ब्रेकिंग न्यूज़
बढ़ती मांग के बावजूद पंजाब में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की पर्याप्त आपूर्ति, घबराकर खरीदारी न करें: तेल कंपनियां

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) ने पंजाब सहित देशभर में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की निर्बाध आपूर्ति बनाए रखने का भरोसा दिया है। कंपनियों का कहना है कि हाल के दिनों में ईंधन की मांग में अचानक और तेज वृद्धि हुई है, लेकिन उपभोक्ताओं को घबराने की जरूरत नहीं है क्योंकि पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है।

इंडियनऑयल, बीपीसीएल और एचपीसीएल ने संयुक्त रूप से बताया कि कृषि गतिविधियों और फसल कटाई के मौसम के कारण कई राज्यों में पेट्रोलियम उत्पादों की खपत बढ़ी है। इसके अलावा, सार्वजनिक क्षेत्र के पेट्रोल पंपों पर अपेक्षाकृत कम कीमतों के कारण ग्राहकों की संख्या भी बढ़ी है।

तेल कंपनियों ने कहा कि उनके टर्मिनल, डिपो, पाइपलाइन नेटवर्क, एलपीजी बॉटलिंग प्लांट और खुदरा आउटलेट पूरी क्षमता के साथ काम कर रहे हैं। आपूर्ति और परिवहन से जुड़ी टीमें 24 घंटे कार्यरत हैं ताकि ईंधन की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।

कंपनियों ने स्पष्ट किया कि पेट्रोल, डीजल और एलपीजी का पर्याप्त भंडार मौजूद है और आपूर्ति व्यवस्था पूरी तरह सामान्य है। बढ़ती मांग को देखते हुए लॉजिस्टिक्स और वितरण प्रणाली की लगातार निगरानी की जा रही है।

आईओसीएल पंजाब के कार्यकारी निदेशक एवं राज्य प्रमुख अशुतोष गुप्ता ने नागरिकों से अपील की कि वे सामान्य रूप से ईंधन खरीदें और किसी भी तरह की अफवाह या घबराहट में अतिरिक्त खरीदारी न करें। उन्होंने लोगों से ईंधन उपलब्धता संबंधी जानकारी के लिए केवल अधिकृत स्रोतों और तेल कंपनियों की आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने का आग्रह किया।

जनगणना 2027: चंडीगढ़ में मकान सूचीकरण कार्य 100% पूर्ण

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

जनगणना संचालन निदेशालय, चंडीगढ़ को यह घोषणा करते हुए प्रसन्नता हो रही है कि जनगणना 2027 के अंतर्गत मकान सूचीकरण ब्लॉक (House Listing Block – HLB) कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिया गया है।

29 मई की नवीनतम प्रगति रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के सभी 2,054 मकान सूचीकरण ब्लॉकों (HLBs) का कार्य पूर्ण कर लिया गया है, जिससे चंडीगढ़ के सभी 10 जनगणना प्रभारों (Census Charges) में 100 प्रतिशत कवरेज सुनिश्चित हुई है।

यह महत्वपूर्ण उपलब्धि प्रगणकों (Enumerators), पर्यवेक्षकों (Supervisors), चार्ज अधिकारियों (Charge Officers) तथा अन्य जनगणना कर्मियों के समर्पित प्रयासों से संभव हो सकी है, जिन्होंने मकान सूचीकरण कार्य को समयबद्ध रूप से पूरा करने के लिए अथक परिश्रम किया। निरंतर निगरानी तथा प्रभावी क्षेत्रीय समन्वय ने इस लक्ष्य की प्राप्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इस उपलब्धि पर जनगणना संचालन निदेशक, चंडीगढ़, डॉ. नवजोत खोसा, आईएएस, तथा प्रधान जनगणना अधिकारी, चंडीगढ़, निशांत कुमार यादव ने इस कार्य में लगे सभी अधिकारियों एवं क्षेत्रीय कर्मचारियों की प्रतिबद्धता और कठिन परिश्रम की सराहना की। उन्होंने चंडीगढ़ के नागरिकों द्वारा प्रदान किए गए पूर्ण सहयोग के लिए भी आभार व्यक्त किया, जिसके कारण इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्य को सफलतापूर्वक सम्पन्न किया जा सका।

जनगणना संचालन निदेशालय, चंडीगढ़ अब जनगणना 2027 के अगले चरण अर्थात जनसंख्या गणना (Population Enumeration) के लिए पूर्णतः तैयार है, जिसका शुभारंभ फरवरी 2027 में प्रस्तावित है। इसके सुचारु एवं सफल क्रियान्वयन हेतु सभी आवश्यक तैयारियाँ की जा रही हैं।

जनगणना विभाग इस कार्य में सहयोग एवं सहभागिता प्रदान करने वाले सभी हितधारकों तथा नागरिकों के प्रति अपनी हार्दिक कृतज्ञता व्यक्त करता है। विभाग जनगणना 2027 के आगामी चरणों में उच्चतम डेटा गुणवत्ता, कार्यकुशलता तथा जनसेवा के मानकों को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।

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पंजाबी लोक विरासत अकादमी, लुधियाना ने किताब “स्मृति प्रो. मालविंदरजीत सिंह वड़ैच” लॉन्च की

लुधियाना / सत्ता संदेश

आज़ादी की लड़ाई के असल इतिहासकार प्रो. मालविंदरजीत सिंह वड़ैच को भावभीनी श्रद्धांजलि देते हुए, शहीद भगत सिंह के भतीजे प्रो. जगमोहन सिंह ने चंडीगढ़ के पीपल्स कन्वेंशन सेंटर में कहा कि वे मेरे टीचर ही नहीं, बल्कि मेरे गाइड भी थे। मुझे याद है कि 1966 को मैं और राजिंदर सिंह चीमा, प्रो. मालविंदरजीत सिंह वड़ैच के साथ संकल्प पर सवार होकर बाबा सोहन सिंह भकना से मिलने गांव भकना (अमृतसर) गए थे। बाबा भकना ने प्रोफेसर के उर्दू ज्ञान को ध्यान में रखते हुए अपनी ऑटोबायोग्राफी “जीवन संग्राम” उन्हें गुरमुखी स्क्रिप्ट में छपवाने के लिए दे दी थी। युवक केंद्र द्वारा लिखा गया यही पाठ देश का पहला बड़े पैमाने पर महत्वपूर्ण प्रकाशन बना। अजीत प्रकाशन ग्रुप के चीफ एडिटर डॉ. बरजिंदर सिंह हमदर्द ने कहा कि प्रो. मालविंदरजीत सिंह वड़ैच को हमेशा इस बात की चिंता रहती थी कि शहीदों और स्वतंत्रता सेनानियों ने देश के लिए अपना सब कुछ कुर्बान कर दिया, लेकिन उनकी यादें और विचार नई पीढ़ी के मन में सही जगह नहीं बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर मुझे बाबा सोहन सिंह भकना और शहीद भगत सिंह की माता बीबी विद्या वती जी का सानिध्य पाने का सौभाग्य मिला तो इसका श्रेय भी प्रो. मालविंदरजीत सिंह वड़ैच को जाता है। उन्होंने कहा कि जब पंजाब सरकार ने उन्हें ‘जंग-ए-आजादी’ के इतिहास से संबंधित यादगार का चेयरमैन नियुक्त किया तो उन्होंने सबसे पहले प्रो. वड़ैच से संपर्क किया। प्रो. वड़ैच ने उन्हें कई महत्वपूर्ण पुस्तकें और रेफरेंस मटीरियल भी दिए। डॉ. हमदर्द ने कहा कि प्रो. वड़ैच जितने महान विद्वान थे, उतने ही मिलनसार और सरल भी थे। उन्होंने कहा कि भले ही प्रो. मालविंदरजीत सिंह वड़ैच जैसी शख्सियतें शारीरिक रूप से हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके विचार और मिशन समाज को रास्ता दिखाते रहेंगे। वे हमेशा रहेंगे। उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि हम भी अपने शहीदों और स्वतंत्रता सेनानियों के विचारों को अपने मन में जिंदा रखें।
उन्होंने कहा कि प्रो. मालविंदरजीत सिंह वड़ैच और उनके साथियों ने जालंधर के लाडोवाली रोड में एक यूथ सेंटर बनाया, जिसमें राजिंदर सिंह चीमा, प्रिंसिपल एमएस परमार, प्रिंसिपल जसवंत सिंह गिल, सुदर्शन कुमार लांबड़ा और राय हौर हमारे साथी थे। सिडनी (ऑस्ट्रेलिया) से ऑनलाइन अपने विचार व्यक्त करते हुए प्रिंसिपल जसवंत सिंह गिल ने कहा कि भले ही प्रो. वड़ैच शारीरिक रूप से हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनका प्यार, लेखन और विचार भविष्य में भी सार्थक रहेंगे।
प्रो. मालविंदरजीत सिंह वड़ैच के भतीजे सुप्रीम कोर्ट के सीनियर एडवोकेट एस. राजिंदर सिंह चीमा ने कहा कि परिवार के फैसले के अनुसार, छह महीने के अंदर प्रो. मालविंदरजीत सिंह वड़ैच की याद में एक मेमोरियल बुक तैयार की जाएगी। उनके बारे में लिखी हुई सामग्री हमें 31 अगस्त तक मुहैया कराई जाए, ताकि उसे समय पर पब्लिश किया जा सके। इस मौके पर यूनिस्टार के मालिक, जाने-माने विचारक हरीश जैन, पंजाबी ट्रिब्यून के पूर्व एडिटर और लेखक डॉ. स्वराजबीर, पंजाब स्कूल एजुकेशन बोर्ड के पूर्व वाइस चेयरमैन डॉ. गुरदेव सिंह सिद्धू, देश भगत मेमोरियल हॉल से अमोलक सिंह, गुरु नानक इंजीनियरिंग कॉलेज एलुमनाई एसोसिएशन के वर्ल्ड प्रेसिडेंट सुरिंदर मेहन सिंह संधू, स. मनोहर सिंह चुघा (मोगा) और नामधारी दरबार से सुवरन सिंह विर्क ने भी संबोधित किया। इस मौके पर पंजाबी लोक विरासत अकादमी के चेयरमैन प्रो. गुरभजन सिंह गिल ने कहा कि प्रो. वड़ैच न सिर्फ आजादी की लड़ाई के तथ्यात्मक इतिहासकार थे, बल्कि मौजूदा अन्याय और जुल्म के भी गवाह थे। वे युवाओं को विपक्ष के खिलाफ सोचने, समझने और एनालाइज करने के लिए गाइड भी थे। इस मौके पर पंजाबी लोक विरासत अकादमी लुधियाना की ओर से गुरभजन गिल के एडिटर-इन-चीफ के तौर पर तैयार की गई किताब “स्मृति प्रो. डॉ. बरजिंदर सिंह हमदर्द, प्रो. जगमोहन सिंह, राजिंदर सिंह चीमा, प्रोफ़ेसर वड़ैच की इकलौती बेटी डॉ. मिन्ना वड़ैच जाखड़ और डॉ. सुखदेव सिंह सिरसा ने “मालविंदरजीत सिंह वड़ैच” को जनता को समर्पित किया।
मंच का संचालन करते हुए जाने-माने विद्वान सुखदेव सिंह सिरसा ने सभी को संबोधित किया और प्रोफ़ेसर मालविंदरजीत सिंह वड़ैच की जीवनी के अलग-अलग पहलुओं पर रोशनी डाली।
पूर्व MLA हरदेव अर्शी नज़र सिंह मानशाहिया, गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी के पूर्व डीन डॉ. हरदेव सिंह विर्क, इतिहासकार सीता राम बंसल,
मशहूर लेखक शमशेर सिंह संधू, लोक गायक हरदीप सिंह मोहाली, फ़िल्म एक्टर दर्शन औलख, ए.एस. पाल पंजाब बुक सेंटर, डॉ. मेघा सिंह शेरगिल, बलदेव सिंह सरन पूर्व CMD पंजाब पावर कॉर्पोरेशन, शबदीश, हमीर सिंह, डॉ. रौनकी राम पंजाब यूनिवर्सिटी, करम सिंह इतिहासकार के पोते हरप्रीत सिंह ढिल्लों और गुरजीत सिंह ढिल्लों राजपुरा, रमेश कुमार, पुरुषोत्तम बल्ली बरनाला, नील कमल बठिंडा, पंजाबी कवि डॉ. सुरिंदर गिल, गुरसेवक सिंह ढिल्लों नामधारी, डॉ. बलदेव सिंह सप्तऋषि, संजीवन सिंह, नरभिंदर सिंह, डॉ. करनबीर सिंह लायलपुर खालसा कॉलेज जालंधर, एस. गगनदीप सिंह विर्क मुख्य प्रशासक बाबा आया सिंह रियारकी कॉलेज तुगलवाला (गुरदासपुर), सुखदर्शन नत्त, नवदीप सिंह गिल, प्रसिद्ध पत्रकार बलजीत बल्ली, डॉ. चमन लाल पूर्व प्रोफेसर जेएनयू, गदर आंदोलन पर पहली डॉक्टरेट करने वाले डॉ. हरीश पुरी, यशपाल वर्गा चेतना, सारा पंजाब विश्वविद्यालय, रणजीत सिंह औलाख, कस्तूरी लाल, स्वदेश तलवार, देश सेवक के संपादक रिपुदमन रिप्पी, वरिष्ठ पत्रकार रमनिंदर भाटिया, पंजाबी ट्रिब्यून समाचार संपादक जसबीर समर, डॉ. जगतार सिंह जोगा, डॉ. जसपाल सिंह प्रिंसिपल, सरदारनी जसपाल कौर चीमा, सरदारनी जसविंदर कौर गिल लुधियाना मौजूद रहे।

नियंत्रक संचार लेखा कार्यालय, पंजाब टेलीकॉम सर्किल, चंडीगढ़ में विधिक प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

संचार मंत्रालय के दूरसंचार विभाग के अंतर्गत आने वाले नियंत्रक संचार लेखा कार्यालय, पंजाब टेलीकॉम सर्किल, चंडीगढ़ में “विधिक ढांचा एवं न्यायालयीन मामलों का प्रभावी प्रबंधन” विषय पर एक विधिक प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य अधिकारियों एवं कर्मचारियों को विधिक मामलों के प्रभावी निस्तारण, न्यायालयीन प्रक्रियाओं की समझ, समयबद्ध अनुपालन तथा सरकारी कार्यालयों में कानूनी विषयों के बेहतर प्रबंधन के संबंध में जागरूक करना था।

कार्यक्रम का शुभारंभ श्री विजेंद्र एन. टंडन, नियंत्रक संचार लेखा, पंजाब द्वारा किया गया। अपने संबोधन में उन्होंने सरकारी कार्यालयों में विधिक मामलों के समयबद्ध एवं प्रभावी प्रबंधन के महत्व पर बल दिया। उन्होंने अधिकारियों एवं कर्मचारियों को न्यायालयीन प्रक्रियाओं तथा विधिक अनुपालन के संबंध में उचित समझ, समन्वय एवं जागरूकता विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम अधिकारियों एवं कर्मचारियों की कार्यकुशलता बढ़ाने तथा प्रशासनिक कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

कार्यशाला में अधिवक्ता श्री के. के. ठाकुर, भारत सरकार के वरिष्ठ पैनल अधिवक्ता, मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT), चंडीगढ़ तथा माननीय पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में मामलों के संचालन के अपने व्यापक अनुभव साझा किए तथा विभिन्न विधिक विषयों पर विस्तृत जानकारी प्रदान की।

अपने व्याख्यान के दौरान उन्होंने न्यायालयीन मामलों के प्रभावी प्रबंधन, समयबद्ध उत्तर दाखिल करने, अवमानना याचिकाओं एवं रिट याचिकाओं के संचालन, अभिलेखों के उचित रख-रखाव, विभागीय समन्वय तथा विधिक प्रक्रियाओं के व्यावहारिक पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने यह भी बताया कि प्रभावी विधिक प्रबंधन से अनावश्यक वाद-विवाद एवं प्रशासनिक जटिलताओं को कम किया जा सकता है।

कार्यक्रम के अंत में श्री राजीव रंजन, वरिष्ठ लेखा अधिकारी द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया। उन्होंने अधिकारियों एवं कर्मचारियों के क्षमता निर्माण में निरंतर सहयोग एवं दूरदर्शी नेतृत्व हेतु श्री विजेंद्र एन. टंडन, नियंत्रक संचार लेखा, पंजाब का आभार व्यक्त किया। उन्होंने अधिवक्ता श्री के. के. ठाकुर एवं सभी प्रतिभागियों का भी धन्यवाद किया तथा कहा कि यह कार्यशाला सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए अत्यंत ज्ञानवर्धक एवं उपयोगी सिद्ध हुई।

UIDAI ने पंजाब में बढ़ाई आधार सेवाएं, होशियारपुर, जालंधर व गुरदासपुर में नए आधार सेवा केंद्र स्थापित

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

होशियारपुर, गुरदासपुर व जालंधर में नए आधार सेवा केंद्रों (एएसके) शुरू करके, यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया, क्षेत्रीय कार्यालय चंडीगढ़ ने पंजाब में सेवा वितरण नेटवर्क को मजबूत किया है।

ये नवीनतम आधार सेवा केंद्र नागरिक सुविधा बढ़ाने व आधार संबंधी सेवाओं के सहज वितरण सुनिश्चित करने हेतु हैं। निवासी आधार नामांकन, नाम, पता व जन्म तिथि जैसे जनसांख्यिकीय विवरणों के अपडेट के साथ-साथ बायोमेट्रिक अपडेट अधिक बेहतर व आसान तरीके से प्राप्त कर सकते हैं।

इन केंद्रों के जुड़ने से यूआईडीएआई निवासियों, विशेषकर नजदीकी कस्बों व ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों के लिए पहुंच सुधारने व यात्रा समय घटाने की प्रतिबद्धता जारी रखे हुए है। केंद्र आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, प्रशिक्षित स्टाफ व सुव्यवस्थित प्रक्रियाओं से सुसज्जित हैं ताकि न्यूनतम प्रतीक्षा समय व सुगम सेवा अनुभव सुनिश्चित हो।

 मानकीकृत व नागरिक हितैषी वातावरण बनाकर, मौजूदा केंद्रों पर भीड़ घटाकर व अनुरोधों के तेज प्रसंस्करण सुनिश्चित करके, इन एएसके की स्थापना सेवा वितरण की समग्र गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार लाने की उम्मीद है। यह आधार सेवाओं में पारदर्शिता व विश्वसनीयता भी बढ़ाएगा।

इसके अलावा, ये केंद्र वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं व दिव्यांग व्यक्तियों सहित समाज के सभी वर्गों के लिए आधार सेवाओं को आसानी से सुलभ बनाकर व्यापक समावेशन को बढ़ावा देंगे। बेहतर पहुंच सुगमता अधिक निवासियों को आधार विवरण अद्यतन रखने के लिए प्रोत्साहित करेगी, जिससे विभिन्न सरकारी व वित्तीय सेवाओं तक बेहतर पहुंच संभव होगी।

यूआईडीएआई पंजाब के निवासियों को अपने नामांकन और अपडेट संबंधी ज़रूरतों के लिए इन आधार सेवा केंद्रों का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करता है। नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने साथ वैध सहायक दस्तावेज़ रखें, और अतिरिक्त सुविधा के लिए वे ऑनलाइन अपॉइंटमेंट भी बुक कर सकते हैं।

अधिक जानकारी के लिए, निवासी यूआईडीएआई की आधिकारिक वेबसाइट पर जा सकते हैं या अपने निकटतम आधार सेवा केंद्र से संपर्क कर सकते हैं।

चंडीगढ़ के युवाओं को पीएम इंटर्नशिप योजना के लिए आवेदन करने का आमंत्रण, मिलेगी आर्थिक सहायता

चंडीगढ़ /सत्ता संदेश

प्रतिष्ठित *प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना* के अंतर्गत 12वीं, आईटीआई, डिप्लोमा अथवा स्नातक उत्तीर्ण युवाओं के लिए विभिन्न इंटर्नशिप अवसर उपलब्ध हैं।

श्री विनय कुमार, जिला युवा अधिकारी, MY Bharat, युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार ने जानकारी देते हुए बताया कि पात्र युवा MY Bharat पोर्टल पर स्वयं को पंजीकृत कर प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना हेतु आवेदन कर सकते हैं।

उन्होंने आगे बताया कि चंडीगढ़ में वर्तमान में विभिन्न इंटर्नशिप अवसर उपलब्ध हैं तथा चयनित अभ्यर्थियों को इंटर्नशिप अवधि के दौरान प्रतिमाह ₹9,000 की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।

इच्छुक युवा निम्न वेबसाइट पर पंजीकरण एवं आवेदन कर सकते हैं:

http://www.mybharat.gov.in

आवेदन प्रक्रिया से संबंधित किसी भी जानकारी हेतु युवा जिला युवा अधिकारी से मोबाइल नंबर *9805832503* पर संपर्क कर सकते हैं अथवा MY Bharat कार्यालय, आरजीएनआईवाईडी भवन, PEC कैंपस, गेट नंबर 1, सेक्टर 12, चंडीगढ़ में संपर्क कर सकते हैं।

पीजीआईएमईआर ने द्वितीय वार्षिक ‘सारथी दिवस’ मनाया

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

स्वैच्छिक सेवा और परिवर्तनीय रोगी देखभाल की भावना का सम्मान

• सारथी सहानुभूति, करुणा, सामाजिक जिम्मेदारी और अनुभवात्मक सीख पर आधारित है; छात्रों को इसके माध्यम से केवल कौशल ही नहीं, बल्कि जीवनभर के लिए हृदय का परिवर्तन प्राप्त होता है: श्री एच. राजेश प्रसाद, आईएएस, मुख्य सचिव, चंडीगढ़ प्रशासन

सारथी स्वयंसेवक केवल मरीजों की सहायता नहीं कर रहे, बल्कि मानवता के सर्वोत्तम रूप को सीख रहे हैं: प्रो. विवेक लाल, निदेशक, पीजीआईएमईआर

चंडीगढ़, 5 मई 2026: एक महत्वपूर्ण उपलब्धि को चिह्नित करते हुए, पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ ने आज द्वितीय वार्षिक ‘सारथी दिवस’ मनाया, जो सारथी (Students’ Alliance for Responsible Action to Transform Healthcare Institutes) के दो सफल वर्षों की स्मृति में आयोजित किया गया—यह एक अग्रणी स्वयंसेवी पहल है जो संस्थान में रोगी देखभाल और पहुंच को रूपांतरित कर रही है।
इस अवसर पर श्री एच. राजेश प्रसाद, आईएएस, मुख्य सचिव, चंडीगढ़ प्रशासन मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि सुश्री प्रेरणा पुरी, आईएएस, सचिव शिक्षा, चंडीगढ़ प्रशासन विशिष्ट अतिथि रहीं। कार्यक्रम में प्रो. विवेक लाल, निदेशक, पीजीआईएमईआर, श्री पंकज राय, आईएएस, उप निदेशक (प्रशासन), प्रो. संजय जैन, डीन (अनुसंधान) तथा प्रो. अशोक कुमार, चिकित्सा अधीक्षक भी उपस्थित रहे।
एक भरे हुए सभागार को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि श्री एच. राजेश प्रसाद ने सारथी को सेवा और अनुभवात्मक शिक्षा के अनूठे मॉडल के रूप में सराहा। उन्होंने कहा, “सारथी चार सशक्त स्तंभों—सहानुभूति, करुणा, सामाजिक जिम्मेदारी और अनुभवात्मक सीख—पर आधारित है। बड़े अस्पतालों में, जहां व्यवस्थाओं को समझना चुनौतीपूर्ण हो सकता है, ये युवा स्वयंसेवक सच्चे ‘सारथी’ बनकर मरीजों को गरिमा और संवेदनशीलता के साथ मार्गदर्शन देते हैं। यहां उन्हें केवल कौशल ही नहीं, बल्कि जीवनभर के लिए हृदय का परिवर्तन मिलता है।”
मानवीय सेवा के आयाम को रेखांकित करते हुए उन्होंने आगे कहा, “करुणा को पुस्तकों से नहीं सिखाया जा सकता—इसे अनुभव करना पड़ता है। सारथी के माध्यम से ये छात्र न केवल मरीजों की सहायता कर रहे हैं, बल्कि मानवता के वास्तविक सार को भी समझ रहे हैं। यह पहल बेहतर स्वास्थ्य सेवा प्रणाली के साथ-साथ बेहतर नागरिक भी तैयार कर रही है।”
पहल के व्यापक प्रभाव की सराहना करते हुए उन्होंने कहा, “पीजीआईएमईआर में एक पायलट के रूप में शुरू हुई यह पहल देश के सबसे बड़े सामाजिक सेवा आंदोलनों में से एक बनने की क्षमता रखती है। जब युवाओं की ऊर्जा को सेवा की दिशा में लगाया जाता है, तो स्वास्थ्य सेवाओं का अनुभव पूरे देश में बदला जा सकता है।”
इससे पूर्व प्रो. विवेक लाल, निदेशक, पीजीआईएमईआर ने अपने संबोधन में सारथी को संस्थान की करुणा, सेवा और रोगी-केंद्रित दृष्टिकोण का प्रतिबिंब बताया। उन्होंने कहा, “संस्थान केवल भवनों या तकनीक से नहीं बनते, बल्कि मूल्यों, समर्पण और सेवा से बनते हैं। पीजीआईएमईआर ने अपनी यात्रा इन्हीं मूल्यों के आधार पर तय की है और सारथी इन्हीं आदर्शों का प्रतिनिधित्व करता है।”
स्वयंसेवकों को स्नेहपूर्वक “ब्रेवहार्ट्स” संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, “ये युवा केवल मरीजों की सहायता नहीं कर रहे, बल्कि मानवता का श्रेष्ठ रूप सीख रहे हैं। देश के सबसे व्यस्त अस्पतालों में से एक में मरीजों का मार्गदर्शन करते हुए वे सहानुभूति, धैर्य और सेवा के प्रति आजीवन प्रतिबद्धता विकसित कर रहे हैं। आने वाले वर्षों में वे सारथी को अपने जीवन का एक महत्वपूर्ण अध्याय मानेंगे।”
उन्होंने इस पहल को सफल बनाने में विद्यालयों के प्राचार्यों, शिक्षकों, नोडल अधिकारियों और प्रशासकों के योगदान के लिए आभार भी व्यक्त किया।
कार्यक्रम के राष्ट्रीय विस्तार पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा, “जो पहल पीजीआईएमईआर में शुरू हुई थी, वह अब एक जन-आंदोलन का रूप ले चुकी है। सारथी ने यह सिद्ध किया है कि जब युवाओं को उद्देश्य और मूल्यों के साथ मार्गदर्शन मिलता है, तो वे परिवर्तन के सशक्त वाहक बन सकते हैं।”
श्री पंकज राय, आईएएस, उप निदेशक (प्रशासन), पीजीआईएमईआर ने कहा, “स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की चर्चा अक्सर बुनियादी ढांचे और तकनीक तक सीमित रहती है, लेकिन मरीज का वास्तविक अनुभव भी उतना ही महत्वपूर्ण है। बड़े संस्थानों में सेवाओं तक पहुंच चुनौतीपूर्ण हो सकती है। सारथी इसी अंतर को पाटने के लिए शुरू किया गया था।”
6 मई 2024 को शुरू हुई इस पहल के तहत छात्र स्वयंसेवक अस्पताल में मरीजों की गैर-चिकित्सीय प्रक्रियाओं—जैसे पंजीकरण, जांच केंद्रों तक मार्गदर्शन, विभिन्न सेवाओं के बीच आवागमन, तथा बुजुर्ग और कमजोर वर्गों की सहायता—में सहयोग करते हैं।
पहल के व्यापक प्रभाव पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि 2,000 से अधिक स्वयंसेवकों ने मिलकर 1.24 लाख से अधिक सेवा घंटे दिए हैं, जिससे लाखों मरीजों और उनके परिजनों को लाभ मिला है।
नीतिगत महत्व का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सारथी को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा एक अनुकरणीय मॉडल के रूप में मान्यता प्राप्त हुई है, तथा युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय द्वारा अनुभवात्मक शिक्षण ढांचे के अंतर्गत भी सराहा गया है।
उन्होंने कहा, “सारथी एक ऐसी पीढ़ी तैयार कर रहा है जो सामाजिक रूप से जिम्मेदार है और समझती है कि स्वास्थ्य सेवा एक सामूहिक जिम्मेदारी है। यह पहल हमें याद दिलाती है कि सच्चा उपचार केवल चिकित्सा में नहीं, बल्कि मरीज को सम्मान और सहारा देने में निहित है।”
कार्यक्रम में सारथी परियोजना की दो वर्षों की यात्रा का विस्तृत प्रस्तुतीकरण किया गया। एक विशेष फिल्म के माध्यम से इसके विकास और प्रभाव को दर्शाया गया। इसके साथ ही 25 सहयोगी शैक्षणिक संस्थानों को सम्मानित किया गया तथा प्राचार्यों, एनएसएस नोडल अधिकारियों और समर्पित स्वयंसेवकों (ब्रेवहार्ट्स) को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
समापन पर प्रो. संजय जैन, डीन (अनुसंधान), पीजीआईएमईआर ने कहा, “सारथी करुणा को क्रियान्वित करने का सशक्त उदाहरण है। यह युवाओं द्वारा संचालित परिवर्तन और सामुदायिक सहभागिता की अपार संभावनाओं को दर्शाता है।”
कार्यक्रम का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि इस पहल को और मजबूत करते हुए देशभर के स्वास्थ्य संस्थानों में इसका विस्तार किया जाएगा।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री श्री जे.पी. नड्डा ने स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (पीजीआईएमईआर),

चंडीगढ़/ सत्ता संदेश

चंडीगढ़ के 39वें दीक्षांत समारोह को संबोधित कियाकेंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने पीजीआई चंडीगढ़ की विरासत, प्रतिष्ठित साख और अग्रणी चिकित्सा अनुसंधान, सर्जरी तथा एक मजबूत अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र में इसके योगदान पर प्रकाश डालापीजीआई चंडीगढ़ उत्तर भारत के सबसे बड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य देखभाल प्रणालियों में से एक है और विश्वस्तरीय चिकित्सा देखभाल, उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान का केंद्र है: श्री नड्डाप्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में, भारत ने स्वास्थ्य सेवा सहित सभी क्षेत्रों में एक ऐतिहासिक छलांग लगाई है: श्री नड्डा ने 2014 के बाद से चिकित्सा बुनियादी ढांचे के परिवर्तनकारी विस्तार पर प्रकाश डाला: एम्स की संख्या बढ़कर 23 हुई, मेडिकल कॉलेज 818 हुए और कुल मेडिकल सीटों की संख्या 2 लाख से अधिक हो गई दीक्षांत समारोह में 61 पीएचडी और 114 डीएम सहित 682 स्नातकों ने डिग्रियां प्राप्त कीं और 95 पदक प्रदान किए गए

चंडीगढ़, 30 अप्रैल 2026: केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा ने आज स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (पीजीआईएमईआर), चंडीगढ़ के 39वें दीक्षांत समारोह को संबोधित किया। इस अवसर पर पंजाब के राज्यपाल और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के प्रशासक श्री गुलाब चंद कटारिया और नीति आयोग के पूर्व सदस्य डॉ. विनोद के. पॉल भी उपस्थित रहे।

सभा को संबोधित करते हुए, श्री नड्डा ने स्नातक पूरा करने वाले छात्रों को “एक महत्वपूर्ण उपलब्धि” हासिल करने के लिए बधाई दी, जो उनकी कड़ी मेहनत, अनुशासन और दृढ़ संकल्प के साथ-साथ उनके शिक्षकों, संकाय सदस्यों और उनके माता-पिता के प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने भारत में चिकित्सा विज्ञान शिक्षा और रोगी देखभाल को आगे बढ़ाने में पीजीआईएमईआर के योगदान की सराहना की।

श्री नड्डा ने रेखांकित किया कि “पीजीआई चंडीगढ़ उत्तर भारत के सबसे बड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्रों में से एक है और विश्वस्तरीय चिकित्सा देखभाल, उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान का केंद्र है।” उन्होंने कहा कि दशकों से डॉक्टरों, वैज्ञानिकों और स्वास्थ्य पेशेवरों की पीढ़ियों के समर्पित प्रयासों ने पीजीआई को एक प्रतिष्ठित ब्रांड के रूप में स्थापित किया है। उन्होंने कहा कि पीजीआई के स्नातकों के साथ संस्थान की साख जुड़ी होती हैं और इस प्रतिष्ठित संस्थान से उत्तीर्ण होने पर सभी छात्रों को बधाई दी।

श्री नड्डा ने पथ-प्रदर्शक क्लिनिकल अनुसंधान और अग्रणी सर्जरी में संस्थान के योगदान की प्रशंसा की। उन्होंने कहा “वर्तमान में पीजीआई में 850 से अधिक बाह्य (extramural) परियोजनाएं और 100 से अधिक आंतरिक (intramural) परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं, जो न केवल एक स्नातकोत्तर संस्थान के रूप में बल्कि शिक्षा और अनुसंधान में उत्कृष्टता के केंद्र के रूप में इसकी स्थिति को दर्शाती हैं।” उन्होंने एक साथ अग्न्याशय-गुर्दा प्रत्यारोपण, गुर्दा प्रत्यारोपण और यकृत प्रत्यारोपण में संस्थान की विशेषज्ञता की भी सराहना की।

श्री नड्डा ने कहा कि “इतने प्रतिष्ठित संस्थान से स्नातक होना छात्रों के लिए गर्व की बात है” और उन्होंने स्वयं पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ के अध्यक्ष के रूप में इस कार्यक्रम का हिस्सा होने पर गर्व व्यक्त किया।

श्री नड्डा ने जोर देकर कहा कि “प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में, भारत ने स्वास्थ्य सेवा सहित विभिन्न क्षेत्रों में एक ऐतिहासिक छलांग लगाई है।” उन्होंने चिकित्सा शिक्षा के बुनियादी ढांचे के विस्तार में नीतिगत निर्णयों की भूमिका को रेखांकित किया और कहा कि “20वीं सदी के अंत तक, भारत में केवल एक अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स ) और एक स्नातकोत्तर संस्थान था। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने छह नए एम्स की स्थापना शुरू की थी और पिछले 10 वर्षों में 16 और एम्स जोड़े गए हैं, जिससे कुल संख्या 23 हो गई है।”

श्री नड्डा ने आगे कहा कि सरकार का लक्ष्य देश भर में तृतीयक स्वास्थ्य देखभाल को मजबूत करना है। चिकित्सा शिक्षा को मजबूत करने की दिशा में सरकार के प्रयासों को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि “मेडिकल कॉलेजों की संख्या एक दशक पहले के 387 से बढ़कर आज 818 हो गई है। स्नातक (यूजी) मेडिकल सीटें 51,000 से बढ़कर 1,26,000 से अधिक हो गई हैं, अगले पांच वर्षों में 75,000 और यूजी और पीजी सीटें जोड़ने का लक्ष्य है, जिनमें से 28,000 सीटें पिछले दो वर्षों में ही जोड़ने का लक्ष्य हासिल कर लिया गया हैं। इसी तरह, स्नातकोत्तर (पीजी) सीटें 31,000 से बढ़कर लगभग 81,000-85,000 हो गई हैं।”

स्नातक छात्रों को संबोधित करते हुए श्री नड्डा ने कहा कि उनकी उपलब्धियां दृढ़ता, कड़ी मेहनत और प्रतिबद्धता का परिणाम हैं। साथ ही, उन्होंने उन्हें याद दिलाया कि “जहां बुनियादी शिक्षा एक अधिकार है, वहीं उच्च और व्यावसायिक शिक्षा एक विशेषाधिकार है जो महत्वपूर्ण सार्वजनिक निवेश द्वारा समर्थित है।” उन्होंने बताया कि “सरकार द्वारा प्रति छात्र प्रति वर्ष लगभग 30-35 लाख रुपये खर्च किए जाते हैं, और सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सीटें बढ़ाने के लिए अगले पांच वर्षों में प्रति छात्र 1.5 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।”

स्वास्थ्य सेवा के भविष्य के बारे में बात करते हुए, श्री नड्डा ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), स्टेम सेल अनुसंधान, जीन थेरेपी, प्रिसिजन मेडिसिन और टेलीहेल्थ सहित तकनीक की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने जोर देते हुए कहा “हालांकि तकनीकी प्रगति स्वास्थ्य सेवा को बदल रही है, लेकिन मानवीय भूमिका भी बनी रहनी चाहिए।” उन्होंने कहा “करुणा की अपनी ताकत होती है और यह चिकित्सा पद्धति के केंद्र में होनी चाहिए।” उन्होंने छात्रों को रोगियों और समाज के लाभ के लिए तकनीक का पूरी तरह से उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया, साथ ही यह सुनिश्चित करने को कहा कि सहानुभूति और करुणा उनके काम का मार्गदर्शन करती रहे।

उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे अपनी शिक्षा को समाज के लिए कुछ करने की जिम्मेदारी के रूप में देखें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि वे इसमें सार्थक योगदान देंगे, और साथ ही यह भी कहा कि दीक्षांत समारोह स्नातकों को उनके कर्तव्यों की याद दिलाने का एक अवसर होता है। उन्होंने उन्हें बाहरी मान्यताओं से परे देखने के लिए भी प्रोत्साहित किया, और ईमानदारी से अपना आत्म-मूल्यांकन करने, लगातार सुधार करने, तथा अपने प्रयासों और समर्पण के माध्यम से बेहतर पेशेवर और बेहतर इंसान बनते हुए उत्कृष्टता के उच्च मानकों को प्राप्त करने के लिए प्रयास करने के महत्व पर ज़ोर दिया।

अपने संबोधन के अंत में श्री नड्डा ने कहा कि स्नातक छात्र जीवन के एक नए चरण में प्रवेश कर रहे हैं, जहां सीखना व्यावहारिक और जिम्मेदारी आधारित होगा। उन्होंने उन्हें इस समझ के साथ आगे बढ़ने और पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च, चंडीगढ़ के मानकों और मूल्यों को बनाए रखने की सलाह दी।

दीक्षांत समारोह में 682 उम्मीदवारों को डिग्री दी गई, जिनमें 61 पीएचडी, 114 डीएम, 67 एमसीएच, 323 एमडी, 103 एमएस और 14 एमडीएस स्नातक शामिल थे। इसके अतिरिक्त, संस्थान की शैक्षणिक उत्कृष्टता को दर्शाते हुए 95 पदक (18 स्वर्ण, 37 रजत और 40 कांस्य) प्रदान किए गए।

इस अवसर पर प्रो. विवेक लाल, निदेशक, पीजीआईएमईआर और केंद्र सरकार तथा पंजाब एवं चंडीगढ़ सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

पृष्ठभूमि: 1962 में स्थापित और 1967 में ‘राष्ट्रीय महत्व का संस्थान’ घोषित पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़, तृतीयक स्वास्थ्य देखभाल, चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान के लिए भारत के प्रमुख संस्थानों में से एक है। एनआईआरएफ 2025 की मेडिकल श्रेणी में संस्थान ने दूसरा स्थान प्राप्त किया है।

क्षमता: संस्थान में 47 विशेषज्ञता विभागों में 2,233 बिस्तरों की क्षमता है।

रोगी सेवा: वार्षिक रूप से लगभग 27-28 लाख ओपीडी विजिट, 1 लाख इनपेशेंट प्रवेश और 95,000 से अधिक सर्जरी की जाती हैं।

आयुष्मान भारत: पीएम-जेएवाई (पीएम -जे ए वाई ) योजना के तहत लगभग 1.81 लाख मरीजों का इलाज किया गया है।

प्रत्यारोपण: 2025 में 250 गुर्दा प्रत्यारोपण किए गए। संस्थान एक साथ अग्न्याशय-गुर्दा प्रत्यारोपण (एसपीके) में राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी बना हुआ है।

अनुसंधान: डब्ल्यूएचओ, आईसीएमआर और अन्य अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों द्वारा समर्थित 800 से अधिक परियोजनाएं चल रही हैं।

विस्तार: संगरूर (पंजाब), ऊना (हिमाचल प्रदेश) और फिरोजपुर (पंजाब) में सैटेलाइट केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं ताकि क्षेत्रीय पहुंच बढ़ सके।

नवाचार: संस्थान ने दवाओं की आपूर्ति के लिए ‘ऑनलाइन इंडेंटिंग सिस्टम’ और मरीजों की सहायता के लिए ‘प्रोजेक्ट सारथी’ जैसे नवाचार लागू किए हैं।

जेपी नड्डा चंडीगढ़ में 10वें राष्ट्रीय स्वास्थ्य शिखर सम्मेलन का करेंगे उद्घाटन

चंडीगढ़/सत्ता संदेश
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणालियों में बेहतर और अनुकरणीय प्रथाओं तथा नवाचारों पर 10वें राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन का आयोजन 30 अप्रैल से 1 मई तक चंडीगढ़ में आयोजित किया जाएगा।


इस शिखर सम्मेलन का उद्घाटन केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और राज्य की स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री आरती सिंह राव की मौजूदगी में किया जाएगा।


इस कार्यक्रम में अतिरिक्त मुख्य सचिव और प्रधान सचिव, मिशन निदेशक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रबंधन के अंतर्गत राज्य/केंद्र शासित प्रदेश के वरिष्ठ नोडल अधिकारी और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी भाग लेंगे।


राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन, स्वास्थ्य मंत्रालय की एक प्रमुख पहल है जिसका उद्देश्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा विभिन्न सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने के लिए अपनाई गई नवोन्मेषी और प्रभावशाली पद्धतियों को प्रदर्शित करना, मान्यता देना और उनका दस्तावेजीकरण करना है। यह आपसी ज्ञानवर्धन के लिए एक मंच के रूप में भी कार्य करता है और देश भर में सफल और व्यापक रूप से लागू किए जा सकते है। और आने वाले मॉडलों के अनुकरण को सुगम बनाता है। वार्षिक शिखर सम्मेलन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा वितरण और प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में नवोन्मेषी, साक्ष्य-आधारित और परिणाम-उन्मुख कार्यक्रमों को प्रस्तुत करने का एक मूल्यवान अवसर प्रदान करता है, जिनसे स्वास्थ्य परिणामों में उल्लेखनीय सुधार हुए हैं।


2013 में अपनी स्थापना के बाद से, इस पहल ने सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा वितरण में अनुभवों और नवाचारों को साझा करने के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एक साथ लाया है। शिखर सम्मेलन का 9वां संस्करण मार्च 2025 में पुरी में आयोजित किया गया था।


मौजूदा वर्ष के लिए, 10वें राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन की प्रक्रिया अप्रैल 2025 में शुरू हुई। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा नवाचार के माध्यम से अपनी सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों और नवाचारों को प्रस्तुत किया। सभी प्रस्तुतियां मंत्रालय के संबंधित कार्यक्रम प्रभागों द्वारा सावधानीपूर्वक मूल्यांकन और अंक प्रदान किए गए। इन मूल्यांकनों के आधार पर, कार्यक्रम प्रभागों से प्राप्त सुझावों और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के सहायक एवं निदेशक मंडल की अध्यक्षता में विस्तृत समीक्षा के बाद शिखर सम्मेलन के लिए कुल 13 मौखिक प्रस्तुतियां और 32 पोस्टर प्रस्तुतियां चयनित की गई हैं।


प्रस्तुतियों के अलावा, शिखर सम्मेलन में नवंबर 2025 में 17 राज्यों में आयोजित 17वें संयुक्त समीक्षा मिशन की रिपोर्ट का प्रसार भी किया जाएगा। इस कार्य के लिए, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधिकारियों, अन्य मंत्रालयों के प्रतिनिधियों, सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों, नागरिक समाज संगठनों, विकास भागीदारों और मंत्रालय के सलाहकारों से युक्त 17 बहु-विषयक टीमों का गठन किया गया था। सीआरएम के निष्कर्ष सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणालियों के कामकाज में महत्वपूर्ण अंतर्दृष्टि प्रदान करते हैं और भविष्य की नीति एवं कार्यक्रम संबंधी हस्तक्षेपों को दिशा देने में सहायक होंगे।


इस शिखर सम्मेलन में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा को मजबूत करने, डिजिटल स्वास्थ्य नवाचारों और सेवा वितरण प्रणालियों में सुधार जैसे प्रमुख प्राथमिकता वाले क्षेत्रों पर केंद्रित पूर्ण सत्र, विषयगत चर्चाएं और प्रदर्शनियां होंगी। ये प्रयास आयुष्मान भारत और आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन जैसी प्रमुख पहलों के अनुरूप हैं।

पंजाब में 30 अप्रैल से शुरू होगा जनगणना 2027 का पहला चरण

चंडीगढ़/सत्ता संदेश

जनगणना 2027 के चरण-I (हाउसलिस्टिंग और आवासीय जनगणना) तथा स्व-गणना की शुरुआत पर विशेष जोर देते हुए मीडिया को जानकारी देने के लिए, पंजाब और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के जनगणना संचालन निदेशालय की निदेशक डॉ. नवजोत खोसा आईएएस और पंजाब के स्थानीय सरकार विभाग के प्रशासकीय सचिव श्री मनजीत सिंह बराड़ आईएएस द्वारा एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन आयोजित किया गया। भारत में जनगणना जनगणना अधिनियम, 1948 और जनगणना नियम, 1990 के प्रावधानों के तहत की जाती है। जनगणना 2027 भारत में 16वीं जनगणना होगी और स्वतंत्रता के बाद आठवीं। पिछली जनगणना 2011 में की गई थी, जबकि 2021 की जनगणना को कोविड-19 महामारी के कारण स्थगित कर दिया गया था।

यह जानकारी दी गई कि जनगणना का डेटा सामाजिक-आर्थिक और जनसांख्यिकीय जानकारी के एक व्यापक स्रोत के रूप में काम करता है और विकास योजना, कल्याणकारी योजनाओं के निर्माण और सार्वजनिक सेवाओं को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जनगणना 2027 दो चरणों में आयोजित की जाएगी। चरण-I, जिसमें 30 अप्रैल, 2026 से 14 मई, 2026 तक स्व-गणना और इसके बाद 15 मई, 2026 से 13 जून, 2026 तक घर-घर जाकर जनगणना शामिल है और चरण-II जनसंख्या गणना, 9 फरवरी, 2027 से 28 फरवरी, 2027 तक निर्धारित है। चरण-I का ध्यान आवास की स्थिति, सुविधाओं और परिसंपत्तियों पर रहेगा और यह जनसंख्या गणना चरण के लिए आधार का काम करेगा।

डॉ. नवजोत खोसा ने बताया कि जनगणना 2027 पहली बार डिजिटल मोड में मोबाइल एप्लिकेशन के साथ-साथ ऑनलाइन पोर्टल (https://se.census.gov.in) के माध्यम से स्व-गणना शुरू करने के साथ आयोजित की जाएगी। लोग निर्धारित अवधि के दौरान अपना विवरण भरकर जमा करने पर एक अद्वितीय स्व-गणना संदर्भ आईडी प्राप्त करेंगे, जिसे क्षेत्र सत्यापन के दौरान गणना करने वाले कर्मचारी के साथ साझा किया जाएगा। जनगणना प्रबंधन और निगरानी प्रणाली के माध्यम से वास्तविक समय की निगरानी की जाएगी और मकान सूचीकरण ब्लॉक के निर्माण के लिए वेब-आधारित मैपिंग का उपयोग किया गया है।

मनजीत बराड़, जनगणना के राज्य नोडल अधिकारी, ने सूचित किया कि व्यापक प्रशासनिक व्यवस्थाएं की गई हैं। इनमें पूरे राज्य में मकान सूचीकरण ब्लॉक का निर्माण और अनुमानित 67,000 गणना करने वाले कर्मचारियों तथा पर्यवेक्षकों (आरक्षित सहित) की नियुक्ति शामिल है। उन्होंने आगे कहा कि जनगणना कार्यकर्ताओं का प्रशिक्षण एक व्यवस्थित और चरणबद्ध तरीके से किया गया है। पंजाब में, 52 मास्टर प्रशिक्षकों (राज्य से 36 और डीसीओ, पंजाब से 16) और 932 फील्ड प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है। गणना करने वाले कर्मचारियों और पर्यवेक्षकों का प्रशिक्षण 16 अप्रैल से 9 मई 2026 तक राज्य भर के विभिन्न स्थानों पर चल रहा है, जो जनगणना कार्य के सुचारु और प्रभावी संचालन के लिए तैयारी सुनिश्चित करता है।

मीडिया की भूमिका पर ज़ोर देते हुए कहा गया कि मीडिया लोकतंत्र का एक महत्वपूर्ण आधार स्तंभ है। मीडिया से जन जागरूकता फैलाने, सार्वजनिक भागीदारी को प्रोत्साहित करने और गलत सूचना, विशेष रूप से अंकीय गणना और डेटा की गोपनीयता से संबंधित भ्रांतियों को दूर करने में सक्रिय भूमिका निभाने का अनुरोध किया गया था। निवासियों से जनगणना में सक्रिय रूप से भाग लेने, सटीक जानकारी प्रदान करने और गणना करने वालों को पूर्ण सहयोग देने का आग्रह किया गया। यह दोहराया गया कि एकत्र की गई सभी जानकारी पूरी तरह गोपनीय रहेगी और इसका उपयोग केवल सांख्यिकीय उद्देश्यों के लिए किया जाएगा।

जनगणना 2027 के लिए एक राष्ट्रीय टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर (1855) पंजाब में 30.04.2026 से जनता को स्वयं-जनगणना, मकान सूचीकरण अभियानों और शिकायत निवारण से संबंधित प्रश्नों में सहायता करने के लिए चालू रहेगा।