ईडी छापेमारी को लेकर केरल में सियासी घमासान, कांग्रेस ने उठाए सरकार और माकपा पर सवाल
तिरुवनंतपुरम / सत्ता संदेश
Kerala की राजनीति में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की हालिया छापेमारी को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। राज्य सरकार में मंत्री K. Muraleedharan ने दावा किया है कि पूर्व मुख्यमंत्री Pinarayi Vijayan से जुड़े परिसरों पर की गई ईडी की कार्रवाई का उद्देश्य उन्हें मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी यानी Communist Party of India (Marxist) के भीतर हो रही आलोचनाओं से बचाना हो सकता है।
मुरलीधरन ने कहा कि कांग्रेस को इस कार्रवाई के समय और राजनीतिक परिस्थितियों को लेकर संदेह है। उनका आरोप है कि जिस समय पार्टी के भीतर विजयन की कार्यशैली और कुछ राजनीतिक फैसलों को लेकर सवाल उठ रहे थे, उसी दौरान ईडी की छापेमारी ने राजनीतिक विमर्श का ध्यान दूसरी ओर मोड़ दिया।
हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस न तो ईडी का समर्थन करती है और न ही एजेंसी द्वारा की गई छापेमारी का। उन्होंने कहा कि कांग्रेस लगातार केंद्रीय एजेंसियों के राजनीतिक इस्तेमाल का विरोध करती रही है और उसका रुख इस मामले में भी वही है।
मुरलीधरन के बयान के बाद केरल की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। विपक्षी दलों का कहना है कि केंद्रीय जांच एजेंसियों की कार्रवाई कई बार राजनीतिक परिस्थितियों से प्रभावित दिखाई देती है, जबकि भाजपा और केंद्र सरकार ऐसे आरोपों को लगातार खारिज करती रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केरल में माकपा और कांग्रेस के बीच पहले से ही तीखा राजनीतिक मुकाबला है। ऐसे में ईडी की कार्रवाई और उस पर दिए जा रहे बयान राज्य की राजनीति को और गर्मा सकते हैं। खासतौर पर जब राज्य में भ्रष्टाचार, प्रशासनिक फैसलों और राजनीतिक नेतृत्व को लेकर बहस तेज हो रही हो।
इस मामले में अब तक ईडी की ओर से विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। वहीं माकपा नेताओं ने भी कांग्रेस के आरोपों को राजनीतिक बयानबाजी करार दिया है। पार्टी का कहना है कि विपक्ष बिना तथ्यों के अनावश्यक विवाद पैदा करने की कोशिश कर रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के वर्षों में देशभर में केंद्रीय जांच एजेंसियों की कार्रवाई राजनीतिक चर्चा का बड़ा विषय बनी हुई है। कई विपक्षी दल एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाते रहे हैं, जबकि केंद्र सरकार का कहना है कि जांच एजेंसियां कानून के तहत स्वतंत्र रूप से काम करती हैं।
फिलहाल केरल में यह मुद्दा राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है और आने वाले दिनों में इस पर और तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल सकती हैं।

