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चंडीगढ़ के युवाओं को पीएम इंटर्नशिप योजना के लिए आवेदन करने का आमंत्रण, मिलेगी आर्थिक सहायता

चंडीगढ़ /सत्ता संदेश

प्रतिष्ठित *प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना* के अंतर्गत 12वीं, आईटीआई, डिप्लोमा अथवा स्नातक उत्तीर्ण युवाओं के लिए विभिन्न इंटर्नशिप अवसर उपलब्ध हैं।

श्री विनय कुमार, जिला युवा अधिकारी, MY Bharat, युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार ने जानकारी देते हुए बताया कि पात्र युवा MY Bharat पोर्टल पर स्वयं को पंजीकृत कर प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना हेतु आवेदन कर सकते हैं।

उन्होंने आगे बताया कि चंडीगढ़ में वर्तमान में विभिन्न इंटर्नशिप अवसर उपलब्ध हैं तथा चयनित अभ्यर्थियों को इंटर्नशिप अवधि के दौरान प्रतिमाह ₹9,000 की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।

इच्छुक युवा निम्न वेबसाइट पर पंजीकरण एवं आवेदन कर सकते हैं:

http://www.mybharat.gov.in

आवेदन प्रक्रिया से संबंधित किसी भी जानकारी हेतु युवा जिला युवा अधिकारी से मोबाइल नंबर *9805832503* पर संपर्क कर सकते हैं अथवा MY Bharat कार्यालय, आरजीएनआईवाईडी भवन, PEC कैंपस, गेट नंबर 1, सेक्टर 12, चंडीगढ़ में संपर्क कर सकते हैं।

सीयू पंजाब ने सामुदायिक संवाद कार्यक्रम के माध्यम से ग्रामीण युवाओं को कौशल विकास, रोजगार और नशा-मुक्ति के प्रति किया जागरूक

बठिंडा/सत्ता संदेश

ग्रामीण युवाओं को रोजगारोन्मुखी शैक्षिक अवसरों से जोड़ने के उद्देश्य से पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयू पंजाब) ने कुलपति प्रो. राघवेंद्र प्रसाद तिवारी के नेतृत्व में एक विशेष सामुदायिक संवाद कार्यक्रम आयोजित किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को कौशल विकास पाठ्यक्रमों के माध्यम से अपने कौशल को उन्नत करने के लिए प्रेरित करना था। कार्यक्रम में 10 गांवों से लगभग 100 लोगों ने भाग लिया, जिनमें सरपंच, स्थानीय युवा और समुदाय के सदस्य शामिल थे।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विश्वविद्यालय द्वारा प्रारंभ किए गए छह नए एनसीवीईटी अनुमोदित कौशल विकास पाठ्यक्रमों के बारे में जागरूकता फैलाना था। इन पाठ्यक्रमों में असिस्टेंट प्लंबर–जनरल; हेल्पर इलेक्ट्रीशियन; फंडामेंटल्स ऑफ कंप्यूटर्स;टैली ऑपरेशन एवं जीएसटी कैलकुलेशन का परिचय; बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट; तथा रेफ्रिजरेशन एवं एयर कंडीशनिंग की मूलभूत जानकारी जैसे कोर्स शामिल हैं। विश्वविद्यालय अधिकारियों ने बताया कि ये पाठ्यक्रम विशेष रूप से उन युवाओं के लिए तैयार किए गए हैं जिन्होंने 8वीं, 9वीं, 10वीं या 12वीं उत्तीर्ण की है तथा जिनके पास संबंधित अनुभव है और जो अपने कौशल एवं रोजगार क्षमता को और बेहतर बनाना चाहते हैं। पात्रता, पाठ्यक्रम और प्रवेश से जुड़ी विस्तृत जानकारी विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध प्रॉस्पेक्टस में देखी जा सकती है।

सभा को संबोधित करते हुए कुलपति प्रो. राघवेंद्र प्रसाद तिवारी ने राष्ट्रीय कौशल योग्यता ढांचा के अंतर्गत प्रारंभ किए गए तथा भारत सरकार के कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीवीईटी) द्वारा अनुमोदित इन छह रोजगारपरक पाठ्यक्रमों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कौशल आधारित शिक्षा देश को आगे बढ़ा सकती है और विश्वविद्यालयों को सिर्फ डिग्री देने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। जो युवा आगे की पढ़ाई नहीं कर सके, उनके लिए रोजगार से जुड़े कौशल विकास कार्यक्रम शुरू करना जरूरी है, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें और देश के विकास में योगदान दे सकें। उन्होंने युवाओं और समुदाय से कौशल विकास एवं सकारात्मक सहभागिता के माध्यम से नशामुक्त समाज के निर्माण हेतु मिलकर कार्य करने का आह्वान किया।

वहीं, समकुलपति प्रो. किरण हजारिका ने कहा कि ये पाठ्यक्रम युवाओं को बिजली, प्लंबिंग, कंप्यूटर, अकाउंटिंग, स्वास्थ्य सेवा और तकनीकी क्षेत्रों में व्यावहारिक कौशल प्रदान करेंगे, जिससे उन्हें रोजगार, उद्यमिता और स्वरोजगार के नए अवसर मिलेंगे।

कुलसचिव डॉ. विजय शर्मा ने बताया कि ये पाठ्यक्रम आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के राष्ट्रीय विजन के अनुरूप युवाओं में रोजगार क्षमता, आत्मनिर्भरता और व्यावसायिक उत्कृष्टता को बढ़ावा देने के लिए शुरू किए गए हैं। उन्होंने कहा कि इन पाठ्यक्रमों को आसान पात्रता, किफायती शुल्क और व्यापक प्रायोगिक प्रशिक्षण के साथ तैयार किया गया है, ताकि ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के अधिक से अधिक युवा इसका लाभ उठा सकें।

कार्यक्रम के अंत में वित्त अधिकारी डॉ. राजकुमार शर्मा ने वंचित समुदायों के अधिकतम युवाओं तक इन परिवर्तनकारी अवसरों की जानकारी पहुंचाने के लिए विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता दोहराई और सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। प्रो. संजीव ठाकुर, डॉ. संजीव मंडेर एवं विश्वविद्यालय चिकित्सा अधिकारी डॉ. आकाश प्रकाश ने कार्यक्रम का संचालन किया तथा प्रतिभागियों को नशा मुक्ति और सामाजिक कल्याण को बढ़ावा देने वाली विश्वविद्यालय की व्यापक सामुदायिक पहलों के प्रति जागरूक किया। गांवों के सरपंचों और स्थानीय निवासियों ने ग्रामीण समुदायों में सुलभ करियर उन्मुख अवसरों के प्रति जागरूकता फैलाने तथा नशा मुक्ति के लिए विश्वविद्यालय की सक्रिय सामुदायिक पहल की सराहना की।

जे सी आई लुधियाना सेंट्रल द्वारा स्पीच क्राफ्ट-2026 का आयोजन

लुधियाना/सत्ता संदेश

जूनियर चैंबर इंटरनेशनल (जे सी आई) लुधियाना सेंट्रल द्वारा अपने सदस्यों के कौशल विकास के लिए स्थानीय होटल आगाज़ में तीन दिवसीय स्पीच क्राफ्ट-2026 का आयोजन किया गया। इसका उद्घाटन जे सी आई लुधियाना सेंट्रल के अध्यक्ष एडवोकेट सिमरप्रीत सिंह आहूजा, ट्रेनिंग वीपी जसपाल सिंह ग्रेवाल और ट्रेनिंग डायरेक्टरों द्वारा किया गया। इस मौके पर गेस्ट ऑफ ऑनर के रूप में होटल आगाज़ से राहुल आहूजा, जे सी रमन नायर, सीए जसमिंदर सिंह, दीदारजीत सिंह लोटे, ट्रेनर जे सी डॉ. दर्शन मरजादी और साक्षी महाजन शामिल रहे।

ट्रेनिंग सत्र संबंधी जानकारी देते हुए, एडवोकेट सिमरप्रीत सिंह आहूजा ने बताया कि जे सी आई लुधियाना सेंट्रल अपने सदस्यों के कौशल विकास के लिए वचनबद्ध है और समय-समय पर संस्था द्वारा विभिन्न ट्रेनिंग सत्र आयोजित किए जाते हैं। स्पीच क्राफ्ट-2026 का उद्देश्य सदस्यों में कम्युनिकेशन स्किल्स और पब्लिक स्पीकिंग स्किल्स को बढ़ाना है, ताकि वे इन कौशलों का उपयोग अपने व्यवसाय और रिलेशन डेवलपमेंट में कर सकें।

उन्होंने बताया कि इस सत्र में सभी जोनों से प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं। तीन दिवसीय ट्रेनिंग सत्र की शुरुआत 24 अप्रैल को हुई थी। 25 अप्रैल को भी कई महत्वपूर्ण सत्र आयोजित किए गए और 26 अप्रैल, रविवार को इसका समापन हुआ।

इस अवसर पर अन्य लोगों के अलावा, सचिव विनायक कश्यप, ज्वाइंट सचिव जे सी रसलीन कौर, वीपी जसपाल सिंह, डायरेक्टर रितिक पलाहा, पी एंड आर वीपी दीपक, पूर्व अध्यक्ष प्रदीप सिंह मुंडी, जे सी कौशिक डोगरा, जे सी संजय शर्मा, जे सी प्रभजोत सिंह, हनी सेठी, जे सी सोमन गोयल, जे सी अनुज धीर, जे सी जैसमीन कौर, डायरेक्टर जतिंदर पाल सिंह और वीपी मैनेजमेंट कुलजीत सिंह भी मौजूद रहे।

लुधियाना के एनएसटीआई में सौर ऊर्जा उद्यमिता प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ

लुधियाना/सत्ता संदेश

राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थान लुधियाना में 16 अप्रैल 2026 से 24 अप्रैल 2026 तक नौ दिवसीय सौर ऊर्जा उद्यमिता प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया।कार्यक्रम का आयोजन कर्नल अजय कोहली, कमांडिंग ऑफिसर, 3 पंजाब बटालियन एनसीसी के मार्गदर्शन और नेतृत्व में, प्रशासनिक अधिकारी कर्नल जेपी शर्मा और सूबेदार मेजर करनैल सिंह के सक्रिय सहयोग से किया गया।

इस प्रशिक्षण का उद्देश्य कैडेटों और स्थानीय युवाओं को सौर ऊर्जा प्रणालियों, स्थापना, रखरखाव और व्यावसायिक मॉडलों के बारे में व्यावहारिक ज्ञान और उद्यमिता कौशल प्रदान करना था। इस पहल का लक्ष्य नवीकरणीय ऊर्जा के बारे में जागरूकता बढ़ाना और स्किल इंडिया और आत्मनिर्भर भारत मिशन के तहत स्वरोजगार के अवसर पैदा करना था।

इस कार्यक्रम में एनसीसी कैडेट्स ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। व्यावहारिक सत्र, उद्योग से संबंधित संवाद और परियोजना आधारित शिक्षण प्रशिक्षण के मुख्य घटक थे।
कार्यक्रम के सफल समापन के अवसर पर कर्नल अजय कोहली ने कहा, “यह पहल हमारे युवाओं को हरित ऊर्जा क्षेत्र में रोजगार सृजनकर्ता बनने के लिए सशक्त बनाती है। एनसीसी कौशल विकास और राष्ट्र निर्माण के लिए सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रति प्रतिबद्ध है।” प्रशिक्षण का समापन 24 अप्रैल 2026 को सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरण के साथ हुआ।
लुधियाना NCC: 100% रिजल्ट के साथ JW कैडेट्स को ‘A’ सर्टिफिकेट वितरित, प्रशिक्षकों के लिए ओरिएंटेशन कैडर शुरू

राष्ट्रीय कैडेट कोर (NCC) की 3 पंजाब गर्ल्स बटालियन, लुधियाना द्वा    रा जूनियर विंग (JW) कैडेट्स के लिए एक गरिमामय एवं प्रेरणादायक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें NCC ‘A’ सर्टिफिकेट सफलतापूर्वक प्राप्त करने वाली कैडेट्स को औपचारिक रूप से प्रमाण पत्र वितरित किए गए। इस अवसर पर बटालियन के अधिकारियों, प्रशिक्षकों और कैडेट्स की उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष बना दिया।

कार्यक्रम की सबसे उल्लेखनीय उपलब्धि यह रही कि NCC ‘A’ सर्टिफिकेट परीक्षा का परिणाम 100 प्रतिशत रहा। यह न केवल कैडेट्स की कड़ी मेहनत और अनुशासन को दर्शाता है, बल्कि प्रशिक्षकों के समर्पण, मार्गदर्शन और प्रभावी प्रशिक्षण प्रणाली का भी प्रमाण है। अधिकारियों ने इस सफलता को टीमवर्क, नियमित अभ्यास और सकारात्मक वातावरण का परिणाम बताया।

इस मौके पर कैडेट्स के चेहरे पर खुशी और गर्व साफ झलक रहा था। कई कैडेट्स ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि NCC प्रशिक्षण ने उनमें आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और जिम्मेदारी की भावना विकसित की है। उन्होंने कहा कि यह सर्टिफिकेट उनके भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जो उन्हें विभिन्न क्षेत्रों में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगा।

इसके साथ ही, बटालियन द्वारा 21 अप्रैल से 24 अप्रैल 2026 तक एक विशेष ओरिएंटेशन कैडर का भी आयोजन किया गया। इस कैडर का मुख्य उद्देश्य प्रशिक्षकों को NCC जूनियर विंग के सिलेबस में हुए नवीनतम बदलावों से अवगत कराना और उनके प्रशिक्षण कौशल को और अधिक सशक्त बनाना था। इस पहल के माध्यम से प्रशिक्षण की गुणवत्ता को और बेहतर बनाने का प्रयास किया गया।

ओरिएंटेशन कैडर के दौरान प्रशिक्षकों को विभिन्न महत्वपूर्ण और समकालीन विषयों पर विस्तृत प्रशिक्षण दिया गया। इनमें साइबर सुरक्षा, अग्निवीर भर्ती प्रक्रिया, स्वास्थ्य एवं स्वच्छता, जीवन कौशल, नैतिक एवं आचारिक मूल्य जैसे विषय प्रमुख रहे। विशेषज्ञों द्वारा इन विषयों पर व्याख्यान और व्यावहारिक सत्र आयोजित किए गए, जिससे प्रशिक्षकों को अद्यतन जानकारी प्राप्त हुई और वे इसे कैडेट्स तक प्रभावी ढंग से पहुंचा सकें।

विशेष रूप से साइबर सुरक्षा पर दिए गए प्रशिक्षण ने डिजिटल युग में बढ़ते खतरों के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वहीं अग्निवीर भर्ती से संबंधित जानकारी ने कैडेट्स और प्रशिक्षकों दोनों को भारतीय सशस्त्र बलों में करियर के नए अवसरों के बारे में जागरूक किया। स्वास्थ्य एवं स्वच्छता पर सत्रों ने व्यक्तिगत और सामुदायिक स्वास्थ्य के महत्व को रेखांकित किया।

जीवन कौशल और नैतिक मूल्यों पर आधारित प्रशिक्षण ने कैडेट्स के समग्र व्यक्तित्व विकास पर जोर दिया। इन सत्रों में अनुशासन, नेतृत्व, टीमवर्क और सामाजिक जिम्मेदारी जैसे गुणों को विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया गया। प्रशिक्षकों ने इस कैडर को अत्यंत उपयोगी और ज्ञानवर्धक बताया।

कार्यक्रम के समापन अवसर पर 3 पंजाब गर्ल्स बटालियन NCC, लुधियाना के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल आर.एस. चौहान ने कैडेट्स और प्रशिक्षकों को संबोधित करते हुए उनकी मेहनत और समर्पण की सराहना की। उन्होंने कहा कि NCC न केवल युवाओं को अनुशासित बनाता है, बल्कि उन्हें एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में भी तैयार करता है।

कर्नल चौहान ने यह भी कहा कि 100 प्रतिशत परिणाम हासिल करना एक बड़ी उपलब्धि है, जो बटालियन के उच्च प्रशिक्षण मानकों को दर्शाता है। उन्होंने प्रशिक्षकों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे इसी तरह कैडेट्स को मार्गदर्शन देते रहें और उन्हें राष्ट्र सेवा के लिए तैयार करें।

इस पूरे आयोजन का मुख्य उद्देश्य प्रशिक्षण ढांचे को और अधिक मजबूत बनाना तथा प्रशिक्षकों को आधुनिक और प्रभावी तरीकों से कैडेट्स को प्रशिक्षित करने के लिए सक्षम बनाना था। यह पहल न केवल वर्तमान कैडेट्स के लिए लाभकारी रही, बल्कि भविष्य में भी NCC की गुणवत्ता और प्रभाव को बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगी।

डीबीईई द्वारा 17 अप्रैल को प्लेसमेंट कैंप का आयोजन
जिला जनसंपर्क कार्यालय, लुधियाना

लुधियाना, 15 अप्रैल (000) - लुधियाना स्थित जिला रोजगार एवं उद्यम ब्यूरो (डीबीईई) की उप निदेशक रूपिंदर कौर ने जानकारी देते हुए बताया कि पंजाब सरकार इच्छुक उम्मीदवारों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है, जिसके तहत 17 अप्रैल (शुक्रवार) को डीबीईई के स्थानीय कार्यालय, संगीत सिनेमा रोड, प्रताप चौक, लुधियाना में एक प्लेसमेंट कैंप का आयोजन किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि इस शिविर का समय सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक निर्धारित किया गया है, जिसमें कई प्रतिष्ठित कंपनियां भाग ले रही हैं।

रोजगार सृजन, कौशल विकास और प्रशिक्षण विभाग, लुधियाना के उप निदेशक ने बताया कि आईटीआई से उत्तीर्ण सभी ट्रेड के छात्र इस प्लेसमेंट शिविर में भाग ले सकते हैं। छात्रों के लिए अपने रिज्यूमे की 2 प्रतियां और शैक्षणिक योग्यता प्रमाण पत्र लाना अनिवार्य है।
उप निदेशक रुपिंदर कौर ने इच्छुक उम्मीदवारों से इस अवसर का भरपूर लाभ उठाने की अपील की। ​​अधिक जानकारी के लिए, आप dbeeludhiana@gmail.com पर संपर्क कर सकते हैं।
शुरुआती कदमों से भविष्य के सपनों तक: हर बच्चे के लिए सीखने का नया स्वरूप
  • श्री धर्मेंद्र प्रधान

राष्ट्रीय नवनिर्माण का क्षण

हर साल, जब स्कूलों के द्वार नए शैक्षणिक सत्र के लिए खुलते हैं, तो भारत सामूहिक संकल्प के सबसे गहन उदाहरणों में से एक का साक्षी बनता है। पहाड़ों और तटों से लेकर शहरों और दूरदराज के गांवों तक, लाखों बच्चे कभी-कभी अपने जीवन में आने वाली चुनौतियों के बावजूद, नए जोश, नई आकांक्षाओं और अपार संभावनाओं के साथ अपनी कक्षाओं में कदम रखते हैं। यह एक शांत लेकिन शक्तिशाली राष्ट्रीय क्षण है। इस वर्ष भी लगभग दो करोड़ बच्चों ने पहली कक्षा में प्रवेश लिया है, जो आशा और एक साझा राष्ट्रीय जिम्मेदारी दोनों को समेटे हुए है।

भारत का स्कूली ढांचा बेहद विशाल है। इसमें 14.7 लाख से अधिक स्कूल, लगभग 25 करोड़ नामांकित छात्र और एक करोड़ से ज्यादा शिक्षक शामिल हैं। ये संख्याएं केवल प्रशासनिक स्तर को मापने का जरिया भर नहीं हैं, बल्कि ये शिक्षा के माध्यम से हमारे देश के भविष्य को गढ़ने की एक मजबूत प्रतिबद्धता की घोषणा करती हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 ने रटने की आदत से आगे बढ़कर जिज्ञासा, समझ और समग्र विकास (होलिस्टिक डेवलपमेंट) को सीखने के केंद्र में रखा है। हर नया शैक्षणिक सत्र उस सपने को साकार करने की दिशा में एक सार्थक कदम है।

बालवाटिका लागू होने से अब छोटे बच्चों की शुरुआती पढ़ाई स्कूल व्यवस्था का हिस्सा बन गई है। इससे बच्चे पहली कक्षा में बेहतर तैयारी और मजबूत बुनियादी कौशल के साथ प्रवेश करते हैं। बच्चे का स्कूल में दाखिला उसके जीवनभर के सीखने और समाज से जुड़ने की शुरुआत होता है। इसलिए जरूरी है कि यह सफर खुशी, अच्छे माहौल और अपनापन महसूस कराने वाला हो।

सीखने का सफर: पहले कदम से आत्मविश्वास तक

स्कूल का पहला दिन खास होता है। इसमें थोड़ी झिझक होती है, तो नए शुरुआत की खुशी भी होती है। छोटे-छोटे बच्चे अपने बड़े-बड़े भाव लेकर स्कूल आते हैं और उनकी जिज्ञासु आंखें एक नई दुनिया देखती हैं। जब बच्चे खुद को सुरक्षित और महत्वपूर्ण महसूस करते हैं, तो वे खुलने लगते हैं। वे ज्यादा भाग लेते हैं, सवाल पूछते हैं और उनकी जिज्ञासा बढ़ती है। धीरे-धीरे उनका आत्मविश्वास भी मजबूत होता जाता है। शुरुआती साल खेल, खोज और नई चीज़ें सीखने पर आधारित होने चाहिए, यही जीवनभर की सीखने की यात्रा की शुरुआत है।

अच्छे रिश्ते बहुत मायने रखते हैं। एक समझदार और देखभाल करने वाला शिक्षक बच्चे की जिंदगी बदल सकता है। सहयोगी कक्षा माहौल बच्चे की चुप्पी को भागीदारी में और भागीदारी को आत्मविश्वास में बदल सकता है। जब बच्चा खुद को सच में समझा और सुना हुआ महसूस करता है, तो उसकी जिज्ञासा हिम्मत में बदल जाती है। और जब उसे अपनापन महसूस होता है, तो वह अपनी आवाज़ पहचानने लगता है।

इन प्रारंभिक वर्षों के केंद्र में बुनियादी साक्षरता और अंकगणित के प्रति एक मजबूत राष्ट्रीय प्रतिबद्धता निहित है। निपुण भारत मिशन के माध्यम से, भारत ने एक स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित किया है: कक्षा 2 के अंत तक प्रत्येक बच्चा समझ के साथ पढ़ सके और बुनियादी अंकगणित कर सके। ध्यान उत्तरों को रटने से हटकर अवधारणाओं को समझने पर केंद्रित है। कक्षाओं को बच्चों को केवल उत्तर दोहराने के बजाय प्रश्न पूछने के लिए प्रेरित करना चाहिए। यह दृष्टिकोण अकादमिक शिक्षा से परे है। कला, खेल और मूल्य सीखने की प्रक्रिया के अनिवार्य अंग हैं। शिक्षा को ‘संपूर्ण बच्चे’ का निर्माण करना चाहिए- न केवल मन का, बल्कि शरीर और हृदय का भी। शारीरिक गतिविधि और पोषण दैनिक स्कूली जीवन का अभिन्न अंग हैं। एक स्वस्थ बच्चा बेहतर सीखता है, अधिक भाग लेता है और आत्म-सम्मान की स्वस्थ भावना के साथ विकसित होता है।

उभरती चुनौतियों का सामना

वैश्विक स्तर पर, बच्चों की जीवनशैली में महत्वपूर्ण बदलाव आया है। खान-पान की आदतों में बदलाव और शारीरिक गतिविधि में कमी कई देशों के लिए चिंता का विषय बन गई है। भारत इस चुनौती का सक्रिय रूप से सामना कर रहा है। अनिवार्य शारीरिक शिक्षा, स्कूलों में मोटापे से निपटने के लिए ‘ऑयल बोर्ड’ और ‘शुगर बोर्ड’ जैसे उपाय और पोषण गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने वाली मजबूत पीएम-पोषण योजना स्कूलों को स्वास्थ्य और सक्रिय जीवनशैली की ओर उन्मुख कर रही है। इन प्रयासों का उद्देश्य एक ऐसी पीढ़ी का निर्माण करना है जो स्वास्थ्य को समग्र विकास का केंद्र मानती हो।

हालांकि प्रौद्योगिकी शिक्षा और पहुंच के लिए एक शक्तिशाली माध्यम है, सोशल मीडिया के बढ़ते उपयोग से स्क्रीन टाइम, ध्यान और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। यह एक वैश्विक चिंता है, न कि केवल भारत तक सीमित। स्कूलों और परिवारों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि इसका उपयोग सीखने के साधन के रूप में किया जाए, न कि ध्यान भटकाने के साधन के रूप में।

इस दृष्टिकोण में बच्चों का मानसिक और भावनात्मक कल्याण भी उतना ही महत्वपूर्ण है। स्कूली पाठ्यक्रम और शिक्षण विधियों में सामाजिक-भावनात्मक शिक्षा को शामिल किया गया है ताकि बच्चों के विकास में सहयोग मिल सके, ऐसे समय में जब बच्चे पिछली किसी भी पीढ़ी की तुलना में अधिक जटिल और चुनौतीपूर्ण दुनिया का सामना कर रहे हैं। सुरक्षित और तनावमुक्त वातावरण बनाने के लिए स्कूलों, अभिभावकों, शिक्षकों और समुदायों के संयुक्त प्रयास आवश्यक हैं।

शिक्षकों की भूमिका

सुधार केवल नीतिगत दस्तावेजों के माध्यम से बच्चों तक नहीं पहुंचता, यह शिक्षकों के माध्यम से ही लागू होता है। वे ही शिक्षा के परिवर्तन के सच्चे सूत्रधार हैं, जो दूरदृष्टि और कक्षा की वास्तविकता के बीच की खाई को पाटते हैं। शिक्षकों को बहुभाषी वातावरण में पढ़ाना चाहिए और यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि बच्चे की मातृभाषा का सम्मान किया जाए और उसे सीखने के एक सशक्त साधन के रूप में उपयोग किया जाए। इसे महत्व देकर, हम यह सुनिश्चित करते हैं कि औपचारिक शिक्षा में उनका संक्रमण सहज, आत्मविश्वासपूर्ण और उनकी अपनी पहचान से जुड़ा हो। मैं अपने शिक्षकों से आह्वान करता हूं कि वे प्रत्येक बच्चे की गति, व्यक्तित्व का सम्मान करते हुए और अपनी देखरेख में प्रत्येक छात्र के भावनात्मक और मानसिक कल्याण के प्रति सचेत रहते हुए योग्यता-आधारित शिक्षा को प्राथमिकता दें।

माता-पिता की भूमिका

शिक्षा विद्यालय के द्वार पर शुरू या समाप्त नहीं होती। घर ही पहला कक्षास्थल है और माता-पिता ही पहले शिक्षक। घर पर बच्चे जो अनुभव प्राप्त करते हैं, वही उनके विद्यालय में सीखने के तरीके को आकार देता है। पढ़ने की आदत को बढ़ावा देना और बच्चे के प्रश्नों का धैर्यपूर्वक उत्तर देना, ज्ञान की जिज्ञासा को पोषित करने के सूक्ष्म कार्य हैं। मैं माता-पिता से आग्रह करता हूं कि वे सुनिश्चित करें कि बच्चों को संतुलित पोषण और पर्याप्त नींद मिले, उन्हें प्रतिदिन पर्याप्त शारीरिक गतिविधि और बाहरी वातावरण का अनुभव मिले। माता-पिता को विद्यालय के साथ सक्रिय रूप से जुड़ना चाहिए और बच्चे की सफलता को केवल अंकों के आधार पर ही नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, दयालुता और सीखने में निरंतर रुचि के आधार पर भी मापना चाहिए। माता-पिता अपने बच्चे को जो सबसे बड़ा उपहार दे सकते हैं, वह है यह विश्वास दिलाना कि सीखना वास्तव में आनंददायक है।

एक साझा राष्ट्रीय प्रतिबद्धता

शिक्षा एक साझा जिम्मेदारी है। यह सरकारों, स्कूलों, शिक्षकों, अभिभावकों और समुदायों की जिम्मेदारी है। हर हितधारक की इसमें भूमिका है। हर बच्चे को सीखने की यात्रा में देखा, सुना और मार्गदर्शन किया जाना चाहिए। हमारी शिक्षा प्रणाली की सच्ची पहचान कुछ चुनिंदा उच्च उपलब्धि हासिल करने वालों से नहीं, बल्कि इस बात से होती है कि पृष्ठभूमि की परवाह किए बिना हर बच्चा आत्मविश्वास और आनंद के साथ सीखता है या नहीं। आइए, समावेशी, नवोन्मेषी और भविष्य के लिए तैयार शिक्षा प्रणाली के निर्माण के प्रति अपनी राष्ट्रीय प्रतिबद्धता को दोहराएं। साथ मिलकर, हम यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि हर कक्षा सपनों को साकार करने का स्थान बने और आने वाले कल के नेताओं का निर्माण हो। 2047 तक विकसित भारत के अग्रदूत आज हमारी कक्षाओं में मौजूद हैं। आइए, उन्हें उड़ान भरने के लिए सुनहरे पंख दें।

(लेखक केंद्रीय शिक्षा मंत्री हैं)

डेयरी विभाग ने प्रशिक्षुओं को प्रमाण पत्र वितरित किए

लुधियाना, 01 अप्रैल 2026 – डेयरी विकास विभाग द्वारा संचालित 2 सप्ताह के डेयरी प्रशिक्षण पाठ्यक्रम के पूरा होने के बाद, बीजा स्थित डेयरी प्रशिक्षण एवं विस्तार केंद्र में प्रशिक्षुओं को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। वरिष्ठ कार्यकारी अधिकारी-सह-प्रभारी डेयरी प्रशिक्षण केंद्र, बीजा दलबीर कुमार ने बताया कि पशुपालन, मत्स्य पालन और डेयरी विकास विभाग, पंजाब कैबिनेट मंत्री गुरमीत सिंह खुदियां और डेयरी विकास विभाग के निदेशक वारयाम सिंह गिल के कुशल मार्गदर्शन में यह कार्य संभव हो पाया है।

विभाग द्वारा प्रशिक्षार्थियों के लिए आयोजित किया जा रहा दो सप्ताह का डेयरी प्रशिक्षण पाठ्यक्रम 28 मार्च, 2026 को संपन्न हुआ। उन्होंने बताया कि पाठ्यक्रम पूरा होने के बाद, बीजा स्थित डेयरी प्रशिक्षण एवं विस्तार केंद्र में प्रशिक्षार्थियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए।

इस अवसर पर उन्होंने भाग लेने वाले प्रशिक्षुओं को विभागीय योजनाओं का अधिकतम लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि सामान्य जाति के प्रशिक्षुओं को 25 प्रतिशत और अनुसूचित जाति के प्रशिक्षुओं को 33 प्रतिशत सब्सिडी प्रदान की जाएगी। उन्होंने क्षेत्र के बेरोजगार लड़के-लड़कियों से भी डेयरी विकास विभाग द्वारा चलाई जा रही योजनाओं का अधिकतम लाभ उठाने की अपील की।

वरिष्ठ कार्यकारी अधिकारी और डेयरी प्रशिक्षण केंद्र के प्रभारी बीजा दलबीर कुमार ने कहा कि दूध उपभोक्ताओं को जागरूक करने के लिए विभाग शहरों में मोबाइल वैन के माध्यम से शिविरों का आयोजन भी कर रहा है।

अधिक जानकारी के लिए, आप मोबाइल नंबर 81461-00543 या 01628-299322 पर भी संपर्क कर सकते हैं। इस अवसर पर क्लर्क हरविंदर सिंह और स्टेनोग्राफर हरविंदर सिंह भी उपस्थित थे।

सरकार ने बालिकाओं के शैक्षिक, सामाजिक एवं आर्थिक सशक्तिकरण के लिए अपनाया बहुआयामी दृष्टिकोण

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, बाल लिंग अनुपात (सीएसआर) और बालिकाओं व महिलाओं के सशक्तिकरण से जुड़े मुद्दों के समाधान में मदद करता है। यह योजना विभिन्न हितधारकों को सूचित, प्रभावित, प्रेरित और सशक्त बनाकर बालिकाओं के प्रति मानसिकता और व्यवहार में बदलाव लाने का प्रयास करती है। 15वें वित्त आयोग की अवधि (यानी 2021-22 से 2025-26) में बीबीबीपी योजना का पुनर्गठन किया गया है और अब यह ‘मिशन शक्ति’ की ‘संभल’ उप-योजना का एक घटक है। बीबीबीपी का विस्तार देश के सभी जिलों में कर दिया गया है, जिसमें बहु-क्षेत्रीय हस्तक्षेपों के माध्यम से उन गतिविधियों पर अधिक खर्च करने को प्रोत्साहित किया जाता है जिनका ज़मीनी स्तर पर प्रभाव पड़ता है।

बीबीबीपी के तहत इन पहलों ने एक रिकॉल वैल्यू स्थापित की है और विभिन्न हितधारकों—जिनमें सरकारी एजेंसियां, मीडिया, नागरिक समाज और आम जनता शामिल है—को लामबंद करके इसे एक नीतिगत पहल से एक राष्ट्रीय आंदोलन में बदल दिया गया है। इस आंदोलन का उद्देश्य न केवल जन्म के समय लिंग अनुपात और लिंग आधारित भेदभाव से संबंधित तत्काल चिंताओं को दूर करना है, बल्कि बालिकाओं को महत्व देने और उनके अधिकारों व अवसरों को सुनिश्चित करने की दिशा में एक सांस्कृतिक बदलाव लाना भी है।

मिशन शक्ति अम्ब्रेला योजना और बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ से संबंधित इसके घटकों सहित मंत्रालय की योजनाओं का दो बार—2020 में और पुनः 2025 में—नीति आयोग के माध्यम से थर्ड पार्टी मूल्यांकन किया गया है। इन अध्ययनों ने योजना की प्रासंगिकता, प्रभावशीलता और निरंतरता को संतोषजनक पाया है।

सरकार देश भर में बालिकाओं की सुरक्षा, संरक्षा और सशक्तिकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है। इस उद्देश्य के लिए, सरकार ने बालिकाओं के शैक्षिक, सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण के समाधान हेतु एक बहुआयामी दृष्टिकोण अपनाया है।

समग्र शिक्षा प्री-स्कूल से कक्षा XII तक की स्कूली शिक्षा के लिए एक एकीकृत योजना है, जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के कार्यान्वयन में सहायता प्रदान करती है। यह योजना प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा, बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मकता, एक समग्र और समावेशी पाठ्यक्रम, लर्निंग आउटकम में सुधार, सामाजिक और लैंगिक अंतराल को पाटने, और शिक्षा के सभी स्तरों पर समानता और समावेश सुनिश्चित करने पर जोर देती है।

कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (केजीबीवी) योजना कक्षा XII तक की लड़कियों के लिए आवासीय स्कूली सुविधाएँ प्रदान करके स्कूली शिक्षा में लैंगिक और सामाजिक श्रेणी के अंतराल को पाटने का प्रयास करती है। इस योजना के तहत अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी), अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), अल्पसंख्यक समुदायों और बीपीएल  परिवारों की 10-18 वर्ष की आयु वर्ग की लड़कियों को शामिल किया जाता है।

विज्ञान ज्योति कार्यक्रम लैंगिक संतुलन में सुधार के लिए लड़कियों को स्टेम (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग, गणित) क्षेत्रों में शिक्षा और करियर बनाने के लिए प्रोत्साहित करता है। यह कक्षा IX से कक्षा XII तक की मेधावी छात्राओं को लक्षित करता है और इसमें छात्र-अभिभावक परामर्श, करियर परामर्श, अतिरिक्त शैक्षणिक सहायता कक्षाएं, टिंकरिंग गतिविधियां, विशेष व्याख्यान, वैज्ञानिक संस्थानों, प्रयोगशालाओं, उद्योगों के भ्रमण और विज्ञान शिविर व कार्यशालाएं शामिल हैं।

बालिकाओं के लिए आर्थिक स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से, सरकार ने व्यापक कौशल विकास और व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए स्किल इंडिया मिशन शुरू किया है। सरकार ने देश भर में प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत ‘प्रधानमंत्री कौशल केंद्र’ भी स्थापित किए हैं। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई) के अंतर्गत महिलाओं को कौशल और व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है।

सरकार ने देश में रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देने के लिए महिलाओं हेतु कई पहल/उपाय किए हैं, जिनमें प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (पीएमएमवाई), स्टैंड-अप इंडिया योजना, स्टार्टअप इंडिया, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी), दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना (डीडीयू-जीकेवाई), ग्रामीण स्वरोजगार और प्रशिक्षण संस्थान (आरएसईटीआई), प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव आदि शामिल हैं।

दीनदयाल अंत्योदय योजना – राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम) के तहत महिला स्वयं सहायता समूह रोजगार और स्वरोजगार के लिए ग्रामीण परिदृश्य को बदल रहे हैं। इसी प्रकार, शहरी क्षेत्रों के लिए राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन (एनयूएलएम) संचालित है।

सरकार महिलाओं की रोजगार क्षमता में सुधार के लिए महिला-केंद्रित योजनाएं भी लागू कर रही है, जैसे कि नमो ड्रोन दीदी, लखपति दीदी, वूमेन इन साइंस एंड इंजीनियरिंग- किरण (डब्लूआईएसई-किरण), सर्ब-पावर (खोजपूर्ण अनुसंधान में महिलाओं के लिए अवसरों को बढ़ावा देना) आदि।

यह जानकारी महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर द्वारा लोकसभा में एक प्रश्न के उत्तर में दी गई।