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थाना जमालपुर का मुंडियां इलाका बना चोरों का टारगेट प्वाइंट

लुधियाना / जमालपुर / सत्ता संदेश

रिपोर्ट : संजय भाटिया

  • 33 फुट रोड़ में शनीवार सुबह 15 मिनट में 3 दुकानों के शटर के ताले तोड़ कर चोरी।
  • शिकायत के दो दिन बीत जाने के बाद भी नही पहुँची पुलिस : पीड़ित दुकानदार

ऐसा लगता है कि थाना जमालपुर के इलाके में चोरी और लूटपाट की वारदातें जैसे आम बात हो गयी हो। आये दिन चोरी, लूटपाट, लड़ाई झगडे से इलाका निवासियों में डर का माहौल बना हुआ है। ऐसा ही एक और मामला 33 फुट रोड, सिकन्दर कालोनी, मुंडियां इलाके का सामने आया है। जहाँ शनिवार सुबह करीब 4: 40 बजे स्पलेंडर मोटरसाइकिल पर आए दो नोजवानों ने तीन दुकानों में चोरी की वारदात को अंजाम दिया। तीनो दुकानदारों ने पुलिस की ढीली कार्रवाई पर सवाल उठाए है। उनका कहना है कि शिकायत के दो दिन बीत जाने के बाद भी कोई भी पुलिस मुलाज़िम मौका तक देखने नहीं आया। एक दुकानदार को तो पुलिस ने सेक्युरिटी गार्ड रखने की सलाह भी दे डाली। दुकानदारों का कहना है कि इलाके में पुलिस की गश्त न के बराबर है। इसी कारण इलाके में ऐसी वारदातें लगातार हो रही है।

जानकारी देते हुए सैनी बाइक प्वाइंट के मालिक संतोख सिंह ने बताया कि उनकी टू- व्हीलर की सर्विस की दुकान है । हालांकि उसके सामने उनका घर भी है। जब वो सुबह 6 बजे उठे तो उनको चोरी का पता चला। उनकी दुकान के ताले टूटे हुए थे। संतोख सिंह के मुताबिक उनकी दुकान में करीब सवा लाख रुपए नकद पड़े थे जो कि चोरी हो गए।

दूसरी वारदात सैनी बाइक प्वाइंट के बिल्कुल साथ ग्लैमर ब्यूटी पार्लर में हुई। दुकान मालिक संजीव ने बताया कि चोरों ने शटर का ताला तोड़कर उनके गल्ले से करीब 9 से 10 हज़ार रुपये चुरा लिए।

तीसरी वारदात कुछ कदम की दूरी पर श्री राम करियाना स्टोर में हुई। जहां पर चोरों ने शटर का ताला तोड़कर दुकान में पड़ी मंदिर की गोलक को चोरी किया। दुकानदार करन के मुताबिक उसकी दुकान में मंदिर की गोलक पड़ी थी । जिसमे करीब 7 हज़ार रुपये थे। करन का कहना है कि जब उन्होंने इस मामले में मुंडियां चौकी में शिकायत दी तो पुलिस मुलाजिम मौका देखने तो।नही आये उल्टा उन्होंने सिक्युरिटी गार्ड रखने के सलाह दे डाली।

तीनों वरदात की सीसीटीवी फुटेज सामने आई है। तीनो दुकानो में कैमरे लगे थे। वारदात का समय शनिवार सुबह करीब 4:40 बताया जा रहा है। करीब 15 मिनट में तीनों दुकानों में चोरी की वारदात को अंजाम दिया गया। वारदात कैमरे में कैद हो गयी। फुटेज में दो चोर स्प्लेंडर मोटरसाइकिल पर आते नज़र आये। जिसमे पास लोहे की सब्बल थी। जिससे चोरों ने एक एक करके तीनों दुकानो को निशाना बनाया।

उक्त घटना के आसपास के लोग दहशत में है। आस पास के लोगों को दुकानदारों का कहना है कि इलाके में पुलिस की गश्त नही है। जिससे चोरों के होंसले बुलंद है। इस इलाके में पहले भी कई बार वारदातें हुई है। पुलिस इनपर ठल पाने में नाकाम साबित हो रही है।

थाना जमालपुर के एस.एच.ओ. प्रमोद राज ने बताया कि उक्त मामले में शिकायत दर्ज हुई है। आस पास की फुटेज खंगाली जा रही है।

सीएम योगी और केंद्रीय मंत्री ने लखनऊ में नए क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र का किया उद्घाटन

लखनऊ/ सत्ता संदेश

केन्द्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी एवं पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ के साथ लखनऊ में नए क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र (आरएमसी) का शुभारंभ किया। इस अवसर पर श्री सिंह ने कहा कि पिछले एक दशक में भारत के मौसम विज्ञान संबंधी बुनियादी ढांचे में अभूतपूर्व विस्तार हुआ है, जिससे देश भर में अधिक सटीक, स्थान-विशिष्ट और प्रभाव-आधारित मौसम पूर्वानुमान सेवाएं संभव हो पाई हैं।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले दशक में मौसम पूर्वानुमान और अवलोकन प्रणालियों में प्राप्त की गई प्रगति ने नागरिकों, आपदा प्रबंधन एजेंसियों, किसानों, पर्यटकों और विमानन क्षेत्र को मौसम सेवाएं प्रदान करने के तरीके को बदल दिया है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि वर्ष 2014 में भारत में केवल 17 डॉप्लर मौसम रडार थे, जबकि जम्मू-कश्मीर, पंजाब और उत्तराखंड सहित कई राज्यों में एक भी रडार नहीं था। उन्होंने जानकारी दी कि अब यह नेटवर्क बढ़कर 50 डॉप्लर मौसम रडार तक पहुंच गया है और मिशन मौसम के अंतर्गत 50 और रडार प्रस्तावित हैं, जिससे अगले दो वर्षों में कुल संख्या लगभग 100 हो जाएगी। इस विस्तार से पूरे देश में वास्तविक समय में मौसम की निगरानी और पूर्वानुमान की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने मौसम पूर्वानुमान सेवाओं में हुई प्रगति पर कहा कि मौसम पूर्वानुमान व्यापक क्षेत्रीय पूर्वानुमानों से विकसित होकर अब अत्यधिक स्थानीय और समय-विशिष्ट पूर्वानुमानों तक पहुंच गया है। अब नागरिक अगले कुछ घंटों की मौसम स्थितियों सहित सटीक अल्पकालिक पूर्वानुमान प्राप्त कर सकते हैं, जिससे बेहतर योजना बनाने और तैयारी करने में मदद मिलेगी। मौसम पूर्वानुमानों पर जनता का बढ़ता विश्वास अवलोकन नेटवर्क, पूर्वानुमान मॉडल और प्रसार प्रणालियों में किए गए महत्वपूर्ण सुधारों का परिणाम है।

उत्तर प्रदेश का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि राज्य की भौगोलिक विविधता और जलवायु परिवर्तनशीलता इसे उन्नत मौसम विज्ञान सेवाओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में से एक बनाती है। उत्तर प्रदेश बाढ़, सूखा, लू, आंधी-तूफान और अन्य चरम मौसम घटनाओं के प्रति अत्यधिक संवेदनशील है, इसलिए जन सुरक्षा और आपदा तैयारियों के लिए समय पर पूर्वानुमान और चेतावनी प्रणाली अत्यंत महत्वपूर्ण है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने पिछले एक दशक में उत्तर प्रदेश में मौसम विज्ञान संबंधी बुनियादी ढांचे में हुई उल्लेखनीय वृद्धि पर कहा कि जहां वर्ष 2014 में राज्य में केवल एक डॉप्लर मौसम रडार था, अब इनकी संख्या बढ़कर तीन हो गई हैं और कई अन्य चालू किए जा रहे हैं। राज्य में स्वचालित मौसम स्टेशनों की संख्या 59 से बढ़कर 107 हो गई है, स्वचालित वर्षामापी स्टेशनों की संख्या 132 से बढ़कर 140 हो गई है और बिजली गिरने के सेंसरों की संख्या 0 से बढ़कर 7 हो गई है। राज्य में विमानन बुनियादी ढांचे के बढ़ते विस्तार को दर्शाते हुए, अब उत्तर प्रदेश के ग्यारह हवाई अड्डों पर विमानन मौसम विज्ञान सेवाएं प्रदान की जा रही हैं।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने उत्तराखंड में मौसम विज्ञान सेवाओं के महत्वपूर्ण विस्तार पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि बाढ़, बादल फटने, भूस्खलन और हिमस्खलन जैसी आपदाओं के प्रति संवेदनशील होने के बावजूद, राज्य में पहले कोई डॉप्लर मौसम रडार नहीं था। आज, ऐसे तीन रडार स्थापित किए जा चुके हैं और ‘मिशन मौसम’ के तहत अतिरिक्त प्रणालियों की योजना बनाई जा रही है। स्वचालित मौसम स्टेशनों, हवाईअड्डे मौसम वेधशालाओं और बिजली गिरने का पता लगाने वाली प्रणालियों की संख्या में भी काफी वृद्धि हुई है, जिससे हिमालयी क्षेत्र में मौसम की निगरानी क्षमता मजबूत हुई है।

लखनऊ में नव घोषित क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र के महत्व पर डॉ. सिंह ने कहा कि यह केंद्र मौसम विज्ञान सेवाओं के विकेंद्रीकरण और क्षेत्रीय पूर्वानुमान क्षमताओं को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह केंद्र उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और आसपास के क्षेत्रों की जरूरतों को पूरा करेगा, जिससे मौसम संबंधी जानकारी की अधिक केंद्रित निगरानी, ​​पूर्वानुमान और प्रसार संभव हो सकेगा। राज्य सरकार के सहयोग से उन्नत डॉप्लर मौसम रडार और पवन प्रोफाइलर प्रणालियों सहित समर्पित बुनियादी ढांचे के विकास की योजनाएं चल रही हैं।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि बेहतर पूर्वानुमान प्रणालियां अचानक आने वाली बाढ़, बादल फटने, आंधी-तूफान, बिजली गिरने, हिमस्खलन और अन्य चरम मौसम संबंधी घटनाओं की अग्रिम चेतावनी प्रदान करके आपदा जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। उन्होंने  कहा कि पूर्वानुमान की सटीकता में काफी सुधार हुआ है, लेकिन मौसम सेवाओं की प्रभावशीलता अंततः स्थानीय प्रशासन द्वारा समय पर की गई कार्रवाई और मौसम विज्ञान एजेंसियों द्वारा जारी सलाह और चेतावनियों का जनता द्वारा पालन करने पर निर्भर करती है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने नागरिकों, स्थानीय अधिकारियों और आपदा प्रबंधन एजेंसियों से मौसम पूर्वानुमानों का पूरा उपयोग करने और विभिन्न डिजिटल प्लेटफार्मों के माध्यम से उपलब्ध प्रारंभिक चेतावनियों को गंभीरता से लेने का आग्रह किया। मौसम संबंधी जानकारी अब जिलों, स्थानीय प्रशासनों और पंचायतों तक वास्तविक समय में पहुंच रही है और इसे योजना और निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में शामिल किया जाना चाहिए।

लखनऊ में क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र की घोषणा भारत की मौसम एवं जलवायु सेवाओं की संरचना को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उम्मीद है कि यह केंद्र पूर्वानुमान क्षमताओं को बढ़ाएगा, मौसम संबंधी सलाहों के प्रसार में सुधार करेगा और पूरे क्षेत्र में आपदा प्रबंधन, कृषि, विमानन और सार्वजनिक सुरक्षा को सहयोग प्रदान करेगा।

महबूबनगर–सिकंदराबाद–मेडचल रेल सेक्शन पर बिजली व्यवस्था होगी और मजबूत

दिल्ली / सत्ता संदेश

भारतीय रेल ने दक्षिण मध्य रेलवे के महबूबनगर–सिकंदराबाद–मेडचल रेल सेक्शन पर रेल संचालन को और अधिक सक्षम बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण परियोजना को मंजूरी दी है। इसके तहत मौजूदा 1×25 केवी इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन सिस्टम को आधुनिक 2×25 केवी सिस्टम में अपग्रेड किया जाएगा। लगभग 141 किलोमीटर लंबे इस रेल सेक्शन पर यह कार्य ₹285.01 करोड़ की लागत से किया जाएगा।

यह परियोजना भारतीय रेल के उन प्रयासों का हिस्सा है, जिनके तहत देश के व्यस्त रेल मार्गों की क्षमता बढ़ाई जा रही है। 2×25 केवी सिस्टम लागू होने से ट्रेनों को अधिक स्थिर और बेहतर बिजली आपूर्ति मिलेगी, जिससे रेल संचालन और अधिक सुचारु, सुरक्षित एवं विश्वसनीय बनेगा।

महबूबनगर–सिकंदराबाद–मेडचल रेल सेक्शन देश के महत्वपूर्ण हाई डेंसिटी नेटवर्क मार्गों में शामिल है। यह धर्मवरम–डोन–महबूबनगर–सिकंदराबाद–मेडचल–मुदखेड़–इंदौर–अजमेर रेल कॉरिडोर का हिस्सा है, जहां बड़ी संख्या में यात्री और मालगाड़ियां संचालित होती हैं।

परियोजना पूरी होने के बाद इस मार्ग पर ट्रेनों के संचालन में और सुधार होगा। मालगाड़ियों की आवाजाही अधिक सुगम होगी, जिससे माल परिवहन की गति और क्षमता दोनों बढ़ेंगी। इसके साथ ही क्षेत्र में व्यापार, उद्योग और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।

यह परियोजना भारतीय रेल के आधुनिक और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप रेल नेटवर्क विकसित करने के संकल्प को और मजबूत करेगी तथा यात्रियों और उद्योग जगत दोनों को इसका लाभ मिलेगा।

जल्दी इंसाफ पाने के लिए परमानेंट लोक अदालत का फायदा उठाएं : हरप्रीत कौर रंधावा

लुधियाना / सत्ता संदेश

डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज-कम-चेयरपर्सन, डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विसेज़ अथॉरिटी, लुधियाना मैडम हरप्रीत कौर रंधावा ने परमानेंट लोक अदालतों का ज़्यादा से ज़्यादा फायदा उठाने पर ज़ोर दिया।

डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज रंधावा ने कहा कि पंजाब स्टेट लीगल सर्विसेज़ अथॉरिटी, SAS नगर के निर्देशों के अनुसार, लीगल सर्विसेज़ अथॉरिटीज़, 1987 के सेक्शन 22-B के तहत डिस्ट्रिक्ट लेवल पर परमानेंट लोक अदालतें (पब्लिक यूटिलिटी सर्विसेज़) बनाई गई हैं। उन्होंने कहा कि लीगल सर्विसेज़ अथॉरिटीज़ अमेंडमेंट एक्ट, 2002 के अनुसार, डिस्ट्रिक्ट लेवल पर परमानेंट लोक अदालतें (पब्लिक यूटिलिटी सर्विसेज़) बनाई गई हैं, जबकि परमानेंट लोक अदालतों (पब्लिक यूटिलिटी सर्विसेज़) में 01 चेयरपर्सन और 02 मेंबर होते हैं।

उन्होंने आगे बताया कि इस लोक अदालत में जनोपयोगी सेवाओं से संबंधित प्री-लिटिगेटिव केस (वे केस जो न्यायालयों में लंबित नहीं हैं) का फैसला किया जाता है। इस स्थायी लोक अदालत में जनोपयोगी सेवाओं जैसे परिवहन सेवाएं, डाक, टेलीफोन सेवाएं, बिजली सेवाओं से संबंधित मामले, पानी से संबंधित मामले, प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा या सफाई से संबंधित मामले, अस्पताल या डिस्पेंसरी में सेवाओं से संबंधित मामले, बीमा सेवाएं, बैंकिंग सेवाएं, आवास सेवाएं, वित्त सेवाएं, शिक्षा का प्रावधान एवं संबंधित मामले, नए कनेक्शन, आपूर्ति, एलपीजी रीफिलिंग एवं संबंधित मामले, आधार कार्ड, राशन कार्ड, मतदाता पहचान पत्र एवं बीपीएल कार्ड जारी करना, वृद्धावस्था पेंशन, विधवा योजना, शगुन योजना एवं बेरोजगारी भत्ता सेवाओं से संबंधित मामले, जनवितरण सेवाएं, जन्म एवं मृत्यु के पंजीकरण से संबंधित सेवाएं आदि का निपटारा किया जाता है।

उपर्युक्त सेवाओं से संबंधित ऐसे विवाद, शिकायत, विवाद जो न्यायालयों में लंबित नहीं हैं, उन्हें सादे कागज पर लिखित रूप में स्थायी लोक अदालत (जनोपयोगी सेवाएं) के अध्यक्ष के समक्ष दायर करना होगा तथा 5 लाख रुपये तक के विवाद/मामले इस लोक अदालत में 01 करोड़ तक के केस फाइल किए जा सकते हैं।

डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विसेज़ अथॉरिटी, लुधियाना की चेयरपर्सन मैडम हरप्रीत कौर रंधावा ने आम लोगों से अपील की कि वे ऊपर बताई गई कैटेगरी में आने वाले अपने केस परमानेंट लोक अदालत (पब्लिक यूटिलिटी सर्विसेज़) में फाइल करें। लोक अदालत में जल्दी और सस्ता इंसाफ मिलता है और इसके फैसले को सिविल कोर्ट का आदेश माना जाता है। परमानेंट लोक अदालत में केस फाइल करने के लिए कोई कोर्ट फीस नहीं लगती और इसके फैसले के खिलाफ कोई अपील नहीं होती। ज़्यादा जानकारी के लिए 15100 पर भी संपर्क किया जा सकता है।

‘माई किचन स्कीम’ के तहत MLA छीना ने लोगों को 11 KV फीडर समर्पित किया
  • कहा! अब इलाके के लोगों को बिना रुकावट बिजली सप्लाई मिलेगी

लुधियाना / सत्ता संदेश

लुधियाना साउथ विधानसभा क्षेत्र में विकास कार्यों को और मजबूत करते हुए, सोमवार को MLA राजिंदरपाल कौर छीना ने जनता नगर यूनिट नंबर-3 के तहत नए 11 KV “शिव शक्ति फीडर” का उद्घाटन किया।

लगभग 45 लाख रुपये की लागत से तैयार यह फीडर 66 KV सिंगला साइकिल ग्रिड से चलेगा। इस प्रोजेक्ट के शुरू होने से अब इलाके के लोगों को बिना रुकावट बिजली सप्लाई सुनिश्चित होगी।

इस मौके पर MLA राजिंदरपाल कौर छीना ने कहा कि पंजाब सरकार लोगों को बेहतर बुनियादी सुविधाएं देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि बिजली सप्लाई को और मजबूत और भरोसेमंद बनाने के लिए लगातार काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस नए फीडर के चालू होने से हरपाल नगर, कुंती नगर, सतगुरु नगर, प्रेम नगर, शिव कॉलोनी, केशव नगर और मंदीप कॉलोनी के लोगों को बिना रुकावट और सुचारू बिजली सप्लाई मिलेगी। इसके अलावा, अब जहां बिजली लोड का डिस्ट्रीब्यूशन बेहतर होगा, वहीं कम वोल्टेज की समस्या भी हल हो जाएगी।

MLA छीना ने कहा कि विधानसभा क्षेत्र साउथ को विकास के मामले में अग्रणी बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं और आने वाले समय में भी लोगों की बुनियादी जरूरतों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाएगा।

इस मौके पर बिजली विभाग के अधिकारी, इलाके के गणमान्य लोग और बड़ी संख्या में स्थानीय निवासी भी मौजूद थे।

‘मेरी रसोई योजना’ के तहत MLA ने 300 परिवारों को बांटी राशन किट

लुधियाना / सत्ता संदेश

सोमवार यानि कि 8 जून 2026 को लुधियाना नॉर्थ विधानसभा क्षेत्र के वार्ड नंबर 1 में MLA मदन लाल बग्गा ने आम लोगों की सुविधा के लिए “मेरी रसोई योजना” के तहत करीब 300 परिवारों को खास राशन किट बांटी।

इस मौके पर MLA बग्गा के साथ पार्षद अशोक कुमार, पार्षद अमन बग्गा खुराना, वरिंदर कोफी, कुलदीप सिंह मक्कड़ और बड़ी संख्या में स्थानीय निवासी मौजूद थे।

MLA बग्गा ने कहा कि समाज के हर वर्ग को राहत पहुंचाना पंजाब सरकार की मुख्य प्राथमिकता है और लोगों की रोज़ाना की ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए ऐसे सेवा कार्य लगातार जारी रहेंगे। उन्होंने कहा कि “मेरी रसोई योजना” का मुख्य मकसद आर्थिक रूप से कमज़ोर और ज़रूरतमंद परिवारों को मदद पहुंचाना है ताकि कोई भी परिवार ज़रूरी राशन से वंचित न रहे।

स्थानीय निवासियों ने पंजाब सरकार और उनके लोकप्रिय MLA मदन लाल बग्गा को धन्यवाद दिया और कहा कि मौजूदा सरकार जनकल्याण के कामों को प्राथमिकता के आधार पर कर रही है, जिससे आम परिवारों को बड़ी राहत मिल रही है।

बूथ लेवल पर BLA नियुक्त करने और SIR मैपिंग ड्राइव में राजनीतिक पार्टियों से मदद करने की अपील की
  • ADC ने राजनीतिक पार्टियों से बूथ लेवल पर BLA नियुक्त करने और SIR मैपिंग ड्राइव में मदद करने की अपील की
  • 7 फरवरी को हुए स्पेशल कैंप ड्राइव के दौरान 18,718 वोटरों की मैपिंग की गई

लुधियाना / सत्ता संदेश

एडिशनल डिप्टी कमिश्नर (G) पूनम सिंह ने सोमवार को मान्यता प्राप्त और गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टियों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की और उनसे सभी पोलिंग बूथों पर बूथ लेवल एजेंट (BLAs) नियुक्त करने और वोटर मैपिंग कवरेज को बेहतर बनाने की कोशिशों में मदद करने की अपील की।

सिंह ने प्रतिनिधियों को बताया कि बिना मैप वाले वोटरों की लिस्ट चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर (CEO), पंजाब के ऑफिस ने पहले ही राजनीतिक पार्टियों के साथ शेयर कर दी है, जबकि बूथ लेवल ऑफिसर (BLOs) के पास भी यही लिस्ट है। उन्होंने कहा कि BLAs, बिना मैप वाले वोटरों की लिस्ट को वेरिफाई करने के लिए BLOs के साथ कोऑर्डिनेट कर सकते हैं और उनकी मैपिंग पक्का करने में मदद कर सकते हैं। उन्होंने आगे बताया कि 7 फरवरी को चलाए गए स्पेशल कैंप ड्राइव के दौरान करीब 18,718 वोटर्स की मैपिंग की गई। लुधियाना में, 2,684,361 वोटर्स में से 2,048,484 की मैपिंग पहले ही हो चुकी है।”

सिंह ने सभी पॉलिटिकल पार्टियों से स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) एक्सरसाइज को सफलतापूर्वक पूरा करने में एक्टिव रूप से हिस्सा लेने की भी अपील की। ​​उन्होंने कहा कि इलेक्शन कमीशन ऑफ़ इंडिया (ECI) ने पंजाब में SIR के लिए रिवाइज्ड शेड्यूल की घोषणा की है। घर-घर जाकर गिनती अब 25 जून से शुरू होगी, जबकि ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल 3 अगस्त को पब्लिश किए जाएंगे।

क्लेम और ऑब्जेक्शन फाइल करने का समय 3 अगस्त से बदलकर 2 सितंबर कर दिया गया है, जबकि नोटिस फेज और क्लेम और ऑब्जेक्शन का निपटारा 3 अगस्त से 28 सितंबर, 2026 तक किया जाएगा।

सिंह ने आगे कहा, “घर-घर जाकर गिनती का फेज शुरू होने से पहले ज़्यादा से ज़्यादा वोटर्स तक पहुंचने और प्री-मैपिंग एक्सरसाइज को पूरा करने की पूरी कोशिश की जा रही है।”

PMSMA का एक दशक: मैटरनल हेल्थ में बदलाव और सुरक्षित मदरहुड की ओर भारत की यात्रा को तेज़ करना

हर सुरक्षित प्रेग्नेंसी देश की महिलाओं के प्रति कमिटमेंट को दिखाती है। हमारे देश में हर साल लगभग 29 मिलियन प्रेग्नेंसी होती हैं। इतने बड़े पैमाने पर सुरक्षित मदरहुड पक्का करने के लिए मज़बूत हेल्थ सिस्टम, लगातार पॉलिटिकल कमिटमेंट, समय पर दखल और अच्छी हेल्थ सर्विस तक सबके लिए बराबर पहुँच की ज़रूरत होती है।

देश में पिछले दशक में मैटरनल डेथ में काफ़ी कमी आई है। यह सबसे बड़ी पब्लिक हेल्थ अचीवमेंट्स में से एक है। इस प्रोग्रेस की नींव मैटरनल हेल्थ में लगातार इन्वेस्टमेंट, सर्विस डिलीवरी सिस्टम को मज़बूत करना और कम्युनिटी पार्टिसिपेशन है। हम यह पक्का करने के लिए कमिटेड हैं कि हर महिला को उसकी प्रेग्नेंसी के दौरान अच्छी केयर मिले। इस बदलाव के सेंटर में प्रधानमंत्री सुरक्षित मैटरनल अभियान (PMSMA) है। यह कैंपेन पिछले 10 सालों से पूरे देश में सुरक्षित मदरहुड को बढ़ावा दे रहा है।

PMSMA माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का एक विज़न है जिसे 9 जून 2016 को लॉन्च किया गया था। यह प्रेग्नेंसी के दूसरे और तीसरे ट्राइमेस्टर के दौरान हर महीने की नौवीं तारीख को सभी प्रेग्नेंट महिलाओं को मुफ़्त, पूरी और अच्छी एंटीनेटल केयर सर्विस देने के लिए एक देशव्यापी कैंपेन है। हर महीने के नौवें दिन को चुनने का एक गहरा महत्व है। प्रेग्नेंसी नौ कीमती महीनों का सफ़र है। इनमें से हर महीना नई उम्मीदें, अपेक्षाएं और ज़िम्मेदारियां लेकर आता है। हर महीने के नौवें दिन को मां की सेहत को समर्पित करके, PMSMA हमें याद दिलाता है कि हर प्रेग्नेंसी को एक स्वस्थ बच्चे के सुरक्षित आने तक पूरे नौ महीनों तक लगातार देखभाल, निगरानी और सपोर्ट की ज़रूरत होती है।

मैटरनल हेल्थ का सबसे ज़रूरी सबक यह है कि कोई भी प्रेग्नेंसी पूरी तरह से रिस्क-फ्री नहीं होती। आज जो प्रेग्नेंसी नॉर्मल लगती है, कल उसमें गंभीर कॉम्प्लिकेशन हो सकती हैं। PMSMA मानता है कि कोई भी प्रेग्नेंसी बिना किसी वॉर्निंग के हाई-रिस्क हो सकती है। इसलिए, यह कैंपेन रिस्क की जल्दी पहचान, करीबी मॉनिटरिंग और समय पर गाइडेंस और मैनेजमेंट पक्का करने का एक आसान लेकिन बदलाव लाने वाला तरीका अपनाता है। हर पहचानी गई हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी माँ की जान बचाने और प्रीमैच्योर बर्थ, बच्चे में कॉम्प्लिकेशन या ज़िंदगी भर की डिसेबिलिटी को रोकने का एक मौका है। यह कैंपेन कॉम्प्लिकेशन का इलाज करने के बजाय उन्हें रोकने पर फोकस करता है। इस तरह, इसने भारत के मैटरनल हेल्थ केयर सिस्टम को मज़बूत किया है और करोड़ों महिलाओं के लिए प्रेग्नेंसी को सुरक्षित बनाया है।

PMSMA की एक खास बात यह है कि यह एक तय दिन पर एक्सपर्ट की देखरेख में एंटीनेटल केयर पक्का करता है। इससे पूरे देश में मैटरनल हेल्थ सर्विसेज़ में प्रेडिक्टेबिलिटी, अकाउंटेबिलिटी और कंटिन्यूटी आई है। इस कैंपेन के तहत, प्रेग्नेंट महिलाओं की लगभग 25 हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी कंडीशन के लिए स्क्रीनिंग की जाती है। इनमें गंभीर एनीमिया, हाई ब्लड प्रेशर, जेस्टेशनल डायबिटीज, इन्फेक्शन और दूसरी कॉम्प्लिकेशन की स्क्रीनिंग शामिल है, जिनका अगर पता न चले, तो वे माँ और बच्चे के लिए जानलेवा हो सकती हैं।

क्योंकि इस बात के सबूत हैं कि PMSMA के तहत रेगुलर एंटीनेटल केयर के बाद भी हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी में किसी स्पेशलिस्ट/डॉक्टर द्वारा लगातार मॉनिटरिंग की ज़रूरत होती है, इसलिए भारत सरकार ने 2022 में ‘एक्सटेंडेड PMSMA’ (e-PMSMA) लॉन्च करके इस प्रोग्राम को और बेहतर बनाया है।

e-PMSMA के तहत, हाई-रिस्क प्रेग्नेंट महिलाओं को रेगुलर PMSMA स्क्रीनिंग के अलावा एक्स्ट्रा फॉलो-अप विज़िट भी दी जाती हैं ताकि सुरक्षित डिलीवरी तक समय पर देखभाल पक्की हो सके। इस पहल के तहत, हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी की नाम-आधारित ट्रैकिंग शुरू की गई है और डिलीवरी के 45 दिन बाद तक फॉलो-अप काउंसलिंग के लिए इसे बेहतर बनाया गया है, ताकि यह पक्का हो सके कि कमज़ोर महिलाओं को प्रेग्नेंसी के दौरान और डिलीवरी के तुरंत बाद लगातार देखभाल मिले। एक्स्ट्रा स्क्रीनिंग के लिए हाई-रिस्क प्रेग्नेंट महिलाओं के साथ जाने वाले एक्रेडिटेड सोशल हेल्थ वर्कर्स (ASHA वर्कर्स) के लिए इंसेंटिव के प्रोविज़न ने रेफरल और देखभाल की कंटिन्यूटी के नियमों को और मज़बूत किया है।

इम्प्लीमेंटेशन, मॉनिटरिंग और अकाउंटेबिलिटी को और बेहतर बनाने के लिए, भारत सरकार ने एक सेंट्रलाइज़्ड PMSMA डिजिटल पोर्टल बनाया है, जो पूरे देश में प्रोग्राम मैनेजमेंट का मुख्य आधार है।

यह पोर्टल सर्विस डिलीवरी की रियल-टाइम रिपोर्टिंग, हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी की नाम-बेस्ड ट्रैकिंग, प्रोग्राम के परफॉर्मेंस की मॉनिटरिंग और नेशनल और स्टेट लेवल पर सबूतों के आधार पर फैसले लेने में मदद करता है। खास बात यह है कि यह प्लेटफॉर्म प्राइवेट सेक्टर के एक्सपर्ट्स और कम्युनिटी वॉलंटियर्स को भी प्रोग्राम में योगदान देने में मदद करता है, जिससे माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘जन भागीदारी’ के विजन को और मजबूती मिलती है, जो PMSMA की मूल भावना है।

PMSMA की सफलता भारत के मैटरनल हेल्थ सिस्टम में अलग-अलग स्कीमों के बीच तालमेल के महत्व को भी दिखाती है। जननी सुरक्षा योजना (JSY), जननी शिशु सुरक्षा प्रोग्राम (JSSK), सुरक्षित मातृत्व आश्वासन (SUMAN), नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस स्टैंडर्ड्स (NQAS) पोषण अभियान, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY), आयुष्मान भारत और मिडवाइफ सर्विसेज़, ऑप्टिमाइजेशन ऑफ पोस्टनेटल केयर (OPNC) जैसी पहलों के साथ मिलकर काम करते हुए, PMSMA ने प्रेग्नेंसी, डिलीवरी और पोस्टनेटल पीरियड के दौरान महिलाओं की देखभाल का एक मजबूत कंटिन्यूअम बनाने में अहम योगदान दिया है। इस बदलाव के केंद्र में भारत के फ्रंटलाइन हेल्थ वर्कर हैं, जैसे एक्रेडिटेड सोशल हेल्थ वर्कर (ASHA वर्कर), आंगनवाड़ी वर्कर, असिस्टेंट नर्स मिडवाइफ (ANM), कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर, नर्स, मिडवाइफ और मेडिकल ऑफिसर। कम्युनिटी में हिस्सा लेने, काउंसलिंग, टेस्टिंग, रेफरल और फॉलो-अप कंसल्टेशन में उनकी लगातार कोशिशों से यह पक्का हुआ कि मैटरनल हेल्थ सर्विस देश के सबसे दूर-दराज और पिछड़े इलाकों की महिलाओं तक भी पहुंचे।

इन मिलकर की गई कोशिशों का असर नेशनल हेल्थ नतीजों में तेज़ी से देखा जा रहा है। साल 2022-24 के लिए लेटेस्ट सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (SRS) के अनुमानों के मुताबिक, भारत का मैटरनल मॉर्टेलिटी रेश्यो (MMR) घटकर 1,00,000 जीवित जन्मों पर 87 हो गया है। इससे देश 2030 तक मैटरनल मॉर्टेलिटी रेश्यो को 70 प्रति लाख जीवित जन्मों से कम करने के सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल को पाने के बहुत करीब आ गया है।
ये सुधार मैटरनल हेल्थ से जुड़े बड़े इंडिकेटर्स में भी दिख रहे हैं। हाल ही में जारी नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS-6, 2023-24) के अनुसार, इंस्टीट्यूशनल डिलीवरी (इंस्टीट्यूशन/हॉस्पिटल में होने वाली डिलीवरी) की दर NFHS-5 (2019-21) में 88.6% से बढ़कर 90.6% हो गई है, जबकि एंटीनेटल केयर का कवरेज NFHS-5 में 92.6% से बढ़कर NFHS-6 में 95.9% हो गया है। ये उपलब्धियां बताती हैं कि पहले के मुकाबले अब बहुत ज़्यादा महिलाएं ज़रूरी मैटरनल हेल्थ सर्विसेज़ का फ़ायदा उठा रही हैं, जिससे कॉम्प्लीकेशंस का जल्दी पता लगाने और समय पर सही इलाज के अच्छे मौके मिल रहे हैं। दुनिया में नए जन्मे बच्चों के सबसे बड़े ग्रुप में से एक को मैनेज करते हुए यह तरक्की हासिल की गई है।

कर्ण भारत के मैटरनल हेल्थ प्रोग्राम के स्केल और असर को दिखाते हैं।
पिछले एक दशक में PMSMA का दायरा और पहुंच पहले कभी नहीं देखी गई। 2016 में इसके लॉन्च के बाद से, इस प्रोग्राम के तहत देश भर में 75 मिलियन से ज़्यादा एंटीनेटल केयर विज़िट की गई हैं। खास बात यह है कि PMSMA ने 11.7 करोड़ से ज़्यादा हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी की पहचान करने में मदद की है।
ये उपलब्धियां सिर्फ़ आंकड़े नहीं हैं। ये उन लाखों मांओं को दिखाती हैं जिनकी हेल्थ से जुड़ी दिक्कतों का जल्दी पता चल गया, जिनकी प्रेग्नेंसी पर करीब से नज़र रखी गई और जिनकी जान और उनके नए जन्मे बच्चों की जान अच्छी क्वालिटी की हेल्थ सर्विस समय पर मिलने से बच गई।
हर मां के लिए, प्रेग्नेंसी उम्मीद का एक नया सफ़र है। हर परिवार के लिए, यह एक नई शुरुआत का वादा है। फिर भी, दुनिया भर में कई महिलाओं के लिए, प्रेग्नेंसी ऐसे रिस्क पैदा करती है जिनसे बचा जा सकता है। PMSMA एक आसान लेकिन दमदार सोच के साथ शुरू हुआ कि बच्चे को जन्म देते समय किसी भी महिला की जान न जाए और किसी भी परिवार को प्रेग्नेंसी से जुड़ी किसी दिक्कत की वजह से मां न खोनी पड़े। देश में PMSMA के दस साल पूरे होने पर, यह सिर्फ़ एक पब्लिक हेल्थ प्रोग्राम की सफलता नहीं है, बल्कि इससे कहीं ज़्यादा है। हम लाखों सुरक्षित प्रेग्नेंसी, ज़्यादा सेहतमंद मांओं, नए जन्मे बच्चों के लिए मज़बूत शुरुआत और हेल्थ वर्कर्स, कम्युनिटीज़ और परिवारों की मिली-जुली कोशिशों का जश्न मनाते हैं, जिन्होंने इस बदलाव में योगदान दिया है।

आगे का रास्ता साफ़ है। हमें अच्छी क्वालिटी की एंटीनेटल केयर, ज़्यादा रिस्क वाली प्रेग्नेंसी की ट्रैकिंग, मिडवाइफरी से जुड़ी सर्विस, डिजिटल इनोवेशन और मैटरनल हेल्थ केयर तक सही और बराबर पहुंच को मज़बूत करना जारी रखना होगा। PMSMA के अनुभव ने एक बार फिर एक सीधी सी बात साबित कर दी है: जब हर प्रेग्नेंसी पर नज़र रखी जाती है, हर रिस्क की जल्दी पहचान हो जाती है और हर महिला को समय पर, इज्ज़तदार और अच्छी क्वालिटी की देखभाल मिलती है, तो बच्चे के जन्म के दौरान मां की मौत को रोका जा सकता है, यह ज़रूरी नहीं है।
इसलिए, PMSMA के दस साल पूरे होना सिर्फ़ एक इवेंट का जश्न नहीं है। यह इस बात का सबूत है कि जब पॉलिटिकल कमिटमेंट, मज़बूत वर्कर्स, डिजिटल इनोवेशन, पब्लिक पार्टिसिपेशन और अच्छी क्वालिटी की हेल्थ सर्विस एक ही लक्ष्य – ‘हर मां को सुरक्षित और हर नए जन्मे बच्चे को स्वस्थ रखना’ के लिए मिलकर काम करते हैं, तो क्या हासिल किया जा सकता है। (लेखक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री और रसायन एवं उर्वरक मंत्री हैं)

दुनिया में शांति की आवाज़ पंजाबी लेखक एस. तेरा सिंह चान ने उठाई

दिल्ली / सत्ता संदेश

मैंने पहली बार नई दिल्ली में बारांखंबा रोड पर एस. प्यारा सिंह सेहराई और एस. गुरबचन सिंह भुल्लर जी के मुँह से “चान जी” शब्द सुना। मैंने उनके साथ दर्शन किए। दर्शन का चेहरा देखकर मैंने पूछा कि ये कौन हैं?
सेहराई जी ने मुझे बताया कि ये हैं तेरा सिंह चान, पंजाब में दुनिया में शांति के आंदोलन के हीरो, इप्टा आंदोलन के लीडर। मेरी यह मुलाकात 1975-76 में हुई थी। जागीर सिंह कहलों और मैं साथ में सेहराई जी और भुल्लर साहब से मिलने गए थे। उस समय वो 4, अशोका रोड पर ए.के. गोपालन जी के घर में रहते थे और पेजेट और लेबर मैगज़ीन के लिए काम करते थे। हम बचपन के दोस्त थे, इसलिए यह जायदाद हमारी कॉमन जायदाद थी। बचपन में हम अमरजीत गुरदासपुरी जी की आवाज़ में चैन जी का गाना “कंग सेमे दा बोल्या अमन दी बोली” सुनते थे। हम स्कूल में सुबह की प्रार्थना में “हे प्यारी भारत माँ” गाते थे।

यूथ सेंटर के पब्लिकेशन “बोल शहीदां दे” में शहीद भगत सिंह की जंग

ये अभी भी कल की कहानी है दोस्तों, कोई बूढ़ा नहीं होता।

जब विदेशियों ने बांधा, ये भारत सिमट गया।

और गोरों के ज़ुल्म की कहानी घर-घर फैल गई।

तब हम पंजाब के शेर के साथ जागे, हम दोस्त थे।

साथ ही, तेरा सिंह चैन जी की अमर रचना थी।

जब मुझे उनके बारे में और जानने की भूख थी, तो मुझे पता चला कि ज्ञानी हीरा सिंह दर्द और बाबा गुरबख्श सिंह बन्नोआना के साथ, वे भी उन नेताओं में से थे जिन्होंने 1954 में सेंट्रल पंजाबी राइटर्स एसोसिएशन को ऑर्गनाइज़ किया था। उस समय, वे जालंधर में रहते थे। 1986 में, IPTA आंदोलन की गोल्डन जुबली के दौरान, तेरा सिंह चान और अमरजीत गुरदासपुरी जी को पंजाबी भवन लुधियाना के बलराज साहनी ओपन एयर थिएटर में एक साथ देखा गया। मेरा मन खुशी से भर गया।
चान जी कौन थे और कहाँ के थे, विकिपीडिया पर सुनें।

तेरा सिंह चान जी का जन्म 6 जनवरी 1921 को हुआ था और 9 जुलाई 2009 को उनका निधन हो गया।
वे पंजाबी संस्कृति के क्षेत्र में काम करने वाले एक लेखक, अनुवादक और कम्युनिस्ट कार्यकर्ता थे। वे कई अमर गीतों के लेखक थे जो जन आंदोलनों में लोकप्रिय थे।

तेरा सिंह चान का गाँव बिलावल, तहसील फतेह जंग, जिला कैंपबेलपुर (अब पाकिस्तान) था।
उनकी जन्मभूमि, बिलावल, तीन तरफ से सुहान नदी के कलकल करते पानी से घिरी हुई थी और प्राकृतिक सुंदरता से भरी हुई थी। इस सुहान के बारे में प्रो. मेहन सिंह लिखते हैं, “सीस को कभी मोहम्मद सादिक ने गाया था। खुशियों की ऊंची दीवार पर बैठो। दुनिया का होश नहीं रहता। यादें फिर से आती हैं। मेरे प्यारे। चैन जी के जन्म से पहले, उनके परिवार में कोई बच्चा नहीं बचा था। इसलिए, उनके माता-पिता ने सतगुरु के प्रति आभार जताने के लिए उनका नाम तेरा सिंह रखा। क्योंकि वह एक सुंदर आदमी थे, इसलिए उनकी माँ उन्हें बचपन से ही चैन पुत्त कहती थीं और उनका सुंदर और समझदार बेटा तुरंत अपनी माँ की देखभाल में आ जाता था। इस तरह, जब उनकी माँ ने उन्हें बचपन में चैन कहा, तो उनका नाम चैन हो गया। लेकिन चैन जी की खुशी ज़्यादा समय तक नहीं टिकी और उनकी माँ उन्हें बचपन की बेफिक्री में छोड़कर गुज़र गईं। तेरा सिंह चैन के पिता और पिता पहले चूहरकाना, ज़िले शेखूपुरा के पास सच्चा सौदा गुरुद्वारा साहिब में रहते थे, जहाँ चैन जी ने अपनी शुरुआती पढ़ाई की। फिर वह अमृतसर आकर अपने चाचा सरदार सरूप सिंह के साथ रहने लगे और उन्हें अपनी समझदार और समझदार चाची भगवंती से माँ जैसा प्यार मिला। उनके पिता गाँवों में बर्तन और कपड़े बेचने जाते थे और कई दिनों बाद घर लौटे।

उनके चाचा अकाली नेता करम सिंह गंगवाल और थेदार तेजा सिंह चुहरकाना की लीडरशिप में ब्रिटिश सरकार के खिलाफ आज़ादी की लड़ाई लड़ रहे थे। इसमें इंग्लिश कपड़े छोड़ना और कपड़े जलाना भी शामिल था।

हालांकि 1919 में बैसाखी के दौरान हुआ जलियांवाला बाग हत्याकांड उनके जन्म से पहले ही हो चुका था, लेकिन बचपन में इसके बारे में जो बातें उन्होंने सुनीं, उनका चान जी के सेंसिटिव और कोमल दिल पर गहरा असर पड़ा और वे भी आज़ादी की लड़ाई में शामिल हो गए।

बचपन में चान जी ने देखा था कि बिलावल गांव के खूबसूरत किनारों पर रेत के टीलों पर खेल खेले जाते थे। वहां नाच-गाने और नाटक होते थे। सस्सी पुनू, हीर रांझा और दूसरी लोक कथाओं पर आधारित नाटक या पोएटिक ओपेरा दिखाए जाते थे। पुनू का रोल करने वाला आर्टिस्ट ऊंट पर बैठकर एक्टिंग करता था और ऊंची आवाज़ में गाने गाता था। आर्टिस्ट हीर गाता था जो दूर से सुनाई देता था। इन लोकगीतों, नाटकों, गानों और डांस ने उनके मन में घर कर लिया और वे भी लिटरेचर की तरफ इंस्पायर हुए। उन्हें इसमें इतनी दिलचस्पी थी। कविता में उन्होंने साहित्य के क्षेत्र में एक अमिट छाप छोड़ी और ऐसी कविताएँ, ग़ज़लें, ओपेरा, नाटक, गीत और नाटक लिखे जो हमेशा गाने लायक हैं और साहित्य के क्षेत्र में अपनी मज़बूत पहचान बनाई।
उनकी कविताओं में, सिसकियाँ (1943, देव दीपक मंडल द्वारा हमदर्द स्टीम प्रेस, रावलपिंडी के तहत प्रकाशित)। जय हिंद 1945 में और साईं साईं दियां गलां 1954 में मीत प्रिंटिंग प्रेस, अमृतसर द्वारा प्रकाशित हुईं।
काग साईं दा बोल्या 1995, बलराज साहनी यादगारी प्रकाशन, अमृतसर द्वारा एस. गुरशरण सिंह द्वारा प्रकाशित। इसे उनके दामाद डॉ. रघबीर सिंह सिरजाना ने एडिट किया था। उनके नाटकों में, अमर पंजाब, सांझ विहड़ा लक्कड़ दी लता प्रमुख हैं।
लक्कड़ दी लता’ उन सैनिकों की पीड़ा के बारे में है जिन्होंने युद्ध के मैदान में अपने हाथ और पैर खो दिए थे।
तेरा सिंह चान जी के बारे में और जानने के लिए, आप किताब पढ़ सकते हैं पंजाबी साहित्य अकादमी, पंजाबी भवन, लुधियाना ने उनकी जन्म शताब्दी के मौके पर यह किताब पब्लिश की है।

वांगी मटर में उनकी दो रचनाएँ पेश हैं।

1.
हे प्यारी भारत माँ
हे प्यारी भारत माँ,
हम आपके सामने सिर झुकाते हैं
हम आपके शुक्रगुजार हैं।

माँ ने हमें लोरियाँ दीं,
तुम्हारी गधों की भाषा।
माँ ने हमें हँसना सिखाया,
तुम्हारी भांगड़ा मंडली।
हम जवान हो गए हैं,
अभी नहीं

ट्राई ने चंडीगढ़, मोहाली और पंचकूला शहरी क्षेत्र में मोबाइल नेटवर्क की गुणवत्ता का आकलन किया

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने अप्रैल 2026 के महीने में चंडीगढ़, मोहाली और पंचकूला शहरी क्षेत्र (पंजाब एलएसए ) में किए गए स्वतंत्र ड्राइव टेस्ट (आईडीटी) निष्कर्ष सामान्‍य दूरसंचार उपभोक्‍ताओं की जानकारी के लिए जारी किए। ड्राइव टेस्ट का उद्देश्य दूरसंचार सेवा प्रदाताओं (टीएसपी) द्वारा प्रदान की जाने वाली मोबाइल नेटवर्क सेवाओं (वॉयस और डेटा दोनों) की वास्तविक समय गुणवत्ता का आकलन और सत्यापन करना है। आईडीटी के दौरान, ट्राई द्वारा कवरेज, कॉल ड्रॉप रेट (सीडीआर), कॉल सेटअप सक्‍सेज रेट (सीएसएसआर), डाटा डाउनलोड (डीएल) और अपलोड (यूएल) थ्रूपुट आदि जैसे प्रमुख गुणवत्ता (क्यूओएस) पैरामीटरों को दर्ज किया जाता है और उन्‍हे उपभोक्ताओं की सूचना के लिए और दूरसंचार सेवा प्रदाताओं को प्रोत्साहित करने के लिए प्रकाशित किया जाता है ताकि दूरसंचार सेवा प्रदाता अपनी सेवाओं में सुधार कर सकें।  

  1. ये आईडीटी शहरों, हॉटस्पॉट, सार्वजनिक परिवहन केंद्रों आदि जैसे विविध उपयोग वाले वातावरण में सभी दूरसंचार सेवा प्रदाताओं के ऑनग्राउंड मोबाइल नेटवर्क प्रदर्शन को कैप्चर करने के लिए डिज़ाइन किए जाते हैं। इस प्रकार के ड्राइव परीक्षण में, 2G, 3G, 4G और 5G नेटवर्क पर सभी दूरसंचार सेवा प्रदाताओं के सिम कार्ड का उपयोग करके लाइव डेटा और वॉयस सैशन स्थापित किए जाते हैं। कई उन्नत परीक्षण हैंडसेट का उपयोग किया जाता है, और उन्नत सॉफ्टवेयर सिस्टम का उपयोग करके वास्तविक समय में सत्रों की निगरानी और विश्लेषण किया जाता है।
  1. ट्राई ने अपनी नियुक्त एजेंसी के माध्यम से पंजाब एलएसए में 6 अप्रैल 2026 से 10 अप्रैल 2026 के दौरान चंडीगढ़, मोहाली और पंचकूला शहरी क्षेत्र में 453.2 किलोमीटर के सिटी ड्राइव टेस्ट, 15 हॉटस्पॉट लोकेशंस और 1.5 किलोमीटर के वॉक टेस्ट किए। ये टेस्ट भादूविप्रा के क्षेत्रीय कार्यालय, जयपुर की देखरेख में किए गए। ड्राइव टेस्ट रिपोर्ट में प्रस्तुत अवलोकन ड्राइव टेस्ट आयोजित करने के दिन/समय पर परीक्षण के तहत क्षेत्र/मार्ग पर दूरसंचार सेवा प्रदाता के प्रदर्शन को दर्शाते हैं।
  1. ड्राइव टेस्ट रूट मैप : निम्नलिखित मानचित्र, मानचित्र पर दिखाए गए रास्‍ते के अनुसार, सिटी ड्राइव, इंटर-ऑपरेटर कॉलिंग, हॉटस्पॉट और वॉक टेस्ट को इंगित करने वाले ड्राइव टेस्ट मार्गों को बताता है: –
  1.   प्रमुख मूल्‍यांकित मानदंड: 
  1. कवरेज गैप : नमूनों का प्रतिशत, जिनका सिग्नल स्ट्रेंथ संबंधित तकनीक (2G/3G/4G/5G) के लिए न्यूनतम निर्धारित सिग्नल स्ट्रेंथ  से कम पाया गया । 
  2.  वॉयस सर्विसेज : कॉल सैट अप सक्‍सेज रेट (CSSR), ड्रॉप कॉल रेट (DCR), कॉल सेटअप टाइम, कॉल साइलेंस रेट, स्‍पीच क्‍वालिटी (MOS).
  3. कॉल साईलेंस इंस्‍टांस: कॉल के दौरान कितनी कॉल साइलेंस इंस्टेंस हुईं। 
  4. डाटा सर्विसेज : डाउनलोड/अपलोड थ्रूपुट, लेटेंसी, जिटर, पैकेट ड्राप रेट.
  1. प्रमुख मापदंडों के लिए चंडीगढ़, मोहाली और पंचकूला शहरी क्षेत्र में समग्र मोबाइल नेटवर्क प्रदर्शन का सारांश नीचे दिया गया है: 
  1. कवरेज गैप – ऑटो-सिलेक्शन मोड (5G/4G/3G/2G) में ड्राइव टेस्ट रूट पर वॉयस टेस्टिंग के दौरान लिए गए खराब सिग्नल वाले नमूनों से कुल नमूनों का अनुपात, Airtel के लिए 97/63149, BSNL के लिए 7755/61140, RJIL के लिए 356/59297 और VIL के लिए 382/62915 रहा। कवरेज गैप का विवरण संलग्न मानचित्र में दर्शाया गया है। 
  2. ड्राप्‍ड कॉल्‍स– ड्रॉप कॉल की संख्या से सफलतापूर्वक स्थापित कॉल की संख्या का अनुपात, Airtel के लिए 0/566, BSNL के लिए 24/534, RJIL के लिए 4/554 और VIL के लिए 2/542 रहा। ड्रॉप किए गए कॉल स्थानों का विवरण संलग्न मानचित्र में दर्शाया गया है।
  1. कॉल साईलेंस इंस्‍टांस – 3 सेकंड से ज्यादा के लिए पाई गई साइलेंस इंस्टेंस  की संख्या का स्थापित कुल कॉल से अनुपात, Airtel के लिए 7/543, BSNL के लिए 16/447, RJIL के लिए 9/551 और VIL के लिए 3/552 रहा। कॉल साइलेंस इंस्टेंस स्थानों का विवरण संलग्न मानचित्र में दर्शाया गया है।

घ) डाटा डाउनलोड एवं अपलोड थ्रूपुट :

  1. डाटा डाउनलोड थ्रूपुट (समग्र): Airtel (5G/4G) के लिए औसत डाउनलोड स्पीड 169.66Mbps, BSNL(4G/3G/2G) के लिए 11.00Mbps, RJIL(5G/4G) के लिए 203.16Mbps और VIL(5G/4G/2G) के लिए 48.27Mbps मापी गई। डाउनलोड थ्रूपुट का विवरण संलग्न मानचित्र में दर्शाया गया है। 
  1. डाटा अपलोड थ्रूपुट (समग्र): Airtel (5G/4G), के लिए औसत अपलोड स्पीड 23.28 Mbps, BSNL (4G/3G/2G) के लिए 4.96Mbps, RJIL (5G/4G), के लिए 23.85Mbps और VIL (5G/4G/2G) के लिए 17.97Mbps मापी गई। अपलोड थ्रूपुट का विवरण संलग्न मानचित्र में दर्शाया गया है। 

मानचित्र पर लाल बिंदु पर क्लिक करके ड्रॉप कॉल और कॉल साइलेंस की स्थिति देखी जा सकती है।

  1. आईडीटी के दौरान ड्राइव टेस्ट मार्ग और कवर किए गए क्षेत्र का विवरण इस प्रकार है: 

शहर:  चंडीगढ़, मोहाली और पंचकूला अरबन एरिया में चंडी मंदि‍र, पंचकूला, जीरकपुर, डेरा बस्सी, डप्पर, अजीजपुर, गमाडा एयरोसिटी, तंगोरी, चोलता खुर्द, मोरिंडा, कुराली, खरड़, न्यू चंडीगढ़, नयागांव,          सेक्टर-15, सेक्टर-42, साहिबजादा अजीत सिंह नगर, ग्रेटर मोहाली, सेक्टर-68, सेक्टर-46, सेक्टर-27 इंडस्ट्रियल एरि‍या फेज-I, II आदि शामिल हैं। 

  1. आईडीटी के निष्कर्षों के बारे में सभी संबंधित दूरसंचार सेवा प्रदाताओं को उनके स्‍तर पर  आवश्‍यकता के अनुसार (यदि हो) आवश्‍यक कार्रवाई करने के लिए सूचित किया जा चुका है। ड्राइव टेस्‍ट की विस्तृत रिपोर्ट ट्राई की वेबसाइट www.trai.gov.in पर उपलब्ध है। अतिरिक्‍त जानकारी के लिए ट्राई क्षेत्रीय कार्यालय, जयपुर से ईमेल adv.jaipur@trai.gov.in या दूरभाष सं 0141-2701919 पर संपर्क किया जा सकता है।