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‘युवा भारत की सबसे बड़ी ताकत, विकसित भारत के निर्माण में निभाएंगे अहम भूमिका’: मनसुख मांडविया

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

केंद्रीय युवा कार्यक्रम और खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के साथ राष्ट्रीय राजधानी के त्यागराज स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में आयोजित ‘विकसित भारत के लिए युवा: माय भारत युवा सम्मेलन’ को संबोधित किया।
इस सम्मेलन में देश भर से 6,000 से अधिक युवा प्रतिभागियों ने भाग लिया, जो छात्रों, युवा पेशेवरों, युवा महिलाओं, उद्यमियों, कंटेंट क्रिएटर्स, नवाचारों, उभरते दिग्गजों और उपलब्धि हासिल करने वालों सहित विविध पृष्ठभूमि वाले युवाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं।
इसमें राष्ट्र निर्माण में युवाओं की परिवर्तनकारी भूमिका और 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में भारत की यात्रा को दर्शाया गया है।

उन्होंने कहा, “युवा हमारी शक्ति, हमारा गौरव, हमारा संकल्प और हमारा भविष्य हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में, युवा भारतीयों को नवाचार करने, उत्कृष्टता हासिल करने और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने के अभूतपूर्व अवसर मिले हैं। चाहे स्टार्टअप हो, खेल हो, सार्वजनिक सेवा हो, उद्यमिता हो या रचनात्मक क्षेत्र, युवा भारतीय अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं और देश की वैश्विक प्रतिष्ठा को बढ़ा रहे हैं।”

डॉ. मांडविया ने माय भारत की हालिया गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड उपलब्धि की भी सराहना की और युवाओं से इस मंच के कार्यक्रमों, स्वयंसेवी अवसरों और राष्ट्र निर्माण की पहलों में सक्रिय रूप से भाग लेने का आग्रह किया।
डॉ. मांडविया ने युवाओं से अपनी क्षमता को पहचानने और उत्कृष्टता के लिए प्रयास करने का आह्वान करते हुए कहा “यह समय युवाओं का है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने एक विकसित भारत की परिकल्पना की है जो युवा भारतीयों के विचारों, नवाचार और आकांक्षाओं से आकार लेता है। हमें मिलकर एक प्रतिस्पर्धी, आत्मविश्वासी और आत्मनिर्भर भारत का निर्माण करना होगा जो 140 करोड़ नागरिकों के सपनों को साकार करे।”
दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि भारत के युवा अपनी प्रतिभा, दृढ़ संकल्प और कड़ी मेहनत के माध्यम से देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए तैयार हैं।

उन्होंने राष्ट्र निर्माण में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर देते हुए, कहा कि भारत के युवा मेहनती, दूरदर्शी, रचनात्मक और साहसी हैं, और एक युवा भारतीय द्वारा हासिल की गई हर उपलब्धि देश को विकसित भारत की ओर बढ़ने में मदद करती है।
उन्होंने कहा कि उत्कृष्टता किसी भी क्षेत्र में दृढ़ता, अनुशासन और समर्पण पर आधारित होती है, और उन्होंने खेल, उद्यमिता, कंटेंट क्रिएशन, कला और सार्वजनिक सेवा के क्षेत्र में युवा भारतीयों की उपलब्धियों की सराहना की।
युवा सम्मेलन के दौरान, अभिनेता विक्रांत मैसी ने प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में भारत की रचनात्मक अर्थव्यवस्था की उल्लेखनीय वृद्धि का उल्लेख किया और डिजिटल सशक्तिकरण तथा नवाचार के माध्यम से सृजित अवसरों पर जोर दिया।

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क्या इजराइल कर रहा है अमेरिका की जासूसी? रिपोर्ट में बढ़ा दावा

इंटरनेशनल डेस्क / सत्ता संदेश

अमेरिका और इजराइल दुनिया के सबसे करीबी सहयोगियों में गिने जाते हैं, लेकिन एक नई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिका को अपने ही सहयोगी इजराइल से जासूसी का खतरा महसूस हो रहा है. इसी वजह से अमेरिकी अधिकारी इजराइल दौरे के दौरान विशेष सुरक्षा उपाय अपनाते हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन और उसकी खुफिया एजेंसी डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी (DIA) ने हाल ही में इजराइल से जुड़े खुफिया खतरे का नया आकलन तैयार किया है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि DIA ने इजराइल के लिए खतरे का स्तर बढ़ाकर क्रिटिकल यानी अत्यंत गंभीर कर दिया है. अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि इजराइल, ईरान युद्ध और अमेरिका की रणनीति से जुड़ी आंतरिक चर्चाओं की जानकारी हासिल करने की कोशिश कर सकता है. DIA ने इस संबंध में सात पन्नों का एक दस्तावेज भी तैयार किया है, जिसमें उन घटनाओं का जिक्र है, जिनसे यह चिंता बढ़ी.

इजराइल-अमेरिका ने रिपोर्ट खारिज की

हालांकि, व्हाइट हाउस और इजराइल दोनों ने इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है. इजराइल के दूतावास ने कहा कि वह अमेरिकी संस्थाओं या सरकारी अधिकारियों की जासूसी नहीं करता. वहीं व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने रिपोर्ट को पूरी तरह गलत बताया. रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ हफ्ते पहले अमेरिकी प्रशासन और ईरान के बीच युद्धविराम और बातचीत को लेकर चर्चा चल रही थी. उस दौरान इजराइल को बातचीत की पूरी जानकारी नहीं मिल रही थी. ऐसे में इजराइल ने क्षेत्रीय नेताओं और राजनयिकों के जरिए जानकारी जुटाने की कोशिश की.

अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि सहयोगी देशों के बीच भी खुफिया जानकारी जुटाना आम बात है, लेकिन इजराइल की गतिविधियों को लेकर इस बार ज्यादा चिंता जताई गई है. इसी कारण इजराइल जाने वाले अमेरिकी अधिकारियों और राजनयिकों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है.

बर्नर फोन, क्लीन लैपटॉप और सख्त नियम

रिपोर्ट में कहा गया है कि कई अमेरिकी अधिकारी इजराइल में बर्नर फोन (अस्थायी मोबाइल फोन) और क्लीन लैपटॉप का इस्तेमाल करते हैं, ताकि उनकी संवेदनशील जानकारी सुरक्षित रहे. वे होटल के कमरों में महत्वपूर्ण या गोपनीय बातचीत करने से भी बचते हैं. एक सीनियर अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि इजराइल खुफिया जानकारी जुटाने में काफी आक्रामक माना जाता है, इसलिए अतिरिक्त सुरक्षा उपाय अपनाए जाते हैं.

रिपोर्ट में पुराने मामलों का भी जिक्र किया गया है. 1980 के दशक में अमेरिकी खुफिया एनालिस्ट जोनाथन पोलार्ड को इजराइल को सीक्रेट दस्तावेज देने के मामले में 30 साल की जेल हुई थी. वहीं 2013 में एडवर्ड स्नोडेन के खुलासों से यह भी सामने आया था कि अमेरिका खुद अपने सहयोगी देशों की जासूसी करता है और उनसे जुड़ी खुफिया जानकारी जुटाता है.

CJP Protest : कॉकरोच जनता पार्टी की किन 5 मांगों पर खड़ा है आंदोलन?

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नई दिल्ली / सत्ता संदेश

दिल्ली के जंतर-मंतर पर शनिवार को कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी का बड़ा प्रदर्शन देखने को मिला। इस प्रदर्शन का नेतृत्व पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने किया। वो अमेरिका से भारत लौटने के बाद सीधे आंदोलन में शामिल हुए। भारी पुलिस सुरक्षा के बीच हजारों युवा, छात्र, अभिभावक और नौकरी की तैयारी कर रहे उम्मीदवार प्रदर्शन में पहुंचे। आंदोलन का केंद्र बिंदु शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा में गड़बड़ी और छात्रों पर बढ़ते मानसिक दबाव को बनाया गया। प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी भी की।

आंदोलन की सबसे बड़ी मांग

सीजेपी आंदोलन की सबसे बड़ी मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि नीट पेपर लीक, सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली में कथित गड़बड़ी और भर्ती परीक्षाओं में लगातार सामने आ रही समस्याओं ने छात्रों का भरोसा तोड़ दिया है। जंतर-मंतर पर मौजूद युवाओं ने कहा कि सरकार परीक्षा व्यवस्था को संभालने में विफल रही है। प्रदर्शन के दौरान धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो और मेक इन इंडिया नहीं, लीक इन इंडिया जैसे नारे लगाए गए। अभिजीत दीपके ने कहा कि यह लड़ाई लंबी है और छात्र अब पीछे हटने वाले नहीं हैं।

मांगक्या चाहते हैं प्रदर्शनकारी
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफापरीक्षा में गड़बड़ियों की जिम्मेदारी तय हो
निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्थानीट, सीबीएसई, सीयूईटी और एसएससी में पारदर्शिता हो  
डिजिटल शिक्षा में सुधारप्रशिक्षण और सुरक्षा के बाद ही लागू हो सिस्टम
मणिपुर में सामान्य शिक्षास्कूल-कॉलेज नियमित रूप से चलें
छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान     तनाव और आत्महत्या रोकने के लिए व्यवस्था

 

डिजिटल शिक्षा पर भी उठे सवाल

प्रदर्शन में शामिल कई अभिभावकों और छात्रों ने शिक्षा के तेजी से हो रहे डिजिटलीकरण पर भी सवाल उठाए। दिल्ली में पढ़ रहे छात्रों के पिता राधेश्याम कैथल ने कहा कि बिना तैयारी और प्रशिक्षण के डिजिटल सिस्टम लागू करने से गड़बड़ियां बढ़ रही हैं। उनका कहना था कि बैंकिंग से लेकर शिक्षा तक हर जगह डिजिटल व्यवस्था लागू हो रही है, लेकिन सुरक्षा और पारदर्शिता अभी भी कमजोर है। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि शिक्षकों को पर्याप्त प्रशिक्षण देने और सिस्टम की जांच के बाद ही पूरी तरह डिजिटल शिक्षा लागू की जाए।

मणिपुर के छात्रों की परेशानी भी बनी मुद्दा
सीजेपी के प्रदर्शन में मणिपुर का मुद्दा भी जोरदार तरीके से उठा। मणिपुर से आए सामाजिक कार्यकर्ता विंसन ने कहा कि राज्य में पिछले तीन वर्षों से हालात सामान्य नहीं हैं। स्कूल और कॉलेज लगातार प्रभावित हो रहे हैं और छात्रों का भविष्य खतरे में है। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि केंद्र सरकार मणिपुर में शिक्षा व्यवस्था को सामान्य बनाने के लिए तुरंत ठोस कदम उठाए। युवाओं का कहना था कि अशांत इलाकों में रहने वाले छात्रों के लिए अलग और सुरक्षित शिक्षा व्यवस्था बनाई जानी चाहिए।

मानसिक दबाव और आत्महत्या पर भी चिंता जताई

जंतर-मंतर पर जुटे युवाओं ने छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को भी बड़ा मुद्दा बताया। प्रदर्शन में शामिल मनोवैज्ञानिक सुगंधा ने कहा कि लगातार परीक्षा गड़बड़ी और अनिश्चितता के कारण लाखों छात्र मानसिक तनाव में हैं। कई छात्रों ने आत्महत्या तक कर ली, लेकिन जवाबदेही तय नहीं हुई। राजस्थान की गायत्री सिंह ने कहा कि उनका रिश्तेदार तीन साल से नीट की तैयारी कर रहा था, लेकिन पेपर लीक के बाद उसका मनोबल टूट गया। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सहायता तंत्र बनाया जाए।

सोशल मीडिया से सड़क तक पहुंचा सीजेपी का आंदोलन

यह प्रदर्शन केवल ऑनलाइन अभियान तक सीमित नहीं रहा। बड़ी संख्या में स्कूल और कॉलेज के छात्र, युवा पेशेवर और अभिभावक जंतर-मंतर पहुंचे। कई प्रदर्शनकारी कॉकरोच मास्क पहनकर आए और हाथों में फूल लिए दिखे। अभिजीत दीपके ने प्रदर्शन को शांतिपूर्ण रखने की अपील की और पुलिसकर्मियों को फूल देने की बात कही। उन्होंने कहा कि आंदोलन संविधान और लोकतंत्र के दायरे में रहेगा। इस प्रदर्शन ने साफ संकेत दिया कि शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था को लेकर युवाओं के बीच गुस्सा तेजी से बढ़ रहा है।

जयंत चौधरी ने कौशल भवन में ‘शिशु सदन’ सुविधा का किया उद्घाटन, समावेशी कार्यस्थल को मिलेगा बढ़ावा

नई दिल्ली /सत्ता संदेश

कौशल विकास और उद्यमशीलता राज्य मंत्री और शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने जन-केंद्रित कार्य वातावरण को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। उन्होंने कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय के मुख्यालय- कौशल भवन में कर्मचारियों के बच्चों के लिए एक नई शिशु सदन सुविधा का उद्घाटन किया।

लगभग 600 वर्ग मीटर में फैला यह नया शिशु सदन बच्चों के लिए एक सुरक्षित और शैक्षिक वातावरण प्रदान करता है। इस शिशु सदन में आरामदायक सोने और आराम करने के लिए स्‍थान, बच्चों के लिए आकर्षक खेल और गतिविधि क्षेत्र, उनकी उम्र के अनुसार सीखने के संसाधन, बच्चों के अनुकूल फर्नीचर, स्वच्छ शौचालय और शिशुओं और छोटे बच्चों के आराम और स्वास्थ्य के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन किए गए भोजन और डायपर बदलने के कमरे हैं। प्रशिक्षित देखभालकर्ताओं और सहायक कर्मचारियों द्वारा संचालित इस शिशु सदन को 6 महीने से 6 साल तक के बच्चों की विकास और देखभाल संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए सोच-समझकर डिज़ाइन किया गया है।

नवनिर्मित शिशु सदन केवल बुनियादी ढांचे तक ही सीमित नहीं है, यह एक ऐसी संस्कृति का प्रतीक है जो देखभाल को महत्व देती है, बचपन को बढ़ावा देता है और कर्मचारियों को पेशेवर प्रतिबद्धताओं और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाने में सक्षम बनाता है। कार्यस्थल के पास गुणवत्तापूर्ण शिशु सदन की पहल कामकाजी माता-पिता के लिए सहायक है और कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय के अधिक समावेशी, परिवार-अनुकूल और जन-केंद्रित कार्य वातावरण को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

भारत के भविष्य के लिए तैयार और समावेशी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में आगे बढ़ने के साथ, इस तरह की पहलें प्रगतिशील, जन-केंद्रित और आधुनिक कार्यबल की आवश्यकताओं के प्रति संवेदनशील संस्थानों के निर्माण पर सरकार के ध्‍यान को मजबूत करती हैं।

परीक्षा गड़बड़ियों के खिलाफ CJP का प्रदर्शन, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग

दिल्ली के जंतर-मंतर पर शनिवार को कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी के प्रदर्शन में बड़ी संख्या में छात्र और युवा जुटे। इस दौरान सीजेपी संस्थापक अभिजीत दीपके ने केंद्र सरकार और शिक्षा व्यवस्था पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई लंबी है और छात्र पीछे हटने वाले नहीं हैं। नीट, सीबीएसई, सीयूईटी और एसएससी जैसी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग उठाई। भारी पुलिस सुरक्षा के बीच हुआ यह प्रदर्शन पूरे दिन चर्चा का केंद्र बना रहा।

सरकार पर क्या आरोप लगाए अभिजीत दीपके ने?
प्रदर्शन को संबोधित करते हुए अभिजीत दीपके ने कहा कि पिछले एक महीने से सोशल मीडिया पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की जा रही है, लेकिन सरकार कार्रवाई करने के बजाय आंदोलन को दबाने में लगी है। उन्होंने आरोप लगाया कि सोशल मीडिया पोस्ट हटवाने और अकाउंट हैक कराने की कोशिश की गई। दीपके ने मंच से कहा, ‘आप हमारी पोस्ट हटा सकते हैं, लेकिन हमें इस जगह से मिटा नहीं सकते। उनके इस बयान पर प्रदर्शन स्थल पर मौजूद युवाओं ने जोरदार नारेबाजी की।

प्रदर्शन में किस तरह का माहौल देखने को मिला?
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में स्कूल और कॉलेज के छात्रों के साथ बड़ी संख्या में युवा पेशेवर भी पहुंचे। कई प्रदर्शनकारी कॉकरोच मास्क पहने दिखाई दिए। कुछ लोग हाथों में फूल और तिरंगा लेकर पहुंचे थे। प्रदर्शनकारियों ने ‘धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो’ और ‘मेक इन इंडिया नहीं, लीक इन इंडिया’ जैसे नारे लगाए। कई छात्र अपने अभिभावकों के साथ भी प्रदर्शन में शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान माहौल पूरी तरह राजनीतिक और छात्र आंदोलनों जैसा नजर आया।

आंदोलन को शांतिपूर्ण रखने की अपील क्यों की गई?
अभिजीत दीपके ने प्रदर्शन शुरू होने से पहले समर्थकों से साफ कहा था कि आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहना चाहिए। उन्होंने लोगों से किताब और तिरंगा लेकर आने की अपील की थी। साथ ही पुलिसकर्मियों को सम्मान के तौर पर फूल देने की बात भी कही। दीपके ने कहा कि यह आंदोलन प्यार और शांति के रास्ते पर चलेगा। प्रदर्शन से पहले सीजेपी ने सोशल मीडिया पर दिशा-निर्देश भी जारी किए थे, जिसमें किसी तरह के टकराव से बचने को कहा गया था।

 सोनम वांगचुक के समर्थन का क्या असर दिखा?
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने भी इस आंदोलन को समर्थन दिया है। अभिजीत दीपके ने मंच से उनका धन्यवाद किया और कहा कि वह जल्द प्रदर्शन में शामिल होंगे। वांगचुक ने कहा है कि अगर अभिजीत दीपके को गिरफ्तार किया गया तो वह छह सप्ताह का उपवास करेंगे। इससे आंदोलन को और ज्यादा चर्चा मिली है। प्रदर्शन में शामिल युवाओं ने कहा कि परीक्षा और भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता जरूरी है और छात्रों की आवाज दबाई नहीं जानी चाहिए।

दिल्ली पुलिस ने क्या इंतजाम किए?
प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने राजधानी में सुरक्षा कड़ी कर दी थी। जंतर-मंतर, इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और कई संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया। करीब 1000 से ज्यादा पुलिसकर्मियों को सुरक्षा व्यवस्था में लगाया गया। पुलिस ने सुबह 10 बजे से शाम पांच बजे तक प्रदर्शन की अनुमति दी थी। प्रदर्शन के दौरान पुलिस लगातार हालात पर नजर बनाए रही।

सीजेपी आंदोलन क्यों बना राष्ट्रीय चर्चा का मुद्दा?
कॉकरोच जनता पार्टी सोशल मीडिया से शुरू हुआ एक युवा आंदोलन है, जो परीक्षा और भर्ती प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर जवाबदेही की मांग कर रहा है। हाल के महीनों में नीट और अन्य परीक्षाओं को लेकर देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए हैं। ऐसे में सीजेपी का यह आंदोलन युवाओं के बीच तेजी से चर्चा का विषय बन गया है। बड़ी संख्या में छात्रों की भागीदारी ने इस आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है।

जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के बाद साफ संकेत मिल रहे हैं कि यह आंदोलन आगे और तेज हो सकता है। अभिजीत दीपके ने कहा कि छात्र और युवा पीछे हटने वाले नहीं हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक परीक्षा और भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता नहीं आती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। फिलहाल दिल्ली का जंतर-मंतर छात्रों के गुस्से और सरकार से जवाब मांगने का बड़ा मंच बन गया है।

15 जून तक बढ़ी NEET-UG पेपर लीक के मुख्य आरोपी शुभम की न्यायिक हिरासत

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने शनिवार को बड़ा फैसला सुनाते हुए आरोपी शुभम खैरनार की न्यायिक हिरासत 15 जून तक बढ़ा दी। खैरनार को उनकी पिछली न्यायिक हिरासत समाप्त होने के बाद अदालत में पेश किया गया था।

सीबीआई ने किया वाघमारे की जमानत का विरोध

वहीं, मामले की एक अन्य आरोपी मनीषा वाघमारे की जमानत याचिका पर सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने अपना फैसला 9 जून के लिए सुरक्षित रख लिया है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने वाघमारे की जमानत का कड़ा विरोध किया, सीबीआई का कहना है कि मनीष वाघमारे NEET-UG पेपर लीक के षड्यंत्र की अहम साजिशकर्ता है।

सीबीआई ने दी जानकारी ?

विशेष CBI न्यायाधीश अजय गुप्ता की अदालत में वाघमारे की ओर से अधिवक्ता श्रेयस गच्छे और CBI की ओर से वरिष्ठ लोक अभियोजक नीतू सिंह ने अपने-अपने पक्ष रखे। CBI ने अदालत को बताया कि मनीषा वाघमारे ने सेवानिवृत्त रसायन विज्ञान शिक्षक प्रह्लाद कुलकर्णी और पुणे निवासी धनंजय लोखंडे के साथ मिलकर लीक हुआ प्रश्नपत्र हासिल किया और उसे आगे वितरित किया।

जांच एजेंसी के अनुसार, बैंक खातों के रिकॉर्ड और छात्रों के बयानों से यह संकेत मिले हैं कि परीक्षा सामग्री तक पहुंच दिलाने के लिए धन का लेन-देन किया गया था। सीबीआई का दावा है कि धनंजय लोखंडे ने मनीषा वाघमारे से नीट यूजी 2026 की परीक्षा सामग्री प्राप्त की थी, जिसे बाद में शुभम खैरनार तक पहुंचाया गया।

बचाव पक्ष ने क्या कहा?

हालांकि, बचाव पक्ष ने सीबीआई के सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि मनीषा वाघमारे एक प्रमाणित शैक्षणिक सलाहकार हैं और उनकी आय छात्रों को विभिन्न संस्थानों में रेफर करने पर मिलने वाले कमीशन से होती है। बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि उनके घर पर की गई तलाशी के दौरान कोई नकदी या अन्य आपत्तिजनक सामग्री बरामद नहीं हुई।

सुनवाई के दौरान वाघमारे के वकील ने उनकी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का भी हवाला दिया। उन्होंने बताया कि वाघमारे वर्टिगो (चक्कर आने की बीमारी) से पीड़ित हैं और हाल ही में अस्पताल में भर्ती रही थीं। इस पर अदालत ने बचाव पक्ष को उचित आवेदन दाखिल करने की सलाह देते हुए कहा कि जेल अस्पताल ऐसी स्वास्थ्य समस्याओं के इलाज के लिए पर्याप्त सुविधाओं से लैस है।

सीबीआई ने अदालत से कहा कि मामले की व्यापक साजिश का खुलासा करने और इसमें शामिल अन्य लोगों की पहचान करने के लिए आरोपियों की हिरासत आवश्यक है।

गौरतलब है कि NEET-UG 2026 परीक्षा 3 मई को भारत के 551 शहरों और विदेश के 14 शहरों में आयोजित की गई थी, जिसमें 22 लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया था। पेपर लीक के आरोपों के बाद 12 मई को परीक्षा रद्द कर दी गई थी। अब केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय ने 21 जून को होने वाली पुनर्परीक्षा के लिए सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी को और मजबूत करने के निर्देश दिए हैं।

ऑपरेशन ब्लू स्टार की 42वीं बरसी, खालिस्तान समर्थकों ने स्वर्ण मंदिर में लगाए नारे

पंजाब / सत्ता संदेश

हर साल 6 जून को ऑपरेशन ब्लू स्टार की बरसी मनाई जाती है। 1984 में अमृतसर के स्वर्ण मंदिर से चरमपंथी तत्वों को हटाने के लिए भारतीय सेना द्वारा ऑपरेशन ‘ब्लू स्टार’ चलाया गया। इस बार 42वीं बरसी के मौके पर सिखों के इस सबसे पवित्र धार्मिक स्थल स्वर्ण मंदिर के परिसर में खालिस्तान-समर्थक नारे लगाए गए। प्रदर्शनकारी सिखों के सर्वोच्च धार्मिक और लौकिक केंद्र ‘अकाल तख्त’ के सामने जमा हुए। उन्होंने जरनैल सिंह भिंडरावाले के पोस्टर भी दिखाए, जिनके बारे में कहा जाता है कि 1984 में परिसर के भीतर सिख चरमपंथियों का नेतृत्व वही कर रहे थे।

6 जून यानि की भिंडरावाले की पुण्यतिथि है। वे दमदमी टकसाल के प्रमुख थे, जो सिखों का एक पारंपरिक शैक्षिक संगठन और मदरसा है। इसकी स्थापना सिखों के दसवें गुरु, गुरु गोबिंद सिंह जी ने की थी. 1984 में अपनी मृत्यु के समय वे इसी संगठन के प्रमुख थे। इस मौके से पहले सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पंजाब पुलिस ने अमृतसर और आसपास के इलाकों में व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की थी।

बढ़ाई गई सुरक्षा व्यवस्था

पुलिस के विशेष महानिदेशक (कानून-व्यवस्था) प्रवीण कुमार सिन्हा ने 4 जून को जिले का दौरा करके सुरक्षा बलों की तैनाती का जायजा लिया। यहां व्यवस्था को बनाए रखने के लिए 4,000 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। पत्रकारों से बात करते हुए SDGP प्रवीण कुमार सिन्हा ने कहा कि ऑपरेशन ब्लू स्टार की बरसी 6 जून को है। इस मौके पर कई कार्यक्रम और आयोजन होते हैं, जिससे सुरक्षा का माहौल संवेदनशील और हाई-अलर्ट वाला हो जाता है। जिसके चलते पूरे पंजाब में, खासकर अमृतसर और उसके आस-पास के इलाकों में एक मजबूत सुरक्षा घेरा बनाया है।

आखिर क्या है ऑपरेशन ब्लू स्टार?

6 जून 1984 को भारतीय सेना ने ऑपरेशन ब्लू स्टार के तहत स्वर्ण मंदिर में एंट्री ली।यह कार्रवाई तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के आदेश पर पंजाब में जरनैल सिंह भिंडरावाले के नेतृत्व में चल रहे सिख उग्रवाद को रोकने के लिए की गई थी। भिंडरावाले ने स्वर्ण मंदिर परिसर में भारी मात्रा में हथियार जमा कर रखे थे. इस ऑपरेशन के दौरान वह और उसके हथियारबंद समर्थक मारे गए. इस कार्रवाई की काफी आलोचना हुई। इसके कुछ महीनों बाद, 31 अक्टूबर 1984 को नई दिल्ली स्थित उनके आवास पर इंदिरा गांधी की हत्या उनके ही दो सिख अंगरक्षकों, बेअंत सिंह और सतवंत सिंह ने कर दी।

पंजाब के फिरोजपुर में भीषण हादसा, पिकअप और ट्रेलर में टक्कर, 9 लोगों की मौत

पंजाब / सत्ता संदेश

पंजाब के फिरोजपुर जिले में शनिवार सुबह एक भीषण सड़क हादसे हो गया। फिरोजपुर-फाजिल्का रोड पर महिंद्रा पिकअप वाहन और एक ट्रेलर के बीच हुई जोरदार टक्कर में 9 लोगों की मौत हो गई, जबकि कुछ गंभीर रूप से घायल हो गए। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया।

जलालाबाद क्षेत्र से एक परिवार अपने रिश्तेदारों के साथ महिंद्रा पिकअप वाहन में सवार होकर जा रहा था। बता दें कि वाहन में करीब 25 से 28 लोग मौजूद थे। इसी दौरान फिरोजपुर-फाजिल्का रोड पर जंगा वाले मोड़ के पास गांव हुसैनशाह वाला के नजदीक उनकी गाड़ी एक ट्रेलर से टकरा गई।


पिकअप के परखच्चे उड़ गए

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, टक्कर इतनी भीषण थी कि पिकअप वाहन के परखच्चे उड़ गए। हादसे में कई लोग वाहन के अंदर ही फंस गए। स्थानीय लोगों ने तुरंत राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया और पुलिस को सूचना दी। शुरुआती जानकारी में चार लोगों की मौके पर ही मौत की बात सामने आई थी, जिनमें तीन पुरुष और एक महिला शामिल थे। बाद में मृतकों की संख्या बढ़कर 9 हो गई।

हादसे में घायल हुए लोगों को तुरंत नजदीकी सरकारी और निजी अस्पतालों में पहुंचाया गया। कई घायलों की हालत गंभीर होने के कारण उन्हें बेहतर इलाज के लिए फरीदकोट रेफर किया गया है। डॉक्टरों की टीम लगातार घायलों के उपचार में जुटी हुई है।


मौके पर पहुंचे एसएसपी

घटना की सूचना मिलते ही एसएसपी सहित पुलिस के आला अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने घटनास्थल और राहत कार्यों का जायजा लिया। पुलिस ने दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है. फिलहाल यह पता लगाने का कोशिश की जा रही है कि हादसा तेज रफ्तार, लापरवाही या किसी अन्य वजह से हुआ।

इस दर्दनाक हादसे के बाद मृतकों के परिवारों में मातम पसरा हुआ है। अस्पतालों और घटनास्थल पर परिजनों की चीख-पुकार सुनकर हर किसी की आंखें नम हो गईं। प्रशासन की ओर से मृतकों की पहचान और घायलों के उपचार को लेकर आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। वहीं पुलिस पूरे मामले की गहन जांच में जुटी हुई है।

ऑपरेशन ब्लू स्टार को लेकर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था, 2500 सुरक्षाकर्मियों को किया तैनात

पंजाब / सत्ता संदेश

ऑपरेशन ब्लू स्टार की बरसी को लेकर अमृतसर में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर मजबूत कदम उठाया गया है। शनिवार 6 जून को आयोजित होने वाले कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस विभाग पूरी तरह सतर्क हो गया है। शहर में हाई अलर्ट घोषित करते हुए सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है तथा संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखी जा रही है।

बरसी से दो दिन पहले अमृतसर पुलिस की ओर से शहर के विभिन्न हिस्सों में फ्लैग मार्च निकाला गया। पुलिस अधिकारियों और जवानों ने प्रमुख बाजारों, बस अड्डों, रेलवे स्टेशन, धार्मिक स्थलों तथा अन्य संवेदनशील इलाकों में पैदल मार्च कर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया।

इस दौरान लोगों को सुरक्षा का भरोसा दिलाने के साथ-साथ असामाजिक तत्वों को कड़ा संदेश दिया गया कि कानून व्यवस्था बिगाड़ने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

70 से ज्यादा जगहों पर की नाकाबंदी

पुलिस आयुक्त गुरप्रीत सिंह भुल्लर ने बताया कि पूरे शहर में करीब 2500 पुलिस कर्मियों को तैनात किया गया है। इसके अलावा केंद्रीय सुरक्षा बलों की कंपनियां भी सुरक्षा प्रबंधों में सहयोग कर रही हैं। शहर के प्रमुख प्रवेश और निकास मार्गों पर तकरीबन 70 के करीब विशेष नाके लगाए गए हैं, जहां आने-जाने वाले वाहनों और संदिग्ध व्यक्तियों की गहन जांच की जा रही है।

सुरक्षा एजेंसियां आधुनिक तकनीक का भी सहारा ले रही हैं। शहरभर में लगे सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। इसके साथ ही विभिन्न स्थानों पर अतिरिक्त निगरानी दल तैनात किए गए हैं ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।

इंटरनेट पर भी साइबर सेल की नजर

पुलिस आयुक्त ने बताया कि सोशल मीडिया मंचों पर भी विशेष निगरानी रखी जा रही है। किसी भी प्रकार की अफवाह, भड़काऊ संदेश या शांति भंग करने वाली सामग्री साझा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे किसी भी अपुष्ट जानकारी पर विश्वास न करें और केवल आधिकारिक स्रोतों से प्राप्त सूचनाओं को ही सही मानें।

प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार बरसी के अवसर पर विभिन्न धार्मिक और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के अमृतसर पहुंचने की संभावना है। इसे देखते हुए भीड़ प्रबंधन के लिए अलग-अलग टीमें गठित की गई हैं। किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं और संबंधित विभागों को अलर्ट मोड पर रखा गया है।

संवेदनशील इलाकों में बढ़ाई सुरक्षा

प्रशासन का कहना है कि शहर में शांति, सौहार्द और भाईचारा बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से लगातार गश्त बढ़ाई गई है और संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि कानून व्यवस्था को प्रभावित करने वाली किसी भी गतिविधि के खिलाफ तत्काल और सख्त कार्रवाई की जाएगी।

भारत के 319वें टेस्ट प्लेयर बने मानव सुथार, प्लेइंग-11 में मिली जगह

स्पोर्ट डेस्क / सत्ता संदेश

पूरे 6 महीने के बाद टेस्ट क्रिकेट में टीम इंडिया की वापसी हुई है और ये वापसी एक युवा भारतीय खिलाड़ी के लिए अच्छी खबर लेकर आई है. न्यू चंडीगढ़ के मुल्लांपुर में भारत और अफगानिस्तान के बीच टेस्ट मैच में युवा स्पिनर मानव सुथार को डेब्यू का मौका दिया गया है. बाएं हाथ के स्पिनर मानव सुथार को मैच शुरू होने से ठीक पहले उनकी टेस्ट कैप देकर इंटरनेशनल क्रिकेट में स्वागत किया गया. इसके साथ ही वो भारत के लिए टेस्ट क्रिकेट खेलने वाले 319वें खिलाड़ी बन गए, जबकि 2021 के बाद पहली बार किसी स्पिनर ने टीम इंडिया के लिए टेस्ट डेब्यू किया है.

किसने दी सुथार को टेस्ट कैप?

शनिवार 6 जून से भारत-अफगानिस्तान के बीच एकमात्र टेस्ट मैच की शुरुआत के साथ ही 2 डेब्यू हुए. पहला तो टेस्ट क्रिकेट में मुल्लांपुर के महाराजा यादवेंद्र सिंह स्टेडियम की एंट्री हुई और ये टेस्ट मैच आयोजित करने वाला भारत का 31वां वेन्यू बन गया. वहीं इसके बाद ज्यादा अहम डेब्यू हुआ टीम इंडिया, जब स्टार लेग स्पिनर कुलदीप यादव ने 23 साल के सुथार को उनकी ‘बैगी ब्लू’ कैप सौंपी. इसके साथ ही मानव सुथार भारतीय टेस्ट क्रिकेट का हिस्सा बन गए.

सुथार vs दुबे- कैसा है रिकॉर्ड?

इस मैच से एक दिन पहले ही टीम इंडिया के हेड कोच गौतम गंभीर ने ऐलान कर दिया था कि मानव सुथार या हर्ष दुबे में से किसी एक को मौका दिया जाएगा. दोनों ही 23 साल के बाएं हाथ के स्पिन ऑलराउंडर हैं और दोनों का फर्स्ट क्लास करियर लगभग एक जैसा ही है. राजस्थान के लिए खेलने वाले सुथार ने 29 फर्स्ट क्लास मैच में 129 विकेट लिए हैं, जबकि विदर्भ के स्पिनर दुबे ने 27 मुकाबलों में 133 विकेट लिए हैं. इसी तरह बैटिंग में सुथार ने 25.54 की औसत से 945 रन बनाए हैं, जिसमें 1 शतक और 6 अर्धशतक हैं जबकि दुबे ने 25.65 के औसत से 1026 रन बनाए हैं और 9 अर्धशतक लगाए हैं.

फिर सुथार को क्यों मिला मौका?

अगर दोनों के रिकॉर्ड लगभग बराबर हैं, दोनों एक तरह के क्रिकेटर हैं और दोनों की उम्र भी समान है तो फिर दुबे की जगह सुथार को क्यों चुना गया? इसकी एक बड़ी वजह है सुथार की हाइट और एक सटीक टप्पे पर लगातार गेंदबाजी करने की काबिलियत. दुबे की तुलना में सुथार थोड़ा लंबे हैं और ऐसे में उनका बॉल रिलीजिंग पॉइंट ज्यादा ऊंचा होता है. ये बल्लेबाजों को परेशान करता है क्योंकि वो ज्यादा उछाल भी हासिल कर सकते हैं.

इसके अलावा जब गेंद उनके हाथ से निकलती है तो ये हवा में काफी ज्यादा घूमती (रेवॉल्यूशन) है, जिसके चलते बल्लेबाज के लिए इसकी स्पीड, टर्न और बाउंस को जज कर पाना आसान नहीं होता. वहीं एक पहलू ये भी है कि सुथार पिछले दो IPL सीजन से गुजरात टाइटंस का हिस्सा हैं, जिसके कप्तान शुभमन गिल हैं. ऐसे में गिल ने उनकी गेंदबाजी को ज्यादा करीब से देखा होगा और वो उनकी ताकत को समझ सकते हैं, जिसके चलते उन्हें प्राथमिकता मिली होगी.

टॉस और प्लेइंग-11 का हाल

टॉस और प्लेइंग-11 की बात करें तो भारतीय कप्तान शुभमन गिल ने टॉस जीता और पहले बल्लेबाजी का फैसला किया. टीम इंडिया ने सभी अटकलों पर विराम लगाते हुए स्टार तेज गेंदबाज मोहम्मद सिराज को इस मैच के लिए प्लेइंग-11 में शामिल किया है. उनके अलावा प्रसिद्ध कृष्णा दूसरे तेज गेंदबाज हैं. टीम इंडिया वॉशिंगटन सुंदर, कुलदीप यादव और मानव सुथार के रूप में 3 स्पिनर्स के साथ उतरी है. वहीं अफगानिस्तान ने भी स्पिनर नांग्यालिया खरोटे को डेब्यू का मौका दिया है.

IND vs AFG Test: प्लेइंग-11

भारतः शुभमन गिल (कप्तान), केएल राहुल, यशस्वी जायसवाल, साई सुदर्शन, ऋषभ पंत (विकेटकीपर), ध्रुव जुरेल, वाशिंगटन सुंदर, मानव सुथार, कुलदीप यादव, मोहम्मद सिराज, प्रसिद्ध कृष्णा

अफगानिस्तान: हशमतुल्लाह शाहिदी (कप्तान), सेदीकुल्लाह अटल, रहमानुल्लाह गुरबाज़, अब्दुल मलिक, रहमत शाह, अफ़सर ज़ज़ई (विकेटकीपर), अज़मतुल्लाह ओमरज़ई, शराफ़ुद्दीन अशरफ़, नांग्यालिया खरोटे, जियाउर रहमान शफ़ीकी, मोहम्मद सलीम सफ़ी

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