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विशाखापत्तनम स्टील प्लांट विस्फोट मामला: एनएचआरसी ने लिया स्वतः संज्ञान, आंध्र प्रदेश सरकार से मांगी रिपोर्ट

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम स्थित राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड (आरआईएनएल) के स्टील प्लांट में हुए भीषण विस्फोट में आठ श्रमिकों की मौत और छह अन्य के गंभीर रूप से घायल होने की घटना का स्वतः संज्ञान लिया है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह हादसा 8 जून 2026 को संयंत्र की स्टील मेल्टिंग शॉप में हुआ, जब करीब 1600 डिग्री सेल्सियस तापमान पर लगभग 150 टन तरल स्टील ले जा रहा एक बर्तन अचानक फट गया। विस्फोट के बाद पिघला हुआ स्टील वर्कशॉप के फर्श पर फैल गया, जिसकी चपेट में कई श्रमिक आ गए।

घटना में आठ श्रमिकों की मौत हो गई, जबकि कम से कम छह अन्य गंभीर रूप से झुलस गए। श्रमिक संघों ने इस हादसे के लिए प्रबंधन पर सुरक्षा प्रोटोकॉल की अनदेखी करने का आरोप लगाया है।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा है कि यदि मीडिया रिपोर्टों में दी गई जानकारी सही है, तो यह मानवाधिकारों के उल्लंघन का मामला बनता है। आयोग ने आंध्र प्रदेश के मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

एनएचआरसी ने कहा है कि रिपोर्ट में घायल श्रमिकों की वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति, उनके उपचार की जानकारी तथा घायलों और मृतकों के परिजनों को दिए गए मुआवजे का पूरा विवरण शामिल होना चाहिए।

आयोग की इस कार्रवाई के बाद अब राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों की ओर से हादसे के कारणों, सुरक्षा मानकों के पालन और पीड़ित परिवारों को राहत प्रदान करने के संबंध में विस्तृत जानकारी सामने आने की उम्मीद है।

जैसलमेर के रामगढ़ में 20 किलोवाट आकाशवाणी एफएम ट्रांसमीटर का उद्घाटन, सीमावर्ती क्षेत्रों में मजबूत होगी रेडियो पहुंच

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने राजस्थान के जैसलमेर जिले के रामगढ़ में 20 किलोवाट क्षमता वाले आकाशवाणी एफएम ट्रांसमीटर का वर्चुअल उद्घाटन किया। यह कार्यक्रम आकाशवाणी जयपुर परिसर से आयोजित किया गया।

नए ट्रांसमीटर के शुरू होने के साथ राजस्थान में एफएम ट्रांसमीटरों की कुल संख्या बढ़कर 39 हो गई है। रामगढ़ स्थित यह ट्रांसमीटर सीमावर्ती क्षेत्र में लगभग 80 किलोमीटर के दायरे में रेडियो कवरेज उपलब्ध कराएगा और जैसलमेर जिले के करीब 20 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को कवर करेगा। इससे क्षेत्र के लोगों को सूचनात्मक, शैक्षिक और मनोरंजन से जुड़े कार्यक्रमों तक बेहतर पहुंच मिलेगी।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि तेजी से बदलती तकनीक के दौर में रेडियो प्रसारण को प्रासंगिक और प्रभावशाली बनाए रखने के लिए “डिजिटल फर्स्ट” और “हाइपर-लोकल” दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है। उन्होंने प्रसार भारती के अधिकारियों को इस दिशा में एक व्यापक रोडमैप तैयार करने के निर्देश दिए।

उन्होंने प्रसारण सेवाओं में स्थानीय कलाकारों, लोक संस्कृति और शिल्पकारों को अधिक स्थान देने पर भी जोर दिया, ताकि स्थानीय प्रतिभाओं को राष्ट्रीय मंच मिल सके और क्षेत्रीय पहचान को मजबूती मिले।

अश्विनी वैष्णव ने जयपुर में विकसित किए जा रहे आगामी एआई डेटा सेंटर का भी उल्लेख किया और इसे भविष्य की तकनीकी आवश्यकताओं को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया।

प्रसार भारती के अध्यक्ष प्रसून जोशी ने कहा कि आकाशवाणी और दूरदर्शन जैसे संस्थान आज भी समाज की जड़ों से जुड़े हुए हैं और देश के दूरदराज क्षेत्रों तक सूचना पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ये संस्थान जमीनी स्तर की आवाज को राष्ट्रीय मंच प्रदान करते हैं।

नया एफएम ट्रांसमीटर सीमावर्ती क्षेत्रों में आकाशवाणी और दूरदर्शन की पहुंच को मजबूत करेगा। यह पहल “कश्मीर से कच्छ” तक मजबूत प्रसारण अवसंरचना विकसित करने की परिकल्पना का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य पूरे सीमावर्ती क्षेत्र में संचार और सूचना सेवाओं का विस्तार करना है।

कार्यक्रम में राजस्थान के ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर, जयपुर की सांसद मंजू शर्मा, आकाशवाणी के महानिदेशक राजीव कुमार जैन सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। वहीं जैसलमेर के सांसद उमेदराम बेनीवाल वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम में शामिल हुए।

भारत-नेपाल के बीच सीमा पार धन प्रेषण सेवा शुरू, UPI और नेपाल के भुगतान नेटवर्क का सीधा एकीकरण

दिल्ली / सत्ता संदेश

भारत और नेपाल ने डिजिटल वित्तीय सहयोग को नई ऊंचाई देते हुए सीमा पार व्यक्ति-से-व्यक्ति धन प्रेषण तंत्र की शुरुआत कर दी है। 6 जून को लॉन्च की गई इस नई व्यवस्था के तहत भारत के यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस और नेपाल के नेशनल पेमेंट इंटरफेस को सीधे जोड़ा गया है।

इस एकीकरण के माध्यम से दोनों देशों के नागरिक अब मोबाइल बैंकिंग ऐप और डिजिटल वॉलेट की मदद से वास्तविक समय में सुरक्षित, तेज और निर्बाध तरीके से धन हस्तांतरित कर सकेंगे। यह कदम भारत और नेपाल के बीच वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने के साथ-साथ डिजिटल और आर्थिक एकीकरण को भी मजबूत करेगा।

यह तकनीकी साझेदारी नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड और नेपाल क्लियरिंग हाउस लिमिटेड के सहयोग से लागू की गई है। इसका उद्देश्य सीमा पार भुगतान को अधिक सुलभ, सुरक्षित और किफायती बनाना है।

नई व्यवस्था से दोनों देशों के यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी। अब उन्हें मुद्रा विनिमय की जटिलताओं, अधिक नकदी साथ रखने और अतिरिक्त विदेशी मुद्रा शुल्क जैसी समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ेगा। वहीं नेपाल के स्थानीय व्यापारियों और व्यवसायों को भारतीय पर्यटकों और ग्राहकों तक सीधी पहुंच मिलने से व्यापारिक गतिविधियों में वृद्धि होने की संभावना है।

इसके अलावा डिजिटल भुगतान प्रणाली से नकदी प्रबंधन की लागत कम होगी, भुगतान का निपटान वास्तविक समय में होगा और सीमा पार नकदी ले जाने की आवश्यकता भी घटेगी। इससे व्यापारिक लेनदेन अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक बनेंगे।

गौरतलब है कि वर्तमान में यूपीआई दुनिया के नौ देशों—सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात, फ्रांस, मॉरीशस, नेपाल, भूटान, कतर, श्रीलंका और कंबोडिया—में स्वीकार किया जाता है। इन देशों में भारतीय यात्री अपने परिचित यूपीआई प्लेटफॉर्म के माध्यम से आसानी से डिजिटल भुगतान कर सकते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत-नेपाल के बीच शुरू हुई यह नई भुगतान व्यवस्था दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने के साथ-साथ क्षेत्रीय डिजिटल भुगतान सहयोग का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनेगी।

ब्रिक्स 2026: भारत की अध्यक्षता में कृषि व्यापार को अधिक भरोसेमंद और किसान-केंद्रित बनाने का अवसर

भारत 2026 में ब्रिक्स की अध्यक्षता ऐसे समय कर रहा है जब कृषि व्यापार की चर्चा केवल शुल्क और बाजार पहुंच तक सीमित नहीं रह गई है। जलवायु संकट, खाद्य कीमतों में उतार-चढ़ाव, उर्वरकों की आपूर्ति में रुकावट, सतत उत्पादन से जुड़े मानक, उत्पाद के स्रोत और गुणवत्ता की डिजिटल जानकारी तथा संकट के समय बाजारों को खुला रखने की जरूरत अब कृषि व्यापार के अहम मुद्दे बन चुके हैं।

कृषि क्यों महत्वपूर्ण है

ब्रिक्स के विस्तार के बाद यह समूह अब दुनिया की लगभग आधी आबादी, वैश्विक जीडीपी के करीब 40 प्रतिशत और वैश्विक व्यापार के लगभग एक चौथाई हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है। संयुक्त राष्ट्र की व्यापार एवं विकास संस्था, अंकटाड, के हालिया आकलन के अनुसार, ब्रिक्स देशों के बीच वस्तुओं का व्यापार 2003 के बाद तेरह गुना से अधिक बढ़ा है और 2024 में 1.17 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया। कृषि इस बड़े व्यापारिक परिदृश्य का केवल एक हिस्सा हो सकती है, लेकिन राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से यह सबसे संवेदनशील क्षेत्रों में है। जब खाद्य पदार्थ महंगे होते हैं, उर्वरकों की आपूर्ति रुकती है या समुद्री मार्गों में अनिश्चितता आती है, तो इसका सीधा असर किसानों, उपभोक्ताओं और सरकारों पर पड़ता है। इसलिए कृषि भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में से एक है।

ब्रिक्स देशों के बीच कृषि के क्षेत्र में कई तरह की पूरकताएं हैं। ब्राजील सोयाबीन, मांस और चीनी का बड़ा निर्यातक है। रूस अनाज और उर्वरकों में महत्वपूर्ण भूमिका रखता है। भारत चावल, समुद्री उत्पाद, मसाले, भैंस के मांस और छोटे किसानों से जुड़ी कई कृषि वस्तुओं में मजबूत स्थिति रखता है। चीन खाद्य पदार्थों का बड़ा आयातक और प्रसंस्करण करने वाला देश है। दक्षिण अफ्रीका इस समूह को अफ्रीका के महत्वपूर्ण कृषि-खाद्य बाजारों से जोड़ता है। नए सदस्य भी इसमें नए आयाम जोड़ते हैं। संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब लॉजिस्टिक्स, वित्त और खाद्य सुरक्षा निवेश के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं। मिस्र और इथियोपिया अफ्रीका की खाद्य प्रणाली से जुड़ी चिंताओं को सामने लाते हैं, जबकि इंडोनेशिया पाम ऑयल, मत्स्य क्षेत्र और उष्णकटिबंधीय कृषि की ताकत जोड़ता है।

आपसी ताकतों को ठोस व्यवस्था में बदलना

लेकिन केवल बड़े पैमाने और आपसी ताकतों के मेल से अपने-आप मजबूत व्यापार व्यवस्था नहीं बनती। आगामी ब्रिक्स कृषि मंत्रियों की बैठक भारत को यह अवसर देती है कि वह सहयोग को कुछ ठोस दिशाओं में आगे बढ़ाए। इनमें भरोसेमंद व्यापार व्यवस्था, बीज, उर्वरक और अन्य उत्पादन सामग्री की मजबूत आपूर्ति श्रृंखला, बेहतर बाजार जानकारी और ऐसी मूल्य श्रृंखलाएं शामिल हैं जिनमें छोटे किसानों, महिलाओं और युवाओं की सक्रिय भागीदारी हो।

भरोसेमंद व्यापार व्यवस्था को शुरुआती प्राथमिकता मिलनी चाहिए। कृषि व्यापार में केवल माल भेजना पर्याप्त नहीं है; यह भी उतना ही जरूरी है कि उत्पाद की गुणवत्ता, सुरक्षा और स्रोत पर भरोसा हो। कृषि व्यापार सुविधा पर 2024 के ब्रिक्स सिद्धांत पहले ही खाद्य सुरक्षा, पशु-पौध स्वास्थ्य और तकनीकी मानकों से जुड़े सहयोग, एक-दूसरे के मानकों को स्वीकार करने की व्यवस्था, कम व्यापार लागत और डिजिटल व्यापार सुविधा जैसे बुनियादी मुद्दों को मान्यता देते हैं। भारत इस एजेंडे को आगे बढ़ाते हुए डिजिटल प्रमाणपत्रों, उत्पाद के स्रोत और गुणवत्ता की भरोसेमंद डिजिटल जानकारी, नियामकों के बीच तेज संवाद और उत्पादकों व निर्यातकों की क्षमता निर्माण पर जोर दे सकता है।

दूसरी प्राथमिकता मजबूत आपूर्ति श्रृंखला होनी चाहिए। खाद्य व्यापार को उर्वरक, ऊर्जा, पशु आहार, बीज, ढुलाई-भंडारण और वित्त से अलग करके नहीं देखा जा सकता। भारत के लिए यह कोई दूर की चिंता नहीं है। उसके उर्वरक और ऊर्जा आयात का आधे से अधिक हिस्सा ब्रिक्स देशों से आता है। इसलिए उत्पादन सामग्री की सुरक्षा सीधे कृषि की मजबूती से जुड़ी हुई है। पश्चिम एशिया के हालिया संकटों ने दिखाया है कि खाद्य पदार्थों के बाजार तक पहुंचने से बहुत पहले ही उत्पादन प्रभावित हो सकता है। इसलिए ब्रिक्स सहयोग में उर्वरकों और अन्य उत्पादन सामग्री के बाजारों के लिए पूर्व चेतावनी प्रणाली, भंडार और कीमतों पर पारदर्शी जानकारी, और जरूरी कृषि सामग्री की आपूर्ति में अचानक आने वाली रुकावटों को कम करने की व्यवस्था शामिल होनी चाहिए।

तीसरी प्राथमिकता बेहतर बाजार जानकारी है। ब्रिक्स अनाज विनिमय का विचार इस बात की जरूरत को दिखाता है कि खाद्य बाजारों में अधिक पारदर्शिता, बेहतर मूल्य संकेत और खाद्य सुरक्षा की तैयारी होनी चाहिए। भारत इस दिशा में ब्रिक्स कृषि अनुसंधान मंच के भीतर कृषि बाजार जानकारी से जुड़ी एक व्यवस्था का प्रस्ताव रख सकता है। यह मंच पहले से ही “ज्ञान से कार्य” की दिशा में विकसित किया जा रहा है। ऐसी व्यवस्था खाद्य भंडार, फसल की स्थिति, उर्वरक कीमतों, जहाजरानी जोखिमों, खाद्य सुरक्षा और पशु-पौध स्वास्थ्य से जुड़े अलर्ट तथा प्रमुख कृषि जिंसों के रुझानों पर नियमित जानकारी दे सकती है। इससे देश संकट गहराने से पहले ही तैयारी कर सकेंगे।

व्यापार को किसान-केन्द्रित बनाना

चौथी प्राथमिकता ऐसी मूल्य श्रृंखलाएं होनी चाहिए जिनमें छोटे किसानों, महिलाओं और युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित हो। यदि कृषि व्यापार केवल बड़ी मात्रा में अनाज, तेल, चीनी या अन्य जिंसों की खरीद-बिक्री तक सीमित रह गया, तो उससे छोटे किसानों और ग्रामीण परिवारों को सीमित लाभ ही मिलेगा। कृषि-खाद्य प्रणालियों में महिलाओं की भूमिका पर वैश्विक सम्मेलन 2026 से निकली दिल्ली घोषणा ने कृषि-खाद्य व्यवस्था में महिलाओं की भूमिका, नेतृत्व और भागीदारी को केंद्र में रखा है। भारत इस भावना को ब्रिक्स के कृषि व्यापार एजेंडे में आगे बढ़ा सकता है, ताकि छोटे किसानों, विशेषकर महिला किसानों और ग्रामीण युवाओं को केवल बाजार के लिए उत्पादन करने तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उन्हें मूल्य श्रृंखलाओं में अधिक प्रभावी भागीदारी का अवसर मिले।

इन प्राथमिकताओं का उद्देश्य खाद्य पदार्थों से जुड़े किसी बंद गुट का निर्माण करना नहीं है। इनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कृषि व्यापार एक अनिश्चित दुनिया में खाद्य सुरक्षा, किसानों और उपभोक्ताओं के लिए बेहतर ढंग से काम करे। भारत इस एजेंडा को आकार देने की दृष्टि से सही स्थिति में है क्योंकि उसे खाद्य सुरक्षा के प्रबंधन, छोटे किसानों पर आधारित कृषि, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और कृषि अनुसंधान का खासा अनुभव है।

भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता इस एजेंडे को व्यावहारिक रूप देने का समय पर मिला अवसर है। छोटे लेकिन सुविचारित कदम भी संकट के समय कृषि व्यापार को अधिक भरोसेमंद, नियमों की दृष्टि से अधिक पारदर्शी और किसानों के लिए अधिक सुलभ बना सकते हैं। यह अधिक मजबूत, भरोसेमंद और किसान-केंद्रित कृषि व्यापार व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।

(आईसीएआर के महानिदेशक तथा डीएआरई के सचिव हैं)

(आईसीएआर के एम.एस. स्वामीनाथन चेयर की राष्ट्रीय प्रोफेसर और डीएएफ एंड डब्ल्यू की पूर्व संयुक्त सचिव (जी20/ब्रिक्स) हैं)

फाइबर अर्थव्यवस्था: भारत का अगला बड़ा वैश्विक अवसर ‘स्थानीय प्रचुरता से सतत सामग्रियों और भविष्य के लिए तैयार वस्त्रों में वैश्विक नेतृत्व तक’

दिल्ली / सत्ता संदेश

फाइबर के साथ भारत का 5,000 बरस पुराना सभ्यतागत संबंध है, जो हमारे गाँवों, परंपराओं तथा सामूहिक पहचान में गहराई से गुँथा है। “बुनी हुई हवा” कहलाने वाली मोहनजोदड़ो की प्रसिद्ध मलमल से लेकर समस्‍त महाद्वीपों तक फैली भारतीय कारीगरी तक — फाइबर हमेशा से हमारी ग्रामीण अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा रहा है। आज, जब दुनिया वैश्विक स्थिरता की क्रांति की कगार पर खड़ी है, तब यही प्राचीन ज्ञान हमारी सबसे बड़ी प्रतिस्पर्धात्मक शक्ति है।

दशकों तक केले के पेड़ के तने को बेकार अपशिष्ट मानकर फेंक दिया जाता था। आज वही बायोमास प्रीमियम फाइबर बनकर निर्यात बाज़ारों की मांग पूरी कर रहा है, ग्रामीण आजीविकाओं को सशक्त बना रहा है और इस कृषि अवशेष को राष्ट्रीय आय में बदल रहा है। अपशिष्ट से समृद्धि तक, स्थानीय प्रचुरता से वैश्विक अवसर तक — यही भारत की न्यू एज फाइबर मुहिम का सार है, जो हरित सामग्रियों और भविष्य के लिए तैयार वस्त्रों में भारत को वैश्विक नेतृत्व की ओर अग्रसर कर रहा है।

न्यू एज फाइबर ऐसे टिकाऊ एवं पौधों-आधारित पदार्थ हैं, जो भारत के पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक नवाचार के साथ जोड़ते हैं। बांस, भाँग, केला, पीएएलएफ, फ्लैक्स, रेमी, सिसल, मिल्कवीड और कपोक जैसे फाइबर सदियों से मौजूद रहे हैं, लेकिन अब इन्हें वस्त्र उद्योग, रक्षा, बायोडिग्रेडेबल कंपोज़िट्स और प्रीमियम उत्पादों में उच्च-मूल्य उपयोगों के लिए नए सिरे से खोजा जा रहा है। ये हरित भविष्य के लिए भारत के प्राकृतिक फाइबर भंडार का विस्तार कर रहे हैं।

बढ़ती आय, वैश्विक स्थिरता संबंधी अनिवार्यताएँ और ट्रेसेबल सोर्सिंग की आवश्यकताएँ वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं को पूरी तरह बदल रही हैं और एक नई फाइबर अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ा रही हैं। उपभोक्ता अब अपने पहनने के कपड़ों में आराम, पसीना सोखने की क्षमता या ब्रीदेबिलिटी और टिकाऊपन चाहते हैं। यही महत्‍वपूर्ण बदलाव भारत में फाइबर की खपत को आज के 15 एमएमटी से बढ़ाकर 2030 तक 23 एमएमटी तक ले जाने वाला है। दुनिया अब तेजी से वही तलाश रही है, जिसे भारत प्रदान कर सकता है :  नैतिक, टिकाऊ और उच्च-प्रदर्शन वाले प्राकृतिक फाइबर, जो सदियों के अनुभव पर आधारित हैं।

इस विजन को एक स्पष्ट संस्थागत एवं नीतिगत ढाँचे का समर्थन प्राप्त है। वर्ष 2026–2031 के लिए 5,664 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय वाले “मिशन फॉर कॉटन प्रोडक्टिविटी” के अंतर्गत न्यू एज फाइबर्स के लिए 300 करोड़ रुपये का विशेष प्रावधान रखा गया है। इस प्रयास को और सशक्त बनाते हुए, केंद्रीय बजट 2026–27 में घोषित राष्ट्रीय फाइबर मिशन एक व्यापक रणनीतिक ढाँचा प्रदान करता है, जो चार प्रमुख स्तंभों : कृषि-सूत्र- खेती और कच्चे माल के विकास के लिए, इन्फिनिटी-अनुसंधान एवं नवाचार के लिए, ग्राम-सेतु – अवसंरचना और उद्यम सृजन के लिए, तथा जीएमपीएस: ब्रांडिंग और बाज़ार विकास के लिए – पर आधारित है ।

इस नीतिगत ढाँचे की शक्ति दशकों से जारी वैज्ञानिक अनुसंधान में निहित है, जिसे ठोस परिणाम पहले से ही सामने आ चुके हैं। मिल्कवीड (आक/मदार) जिसे पारंपरिक रूप से भगवान शिव को अर्पित किया जाता है, नॉर्दर्न इंडिया टेक्सटाइल रिसर्च एसोसिएशन (एनआईटीआरए) में 18 वर्षों के अनुसंधान के बाद एक बड़ी कामयाबी के तौर पर सामने आया है। अब इसका उपयोग रक्षा क्षेत्र में, विशेषकर –20°C तापमान में कार्यरत सैनिकों के लिए स्लीपिंग बैग बनाने में किया जा रहा है। ये स्लीपिंग बैग अपने पॉलिएस्टर विकल्पों की तुलना में 10% हल्के, ऊन से अधिक गर्म तथा सीएलओ/सेल प्रमाणित हैं। 55 मिलियन हेक्टेयर बंजर भूमि पर बिना उर्वरक के उगाए जाने पर यह पौधा किसानों को प्रति एकड़ प्रतिवर्ष 1.5–2 लाख रुपये तक की आय प्रदान करने की क्षमता रखता है। 

केले का फाइबर प्रतिवर्ष लगभग 1.8 मिलियन टन उत्पादन की क्षमता रखता है और कृषि अवशेषों से किसानों को अतिरिक्त आय प्रदान कर सकता है, जबकि बांस प्रति हेक्टेयर 60 टन तक बायोमास उत्पादन करने की क्षमता रखता है, जिससे पूर्वोत्तर भारत के लिए बड़े अवसर उत्पन्न हो रहे हैं। भाँग भी एक उभरता हुआ वैश्विक बाज़ार बन रहा है, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में जिसकी खेती की पहले से ही अनुमति है। फ्लैक्स, सिसल, रेमी, पीएएलएफ, बिछुआ या नेटल और कपोक जैसे फाइबरों के साथ मिलकर ये सभी भारत के टिकाऊ एवं प्राकृतिक फाइबर आधार का निरंतर विस्तार कर रहे हैं। 

इस वैज्ञानिक गति को आगे बढ़ाते हुए,न्यू एज फाइबर्स पर राष्ट्रीय सेमिनार एक ऐसे मंच के रूप में उभरा, जहाँ विज्ञान, नीति और उद्यम एक साथ आ सके। इसने शोधकर्ताओं, वैज्ञानिकों, उद्यमियों, किसान संगठनों, उद्योग जगत के दिग्‍गजों और नीति-निर्माताओं को एक ही मंच पर एकत्रित किया। सभी दस प्राथमिकता प्राप्त फाइबर्स को कवर करने वाले तीन कार्य बलों की रिपोर्टें जारी की गईं, जिन्होंने क्षेत्रीय विज्ञान को सीधे योजनाओं के डिज़ाइन और निवेश की प्राथमिकताओं में बदल दिया। 

इस सेमिनार ने मानकों, प्रसंस्करण अवसंरचना और संस्थागत वित्तपोषण में मौजूद खामियों की भी स्पष्ट रूप से पहचान की , जो एक ऐसे मिशन को दर्शाता है जो केवल नीति नहीं, बल्कि वास्तविक क्रियान्वयन पर केंद्रित है। इसमें प्रमुख प्राथमिकताएँ: उत्पादन को पाँच वर्षों में  10,000 मीट्रिक टन से बढ़ाकर 10 लाख मीट्रिक टन तक पहुँचाना, गुणवत्ता मानकों का विकास करना, मशीनरी के स्वदेशीकरण को बढ़ावा देना, आयातित प्रसंस्करण तकनीक पर निर्भरता कम करना और खेती से लेकर मूल्य संवर्धन तक क्लस्टर आधारित फाइबर इकोसिस्टम का निर्माण करना सामने आईं। ये सभी कदम मिलकर न्यू एज फाइबर्स को ग्रामीण समृद्धि और टिकाऊ विकास के लिए एक संपूर्ण सरकारी मिशन बनाते हैं। 

शायद सबसे परिवर्तनकारी कार्य फाइबर ब्लेंडिंग है। भारत की वास्तविक शक्ति किसी एक फाइबर में नहीं, बल्कि उन्हें समझदारी से संयोजित करने में निहित है—जैसे थर्मल हल्केपन के लिए मिल्कवीड, गर्माहट के लिए ऊन, ब्रीदेबिलिटी के लिए बांस, और कोमलता के लिए कपास। मिश्रित कपड़ा या ब्लेंडेड फैब्रिक कोई समझौता नहीं है; यह प्रदर्शन को उन्नत बनाना है – ऐसे कपड़े तैयार करना जो अधिक मजबूत, अधिक स्मार्ट और अधिक टिकाऊ हों, साथ ही बेहतर आराम, नमी सोखने की क्षमता, टिकाऊपन तथा फैशन, जीवनशैली और तकनीकी वस्त्रों में बहुपयोगिता प्रदान करें। 

इसके लाभ पूरी मूल्य शृंखला में फैलते हैं। उपभोक्ताओं को बेहतर आराम और कार्यक्षमता मिलती है, निर्माताओं को प्रीमियम और विशिष्ट उत्पाद विकसित करने का अवसर मिलता है, और किसानों को विविध प्रकार की मांग तथा अधिक मजबूत आय प्राप्त होती है। भारत के लिए, ब्लेंडिंग या मिश्रण केवल एक तकनीकी नवाचार भर नहीं है; यह कच्चे फाइबर आपूर्ति से वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी, मूल्य-संवर्धित और भारतीय पहचान से जुड़े ब्रांड्स तक पहुँचने का एक सेतु है।

असल में, न्यू एज फाइबर मुहिम  जीवन को रूपांतरित करने, किसानों के लिए अवसर सृजित करने, ग्रामीण आजीविकाओं को सशक्त बनाने, महिलाओं को सशक्त करने और उद्यमियों को स्थानीय संसाधनों से वैश्विक व्यवसाय खड़ा करने में सक्षम बनाने के बारे में है। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के 5एफ विज़न— खेत से फाइबर, कपड़े से फैशन और विदेश तक—से प्रेरित, भारत की ग्रीन फाइबर क्रांति कोई दूर का सपना नहीं है। रणनीति तय है, संस्थान सक्रिय हैं, विज्ञान प्रमाणित हो चुका है, और उद्यमी तैयार हैं। आज भारत जो कर रहा है—फाइबर दर फाइबर, मिश्रण दर मिश्रण, क्षेत्र दर क्षेत्र, और खेत दर खेत—अपनी वस्त्र गाथा का अगला महान अध्याय लिख रहा है।

सेंटर फॉर AI, MBCIE – सैटेलाइट सेंटर IIT रोपड़ ने “एआई फॉर एजुकेटर्स” कार्यक्रम के 75 प्रतिभागियों के सफल स्नातक होने का उत्सव मनाया

लुधियाना / सत्ता संदेश

सेंटर फॉर एआई, एमबीसीआईई – सैटेलाइट सेंटर आईआईटी रोपड़ द्वारा एमबीसीआईई परिसर, बीसीएम स्कूल, लुधियाना स्थित माता ठाकुर देवी ऑडिटोरियम में “एआई फॉर एजुकेटर्स ग्रेजुएशन सेरेमनी 2026” (बैच-02) का आयोजन किया गया। यह समारोह उन शिक्षकों की उपलब्धियों का उत्सव था जिन्होंने नवाचार को अपनाते हुए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) के माध्यम से शिक्षा के भविष्य का नेतृत्व करने की दिशा में सफलतापूर्वक कार्यक्रम पूरा किया।

समारोह का शुभारंभ शैक्षणिक जुलूस (Academic Procession) एवं वंदे मातरम् से हुआ, जिसके बाद एमबीसीआईई के कार्यकारी निदेशक डॉ. प्रेम कुमार ने स्वागत भाषण देते हुए समारोह के औपचारिक उद्घाटन की घोषणा की।

सेंटर फॉर एआई रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए डॉ. प्रेम कुमार ने केंद्र की यात्रा, प्रमुख उपलब्धियों तथा शिक्षकों एवं पेशेवरों को भविष्य के लिए तैयार कौशल प्रदान करने में उसकी बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने एआई के नैतिक एवं जिम्मेदार उपयोग के महत्व को रेखांकित किया तथा एमबीसीआईई के चेयरमैन डॉ. सुनील कांत मुंजाल के दूरदर्शी नेतृत्व और हीरो साइकिल्स के प्रबंध निदेशक श्री एस.के. राय के सतत मार्गदर्शन के लिए आभार व्यक्त किया।

समारोह में मुख्य अतिथि श्री आदित्य मदान, विशिष्ट अतिथि श्री पंकज जोशी तथा अध्यक्षता अधिकारी श्री देवाकर जैन उपस्थित रहे।

अपने संबोधन में श्री पंकज जोशी ने रोजगार के क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के परिवर्तनकारी प्रभाव पर चर्चा की। उन्होंने शिक्षकों को विद्यार्थियों को केवल वर्तमान करियर ही नहीं, बल्कि एआई द्वारा सृजित होने वाले भविष्य के अवसरों के लिए भी तैयार करने का आह्वान किया। उन्होंने निरंतर सीखने, अनुकूलनशीलता तथा भविष्य-केंद्रित कौशलों के महत्व पर बल दिया।

श्री आदित्य मदान ने अपने संबोधन में शैक्षणिक संस्थानों और उद्योग जगत के बीच मजबूत सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने एमबीसीआईई द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की तथा आईआईटी इकोसिस्टम के साथ व्यापक एकीकरण के माध्यम से शिक्षकों और विद्यार्थियों के लिए अधिक अवसर सृजित करने की बात कही। उन्होंने प्रतिभागियों द्वारा विकसित कैपस्टोन परियोजनाओं की गुणवत्ता और उपयोगिता की प्रशंसा करते हुए उत्कृष्ट विचारों को आगे बढ़ाने में सहयोग का आश्वासन दिया।

अध्यक्षता अधिकारी श्री देवाकर जैन ने स्नातक शिक्षकों को बधाई देते हुए कहा कि व्यावसायिक जिम्मेदारियों के बावजूद पुनः विद्यार्थी बनना सराहनीय है। उन्होंने कहा कि तकनीक शिक्षा के स्वरूप को बदल सकती है, लेकिन मूल्यों का निर्माण, जिज्ञासा का विकास और विद्यार्थियों को प्रेरित करने में शिक्षक की भूमिका सदैव महत्वपूर्ण और अपरिहार्य रहेगी। उन्होंने प्रतिभागियों को विवेक और जिम्मेदारी के साथ नवाचार अपनाने तथा शिक्षा में परिवर्तन का नेतृत्व करने के लिए प्रेरित किया।

समारोह के दौरान कार्यक्रम के उत्कृष्ट प्रतिभागियों को उनकी असाधारण प्रतिबद्धता, नवाचारी सोच और प्रभावशाली परियोजनाओं के लिए पदक प्रदान कर सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण एआई फॉर एजुकेटर्स प्रोग्रामबैच 02 के प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान करना रहा। सभी स्नातक शिक्षकों को आजीवन सीखने की भावना तथा शिक्षा में एआई के सार्थक और जिम्मेदार उपयोग के प्रति उनकी प्रतिबद्धता के लिए सराहा गया।

समारोह का समापन गणमान्य अतिथियों के सम्मान, श्री नवदीप सिंह (हेडएकेडमिक्स) द्वारा धन्यवाद ज्ञापन, औपचारिक समापन घोषणा, राष्ट्रगान, समूह छायाचित्र तथा लंच एवं नेटवर्किंग सत्र के साथ हुआ।यह समारोह शिक्षकों की समर्पण भावना, जिज्ञासा और निरंतर सीखने के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक बना। सेंटर फॉर एआई, एमबीसीआईई – सैटेलाइट सेंटर आईआईटी रोपड़ ने भविष्य के लिए तैयार ऐसे शिक्षकों के समुदाय के निर्माण के अपने संकल्प को पुनः दोहराया, जो उभरती तकनीकों को अपनाने के साथ-साथ उद्देश्यपूर्ण, जिम्मेदार और प्रेरणादायक नेतृत्व प्रदान करें।

पूर्व विधायक मनप्रीत सिंह अयाली अकाली दल “वारिस पंजाब दें” में हुए शामिल

लुधियाना / सत्ता संदेश

अकाली दल “वारिस पंजाब दे” के वरिष्ठ नेता राजीव कुमार लवली ने कहा है कि तीन बार विधायक रहे और अनुभवी राजनेता मनप्रीत सिंह अयाली के पार्टी में शामिल होने से कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह है। उन्होंने अयाली को मालवा का निडर योद्धा करार देते हुए, कहा कि कई बड़ी राष्ट्रीय पार्टियों को छोड़कर उनके अकाली दल “वारिस पंजाब दे” में शामिल होने से जनहित में पार्टी की नीतियों को और मजबूती मिली है।

लवली ने कहा कि अयाली के पार्टी में शामिल होने से जहां पंजाब की राजनीति में ऊपरी स्तर पर नए समीकरण बने हैं, वहीं पर पार्टी कार्यकर्ताओं में इस बात को लेकर भी उत्साह है कि स्थापना के करीब दो वर्षों के भीतर ही पार्टी के पास दो सांसद और एक विधायक हो गए हैं। उन्होंने जोर देते हुए, कहा कि आने वाले दिनों में कई और लोग अकाली दल “वारिस पंजाब दे” में शामिल होते नजर आएंगे। लोग 2027 के विधानसभा चुनावों के बाद राज्य में भाई अमृतपाल सिंह के नेतृत्व वाली सरकार देखना चाहते हैं।

उन्होंने वरिष्ठ नेता अयाली और उनके साथियों का पार्टी कार्यकर्ताओं की ओर से जोरदार स्वागत किया तथा उम्मीद जताई कि उनका लगभग 25 वर्षों का राजनीतिक अनुभव पार्टी को आगे बढ़ाने और मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

पंजाब में कानून व्यवस्था पूरी तरह फेल: पूर्व विधायक डॉ. राज कुमार वेरका का मान सरकार पर हमला

पंजाब / सत्ता संदेश

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक डॉक्‍टर राज कुमार वेरका ने पंजाब की भगवंत मान सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पंजाब को संभालने में पूरी तरह विफल साबित हुई है और आम लोग भय के माहौल में जीवन जीने को मजबूर हैं। डॉक्‍टर वेरका ने कहा कि पंजाब में गुंडागर्दी, लूटपाट, फायरिंग, हत्या और जबरन वसूली जैसी घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। राज्य के विभिन्न हिस्सों में हो रही आपराधिक वारदातों ने लोगों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जेलों के भीतर भी गैंगस्टर गतिविधियां बढ़ रही हैं, लेकिन सरकार इस पर प्रभावी कार्रवाई करने में नाकाम है।

पूर्व विधायक ने कहा कि नशे की समस्या ने पंजाब के युवाओं को बुरी तरह प्रभावित किया है। ड्रग्स के कारण कई परिवार तबाह हो रहे हैं और युवा अपनी जान गंवा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि जनता अब आम आदमी पार्टी सरकार से निराश हो चुकी है और बदलाव चाहती है। डॉक्‍टर वेरका ने अमृतसर, लुधियाना, जालंधर और पटियाला में हाल ही में हुई आपराधिक घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसी घटनाओं ने लोगों की चिंता और असुरक्षा की भावना को बढ़ाया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करने वाले युवाओं, कर्मचारियों और शिक्षकों पर लाठीचार्ज किया गया, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में पंजाब की जनता अपने वोट के माध्यम से सरकार को जवाब देगी और राज्य में बदलाव लाएगी। अमृतसर से ब्‍यूरो रिपोर्ट टीम एनएनआर

सुरजीत रामपुरी जन्म शताब्दी वर्ष का उद्घाटन 12 जून को लुधियाना में डॉ. एस. पी. सिंह करेंगे।

लुधियाना / सत्ता संदेश

पंजाबी कवि सुरजीत रामपुरी जन्म शताब्दी वर्ष का उद्घाटन 12 जून को उनकी जयंती पर लुधियाना के गुजरांवाला गुरु नानक खालसा कॉलेज में सुबह 10.30 बजे किया जाएगा। उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी के पूर्व वाइस चांसलर डॉ. एस. पी. सिंह करेंगे।

इस मौके पर, जालंधर से डॉ. लखविंदर सिंह जोहल के एडिटरशिप में पंजाबी कविता पर छपने वाली एकमात्र मैगज़ीन “कवि लोक” का “सुरजीत रामपुरी स्पेशल इश्यू” पंजाबी लोक विरासत अकादमी, लुधियाना के चेयरमैन प्रो. गुरभजन सिंह गिल और उनके साथियों द्वारा लॉन्च किया जाएगा। इस स्पेशल इश्यू को सुरजीत रामपुरी के लंबे समय के साथी सुरिंदर रामपुरी ने एडिट किया है। वैंकूवर विचार मंच द्वारा संपादित और चेतना प्रकाशन द्वारा प्रकाशित “जरनैल सिंह आर्टिस्ट स्मृति ग्रंथ” का विमोचन भी इसी कार्यक्रम में डॉ. एस. पी. सिंह, डॉ. लखविंदर सिंह जोहल और प्रो. गुरभजन सिंह गिल द्वारा किया जाएगा। जरनैल सिंह आर्टिस्ट का जन्मदिन भी 12 जून को है।

इस कार्यक्रम में डॉ. लखविंदर सिंह जोहल, प्रो. गुरभजन सिंह गिल और सुरिंदर रामपुरी सुरजीत रामपुरी के बारे में संबोधित करेंगे।

सुरिंदर रामपुरी ने कहा कि “कवि लोक” के इस अंक में सुरजीत रामपुरी: एक शांतिपूर्ण और प्रेमपूर्ण दुनिया के कवि- गुरबचन सिंह भुल्लर, सुरजीत रामपुरी का गीत प्रगीत दा चेत अचेत- डॉ. वनिता, गायन कविता का शीर्षक: सुरजीत रामपुरी
-धर्म सिंह कमेआना, गुलाब की चाहत: सुरजीत रामपुरी-डॉ. परमिंदर सिंह बेनीपाल, ज़िंदगी ने हमें बहुत चाहा’-गगन दीप शर्मा
सुरजीत रामपुरी का गीत संग्रह ‘दर्द कहानी रतन दी’
माध्यम में गीत-संगीत-डॉ. सिमरनजीत सिंह, सतलुज के पोते-डॉ. आतम हमराही, बुद्ध नदी… अनुभवों की बहती नदी
-डॉ. सुखपाल कौर समराला
दर्द की खूबसूरती का चितेरा: सुरजीत रामपुरी-डॉ. सरबजीत सिंह को याद करते हुए, सुरजीत रामपुरी जी
-गुरभजन सिंह गिल (प्रो.)
मेरे पिता मेरे ब्रह्मा हैं-कमलप्रीत कौर,मेरा भाई-सुरजीत रामपुरी-हरनेक सिंह रामपुरी,सूक्ष्म भावनाओं के कवि: सुरजीत रामपुरी
-राम सरूप अणखी,नरम हृदय वाले कवि,भूपिंदर सिंह पीसीएस
-मन में महक: सुरजीत रामपुरी-तेलू राम कुहारा,
सुरजीत रामपुरी: एक सच्चे कवि-डॉ. रणधीर सिंह चाँद, सुरजीत रामपुरी की कविता में प्रस्तुत प्रगतिशील अनुभव, काव्य पुस्तक “पीढ़ां दी खुशबू” पर आधारित-डॉ. सरदूल सिंह औजला, ‘अकेलेपन के गीत’ एक विश्लेषण-प्रिंसिपल तख्त सिंह, आदरणीय सुरजीत रामपुरी-ब्रह्मजगदीश सिंह, एक कविता का मूल्यांकन कमल का अवतार-प्रिंस. करतार सिंह कालरा, सुरजीत रामपुरी: कविता और सोच की खासियत – डॉ. बलजीत कौर रियार, आवाज़ और ध्यान का मेल

  • जसवंत सिंह कंवल, एक हेल्दी सोच रखने वाला – एक शानदार पेंटर, तीन यादें – सुखमिंदर रामपुरी
    सूफी दोस्तों का पता – भगवंत सिंह, आम लोगों का कवि – अमर हांडा
    मौकों को भुनाने की स्ट्रेटेजी – डॉ. सैन सेवक, अनजान लोगों का कवि – गुरदयाल दलाल, कविता की पहचान: सुरजीत रामपुरी
  • मनमोहन सिंह दौन, आग की तरह जलते हुए – प्रो. सुलखन इस ग्रैंड से मिलिए…सुरजीत रामपुरी
    दर्द भरी रातों की कहानी-सुरिंदर रामपुरी, मेरी कविता का सफ़र
    -सुरजीत रामपुरी, मिलिट्री लाइफ की यादें-सुरजीत रामपुरी
    तुम सुरजीत रहोगे दुनिया में-इंदरजीत हसनपुरी
    रामपुर स्कूल ऑफ़ पोएट्री
    -सुरजीत रामपुरी
    लाइफ डिटेल्स – सुरजीत रामपुरी, सुरजीत रामपुरी के कामों में इंसानियत की सोच
    की परछाई यादें,
    दलजीत कौर चाना,
    -उल्फत बाजवा, एक पुरानी याद-सतीश गुलाटी
    वह एक आवाज़ थे-रविंदर भट्टल, अकेलेपन के देवता
    हरभजन सिंह मंगत
    उनकी कलम से फूल खिले-
    साधु राम शर्मा रामपुरी
    कवि सुरजीत-गुरसेवक सिंह ढिल्लों और कई अन्य के लेख
    शामिल किए गए हैं।
पंजाब में चालू खरीफ सीजन के लिए यूरिया की कोई किल्लत नहीं; मांग के मुकाबले 10.71 लाख मीट्रिक टन की रिकॉर्ड उपलब्धता सुनिश्चित

नई दिल्ली / पंजाब / सत्ता संदेश

भारत सरकार के रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के अंतर्गत उर्वरक विभाग ने साफ कहा है कि पंजाब राज्य में चालू खरीफ 2026 सीजन लिए यूरिया की उपलब्धता पूरी तरह बनी हुई है। । सरकार ने देश के अन्नदाताओं को आश्वस्त किया है कि धान की रोपाई की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए जमीनी स्तर पर मजबूत आपूर्ति और पर्याप्त बफर स्टॉक मौजूद है ।

पंजाब में यूरिया की वर्तमान उपलब्धता

खरीफ 2026 सीजन के लिए पंजाब की कुल आवश्यकता 14.50 लाख मीट्रिक टन (LMT) अनुमानित है । चालू सीजन में 9 जून 2026 तक की आनुपातिक (pro rata) आवश्यकता 9.0 LMT की थी, जिसके मुकाबले उर्वरक विभाग ने राज्य में 10.71 LMT यूरिया की उपलब्धता पहले ही सुनिश्चित कर दी है । इस अवधि के दौरान राज्य में यूरिया की वास्तविक बिक्री 6.25 LMT रही है, जिसके बाद भी वर्तमान में 4.46 LMT का बड़ा क्लोजिंग स्टॉक राज्य के पास उपलब्ध है । इसके अतिरिक्त, 39,167 मीट्रिक टन यूरिया इस समय रास्ते में (In-transit) है, जिससे राज्य में कुल उपलब्ध स्टॉक की स्थिति 4.85 LMT पहुंच जाती है ।

अमृतसर जिले में उर्वरकों की स्थिति:

अमृतसर जिले में चालू खरीफ सीजन में अब तक कुल 64,720 मीट्रिक टन यूरिया उपलब्ध कराया गया है, जिसमें से आज की तारीख में 32,956 मीट्रिक टन यूरिया का सुरक्षित स्टॉक जिले में मौजूद है ।

ऐतिहासिक रबी सीजन का रिकॉर्ड:

पिछले रबी 2025-26 सीजन में भी पंजाब की 15.00 LMT की अनुमानित मांग के विपरीत केंद्र सरकार ने 19.43 LMT की रिकॉर्ड उपलब्धता सुनिश्चित की थी, जिसमें कुल बिक्री 15.45 LMT दर्ज की गई थी ।

अग्रिम भंडारण की कारगर रणनीति

खरीफ सीजन के सुचारू संचालन के लिए केंद्र सरकार ने दूरदर्शी रणनीति के तहत काम किया है। इस वर्ष जनवरी 2026 से मार्च 2026 के बीच पंजाब की 3.50 LMT की संयुक्त आवश्यकता के मुकाबले 6.08 LMT यूरिया की आपूर्ति पहले ही कर दी गई थी । इस तरह सीजन की शुरुआत से पहले ही 2.58 LMT अतिरिक्त यूरिया का अग्रिम भंडारण (Pre-positioning) सुनिश्चित किया गया था ।

पंजाब में यूरिया की खपत की गति में इस बार उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है । 1 मार्च 2026 से 9 जून 2026 के बीच राज्य में 7.86 LMT यूरिया की बिक्री हुई है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की बिक्री (7.10 LMT) से 76 हजार मीट्रिक टन अधिक है । इस भारी अग्रिम उठाव और पिछले रबी में अनुमान से 45,000 मीट्रिक टन अधिक हुई बिक्री के कारण राज्य सरकार के तात्कालिक बफर पर दबाव पड़ा था, लेकिन केंद्र सरकार द्वारा लगातार इसकी प्रतिपूर्ति की जा रही है ।

वैश्विक भू-राजनीतिक चुनौतियां और भारत की उर्वरक रणनीति

वर्तमान में वैश्विक स्तर पर उर्वरक आपूर्ति श्रृंखला गंभीर भू-राजनीतिक संकटों से प्रभावित रही है । विशेष रूप से अमेरिका-इजरायल व ईरान संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूरिया की उपलब्धता और समुद्री परिवहन पर प्रतिकूल असर पड़ा है ।

इन वैश्विक प्रतिकूलताओं के बावजूद, भारत सरकार ने अपने घरेलू कृषि क्षेत्र को पूरी तरह सुरक्षित रखा है । इसके लिए उर्वरक विभाग ने प्राकृतिक गैस की तत्काल खरीद (Spot Procurement) हेतु ईपीएमसी (EPMC) तंत्र को सक्रिय किया, जिससे घरेलू यूरिया उत्पादन को उल्लेखनीय गति मिली । इसके साथ ही, पूरे कैलेंडर वर्ष के दौरान रणनीतिक रूप से आयात को सुचारू रखा गया, जिससे देश और विशेष रूप से पंजाब राज्य को निर्बाध आपूर्ति मिलती रही ।

राज्यों का दायित्व और प्रवर्तन (Enforcement) के कड़े निर्देश:

भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि जहां थोक में पर्याप्त स्टॉक सुनिश्चित करना केंद्र की जिम्मेदारी है, वहीं राज्य के भीतर विभिन्न जिलों और एक जिले से दूसरे जिले में इसका समान और सुचारू वितरण सुनिश्चित करना पूरी तरह राज्य सरकार का दायित्व है ताकि किसी भी क्षेत्र में कृत्रिम कमी न होने पाए ।

सब्सिडी वाले यूरिया का दुरुपयोग रोकने और यह केवल वास्तविक किसानों तक ही पहुंचे, इसके लिए सचिव (कृषि एवं किसान कल्याण) तथा सचिव (उर्वरक विभाग) की सह-अध्यक्षता में राज्य के उच्चाधिकारियों के साथ निरंतर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के माध्यम से समीक्षा बैठकें आयोजित की गई हैं । राज्य सरकारों को निर्देश दिए गए हैं कि:

रियायती यूरिया को गैर-कृषि या औद्योगिक उपयोग में डायवर्ट करने वाले तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए ।

जमाखोरी और कालाबाजारी में करने वाले असामाजिक तत्वों के खिलाफ तुरंत और कड़े कदम उठाए जाएं ।

वर्तमान में पंजाब में धान की रोपाई पूरी तरह गति पकड़ने वाली है, और राज्य के पास इस मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त संसाधन मौजूद हैं । सभी उर्वरक उत्पादक और आयातक कंपनियों को राज्य सरकार की वास्तविक मांग के हिसाब से उपलब्धता का ठीक से प्रबंधन करने की सलाह दी गई है । भारत सरकार राज्य सरकार के साथ निरंतर संपर्क में है और किसानों के हितों की रक्षा के लिए चौबीसों घंटे स्थिति की निगरानी कर रही है ।