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MLA सिद्धू ने 42.67 लाख रुपये की RMC रोड का उद्घाटन किया

लुधियाना / सत्ता संदेश

आत्म नगर विधानसभा क्षेत्र से MLA कुलवंत सिंह सिद्धू ने 42.67 लाख रुपये की लागत से सड़क बनाने के काम का उद्घाटन किया।

MLA सिद्धू ने कहा कि इस प्रोजेक्ट के तहत जीत हलवाई चौक से इट्टन वाला चौक तक RMC रोड बनाई जाएगी। उन्होंने कहा कि इस सड़क की हालत काफी समय से खराब थी और गड्ढों और पहाड़ियों की वजह से राहगीरों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था और अक्सर ट्रैफिक जाम रहता था। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों ने इलाके का जायजा नहीं लिया लेकिन अब सड़क बनने के बाद ट्रैफिक आसानी से चलेगा।

इस मौके पर MLA सिद्धू के साथ वार्ड इंचार्ज जगदीप सिंह रिंकू, पार्षद जगमीत सिंह नोनी, पार्षद सोहन सिंह गोगा, चेयरमैन रेशम सग्गू, बलविंदर सिंह, सतवंत सिंह मथारू, नीलम लखनपाल, ब्लॉक अध्यक्ष विपन सेठी, जसविंदर सिंह ठुकराल, सुमेश कोचर, अशोक कुमार, गगन मान और दूसरे साथी मौजूद थे।

आतम नगर हलके को विकास के मामले में लीडर बनाने का वादा दोहराते हुए MLA सिद्धू और उनकी टीम ने कहा कि नई सड़क बनाने का काम युद्ध स्तर पर किया गया। उन्होंने कहा कि हमारी कोशिश है कि हलके की कोई भी सड़क मरम्मत से वंचित न रहे। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार गांवों और शहरों के बीच सड़क कनेक्टिविटी को भी बेहतर बनाने के लिए लगातार कोशिश कर रही है।

रायपुर में 250 इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव के लिए 175 करोड़ की रेलवे परियोजना को मंजूरी

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

भारतीय रेलवे ने लोकोमोटिव रखरखाव अवसंरचना को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इसके अंतर्गत दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के अंतर्गत रायपुर स्थित हाई हॉर्स पावर डीजल शेड में 250 थ्री फेज इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव के लिए अतिरिक्त होमिंग सुविधाएं बनाने के उद्देश्‍य से 175 करोड़ रुपए की परियोजना को मंजूरी दी है।

होमिंग का तात्पर्य किसी लोकोमोटिव को एक निर्दिष्ट लोकोमोटिव शेड में जगह देने से है, जो उसके प्राथमिक रखरखाव केंद्र के रूप में कार्य करता है। होमिंग शेड की सुविधा लोकोमोटिव के निर्धारित रखरखाव, सुरक्षा निरीक्षण, मरम्मत और समग्र देखभाल के लिए होती है ताकि उसका सुरक्षित और कुशल संचालन सुनिश्चित हो सके।

यह परियोजना भारतीय रेलवे द्वारा इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव बेड़े के तेजी से विस्तार और पूरे नेटवर्क में माल ढुलाई तथा यात्री परिचालन में वृद्धि के अनुरूप रखरखाव बुनियादी ढांचे को बढ़ाने की दिशा में चल रहे प्रयासों के तहत स्वीकृत की गई है।

इन अतिरिक्त होमिंग सुविधाओं से भारतीय रेलवे को रायपुर डिपो में मौजूदा बुनियादी ढांचे का बेहतर उपयोग करने में मदद मिलेगी, साथ ही भविष्य में तकनीकी विस्तार के लिए आवश्यक स्थान भी उपलब्ध होगा।

कैबिनेट ने यूपी में NH-34 के कानपुर-कबराई 4/6 लेन एक्सप्रेसवे को ₹7,145 करोड़ की मंजूरी

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने आज राष्ट्रीय राजमार्ग (ओ) कार्यक्रम के अंतर्गत भोपाल-कानपुर आर्थिक गलियारे के एक महत्वपूर्ण खंड के रूप में 117.7 किलोमीटर लंबे कानपुर-कबराई एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड राजमार्ग के निर्माण को मंजूरी दे दी है। यह चार लेन का एक्सेस-कंट्रोल्ड गलियारा है जिसमें भविष्य में छह लेन तक विस्तारित करने की व्यवस्था भी है। 7145.14 करोड़ रुपये की अनुमानित कुल पूंजी लागत वाली इस परियोजना को भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा बीओटी (टोल) मोड पर कार्यान्वित किया जाएगा, साथ ही एनएच-34 के मौजूदा कानपुर-कबराई खंड का संचालन और रखरखाव भी किया जाएगा।

यह परियोजना कानपुर और कबराई के बीच निर्बाध, उच्च गति की कनेक्टिविटी प्रदान करेगी, साथ ही सागर, भोपाल और मध्य प्रदेश के अन्य हिस्सों तक आगे की कनेक्टिविटी को मजबूत करेगी, जिससे उत्तर प्रदेश के औद्योगिक और वाणिज्यिक केंद्रों को मध्य प्रदेश के खनिज-समृद्ध, विनिर्माण और कृषि क्षेत्रों से जोड़ने वाला एक आधुनिक पहुंच नियंत्रित आर्थिक गलियारा बनेगा और इस प्रकार इसमें सुधार होगा।

80-100 किमी प्रति घंटे की परिचालन गति के लिए डिज़ाइन किया गया यह कॉरिडोर कानपुर और कबराई के बीच यात्रा समय को 3.5 घंटे से घटाकर 1.5 घंटे (58 प्रतिशत) कर देगा, साथ ही सड़क सुरक्षा में सुधार करेगा, वाहन परिचालन लागत को कम करेगा और यात्री एवं माल यातायात की कुशल आवाजाही को सुगम बनाएगा। यह परियोजना एनएच-34, एनएच-35, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, कानपुर रिंग रोड और राज्य राजमार्ग एसएच-46, एसएच-91, एसएच-10बी और एसएच-42 के साथ रणनीतिक संपर्क भी प्रदान करेगी, जिससे क्षेत्रीय राजमार्ग नेटवर्क के साथ एकीकरण मजबूत होगा। यह कॉरिडोर कबराई खनन क्षेत्र से संपर्क को और मजबूत करेगा, खनिजों, औद्योगिक वस्तुओं, निर्माण सामग्री और कृषि उत्पादों की आवाजाही में सुधार करेगा, जिससे रसद दक्षता, आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती और क्षेत्रीय आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।

पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अनुरूप, यह परियोजना 16 आर्थिक नोड से कनेक्टिविटी में सुधार करेगी, जिनमें उन्नाव, बंथर, पंखी, रनिया, जैनपुर, रूमा, चकेरी, सुमेरपुर और भूरागढ़ औद्योगिक क्षेत्र, ट्रांस गंगा इंटीग्रेटेड टाउनशिप, ग्रोथ सेंटर जयपुर, कानपुर नगर नोड और बंगाल केमिकल्स एंड फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड शामिल हैं। यह 9 सोशल नोड, अर्थात् फतेहपुर, महोबा, कानपुर जूलॉजिकल पार्क, बुद्ध पार्क, जेके मंदिर और जेके मंदिर से कनेक्टिविटी को भी मजबूत करेगी। गार्डन, राधा कृष्ण मंदिर, सिद्धेश्वर महादेव मंदिर, गोपेश्वर मंदिर और महोबा पर्यटक स्थल, और 10 लॉजिस्टिक नोड, जिनमें कानपुर, घाटमपुर, हमीरपुर, महोबा, कबरई, भरवा सुमेरपुर और बांदा रेलवे स्टेशन, साथ में कानपुर, चकेरी और खजुराहो हवाई अड्डे शामिल हैं।

कुल मिलाकर, पीएम गतिशक्ति के उद्देश्यों को आगे बढ़ाते हुए, बुंदेलखंड और उत्तर प्रदेश तथा मध्य प्रदेश के आसपास के क्षेत्रों में रसद प्रतिस्पर्धात्मकता, औद्योगिक विकास और आर्थिक विकास में सुधार करना इसका लक्ष्‍य है।

इस परियोजना से निर्माण के दौरान प्रति लेन प्रति किलोमीटर लगभग 11,188 प्रत्यक्ष और 13,985 अप्रत्यक्ष मानव-दिवस रोजगार सृजित होने की उम्मीद है। वित्त वर्ष 2028 तक इसकी वार्षिक औसत दैनिक यातायात (एएडीटी) लगभग 18,069 यात्री कार इकाइयों (पीसीयू) तक पहुंचने का अनुमान है, जो इसके दीर्घकालिक आर्थिक, रसद और परिवहन महत्व को दर्शाता है। इस प्रकार प्रस्तावित परियोजना से लगभग 1.2 करोड़ मानव-दिवस प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होगा।

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की गुणवत्ता व रखरखाव की समीक्षा की

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने नई दिल्ली में आयोजित अलग-अलग समीक्षा बैठकों में तेलंगाना में 4,931 किमी, जम्मू एवं कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश में 2,035 किमी और लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश में 804 किमी के राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की गुणवत्ता, रखरखाव और प्रगति की समीक्षा की।

मीडिया रिपोर्टों, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों के माध्यम से प्राप्त फीडबैक और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, राष्ट्रीय राजमार्ग एवं अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड के अधिकारियों और परियोजना ठेकेदारों से प्राप्त इनपुट के आधार पर ये समीक्षाएं की गईं।

मंत्री ने बैठक के दौरान चल रही परियोजनाओं, रखरखाव गतिविधियों और सुरक्षित, कुशल और टिकाऊ राजमार्ग अवसंरचना के निर्माण को सुनिश्चित करने के लिए अपनाए जा रहे उपायों की स्थिति का आकलन किया। उन्होंने गुणवत्ता और जवाबदेही के उच्चतम मानकों को बनाए रखते हुए परियोजना कार्यान्वयन में तेजी लाने की आवश्यकता पर बल दिया।

नितिन गडकरी ने अधिकारियों और कार्यकारी एजेंसियों को निगरानी तंत्र को मजबूत करने, कार्यों को समय पर पूरा करने और राजमार्ग गलियारों की स्थायित्व, आरामदायक यात्रा और दीर्घकालिक प्रदर्शन में सुधार के लिए उन्नत निर्माण प्रौद्योगिकियों और सर्वक्षेष्ठ प्रणालियों को अपनाने का निर्देश दिया। उन्होंने क्षेत्रीय संपर्क बढ़ाने, आर्थिक विकास को गति देने, पर्यटन को बढ़ावा देने और यात्रियों की सुविधा में सुधार के लिए सुव्यवस्थित सड़क अवसंरचना के महत्व पर जोर दिया।

उन्होंने परियोजना के सभी हिस्सों में मानसून की व्यापक तैयारियों की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने अधिकारियों को प्रभावी जल निकासी प्रबंधन, ढलान स्थिरीकरण और संरक्षण कार्य तथा मौसम-संबंधी व्यवधानों से निपटने के लिए त्वरित प्रतिक्रिया प्रणालियों की तैनाती सहित निवारक और शमन उपाय करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि ये उपाय निर्बाध संपर्क, सड़क सुरक्षा और राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क की मजबूती सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक हैं।

भारत के बढ़ते डेटा सेंटर सेक्‍टर से एक लाख इंजीनियरिंग रोजगारों का सृजन होने की उम्मीद: डॉ. जितेंद्र सिंह


भारत डेटा सेंटर अर्थव्यवस्था में विश्व का नेतृत्व कर सकता है; सरकार उद्योग जगत के साथ मिलकर काम करने के लिए तैयार है: डॉ. जितेंद्र सिंह

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत अब विदेशों की सफलता की कहानियों का इंतजार नहीं करता; आज दुनिया अत्याधुनिक तकनीकों में भारत के साथ साझेदारी करना चाहती है

कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम और स्वच्छ ऊर्जा भारत की अगली तकनीकी क्रांति को शक्ति प्रदान करेंगे: डॉ. जितेंद्र सिंह

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत निवारण, पेंशन, परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज कहा कि भारत एक निर्णायक दौर में प्रवेश कर रहा है, जहां डेटा सेंटर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम प्रौद्योगिकी और अगली पीढ़ी के डिजिटल इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर वैश्विक आर्थिक व्यवस्था का भविष्य तय करेंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि अब दुनिया प्रौद्योगिकी की साझेदारी के लिए भारत की ओर अधिकाधिक देख रही है, न कि भारत अन्यत्र हुई प्रगति का इंतजार कर रहा है। उन्होंने कहा कि नीतिगत सुधारों, निजी क्षेत्र की भागीदारी, स्वच्छ ऊर्जा एकीकरण और तेजी से विकसित हो रहे नवाचार इकोसिस्‍टम के समर्थन से भारत एक विश्वसनीय वैश्विक डेटा सेंटर हब के रूप में उभरने के लिए पूरी तरह तैयार है।

एएमसीएचएएम इंडिया द्वारा आयोजित वार्षिक नेतृत्व शिखर सम्मेलन में “भारत के डेटा केंद्रों को भविष्य के लिए तैयार करना: सशक्‍त आपूर्ति श्रृंखलाएं और अवसर” विषय पर विशेष सत्र के दौरान मुख्य भाषण देते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत अब डेटा अर्थव्यवस्था को केवल एक तकनीकी परिवर्तन के रूप में नहीं देख सकता है, बल्कि एक रणनीतिक राष्ट्रीय अवसर के रूप में देख सकता है जो आने वाले दशकों में निवेश, रोजगार, ऊर्जा प्रणालियों और भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा को प्रभावित करेगा।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत की डेटा सेंटर क्षमता 2030 तक 1.5 गीगावॉट से बढ़कर लगभग 6.5 गीगावॉट होने का अनुमान है और इस निरंतर विस्तार से एआई सिस्टम, कूलिंग टेक्नोलॉजी, स्मार्ट ग्रिड, नवीकरणीय ऊर्जा एकीकरण और उन्नत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में लगभग एक लाख इंजीनियरिंग रोजगार सृजित होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि एआई, 6जी, सेमीकंडक्टर और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर से संचालित भारत का तेजी से विकसित हो रहा इकोसिस्टम वैश्विक निवेश और प्रौद्योगिकी सहयोग के लिए अभूतपूर्व अवसर पैदा कर रहा है।

डेटा केंद्रों को “अगली तेल अर्थव्यवस्था” बताते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भविष्य में डेटा नियंत्रण, डिजिटल इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर और सुरक्षित प्रौद्योगिकी इकोसिस्‍टम पर अधिकाधिक ध्यान केंद्रित किया जाएगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बड़े पैमाने पर डेटा केंद्रों और कोलोकेशन बाजारों में उभरते अवसरों का पूर्ण लाभ उठाने के लिए भारत को सरकार, निजी उद्योग, इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर प्रदाताओं, दूरसंचार नेटवर्क, नवीकरणीय ऊर्जा हितधारकों और अनुसंधान संस्थानों को शामिल करते हुए एक एकीकृत राष्ट्रीय दृष्टिकोण अपनाना होगा।

तेजी से बदलते वैश्विक प्रौद्योगिकी परिदृश्य का जिक्र करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत आज कई अग्रणी क्षेत्रों में अग्रणी देशों के बराबर तकनीकी प्रगति पर खड़ा है। उन्होंने राष्ट्रीय क्वांटम मिशन का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत ने निर्धारित समय के आधे से भी कम समय में अपने आधे से अधिक लक्ष्य हासिल कर लिए हैं। आठ वर्षों में 2,000 किलोमीटर सुरक्षित क्वांटम संचार इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर स्थापित करने के लक्ष्य के मुकाबले भारत ने मात्र तीन वर्षों में 1,000 किलोमीटर का आंकड़ा पार कर लिया है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने भारत को भविष्य की प्रौद्योगिकियों और रणनीतिक उद्योगों के लिए तैयार करने हेतु कई साहसिक और परिवर्तनकारी निर्णय लिए हैं। उन्होंने विदेशी क्लाउड सेवा प्रदाताओं के लिए दीर्घकालिक कर प्रोत्साहन, राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन, सेमीकंडक्टर मिशन और अंतरिक्ष एवं परमाणु ऊर्जा जैसे क्षेत्रों को निजी भागीदारी के लिए खोलने के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि इनमें से कई सुधार कुछ वर्ष पूर्व अकल्पनीय माने जाते थे, लेकिन भारत ने भविष्य के आर्थिक विकास और तकनीकी नेतृत्व के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ने की राजनीतिक इच्छाशक्ति का प्रदर्शन किया है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार न केवल प्रौद्योगिकी विकास को बढ़ावा दे रही है, बल्कि उद्योग की भागीदारी को गति देने के लिए अनुकूल ढांचा भी तैयार कर रही है। निजी क्षेत्र के नवाचार और गहन तकनीकी अनुसंधान को समर्थन देने वाली हालिया पहलों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भारत एक नए युग का साक्षी बन रहा है, जहां सरकार और उद्योग विज्ञान और प्रौद्योगिकी के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में समान भागीदार के रूप में काम कर रहे हैं।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि डेटा सेंटर क्षेत्र में भारत की भविष्य की वृद्धि सुदृढ़ आपूर्ति श्रृंखलाओं, टिकाऊ ऊर्जा प्रणालियों, उन्नत दूरसंचार कनेक्टिविटी, सब-सी केबल इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर, स्मार्ट कूलिंग समाधानों और सभी क्षेत्रों में समन्वित नीतिगत समर्थन पर निर्भर करेगी। उन्होंने कहा कि नीतिगत समर्थन और निजी क्षेत्र की भागीदारी के बीच देश की बढ़ती अनुकूलता ने एक ऐसा वातावरण बनाया है जहां भारत विश्व के सबसे भरोसेमंद डिजिटल इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर केंद्रों में से एक के रूप में उभर सकता है।