ब्रेकिंग न्यूज़
पंजाब केन्द्रीय विश्वविद्यालय के 11वें दीक्षांत समारोह में भारत के माननीय मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत होंगे मुख्य अतिथि

·       पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश माननीय न्यायमूर्ति शील नागू होंगे विशिष्ट अतिथि

·       कुलाधिपति प्रो. जगबीर सिंह करेंगे समारोह की अध्यक्षता

बठिंडा / सत्ता संदेश

बठिंडा, 12 मई: पंजाब केन्द्रीय विश्वविद्यालय का 11वां दीक्षांत समारोह 23 मई, 2026 को आयोजित किया जाएगा। भारत के माननीय मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में समारोह की गरिमा बढ़ाएंगे। पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश माननीय न्यायमूर्ति शील नागू समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के माननीय कुलाधिपति प्रो. जगबीर सिंह करेंगे।

कुलपति प्रो. राघवेन्द्र प्रसाद तिवारी गणमान्य अतिथियों, विश्वविद्यालय के प्राधिकारियों, संकाय सदस्यों, विद्यार्थियों, अभिभावकों तथा आमंत्रित अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति में विद्यार्थियों को उपाधियाँ प्रदान करेंगे।

यह दीक्षांत समारोह विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के शैक्षणिक जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव होगा, जिसमें स्नातकोत्तर एवं डॉक्टरेट कार्यक्रमों के विद्यार्थियों को उपाधियाँ प्रदान की जाएंगी।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने 11वें दीक्षांत समारोह के सफल आयोजन हेतु व्यापक तैयारियाँ शुरू कर दी हैं। इस समारोह में प्रख्यात शिक्षाविदों, न्यायिक क्षेत्र से जुड़ी गणमान्य हस्तियों, प्रशासकों एवं अन्य प्रतिष्ठित व्यक्तियों की सहभागिता रहेगी।

सीयू पंजाब ने सामुदायिक संवाद कार्यक्रम के माध्यम से ग्रामीण युवाओं को कौशल विकास, रोजगार और नशा-मुक्ति के प्रति किया जागरूक

बठिंडा/सत्ता संदेश

ग्रामीण युवाओं को रोजगारोन्मुखी शैक्षिक अवसरों से जोड़ने के उद्देश्य से पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयू पंजाब) ने कुलपति प्रो. राघवेंद्र प्रसाद तिवारी के नेतृत्व में एक विशेष सामुदायिक संवाद कार्यक्रम आयोजित किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को कौशल विकास पाठ्यक्रमों के माध्यम से अपने कौशल को उन्नत करने के लिए प्रेरित करना था। कार्यक्रम में 10 गांवों से लगभग 100 लोगों ने भाग लिया, जिनमें सरपंच, स्थानीय युवा और समुदाय के सदस्य शामिल थे।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विश्वविद्यालय द्वारा प्रारंभ किए गए छह नए एनसीवीईटी अनुमोदित कौशल विकास पाठ्यक्रमों के बारे में जागरूकता फैलाना था। इन पाठ्यक्रमों में असिस्टेंट प्लंबर–जनरल; हेल्पर इलेक्ट्रीशियन; फंडामेंटल्स ऑफ कंप्यूटर्स;टैली ऑपरेशन एवं जीएसटी कैलकुलेशन का परिचय; बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट; तथा रेफ्रिजरेशन एवं एयर कंडीशनिंग की मूलभूत जानकारी जैसे कोर्स शामिल हैं। विश्वविद्यालय अधिकारियों ने बताया कि ये पाठ्यक्रम विशेष रूप से उन युवाओं के लिए तैयार किए गए हैं जिन्होंने 8वीं, 9वीं, 10वीं या 12वीं उत्तीर्ण की है तथा जिनके पास संबंधित अनुभव है और जो अपने कौशल एवं रोजगार क्षमता को और बेहतर बनाना चाहते हैं। पात्रता, पाठ्यक्रम और प्रवेश से जुड़ी विस्तृत जानकारी विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध प्रॉस्पेक्टस में देखी जा सकती है।

सभा को संबोधित करते हुए कुलपति प्रो. राघवेंद्र प्रसाद तिवारी ने राष्ट्रीय कौशल योग्यता ढांचा के अंतर्गत प्रारंभ किए गए तथा भारत सरकार के कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीवीईटी) द्वारा अनुमोदित इन छह रोजगारपरक पाठ्यक्रमों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कौशल आधारित शिक्षा देश को आगे बढ़ा सकती है और विश्वविद्यालयों को सिर्फ डिग्री देने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। जो युवा आगे की पढ़ाई नहीं कर सके, उनके लिए रोजगार से जुड़े कौशल विकास कार्यक्रम शुरू करना जरूरी है, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें और देश के विकास में योगदान दे सकें। उन्होंने युवाओं और समुदाय से कौशल विकास एवं सकारात्मक सहभागिता के माध्यम से नशामुक्त समाज के निर्माण हेतु मिलकर कार्य करने का आह्वान किया।

वहीं, समकुलपति प्रो. किरण हजारिका ने कहा कि ये पाठ्यक्रम युवाओं को बिजली, प्लंबिंग, कंप्यूटर, अकाउंटिंग, स्वास्थ्य सेवा और तकनीकी क्षेत्रों में व्यावहारिक कौशल प्रदान करेंगे, जिससे उन्हें रोजगार, उद्यमिता और स्वरोजगार के नए अवसर मिलेंगे।

कुलसचिव डॉ. विजय शर्मा ने बताया कि ये पाठ्यक्रम आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के राष्ट्रीय विजन के अनुरूप युवाओं में रोजगार क्षमता, आत्मनिर्भरता और व्यावसायिक उत्कृष्टता को बढ़ावा देने के लिए शुरू किए गए हैं। उन्होंने कहा कि इन पाठ्यक्रमों को आसान पात्रता, किफायती शुल्क और व्यापक प्रायोगिक प्रशिक्षण के साथ तैयार किया गया है, ताकि ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के अधिक से अधिक युवा इसका लाभ उठा सकें।

कार्यक्रम के अंत में वित्त अधिकारी डॉ. राजकुमार शर्मा ने वंचित समुदायों के अधिकतम युवाओं तक इन परिवर्तनकारी अवसरों की जानकारी पहुंचाने के लिए विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता दोहराई और सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। प्रो. संजीव ठाकुर, डॉ. संजीव मंडेर एवं विश्वविद्यालय चिकित्सा अधिकारी डॉ. आकाश प्रकाश ने कार्यक्रम का संचालन किया तथा प्रतिभागियों को नशा मुक्ति और सामाजिक कल्याण को बढ़ावा देने वाली विश्वविद्यालय की व्यापक सामुदायिक पहलों के प्रति जागरूक किया। गांवों के सरपंचों और स्थानीय निवासियों ने ग्रामीण समुदायों में सुलभ करियर उन्मुख अवसरों के प्रति जागरूकता फैलाने तथा नशा मुक्ति के लिए विश्वविद्यालय की सक्रिय सामुदायिक पहल की सराहना की।

पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय में श्री गुरु तेग बहादुर जी को समर्पित राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन

बठिंडा/सत्ता संदेश

, 25 अप्रैल 2026: पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय, बठिंडा के पंजाबी विभाग द्वाराइंटैक पंजाब चैप्टर और बठिंडा चैप्टर के सहयोग से श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी वर्ष को समर्पित कार्यक्रमों की श्रृंखला के अंतर्गत “श्री गुरु तेग बहादुर जी की शिक्षाएं और शहादत: सर्वकालिक सार्थकता” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन 24 अप्रैल 2026 को किया गया। कुलपति प्रो. राघवेन्द्र प्रसाद तिवारी के नेतृत्व में आयोजित इस संगोष्ठी में प्रसिद्ध पंजाबी चिंतक और गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर ऑफ एमिनेंस डॉ. मनमोहन सिंह (पूर्व आईपीएस) ने मुख्य वक्तव्य दिया, जबकि पंजाबी यूनिवर्सिटी के सिख इनसाइक्लोपीडिया विभाग के प्रो. परमवीर सिंह ने विशेष व्याख्यान प्रस्तुत किया। इंटैक पंजाब चैप्टर के संयोजक मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) बलविंदर सिंह तथा बठिंडा चैप्टर के संयोजक श्री कंवर भीम सिंह ने विशेष अतिथि के रूप में भाग लिया। इसके अतिरिक्त विभिन्न अकादमिक सत्रों की अध्यक्षता प्रो. सतनाम सिंह जस्सल, प्रो. राजिंदर सिंह तथा हिमाचल प्रदेश केन्द्रीय विश्वविद्यालय के प्रो. नरेश कुमार ने की। उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के डीन (अकादमिक) प्रो. रामाकृष्ण वुसिरिका ने की।

अपने मुख्य वक्तव्य में डॉ. मनमोहन सिंह ने शहादत की अवधारणा का ऐतिहासिक विश्लेषण करते हुए गुरु तेग बहादुर जी की अद्वितीय शहादत पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह शहादत धार्मिक स्वतंत्रता और मानव अधिकारों की रक्षा के लिए दी गई थी तथा इसे केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि राजनीतिक और आर्थिक दृष्टि से भी समझने की आवश्यकता है।

प्रो. परमवीर सिंह ने अपने विशेष व्याख्यान में कहा कि गुरु तेग बहादुर जी ने अपने उपदेशों को व्यवहार में उतारा और समाज को निर्भयता का संदेश दिया। उनकी शहादत ने भारत में सम्मानपूर्वक जीवन जीने की चेतना को मजबूत किया और अत्याचार के विरुद्ध संघर्ष की प्रेरणा दी।

इंटैक के संयोजक मेजर जनरल (से.नि.) बलविंदर सिंह ने ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण और सिख इतिहास के प्रचार-प्रसार की आवश्यकता पर बल दिया तथा नई पीढ़ी को अपने समृद्ध विरासत से जोड़ने की आवश्यकता बताई।

डीन (अकादमिक) प्रो. रामाकृष्ण वुसिरिका ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में इस संगोष्ठी के आयोजन के लिए पंजाबी विभाग की सराहना की तथा विश्वविद्यालय में स्थापित किए जा रहे “श्री गुरु तेग बहादुर सेंटर ऑफ स्टडीज़ इन इंडिक सिविलाइज़ेशन एंड रिलीजियस स्टडीज़” के बारे में जानकारी दी।

संगोष्ठी के लिए 70 से अधिक प्रतिभागियों ने पंजीकरण कराया और तीन अकादमिक सत्रों में चयनित शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। शोधकर्ताओं ने गुरु तेग बहादुर जी के जीवन, बाणी और शहादत के विभिन्न पहलुओं पर शोधपरक विचार प्रस्तुत किए।

कार्यक्रम की शुरुआत विभागाध्यक्ष डॉ. अमनदीप सिंह के स्वागत भाषण से हुई तथा प्रो. रमनप्रीत कौर ने संगोष्ठी का परिचय प्रस्तुत किया। मंच संचालन डॉ. सरबजीत सिंह ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. सतप्रीत सिंह जस्सल और गुरप्रीत कौर ने प्रस्तुत किया।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के प्रमुख, शिक्षक, शोधार्थी और विद्यार्थी उपस्थित रहे, साथ ही आसपास के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों से आए प्रतिभागियों ने भी संगोष्ठी में सक्रिय भागीदारी निभाई।