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लुधियाना में लाडोवाल टोल फ्री: किसानों ने फूंका अमित शाह का पुतला, जर्जर सड़कों और रुके हुए डैम प्रोजेक्ट पर फूटा गुस्सा

लुधियाना: भारतीय किसान मजदूर यूनियन (पंजाब) ने अपनी लंबित मांगों को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए आज लुधियाना के लाडोवाल टोल प्लाजा को पूरी तरह ‘फ्री’ करा दिया है। प्रदर्शन के दौरान किसान कार्यकर्ताओं ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का पुतला फूंका और सरकार को चेतावनी दी कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जातीं, आंदोलन जारी रहेगा।

विरोध प्रदर्शन के मुख्य कारण:

सफेद हाथी बना ससराली डैम: किसान नेताओं का आरोप है कि हल्का साहनेवाल के ससराली गांव में बना डैम केवल कागजों और तामझाम तक सीमित है। इसका उद्घाटन तो कर दिया गया, लेकिन अब तक टेंडर प्रक्रिया शुरू न होने के कारण काम ठप पड़ा है, जिससे फसलों की सिंचाई और जल प्रबंधन बुरी तरह प्रभावित है।

राहों रोड की खस्ताहाल स्थिति: किसान लंबे समय से राहों रोड की जर्जर हालत को लेकर शिकायत कर रहे हैं। उनका कहना है कि कई प्रदर्शनों और डिमांड लेटर देने के बावजूद सड़क निर्माण का काम शुरू नहीं हुआ है।

सड़कों पर अवैध पार्किंग: सड़क के बीचों-बीच खड़ी होने वाली गाड़ियों के कारण आए दिन हादसे और ट्रैफिक जाम हो रहे हैं, जिस पर प्रशासन कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है।

टोल अधिकारियों की ‘चालाकी’ पर नजर: पिछली बार धरना खत्म होने के बाद कई यात्रियों के मोबाइल से टोल कटने के मैसेज आए थे। इस बार यूनियन ने साफ कर दिया है कि वे यह सुनिश्चित करेंगे कि टोल फ्री के दौरान किसी भी वाहन चालक का पैसा बाद में न कटे।

प्रशासनिक अलर्ट: मौके पर स्थिति को देखते हुए लाडोवाल टोल प्लाजा पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। किसानों का कहना है कि यह केवल उनकी लड़ाई नहीं, बल्कि सड़क की खराब हालत और टोल की मार झेल रहे हर आम नागरिक की साझा लड़ाई है।

बरनाला-बठिंडा हाईवे पर रणक्षेत्र बना तपा: किसानों और पुलिस में हिंसक झड़प, बैरिकेड्स उखाड़े; 53 प्रदर्शनकारी गिरफ्तार

पंजाब डेस्क : पंजाब के बरनाला-बठिंडा नेशनल हाईवे पर तपा के पास शुक्रवार, 6 फरवरी 2026 को किसानों और पुलिस के बीच जबरदस्त टकराव देखने को मिला,। भारतीय किसान यूनियन (एकता उगराहां) के नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों को जब पुलिस ने रोकने की कोशिश की, तो स्थिति तनावपूर्ण हो गई और दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए।

झड़प का मुख्य कारण: बीकेयू (एकता उगराहां) के जिला अध्यक्ष चमकौर सिंह नैनेवाल के अनुसार, यह पूरा विवाद बठिंडा जिले के गांव जींद में लगभग 700 एकड़ जमीन से जुड़ा है। किसानों का आरोप है कि इस मामले में उन्हें न्याय दिलाने के बजाय प्रशासन द्वारा परेशान किया जा रहा है। किसान नेताओं ने दावा किया कि सरनदीप सिंह और बलदेव सिंह जैसे किसानों पर झूठे मुकदमे दर्ज किए गए हैं और जेल में बंद सरनदीप को उसकी मां की मृत्यु के बाद भी रिहा नहीं किया गया, जिससे किसानों में गहरा रोष है।

बैरिकेड्स तोड़कर आगे बढ़े किसान: प्रदेश अध्यक्ष जोगिंदर सिंह उगराहां के आह्वान पर किसानों ने बरनाला में डीसी कार्यालय के बाहर बड़े प्रदर्शन की घोषणा की थी। हाईवे पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था और एसएसपी मोहम्मद सरफराज आलम की मौजूदगी में वॉटर कैनन और बैरिकेडिंग के जरिए किसानों को रोकने की कोशिश की गई।

हालांकि, प्रदर्शनकारी किसानों, जिनमें महिलाएं और बुजुर्ग भी शामिल थे, ने पुलिस के बैरिकेड्स उखाड़ फेंके और बाजार क्षेत्र की सुरक्षा घेराबंदी को तोड़ते हुए बठिंडा की ओर कूच किया।

पुलिस कार्रवाई और गिरफ्तारियां: हंगामे और झड़प के बाद पुलिस ने सख्त रुख अपनाते हुए करीब 53 किसानों को गिरफ्तार कर लिया है,। पुलिस द्वारा रोकने के प्रयासों के बावजूद किसानों का जत्था आगे बढ़ता रहा, जिससे पूरे इलाके में देर शाम तक तनाव का माहौल बना रहा। किसान नेताओं ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनके खिलाफ दर्ज मामले रद्द नहीं होते, उनका आंदोलन जारी रहेगा।