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अमेरिका-ईरान के बीच ‘शांति वार्ता’ पर सस्पेंस: पाकिस्तान की कोशिशें तेज, ईरान ने रखी बड़ी शर्त

इंटरनेशनल डेस्क : अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की शांति वार्ता को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। इसी बीच पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान से फोन पर करीब 45 मिनट तक विस्तार से चर्चा की है। दोनों नेताओं के बीच यह सकारात्मक बातचीत ऐसे समय में हुई है जब क्षेत्र में तनाव कम करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

ट्रंप का डेलिगेशन और ईरान का इनकार : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी है कि एक अमेरिकी डेलिगेशन सोमवार को शांति वार्ता के लिए इस्लामाबाद पहुंचेगा। हालांकि, ईरान की सरकारी न्यूज़ एजेंसी IRNA ने इस्लामाबाद में बातचीत की खबरों को झूठा करार दिया है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह बातचीत की मेज पर तभी आएगा जब अमेरिका उसके बंदरगाहों पर लगी नौसैनिक नाकेबंदी को हटाएगा।

ईरान को ‘चाल’ का डर और 22 अप्रैल की डेडलाइन: ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल को शक है कि यह बातचीत केवल एक चाल हो सकती है। उन्हें डर है कि बातचीत के बाद भी उन पर लगे प्रतिबंध नहीं हटेंगे और उनका फंसा हुआ पैसा वापस नहीं मिलेगा। गौरतलब है कि क्षेत्र में जारी युद्धविराम बुधवार 22 अप्रैल को खत्म होने वाला है, जिससे इस बातचीत की अहमियत और बढ़ गई है।

पाकिस्तान की मध्यस्थता प्रधानमंत्री : शहबाज शरीफ ने ईरान को मनाने के लिए अपने हालिया सऊदी अरब, कतर और तुर्किये के दौरों का भी जिक्र किया। पाकिस्तान की सरकार और सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर इस क्षेत्र में शांति बहाली के लिए सक्रिय रूप से जुटे हुए हैं।

इस्लामाबाद में होगी अमेरिका-ईरान की नई परमाणु वार्ता: शांति की उम्मीद या फिर बढ़ेगा तनाव?

इंटरनेशनल डेस्क : मध्य पूर्व (Middle East) में बढ़ते तनाव के बीच एक बार फिर कूटनीतिक समाधान तलाशने की कोशिशें तेज हो गई हैं। अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु मुद्दे (Nuclear Issue) पर बातचीत का अगला दौर पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में आयोजित होने जा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, दोनों देशों के प्रतिनिधि रविवार तक पाकिस्तान पहुँच सकते हैं और सोमवार (20 अप्रैल, 2026) से औपचारिक बातचीत शुरू हो सकती है।

सीजफायर खत्म होने से पहले समझौते की कोशिश: यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि पाकिस्तान की मध्यस्थता में हुआ दो हफ्तों का सीजफायर अब समाप्त होने के करीब है। इससे पहले पिछले वीकेंड हुई कई घंटों की बातचीत का कोई ठोस नतीजा नहीं निकल पाया था। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस बार भी बातचीत विफल रहती है, तो क्षेत्र में तनाव फिर से भड़क सकता है।

ट्रंप का भरोसा और ईरान का संदेह :अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने विश्वास जताया है कि दोनों देश समझौते के काफी करीब हैं और ईरान कुछ अहम मुद्दों पर झुकने को तैयार है। हालांकि, ईरान के वरिष्ठ अधिकारियों ने ट्रंप के इन दावों पर सवाल उठाए हैं और कहा है कि अभी तक कोई बड़ा समझौता नहीं हुआ है और कई मुद्दों पर मतभेद बरकरार हैं।

होर्मुज स्ट्रेट और क्षेत्रीय संकट: इस वार्ता का सबसे अहम केंद्र होर्मुज स्ट्रेट (Hormuz Strait) बना हुआ है, जो दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण ऑयल रूट है। ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका ने अपना नौसैनिक घेराव (Blockade) नहीं हटाया, तो वह इस रास्ते को बंद कर सकता है, जिससे वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा सकता है।

इसके अलावा, लेबनान में इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच जारी 10 दिन का सीजफायर भी इस बातचीत में एक अहम भूमिका निभा रहा है।