ब्रेकिंग न्यूज़
अमृतसर में 50 हजार किसानों की महापंचायत, US ट्रेड एग्रीमेंट और बाढ़ मुआवजे का मुद्दा

अमृतसर में भारतीय किसान यूनियन एकता संघर्ष की महापंचायत में US ट्रेड एग्रीमेंट और पंजाब के बाढ़ प्रभावित किसानों को मुआवजा नहीं मिलने का मुद्दा उठाया गया। करीब 50 हजार किसानों के पहुंचने का दावा।

अमृतसर / सत्ता संदेश

अमेरिका के साथ प्रस्तावित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट और पंजाब के बाढ़ प्रभावित किसानों को मुआवजा नहीं मिलने के मुद्दे पर भारतीय किसान यूनियन एकता संघर्ष की ओर से अमृतसर में बड़ी महापंचायत आयोजित की जा रही है। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष पलविंदर सिंह मल ने दावा किया कि महापंचायत में करीब 50 हजार किसानों के शामिल होने की उम्मीद है।

महापंचायत में पंजाब के अलग-अलग जिलों से किसान नेता, किसान संगठन और वक्ता पहुंच रहे हैं। आयोजकों के मुताबिक, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में किसान इस महापंचायत में शामिल हो रहे हैं।

US ट्रेड एग्रीमेंट का विरोध

किसान नेता पलविंदर सिंह मल ने कहा कि किसानों का मुख्य विरोध अमेरिका के साथ होने वाले ट्रेड एग्रीमेंट को लेकर है। उनका आरोप है कि इस तरह के समझौतों का असर किसानों के साथ-साथ छोटे व्यापारियों और दुकानदारों पर भी पड़ सकता है।

उन्होंने कहा कि किसान ऐसा कोई फैसला स्वीकार नहीं करेंगे, जिससे देश के कृषि क्षेत्र और किसानों के हित प्रभावित हों। किसान संगठन का कहना है कि कृषि क्षेत्र को लेकर सरकार को किसी भी अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौते में किसानों के हितों को प्राथमिकता देनी चाहिए।

बाढ़ प्रभावित किसानों को मुआवजे का मुद्दा

महापंचायत में पंजाब में आई बाढ़ से हुए नुकसान और प्रभावित किसानों को मुआवजा नहीं मिलने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया जा रहा है।

पलविंदर सिंह मल ने पंजाब सरकार पर आरोप लगाया कि सरकार विज्ञापनों और मीडिया के माध्यम से 100 प्रतिशत मुआवजा देने के दावे कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर कई प्रभावित किसानों और लोगों को अभी तक इसका पूरा लाभ नहीं मिला है।

उन्होंने कहा कि बाढ़ से किसानों की फसल, जमीन और अन्य संपत्तियों को भारी नुकसान हुआ है। ऐसे में प्रभावित परिवारों को जल्द और पूरा मुआवजा मिलना चाहिए।

माझा समेत कई जिलों से पहुंच रहे किसान

किसान नेता के अनुसार, पंजाब के अलग-अलग हिस्सों से किसान महापंचायत में पहुंच रहे हैं। खास तौर पर माझा क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित इलाकों से भी बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने का दावा किया गया है।

उन्होंने कहा कि किसानों के मुद्दों को लेकर यह महापंचायत आने वाले संघर्ष की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

केंद्र सरकार पर भी साधा निशाना

पलविंदर सिंह मल ने केंद्र सरकार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि पहले केंद्र की ओर से यह कहा जाता रहा है कि कृषि क्षेत्र को ट्रेड एग्रीमेंट से बाहर रखा गया है। लेकिन अब सामने आ रहे बयानों को लेकर किसानों के बीच चिंता बढ़ रही है।

उन्होंने कहा कि किसानों को आशंका है कि किसी भी ऐसे व्यापार समझौते का असर भारतीय कृषि और किसानों की आय पर पड़ सकता है।

संघर्ष तेज करने की चेतावनी

किसान नेता ने चेतावनी दी कि यदि केंद्र और पंजाब सरकार ने किसानों की मांगों को गंभीरता से नहीं लिया तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि बड़ी महापंचायतें धीरे-धीरे जन आंदोलन का रूप ले सकती हैं। महापंचायत के मंच से ही आगे की रणनीति का ऐलान किए जाने की बात भी कही गई है।

पलविंदर सिंह मल ने कहा कि किसान अपने अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे और सरकारों पर किसानों की मांगें मानने के लिए दबाव बनाया जाएगा।

लुधियाना में लाडोवाल टोल फ्री: किसानों ने फूंका अमित शाह का पुतला, जर्जर सड़कों और रुके हुए डैम प्रोजेक्ट पर फूटा गुस्सा

लुधियाना: भारतीय किसान मजदूर यूनियन (पंजाब) ने अपनी लंबित मांगों को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए आज लुधियाना के लाडोवाल टोल प्लाजा को पूरी तरह ‘फ्री’ करा दिया है। प्रदर्शन के दौरान किसान कार्यकर्ताओं ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का पुतला फूंका और सरकार को चेतावनी दी कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जातीं, आंदोलन जारी रहेगा।

विरोध प्रदर्शन के मुख्य कारण:

सफेद हाथी बना ससराली डैम: किसान नेताओं का आरोप है कि हल्का साहनेवाल के ससराली गांव में बना डैम केवल कागजों और तामझाम तक सीमित है। इसका उद्घाटन तो कर दिया गया, लेकिन अब तक टेंडर प्रक्रिया शुरू न होने के कारण काम ठप पड़ा है, जिससे फसलों की सिंचाई और जल प्रबंधन बुरी तरह प्रभावित है।

राहों रोड की खस्ताहाल स्थिति: किसान लंबे समय से राहों रोड की जर्जर हालत को लेकर शिकायत कर रहे हैं। उनका कहना है कि कई प्रदर्शनों और डिमांड लेटर देने के बावजूद सड़क निर्माण का काम शुरू नहीं हुआ है।

सड़कों पर अवैध पार्किंग: सड़क के बीचों-बीच खड़ी होने वाली गाड़ियों के कारण आए दिन हादसे और ट्रैफिक जाम हो रहे हैं, जिस पर प्रशासन कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है।

टोल अधिकारियों की ‘चालाकी’ पर नजर: पिछली बार धरना खत्म होने के बाद कई यात्रियों के मोबाइल से टोल कटने के मैसेज आए थे। इस बार यूनियन ने साफ कर दिया है कि वे यह सुनिश्चित करेंगे कि टोल फ्री के दौरान किसी भी वाहन चालक का पैसा बाद में न कटे।

प्रशासनिक अलर्ट: मौके पर स्थिति को देखते हुए लाडोवाल टोल प्लाजा पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। किसानों का कहना है कि यह केवल उनकी लड़ाई नहीं, बल्कि सड़क की खराब हालत और टोल की मार झेल रहे हर आम नागरिक की साझा लड़ाई है।

बरनाला-बठिंडा हाईवे पर रणक्षेत्र बना तपा: किसानों और पुलिस में हिंसक झड़प, बैरिकेड्स उखाड़े; 53 प्रदर्शनकारी गिरफ्तार

पंजाब डेस्क : पंजाब के बरनाला-बठिंडा नेशनल हाईवे पर तपा के पास शुक्रवार, 6 फरवरी 2026 को किसानों और पुलिस के बीच जबरदस्त टकराव देखने को मिला,। भारतीय किसान यूनियन (एकता उगराहां) के नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों को जब पुलिस ने रोकने की कोशिश की, तो स्थिति तनावपूर्ण हो गई और दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए।

झड़प का मुख्य कारण: बीकेयू (एकता उगराहां) के जिला अध्यक्ष चमकौर सिंह नैनेवाल के अनुसार, यह पूरा विवाद बठिंडा जिले के गांव जींद में लगभग 700 एकड़ जमीन से जुड़ा है। किसानों का आरोप है कि इस मामले में उन्हें न्याय दिलाने के बजाय प्रशासन द्वारा परेशान किया जा रहा है। किसान नेताओं ने दावा किया कि सरनदीप सिंह और बलदेव सिंह जैसे किसानों पर झूठे मुकदमे दर्ज किए गए हैं और जेल में बंद सरनदीप को उसकी मां की मृत्यु के बाद भी रिहा नहीं किया गया, जिससे किसानों में गहरा रोष है।

बैरिकेड्स तोड़कर आगे बढ़े किसान: प्रदेश अध्यक्ष जोगिंदर सिंह उगराहां के आह्वान पर किसानों ने बरनाला में डीसी कार्यालय के बाहर बड़े प्रदर्शन की घोषणा की थी। हाईवे पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था और एसएसपी मोहम्मद सरफराज आलम की मौजूदगी में वॉटर कैनन और बैरिकेडिंग के जरिए किसानों को रोकने की कोशिश की गई।

हालांकि, प्रदर्शनकारी किसानों, जिनमें महिलाएं और बुजुर्ग भी शामिल थे, ने पुलिस के बैरिकेड्स उखाड़ फेंके और बाजार क्षेत्र की सुरक्षा घेराबंदी को तोड़ते हुए बठिंडा की ओर कूच किया।

पुलिस कार्रवाई और गिरफ्तारियां: हंगामे और झड़प के बाद पुलिस ने सख्त रुख अपनाते हुए करीब 53 किसानों को गिरफ्तार कर लिया है,। पुलिस द्वारा रोकने के प्रयासों के बावजूद किसानों का जत्था आगे बढ़ता रहा, जिससे पूरे इलाके में देर शाम तक तनाव का माहौल बना रहा। किसान नेताओं ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनके खिलाफ दर्ज मामले रद्द नहीं होते, उनका आंदोलन जारी रहेगा।