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लखनऊ कोचिंग सेंटर में लगी आग, 14 बच्चों की दर्दनाक मौत, अलीगढ़ दौरे से लौटे सीएम योगी

लखनऊ / सत्ता संदेश

राजधानी लखनऊ में सोमवार को अलीगंज क्षेत्र के पुरनिया में एक कोचिंग सेंटर में भीषण आग लग गई। आग लगने के बाद बिल्डिंग में धुआं भर गया। इससे अंदर मौजूद छात्रों में भगदड़ मच गई। कई छात्रों ने जान बचाने के लिए ऊंचाई से छलांग लगा दी। इससे वह घायल हो गए। मौके पर डीएम और प्रशासनिक टीम के साथ पुलिस बल मौजूद है। राहत बचाव कार्य लगातार जारी है। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक मौके पर पहुंचे हैं। बगल के घर की छत से कोचिंग की दीवार काटकर रेस्क्यू का प्रयास किया जा रहा है। अभी तक चार लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। घटना में 14 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है।

सीएम योगी ने रद्द किया अलीगढ़ दौरा, लखनऊ लौटे
लखनऊ अग्निकांड की सूचना मिलने पर अपना अलीगढ़ दौरा बीच में ही रद्द कर दिया। उन्हें लोकार्पण व शिलान्यास कार्यक्रम के दौरान ही इस हादसे की जानकारी मिली, इसके तत्काल बाद मुख्यमंत्री राजधानी लखनऊ के लिए प्रस्थान कर गए। 

अलीगढ़ में आयोजित लोकार्पण/शिलान्यास कार्यक्रम में संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने जनसमूह से कहा कि मेरी इच्छा थी कि यहीं रहूं। लेकिन अभी-अभी जानकारी मिली है कि लखनऊ में एक दुर्घटना हुई है और कुछ बच्चे अग्निकांड की चपेट में आए हैं। इसमें कुछ बच्चों की दुखद मौत हो गई है। प्रशासन राहत कार्यों में लगा है। मुझे भी इस दुखद घटना के कारण तत्काल वापस लखनऊ जाना पड़ रहा है। मुख्यमंत्री ने घायलों के उचित इलाज का भी निर्देश दिया। 

डीजीपी व एसीएस (गृह) को मौके पर जाने का निर्देश 
सीएम ने कहा कि जिन परिवारों ने अपने नौजवानों को खोया है, उनके प्रति गहन संवेदना व्यक्त करता हूं। पुलिस महानिदेशक व अपर मुख्य सचिव (गृह) को निर्देश दिया है कि मौके पर जाकर इसकी रिपोर्ट प्रस्तुत करें। मैं स्वयं भी वहां के लिए प्रस्थान कर रहा हूं। इस मामले की तह में जाकर दोषियों को सजा दिलाई जाएगी।

सीएम ने जनहानि पर जताया शोक
मुख्यमंत्री ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर भी घटना पर दुख जताया। मुख्यमंत्री ने लिखा कि लखनऊ में अग्नि दुर्घटना में हुई जनहानि अत्यंत दुःखद एवं हृदय विदारक है। मेरी संवेदनाएं शोकाकुल परिजनों के साथ हैं। प्रभु श्रीराम से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्माओं को शांति तथा घायलों को शीघ्र स्वास्थ्य लाभ प्रदान करें।

स्थानीय लोगों ने बताया कि भवन से अचानक धुआं उठता दिखाई दिया। इसके बाद आसपास के लोगों ने तत्काल फायर ब्रिगेड और पुलिस को सूचना दी। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया। पूरा परिसर धू-धूकर जलने लगा। 

सूचना मिलने पर दमकल की कई गाड़ियां मौके पर पहुंच गईं। आग बुझाने के साथ-साथ छात्रों को सुरक्षित बाहर निकालने का अभियान शुरू किया। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी घटनास्थल पर मौजूद हैं। अभी तक 10 लोगों के ट्रामा सेंटर पहुंचने की जानकारी है। 

राहत बचाव कार्य  लगातार जारी 

बताया जा रहा है कि आग से बचने के लिए कई बच्चे बिल्डिंग से नीचे गिर गए। इससे वह गंभीर रूप से झुलस गए। अभी कई बच्चों के अंदर फंसे होने की आशंका जताई जा रही है। राहत बचाव कार्य लगातार जारी है।  

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, आग लगने के बाद क्षेत्र में चीख-पुकार मच गई। बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौके पर जुट गए। फिलहाल आग लगने के कारणों का पता नहीं चल सका है। आग में फंसे लोगों की संख्या और घायलों के संबंध में आधिकारिक जानकारी का इंतजार किया जा रहा है। फायर ब्रिगेड, पुलिस और प्रशासन की टीमें मौके पर मौजूद हैं। 

भारतीय रेलवे ने पूर्वी तट रेलवे के 631 रूट किलोमीटर पर ₹270 करोड़ की लागत से ‘कवच’ प्रणाली को मंजूरी दी

नई दिल्ली सत्ता संदेश

भारतीय रेल ने स्वदेशी प्रौद्योगिकी के जरिए रेल सुरक्षा को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए 270 करोड़ रुपये की लागत से पूर्वी तट रेलवे के 631 रूट किलोमीटर (आरकेएम) पर कवच लगाने की मंजूरी दे दी है। कवच एक ऐसी व्यवस्था है जो ट्रेन टक्कर को रोकने का काम करती है।

इस परियोजना में पूर्वी तट रेलवे के छह महत्वपूर्ण रेल मार्ग खंडों जैसे-बघुआपाल-बुढ़पंक, हरिदासपुर-पारादीप, खुर्दा रोड (केयूआर)-बलांगीर, नौपाड़ा-गुनुपुर, लांजीगढ़ रोड-जूनागढ़ और बोब्बिली-सलूर को कवर करती है।

स्वदेशी स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली का विस्तार

स्वीकृत कार्य भारतीय रेल के उस व्यापक कार्यक्रम का हिस्सा है जिसके तहत रेलवे नेटवर्क पर एलटीई-आधारित संचार प्रणाली के साथ कवच प्रणाली को तैनात किया जा रहा है। कवच भारत की स्वदेशी रूप से विकसित स्वचालित ट्रेन सुरक्षा (एटीपी) प्रणाली है, जिसे खतरे के सिग्नल पार करने (एसपीएडी), अति-गति और ट्रेन दुर्घटनाओं को रोककर सुरक्षा बढ़ाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह प्रणाली ट्रेनों की आवाजाही पर लगातार नज़र रखती है और आवश्यकता पड़ने पर स्वचालित रूप से ब्रेक लगा देती है, जिससे परिचालन सुरक्षा में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

बेहतर सुरक्षा, गति और विश्वसनीयता

इन मार्गों पर कवच प्रणाली की स्थापना से स्वचालित ट्रेन सुरक्षा और टक्कर से बचाव की क्षमता बढ़ेगी जिससे ट्रेन संचालन में उच्च स्तर की सुरक्षा प्राप्त करने में मदद मिलेगी। इसके अलावा, कवच प्रणाली घने कोहरे सहित प्रतिकूल मौसम की स्थितियों में भी ट्रेनों की सुरक्षित और अधिक विश्वसनीय आवाजाही सुनिश्चित करती है, जिससे सेवा की विश्वसनीयता और समयबद्धता में सुधार होता है।

पूर्वी तट रेलवे में सुरक्षा अवसंरचना को मजबूत करना

इस परियोजना से पूर्वी तट रेलवे द्वारा सेवा प्रदान किए जाने वाले ओडिशा और पड़ोसी क्षेत्रों के प्रमुख खंडों में यात्री और मालगाड़ी दोनों के संचालन को लाभ मिलने की उम्मीद है। इससे उच्च घनत्व वाले और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मार्गों पर कवच नेटवर्क के विस्तार के लिए भारतीय रेल के चल रहे अभियान को और मजबूती मिलेगी ।

डॉ मनसुख मांडविया केरल में खेल एवं फिटनेस पहलों का करेंगे नेतृत्व

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

केंद्रीय युवा कार्य एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया 23 जून को केरल का दौरा करेंगे। इस दैरान वे फिटनेस, खेल उत्कृष्टता और खेलों में व्यापक भागीदारी को बढ़ावा देने वाले कई कार्यक्रमों में भाग लेंगे।

केंद्रीय मंत्री अपने कार्यक्रमों की शुरुआत तिरुवनंतपुरम में चकाई आईटीआई से शंकुमुघम बीच तक आयोजित साइकिल प्रतियोगिता ‘साइक्लिंग बाय द सी’ में भाग लेकर करेंगे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फिट इंडिया मूवमेंट के विजन को बढ़ावा देने के लिए आयोजित इस पहल का उद्देश्य लोगों को साइकिल चलाने और अन्य फिटनेस गतिविधियों के माध्यम से सक्रिय और स्वस्थ जीवन शैली अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है।

इस यात्रा के दौरान, डॉ. मांडविया मायलोम स्थित जीवी राजा स्पोर्ट्स स्कूल का भी दौरा करेंगे। यह देश के प्रमुख खेल संस्थानों में से एक है, जिसने भारतीय खेल जगत को कई उत्कृष्ट एथलीट प्रदान किए हैं।

यह दौरा जमीनी स्तर पर खेल विकास को मजबूत करने और युवा खेल प्रतिभाओं को पोषित करने की दिशा में सरकार के निरंतर प्रयास को दर्शाता है।

केंद्रीय मंत्री तिरुवनंतपुरम स्थित केरल विश्वविद्यालय स्टेडियम में आयोजित होने वाले 2026 आइची-नागोया एशियाई खेलों के फन रन कार्यक्रम में भी भाग लेंगे।

यह कार्यक्रम 2026 एशियाई खेलों से पहले आयोजित प्रचार गतिविधियों का हिस्सा है और इसे अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक दिवस समारोह के साथ जोड़ा गया है।

यह भव्य आयोजन न केवल खेल भावना और सामूहिक भागीदारी की भावना को प्रदर्शित करेगा, बल्कि केरल की समृद्ध खेल संस्कृति को उजागर करते हुए एशियाई खेलों में लोगों की सक्रिय भागीदारी को भी सुदृढ़ करेगा।

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस-2026 समारोह में “स्वस्थ आयु के लिए योग” को प्रमुखता दी गई

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस (आईडीवाई) 2026 को “स्वस्थ आयु के लिए योग” विषय के अंतर्गत वरिष्ठ नागरिकों पर केंद्रित विशेष कार्यक्रमों के साथ मनाया। केंद्रीय मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार ने कहा कि योग धर्म, जाति और पंथ से परे लोगों को एकजुट करता है और समग्र स्वास्थ्य और कल्याण को बढ़ावा देता है।


भारत मंडपम में आयोजित योग दिवस के एक भव्य कार्यक्रम में दिल्ली-एनसीआर के विभिन्न हिस्सों से लगभग 1,300 वरिष्ठ नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया । इस कार्यक्रम में वृद्धों के शारीरिक स्वास्थ्य, भावनात्मक कल्याण, मानसिक दृढ़ता और जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने में योग की भूमिका पर प्रकाश डाला गया।


संयुक्त सचिव मोनाली पी. ढाकाटे ने इस अवसर पर कहा कि स्वस्थ जीवन में शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक कल्याण शामिल है और योग सक्रिय और गरिमापूर्ण जीवन के लिए एक महत्वपूर्ण साधन है। मंत्रालय ने पूरे भारत में वरिष्ठ नागरिकों के स्वास्थ्य, भागीदारी और कल्याण का समर्थन करने वाले एक समावेशी, आयु-अनुकूल इकोसिस्‍टम के निर्माण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की।

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने वरिष्ठ नागरिकों के स्वास्थ्य, गरिमा और सक्रिय भागीदारी को बढ़ावा देने वाले एक समावेशी और आयु-अनुकूल इकोसिस्‍टम को बढ़ावा देने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस जैसी पहलों और चल रहे कल्याणकारी कार्यक्रमों के माध्यम से, मंत्रालय पूरे देश में बुजुर्ग नागरिकों के लिए स्वस्थ जीवन, सामाजिक समावेश और जीवन की बेहतर गुणवत्ता को प्रोत्साहित करना जारी रखता है।

अमित शाह नई दिल्ली में NAFED के ऑक्शन पोर्टल ‘NAFEX.in’ का शुभारंभ करेंगे

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह 23 जून को नई दिल्ली स्थित अटल अक्षय ऊर्जा भवन में NAFED के ऑक्शन पोर्टल ‘NAFEX.in’ का शुभारंभ करेंगे। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान भी कार्यक्रम में उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम के दौरान अमित शाह NAFED की कई महत्वपूर्ण डिजिटल और किसान-केंद्रित पहलों का शुभारंभ करेंगे। इनमें किसानों के बच्चों के लिए NAFED-KALYAN छात्रवृत्ति, दलहन एवं तिलहन के इन्वेंटरी मैनेजमेंट के लिए DRISHTI पोर्टल, एंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग को मजबूत करने के लिए ERP पोर्टल और ऑक्शन पोर्टल NAFEX.in शामिल हैं। कार्यक्रम के दौरान ऑक्शन पोर्टल पर लाइव पंजीकरण का प्रदर्शन और नीलामी प्रक्रिया का शुभारंभ भी किया जाएगा।

NAFEX.in का शुभारंभ नीलामी प्रक्रिया में पारदर्शिता, दक्षता और संचालन की सुगमता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह पोर्टल नीलामी से संबंधित गतिविधियों को व्यवस्थित करने और किसानों, सदस्य संस्थाओं तथा हितधारकों के हित में NAFED की समग्र कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए एक डिजिटल प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराएगा।

इस अवसर पर केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री किसानों के बच्चों को NAFED-KALYAN छात्रवृत्ति के चेक भी वितरित करेंगे। यह पहल किसान कल्याण और किसानों के बच्चों की शिक्षा को सहयोग देने की दिशा में NAFED की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

शुभारंभ कार्यक्रम के बाद श्री अमित शाह NAFED के निदेशक मंडल के सदस्यों से भेंट करेंगे। इस बैठक में NAFED द्वारा अपनी गतिविधियों और प्रगति पर प्रस्तुति दी जाएगी, जिसमें केन्द्रीय मंत्री द्वारा पिछले दौरे के दौरान दिए गए निर्देशों पर की गई कार्रवाई तथा NAFED के भविष्य के रोडमैप पर चर्चा होगी ।

NAFED किसानों को सहयोग देने, कृषि विपणन, खरीद और सहकारिता आधारित कृषि व्यापार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इन डिजिटल और कल्याणकारी पहलों का शुभारंभ माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के सहकार से समृद्धि के विज़न को साकार करने और सहकारी संस्थाओं को तकनीक, पारदर्शिता तथा किसान-केंद्रित सुधारों के माध्यम से सशक्त बनाने के सरकार के प्रयासों के अनुरूप है।

रिफॉर्म एक्‍सप्रेस के अंतर्गत बढ़ रही न्‍यायिक सुगमता : अर्जुन राम मेघवाल

न्याय सदा से ही मानव सभ्यता का एक अत्‍यधिक महत्वपूर्ण और अभिन्न स्तंभ रहा है। हमारी प्राचीन सांस्कृतिक विरासत की समृद्ध परंपरा तथा उसके स्थायी प्रतीक सामूहिक रूप से उन संस्थागत व्‍यवस्‍थाओं को दर्शाते हैं जिन्होंने मानव सभ्‍यता की विकास यात्रा को सही मार्ग पर आगे बढ़ाया, मार्गदर्शन किया और निरंतर आगे बढ़ने में सहायता की। मानव सभ्‍यता के अनवरत विकास के फलस्‍वरूप ज्ञान-विज्ञान और तकनीक से समृद्ध आधुनिक समाज में एक-दूसरे से जुड़े व्‍यक्तियों और समुदायों के आपसी संबंधों में भी विभिन्‍न विचारों और मतों के कारण परिवर्तन आया है, तथापि, इसमें कोई संदेह नहीं है कि वैज्ञानिक प्रगति और तकनीकी उन्‍नति ने देश की सीमाओं से आगे जाकर विचारों के निर्बाध आदान-प्रदान को और अधिक सुगम बनाया है। अनादि काल से, एक विचार की दूसरे विचार पर श्रेष्ठता स्‍थापित करने की होड़ न्यायशास्त्र के विकास की एक मजबूत नींव रही है। युगों से विचारों और मूल्यों के इस अंतर्संघर्ष के बीच न्यायिक संस्थानों ने सत्य, निष्पक्षता और विधि के शासन में लोगों के विश्वास को पुन: स्‍थापित करने की जिम्‍मेदारी निभाई है। इन्होंने एक सेतु का काम किया है जो प्रत्येक संबंधित पक्ष को, यहाँ तक कि उन लोगों को भी जो स्वयं को अलग-थलग महसूस करते हैं, न्याय और सामूहिक कल्‍याण की एक व्यापक प्रक्रिया से जुड़ाव, विश्‍वास और सहभागिता का अनुभव कराता है। 

इसी स्‍थायी संस्‍थागत प्रतिबद्धता  के कारण एक ऐसी सशक्त व्यवस्था निर्मित होती है जो न केवल न्‍याय तक पहुंच सुनिश्चित करती है बल्कि प्रत्‍येक नागरिक के जीवन को सरल और सुगम बनाने के लिए अनिवार्य है। वर्तमान संदर्भ में विकसित भारतीय न्‍यायशास्‍त्र ने स्‍वयं को आधुनिक चुनौतियों और उपलब्‍ध अवसरों के अनुरूप ढाल लिया है। हमारी संवैधानिक विरासत हमें स्‍वतंत्रता सेनानियों और राष्‍ट्र निर्माताओं का स्‍वप्‍न साकार करते हुए एक समतामूलक समाज के निर्माण की दिशा में सतत मार्गदर्शन प्रदान करती है। संविधान की प्रस्‍तावना में निहित न्‍याय की त्रिवेणी अर्थात राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक न्‍याय तथा स्‍वतंत्रता, समानता और बंधुत्‍व के आदर्श संस्‍थाओं और व्‍यक्तियों दोनों के लिए एक नैतिक दिशासूचक के रूप में कार्य करते हैं। 

स्वतंत्र भारत को संविधान के रूप में एक आदर्श मार्गदर्शक प्राप्त हुआ जिसने हमारे राष्‍ट्र की प्र‍गति की दिशा निर्धारित की। देश की आजादी के बाद यद्यपि हमने राजनीतिक स्वतंत्रता प्राप्त कर ली थी, फिर भी गहरी जड़ें जमा चुकी औपनिवेशिक मानसिकता भारतीय चिंतन और मूल्‍यों के लिए एक बौद्धिक अवरोध बनी रही। लॉर्ड मैकाले की शिक्षा नीति, उसके बाद भारत के नागरिकों के लिए बनाए गए दंडात्मक कानून तथा विभिन्‍न नीतियों ने नियमों का एक जटिल जाल बुन दिया, जिसने देश की जनता की स्वतंत्रता को सीमित किया। 19वीं सदी की मानसिकता और 20वीं सदी के कानून 21वीं सदी की आकांक्षाओं को पूरा नहीं कर सकते।

हमें अपनी राष्ट्रीय उपलब्धियों पर अपार गर्व है। फिर भी, जब हम मोदी सरकार की बारह वर्षों की विकास यात्रा पर नजर डालते हैं तो शासन व्‍यवस्‍था में एक स्पष्ट और सकारात्मक परिवर्तन दिखाई देता है जिसने नागरिकों के जीवन को अनेक स्‍तरों पर प्रभावित किया है। वर्ष 2014 को हमारे देश की लोकतांत्रिक यात्रा के एक महत्‍वपूर्ण पड़ाव के रूप में याद किया जाएगा। यह वह वर्ष था जबकि देश में युवाओं की विशाल आबादी (Demographic Dividend) को देश के विकास में सर्वाधिक महत्‍वपूर्ण (Development Dividend)  मानने वाले तीव्र गति से विकसित हो रहे भारत की पूर्ण क्षमता को साकार करने के लिए नीतिगत हस्तक्षेपों को और अधिक प्रभावी और सक्षम बनाया गया। 

देश के माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के कुशल और दूरदर्शी नेतृत्व में संपूर्ण शासन व्‍यवस्‍था ने रिफॉर्म एक्‍सप्रेस से प्रेरित विकास की प्रक्रिया को तेजी से अपनाते हुए सशक्तिकरण की शक्ति का परिचय दिया है।  इसकी यात्रा को संक्षेप में इस प्रकार बताया जा सकता है कि यह जमीनी स्तर से ‘ईज ऑफ लिविंग’ को बढ़ावा देने का प्रयास है। साथ ही, ‘राष्ट्र प्रथम’ के दृष्टिकोण को शीर्ष स्तर से लागू करना भी इसका उद्देश्य है।

इसी प्रकार, भारत की न्यायिक सुधारों की यात्रा भी व्यापकता, नवाचार और गहन सामाजिक एवं सभ्यतागत प्रतिबद्धता की एक प्रेरक गाथा रही है। यह एक व्यापक और बहुआयामी दृष्टिकोण को दर्शाती है जिसमें विधायी आधुनिकीकरण, संस्थागत सुदृढ़ीकरण और डिजिटल नवाचार शामिल हैं।

‘ईज ऑफ जस्टिस’ हमारे लिए मात्र एक कथन नहीं है बल्कि यह एक सुधार का मंत्र है जिसमें न्‍याय के लिए अदालत की शरण में जाने वालों के लिए ‘ईज ऑफ इंगेजमेंट’, अधिवक्‍ताओं और न्‍यायाधिशों के लिए ‘ईज ऑफ वर्किंग’ तथा नागरिकों के लिए ‘ईज ऑफ अंडरस्‍टैंडिंग’ शाामिल है। 

न्‍याय हेतु अदालतों की शरण में जाने वाले नागरिकों की सुविधा के लिए DISHA योजना के तहत टेली-लॉ, न्‍याय बंधु और प्रो बोनो सेवाओं के विस्‍तार ने न्‍याय प्राप्ति को अत्‍यंत सुलभ और किफायती बना दिया है। कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के व्यापक नेटवर्क के माध्यम से संचालित टेली-लॉ कार्यक्रम के तहत ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों के 112 लाख से अधिक लाभार्थियों को अदालतों में मुकदमे दायर करने  से पहले मुफ्त कानूनी सलाह प्राप्‍त करने का लाभ मिला है। ई-फाइलिंग और ई-सेवा केंद्र की सेवाओं ने अदालत में मुकदमा दायर करने वाले व्‍यक्तियों और न्‍यायिक व्‍यवस्‍था के बीच नियमित संवाद एवं संपर्क को और अधिक सरल बनाया है। आधुनिक प्रौद्यो‍गिकी और सामुदायिक सहभागिता के समन्‍वय का भारत का यह अनूठा मॉडल वैश्विक स्‍तर पर एक मानक के रूप में उभरा है।

अधिवक्‍ताओं और न्‍यायाधीशों के लिए ‘ईज ऑफ वर्किंग’ को डिजिटल और भौतिक अवसंरचना दोनों में व्‍यापक विस्‍तार द्वारा उल्‍लेखनीय रूप से सुदृढ़ किया गया है। चूंकि जिला एवं अधीनस्‍थ न्‍यायपालिका देश के अधिकांश नागरिकों के लिए न्‍यायिक व्‍यवस्‍था का पहला संपर्क बिंदु है, अत: इसे सुदृढ़ करना एक अनिवार्य और व्‍यावहारिक प्राथमिकता बनी हुई है। इसी दृष्टि से, केंद्र प्रायोजित योजना के अंतर्गत न्‍यायालय भवन, अधिवक्‍ता कक्षों, आवासीय इकाइयों तथा डिजिटल अवसंरचना के निर्माण पर विशेष बल दिया गया है। इसके परिणामस्वरूप, देश में न्यायालय भवनों की संख्या वर्ष 2014 के 15,818 से बढ़कर 22,712 हो गई है तथा अत्‍याधुनिक एकीकृत न्‍यायालय परिसरों के विकास हेतु वर्ष 2014 के बाद से अब तक 9,400.40 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। इसके अतिरिक्‍त, 7200 करोड़ रुपए के बजटीय परिव्‍यय से शुरू की गई ई-कोर्ट चरण-III परियोजना का उद्देश्‍य न्‍यायालयों को पूर्णत: डिजिटल, पेपरलेस और एआई-सक्षम न्‍याय वितरण संस्‍थानों में परिवर्तित करना है। विडियो कॉन्‍फ्रेंसिंग सुविधाएं, वर्चुअल कोर्ट और अदालती कार्यवाही की लाईव स्‍ट्रीमिंग जैसी पहलों ने न्‍यायपालिका को लोगों के और करीब ला दिया है तथा न्‍याय वितरण को अधिक सुलभ, पारदर्शी और कुशल बनाया है। 

भारत जैसे  भाषाई विविधता वाले देश में नागरिकों के लिए ‘ईज ऑफ अंडरस्‍टैंडिंग’ का होना ‘ईज ऑफ जस्टिस’ के व्‍यापक ढांचे का एक अत्‍यंत महत्‍वपूर्ण स्‍तंभ है। इस उद्देश्‍य को ध्‍यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट विधिक अनुवाद सॉफ्टवेयर (SUVAS) और भाषिणी (Bhashini) जैसे एआई- संचालित ने‍चुरल लैंग्‍वेज प्रोसेसिंग उपकरण उच्‍चतम न्‍यायालय के निर्णयों एवं आदेशों का 18 भारतीय भाषाओं में अनुवाद कर रहे हैं, जिससे आम जनता के लिए कानूनी जानकारी अधिक सुलभ हो रही है। इस प्रयास को और अधिक सशक्‍त बनाने के लिए राष्‍ट्रीय न्‍यायिक डेटा ग्रि‍ड (NJDG) जो एक सांख्किीय एवं विश्‍लेषणात्‍मक मंच है, 340 मिलियन से अधिक अदालती आदेशों एवं उनसे सं‍बंधित जानकारियों के विशलेषण तक एक क्लिक में पहुंच प्रदान करता है। साथ ही, सरकार शिक्षाविदों के सहयोग से सरल और सहज विधायी प्रारूपण (ड्राफ्टिंग) को बढ़ावा दे रही है ताकि कानूनों को अधिक सरल और आम नागरिकों के अनुकूल बनाया जा सके। 

भारत में औपनिवेशिक दंड संहिता के स्‍थान पर नई आपराधिक न्याय प्रणाली को लागू करने से दाण्डिक व्‍यवस्‍था के स्‍थान पर न्‍यायिक व्‍यवस्‍था स्‍थापित हुई है। ई-कोर्ट, ई-प्रोसीक्‍यूशन, ई-प्रिजन और ई-फोरेंसिक को अपराध तथा आपराधिक ट्रैकिंग नेटवर्क और सिस्टम (CCTNS) के साथ जोड़ना भी एक महत्वपूर्ण परिवर्तनकारी कदम है। ‘न्याय श्रुति’ प्लेटफॉर्म ने वर्चुअल उपस्थिति और गवाहों के बयानों को रिकॉर्ड करने की प्रक्रिया को इतनी कुशलता से सुगम बनाया है कि जब कोई अदालत किसी नागरिक को जमानत देती है, तो डिजिटल जमानत आदेश तुरंत जेल पोर्टल पर पहुंच जाता है जिससे कागजी कार्रवाई और प्रशासनिक देरी समाप्त हो जाती है, जो पारंपरिक रूप से समय पर रिहाई में बाधा डालती थी। यह वास्तविक समय में केस डेटा के आदान-प्रदान को सक्षम बनाता है और एक अंतर-संचालनीय आपराधिक न्याय प्रणाली (ICJS) का मार्ग प्रशस्त करता है। 

उच्च न्यायपालिका की आवश्यकताओं को ध्‍यान में रखते हुए भी सार्थक उपाय किए गए हैं। उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या वर्ष 2014 के 906 से बढ़कर 1122 हो गई है। उच्‍चतम न्यायालय में न्‍यायाधीशों की संख्‍या भी 31 थी जिसे वर्ष 2019 में बढ़ाकर 34 कर दिया गया है तथा उच्‍चतम न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अध्यादेश, 2026 के माध्यम से इसे बढ़ाकर 38 कर दिया गया है। पिछले 12 वर्षों में देश के उच्च न्यायालयों में सामाजिक रूप से विविध पृष्ठभूमि वाले 1175 न्यायाधीशों की तथा  उच्‍चतम न्यायालय में 77 न्यायाधीशों की नियुक्ति न्यायिक व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए कार्यपालिका और न्‍यायपालिका के समन्वित प्रयासों को दर्शाती है। 

यह स्पष्ट है कि अनावश्यक कानूनों की जटिलता संबंधित पक्षों पर अनावश्‍यक बोझ डालती है। 40,000 से अधिक अनावश्‍यक अनुपालनों (Compliances) को समाप्‍त करने तथा औपनिवेशिक युग के 1725 निरर्थक और अप्रचलित कानूनों को निरस्त करने से विभिन्न क्षेत्रों में ईज ऑफ डुइंग बिजनेस में उल्‍लेखनीय सुधार हुआ है। साथ ही, आर्बिट्रेशन संबंधी कानूनों को सुदृढ़ करना, इंडिया इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन सेंटर जैसी संस्‍थाओं की स्‍थापना तथा मेडिएशन एक्‍ट 2023 के माध्‍यम से वैकल्पिक विवाद समाधान (ADR) को बढ़ावा देना तथा इस क्षेत्र में भारत के वैश्विक नेतृत्व को दर्शाता है।

वर्तमान में जबकि विश्‍व जटिल भू-राजनीतिक परिवर्तनों और आर्थिक अनिश्चितताओं से गुजर रहा है, भारत के विधिक और राजनयिक नेतृत्‍व ने BRICS देशों के न्‍यायमंत्रियों की बैठक, 2026 के दौरान मेडिएशन और आर्बिट्रेशन को विवाद समाधान के लिए अधिक प्रभावी और सुलभ माध्‍यम के रूप में स्‍थापित करने हेतु एक सामूहिक प्रतिबद्धता के रूप में गांधीनगर घोषणा पत्र को अपनाने में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाई। ऐसे वैश्विक सहयोगों का उद्देश्‍य न्‍यायालयों में लंबित मामलों की संख्‍या को कम करना, व्‍यापार और निवेश के लिए स्थिर एवं सुविचारित परिवेश को सृजित करने पर अत्‍यधिक बल देना तथा अनावश्‍यक मुकदमेबाजी से बचना है। 

ये सभी पहलें एक साझा दृष्टिकोण को प्रतिबिंबित करती हैं और यह सुनिश्चित करती हैं कि न्याय प्राप्‍त करने की इच्‍छा रखने वाले प्रत्‍येक व्‍यक्ति को एक जवाबदेह, सुलभ और सहयोगी शासन व्‍यवस्‍था प्राप्‍त हो। जैसे-जैसे हमारा देश माननीय प्रधानमंत्री द्वारा परिकल्पित विकसित भारत @2047 की यात्रा पर आगे बढ़ रहा है, हम एक ऐसे भावी न्‍याय प्रणाली के निर्माण के प्रति दृढ़ संकल्पित हैं जो लचीली, नवोन्‍मेषी, समावेशी और 140 करोड़ भारतीयों की सामूहिक आकांक्षाओं से प्रेरित हो।

(लेखक भारत सरकार में केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), और संसदीय मामलों के राज्य मंत्री हैं)

जल शक्ति: विकसित भारत की यात्रा को दे रही है गति : सीआर पाटिल

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

क्या आप जानते हैं कि जल जीवन मिशन दुनिया का सबसे बड़ा ग्रामीण पेयजल आपूर्ति कार्यक्रम है? या फिर स्वच्छ भारत मिशन दुनिया का सबसे बड़ा ग्रामीण स्वच्छता अभियान है, जिसने लोगों की सोच और व्यवहार में अभूतपूर्व बदलाव लाया है? और क्या आपको पता है कि नमामि गंगे आज दुनिया की सबसे महत्वाकांक्षी नदी पुनर्जीवन योजनाओं में शामिल है?

ये सभी पहल केवल सरकारी योजनाएं नहीं हैं, बल्कि इस बात का उदाहरण हैं कि 145 करोड़ आबादी वाला भारत किस तरह पानी की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए विकसित भारत की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

जब इतिहासकार भारत की विकास यात्रा को देखेंगे, तो संभव है कि वे पिछले 12 वर्षों को वह दौर बताएं, जब ‘जल’ देश के विकास का सबसे महत्वपूर्ण विषय बन गया। मानव सम्मान, आर्थिक विकास, जनस्वास्थ्य, कृषि और पर्यावरण संरक्षण पर पानी जितना प्रभाव डालता है, उतना शायद ही कोई दूसरा क्षेत्र डालता हो। लेकिन कई दशकों तक भारत में जल संबंधी समस्याओं का समाधान अलग-अलग और बिखरे हुए तरीकों से किया जाता रहा। पिछले कुछ वर्षों में सबसे बड़ा बदलाव यह आया है कि इन चुनौतियों से निपटने के लिए एकीकृत, गंभीर और दूरदर्शी दृष्टिकोण अपनाया गया, जिसका नेतृत्व स्वयं प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने किया।

पिछले 12 वर्षों में जल क्षेत्र में जितने बड़े पैमाने पर निवेश और काम हुआ है, वैसा पहले कभी नहीं देखा गया। लेकिन इस बदलाव की अहमियत केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है। आज पानी को पूरे देश की साझा प्राथमिकता माना जा रहा है, जिसमें सभी विभाग, राज्य, समुदाय और आने वाली पीढ़ियाँ भागीदार हैं। पहले जल क्षेत्र को उतनी प्राथमिकता नहीं मिलती थी, लेकिन प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार ने जल क्षेत्र की योजना, प्रबंधन और सेवाओं से जुड़ी वर्षों पुरानी कमियों को दूर करने की जिम्मेदारी उठाई।

इस बदलाव का सबसे बड़ा उदाहरण जल जीवन मिशन है। जब यह मिशन शुरू हुआ था, तब केवल लगभग 3.23 करोड़ ग्रामीण परिवारों, यानी करीब 17 प्रतिशत ग्रामीण घरों में ही नल से जल की सुविधा थी। आज 15.8 करोड़ से अधिक ग्रामीण परिवारों, यानी 81 प्रतिशत से ज्यादा ग्रामीण घरों तक नल से पानी पहुँच चुका है। सरकार का लक्ष्य 2028 तक 100 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों को यह सुविधा उपलब्ध कराना है। लाखों परिवारों, खासकर महिलाओं और बच्चों के लिए यह केवल पानी की सुविधा नहीं है, बल्कि उनके जीवन में आया एक बड़ा बदलाव है।

अध्ययनों के अनुसार, पहले भारत की ग्रामीण महिलाओं को हर साल पानी लाने में अरबों घंटे खर्च करने पड़ते थे। अब घर-घर नल से पानी पहुंचने के कारण हर दिन 5.5 करोड़ से अधिक व्यक्ति-घंटों की बचत हो रही है। जो समय पहले पानी लाने में लगता था, अब उसका उपयोग पढ़ाई, रोजगार, बच्चों की देखभाल और आय बढ़ाने वाले कामों में हो रहा है। साथ ही, सुरक्षित पेयजल मिलने से पानी से फैलने वाली बीमारियाँ कम हुई हैं, जिससे लोगों का इलाज पर होने वाला खर्च भी घटा है। इसी तरह स्वच्छ भारत मिशन ने भी देश में बड़ा बदलाव लाया है। इस अभियान ने दिखाया कि लोगों की सोच में बदलाव, जनभागीदारी और मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति मिलकर बड़े स्तर पर परिवर्तन ला सकती है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के आकलन के अनुसार, स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) की वजह से 2014 से अक्टूबर 2019 के बीच दस्त से होने वाली 3 लाख से अधिक मौतों को रोका जा सका। घर-घर शौचालय बनने से करोड़ों ग्रामीण महिलाओं को सम्मान, निजता और सुरक्षा मिली। इस तरह स्वच्छता केवल एक सुविधा नहीं रही, बल्कि जनस्वास्थ्य और सामाजिक सम्मान का एक बड़ा जनआंदोलन बन गई। गांवों को खुले में शौच से मुक्त बनाने के बाद अब देश स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) 2.0 के तहत ठोस और तरल कचरे के वैज्ञानिक एवं टिकाऊ प्रबंधन की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

भारत ने जल संरक्षण और भूजल रिचार्ज के क्षेत्र में भी दुनिया के सबसे बड़े अभियानों में से एक चलाया है। 6 सितंबर 2024 को प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने सूरत से “जल संचय जन भागीदारी” अभियान की शुरुआत की थी। इसके तहत 31 मई 2026 तक देशभर में 1.55 करोड़
से अधिक वर्षा जल संचयन और भूजल रिचार्ज संरचनाओं का निर्माण किया जा चुका है। यह अभियान दिखाता है कि जल संरक्षण में लोगों की भागीदारी और सामूहिक प्रयास कितने प्रभावी हो सकते हैं।

इन प्रयासों का सकारात्मक असर अब भूजल की स्थिति में भी दिखाई देने लगा है। हाल के आकलनों के अनुसार, देश के कई हिस्सों में भूजल का स्तर बेहतर हुआ है और जिन क्षेत्रों में भूजल का अत्यधिक दोहन हो रहा था, उनकी संख्या में भी कमी आई है। यह इस बात का
प्रमाण है कि लगातार किए गए जल संरक्षण के प्रयास और जनभागीदारी मिलकर पर्यावरण पर बढ़ते दबाव को भी कम कर सकते हैं।

साथ ही, भारत ने लंबे समय से लंबित राष्ट्रीय जल परियोजनाओं को भी तेज़ी से आगे बढ़ाया है। देश की पहली बड़ी नदी जोड़ो परियोजना, केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना, तेजी से आगे बढ़ रही है। इसका उद्देश्य बुंदेलखंड के सूखा प्रभावित क्षेत्रों तक पानी पहुंचाना है। इसके अलावा, राज्यों के भीतर नदियों को जोड़ने की कई परियोजनाओं में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में नमामि गंगे कार्यक्रम ने यह साबित किया है कि पर्यावरण संरक्षण और विकास साथ-साथ आगे बढ़ सकते हैं।

पिछले एक दशक में 4,260 मिलियन लीटर प्रतिदिन(एमएलडी) सीवेज शोधन क्षमता विकसित की गई है। अत्यधिक प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों से निकलने वाला जैविक प्रदूषण (बीओडी) 2017 में 26 टन प्रतिदिन से घटकर 2024 में 10.75 टन प्रतिदिन रह गया है। वहीं, उद्योगों से निकलने वाले गंदे पानी (एफ्लुएंट) का उत्सर्जन भी 349 एमएलडी से घटकर 265.56 एमएलडी हो गया है।

आज निगरानी के आंकड़े बताते हैं कि गंगा नदी में सभी निगरानी केंद्रों पर पानी का पीएच स्तर और घुली हुई ऑक्सीजन (डीओ) स्नान योग्य मानकों के अनुरूप है। इसके अलावा, देशव्यापी आकलन के अनुसार गंगा में लगभग 6,324 गंगा डॉल्फ़िन पाई गई हैं, जो नदी के बेहतर होते पर्यावरणीय स्वास्थ्य का संकेत है।

पिछले कुछ वर्षों में भारत की जल यात्रा दुनिया के लिए भी एक महत्वपूर्ण सीख बनकर सामने आई है। 21वीं सदी की जल संबंधी चुनौतियों का समाधान अलग-अलग प्रयासों से नहीं हो सकता। पेयजल, स्वच्छता, नदियों का संरक्षण, सिंचाई की बेहतर व्यवस्था, भूजल रिचार्ज, इस्तेमाल किए गए पानी का दोबारा उपयोग और जलवायु परिवर्तन से निपटने की तैयारी—इन सभी को एक-दूसरे से जुड़ी व्यवस्था के रूप में देखना होगा।

जलवायु परिवर्तन के दौर में यह समग्र दृष्टिकोण और भी ज़रूरी हो जाता है, क्योंकि दुनिया भर में जल संसाधनों पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। भारत के सामने यह चुनौती और भी बड़ी है। दुनिया की लगभग 18 प्रतिशत आबादी भारत में रहती है, लेकिन देश के पास दुनिया के कुल मीठे पानी के संसाधनों का केवल लगभग 4 प्रतिशत ही है।

तेज़ी से बढ़ता शहरीकरण, औद्योगिक विकास और बदलते मौसम के पैटर्न आने वाले वर्षों में इन जल संसाधनों पर और अधिक दबाव डालेंगे। इसलिए आज जल क्षेत्र में किया जा रहा निवेश केवल विकास पर होने वाला खर्च नहीं है, बल्कि देश को भविष्य की चुनौतियों के लिए मजबूत बनाने में किया जा रहा दीर्घकालिक निवेश है। पिछले एक दशक में मिली सफलता यह दिखाती है कि जब निस्वार्थ नेतृत्व, जवाबदेह शासन और जनता की सक्रिय भागीदारी एक साझा राष्ट्रीय लक्ष्य के लिए साथ आते हैं, तो बड़े और सकारात्मक बदलाव संभव हो जाते हैं।

जैसे-जैसे भारत विकसित भारत की ओर आगे बढ़ रहा है, जल उसकी विकास यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण आधार बना हुआ है। जल सुरक्षित भारत का मतलब केवल सभी को पर्याप्त पानी उपलब्ध कराना नहीं है। इसका अर्थ है महिलाओं का सम्मान, परिवारों का बेहतर स्वास्थ्य, किसानों की अधिक उत्पादकता, शहरों का टिकाऊ विकास और आने वाली पीढ़ियों के लिए पर्यावरण का संतुलन बनाए रखना।

पिछले 12 वर्षों में भारत के जल क्षेत्र में जो बड़ा बदलाव आया है, वह प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व का प्रमाण है। उनके संकल्प ने पानी को केवल एक विकास संबंधी चुनौती नहीं रहने दिया, बल्कि उसे राष्ट्र निर्माण और विकसित भारत का एक मजबूत माध्यम बना दिया।

आगे की राह में लगातार प्रयास करना आवश्यक होगा। इसमें तकनीक, आंकड़ों और नवाचार की बड़ी भूमिका रहेगी। हमारा लक्ष्य सभी क्षेत्रों में पानी के बेहतर और कुशल उपयोग को बढ़ावा देना, इस्तेमाल किए गए पानी का पुनः उपयोग और पुनर्चक्रण बढ़ाना, स्थानीय स्तर पर जल प्रबंधन को मजबूत करना और जल संरक्षण में आम नागरिकों की भागीदारी बढ़ाना है।

(लेखक भारत सरकार में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री हैं।)

SIR-2026 के तहत बूथ लेवल एजेंट्स की हुई ट्रेनिंग

चुनाव प्रक्रिया को ट्रांसपेरेंट और फेयर बनाने के लिए पॉलिटिकल पार्टियों के सहयोग की ज़रूरत:- एडिशनल डिस्ट्रिक्ट इलेक्शन ऑफिसर शिखा भगत

लुधियाना / सत्ता संदेश

एडिशनल डिप्टी कमिश्नर-कम-एडिशनल डिस्ट्रिक्ट इलेक्शन ऑफिसर लुधियाना शिखा भगत ने बताया कि इलेक्शन कमीशन ऑफ़ इंडिया की गाइडलाइंस के मुताबिक, स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR)-2026 के तहत ज़िला लुधियाना के अलग-अलग असेंबली इलाकों के अलग-अलग पॉलिटिकल पार्टियों द्वारा नॉमिनेटेड बूथ लेवल एजेंट्स (BLAs) की ट्रेनिंग 20 और 21 जून को हुई।

यह ट्रेनिंग सेशन ज़िला लुधियाना के अलग-अलग असेंबली इलाकों के इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर्स ने लीड किया।

ट्रेनिंग के दौरान, बूथ लेवल एजेंट्स (BLAs) को स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन 2026 के पूरे प्रोग्राम, इलेक्शन कमीशन की तरफ से जारी इंस्ट्रक्शन्स और वोटर लिस्ट की एक्यूरेसी पक्का करने के बारे में डिटेल में जानकारी दी गई।

एडिशनल डिस्ट्रिक्ट इलेक्शन ऑफिसर शिखा भगत ने कहा कि इलेक्शन कमीशन ऑफ़ इंडिया वोटर लिस्ट को ज़्यादा सही, ट्रांसपेरेंट और अपडेटेड बनाने के लिए SIR कैंपेन चला रहा है। इस कैंपेन को सफल बनाने के लिए बूथ लेवल एजेंट्स की भूमिका बहुत ज़रूरी है, क्योंकि वे पॉलिटिकल पार्टियों और इलेक्शन एडमिनिस्ट्रेशन के बीच एक अहम कड़ी का काम करते हैं।

उन्होंने कहा कि 25 जून 2026 से बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLOs) घर-घर जाकर वोटर्स को काउंटिंग फॉर्म बांटेंगे। इस दौरान, BLA, BLOs के साथ मिलकर यह पक्का करेंगे कि फॉर्म हर एलिजिबल वोटर तक पहुंचे और वोटर लिस्ट में कोई भी गलती या गलती समय पर ठीक हो जाए।

ट्रेनिंग के दौरान, BLOs को एन्यूमरेशन फॉर्म भरने के प्रोसेस के बारे में डिटेल में जानकारी दी गई और वोटर रजिस्ट्रेशन, नाम जोड़ने, करेक्शन और दूसरे इलेक्शन प्रोसेस के बारे में प्रैक्टिकल जानकारी भी दी गई। ऑफिसर्स ने पार्टिसिपेंट्स के सवालों के जवाब दिए और उनके डाउट्स दूर किए।

इस मौके पर BLOs को SIR-2026 से जुड़ी किट भी बांटी गई हैं और 25 जून से गिनती के फॉर्म बांटने का काम शुरू किया जाएगा।

एडिशनल डिप्टी कमिश्नर शिखा भगत ने सभी पॉलिटिकल पार्टियों, बूथ लेवल एजेंट्स (BLAs) और आम जनता से अपील की कि वे चुनाव आयोग के इस ज़रूरी कैंपेन में बढ़-चढ़कर सहयोग करें, ताकि हर योग्य नागरिक का नाम वोटर लिस्ट में रजिस्टर हो सके और डेमोक्रेटिक प्रोसेस को और मज़बूत किया जा सके।

3 पंजाब बटालियन एनसीसी द्वारा अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 के अवसर पर विभिन्न शिक्षण संस्थानों में सामूहिक योग सत्रों का आयोजन

लुधियाना / सत्ता संदेश

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 के अवसर पर 3 पंजाब बटालियन एनसीसी, लुधियाना द्वारा अपने कार्यक्षेत्र के विभिन्न शिक्षण संस्थानों में बड़े पैमाने पर योग सत्रों का आयोजन किया गया, जिसका उद्देश्य युवाओं में स्वास्थ्य, फिटनेस एवं समग्र कल्याण को बढ़ावा देना था।

मुख्य कार्यक्रम गुरु नानक देव इंजीनियरिंग कॉलेज, लुधियाना में आयोजित किया गया, जिसमें 530 एनसीसी कैडेटों ने उत्साहपूर्वक सामूहिक योग सत्र में भाग लिया। यह कार्यक्रम कर्नल अजय कोहली, कमांडिंग ऑफिसर, 3 पंजाब बटालियन एनसीसी, लुधियाना के संरक्षण में आयोजित किया गया, जिसमें कर्नल जे.पी. शर्मा, प्रशासनिक अधिकारी तथा सूबेदार मेजर कर्नैल सिंह भी उपस्थित रहे।

कैडेटों को संबोधित करते हुए कर्नल अजय कोहली ने शारीरिक फिटनेस, मानसिक दृढ़ता तथा भावनात्मक संतुलन बनाए रखने हेतु योग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि योग भारत की विश्व को अमूल्य देन है तथा अनुशासित एवं स्वस्थ नाकों के निर्माण में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है।

मुख्य कार्यक्रम के अतिरिक्त सात अन्य स्थानों पर भी योग सत्रों का एक साथ आयोजन किया गया, जिनमें कुल 1,288 एनसीसी कैडेटों ने भाग लिया। प्रशिक्षित प्रशिक्षकों एवं एनसीसी स्टाफ के मार्गदर्शन में कैडेटों ने विभिन्न योगासन एवं प्राणायाम का अभ्यास किया।

यह कार्यक्रम युवाओं में स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने तथा योग के लाभों के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए एनसीसी की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। कार्यक्रम का समापन कैडेटों द्वारा नियमित रूप से योग करने तथा अन्य लोगों को भी स्वस्थ एवं सक्रिय जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करने की शपथ के साथ हुआ

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर 460 एनसीसी कैडेटों ने किया योगाभ्यास

लुधियाना / सत्ता संदेश

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर 3 पंजाब गर्ल्स बटालियन एनसीसी, लुधियाना द्वारा विभिन्न एनसीसी संस्थानों में विशेष योग सत्रों का आयोजन किया गया। इस अवसर पर कुल 460 एनसीसी कैडेटों ने भाग लेकर योग के माध्यम से स्वस्थ जीवनशैली का संदेश दिया।


प्रातः 7:00 बजे आरम्भ हुए कार्यक्रम के दौरान कैडेटों ने प्रशिक्षित योग प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन में विभिन्न योगासन, प्राणायाम एवं ध्यान अभ्यास किए। योग के शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य संबंधी लाभों के बारे में भी जानकारी प्रदान की गई।


इस अवसर पर 3 पंजाब गर्ल्स बटालियन एनसीसी के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल आर. एस. चौहान ने कैडेटों का उच्च मनोबल, अनुशासन एवं उत्साह देखकर उन्हें प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि योग न केवल शरीर को स्वस्थ एवं सुदृढ़ बनाता है, बल्कि मन को भी शांत, संतुलित एवं एकाग्र बनाता है।

उन्होंने कैडेटों को अपने दैनिक जीवन में योग को अपनाने तथा स्वस्थ समाज के निर्माण में योगदान देने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम के दौरान कैडेटों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया तथा “एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य के लिए योग” के संदेश को आगे बढ़ाया। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने नियमित रूप से योग करने का संकल्प लिया।