमजोर पड़ जाती है क्योंकि सरकारी पक्ष समय पर और प्रभावी ढंग से अदालत में रखा ही नहीं जाता। उन्होंने सभी विभागों से कहा कि वे लंबित कोर्ट केसों की सूची निकालें, उनकी समीक्षा करें, नोडल अधिकारी तय करें, विधिक तैयारी मजबूत करें और जरूरत पड़े तो बेहतर वकीलों की व्यवस्था करें, क्योंकि सरकार की हार का सीधा नुकसान सार्वजनिक हित को होता है।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा विकास कार्यों में बाधाओं की पहचान और समाधान पर दिए गए संदेश को आगे बढ़ाते हुए केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने कहा कि हर डिवीजन यह बताए कि काम किस वजह से अटकता है, कौन सी बाधाएं फैसलों, क्रियान्वयन और लाभ वितरण में देरी करती हैं, और उन्हें दूर करने के लिए क्या सुधार किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह कवायद एक साथ चलनी चाहिए- रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म के साथ-साथ इन्फॉर्म भी।

उन्होंने कहा कि कई बार योजनाएं अच्छी होती हैं, सुधार भी किए जाते हैं, लेकिन जनता को जानकारी ही नहीं होती। इसलिए हितधारकों से संवाद, किसान संगठनों के साथ बैठक, मजदूरों और सरपंचों से बातचीत, जनप्रतिनिधियों के माध्यम से सूचना, सोशल मीडिया, ग्राफिक्स, वीडियो, रील्स और रचनात्मक संचार माध्यमों से योजनाओं और सुधारों को जनता तक पहुंचाया जाए।

बैठक में यह भी कहा गया कि जो सुधार पहले ही किए जा चुके हैं, उनका “रिफॉर्म उत्सव” की तरह प्रचार-प्रसार होना चाहिए। श्री चौहान ने कहा कि केवल सुधार कर देना काफी नहीं है, बल्कि जिनके लिए सुधार किए गए हैं, उन्हें बुलाकर संवाद किया जाना चाहिए, बताया जाना चाहिए कि क्या बदला है, उससे क्या लाभ होगा और आगे क्या और किया जा सकता है।

श्री चौहान ने राज्यों के साथ साझेदारी को कृषि और ग्रामीण विकास की सफलता की कुंजी बताया। उन्होंने कहा कि असली काम राज्यों में होता है, इसलिए राज्यों के साथ रोडमैप आधारित साझेदारी, ज़ोनल कॉन्फ्रेंस, योजनावार समन्वय और समस्या-आधारित संवाद को और मजबूत किया जाए। उन्होंने संकेत दिया कि जो राज्य संकोच करते हैं, उनके साथ भी संवाद बढ़ाया जाएगा, क्योंकि केंद्र का दायित्व पूरे देश की जनता के प्रति है।

उन्होंने कृषि, पशुपालन, मत्स्य, फूड प्रोसेसिंग और अन्य संबद्ध क्षेत्रों के बीच बेहतर समन्वय की भी जरूरत बताई। उनका कहना था कि इंटीग्रेटेड फार्मिंग, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और क्षेत्रीय कृषि रोडमैप जैसे मुद्दों पर अलग-अलग मंत्रालयों और विभागों को साथ बैठकर काम करना होगा।

बैठक में विकसित भारत 2047 के लक्ष्य के अनुरूप विभागीय विजन दस्तावेज तैयार करने पर भी बल दिया गया। केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने कहा कि प्रत्येक विभाग अपना 2047 विजन, इस वर्ष के लक्ष्य, वार्षिक, छह-माही, तिमाही, साप्ताहिक और दैनिक कार्ययोजना तैयार करे, ताकि मॉनिटरिंग मजबूत हो और काम का आकलन स्पष्ट रूप से हो सके।

उन्होंने सरकारी भवनों और संस्थानों में पीएम सूर्य घर जैसी पहलों के अनुरूप सोलराइजेशन को भी आगे बढ़ाने की बात कही और कहा कि जहां काम हो चुका है और जहां बाकी है, उसका स्पष्ट आकलन तैयार कर समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मौजूदा कार्यकाल के दो वर्ष और समग्र 12 वर्षों की उपलब्धियों के प्रभावी प्रस्तुतीकरण पर भी बैठक में चर्चा हुई। श्री चौहान ने कहा कि विभाग अपनी उपलब्धियों को अभी से व्यवस्थित करें और प्रेस कॉन्फ्रेंस के साथ ही गांव स्तर तक जाने वाले कार्यक्रम, प्रेजेंटेशन, रचनात्मक कंटेंट, वीडियो और सोशल मीडिया अभियानों के माध्यम से जनता के बीच ले जाएं। उन्होंने सोशल मीडिया के प्रभाव को देखते हुए छोटे वीडियो, ग्राफिक्स, लाभार्थी कहानियों और योजनाओं से जीवन में आए बदलावों को केंद्र में रखने का सुझाव दिया। उनका मानना था कि अखबार और टीवी के साथ-साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दमदार प्रस्तुतीकरण आज ज्यादा असरकारी हो सकता है।

बैठक में विदेश यात्राओं को लेकर भी प्रधानमंत्री श्री मोदी के निर्देशों का उल्लेख करते हुए श्री चौहान ने अधिकारियों से कहा कि अनावश्यक विदेश यात्राओं से बचा जाए और केवल अत्यंत जरूरी मामलों में ही ऐसे प्रस्ताव आगे आएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस समय प्राथमिकता देश के भीतर काम की गति, गुणवत्ता और परिणाम को बेहतर बनाना है।

फाइलों के निस्तारण को लेकर श्री चौहान ने कहा कि उनकी प्राथमिकता केवल तेजी नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण और परिणाममूलक निर्णय है। उन्होंने कहा कि कोई भी नियम या फाइल कई लोगों की जिंदगी पर असर डाल सकती है, इसलिए उसे समझकर, परखकर और सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ निर्णय लेना जरूरी है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी व्यवस्था बनाई जाए जिससे अनावश्यक देरी न हो और महत्वपूर्ण मामलों पर समय रहते चर्चा हो सके।

बैठक में केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि कोई भी विभाग पीछे नहीं रहना चाहिए। शिकायत निवारण से लेकर रिफॉर्म, टेक्नोलॉजी, कोर्ट केस, राज्यों से समन्वय, जनसंवाद, 2047 रोडमैप और उपलब्धियों के प्रस्तुतीकरण तक हर मोर्चे पर सक्रिय, समयबद्ध और जवाबदेह कार्यशैली अपनानी होगी, ताकि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के सुशासन विजन के अनुरूप सरकार का लाभ अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी ढंग से पहुंच सके।

भूमि शासन एवं वाटरशेड प्रबंधन में सहयोग को लेकर भूमि संसाधन विभाग और एडीबी के बीच चर्चा


नई दिल्ली / सत्ता संदेश

भूमि संसाधन विभाग के सचिव ने एडीबी के साथ बैठक में भूमि शासन सुधारों और डिजिटल पहलों पर प्रकाश डाला

नई दिल्ली, 21 मई: ग्रामीण विकास मंत्रालय के भूमि संसाधन विभाग (डीओएलआर) के सचिव श्री नरेन्द्र भूषण ने आज एशियाई विकास बैंक (एडीबी) की कंट्री डायरेक्टर सुश्री मियो ओका के नेतृत्व में एडीबी प्रतिनिधिमंडल के साथ एक परिचयात्मक बैठक की। बैठक के दौरान, श्री नरेन्द्र भूषण ने 2047 तक विकसित भारत के निर्माण के सरकार के विजन के अनुरूप भूमि प्रशासन, भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण और जलसंभर विकास के क्षेत्रों में भूमि संसाधन विभाग द्वारा की जा रही प्रमुख पहलों पर प्रकाश डाला।

सचिव ने कहा कि भूमि संसाधन विभाग को देश में भूमि अभिलेख प्रबंधन और भूमि प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्होंने कहा कि कुशल भूमि प्रशासन और भूमि संसाधनों का अधिकतम उपयोग आर्थिक विकास को गति देने, भूमि संपत्तियों के मूल्य को उजागर करने और समावेशी विकास सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है।

भूमि प्रशासन में प्रौद्योगिकी की परिवर्तनकारी भूमिका पर बल देते हुए, श्री भूषण ने प्रतिनिधिमंडल को सूचित किया कि डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम (डीआईएलआरएमपी) के तहत महत्वपूर्ण प्रगति हासिल की गई है। उन्होंने कहा कि कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में रिकॉर्ड्स ऑफ राइट्स का डिजिटलीकरण लगभग पूर्ण हो चुका है, जबकि देश भर में लिखित भूमि अभिलेखों को जमाबंदी नक्शों से जोड़ने में महत्वपूर्ण उपलब्धियां प्राप्त की गई हैं।

उन्होंने बताया कि विभाग कार्यक्रम के अगले चरण, डीआईएलआरएमपी 3.0 लागू करने की प्रक्रिया में है, जिसका उद्देश्य प्रौद्योगिकी उपाय, भूमि अभिलेखों के गतिशील अद्यतन और भूमि संबंधी डेटाबेस के बेहतर एकीकरण के माध्यम से भूमि शासन प्रणालियों को और सुदृढ़ करना है। सचिव ने देश भर में भूमि पार्सलों को विशिष्ट भूमि पार्सल पहचान संख्या (यूएलपीआईएन), जिसे “भू-आधार” भी कहा जाता है, के आवंटन में हुई प्रगति को भी रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि भारत में लगभग 66 प्रतिशत कृषि भूमि पार्सलों के लिए यूएलपीआईएन जारी किए जा चुके हैं।

श्री भूषण ने डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (डीपीआई) की अगली परत के रूप में एक व्यापक “लैंड स्टैक” विकसित करने के विभाग के विजन को साझा किया, जिसमें भूमि अभिलेख, पंजीकरण, म्यूटेशन, भूमि उपयोग और अन्य संबंधित सेवाओं को अंतरसंचालनीय डिजिटल प्रणालियों के माध्यम से एकीकृत करके बेहतर शासन और सेवा वितरण सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने शहरी क्षेत्रों में आधुनिक भूमि शासन पद्धतियों के विस्तार के लिए विभाग की चल रही पहलों पर भी प्रकाश डाला, जिनमें मानचित्रण और प्रौद्योगिकी-आधारित समाधान शामिल हैं।

जलसंभर विकास के विषय पर, सचिव ने कृषि उत्पादकता बढ़ाने और ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने के लिए जलवायु-अनुकूल और टिकाऊ भूमि एवं जल प्रबंधन पद्धतियों के महत्व पर बल दिया। उन्होंने देश भर में जलसंभर विकास पहलों को व्यापक स्तर पर लागू करने के लिए नवीन वित्तपोषण मॉडल, प्रौद्योगिकी उपाय और संयोजन-आधारित दृष्टिकोणों की आवश्यकता पर बल दिया।

बैठक में भूमि प्रशासन, जलसंभर विकास, डिजिटल शासन और सतत प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन में वैश्विक सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों पर भी विचार-विमर्श किया गया। शासन के परिणामों में सुधार के लिए भू-स्थानिक प्रणालियों, डिजिटल प्लेटफार्मों, रिमोट सेंसिंग और डेटा-आधारित योजना सहित उभरती प्रौद्योगिकियों के उपयोग पर चर्चा हुई।

सुश्री मियो ओका ने सचिव को भारत में विभिन्न क्षेत्रों में एशियाई विकास बैंक द्वारा समर्थित विभिन्न पहलों और परियोजनाओं तथा राज्य सरकारों के साथ जारी सहयोग के बारे में जानकारी दी। उन्होंने डिजिटल कृषि, जलवायु परिवर्तन से निपटने की क्षमता, जलसंभर प्रबंधन और संस्थागत क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में एडीबी के कार्यों पर प्रकाश डाला और आपसी हित के क्षेत्रों में भूमि संसाधन विभाग के साथ सहयोग करने में एडीबी की गहरी रुचि व्यक्त की।


दोनों पक्षों ने देश में सतत भूमि और जलसंभर प्रबंधन प्रणालियों को मजबूत करने के लिए तकनीकी सहायता, नीतिगत समर्थन, क्षमता निर्माण और ज्ञान साझाकरण सहित भविष्य में सहयोग के अवसरों पर चर्चा की।

इस बैठक में अपर सचिव श्री आर आनंद; संयुक्त सचिव श्री पी. नरहरि; संयुक्त सचिव श्री नितिन खाडे; आर्थिक सलाहकार श्री पी.के. अब्दुल करीम; और मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

ग्रामीण विकास मंत्रालय ने शी-मार्ट्स के माध्यम से पूरे भारत में महिलाओं के नेतृत्व वाले ग्रामीण विपणन पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक रूपरेखा तैयार की


दिल्ली /सत्ता संदेश

डीएवाई-एनआरएलएम ने पूरे भारत में महिलाओं के नेतृत्व वाले ग्रामीण विपणन पारिस्थितिकी तंत्र के लिए शी-मार्ट्स पर राष्ट्रीय परामर्श का नेतृत्व किया

भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय (एमओआरडी) ने दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम) के माध्यम से 14-15 मई , 2026 को भुवनेश्वर, ओडिशा के मेफेयर कन्वेंशन हॉल में शी-मार्ट्स (स्वयं सहायता उद्यमी-ग्रामीण परिवर्तन के लिए विपणन के अवसर) पर दो दिवसीय राष्ट्रीय परामर्श का आयोजन किया। इस परामर्श ने बजट घोषणा – 2026 के कार्यान्वयन का मार्ग प्रशस्त किया। इस परामर्श की मेजबानी ओडिशा आजीविका मिशन (ओएलएम), मिशन शक्ति विभाग, ओडिशा सरकार ने की और राष्ट्रीय सहायता संगठन (एनएसओ) के रूप में पीआरएडीएएन ने इसे सुगम बनाया।

राज्य मिशन निदेशकों, सीईओ, राज्य ग्रामीण आजीविका मिशनों (एसआरएलएम) के वरिष्ठ अधिकारियों, नाबार्ड के प्रतिनिधियों, क्षेत्र विशेषज्ञों, विकास कार्यकर्ताओं, वित्तीय संस्थानों और पारिस्थितिकी तंत्र भागीदारों ने एक साथ मिलकर महिला नेतृत्व वाले ग्रामीण उद्यमों और बाजार प्रणालियों को मजबूत करने के लिए रणनीतिक हस्तक्षेपों पर विचार-विमर्श किया।

इस परामर्श का उद्देश्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से प्राप्त जमीनी प्रतिक्रिया, सुझावों और प्रासंगिक जानकारियों के माध्यम से शी-मार्ट्स पहल के परिचालन दिशानिर्देशों को अंतिम रूप देना था। प्रमुख विषयों में संस्थागत संरचना, वित्तपोषण मॉडल, अभिसरण मार्ग, निगरानी प्रणाली, व्यावसायिक प्रक्रियाएं, शासन संरचनाएं, प्रौद्योगिकी एकीकरण और कार्यान्वयन रणनीतियां शामिल थीं।

उद्घाटन सत्र का नेतृत्व भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव श्री टी.के. अनिल कुमार ने किया, जिन्होंने वर्चुअल माध्यम से मुख्य उद्घाटन भाषण दिया। अपने मुख्य भाषण में, उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि डीएवाई-एनआरएलएम का भविष्य उद्यम विकास और बाज़ार एकीकरण में निहित है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि शी-मार्ट्स को सब्सिडी-आधारित संस्थागत मॉडलों के बजाय, महिलाओं के समूहों द्वारा संचालित, समुदाय के स्वामित्व वाले खुदरा और एकत्रीकरण प्रणालियों के रूप में उभरना चाहिए।

एमओआरडी की संयुक्त सचिव, सुश्री स्वाति शर्मा ने इस बात पर ज़ोर दिया कि इस राष्ट्रीय परामर्श का उद्देश्य एक ऐसे कार्यकारी मंच के रूप में काम करना है, जहाँ राज्य/केंद्र शासित प्रदेश मसौदा रूपरेखा की गहन समीक्षा कर सकें, कार्यान्वयन में मौजूद कमियों की पहचान कर सकें और बड़े पैमाने पर इसे लागू करने के लिए व्यावहारिक विकल्प सुझा सकें।

एमओआरडी की संयुक्त सचिव, सुश्री रोहिणी आर. भाजीभाकरे भी वीबी-जीराम-जी की प्रमुख विशेषताओं को उजागर करने के लिए इस परामर्श में शामिल हुईं।

ओडिशा आजीविका मिशन की राज्य मिशन निदेशक डॉ. मोनिका प्रियदर्शनी ने मिशन शक्ति और सामुदायिक संस्थानों के माध्यम से विकेंद्रीकृत महिला नेतृत्व वाले उद्यम पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण में ओडिशा के अनुभव पर प्रकाश डाला।

डीएवाई-एनआरएलएम की ग्रामीण आजीविका विभाग की निदेशक, डॉ. मोलिश्री ने शी-मार्ट्स पहल के विकास और रणनीतिक दृष्टिकोण को प्रस्तुत किया और आजीविका संवर्धन से उद्यम-आधारित ग्रामीण बाजार प्रणालियों की ओर बढ़ने की आवश्यकता पर जोर दिया।

भारत सरकार के वीबी-जीराम-जी की सहायक आयुक्त सुश्री दीक्षा सुप्याल बिष्ट ने वीबी-जीराम-जी और शी-मार्ट्स के बीच संभावित अभिसरण के अवसरों पर चर्चा की, विशेष रूप से महिला-केंद्रित बुनियादी ढांचे, मांग सृजन और बाजार समर्थन प्रणालियों के संबंध में।

पहले दिन का एक प्रमुख आकर्षण “ग्रामीण विपणन के लिए एक रणनीतिक हस्तक्षेप के रूप में ‘शी-मार्ट्स’ पर आयोजित राष्ट्रीय पैनल चर्चा थी। इस पैनल ने शी-मार्ट्स के लिए स्केलेबल डिज़ाइन सिद्धांतों पर विचार-विमर्श करने हेतु सरकार, वित्त, प्रौद्योगिकी और सामाजिक उद्यम क्षेत्रों के विविध दृष्टिकोणों को एक साथ लाया। इस परामर्श में व्यापक उप-समूह विचार-विमर्श भी शामिल था, जिसमें पाँच विषयगत समूहों ने शी-मार्ट्स के मसौदा परिचालन ढाँचे की गहन समीक्षा की; इस समीक्षा में और अधिक विस्तार, जोड़, हटाव और किन पहलुओं से बचना है—इन सभी बिंदुओं पर विशेष रूप से विचार किया गया।

परामर्श के दूसरे दिन मानव संसाधन संरचना एवं महिला नेतृत्व, तकनीकी डिजाइन एवं कार्यान्वयन रणनीति तथा क्षमता निर्माण संरचना पर ध्यान केंद्रित किया गया। प्रतिभागियों ने महिला नेतृत्व वाली शासन प्रणाली और सामुदायिक स्वामित्व को बनाए रखते हुए पेशेवर खुदरा प्रबंधन प्रणालियों की आवश्यकता पर बल दिया।

दो-दिवसीय परामर्श के दौरान, इस बात पर एक मज़बूत आम सहमति बनी कि शी-मार्ट्स को सब्सिडी पर निर्भर खुदरा दुकानों के बजाय, विकेंद्रीकृत, महिलाओं के नेतृत्व वाले, पेशेवर रूप से प्रबंधित और समुदाय के स्वामित्व वाले उद्यम पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में विकसित किया जाना चाहिए।

परामर्श प्रक्रिया राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों, डीएवाई-एनआरएलएम और पारिस्थितिकी तंत्र भागीदारों की ओर से शी-मार्ट्स के लिए अंतिम परिचालन दिशानिर्देशों को सुदृढ़ करने और देश भर में चरणबद्ध कार्यान्वयन का समर्थन करने की साझा प्रतिबद्धता के साथ समाप्त हुई। ग्रामीण विकास मंत्रालय ने 2029 तक 3 करोड़ अतिरिक्त ‘लखपति दीदी’ बनाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। साथ ही, मंत्रालय ने एसआरएलएम को ‘शी-मार्ट्स’ स्थापित करने में सहायता देने का भी संकल्प लिया है। ये शी-मार्ट्स ऐसे टिकाऊ ग्रामीण विपणन मंच होंगे जो पूरे भारत में महिलाओं के नेतृत्व वाले उत्पादक समूहों के लिए आय के अवसर, उद्यम विकास, ब्रांडिंग और बाज़ार तक पहुँच को बेहतर बनाएंगे।

सतारा से केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने महाराष्ट्र को दी सौगात: महाराष्ट्र के 5 लाख ग्रामीण परिवारों को पक्के घरों का गौरवपूर्ण गृह प्रवेश

महाराष्ट्र /सत्ता संदेश


शिवराज सिंह ने दी महाराष्ट्र को PMAY-G के लिए 8,368.50 करोड़ रुपए की बड़ी केंद्रीय सहायता, ग्रामीण विकास को नई रफ्तार

शिवराज सिंह ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को सौंपी 35 ग्रामीण सड़क परियोजनाओं को मंजूरी: 122.98 करोड़ रु. से 35 बसावटों की कनेक्टिविटी होगी मजबूत

शिवराज ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘हर गरीब को पक्की छत’ का भरोसा दोहराया, बोले- बचे हुए पात्र परिवारों को भी मिलेगा आवास

1 जुलाई से विकसित भारत जी राम जी योजना की शुरुआत, गांवों के समग्र विकास को मिलेगी नई दिशा- शिवराज सिंह

प्याज किसानों को बड़ी राहत: आज से NAFED 12.35 रु. प्रति किलो की दर से खरीदी शुरू करेगा- शिवराज सिंह

शिवराज सिंह ने गन्ना उत्पादकों की समस्याओं के समाधान का दिया भरोसा: केंद्र और राज्य मिलकर निकालेंगे रास्ता

महा आवास अभियान में रिकॉर्ड समय में आवास पूर्ण कर महाराष्ट्र ने पेश किया सुशासन का मॉडल- मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज महाराष्ट्र के सतारा स्थित सैनिक स्कूल ग्राउंड में आयोजित “प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) लाभार्थी सम्मेलन एवं महा आवास अभियान राज्य स्तरीय पुरस्कार वितरण समारोह” में 5 लाख पूर्ण ग्रामीण आवासों के गृह प्रवेश का शुभारंभ किया, 5 लाभार्थियों को आवास की चाबियां सौंपीं और महाराष्ट्र के ग्रामीण विकास को नई गति देने वाले कई महत्वपूर्ण निर्णयों की घोषणा की। इस अवसर पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री श्री देवेंद्र फडणवीस, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री श्री जयकुमार गोरे, पर्यटन, खननकर्म एवं माजी सैनिक कल्याण मंत्री तथा सतारा के पालकमंत्री श्री शंभूराज देसाई, सार्वजनिक बांधकाम मंत्री श्री शिवेंद्रसिंह भोसले, मदद एवं पुनर्वसन मंत्री श्री मकरंद जाधव (पाटील), ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज राज्य मंत्री श्री योगेश कदम तथा स्थानीय सांसद श्रीमंत छत्रपति उदयनराजे भोसले उपस्थित थे।

अपने संबोधन में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार का स्पष्ट संकल्प है कि देश में कोई भी गरीब कच्चे मकान में न रहे और प्रत्येक पात्र परिवार को सम्मानजनक पक्की छत मिले। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र ने PMAY-G के क्रियान्वयन में उल्लेखनीय कार्य करते हुए रिकॉर्ड समय में 5 लाख आवास पूर्ण कर सुशासन, संवेदनशीलता और परिणामोन्मुख प्रशासन का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है। 

केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने महाराष्ट्र के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत वित्त वर्ष 2026-27 हेतु 8,368.50 करोड़ रु. की केंद्रीय अंश सहायता जारी किए जाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि यह राशि राज्य में ग्रामीण गरीबों के आवास निर्माण अभियान को और तेज करेगी तथा बेघर-मुक्त ग्रामीण महाराष्ट्र के संकल्प को मजबूत आधार देगी। 

श्री चौहान ने यह भी कहा कि जिन पात्र परिवारों का नाम अब तक छूट गया है, उनके लिए भी रास्ता खुला है और सर्वे तथा सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद आवश्यकतानुसार और आवास उपलब्ध कराए जाएंगे। उन्होंने दोहराया कि केंद्र सरकार का लक्ष्य केवल मकान बनाना नहीं, बल्कि बिजली, जल, स्वच्छता और सम्मानपूर्ण जीवन के साथ समग्र ग्रामीण जीवन-स्तर को ऊंचा उठाना है। 

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना-IV के अंतर्गत महाराष्ट्र के लिए 122.98 करोड़ रु. की लागत वाली 35 सड़क परियोजनाओं की स्वीकृति भी मुख्यमंत्री श्री फडणवीस को सौंपी। 95.99 किलोमीटर लंबाई की इन परियोजनाओं से राज्य की 35 ग्रामीण बसावटों को लाभ मिलेगा और शिक्षा, स्वास्थ्य, बाजार तथा अन्य आवश्यक सेवाओं तक पहुंच अधिक सुगम होगी। 

शिवराज सिंह चौहान ने ‘महा आवास अभियान’ के अंतर्गत उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले जिलों, इकाइयों और अधिकारियों को मुख्यमंत्री श्री फडणवीस के साथ सम्मानित करते हुए कहा कि जब राजनीतिक इच्छाशक्ति, प्रशासनिक दक्षता और जनकल्याण का भाव साथ आता है, तब विकास अभियान जनआंदोलन बन जाते हैं। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र ने ग्रामीण आवास के क्षेत्र में जिस गति और प्रतिबद्धता का परिचय दिया है, वह अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरक है। 

केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने विकसित भारत जी राम जी योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि 1 जुलाई से शुरू होने जा रही यह पहल गांवों के समग्र और सुनियोजित विकास की नई आधारशिला बनेगी। उन्होंने कहा कि इस योजना के माध्यम से ग्राम पंचायतें अपनी स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप विकास की व्यापक रूपरेखा तैयार करेंगी, जिससे गांवों के बुनियादी ढांचे, जनसुविधाओं और आजीविका से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों को गति मिलेगी तथा विकसित भारत के राष्ट्रीय संकल्प को विकसित गांवों के मजबूत आधार पर आगे बढ़ाया जा सकेगा।

किसानों के मुद्दों पर विशेष रूप से बोलते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री श्री चौहान ने प्याज उत्पादक किसानों को बड़ी राहत दी। उन्होंने कहा कि उत्पादन बढ़ने और निर्यात संबंधी परिस्थितियों के कारण बाजार भाव प्रभावित हुए हैं, इसलिए आज से ही NAFED द्वारा 12 रु. 35 पैसे प्रति किलो की दर से प्याज की खरीदी शुरू की जाएगी, ताकि किसानों को तत्काल सहारा मिल सके। उन्होंने स्पष्ट कहा कि केंद्र सरकार किसानों को संकट में अकेला नहीं छोड़ेगी और खरीदी व्यवस्था को प्रभावी, पारदर्शी तथा व्यवस्थित बनाने पर बल दिया। श्री चौहान ने अधिकारियों को सतर्क निगरानी रखने के निर्देश भी दिए, ताकि खरीदी प्रक्रिया सुचारु रहे और वास्तविक किसानों को उसका लाभ मिल सके। 

गन्ना उत्पादकों से जुड़े मुद्दों पर श्री चौहान ने भरोसा दिलाया कि केंद्र और महाराष्ट्र सरकार मिलकर समस्याओं का समाधान निकालेंगे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री फडणवीस के साथ इस विषय पर चर्चा हुई है और संबंधित मंत्रालयों के स्तर पर आवश्यक विमर्श कर व्यावहारिक समाधान की दिशा में पूरी कोशिश की जाएगी, क्योंकि किसान देश की अर्थव्यवस्था का आधार हैं। 

श्री चौहान ने यह भी रेखांकित किया कि कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और किसान उसकी आत्मा हैं। उन्होंने MSP में हालिया बढ़ोतरी, तिलहन-दलहन खरीदी, कपास मिशन, फार्मर आईडी, किसान-केंद्रित व्यवस्थाओं और ग्रामीण आधारभूत संरचना के विस्तार जैसे उपायों का उल्लेख करते हुए कहा कि केंद्र सरकार किसानों और ग्रामीण गरीबों के कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। 

शिवराज सिंह चौहान ने सतारा की पावन धरती को छत्रपति शिवाजी महाराज की वीरता, स्वाभिमान और सुशासन की प्रेरणास्थली बताते हुए कहा कि शिवाजी महाराज केवल महाराष्ट्र ही नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र के नायक हैं। उन्होंने कहा कि शिवाजी महाराज ने देश को यह संदेश दिया कि सुशासन का अर्थ गरीबों के आँसू पोंछना, माताओं-बहनों का सम्मान सुनिश्चित करना, किसानों को समृद्ध बनाना और समाज के अंतिम व्यक्ति को गले लगाना है; प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र सरकार इसी जनकल्याणकारी और संवेदनशील शासन-दृष्टि को आगे बढ़ाने के संकल्प के साथ कार्य कर रही है।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कार्यक्रम में कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी और केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के सहयोग से महाराष्ट्र को रिकॉर्ड 30 लाख आवासों की स्वीकृति मिली और राज्य ने रिकॉर्ड समय में 5 लाख घर पूर्ण कर आज लाभार्थियों को समर्पित किए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने आवासों की गुणवत्ता बढ़ाने, सौर ऊर्जा के माध्यम से बिजली सुविधा उपलब्ध कराने और जमीनविहीन पात्र परिवारों को भी सहायता देकर इस अभियान को व्यापक सामाजिक सुरक्षा के मॉडल में बदला है। 

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि महाराष्ट्र का लक्ष्य बेघर-मुक्त राज्य का निर्माण है और आने वाले समय में और अधिक परिवारों को आवास उपलब्ध कराए जाएंगे। उन्होंने प्याज किसानों के लिए केंद्रीय मंत्री श्री चौहान द्वारा घोषित NAFED खरीदी का स्वागत किया तथा गन्ना एवं चीनी उद्योग से जुड़े मुद्दों पर केंद्र-राज्य समन्वय से समाधान निकालने का भरोसा व्यक्त किया। 

कार्यक्रम में ग्रामीण विकास से जुड़े जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, लाभार्थियों और बड़ी संख्या में ग्रामीण नागरिकों की उपस्थिति रही।

छत्तीसगढ़ के धमतारी जिले में भूमि संसाधन विभाग के सचिव श्री नरेंद्र भूषण ने वाटरशेड विकास परियोजनाओं की समीक्षा की

छत्तीसगढ़/ / सत्ता संदेश


प्रतिनिधिमंडल ने सुरक्षात्मक सिंचाई, आजीविका संवर्धन और मृदा एवं जल संरक्षण संबंधी पहलों की समीक्षा की

भारत सरकार के भूमि संसाधन विभाग के सचिव श्री नरेंद्र भूषण के नेतृत्व में ग्रामीण विकास मंत्रालय के एक उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने गुरुवार को छत्तीसगढ़ के धमतारी जिले के मगरलोद ब्लॉक में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 2.0 (डब्ल्यूडीसी-पीएमकेएसवाई 2.0) के वाटरशेड विकास घटक के अंतर्गत वाटरशेड विकास परियोजनाओं का व्यापक क्षेत्र दौरा किया।

प्रतिनिधिमंडल ने सुरक्षात्मक सिंचाई, आजीविका संवर्धन और मृदा एवं जल संरक्षण पर केंद्रित विभिन्न पहलों की समीक्षा की। इस प्रतिनिधिमंडल में संयुक्त सचिव (वाटरशेड प्रबंधन) श्री नितिन खाडे और जिला अधिकारी श्री अबिनाश मिश्रा शामिल थे।

सांकरा गांव के दौरे के दौरान, सचिव ने वाटरशेड विकास घटक (डब्ल्यूडीसी) और मनरेगा के संयुक्त प्रयासों से निर्मित 40.34 लाख रुपये की लागत से बने एक स्टॉप डैम का निरीक्षण किया। इस डैम से लगभग 80-85 एकड़ भूमि सिंचित हो गई है और 50 से अधिक किसानों को लाभ मिल रहा है। बेलाउदी गांव में, प्रतिनिधिमंडल ने 20.20 लाख रुपये की लागत से विकसित 430 मीटर लंबी सिंचाई नहर की समीक्षा की, जो वर्तमान में लगभग 150 एकड़ भूमि को सिंचित कर रही है और मृदा अपरदन को काफी हद तक कम करने में सहायक है।

प्रतिनिधिमंडल ने सौंगा गांव में पांच एकड़ के वृक्षारोपण स्थल का भी दौरा किया, जहां एक नदी द्वीप पर 1,050 अमरूद और नींबू के पेड़ लगाए गए हैं। जल संकट की समस्या से निपटने के लिए, अधिकारियों ने क्षेत्र में छोटे तालाब बनाने की सलाह दी।

प्रतिनिधिमंडल ने भूजल पुनर्भरण और सामुदायिक जल उपलब्धता में योगदान के लिए बोदरा और गदाडीह गांवों में “अमृत सरोवर” परियोजनाओं की समीक्षा भी की।

इस यात्रा का एक प्रमुख आकर्षण गदाडीह में लिफ्ट सिंचाई परियोजना थी, जो महानदी नदी के जल का उपयोग करके 85 हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई करती है, जिससे लगभग 250 किसानों को लाभ होता है। श्री नरेंद्र भूषण ने इस पहल को एक “सफल मॉडल” बताया और अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे भविष्य की वाटरशेड विकास परियोजनाओं के लिए राज्य-स्तरीय आदर्श के रूप में ऐसी उपलब्धियों का दस्तावेजीकरण करें।

यह दौरा बेलाउदी गांव में एक सब्जी की खेती वाले खेत के निरीक्षण के साथ समाप्त हुआ, जहां किसानों द्वारा अपनी आय बढ़ाने के लिए अपनाई गई बागवानी पद्धतियों की सराहना की गई।

शिवराज सिंह चौहान करेंगे 5 लाख पीएमएवाई-जी आवासों के गृह प्रवेश का शुभारंभ; महाराष्ट्र के लिए ₹8,368.50 करोड़ की केंद्रीय अंश सहायता जारी करेंगे


दिल्ली / सत्ता संदेश

15 मई को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की उपस्थिति में महाराष्ट्र को ₹122.98 करोड़ की 35 सड़क परियोजनाओं की भी सौगात

सतारा में आयोजित होगा पीएमएवाई-जी लाभार्थी सम्मेलन एवं ‘महा आवास अभियान’ राज्य स्तरीय पुरस्कार समारो

केंद्रीय ग्रामीण विकास तथा कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान 15 मई 2026 को महाराष्ट्र के सतारा स्थित सैनिक स्कूल ग्राउंड में आयोजित “प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) लाभार्थी सम्मेलन एवं महा आवास अभियान राज्य स्तरीय पुरस्कार वितरण समारोह” में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। कार्यक्रम में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री श्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री श्री एकनाथ शिंदे, उपमुख्यमंत्री श्रीमती सुनेत्रा अजित पवार सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित रहेंगे।

कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) के अंतर्गत पूर्ण हुए 5 लाख आवासों के गृह प्रवेश का शुभारंभ करेंगे। साथ ही, 6 पीएमएवाई-जी लाभार्थियों को आवास की चाबियां भी सौंपेंगे, जिनमें योजना के अंतर्गत 3 करोड़वें आवास से जुड़े लाभार्थी भी शामिल होंगे।

इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री महाराष्ट्र को पीएमएवाई-जी के अंतर्गत वित्त वर्ष 2026-27 हेतु ₹8,368.50 करोड़ की केंद्रीय अंश की मातृ स्वीकृति जारी करेंगे। इसके अतिरिक्त प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY)-IV के अंतर्गत ₹122.98 करोड़ की लागत से 35 सड़क परियोजनाओं की स्वीकृति भी जारी करेंगे, जिससे राज्य की 35 ग्रामीण बसावटें लाभान्वित होंगी।

कार्यक्रम के दौरान ‘महा आवास अभियान 2023-24’ के अंतर्गत राज्य स्तरीय पुरस्कार भी वितरित किए जाएंगे। कार्यक्रम में ‘महा आवास अभियान अवॉर्ड्स गौरवगाथा पुस्तिका’ एवं त्रैमासिक पत्रिका का प्रकाशन भी किया जाएगा।

प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण भारत सरकार की प्रमुख योजनाओं में से एक है, जिसका उद्देश्य पात्र ग्रामीण परिवारों को मूलभूत सुविधाओं सहित पक्के आवास उपलब्ध कराना है। पीएमएवाई-जी के अंतर्गत अब तक राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों को 4.15 करोड़ आवासों का लक्ष्य आवंटित किया जा चुका है, जिनमें से 3.91 करोड़ आवास स्वीकृत किए गए हैं तथा 11 मई 2026 तक 3.03 करोड़ से अधिक आवास पूर्ण किए जा चुके हैं।

महाराष्ट्र ने योजना के कार्यान्वयन में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। राज्य को आवंटित 43.80 लाख आवासों के लक्ष्य के विरुद्ध 41.42 लाख आवास स्वीकृत किए जा चुके हैं तथा 17.92 लाख आवास पूर्ण हो चुके हैं। सतारा जिले में 55,052 आवासों के लक्ष्य के सापेक्ष 54,759 आवास स्वीकृत किए गए हैं तथा 24,848 आवास पूर्ण किए जा चुके हैं।

महाराष्ट्र के लिए पीएमजीएसवाई-IV के अंतर्गत बड़ी स्वीकृति

कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY)-IV के अंतर्गत महाराष्ट्र के लिए बड़ी स्वीकृति की घोषणा भी की जाएगी, जिससे राज्य में ग्रामीण सड़क संपर्क एवं आधारभूत संरचना को और मजबूती मिलेगी।

पीएमजीएसवाई-IV (2026-27, बैच-I) के अंतर्गत 95.99 किलोमीटर लंबाई की 35 सड़क परियोजनाओं को लगभग ₹122.98 करोड़ की लागत से स्वीकृति का प्रस्ताव है। इन परियोजनाओं से राज्य की 35 ग्रामीण बसावटें लाभान्वित होंगी।

इन परियोजनाओं का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में हर मौसम में सड़क संपर्क सुनिश्चित करना तथा शिक्षा, स्वास्थ्य, बाजार एवं अन्य आवश्यक सार्वजनिक सेवाओं तक पहुंच को बेहतर बनाना है। यह पहल ग्रामीण महाराष्ट्र में सामाजिक-आर्थिक विकास को गति देने एवं जीवन स्तर में सुधार लाने में सहायक होगी।

महाराष्ट्र में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के अंतर्गत अब तक 34 हजार किलोमीटर से अधिक ग्रामीण सड़कों एवं 1000 से अधिक पुलों को स्वीकृति दी जा चुकी है, जिन पर ₹15 हजार करोड़ से अधिक की लागत स्वीकृत की गई है। इन परियोजनाओं के माध्यम से गांवों की सड़क संपर्क व्यवस्था मजबूत हुई है तथा ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, बाजार और अन्य आवश्यक सेवाओं तक पहुंच आसान हुई है।

राज्य में पीएमजीएसवाई के अंतर्गत ‘न्यू एंड ग्रीन टेक्नोलॉजी’ आधारित सड़क निर्माण कार्यों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे आधुनिक, टिकाऊ एवं पर्यावरण-अनुकूल ग्रामीण आधारभूत संरचना विकसित हो रही है।

यह कार्यक्रम ग्रामीण आवास, सड़क संपर्क एवं आधारभूत संरचना विकास के माध्यम से ग्रामीण परिवर्तन को नई गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित होगा।

ग्रामीण क्षेत्रों में 1 जुलाई से ‘विकसित भारत-जी राम जी’ अधिनियम की शुरुआत

नई दिल्ली/सत्ता संदेश

ग्रामीण विकास और रोजगार को नई दिशा देते हुए, भारत सरकार ने 11 मई को विकसित भारत – गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025 को अधिसूचित कर दिया है। यह अधिनियम 1 जुलाई से देशभर के ग्रामीण क्षेत्रों में लागू होगा।

विकसित भारत–जी राम जी अधिनियम लागू होने के साथ ही महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम 2005 उसी तिथि से निरस्त माना जाएगा। यह भारत के ग्रामीण विकास ढांचे में एक ऐतिहासिक परिवर्तन है, जो विकसित भारत@2047 के राष्ट्रीय विजन के अनुरूप एक समेकित (इंटीग्रेटेड), भविष्य उन्मुख एवं उत्पादकता (प्रोडक्टिविटी) आधारित ग्रामीण परिवर्तन के नए युग की शुरुआत करता है।

नई व्यवस्था के अंतर्गत प्रत्येक ग्रामीण परिवार, जिसके वयस्क सदस्य अकुशल शारीरिक श्रम करने के लिए स्वेच्छा से आगे आते हैं, उन्हें प्रत्येक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के मजदूरी आधारित रोजगार की वैधानिक गारंटी प्राप्त होगी। यह बढ़ी हुई गारंटी आजीविका सुरक्षा को मजबूत करने, ग्रामीण आय में वृद्धि करने तथा ग्राम स्तर पर सतत विकास को समर्थन देने के उद्देश्य से लाई गई है।

अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार श्रमिकों को उनकी रोजगार मांग के अनुसार निर्धारित समय-सीमा के भीतर कार्य उपलब्ध कराया जाएगा। ऐसा न होने की स्थिति में श्रमिक बेरोजगारी भत्ता पाने के हकदार होंगे।

यह अधिनियम समयबद्ध और पारदर्शी मजदूरी भुगतान पर विशेष बल देता है। मजदूरी का भुगतान प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से सीधे श्रमिकों के बैंक अथवा डाकघर खातों में किया जाता रहेगा। मजदूरी का भुगतान साप्ताहिक आधार पर अथवा मस्टर रोल बंद होने के पंद्रह दिनों के भीतर किया जाएगा। यदि ऐसा नहीं होता है, तो अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार श्रमिक विलंब क्षतिपूर्ति (मुआवजा) पाने के पात्र होंगे।

भारत सरकार ने विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम, 2025 के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु व्यापक वित्तीय प्रावधान सुनिश्चित किए हैं। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए केंद्र सरकार ने ₹95,692.31 करोड़ का बजटीय आवंटन किया है, जो ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम के लिए बजट अनुमान चरण में अब तक का सर्वाधिक आवंटन है।

राज्यों के संभावित राज्यांश सहित इस कार्यक्रम का कुल परिव्यय ₹1.51 लाख करोड़ से अधिक होने का अनुमान है। यह आवंटन ग्रामीण अवसंरचना विकास, बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन तथा ग्रामीण आय में वृद्धि को नई गति प्रदान करेगा।

बिना किसी बाधा के, सुचारु और श्रमिक-केंद्रित ट्रांजिशन सुनिश्चित करने के लिए नए अधिनियम के लागू होने की तिथि तक महात्मा गांधी नरेगा के अंतर्गत रोजगार बिना किसी व्यवधान के जारी रहेंगे। 30 जून तक महात्मा गांधी नरेगा के अंतर्गत चल रहे सभी कार्य संरक्षित रहेंगे और विकसित भारत–जी राम जी के प्रावधानों के अनुरूप उन्हें सुचारु रूप से नई व्यवस्था में समाहित किया जाएगा। ग्रामीण श्रमिकों को समय पर कार्य उपलब्ध कराना और मजदूरी का शीघ्र भुगतान सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

भारत सरकार ने रोजगार की मांग के पैटर्न और मैदानी आवश्यकताओं के अनुरूप राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों को पर्याप्त श्रम बजट उपलब्ध कराया है, ताकि विकसित भारत–जी राम जी अधिनियम लागू होने से पूर्व की अवधि में किसी भी ग्रामीण परिवार को असुविधा का सामना न करना पड़े।

वर्तमान ई-केवाईसी सत्यापित मनरेगा जॉब कार्ड, ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड जारी होने तक विकसित भारत–जी राम जी के अंतर्गत मान्य रहेंगे। जिन श्रमिकों के पास जॉब कार्ड नहीं हैं, वे ग्राम पंचायत स्तर पर पंजीकरण हेतु आवेदन कर सकते हैं। केवल ई-केवाईसी लंबित होने के कारण किसी भी श्रमिक को रोजगार से वंचित नहीं किया जाएगा, तथा ई-केवाईसी पूर्ण कराने हेतु राज्य सरकारों द्वारा मैदानी स्तर पर आवश्यक व्यवस्थाएं जारी रहेंगी।

ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम, 2025 के अंतर्गत विभिन्न नियमों के ड्राफ्ट राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के परामर्श से तैयार किए जा रहे हैं, जो निम्नानुसार हैं:

  • मानक(नॉरमेटिव) आवंटन हेतु वस्तुनिष्ठ मानदंडों से संबंधित नियम
  • संक्रमणकालीन प्रावधान (ट्रांजिशनल प्रोविजंस) नियम
  • राष्ट्रीय स्तर पर संचालन समिति के नियम
  • केंद्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी परिषद नियम
  • प्रशासनिक व्यय नियम
  • शिकायत निवारण नियम
  • मजदूरी एवं बेरोजगारी भत्ते के भुगतान की प्रक्रिया संबंधी नियम
  • अतिरिक्त व्यय वहन करने की प्रक्रिया संबंधी नियम
  • बिना विधानमंडल वाले केंद्रशासित प्रदेशों में योजना व्यय वहन करने की प्रक्रिया संबंधी नियम

महात्मा गांधी नरेगा से विकसित भारत-जी राम जी में सुचारु ट्रांजिशन सुनिश्चित करने के लिए संक्रमणकालीन प्रावधान (ट्रांजिशनल प्रोविजंस) नियमों में उपयुक्त प्रावधान शामिल किए जा रहे हैं, जिन्हें शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा। उपर्युक्त अन्य नियमों के प्रारूप भी तैयार कर लिए गए हैं और उन्हें सार्वजनिक परामर्श हेतु जल्द प्रकाशित किया जाएगा।

विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम, 2025 से ग्रामीण रोजगार सृजन, ग्रामीण विकास और गांवों में आत्मनिर्भरता को नई गति मिलने की अपेक्षा है। ग्राम पंचायतों को ग्रामीण परिवर्तन के केंद्रीय स्तंभ के रूप में स्थापित करते हुए यह अधिनियम सशक्त, समृद्ध और विकसित ग्रामीण भारत के निर्माण में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध होगा।

डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने और जमीनी स्तर पर युवाओं को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, ग्लोबल यूथ फेडरेशन, इंडिया ने पंजाब के मोहाली में स्थित सरकारी स्कूलों में चार नए कंप्यूटर लैब सफलतापूर्वक स्थापित किए हैं।

मोहाली / सत्ता संदेश

डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने और जमीनी स्तर पर युवाओं को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, ग्लोबल यूथ फेडरेशन, इंडिया ने पंजाब के मोहाली में स्थित सरकारी स्कूलों में चार नए कंप्यूटर लैब सफलतापूर्वक स्थापित किए हैं। ये कंप्यूटर लैब ग्लोबल यूथ फेडरेशन द्वारा पुकार – द वॉइस ऑफ ह्यूमैनिटी एनजीओ के सहयोग से, सेज फाउंडेशन और आईवॉलंटियर इंडिया के बहुमूल्य समर्थन से विकसित किए गए हैं और इन्हें माय भारत (युवा मामले एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार) को समर्पित किया गया है, जो युवा विकास और डिजिटल समावेशन को मजबूत करने की दिशा में ग्लोबल यूथ फेडरेशन की दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

कंप्यूटर लैब सरकारी हाई स्कूल, सनेटा (एस.ए.एस. नगर), सरकारी हाई स्कूल, माताउर (सेक्टर-70), सरकारी हाई स्कूल, मौली बैदवान और सरकारी हाई स्कूल, बाल्टाना में स्थापित किए गए हैं, जिनका उद्देश्य छात्रों को आधुनिक तकनीक तक पहुंच प्रदान करना और उनकी डिजिटल शिक्षण क्षमताओं को बढ़ाना है। उम्मीद है कि यह पहल डिजिटल विभाजन को पाटने और छात्रों को आज की तेजी से बदलती दुनिया में आवश्यक कौशल से लैस करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

उद्घाटन समारोह में सेज के निदेशक श्री महेश गर्ग सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। श्री आनंद कदुर, कंट्री हेड, SAGE; सुदीप्ति रस्तोगी, लर्न एंड डेवलपमेंट हेड और ग्लोबल SAGE फाउंडेशन एंबेसडर; प्रो. (डॉ.) रेणु त्रिखा, चीफ एडवाइजर, ग्लोबल यूथ फेडरेशन; श्रीमती गिन्नी दुग्गल, जिला शिक्षा अधिकारी, मोहाली; सुश्री ईशा गुप्ता, जिला युवा अधिकारी, MY भारत, मोहाली; श्री रोहित कुमार, निदेशक और सीईओ, ग्लोबल यूथ फेडरेशन; और श्रीमती शिवानी रैना, संस्थापक और अध्यक्ष, पुकार – द वॉइस ऑफ ह्यूमैनिटी एनजीओ। उनकी उपस्थिति ने शिक्षा क्षेत्र में सार्थक और स्थायी प्रभाव पैदा करने के लिए सहयोगात्मक प्रयासों के महत्व को उजागर किया।

यह पहल प्रभावी साझेदारी का एक सशक्त उदाहरण है, जहां SAGE फाउंडेशन और iVolunteerIndia ने अपना निरंतर सहयोग दिया, और ग्लोबल यूथ फेडरेशन ने पुकार – द वॉइस ऑफ ह्यूमैनिटी के साथ मिलकर जमीनी स्तर पर सुचारू कार्यान्वयन सुनिश्चित किया। MY भारत को समर्पित ये कंप्यूटर लैब युवाओं को अवसरों, प्रौद्योगिकी और कौशल विकास तक पहुंच के माध्यम से सशक्त बनाने के साझा दृष्टिकोण को और मजबूत करती हैं।

इस अवसर पर बोलते हुए, ग्लोबल यूथ फेडरेशन के निदेशक एवं सीईओ रोहित कुमार ने कहा, “हमारा लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक छात्र को अवसरों की समान पहुँच मिले और वह भविष्य के लिए आवश्यक कौशलों से लैस हो। ये कंप्यूटर लैब केवल बुनियादी ढाँचा नहीं हैं; ये अवसर, शिक्षा और उज्ज्वल भविष्य की ओर अग्रसर मार्ग का प्रतीक हैं।”

इन कंप्यूटर लैब की सफल स्थापना डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देने और समावेशी शिक्षण वातावरण बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जो कुशल और भविष्य के लिए तैयार पीढ़ी के निर्माण के व्यापक लक्ष्य में योगदान देती है।